<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848</id><updated>2012-02-16T14:51:05.660+05:30</updated><category term='ये बंधन है प्यार का...'/><category term='मां'/><category term='मदर्स डे'/><category term='एक्सक्लूसिव'/><category term='वेलेंटाइन-डे'/><category term='सूचना का अधिकार'/><title type='text'>खबरों का अड्डा</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>116</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-8529980935877253369</id><published>2011-02-26T20:34:00.001+05:30</published><updated>2011-02-26T20:38:01.913+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सूचना का अधिकार'/><title type='text'>पानी में डूबे दस करोड़</title><content type='html'>आपणी योजना की हकीकत, 99 गांवों ने ठुकराया 'अमृत' &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चूरू।&lt;/strong&gt; धोरों में मीठा पानी मुहैया करवाने वाली आपणी योजना के दस करोड़ से अधिक रुपए पानी में डूब गए हैं। अभियंता छह साल से प्रयासरत हैं, परन्तु एक भी रुपया वापस नहीं निकल पा रहा है। यह सब चूरू व झुंझुनूं जिले के 99 गांवों के अपने वादे से मुकरने के कारण हुआ है। गांवों में दफन 120 किलोमीटर लम्बी पाइप लाइन, बूंद-बूंद पानी को तरसतीं पेयजल टंकियां और धूल फांकते पेयजल उपकरण इसके गवाह हैं। सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर आपणी योजना और ग्रामीणों की यह हकीकत सामने आई है।&lt;br /&gt;योजना के तहत 2000-2005 के दौरान शेखावाटी की चूरू, झुंझुनूं व अलसीसर पंचायत समिति के 71 गांवों को मीठा पानी उपलब्ध करवाने के लिए 8.72 करोड़ रुपए खर्च कर 120 किलोमीटर लम्बी पाइप लाइन डालने के साथ ही गांव गाजसर व जुहारपुरा में पांच-पांच सौ किलोमीटर क्षमता की पेयजल टंकियों का निर्माण किया गया। इनमें सरदारशहर पंचायत समिति के 28 गांवों के लिए खर्च की गई राशि शामिल की जाए तो आंकड़ा दस करोड़ रुपए से ऊपर जाता है। योजना का कार्य पूर्ण होने के बाद सभी 99 गांवों ने मीठा पानी लेने से साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में पाइप लाइन और पेयजल टंकियां कोई काम नहीं आ रही हैं।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इसलिए मुकरे वादे से&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आधिकारिक जानकारी के अनुसार योजना की शुरुआत में ग्रामीणों ने मीठा पानी लेने की सहमति जताई थी, लेकिन बाद में अपने वादे से मुकर गए। इस पर ग्रामीणों के अपने तर्क हैं। ग्रामीणों को घर-घर पेयजल कनेक्शन चाहिए जबकि योजना में सामुदायिक नल की व्यवस्था है। योजना के पानी की नियमित आपूर्ति और गुणवत्ता पर ग्रामीणों भी को संदेह है। आपणी योजना से जुडऩे के बाद गांव में पीएचईडी के जलस्रोतों से जलापूर्ति बंद हो जाती है। ऐसे में ग्रामीण अपने पुराने जलस्रोत नहीं खोना चाहते। पीएचईडी की ओर से कई गांवों में खारा पानी मुफ्त में पिलाया जाता है। जबकि आपणी योजना के पानी की कीमत प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच रुपए है। हालांकि पैसों के लालच में लोग खारा पानी पीकर खुद अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्रामीणों ने घर-घर में बरसाती कुण्ड बना रखे हैं, जिनसे गर्मियों में भी पानी की कमी नहीं अखरती।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;थमाए नोटिस दर नोटिस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आपणी योजना से जोड़े जाने के बावजूद पानी नहीं लेने पर अधिकारियों ने संबंधित ग्राम पंचायत व गांव की जल एवं स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष को गत छह वर्ष के दौरान अनेक नोटिस जारी किए हैं। 26 अगस्त 2010 को जारी नोटिस में तो यहां तक लिखा गया कि अगर गांव वाले मीठा लेने को तैयार नहीं हुए तो पीएचईडी की ओर से खारा भी बंद करवा दिया जाएगा, परन्तु नोटिसों का जवाब नहीं आया और ना ही पीएचईडी से जलापूर्ति बंद करवाई गई।&lt;br /&gt;------&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या है योजना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जर्मन सरकार की उच्च तकनीक व आर्थिक सहयोग से करीब पांच अरब रुपए की आपणी योजना चूरू, झुंझुनंू व हनुमानगढ़ जिले  में एक दशक से संचालित है। वर्तमान में योजना के तहत तीनों जिले में 508 गांव के लोग मीठा पानी पी रहे हैं।&lt;br /&gt;------&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इन्होंने किया मना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सरदारशहर व चूरू पंचायत समिति में गांव आ्सलू, ढाढऱ, लाखाऊ, झारिया, दूधवाखारा, बूंटियां, गाजसर, घंटेल, कड़वासर, सहजूसर, मेघसर, देपालसर, खासोली, ऊंटवालिया, हणुतपुरा, थैलासर, मेहरावनसर, सोमासी, छाजूसर, जुहारपुरा, मोलीसर बड़ा, रायपुरिया, सहनाली बड़ी, सहनाली छोटी, सातड़ा, सूरतपुरा, ढाढ़रिया चारणान, धोधलिया, नाकरासर, धीरासर बीकान, चारणान, शेखावतान, जासासर, जसरासर, बालरासर तंवरान, दांदू, घांघू, राणासर, हरियासर घड़सोतान, चारणवासी, ढाणी सुवाना, मेहरासर चाचेरा, सवाई बड़ी, बलवानिया, दूलरासर, मांगासर, गोमटिया, रामसीसर भेड़वालिया, चन्नाई, छजलानिया, भीकमसरा, पनपालिया, मेलूसर, अड़मालसर, राणासर बिकान, भैंरूसर, खींवासर, पूलासर, बरलाजसर, मेहरी रिजवान, पुरोहितान, कामासर, जीवणदेसर, आसासर, अजीतसर व उदासर बीदावतान तथा झुंझुनूं व पंचायत समिति अलसीसर के गांव हनुतपुरा, बाजला, बीदासर, भीखनसर, बिसनपुरा, चंदवा, चूडेला, डाबड़ी, धीरासर, डिलाई, दूलचास, हंसासरी, हमीरवास रिजानी, हनुमानपुरा, कंकडेउ खुर्द, कालियासर, कांट, खिदरसर, लादूसर, नांद, पाडासी, पाटोदा, श्री किशनपुरा, टांई, ढाणी चारण, हंसासर, कमलासर, कोलिण्डा, लूट्टू, मेहनसर, सोनासर, धनूरी व श्यामपुरा आपणी योजना का पानी लेने को तैयार नहीं है।&lt;br /&gt;------&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इनका कहना है...&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चूरू-झुंझुनूं जिले के 99 गांव मीठा पानी पीने को तैयार नहीं हैं, जबकि आपणी योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर गांवों तक पाइप लाइन डाली हुई है। वर्षों पूर्व हुए सर्वे के दौरान ग्रामीणों ने मीठा पानी लेने की सहमति जताई थी लेकिन बाद में मना कर दिया। मामला राज्य सरकार के ध्यान में है। सरपंच व ग्राम जल एवं स्वास्थ्य समितियों को इस संबंध में नोटिस में दिए गए, परन्तु किसी ने कोई जवाब नहीं दिया।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-एसके शर्मा, अधीक्षण अभियंता, आपणी योजना चूरू&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-8529980935877253369?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/8529980935877253369/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2011/02/blog-post_26.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8529980935877253369'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8529980935877253369'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2011/02/blog-post_26.html' title='पानी में डूबे दस करोड़'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-3274213247277777309</id><published>2011-02-23T20:29:00.000+05:30</published><updated>2011-02-23T20:42:33.058+05:30</updated><title type='text'>"हक" पर कब्जा,"सम्मान" पर चुप्पी</title><content type='html'>&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  चूरू । "वतन पर मरने वालों का बाकी यही निशां होगा" कि शहीद वीरांगनाएं अपने हक और पति के सम्मान के खातिर कार्यालय दर कार्यालय चक्कर काटेंगी। बात भले ही गले नहीं उतर रही हो, परन्तु रतनगढ़ के गांव भुखरेड़ी निवासी दो शहीद वीरांगनाओं को प्रशासन ने ऎसा करने पर मजबूर कर रखा है। एक शहीद वीरांगना को भूखण्ड आवंटन के बावजूद उस पर कब्जा नहीं मिल पाया जबकि दूसरी को शहीद स्मारक बनवाने के लिए जमीन आवंटित करने में अधिकारी रूचि नहीं ले रहे हैं।आधिकारिक जानकारी के अनुसार 1986 में ऑपरेशन मेघदूत में शहीद हुए भुखरेड़ी निवासी सिपाही तोलाराम की वीरांगना सुप्यार देवी को 25 अगस्त 2008 को चूरू की सैनिक बस्ती के सेक्टर1-बी-189 में 10.5 गुणा 21 मीटर भूखण्ड आवंटित किया गया। सुप्यार देवी को भूखण्ड का पट्टा भी दिया गया, परन्तु भूखण्ड पर उसे आज तक कब्जा नहीं मिल पाया। प्रशासन की मिलीभगत से भूखण्ड पर अन्य व्यक्ति ने कब्जा कर रखा है। ऎसे में सुप्यार देवी भूखण्ड आवंटन के ढाई वर्ष बाद भी अपने हक से वंचित है। उधर, जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में मच्छाल सेक्टर में 30 जून 2010 को शहीद हुए भुखरेड़ी के मुकेश भास्कर की वीरांगना सुमन उनके सम्मान में शहीद स्मारक बनवाना चाहती है। स्मारक के नाम पर गांव में भूमि आवंटित करने के लिए सुमन ने ग्राम पंचायत, तहसीलदार व कलक्टर कार्यालय में अनेक चक्कर काट चुकी है। बार-बार चक्कर कटवाने से दुखी होकर सुमन ने 21 फरवरी को जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर शहीद मुकेश का इस तरह अपमान नहीं करने की गुहार लगाई है।प्रशासन ने केवल पट्टा थमायाप्रशासन ने सैनिक बस्ती में भूखण्ड आवंटित करने में महज कागजी खानापूर्ति की है। पट्टा मिलने पर मैंने नम्बरों के आधार पर भूखण्ड पर ढूंढ़ा तो उस पर किसी अन्य का अवैध कब्जा मिला। अवैध रूप से किया गया कब्जा हटवाकर मुझे अपने भूखण्ड पर कब्जा दिलवाने के लिए मैंने प्रशासन के सामने अनेक बार गुहार लगाई, मगर अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला।-सुप्यार देवी, शहीद तोलाराम की वीरांगनाअधिकारियों ने दबाई फाइलपति के सम्मान में शहीद स्मारक बनवाना चाहती हूं। स्मारक के नाम पर भूमि आवंटित करने की फाइल पहले रतनगढ़ तहसीलदार ने पांच माह तक दबाए रखी और अब तीन माह से फाइल जिला कलक्टर के पास अटकी पड़ी है। गांव में गोचर भूमि पर स्मारक बनाया जा सकता है। जनप्रतिनिधि स्मारक निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग देने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद प्रशासन मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। -सुमन देवी, शहीद मुकेश की वीरांगनाप्रशासन को बताया दोनों ही शहीद वीरांगनाओं के साथ ठीक नहीं हो रहा है। वीरांगना सुप्यार ने भूखण्ड पर कब्जा नहीं मिलने की शिकायत थी, जिससे प्रशासन को अवगत करवा दिया गया। शहीद स्मारक का मामला भी कलक्टर की जानकारी में लाया हुआ है।-रामकुमार कस्वां, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, चूरूदूंगा आर्थिक सहयोगशहीद मुकेश की अत्येष्टि के समय ही मैंने उनके स्मारक के लिए आर्थिक सहयोग देने का वादा किया था और अब भी तैयार हंू। प्रशासन जमीन तो आवंटन करें, राशि की कोई कमी नहीं दी जाएगी।-रामसिंह कस्वां, सांसद, चूरूमुझे जानकारी नहींशहीद वीरांगनाओं की समस्याएं प्राथमिकता से दूरी की जाती हैं। सैनिक बस्ती में शहीद वीरांगना को भूखण्ड आवंटन और गांव भुखरेड़ी में शहीद स्मारक बनवाए जाने का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यदि आप जैसा बता रहे हो, वैसा हो रहा है तो तत्काल दोनों मामलों की जांच करवाएंगे।-विकास एस भाले, कलक्टर, चूूरू विश्वनाथ सैनी&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-3274213247277777309?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/3274213247277777309/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2011/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/3274213247277777309'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/3274213247277777309'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='&quot;हक&quot; पर कब्जा,&quot;सम्मान&quot; पर चुप्पी'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-7617774585462167636</id><published>2011-01-30T19:28:00.002+05:30</published><updated>2011-02-26T20:42:05.207+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सूचना का अधिकार'/><title type='text'>हर दूसरा शिक्षक लापरवाह</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;[शिक्षा अधिकारी भी गंभीर नहीं]&lt;br /&gt;शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के कार्यक्रमों के प्रति बेरुखी&lt;br /&gt;चूरू। शिक्षक संघों के सम्मेलन, आंदोलन व धरना-प्रदर्शन हो तो शिक्षकों की फौज खड़ी नजर आती है, परन्तु शिक्षा में नवाचार, आधुनिक तकनीक और अध्यापन में दक्षता बढ़ाने की बात आए तो शिक्षक पीठ दिखाने से नहीं चूकते। राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान उदयपुर की ओर से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में चलाए जा रहे कार्यक्रमों से इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।&lt;br /&gt;पिछले ढाई साल में चूरू जिले के पचास फीसदी शिक्षक इन कार्यक्रमों को गंभीरता से नहीं लिया है। कार्यक्रमों के प्रति केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि शिक्षा अधिकारी और खुद डाइट प्रबंधन भी लापरवाह है। शिक्षा अधिकारी कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उपस्थित नहीं हुए जबकि डाइट प्रबंधन ने अनेक कार्यक्रम आयोजित ही नहीं किए। डाइट कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगने पर यह खुलासा हुआ है।&lt;br /&gt;आधिकारिक जानकारी के अनुसार एक अप्रेल 2008 से 30 नवम्बर 2010 के दौरान प्रशिक्षण, कार्यगोष्ठी एवं प्रसार के 474 कार्यक्रमों में 12 हजार 128 शिक्षकों, बीईईओ व एबीईईओ को बुलाया गया, लेकिन 6 हजार 75 ने ही उपस्थिति दर्ज करवाई। उधर, डाइट प्रबंधन में ढाई साल में प्रस्तावित 555 कार्यक्रमों में से 81 कार्यक्रम आयोजित नहीं किए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्या हैं कार्यक्रम&lt;br /&gt;डाइट में प्रतिवर्ष समय-समय पर प्रशिक्षण, कार्यगोष्ठी एवं प्रसार कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों तथा शिक्षा अधिकारियों को कार्यानुभव, मूल्यांकन, पाठ्य पुस्तकों की समीक्षा, क्षेत्रीय सम्पे्रषण, अध्यापन दक्षता, योजनाएं बनाने, स्कूल प्रबंधन, इनोवेटिव नॉलेज और शिक्षा की आधुनिक तकनीक की विस्तृत जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसका लाभ अप्रत्यक्ष रूप से बच्चों को होता है। कार्यक्रम के लिए लाखों रुपए भी खर्च किए जाते हैं। जिनमें संभागियों को आने-जाने का किराया भी देय है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक हजार से अधिक अधिकारी लापरवाह&lt;br /&gt;ब्लॉक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी तथा अतिरिक्त ब्लॉक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारियों को उनके ब्लॉक के विद्यालयों से जुड़ीं तमाम योजनाएं बनाने एवं विद्यालयों के बेहतर संचालन के लिए विभिन्न कार्यक्रमों से लाभान्वित किया जाता है। इसके लिए एक अप्रेल 2008 से तीस नवम्बर 2010 के दौरान एक हजार 881 शिक्षा अधिकारियों को डाइट बुलाया गया परन्तु एक हजार 32 शिक्षक आनाकानी कर गए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आंकड़ों की जुबानी&lt;br /&gt;कार्यक्रम ~~~~बुलाए~~~~आए&lt;br /&gt;प्रशिक्षण ~~~~८५७६~~~~ ४१८५&lt;br /&gt;कार्यगोष्ठी~~~~ 2478 ~~~~१३८२&lt;br /&gt;प्रसार~~~~ १०७४~~~~ ५०८&lt;br /&gt;कुल ~~~~१2128 ~~~~६०७५&lt;br /&gt;(आंकड़े एक अपे्रल 09 से 30 नवम्बर 10 तक)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पूरा नहीं हुआ लक्ष्य&lt;br /&gt;वर्ष~~~~ प्रस्तावित~~~~ आयोजित&lt;br /&gt;2008-09 ~~~~२४४~~~~२३०&lt;br /&gt;2009-10 ~~~~१९४ ~~~~१७३&lt;br /&gt;2010 ~~~~११७ ~~~~७१&lt;br /&gt;कुल ~~~~555~~~~ 474&lt;br /&gt;(कार्यक्रमों में प्रशिक्षण, कार्यगोष्ठी व प्रसार शामिल)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इनका कहना है...&lt;br /&gt;यह सही है कि अनेक शिक्षक डाइट में लगाए जा रहे कार्यक्रमों को गंभीरता से नहीं ले रह हैं। कार्यक्रम में प्रस्तावित संभागियों की सूची समस्त बीईईओ को भेजते हैं। कई बार तो बीईईओ शिक्षकों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पाबंद नहीं करते जबकि कई शिक्षक खुद लापरवाह हैं। कार्यक्रम समाप्ति के बाद अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीईओ व बीईईओ को लिखा जाता है।&lt;br /&gt;-महावीर सिंघल-डाइट, प्राचार्य, चूरू&lt;br /&gt;--------&lt;br /&gt;शिक्षकों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए केवल आने-जाने का किराया देय है। ठहरने का भत्ता नहीं दिया जाता। ऐसे में एकाध शिक्षक कार्यक्रम से नदारद रहता है। हजारों शिक्षकों के अनुपस्थित रहने के बारे में आपने बताया है। लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।&lt;br /&gt;-हीरालाल आर्य, जिला शिक्षा अधिकारी(प्रारम्भिक), चूरू&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-7617774585462167636?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/7617774585462167636/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2011/01/blog-post_30.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7617774585462167636'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7617774585462167636'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2011/01/blog-post_30.html' title='हर दूसरा शिक्षक लापरवाह'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-2488127649478794060</id><published>2011-01-06T11:43:00.003+05:30</published><updated>2011-01-06T11:56:53.924+05:30</updated><title type='text'>'भूगोल' मे छिपी ठण्ड की 'केमिस्ट्री'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://rptool1.rajasthanpatrika.com/NewsImages/1-2011/churu-f9587357831.jpg"&gt;&lt;img style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 252px" alt="" src="http://rptool1.rajasthanpatrika.com/NewsImages/1-2011/churu-f9587357831.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;em&gt;&lt;strong&gt;चूरू।&lt;/strong&gt; सर्दियो में हाड कंपकंपा देने वाली ठण्ड और गर्मियों में भीषण गर्मी की विशेषता प्रदेशभर में एकमात्र चूरू जिले में देखने को मिलती है। यह कोई इत्तफाक नहीं है, बल्कि जिले की भौगोलिक परिस्थितियां इसकी जिम्मेदार है। पारा जमाव बिन्दू की ओर जाना, ठण्ड के तेवर तीखे होना और नश्तर चुभती सर्द हवाओं के चलने की सारी केमिस्ट्री जिले के भूगोल में छिपी है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;इसलिए शून्य से नीचे तक जाता है पारा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;प्रदेश के बीकानेर, श्रीगंगानगर, जैसलमेर व बाडमेर आदि जिलों की तरह चूरू भी मैदानी है। ऎसे में यहां पर सूर्य से आने वाला विकिरण धरातल से परावर्तित होकर तेजी से वायुमण्डल में चला जाता है। वायुमण्डल में जल वाष्प की अघिक मौजूदगी परावर्तित विकिरण को रोक कर तापमान बढाने में सहायक होती है। लेकिन चूरू के वायुमण्डल में मौजूद वायु शुष्क होने के कारण परावर्तित विकिरण बिना किसी रूकावट के ऊपर चला जाता है, जिससे यहां अन्य जिलों की तुलना में पारा नीचे दर्ज होता है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;जल्दी ठण्डी होती मिट्टी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;प्रदेश के मरूस्थलीय जिलों में चूरू सबसे पूर्व में स्थित है। इसलिए पश्चिम से आने वाली हवाओं के साथ बालू मिट्टी के बारिक कण भी यहां आकर जमा होते हैं। ये कण आपस में पूरी तरह से जुडे रहते हैं और सूर्य के ताप को ज्यादा गहराई तक जाने से रोकते हैं। ऎसे में धरातल का ऊपरी भाग जितना जल्दी गर्म होता है उतना ही जल्दी ठण्डा हो जाता है। जिले की मिट्टी की ऊष्मा ग्रहण करने की क्षमता अन्य जिलों की तुलना में कम होेने के कारण ठण्ड के तेवर अघिक तीखे रहते हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;जम्मू से आती शीतलहर&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;चूरू की स्थिति देशान्तरीय रूप में जम्मू कश्मीर के भागों से दक्षिण में स्थित है। उत्तरी भारत के बर्फबारी वाले क्षेत्रों से चलने वाली शीतलहर जिले में सीधी पहंुचती हैं। जो नश्तर चुभती हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर व चूरू के बीच प्रदेश के श्रीगंगानगर व हनुमानगढ जिले भी स्थित हैं, लेकिन यहां पर नहरी पानी की उपलब्धता के कारण आद्रüता अघिक रहती है। जिससे तापमान अमूमन शून्य से नीचे नहीं जा पाता है। चूरू से पश्चिम में बीकानेर स्थित है, परन्तु वहां अघिक प्रदूष्ाण के चलते तापमान चूरू की अपेक्षा अघिक रहता है। उधर, उत्तरी हवाओं के रास्ते से बाडमेर व जैसलमेर की दूरी ज्यादा है। ऎसे में उत्तरी हवाओं से सबसे अघिक प्रभावित चूरू ही होता है।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;भौगोलिक स्थिति &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;जिम्मेदार &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;चूरू की भौगोलिक परिस्थितियां ही ठण्ड की जिम्मेदार है। यहां की वायु में अघिक शुष्कता व मिट्टी की ऊष्मा ग्रहण करने की क्षमता कम होने तथा उत्तरी भारत से आने वाली सर्द हवाएं सीधी पहुंचने की वजह से सर्दी अघिक पडती है। चूरू और इसके पडोसी जिलों की भौगोलिक स्थितियों में काफी अंतर है।&lt;strong&gt;-डॉ। रविन्द्र कुमार बुडानिया, व्याख्याता (भूगोल), लोहिया महाविद्यालय, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;'केमिस्ट्री'&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-2488127649478794060?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/2488127649478794060/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2011/01/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2488127649478794060'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2488127649478794060'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2011/01/blog-post.html' title='&apos;भूगोल&apos; मे छिपी ठण्ड की &apos;केमिस्ट्री&apos;'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-786589390107842422</id><published>2010-12-14T11:31:00.002+05:30</published><updated>2010-12-14T11:40:18.932+05:30</updated><title type='text'>प्रशासन तक होगी सीधी पहुंच</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;'सुगम' करेगा राह आसान : जिला और तहसील मुख्यालयों पर बनेंगे सुगम सेंटर&lt;br /&gt;चूरू। प्रदेश में जाति प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोगों तक को अब अधिकारी और कर्मचारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जन-जन की यह परेशानी सुगम प्रोजेक्ट दूर करेगा। प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के जिला और तहसील स्तर पर एक-एक सुगम सेंटर खोला जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने सेंटर शुरू करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2011 निर्धारित की है। सेंटर पर कम्प्यूटर, प्रिंटर, स्केनर व विभिन्न प्रमाण पत्र के आवेदन फार्म उपलब्ध कराए जाएंगे। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो आमजन की न केवल प्रशासन तक पहुंच आसान होगी बल्कि प्रमाण पत्र बनवाने में लगने वाला समय और अनावश्यक खर्च भी बचाया जा सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;प्रारूप पर नहीं उठेगी अंगुली&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सुगम सेंटर शुरू होने के बाद प्रदेशभर में जाति, मूल निवास व आय समेत अनेक प्रमाण पत्र का स्टैण्डर्ड प्रारूप तय हो जाएगा। जिससे नौकरी के दौरान या अन्य कभी आवश्यकता पडऩे पर प्रमाण पत्र के प्रारूप पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकेगा। साथ ही फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने पर भी काफी हद तक अंकुश लगेगा। फिलहाल प्रदेशभर में प्रमाण पत्रों के अलग-&lt;br /&gt;अलग प्रारूप प्रचलित हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;जाति नहीं करा सकेगी गड़बड़ी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सुगम सेंटर पर उपलब्ध 'सुगम सॉफ्टवेयरÓ में एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग में भारत सरकार की ओर से निर्धारित जाति एवं उनकी उप जाति की सूची फीड रहेगी। प्रमाण पत्र बनवाते समय किसी जाति विशेष के वर्ग को लेकर विवाद होने पर सूची में मिलान किया जा सकेगा। इससे गलत जाति का प्रमाण पत्र बनवाने की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। वर्तमान में किसी वर्ग विशेष में शामिल जाति का मिलान करने के लिए कार्मिकों को काफी समय खपाना पड़ता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ऐसे होगा आवेदन, यूं मिलेगा प्रमाण पत्र&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आवेदक को सेंटर से फार्म लेना होगा। जिस पर फार्म के साथ संलग्र किए जाने वाले अन्य दस्तावेजों की सूची भी रहेगी। फार्म जमा कराने पर आवेदक को जमा की रसीद या नम्बर देने के साथ ही भविष्य में सेंटर पर आकर प्रमाण पत्र प्राप्त का दिन और समय भी बताया जाएगा। प्रमाण पत्र पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर एवं मोहर लगवाने का काम सेंटर अपने स्तर पर पूरा करेगा।&lt;br /&gt;___&lt;br /&gt;प्रदेश के एकाध जिले में सुगम प्रोजेक्ट चल रहा है, मगर तहसील स्तर पर सेंटर पहली बार बना रहे हैं। जिला कलक्टरों को इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। जाति, मूल निवास, राशन कार्ड व लाइसेंस बनवाने समेत अनेक सुविधाएं सेंटर पर उपलब्ध करवाई जाएगी। जिला कलक्टर स्व विवेक से सेंटर पर अन्य सुविधाएं बढ़ा भी सकेंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-संजय मलहोत्रा, सचिव व आयुक्त&lt;br /&gt;सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जिला व तहसील स्तर पर सुगम सेंटर स्थापित करने के लिए कार्य शुरू कर दिया है। एक अप्रेल से हर हाल में लोगों को इनका लाभ मिलने लगेगा। सेंटर से संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। फिलहाल भवन की तलाश व अन्य संसाधन जुटाए जा रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-विकास एस भाले, जिला कलक्टर, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-786589390107842422?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/786589390107842422/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/12/blog-post_14.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/786589390107842422'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/786589390107842422'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/12/blog-post_14.html' title='प्रशासन तक होगी सीधी पहुंच'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-4196359502813300615</id><published>2010-12-07T14:18:00.002+05:30</published><updated>2010-12-12T14:55:49.577+05:30</updated><title type='text'>कल्याण की राह में अधिकारी रोड़ा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;झण्डा दिवस के ध्वज व स्टीकरों के लाखों बकाया&lt;br /&gt;चूरू। शहीदों की शहादत पर गर्व महसूस करने वाले अधिकारी ही उनके परिवार और आश्रितों के कल्याण की राह में बाधा बने हुए हैं। बात भले ही गले नहीं उतर रही हो, परन्तु सरकारी कार्यालयों में धूल फांकते सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के स्टीकर और ध्वज देख इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। आलम यह है कि अधिकांश अधिकारी शहीदों के आश्रितों को संभल प्रदान करने मेंं कतई गंभीर नहीं है। झण्डा दिवस के मौके पर पत्रिका टीम ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय के रिकॉर्ड खंगाले तब अधिकारियों का यह दूसरा चेहरा सामने आया।&lt;br /&gt;जिलेभर में 63 अधिकारी शहीदों के आश्रितों के कल्याण के 11 लाख 62 हजार 750 रुपयों पर कुंडली मारे बैठे हैं। अधिकारियों को इस राशि के स्टीकर और ध्वज 1996 से 2009 के दौरान वितरित किए गए थे। ऐसे में अधिकारियों के भरोसे शहीदों के परिवारों का मनोबल बढ़ाने की सोचना बेमानी होगा। हालांकि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी जिलेभर के 96 अधिकारियों को 100 से 6000 स्टीकर व ध्वज वितरित किए जाएंगे। लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ अगर कोई कदम नहीं उठाया गया तो इस साल के स्टीकरों और ध्वज को भी सरकारी कार्यालयों में धूल फांकने में देर नहीं लगेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बढ़ता बकाया का आंकड़ा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वर्ष ------बकाया&lt;br /&gt;1996------ 2000&lt;br /&gt;1997------ 2000&lt;br /&gt;1998------ 500&lt;br /&gt;1999------ 2300&lt;br /&gt;2000------ 1200&lt;br /&gt;2001------ 400&lt;br /&gt;2003------ 13000&lt;br /&gt;2004------ 3000&lt;br /&gt;2005------ 5700&lt;br /&gt;2006------ 26920&lt;br /&gt;2007------ 43600&lt;br /&gt;2008------ 476800&lt;br /&gt;2009------ 585330&lt;br /&gt;कुल------ 11,62,750&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सर्वाधिक लापरवाह डीटीओ&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कल्याण की राह में रोड़ा बनने वाले अधिकारियों में बकाया के लिहाज से जिला परिवहन अधिकारी पहले पायदान पर हैं। डीटीओ पर वर्ष 2008 के एक लाख 97 हजार रुपए तथा वर्ष 2009 के दो लाख 25 हजार रुपए बकाया हैं। पीएचईडी के एसई व एसपी पर बकाया का आंकड़ा एक लाख को पार कर चुका है। बकाया के मामले में अन्य अधिकारियों की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या झण्डा दिवस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;देश की आन, बान और शान के लिए जान की बाजी लगाने वाले शहीद की याद और सेवारत सैनिकों के साथ राष्ट्र की एकजुटता दर्शाने के उदे्श्य से प्रतिवर्ष सात दिसम्बर को देशभर में झण्डा दिवस मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न विभागों को विशेष प्रकार के ध्वज व स्टीकर वितरित किए जाते हैं। जिन्हें वाहनों पर लगाकर या जन समूह को वितरित कर राशि जुटाई जाती है। यह राशि जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से अमल गमैटेड फण्ड में भेजी जाती है। जिसका उपयोग युद्ध विकलांग एवं शहीदों के परिवारों का पुर्नवास, सेवानिवृत व सेवारत सैनिकों एवं उनके परिवारों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यूं जमा होगी राशि&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इस वर्ष प्रति स्टीकर दस रुपए तथा प्रति वाहन पताका (ध्वज) पचास रुपए निर्धारित किए गए हैं। स्टीकर व ध्वज से एकत्रित की गई राशि अधिकारियों को नकद, ड्राफ्ट या चेक के माध्यम से जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय में जनवरी तक जमा करानी होगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अधिकारियों के वेतन में से काटेंगे&lt;/strong&gt;इस वर्ष स्टीकर एवं ध्वज का वितरण करने के एक माह ही इसकी समीक्षा की जाएगी। वर्षों पुराने बकाया की भरपाई संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन में से काटकर करेंगे। इस बार बचे हुए स्टीकर व ध्वज को कार्यालय में रखने की बजाय सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय वापस लौटा देंगे।&lt;br /&gt;-विकास एस भाले, जिला कलक्टर एवं जिला सैनिक बोर्ड के अध्यक्ष, चूरू&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-4196359502813300615?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/4196359502813300615/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/12/blog-post_07.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4196359502813300615'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4196359502813300615'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/12/blog-post_07.html' title='कल्याण की राह में अधिकारी रोड़ा'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-1120564486797310010</id><published>2010-12-06T14:35:00.000+05:30</published><updated>2010-12-12T14:44:17.870+05:30</updated><title type='text'>घर छोटा परिवार बढ़ा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;क्षमता से दोगुने अधिक हिरण करते विचरण&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;चूरू। काले हिरणों के विश्व प्रसिद्ध तालछापर अभयारण्य वर्षों से अपने विस्तार को तरस रहा है। अभयारण्य में हिरणों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है, मगर क्षेत्रफल जस का तस है। स्थिति यह है कि यहां पर हिरणों की संख्या क्षमता से दोगुनी अधिक है। यही वजह है कि भोजन तलाश एवं स्वच्छंद विचरण के लिए अभयारण्य सीमा से बाहर निकलकर कई हिरण अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। वन विभाग पिछले तीन वर्ष से अभयारण्य के विस्तार का प्रयास कर रहा है, परन्तु प्रशासनिक शिथिलता और राज्य सरकार की अनदेखी के चलते योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी इस कार्य में रुचि लेते नहीं दिख रहे हैं।&lt;br /&gt;वन विभाग अभयारण्य की दक्षिणी-पश्चिमी से सटी से सरकारी भूमि को अभयारण्य में मिलाकर इसके विस्तार का प्रयास कर रहा है। लगभग चार सौ हैक्टेयर में फैली इस भूमि पर नमक की 34 इकाइयां स्थापित हैं। इनमें से 10 इकाइयों के पट्टे निरस्त कर दिए गए हैं जबकि दो इकाइयां बंद हैं। अभयारण्य के विकास को लेकर होने वाली बैठकों में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाता रहा है। इस साल 24 जून को जिला कलक्टर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक नमक की आठ इकाइयों की भूमि, जिस पर कोई नहीं की वजह से वन विभाग को सौंपे जाने की सहमति जता चुके हैं। इसी बैठक में सुजानगढ़ के तहसीलदार ने अभयारण्य के विस्तार के लिए नमक की शेष इकाइयों के पट्टों का नवीनीकरण रोकने तथा पट्टाधारियों को नावा या अन्यत्र क्षेत्र में स्थानांनतरित करने का सुझाव दिया था। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो अभयारण्य के विस्तार का प्रस्ताव और नमक इकाइयों के सर्वे की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी हुई है। लेकिन सरकार अभी तक इस मुदद्े को गंभीरता से नहीं लिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यूं बढ़ेगा क्षेत्रफल&lt;br /&gt;तालछापर अभयारण्य 719 हैक्टेयर में फैला हुआ है। नमक इकाइयों की लगभग 16 सौ बीघा भूमि मिलने पर अभयारण्य का क्षेत्रफल तकरीबन चार सौ हैक्टेयर बढ़कर एक हजार 119 हैक्टेयर हो सकता है। वन विशेषज्ञों के मुताबिक एक हिरण को स्वच्छंद विचरण करने के लिए करीब एक हैक्टेयर क्षेत्रफल की आश्यकता होती है। हालांकि इस लिहाज यह क्षेत्रफल भी पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसलिए विस्तार जरूरी&lt;br /&gt;-हिरणों को स्वच्छंद विचरण के लिए मिलेगा अधिक क्षेत्र।&lt;br /&gt;-चारागाह विकसित कर प्राकृतिक चारे की कमी दूरी होगी।&lt;br /&gt;-मीठे पानी के जलस्रोतों की संख्या में होगा इजाफा।&lt;br /&gt;-हिरणों का नमक इकाइयों के गड्ढ़ों में गिरना बंद होगा।&lt;br /&gt;-आवारा कुत्तों व शिकारियों से अधिक सुरक्षित होंगे हिरण।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;साल दर साल बढ़ते हिरण&lt;br /&gt;चूरू जिले की सुजानगढ़ तहसील के छापर कस्बे में स्थित अभयारण्य में हिरणों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। अपे्रल 2010 में की गई वन्यजीव गणना के मुताबिक अभयारण्य में हिरणों की संख्या एक हजार 910 से बढ़कर दो हजार 25 हो गई है। हिरणों की संख्या अधिक बढ़ सकती थी, मगर बीते दो वर्ष के दौरान तेज अंधड़ व बारिश की वजह से तकरीबन सौ हिरण अकाल मौत का शिकार हो गए थे। अभयारण्य के विस्तार की आवश्यकता सात-आठ वर्ष पूर्व ही महसूस की जाने लगी थी, परन्तु इस दिशा में तीन वर्ष पूर्व कदम बढ़ाए गए हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जसवंतगढ़ में भी तलाशी जगह&lt;br /&gt;हिरणों की संख्या बढऩे के साथ-साथ अभयारण्य के विस्तार का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। ्रऐसे में वन विभाग ने नागौर जिले की लाडऩूं तहसील के जसवंतगढ़ कस्बे में हिरणों के लिए अनुकूल जगह तलाशी है। यहां पर तकरीबन पांच सौ हिरण स्थानांनतरित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है, लेकिन वहां भारी मात्रा में जूली फ्लोरा होना योजना की राह में&lt;br /&gt;सबसे बड़ी बाधा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुरजां भी हैं पहचान&lt;br /&gt;तालछापर में काले हिरणों के अलावा कुरजां, जंगली बिल्ली, मरु लोमड़ी, साण्डा, गिद्धसमेत अन्य कई वन्यजीव पाए जाते हैं। सात समंदर पार से हर साल सैकड़ों की संख्या में आने वाली कुरजां भी अभयारण्य की पहचान हैं। कुरजां यहां पर अक्टूबर-मार्च तक शीतकालीन प्रवास करती हैं। इस वर्ष अभयारण्य में विश्व स्तर पर संकटग्रस्त पक्षी सोशिएबल लैप विंग भी नजर आया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इनका कहना है...&lt;br /&gt;तालछापर में हिरणों की संख्या क्षमता से अधिक हो जाने के कारण गत तीन वर्ष से इसके विस्तार का प्रयास कर रहे हैं, मगर अभी तक सफलता नहीं मिली है। अभयारण्य के पास स्थित सरकारी भूमि को अधिगृहित करने के मामले के निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर होना है। जिला प्रशासन, जिला उद्योग केन्द्र व राज्य सरकार को समय-समय पर पत्र लिखते रहते हैं, मगर अभयारण्य का विस्तार कब होगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसके अलावा लाडनूं के जसवंतगढ़ के पास हिरणों के लिए अनुकूल जगह तलाशी है।&lt;br /&gt;-केसी शर्मा, उप वन संरक्षक, चूरू&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नमक इकाइयों का सर्वे करके रिपोर्ट विभाग के उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। कुल 34 इकाइयों में से 22 कार्यरत हैं। कइयों के मामले न्यायालय में विचारधीन हैं। उक्त भूमि को अभयारण्य में मिलाए जाने का निर्णय उच्च स्तर पर होना है।&lt;br /&gt;-जितेन्द्र सिंह शेखावत, जिला उद्योग अधिकारी, सुजानगढ़&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-1120564486797310010?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/1120564486797310010/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/12/blog-post_06.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1120564486797310010'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1120564486797310010'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/12/blog-post_06.html' title='घर छोटा परिवार बढ़ा'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-2757730142270100541</id><published>2010-12-05T18:23:00.004+05:30</published><updated>2011-02-26T20:44:10.540+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सूचना का अधिकार'/><title type='text'>'खाकी' के सामने बेबस है 'करंट'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;[ चौकी-थानों पर बढ़ता बकाया ] :  बिल के नाम पर  &lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;ठेंगा&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;span class=""&gt;चूरू&lt;/span&gt;.जिले में 'खाकी' का रौब विद्युत निगम पर भारी पड़ रहा है। किसी दिन बिजली की कटौती हो जाए तो 'खाकियों' का तत्काल टेलीफोन पहुंच जाता है, लेकिन बिल जमा करवाने की बारी हो तो खाकी 'ठेंगा' दिखाने से भी नहीं चूकते। विद्युत निगम के खिलाफ होने वाले आन्दोलन एवं धरने प्रदर्शन के दौरान पुलिस महकमे की जरूरत पडऩे के कारण विद्युत निगम के अभियंता भी इनके सामने बेबस नजर आते हैं। हालत यह है कि चूरू जिले व लाडनूं के 28थानों एवं चौकियों में फूंकी जाने वाली बिजली के बिलों के पेटे हर साल औसतन एक लाख रुपए बकाया हो जाता है। बिलों की बकाया राशि सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही हैं, वहीं विद्युत निगम इनके कनेक्शन काटने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;strong&gt;एक लाख हो गए दस लाख&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;सूचना का अधिकार कानून के तहत खुलासा हुआ है कि पुलिस महकमा बिजली के बिल चुकाने के प्रति गम्भीर नहीं है। महकमे पर जिले में बिजली बिलों के पेटे 2001 में करीब एक लाख 21 हजार रुपए बकाया थे। लेकिन बिल जमा नहीं करवाने से यह राशि अगस्त 2010 में बढ़कर 10 लाख 19 हजार के पार पहुंच गई।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;strong&gt;आधा दर्जन के हालात खराब&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;जिले के आधा दर्जन थानों एवं चौकियों के बिलों के आंकड़े खुलासा करते हैं कि दस साल में अधिकांशतया इनका बिल नहीं चुकाया गया। राजगढ़ एवं छापर पुलिस थाने एवं साण्डवा पुलिस चौकी पर बकाया का आंकड़ा करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपए को पार कर गया है। राजगढ़ चौकी पर एक लाख 27 हजार 178  रुपए बकाया होने पर विद्युत कनेक्शन काट दिया गया। हालांकि बिल जमा करवाने के मामले में सभी जगह हालात एक जैसे नहीं है। सादुलपुर ग्रामीण, चूरू ग्रामीण और चूरू शहर पुलिस थाना ऐसे भी हैं, जिन पर बिजली बिल पेटे एक रुपया भी बकाया नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;strong&gt;जानते ही नहीं बिल चुकाना &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;थाना/चौकी-2001-----२०१०&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;साण्डवा---6703.76--1,63,481.45&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;राजगढ़----1541----1,61,259.64&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;छापर-----13609---1,49,781.20&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;strong&gt;विभाग का दावा, पुराना है बकाया&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;वर्तमान में बिजली के बिलों का नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा है। पांच-सात साल पूर्व के कुछ बिल बकाया हैं। जिनका भुगतान करवाने का प्रयास कर रहे हंै। बजट के लिए मुख्यालय को लिखा गया है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;strong&gt;- अनिल कयाल, एएसपी, चूरू&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;strong&gt;क्या करें, पुलिसवाले जो हैं&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt; थानों व चौकियों पर बिजली के बिलों की राशि लगातार बढ़ती जा रही है। बकाया वसूली के लिए बार-बार नोटिस जारी करते हैं। पुलिस विभाग के अधिकारी सुनवाई नहीं करते। आम उपभोक्ता का तो शीघ्र ही कनेक्शन काट देते हैं, लेकिन पुलिस के रौब के चलते कोई सख्त कदम नहीं उठा पाते हैं। गत एक दशक के दस लाख रुपए से अधिक बकाया हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;strong&gt;-के.एल. घुघरवाल, अधीक्षण अभियंता, जोधपुर विद्युत वितरण निगम, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-2757730142270100541?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/2757730142270100541/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/12/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2757730142270100541'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2757730142270100541'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/12/blog-post.html' title='&apos;खाकी&apos; के सामने बेबस है &apos;करंट&apos;'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-1806277629411812688</id><published>2010-11-29T12:41:00.002+05:30</published><updated>2010-11-30T12:24:30.699+05:30</updated><title type='text'>पानी की चाबी अब 'टाइमर' के पास</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;चूरू।&lt;/span&gt; जिला मुख्यालय पर जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के माध्यम से आपूर्ति किए जा रहे पानी की चाबी अब डिजिटल टाइमर के पास होगी। पेयजल का समुचित वितरण और पानी के व्यर्थ बहाव पर लगाम कसने के लिए विभाग ने यह आधुनिक कदम उठाया है। इसके तहत विभाग ने शहर में स्थित अपने कुओं और नलकूपों पर डिजिटल टाइमर स्विच लगाना शुरू कर दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अत्याधुनिक तकनीकी से निर्मित टाइमर लगने के बाद कुएं और नलकूप अपने आप संचालित होंगे। इन्हें चालू या बंद करने के लिए ना तो पीएचईडी के कर्मचारियों को रातभर जगना पडेगा और ना ही घरों में रात को बिना आवश्यकता के जलापूर्ति होगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;उपभोक्ताओं से पूछेंगे टाइम&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;शहर में पीएचईडी के लगभग सौ जलस्त्रोत संचालित हैं। स्टाफ की कमी या कार्मिकों की लापरवाही की वजह से अघिकांश जलस्त्रोत ना तो समय पर चालू हो पाते हैं ना ही बंद। कई जलस्त्रोत चौबीस घंटे चालू रहते हैं, जिनका पानी नलों के जरिए नालियों में व्यर्थ बह जाता है। विभागीय अभियंताओं की मानें तो जलस्त्रोत पर लगाए जाने वाले टाइमर में जलापूर्ति शुरू या बंद करने का समय उससे जुडे उपभोक्ताओं से राय-मशविरा करके सेट किया जाएगा। ताकि विभाग और उपभोक्ता के बीच तालमेल बना रहे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यूं करता है काम&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;टाइमर की साइज मोबाइल से थोडी बडी है। इसेकुएं या नलकूप के पम्प को संचालित करने वाले पैनल बोर्ड के साथ लगाया जाएगा। जिससे पम्प को चालू या बंद करने वाले स्टार्टर पर टाइमर का पूरा नियंत्रण हो सके। खास बात यह है कि टाइमर में पम्प को चालू या बंद करने का समय पूर्व में निर्घारित किया जा सकेगा। निर्घारित समय पर बिना किसी व्यक्ति की मदद से पम्प स्वत: चालू या बंद हो जाएगा। टाइमर में एक बार टाइम सेट करने पर लम्बे समय तक बदलने की जरूरत नहीं पडेगी। हालांकि आवश्यकता पडने पर टाइमर के समय में कभी भी फेरबदल किया जा सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शुरूआत में दो, बाद में पचास&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;विभाग ने चूरू के चांदनी चौक व गढ के पास स्थित नलकूप पर टाइमर लगाकर योजना की शुरूआत कर दी है। शहर के नौ तथा ग्रामीण क्षेत्र के दो जलस्त्रोतों पर भी जल्द ही टाइमर लगेगा। फिलहाल जलस्त्रोत चिह्नित किए जा रहे हैं। उन जलस्त्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां पानी अघिक व्यर्थ बहता हो। आगामी दो माह के दौरान कुल पचास जलस्त्रोतों पर टाइमर लगाया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ये भी होंगे फायदे &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;टाइमर का सबसे बडा फायदा पानी को व्यर्थ बहने से रोकना होगा। जलस्त्रोत चालू या बंद करने में लगा स्टाफ विभाग के अन्य कार्यो में काम लिया जा सकेगा। इसके साथ चौबीसों घंटे जलस्त्रोत चलने की वजह से मोटर जलने तथा पेयजल टंकियां ओवर फ्लो होने की समस्या भी अब नहीं रहेगी।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;पानी व बिजली की बचत तथा स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए शहर में विभाग के जलस्त्रोतों पर पहली बार टाइमर लगा रहे हैं। पहले दिन दो जगह टाइमर लगाए हैं। आगामी दो माह में पचास जलस्त्रोत पर टाइमर लगाएंगे। &lt;strong&gt;-अम्बिका प्रसाद तिवाडी, एक्सईएन, पीएचईडी &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-1806277629411812688?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/1806277629411812688/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1806277629411812688'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1806277629411812688'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html' title='पानी की चाबी अब &apos;टाइमर&apos; के पास'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-1366565745588533259</id><published>2010-11-14T12:03:00.003+05:30</published><updated>2010-11-14T12:22:06.368+05:30</updated><title type='text'>तालछापर में नजर आया दुर्लभ पक्षी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt; चूरू। विश्व स्तर पर दुर्लभ प्रजातियों में शामिल पक्षी सोशिएबल लैप विंग इन दिनों चूरू जिले के तालछापर कृष्णमृग अभयारण्य में देखी जा रहा है &lt;span class=""&gt;।&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TN-GWD_TrwI/AAAAAAAAAnY/jL5MhqcoerA/s1600/chu22017414106.jpeg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5539293780275080962" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 252px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TN-GWD_TrwI/AAAAAAAAAnY/jL5MhqcoerA/s320/chu22017414106.jpeg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt; कजाकिस्तान से शीतकालीन प्रवास पर भारत के सूखी घास और सूखे मैदानी इलाकों में आने वाला यह पक्षी इस बार देशभर में सबसे पहले तालछापर में नजर आया है। फिलहाल अभयारण्य में ऎसे पांच पक्षी विचरण करते देखे जासकते हैं। रेड डेटा बुक में लुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल सोशिएबल लैप विंग अभयारण्य में 12 साल बाद पहुंची है। अभयारण्य के रिकॉर्ड के मुताबिक इससे पूर्व 1998 में इसने अभयारण्य में पहुंचकर सर्दियां गुजारी थी। एक दशक से अधिक लम्बे अंतराल के बाद इसके यहां दुबारा आगमन को वन अधिकारी अभयारण्य के बदलते वातावरण के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दुनिया भर में सिमटी संख्या&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इण्डियन बर्ड्स कन्जर्वेशन नेटवर्क के स्टेट कोऑर्डिनेटर सुरेश चन्द्र शर्मा के अनुसार रेड डाटा बुक में विश्व में सोशिएबल लैप विंग की संख्या काफी कम बताई गई है। भारत में गुजरात का कुछ हिस्सा और सम्पूर्ण राजस्थान में इनके आवास के अनुकूल वातावरण है। मगर दोनों प्रदेशों में लम्बे समय से इनके दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। राजस्थान में मुख्य रूप से तालछापर, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान व अन्य छोटे दलदली क्षेत्रों में यह पक्षी कभी-कभार ही दिखाई देता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बड़ा शर्मिला पक्षी&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;लगभग तीस सेंटीमीटर लम्बा यह पक्षी बड़ा शर्मिला है। सफेद भौंहे, सिर पर चमक और पेट पर काला व मेहरून धब्बा इसकी खास पहचान है। इस मेहमान पक्षी का मुख्य भोजन कीड़े-मकोड़े हैं। कजाकिस्तान में बर्फ गिरने के कारण अक्टूबर में शीतकालीन प्रवास के लिए यह अफगानिस्तान होता हुआ तालछापर पहुंचा है। यहां पर यह पक्षी मार्च तक प्रवास करेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;---&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;सोशिएबल लैप विंग दुर्लभ पक्षी है। दुनिया भर में इनकी संख्या तेजी से घटती जा रही है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-हरकीरत सिंह सांगा, वन्यजीव विशेषज्ञ&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तालछापर अभयारण्य में सात रोज पूर्व ही सोशिएबल लैप विंग नजर आई है।इससे पूर्व इसे अभयारण्य में 1998 में देखा गया था। रेड डाटा बुक में शामिल इस पक्षी का एक दशक बाद यहां पहुंचना अभयारण्य के वातावरण तथा पक्षी संवर्द्धन के लिहाज से अच्छा संकेत है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-सूरत सिंह पूनिया, क्षेत्रीय वन अधिकारी, तालछापर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभयारण्य में प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवास को बढ़ावा देने के लिए लम्बे समय से अनेक काम किए जा रहे हैं। यही वजह है विश्वभर में दुर्लभ पक्षी मानी जा रही सोशिएबल लैप विंग यहां नजर आई है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-केसी शर्मा, डीएफओ, चूरू&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-1366565745588533259?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/1366565745588533259/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post_14.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1366565745588533259'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1366565745588533259'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post_14.html' title='तालछापर में नजर आया दुर्लभ पक्षी'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TN-GWD_TrwI/AAAAAAAAAnY/jL5MhqcoerA/s72-c/chu22017414106.jpeg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-4214383865326514270</id><published>2010-11-14T08:32:00.000+05:30</published><updated>2010-11-14T20:38:50.881+05:30</updated><title type='text'>फाइलों में अटके सामुदायिक कुण्ड</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;कुण्ड निर्माण में लाखों का मिलता है अनुदान, &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;12 का लक्ष्य, 7 की चयन प्रक्रिया जारी&lt;br /&gt;चूरू। सामूहिक प्रयासों से बड़े कुण्ड बनाकर धोरों को हरा-भरा करने की सामुदायिक कुण्ड निर्माण योजना दो साल से फाइलों में अटकी हुई है। योजना में लाखों रुपए के अनुदान का प्रावधान होने के बावजूद जिले में एक भी कुण्ड नहीं बन पाया है।&lt;br /&gt;आधिकारिक जानकारी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में 12 कुण्ड बनाए जाने का लक्ष्य है, परन्तु अभी तक सात ही समूहों ने आवेदन किया है। फिलहाल इन्हीं समूहों के आवेदनों को भी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। ऐसे में इस बार तय लक्ष्य निर्धारित समय में हासिल होने की सोचना बेमानी होगी।&lt;br /&gt;योजना के तहत कम से कम पांच किसानों को मिलकर सामुदायिक कुण्ड निर्माण के लिए आवेदन करना होता है। 50 मीटर लम्बा व इतना ही चौड़ा और तीन मीटर गहरा कुण्ड बनाने पर राज्य सरकार की ओर से साढ़े सात लाख रुपए का अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है। शेष राशि किसान समूह को मजदूरी जैसे मिट्टी खुदाई करके वहन करनी होती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इस साल बदले प्रावधान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;विभागीय जानकारी के अनुसार पहले वर्ष योजना के तहत अनुदान की राशि तथा कुण्ड की लम्बाई-चौड़ाई दोगुनी थी। जिले की भौगोलिक स्थिति व बारिश की कमी की वजह से इतना बड़ा कुण्ड बन पाना संभव नहीं हुआ। ऐसे में इस वर्ष 12 अक्टूबर को योजना की अनुदान राशि व कुण्ड की साइज में घटाई गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इन्होंने किया आवेदन&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कुण्ड निर्माण के लिए गांव परसनेऊ के रामरख मेघवाल, दांदू के जगदीश मेघवाल, पृथ्वीराज मेघवाल व औंकार मेघवाल, बास जैसे का के चूनाराम जाट, ढाणी रणवा के भंवर लाल तथा खण्डवा के अम्मीलाल बुरड़क ने आवेदन किया है।&lt;br /&gt;____&lt;br /&gt;चालू वित्तीय वर्ष के दौरान जिले में 12 कुण्ड बनाए जाने हैं। फिलहाल सात आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदन के आधार पर किसानों का चयन किया जा रहा है। निर्धारित समय में कुण्ड निर्माण का लक्ष्य प्राप्त करने के पूरे प्रयास कर रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-डॉ. होशियार सिंह, उप निदेशक, कृषि विभाग, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-4214383865326514270?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/4214383865326514270/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post_2723.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4214383865326514270'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4214383865326514270'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post_2723.html' title='फाइलों में अटके सामुदायिक कुण्ड'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-1391327760583596650</id><published>2010-11-13T13:22:00.004+05:30</published><updated>2010-11-13T13:46:37.153+05:30</updated><title type='text'>बिजली होगी अधिक 'दबंग'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;ग्राम पंचायत विद्युत वितरण योजना : सर्किल में बनेंगे 43 जीएसएस, हर पंचायत का अलग फीडर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;चूरू।&lt;/span&gt; जोधपुर विद्युत वितरण निगम ने चूरू सर्किल के ग्रामीण इलाकों की बिजली में नई जान फूंकने वाले तंत्र पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए ग्रिड सब स्टेशनों (जीएसएस) की संख्या बढ़ाने के साथ ही 11केवी के लम्बे फीडरों के बीच की दूरी घटाई जाएगी। यही नहीं बल्कि अब प्रत्येक ग्राम पंचायत का अपना अलग फीडर भी होगा। यह सब ग्राम पंचायत विद्युत वितरण योजना के तहत होगा। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो जल्द ही बिजली वर्तमान की तुलना में अधिक 'दबंग' हो जाएगी। गांवों को चौबीस घंटे थ्री फेज बिजली मिल सकेगी। फिलहाल गांवों को कृषि कनेक्शनों की तर्ज पर छह से आठ घंटे तक ही थ्री फेज बिजली मिल रही है। &lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5538940429318098930" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 437px; CURSOR: hand; HEIGHT: 216px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TN5E-VGOD_I/AAAAAAAAAnI/ANRnG2Pe4I0/s320/dpang.jpg" border="0" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;प्रत्येक तीन ग्राम पंचायतों पर होगा जीएसएस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चालू वित्तीय वर्ष से शुरू हुई इस योजना के तहत सर्किल की प्रत्येक तीन ग्राम पंचायतों पर एक-एक 33 केवी जीएसएस स्थापित होगा। चूरू जिले की कुल 249 व लाडऩू उपखण्ड की 32 ग्राम पंचायतों को ध्यान में रखते हुए 43 जीएसएस स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक 26 जीएसएस स्थापित किए जाने की उम्मीद है। शेष जीएसएस का काम इनके बाद पूरा किया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;ढीले नहीं रहेंगे तार&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;योजना के तहत 11केवी के लम्बी दूरी वाले फीडरों की दूरी घटाई जाएगी। दो फीडरों के बीच नए खम्भे लगाएंगे। इससे गांवों में ढीले तारों की समस्या नहीं रहेगी। छीजत घटने के साथ ही विद्युत व्यवधान भी कम हो जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;पहले चरण में यहां स्थापित होंगे जीएसएस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;ब्लॉक --------गांव&lt;br /&gt;चूरू के चलकोई बीकान&lt;br /&gt;तारानगर के राजपुरा, धीरवास बड़ा, आनंदसिंहपुरा, मिखाला, झाड़सर कांधलान, लूणास व रैयाटुण्डा&lt;br /&gt;राजगढ़ के चैनपुरा छोटा, राघा बड़ी व ढढ़ाल लेखू&lt;br /&gt;सरदारशहर के रामसीसर, खींवणसर, बुकनसर, बिल्यूबास व मालसर&lt;br /&gt;रतनगढ़ के नौसरिया, गौरीसर व बछरारा&lt;br /&gt;सुजानगढ़ &lt;span class=""&gt;के शोभासर&lt;/span&gt;, रणधीसर व लोडसर&lt;br /&gt;लाडनूं के मिठड़ी, बलदू, जसवंतगढ़ व रोडू&lt;br /&gt;(शेष 17 जीएसएस अगले वित्तीय वर्ष में स्थापित होंगे।)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;---------&lt;br /&gt;नई योजना के तहत सर्किल में 43 जीएसएस की स्वीकृति मिली है। जल्द ही काम शुरू होगा। इसके बाद तीन पंचायतों पर एक जीएसएस हो जाएगा। साथ ही प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपना अलग फीडर भी स्थापित करेंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-केएल गुगरवाल, एसई, जेवीवीएनएल, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-1391327760583596650?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/1391327760583596650/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post_13.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1391327760583596650'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1391327760583596650'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post_13.html' title='बिजली होगी अधिक &apos;दबंग&apos;'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TN5E-VGOD_I/AAAAAAAAAnI/ANRnG2Pe4I0/s72-c/dpang.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-5148641393341986204</id><published>2010-11-10T11:49:00.001+05:30</published><updated>2010-11-11T12:04:06.165+05:30</updated><title type='text'>कमाल की कृष्णा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;राष्ट्रमंडल खेलों की ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पूनिया से अंतरंग बातचीत।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TNuM-DmgFrI/AAAAAAAAAnA/M-Sr3iy14n8/s1600/Krishna+Poonia.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5538175164528727730" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 270px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TNuM-DmgFrI/AAAAAAAAAnA/M-Sr3iy14n8/s320/Krishna%2BPoonia.jpg" border="0" /&gt; &lt;p align="justify"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;strong&gt;किस तरह पहुंचीं इस मंजिल तक?&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;एक शादी समारोह में मेरे पिता की वीरेंद्रजी से मुलाकात हुई। उस दौरान वीरेंद्र देश के टॉप एथलीट्स में से एक थे। पहली बार में ही पिता ने उनको मेरे लिए पसंद कर लिया। मैं फाइनल ईयर में आई तो हमारी शादी हो गई। मेरी हाइट और पर्सनेलिटी को देखकर वीरेंद्र ने शादी के बाद खेल जारी रखने की इच्छा जाननी चाही। मैंने बिना कुछ सोचे-समझे हां कर दी। इसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पति ही आपके कोच हैं। कैसे तालमेल बिठाते हैं? घर पर किसकी चलती है?&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;दूसरी महिला खिलाडियों की तुलना में खुद को अधिक खुशनसीब मानती हूं। खेल के मैदान में पहुंचते ही हमारा रिश्ता बदल जाता है। हम पति-पत्नी की बजाय कोच और खिलाड़ी की तरह एक-दूसरे के साथ व्यवहार करते हैं। लेकिन मैदान के बाहर हमारे बीच एक अलग तरह का प्यारभरा रिश्ता है। मैदान में वीरेंद्र कोच के रूप में डांटते-फटकारते हैं तो घर पर पति का फर्ज भी बखूबी निभाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान मेरी तकनीकी खामियों को लेकर अक्सर गुस्सा करते हैं, पर मैंने कभी बुरा नहीं माना। क्योंकि उस वक्त वे पति नहीं, बल्कि कोच की भूमिका निभा रहे होते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि हमने मैदान की बातों को कभी घरेलू जिंदगी में नहीं आने दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;प्रशिक्षण के वक्त पति के साथ का रोमांचक वाकया?&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;प्रशिक्षण के समय हम दोनों में छोटा-मोटा मजाक तो चलता रहता है। वैसे हम अलग तरह के रिजर्व नेचर के कपल हैं। पति में हमेशा से ही मैच्योरिटी रही है। वे ना तो अधिक गंभीर रहते हैं और ना ही लापरवाह। हमने अपना दायरा तय कर रखा है और उसी में रहकर खुद को पूरी तरह एंजॉय करते हैं। दोनों को ही बड़ी पार्टियां अच्छी नहीं लगतीं, पर घर पर अपनों के बीच समय बिताने का कभी कोई मौका नहीं छोड़ते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बचपन की कोई याद? &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;मैं शुरू से संयुक्त परिवार में रही। बचपन में खूब मस्ती करते थे। घर में 200 भैंसें हुआ करती थीं। घर पर उनका दूध निकालती थी, बड़ा मजा आता था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बेटे लक्ष्यराज को अकेला छोड़कर प्रेक्टिस करना... कितना मुश्किल रहा?&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;बेटे से दूर जाने का मन नहीं करता, पर खेल के लिए सब कुछ करना पड़ता है। पर खुशी इस बात की है कि लक्ष्यराज संयुक्त परिवार में रहकर संस्कार सीख रहा है। वह अपनी दादी और चाची के पास भी बड़ा खुश रहता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;खाली समय में क्या करती हैं? &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;मुझे पढ़ना पसंद है। प्रेक्टिस और घरेलू कामों के बाद समय मिलता है तो गीता, रामायण जैसी धार्मिक पुस्तकें पढ़ती हूं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मैं हूं ऑलराउंडर&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;अपने आप को सेलिब्रिटी या आम गृहिणी की बजाय ऑलराउंडर कहना चाहूंगी। एक ऎसी ऑलराउंडर जो खेल, घर-परिवार और रेलवे की डयूटी को बखूबी पूरा करती हूं। जब घर पर होती हूं तो खाना बनाने और कपड़े धुलाने से लेकर बर्तन तक साफ करवा देती हूं। यह सब देख सास और देवरानियां मुझे घरेलू काम करने की बजाय आराम करके प्रशिक्षण की थकान मिटाने की सलाह देती नहीं थकतीं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;घर वालों का प्यार &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;देवर सतीश, विनोद और देवरानी ओम और राजबाला ने मेरे बेटे लक्ष्यराज को मम्मी-पापा का प्यार दिया। यही वजह है कि बेटे को एक वर्ष का छोड़कर मैं तैयारियो में जुट गई थी। 2004 के बाद तो साल-साल भर तक बेटे से दूर रही। बेटे के स्कूल में पैरेंट्स मीटिंग में कभी नहीं जा पाई, मगर देवर-देवरानियों ने कभी मेरी कमी महसूस नहीं होने दी। इसी वजह से मैंने बेटे की चिंता किए बगैर दिन-रात खेल पर ध्यान दिया। रही बात सास के रवैये कि तो यही कहूंगी कि उनके कोई बेटी नहीं है और मैंने बचपन में अपनी मां को खो दिया था। अब सास के रूप में मुझे मां और उन्हें मेरी जैसी बेटी मिल गई है। हमारा परिवार संयुक्त होने के बावजूद मुझे कभी किसी से गिला-शिकवा नहीं रहा। घर के प्रत्येक सदस्य का रवैया कुछ ऎसा है कि लगता है मैं ससुराल नहीं,बल्कि अभी भी मायके में ही रह रही हूं। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-5148641393341986204?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/5148641393341986204/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/5148641393341986204'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/5148641393341986204'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/11/blog-post.html' title='कमाल की कृष्णा'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TNuM-DmgFrI/AAAAAAAAAnA/M-Sr3iy14n8/s72-c/Krishna%2BPoonia.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-6923107880383595734</id><published>2010-10-13T17:48:00.002+05:30</published><updated>2010-10-13T17:58:01.705+05:30</updated><title type='text'>आए, खाए और चल दिए</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;चूरू सर्किट हाउस प्रबंधन बेबस  &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;राजनीति व प्रशासन के 50 से अधिक दिग्गजों के लाखों बकाया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चूरू। 'आए, खाए और खिसके' का जुमला कई दिग्गज राजनेताओं और वरिष्ठ अफसरों पर सटीक बैठ रहा है। इन सब पर चूरू के सर्किट हाउस में ठहरने और भोजन की एवज में लाखों रुपए बकाया हैं। राजकीय अतिथि के रूप में बकाया राशि छोड़कर जाने वालों में तो पूर्व प्रधानमंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर कई जाने-माने मंत्री तक शामिल हैं। ऐसे सांसद और आईएएस अधिकारियों की भी कमी नहीं, जो सर्किट हाउस के बिलों के भुगतान को अब तक गंभीरता से नहीं लिया है। यही नहीं बल्कि चूरू में तैनात रहे एक जिला कलक्टर, उपखण्ड अधिकारी और कोतवाल भी मुफ्त में खाना खाने से नहीं चूके। जनप्रतिनिधियों और हुक्मरानों की यह हकीकत पत्रिका की पड़ताल में सामने आई है।&lt;br /&gt;आधिकारिक जानकारी के अनुसार 1997 से 31 अगस्त 2010 तक की अवधि के दौरान राजकीय अतिथि, सांसद, मंत्री और अधिकारियों समेत कुल 57 व्यक्तियों के सर्किट हाउस में ठहरने और भोजन के बदले एक लाख 67 हजार 71 रुपए बकाया हैं। हालांकि राजकीय अतिथियों के बिलों की राशि का भुगतान करना सामान्य प्रशासन विभाग तथा चुनाव कार्य के चलते चूरू आने वाले आला अधिकारियों के बिलों का भुगतान करना जिला कलक्टर की जिम्मेदारी है। शेष को व्यक्तिगत रूप से भुगतान करना होता है। बकाया वसूली के लिए सर्किट हाउस प्रबंधन के समय-समय पर पत्र जारी किए जाने के बावजूद बकायादारों का आंकड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। स्थिति यह है कि बकाया वसूलने में सर्किट हाउस प्रबंधन पूरी तरह बेबस है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बकाया एक नजर में&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नाम---------------व्यक्ति----------बकाया&lt;br /&gt;राजकीय अतिथि-------19------------27629&lt;br /&gt;मंत्री व सांसद---------11------------32437&lt;br /&gt;महामहिम राज्यपाल-----2--------------6071&lt;br /&gt;कलक्ट्रेट चूरू---------9-------------72261&lt;br /&gt;प्रशासनिक अधिकारी---14--------------25281&lt;br /&gt;अन्य----------------2--------------3392&lt;br /&gt;कुल----------------57------------167071&lt;br /&gt;(आंकड़े सर्किट हाउस के अनुसार)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पूर्व प्रधानमंत्री गुजराल भी शामिल&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सर्किट हाउस में ठहरने और भोजन की एवज में जिन पन्द्रह राजकीय अतिथियों के नाम से राशि बकाया है, उनमें पूर्व प्रधानमंत्री इन्द्रकुमार गुजराल, पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चोटाला, पूर्व केन्द्रीय खनिज मंत्री शीशराम ओला व पूर्व पेट्रोलियम मंत्री मणीशंकर अय्यर समेत अनेक नाम शामिल हैं। राजकीय अतिथियों में से सबसे अधिक राशि 13 हजार 709 रुपए हरियाणा के तत्कालीन (2003) शहरी विकास राज्य मंत्री सुभाष गोयल तथा सबसे कम 420 रुपए तत्कालीन (2001) राज्यसभा सांसद अुर्जन सिंह के बकाया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सांसद बुडानिया सबसे आगे &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;बकाया के मामले में राज्य सभा सांसद नरेन्द्र बुडानिया पहले पायदान पर हैं। सांसद बुडानिया को 4 नवम्बर 2001 से 13 दिसम्बर 2003 तक की अवधि के लिए सर्किट हाउस प्रशासन को 18 हजार 709 रुपए चुकाने हैं। जबकि सबसे कम 132 रुपए बीसूका के तत्कालीन (2003) उपाध्यक्ष करण सिंह यादव के नाम बकाया है। इनके अलावा दस हजार रुपए से अधिक बकाया राशि वालों में आईएएस अधिकारी टीके सिंह, आईआरएस बीके मोहंती, आईआरएस जीएम प्रकाश और आईएएस टी डब्लू बरगप्पा का नाम भी शामिल है।&lt;br /&gt;------&lt;br /&gt;राजकीय अतिथि, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के यहां ठहरने और भोजन के करीब एक लाख 6 7 हजार 71 रुपए बकाया हैं। राजकीय अतिथियों के बकाया का भुगतान सामान्य प्रशासन विभाग तथा चुनाव कार्य से आने वाले अधिकारियों के बकाया का भुगतान कलक्ट्रेट की ओर से किया जाता है। संबंधित विभाग और व्यक्ति को बकाया चुकाने के लिए समय-समय पर पत्र भेजते रहते हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-संतोष कुमावत, प्रबंधक, सर्किट हाउस, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चुनाव पर्यवेक्षकों के विश्राम और भोजन के बिलों की बकाया राशि का भुगतान हमें करना है। कितना बकाया है इसकी जानकारी नहीं है। पता करके ही बता सकूंगा। बजट के अभाव में भुगतान में देरी हो गई होगी। जल्द ही भुगतान करवा दिया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-विकास एस भाले, कलक्टर, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-6923107880383595734?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/6923107880383595734/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/10/blog-post_13.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6923107880383595734'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6923107880383595734'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/10/blog-post_13.html' title='आए, खाए और चल दिए'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-6350784072878645559</id><published>2010-10-04T11:56:00.003+05:30</published><updated>2010-10-04T12:16:57.617+05:30</updated><title type='text'>आईटी की राह में ढिलाई का 'वायरस'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र :&lt;br /&gt;गांधी जयंती को गुजरी डेडलाइन, 86 पंचायतों में तो काम ही शुरू नहीं हुआ, 31 मार्च नई तिथि निर्धारित&lt;br /&gt;चूरू। ग्राम पंचायतों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने वाली भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र (आईटी सेंटर) योजना की रफ्तार ढिलाई के वायरस की गिरफ्त में है। यही वजह है कि सेंटरों का निर्माण पूर्ण होने की पहली संभावित तिथि दो अक्टूबर (गांधी जयंती) गुजर गई, मगर जिले की 249 ग्राम पंचायतों में से 246 में सेंटर अभी भी सपना बना हुआ है। निर्धारित तिथि तक महज तीन पंचायतों में सेंटर निर्माण का काम पूर्ण हुआ है। 86 ग्राम पंचायतों में तो सेंटर का शुरू ही नहीं हो सका है। जिन ग्राम पंचायतों सेंटर निर्माणाधीन है, उनकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं कही जा सकती है। अब रा'य सरकार के निर्देश जिला प्रशासन ने समस्त केन्द्रों का निर्माण कार्य पूर्ण करने की नई तिथि 31 मार्च 2011 तय की है, किन्तु नई तिथि तक कार्य पूर्ण होने की भी कोई गारण्टी नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;टेण्डर समेत कई रोड़े&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आधिकारिक जानकारी के अनुसार सेंटरों के निर्माण की राह में उनकी टेण्डर प्रक्रिया ही रोड़ा साबित हो रही है। जिला प्रशासन ने सेंटरों की निर्माण सामग्री के लिए अप्रेल में टेण्डर प्रक्रिया शुरू की थी। सरपंचों की बजाय जिला कलक्टर की ओर से टेण्डर प्रक्रिया शुरू करने पर सरपंच शुरू से ही इसके खिलाफ थे। इसके अलावा कुछ पंचायतों में जगह उपलब्ध नहीं होने और सामग्री नहीं पहुंचाने से भी योजना के क्रियान्वयन में बाधा आ रही है। रही-सही कसर सरपंच व ग्रामसेवकों की पिछले दिनों हुई हड़ताल ने पूरी कर दी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यहां भी रफ्तार धीमी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आईटी सेंटर निर्माण के लिए ग्राम पंचायत ही नहीं बल्कि पंचायत समिति मुख्यालयों पर भी रफ्तार धीमी है। जिले की छह पंचायत समितियों में से सुजानगढ़ व राजगढ़ में सेंटर का काम पूर्ण हो पाया है। चूरू व सरदारशहर में सेंटर का काम समाप्ति की ओर है। रतनगढ़ में सेंटर का काम छत से नीचे तथा तारानगर में छह डाले जाने के स्तर तक का काम पूर्ण हो गया है। गौरतलब है कि पंचायत समिति मुख्यालय पर सेंटर निर्माण पूर्ण करने की तिथि 15 अगस्त थी, जो डेढ़ माह पूर्व ही गुजर गई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या है योजना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक सेंटर स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक सेंटर पर महानरेगा से दस लाख रुपए खर्च करेंगे। सेंटर पर पांच कम्प्यूटर उपलब्ध करवाए जाएंगे, जहां गांव के युवाओं को&lt;br /&gt;कम्प्यूटर का प्रशिक्षण दिया जा सकेगा और महानरेगा के कार्यों की ऑन डाटा फीडिंग हो सकेगी। साथ ही अन्य विभागों की योजनाओं के आंकड़े भी&lt;br /&gt;पंचायत स्तर पर आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। इसके अलावा ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं के आवेदन पत्र भरने की भी सुविधा मिलेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;163 सेंटर निर्माणाधीन&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जिले की छहों पंचायत समितियों की 163 ग्राम पंचायतों में सेंटर निर्माणाधीन हैं। इनमें से 44 पंचायतों में सेंटर का काम नींव स्तर तक पूरा हो पाया है। 38 पंचायतों में दो से पांच फीट तक तथा 47 पंचायतों में छत के आस-पास तक का काम हुआ है। इनके अलावा 34 पंचायतों की सेंटरों का काम समाप्ति की ओर है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आंकड़ों की जुबानी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पं. स~~~~~बनेंगेकाम शुरू नहीं&lt;br /&gt;चूरू~~~~~~~35~~~~~ 4&lt;br /&gt;सुजानगढ़~~~51 ~~~~~-&lt;br /&gt;सरदारशहर~~~~~48~~~~~ 6&lt;br /&gt;राजगढ़~~~~~~~55~~~~~ 41&lt;br /&gt;तारानगर~~~~~~~28~~~~~ 12&lt;br /&gt;रतनगढ़~~~~~~32~~~~~ 23&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;कुल~~~~~&lt;/span&gt; 249 ~~~~~86&lt;br /&gt;(आंकड़े जिला परिषद के अनुसार)&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;यह सही है कि पंचायत समिति व ग्राम पंचायत मुख्यालय पर बनने वाले सेवा केन्द्रों के निर्माण की अंतिम तिथियां निकल गई हैं। फिर भी चूरू जिला योजना के क्रियान्वयन को लेकर प्रदेशभर में अव्वल है। शेष 8 6 ग्राम पंचायतों में भी जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। पंचायतों में जगह नहीं मिलने, निर्माण सामग्री नहीं पहुंचने और ग्रामसेवकों व सरपंचों की हड़ताल समेत कारणों से देरी हुई है। अब सरकार से 31 मार्च तक का समय लिया गया है।नई तिथि तक समस्त केन्द्रों का कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-अबरार अहमद, मुख्य कार्यकारी अधिकारी,&lt;br /&gt;जिला परिषद, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-6350784072878645559?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/6350784072878645559/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/10/blog-post_04.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6350784072878645559'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6350784072878645559'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/10/blog-post_04.html' title='आईटी की राह में ढिलाई का &apos;वायरस&apos;'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-958423244977998691</id><published>2010-10-03T15:10:00.001+05:30</published><updated>2010-10-03T15:22:33.789+05:30</updated><title type='text'>दिल्ली की नजर चूरू के मौसम पर</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;[कॉमनवैल्थ गेम्स] &lt;/span&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;रात को भी मौसम के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;चूरू। मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले चूरू जिले पर एक बार फिर से दिल्ली की नजर है। तीन अक्टूबर से दिल्ली में शुरू हो रहे राष्ट्रमण्डल खेलों ने चूरू के मौसम की अहमियत बढ़ा दी है। मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए दिन के साथ-साथ रात को भी मौसम के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। दिल्ली स्थित मौसम विभाग के निर्देश पर चूरू के मौसम केन्द्र में दस सितम्बर से शुरू हुई वैकल्पिक व्यवस्था बीस अक्टूबर तक जारी रहेगी।&lt;br /&gt;आधिकारिक जानकारी के अनुसार चूरू मौसम केन्द्र पर रोजाना तीन घंटे के अंतराल में तापमान, हवा का रुख, नमी और वायुदाब की जानकारी जुटाईजाएगी। सुबह और शाम को आसमान में बैलून छोड़कर छह किलोमीटर ऊपर की हवा की दिशा और रफ्तार की जानकारी जुटाई जाती है। लेकिन अब राष्ट्रमण्डल खेलों को हुए तीन घंटे की बजाय एक-एक घंटे के अंतराल में मौसम के हाल का पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा दोपहर और रात को भी बैलून छोड़े जा रहे हैं।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यह होगा फायदा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;प्रदेश में चूरू स्थित मौसम केन्द्र अन्य केन्द्रों की तुलना में दिल्ली के अधिक नजदीक है। यहां पर बनने वाला मौसम तंत्र दिल्ली के मौसम को भी प्रभावित कर सकता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रदेश में चूरू के अलावा बीकानेर, श्रीगंगानगर, जयपुर और कोटा समेत अन्य स्थानों से मौसम के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इससे दिल्ली मौसम विभाग तीन घंटे की बजाय एक-एक घंटे के अंतराल में दिल्ली के आस-पास के मौसम का हाल बताने में सक्षम होगा।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;मुख्यालय के आदेश पर राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए मौसम के आंकड़े जुटाने की वैकल्पिक व्यवस्था बीस अक्टूबर तक जारी रहेगी। अब तीन घंटे की बजाय प्रत्येक घंटे के अंतराल में मौसम के आंकड़े जुटाकर दिल्ली भेज रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-जिलेसिंह राव, प्रभारी अधिकारी, मौसम केन्द्र चूरू&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-958423244977998691?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/958423244977998691/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/10/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/958423244977998691'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/958423244977998691'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/10/blog-post.html' title='दिल्ली की नजर चूरू के मौसम पर'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-1875142283149309852</id><published>2010-09-24T13:11:00.001+05:30</published><updated>2010-09-24T13:19:32.232+05:30</updated><title type='text'>तीसरी आंख भी रखेगी निगरानी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;आरएएस की परीक्षा, प्रत्येक केन्द्र की होगी वीडियोग्राफी &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;चूरू। बोर्ड परीक्षाओं और मतदान प्रक्रिया की तर्ज पर अब आरएएस परीक्षा पर भी तीसरी आंख से निगरानी रखी जाएगी। प्रदेश में 29 सितम्बर को हो रही आरएएस परीक्षा के प्रत्येक केन्द्र पर इस बार से एक-एक वीडियोग्राफर तैनात किया जाएगा।&lt;br /&gt;वीडियोग्राफर केन्द्र पर प्रश्न पत्र के लिफाफे खोलने से लेकर परीक्षा के बाद लिफाफे को फिर से सील किए जाने तथा औचक निरीक्षण समेत केन्द्र की समस्त गतिविधियों को कैमरे में कैद करेगा। परीक्षा के बाद प्रत्येक केन्द्र की वीडियोग्राफी की सीडी बनाकर आरपीएससी मुख्यालय अजमेर पहुंचाई जाएगी।&lt;br /&gt;परीक्षा की गोपनीयता बरकरार रखने के लिए वीडियोग्राफी के अलावा भी कई कदम उठाए गए हैं। अब निजी परीक्षा केन्द्रों पर एक की बजाय दो पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे। साथ ही छह परीक्षा केन्द्रों पर एक-एक फ्लाइंग स्क्वायड लगाएंगे।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कम्प्यूटर से जारी होगा प्रवेश पत्र&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;आरपीएससी की ओर से मूल प्रवेश पत्र प्राप्त करने से वंचित रहे परीक्षार्थियों के लिए इस बार डुप्लीकेट प्रवेश पत्र जारी करने की भी नई व्यवस्था की गई है। आरपीएससी ने प्रत्येक जिले में विशेष सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाया है। जिसमें परीक्षार्थियों की सूची व जानकारी मय फोटो के उपलब्ध है। डुप्लीकेट प्रवेश पत्र चाहने वालेे परीक्षार्थियों को अपनी दो फोटो व पांच रुपए की डीडी के साथ परीक्षा कंट्रोल कक्ष में उपस्थित होना होगा। परीक्षार्थी की पुख्ता पहचान के बाद उसे कम्प्यूटर से मूल प्रवेश पत्र की प्रतिलिपि जारी कर दी जाएगी। पूर्व में अधिकारी अपने स्तर पर प्रमाणित कर डुप्लीकेट प्रवेश पत्र जारी करते थे।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;आरएएस परीक्षा को लेकर इस बार कई नए कदम उठाए गए हैं। प्रत्येक केन्द्र की समस्त गतिविधियों को वीडियो में कैद करने और निजी केन्द्रों पर दो-दो पर्यवेक्षक तैनात करने का निर्णय किया है। साथ ही डुप्लीकेट प्रवेश पत्र भी कम्प्यूटर से जारी करेंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-डॉ. केके पाठक, सचिव, आरपीएससी, अजमेर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-1875142283149309852?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/1875142283149309852/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/09/blog-post_24.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1875142283149309852'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1875142283149309852'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/09/blog-post_24.html' title='तीसरी आंख भी रखेगी निगरानी'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-1536176115929356580</id><published>2010-09-21T12:37:00.003+05:30</published><updated>2010-09-21T12:54:45.228+05:30</updated><title type='text'>ब्लॉक स्तर पर होगी मौसम की भविष्यवाणी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;जयपुर समेत चार जिलों में लगेंगे अत्याधुनिक राडार, &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;मौसम विभाग के डीजीएम अजीत त्यागी चूरू आए&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चूरू।&lt;/strong&gt; देश में अब ब्लॉक स्तर तक मौसम की भविष्यवाणी की जा सकेगी। इसके लिए मौसम केन्द्रों को हाइटेक करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। चुनिंदा मौसम केन्द्रों पर डोप्लर वैदर राडार लगाए जाने के साथ ही करीब दो हजार स्थानों पर स्वचालित मौसम केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं।&lt;br /&gt;मौसम विभाग नई दिल्ली के डीजीएम डॉ. अजीत त्यागी ने सोमवार को पत्रिका से बातचीत में यह जानकारी दी। डॉ. त्यागी चूरू में स्वचालित मौसम केन्द्र का उद्घाटन करने आए हुए थे। उन्होंने बताया कि जयपुर मौसम केन्द्र में जनवरी 2011 के अंत तक डोप्लर वैदर राडार काम करना शुरू कर देगा। जिससे प्रदेश में चार सौ किलोमीटर की परिधि के मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। 12 जिलों में स्वचालित मौसम केन्द्र स्थापित कर दिए गए हैं जबकि शेष 21 जिलों में मौसम केन्द्र जल्द स्थापित होंगे। देशभर में 50 डोप्लर वैदर राडार और दो हजार स्वचालित मौसम केन्द्र की योजना बनाई गई है। जिसके प्रथम चरण का काम शुरू हो गया है। दूसरे चरण का आगाज 2012 में होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सुपर कम्प्यूटर बनेंगे मददगार&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डॉ. त्यागी ने बताया कि डोप्लर वैदर राडार और स्वचालित मौसम केन्द्र से आंकड़े सीधे दिल्ली, पुणे व मुम्बई में तुरंत प्राप्त किए जा सकेंगे, जहां सुपर कम्प्यूटर से आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन एवं विश्लेषण कर ब्लॉक स्तर तक के तापमान, हवा, बारिश व नमी आदि की भविष्यवाणी की जा सकेगी। फिलहाल मौसम विभाग जिला स्तर तक के मौसम का हाल बताने में सक्षम है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कोटा में भी लगेगा राडार&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डॉ. त्यागी ने बताया कि प्रदेश में श्री गंगानगर और जैसलमेर में डोप्लर वैदर राडार लगा हुआ हैं, मगर दोनों ही पुरानी तकनीक से काम कर रहे हैं। अत्याधुनिक राडार सबसे पहले जयपुर में लगेगा। इसके बाद कोटा का नम्बर आएगा। साथ ही श्रीगंगानगर और जैसलमेर स्थित पुराने राडार को भी बदला जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;पल-पल के मौसम पर होगी पकड़&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चूरू में स्वचालित मौसम केन्द्र शुरू&lt;br /&gt;चूरू। जिला मुख्यालय स्थित मौसम केन्द्र हाइटेक हो गया है। यहां पर सोमवार से स्वचालित मौसम केन्द्र ने काम करना शुरू कर दिया है। अब जिले के पल-पल के मौसम पर केन्द्र की पकड़ हो जाएगी। मौसम विभाग नई दिल्ली के डीजीएम डॉ. अजीत त्यागी व मौसम विभाग जयपुर के निदेशक एसएस सिंह ने सुबह दस बजे केन्द्र का फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया। डॉ. त्यागी ने बताया कि चूरू मौसम केन्द्र पर तीन घंटे के अंतराल में ही मौसम की जानकारी ले पाना संभव हो पा रहा था जबकि मौसम की भविष्यवाणी करने के लिहाज से चूरू देशभर में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में यहां पर लम्बे समय से स्वचालित मौसम केन्द्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब दस मिनट के अंतराल में मौसम का हाल जाना जा सकेगा। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;प्रदेश के 12 जिलों में स्वचालित मौसम केन्द्र स्थापित करने में चूरू को भी प्राथमिकता से लिया गया है। निदेशक एसएस सिंह ने बताया कि स्वचालित मौसम केन्द्र शुरू होने पर पाला पडऩे, ओले गिरने व भारी बारिश आदि का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। चूरू केन्द्र प्रभारी जिलेसिंह राव ने डॉ. त्यागी व सिंह को केन्द्र का निरीक्षण करवाया। इस मौके पर सहायक मौसम वैज्ञानिक जयपुर एनके मल्होत्रा, आरएस सिहाग, गोपाल लाल वर्मा आदि उपस्थित थे।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-1536176115929356580?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/1536176115929356580/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/09/blog-post_21.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1536176115929356580'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1536176115929356580'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/09/blog-post_21.html' title='ब्लॉक स्तर पर होगी मौसम की भविष्यवाणी'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-4520622193352481003</id><published>2010-09-17T13:33:00.001+05:30</published><updated>2010-09-17T13:53:07.913+05:30</updated><title type='text'>सरपंची के फेर में बच्चे हुए जवां</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;दो सरपंचों समेत तीन के निर्वाचन अवैध घोषित करने की सिफारिश&lt;br /&gt;शिकायत की जांच में हुआ खुलासा, जन्मतिथि के बनाए फर्जी दस्तावेज&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चूरू।&lt;/strong&gt; जिले में दो सरपंच और एक उप सरपंच की पंचायती छिनने के आसार हैं। जिला प्रशासन ने तीनों के निवार्चन अवैध घोषित करने की आलाधिकारियों को सिफारिश की है। तीनों पर चुनाव घोषणा पत्र में संतान संबंधित वास्तविक तथ्य छिपाने का आरोप है। पंचायत चुनाव के बाद जिला प्रशासन को मिली शिकायतों की जांच में तीनों को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है।&lt;br /&gt;तीनों ने अपनी पंचायती चलाने के लिए न केवल अपने बच्चों की वास्तविक उम्र काफी बढ़ा दी बल्कि नई जन्मतिथि के फर्जी दस्तावेज भी तैयार करवा लिए। शिकायतों की गहन जांच के बाद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अबरार अहमद ने संभागीय आयुक्त बीकानेर को सरदारशहर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मेहरासर चाचेरा की सरपंच सुवा कंवर, पिचकराई ताल की सरपंच मंजू देवी पारीक और चूरू पंचायत समिति की ग्राम पंचायत जसरासर के वार्ड पंच पूर्णाराम के निर्वाचन को अवैध घोषित करने की सिफारिश की है। इनके अलावा सुजानगढ़ व सादुलपुर पंचायत समिति के एक-एक सरपंच के खिलाफ जांच जारी है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;केस-एक&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;सरदारशहर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मेहरासर चाचेरा की सरपंच सुवा कंवर ने अपनी पांचवीं संतान पुत्र भूपेन्द्र उर्फ भवानी सिंह की वास्तविक जन्मतिथि छिपाई है। शिवाजी पब्लिक शिक्षण संस्थान मेहरासर चाचेरा और नेहरू बाल निकेतन उप्रावि भोजरासर के रिकॉर्ड में भूपेन्द्र की जन्मतिथि 5 दिसम्बर 1999 है जबकि सुवा कंवर ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में जन्मतिथि 21 अप्रेल 94 अंकित की गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;केस-दो&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;सरदारशहर तहसील की ग्राम पंचायत पिचकराईताल की सरपंच मंजू देवी पारीक ने अपनी चौथी संतान पुत्र आनंद की जन्मतिथि में हेरफेर किया है। चुनाव घोषणा पत्र में आनंद की जन्मतिथि ग्राम पंचायत से जारी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर 10 दिसम्बर 1991 अंकित की गई है। जबकि जन्म प्रमाण पत्र चुनाव के बाद 18 फरवरी 2010 को जारी करवाया गया। रामावि और ज्ञान ज्योति उप्रा शिक्षण संस्थान बरजांगसर के रिकॉर्ड के मुताबिक आनंद की जन्मतिथि 4 दिसम्बर 1996 है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;केस-तीन&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;तीसरा मामला चूरू पंचायत समिति की ग्राम पंचायत जसरासर के वार्ड पंच पूर्णाराम के निर्वाचन का है। पूर्णाराम बाद में उप सरपंच चुन गए थे। इन्होंने चुनाव घोषणा पत्र मेंं अपनी छठी संतान पुत्री गायत्री का जन्म 6 अपे्रल 198 5 व सातवीं संतान पुत्री बनारसी का जन्म 13 अप्रेल 198 8 को होना बताया है। जबकि गांव धीरावास के राजकीय माध्यमिक विद्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक गायत्री की वास्तविक जन्मतिथि 15 सितम्बर 1998 व बनारसी की जन्मतिथि 10 अक्टूबर 1999 है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;इनकी जांच जारी &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;इनके अलावा सुजानगढ़ पंचायत समिति की गोपालपुरा ग्राम पंचायत के सरपंच अमराराम मेघवाल व सादुलपुर ग्राम पंचायत के सरपंच न्यांगल छोटी के निर्वाचन पर भी तलवार लटक रही है। जिला प्रशासन को दोनों सरपंचों के खिलाफ संतान सम्बन्धित तथ्य छुपाने की शिकायत मिली है। जिसकी संबंधित विकास अधिकारी से जांच करवाई जा रही है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;क्या है नियम&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;राजस्थान पंचायत राज निर्वाचन नियम 1994 में निर्धारित तिथि 27 नवम्बर 1995 के बाद किसी के तीसरी संतान पैदा होने पर वह चुनाव लडऩे का अपात्र हो जाता है। इसके बावजूद अगर चुनाव जीतता है तो शिकायत मिलने पर उसका निर्वाचन अवैध घोषित किया जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;इनका कहना है...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;दो सरपंच व एक उप सरपंच के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की बीडीओ व बीईईओ से विस्तृत जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर तीनों के निर्वाचन को अवैध घोषित किए जाने की संभागीय आयुक्त को सिफारिश की गई है। दो सरपंचों के खिलाफ प्राप्त शिकायत की जांच जारी है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-अबरार अहमद, सीईओ, जिला परिषद चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-4520622193352481003?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/4520622193352481003/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/09/blog-post_17.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4520622193352481003'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4520622193352481003'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/09/blog-post_17.html' title='सरपंची के फेर में बच्चे हुए जवां'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-396385966606037745</id><published>2010-09-01T12:57:00.002+05:30</published><updated>2010-09-01T13:41:18.086+05:30</updated><title type='text'>घर का बीज पडोसी रहे सींच</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;चूरू।&lt;/strong&gt; घर का जोगी जोगणा आन गांव का सिद्ध वाली कहावत चूरू जिले के गांव गुडाण निवासी प्रगतिशील किसान महावीर सिंह आर्य पर सटीक बैठ रही है। किसान आर्य की ओर से तैयार की गई गेहूं की नई किस्म 'महा किसान क्रांति' व 'महा किसान वरदान' को प्रदेश में भले ही पहचान नहीं मिल पाई हो, मगर पडोसी राज्य उत्तर-प्रदेश व हरियाणा के किसानों के लिए ये किस्में वरदान साबित हो रही हैं। किसान इन किस्मों के बीजों की बुवाई कर मालामाल हो रहे हैं। यूपी के मुजफ्फनगर, एलम, बागपत, कासिमपुर, खेडी, निरपुदा व सिसोली तथा हरियाणा के भिवानी, लुहारू, बहल व दादरी इलाके के सैकडों खेत क्रांति व वरदान किस्म से लहलहा चुके हैं।&lt;br /&gt;इस बार रबी के सीजन में उत्तर प्रदेश के करीब 250 तथा हरियाणा के 20 किसानों ने इन किस्म के गेहूं की बम्पर पैदावार हासिल की है। रबी की फसल के आगामी सीजन में उत्तर प्रदेश में दोनों किस्में काम लेने वाले किसानों की संख्या दोगुनी होने का अनुमान है। जानकारी के अनुसार आर्य की ओर से तैयार गेहूं की दोनों ही किस्म यूपी की स्थानीय किस्म पीवीडब्ल्यू 377 व यूपी 2338 किस्म तथा हरियाणा की 306 किस्म से पैदावार समेत चारा व रोग प्रतिरोधक क्षमता में अघिक उन्नत साबित हो रही है। इससे हरियाणा में किसान 35 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की तुलना में 50 से 60 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तथा यूपी के किसान 45-50 क्विंटल प्रति हैक्टेयर के मुकाबले 60 से 70 क्विंटल प्रति हैक्टेयर पैदावार प्राप्त कर रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पड़ोसी राज्यों के खेतों में यूं पहुंचा बीज &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वर्ष 2007-08 में झुंझुनूं जिले के पिलानी में लगे किसान मेले में महावीर सिंह आर्य ने दोनों ही किस्म के बीजों की प्रदर्शनी लगाई थी। मेले में आए यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के गांव एलम के किसान सुनील ने आर्य से बीस किलोग्राम बीज खरीदे थे। सुनील में यूपी में दो बीघा में बुवाई की और पहली बार नौ क्विंटल पैदावार हासिल की। इससे कम समय में ही दोनों किस्मों ने मुजफ्फर नगर समेत आस-पास के कई जिलों में पहचान बना ली। इसी प्रकार वर्ष 2008-09 में हरियाणा के भिवानी जिले के दिगावा में एनएचआरडीएफ की ओर से लगाए गए मेले में आर्य ने दोनों ही किस्मों की प्रदर्शनी लगाई। हरियाणा के कई किसानों ने आर्य से इनके बीज खरीदे। इसके बाद दोनों ही राज्यों के किसान आर्य से लगातार सम्पर्क में रहे और समय-समय पर गुडाण आकर बीज प्राप्त किए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हम दिलाएंगे पहचान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चूरू के किसान की ओर से तैयार गेहूं की नई किस्मों का यूपी व हरियाणा में बडे पैमाने पर उपयोग होना हम सब के लिए गर्व की बात है। प्रदेश के किसानों का इनसे लाभान्वित नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में पहले जानकारी नहीं थी। आपने इस ओर ध्यान दिलाया है। गेहूं की इन किस्मों की प्रदेशभर में भी पहचान हो, इसके लिए उच्च अघिकारियों से चर्चा की जाएगी।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-होशियार सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दिनोंदिन बढती मांग&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;गेहूं की उन्नत किस्में तैयार करने में बीते दो दशक से काम रहा हूं। महा किसान क्रांति व महा किसान वरदान नामक किस्म सबसे अघिक सफल रही हैं। दोनों ही किस्मों के पेटेंट की प्रक्रिया चल रही है। इसकेे लिए राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान अहमदाबाद की टीम भी कई बार गुडाण आ चुकी है। हरियाणा व यूपी में दोनों किस्मों की मांग दिनोंदिन बढती जा रही है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-महावीर सिंह आर्य, किसान, गांव गुडाण, राजगढ (चूरू)&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;500 किसान बोएंगे&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;ढाई वर्ष पूर्व मुजफ्फनगर के किसान सुनील ने राजस्थान के किसान महावीर सिंह आर्य से लाई दो नई किस्मों की जानकारी दी थी। दोनों ही किस्म हमारी स्थानीय किस्मों से अघिक पैदावार देती हैं। पिछले कई साल से मैं दोनों को काम में ले रहा हूं। इस बार हमारे यहां के करीब पांच सौ किसान क्रांति व वरदान किस्म के गेहूं की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-नरेन्द्र सिंह (किसान), निरपुदा, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पर्याप्त बीज का अभाव&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;गेहूं की महा किसान क्रांति व महा किसान वरदान किस्म का उपयोग करने से हमें स्थानीय किस्म से 15-25 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक अघिक पैदावार प्राप्त होती है। गुडाण निवासी प्रगतिशील किसान आर्य से एक किसान मेले में बीज खरीदा था। हरियाणा के कई जिलों में इन किस्मों की मांग बढ रही है, मगर आर्य पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-हीरानंद श्योराण (किसान), गांव पहाडी, जिला भिवानी, हरियाणा&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-396385966606037745?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/396385966606037745/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/396385966606037745'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/396385966606037745'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='घर का बीज पडोसी रहे सींच'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-9025383272874003698</id><published>2010-08-13T12:14:00.002+05:30</published><updated>2010-08-13T12:21:48.384+05:30</updated><title type='text'>बारिश ने बरसाए 'रिकॉर्ड'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;गत वर्ष से 20 एमएम अधिक बरसात&lt;br /&gt;दस वर्षों के औसत से 46 एमएम कम&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चूरू। जिले में इस बार मानसून नित नए रिकॉर्ड कायम कर रहा हैं। गत वर्ष की कुल बारिश का रिकॉर्ड तो सभी ब्लॉकों में टूट चुका है जबकि आधा सावन और पूरा भादो अभी बाकी है। जिले में अब 46 एमएम बरसात और होती है तो इस बार गत दस वर्षों की औसत बारिश का रिकॉर्ड भी टूट जाएगा।&lt;br /&gt;जिले के छहों ब्लॉकों में इस बार अब तक 1 हजार 718 एमएम बारिश हो चुकी है, जो वर्ष 2009 से 119 एमएम, वर्ष 2002 से 745 एमएम तथा वर्ष 2000 से 321 एमएम अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार जिले में जून से सितम्बर के अंत तक मानसून सक्रिय रहता है। इस बार शुरुआत से ही अच्छी बारिश हो रही है।&lt;br /&gt;जिले में बीते चौबीस घंटों के दौरान चूरू व सरदारशहर में झमाझम हुई। सरदारशहर में बुधवार रात करीब 50 एमएम पानी बरसा जबकि चूरू में दोपहर को 4.4 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जिले के शेष इलाकों में कहीं बादल छाए रहे तो कहीं बूंदाबांदी हुई। दिन का अधिकतम तापमान 34.3 व न्यूनतम तापमान 26.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इस बार की बारिश&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;ब्लॉक वर्षा&lt;br /&gt;चूरू 296&lt;br /&gt;सरदारशहर 201&lt;br /&gt;रतनगढ़ 318&lt;br /&gt;सुजानगढ़ 236&lt;br /&gt;राजगढ़ 259&lt;br /&gt;तारानगर 408&lt;br /&gt;औसत 286.33&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;(वर्षा एमएम में, भू- राजस्व शाखा के अनुसार)&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;गत दस वर्ष की स्थिति&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;साल -----------वर्षा&lt;br /&gt;2000--------- 233&lt;br /&gt;2001 ---------372&lt;br /&gt;2002 ---------162&lt;br /&gt;2003 ---------414&lt;br /&gt;2004 ---------309&lt;br /&gt;2005 ---------355&lt;br /&gt;2006 ---------297&lt;br /&gt;2007 ---------405&lt;br /&gt;2008 --------506&lt;br /&gt;2009 --------266&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;तारानगर पर अधिक मेहरबान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जिले में इस बार अब तक बदरा तारानगर ब्लॉक पर सबसे अधिक मेहरबान हुए हैं। यहां पर 408 एमएम बारिश हो चुकी है, जो तारानगर में वर्ष 2000, 02, 03, 06 व 09 के दौरान हुई कुल बारिश से अधिक है। उधर, अब तक सबसे कम 201 एमएम बारिश सरदारशहर ब्लॉक में रिकॉर्ड की गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फसलों में कीट व रोग का प्रकोप&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अच्छी बारिश के चलते खेतों में खरीफ फसलें लहलहाने लगी हैं। कीट व रोगों ने भी फसलों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. होशियार सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने गुरुवार को चूरू तहसील के गांव बीनासर व देपालसर आदि के खेतों का दौरा किया तो मंूग,मोठ ग्वार में रोग का प्रकोप पाया गया। हालांकि कीट व रोग अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए फसलों को खास नुकसान नहीं हो रहा है। टीम ने किसानों को कीट व रोगों से बचाव की सलाह दी है। टीम में कृषि अधिकारी भारत भूषण शर्मा, कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ. मुकेश शर्मा, जीएस पुण्डीर आदि शामिल थे। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-9025383272874003698?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/9025383272874003698/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/08/blog-post_13.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/9025383272874003698'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/9025383272874003698'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/08/blog-post_13.html' title='बारिश ने बरसाए &apos;रिकॉर्ड&apos;'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-5488526266657530471</id><published>2010-08-11T16:07:00.000+05:30</published><updated>2010-08-11T16:14:39.336+05:30</updated><title type='text'>अंग्रेजी की राह में 'कांटे'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;महाविद्यालय हलचल :&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लोहिया महाविद्यालय में अंग्रेजी का एक भी व्याख्याता नहीं&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चूरू.&lt;/strong&gt; विदेशी भाषा सीख कर कॅरियर बनाने की सोच रहे राजकीय लोहिया महाविद्यालय के सैकड़ों विद्यार्थियों का सपना टूटता नजर आ रहा है। समस्या यह है कि नए सत्र का आगाज हो चुका है मगर महाविद्यालय में अंग्रेजी का एक भी व्याख्याता नहीं है। ऐसे में अनिवार्य अंग्रेजी और अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थियों की राह में 'कांटेÓ दिखाए दे रहे हैं। नए सत्र में अंग्रेजी की कक्षाएं शुरू करने को लेकर महाविद्यालय प्रबंधन की भी चिंता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। उधर, डाइट में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को अंग्रेजी में अधिक पारंगत करने के लिए स्थापित लिंग्वा लैब प्रशिक्षक के अभाव में बंद पड़ी है। यहां पर इस साल मार्च में ही प्रशिक्षक का पद खाली हो गया था। लोहिया महाविद्यालय की लिंग्वा लैब का हाल ऐसा ही है। अंग्रेजी का व्याख्याता उपलब्ध नहीं होने के कारण पिछले साल अक्टूबर से लैब पर ताला लगा हुआ है। महाविद्यालय ने अंग्रेजी व्याख्याता नियुक्त किए जाने का प्रस्ताव आयुक्तालय को भेजा है। प्रस्ताव पर अमल जब होगा तब होगा इस शिक्षा सत्र में तो विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी पढऩे की राह में बाधा ही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;तीनों पद खाली&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जिले के इस एक मात्र मॉडल कॉलेज में अंगे्रजी व्याख्याताओं के कुल तीन पद स्वीकृत हैं, इनमें से एक पद करीब दस साल से खाली पड़ा है जबकि पिछले साल अक्टूबर में उप प्राचार्य पद पर प्रमोशन पाकर व्याख्याता जीएस महला राजकीय रूईया महाविद्यालय रामगढ़ शेखावाटी में तथा एचआर ईसराण राजकीय महाविद्यालय सरदारशहर चले गए। तब से लोहिया महाविद्यालय में अंग्रेजी पढ़ाने वाला कोई नहीं है। इससे विद्यार्थी अंग्रेजी पढऩे से वंचित हो रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लैब पर जड़ा ताला&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;महाविद्यालय में करीब चार वर्ष पूर्व स्थापित लिंग्वा लैब पर वर्तमान में स्टाफ के अभाव में ताला लगा हुआ है। लैब में माइक्रोफोन, हैडफोन, ऑडियो कैसेट आदि उपकरण धूल फांक रहे हैं। महाविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थियों की संख्या तकरीबन पांच सौ के आस-पास है। साथ ही तीनों संकायों में अनिवार्य विषय के रूप में अंग्रेजी चुनने वाले विद्यार्थी भी सैकड़ों में हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डाइट में लिंग्वा लैब को प्रशिक्षक का इंतजार&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डाइट में राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों में अंग्रेजी विषय पढ़ाने का स्तर सुधारने के उद्देश्य से नवम्बर 2008 में लिंग्वा लैब की स्थापना की गई। जिले के एक हजार 460 प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों में से अब तक180 को ही प्रशिक्षित किया गया है। 24 शिक्षकों को एक साथ प्रशिक्षण देने की क्षमता वाली यह लैब 23 मार्च 2010 के बाद से बंद पड़ी है। यहां पर प्रशिक्षक के रूप में तैनात सेवानिवृत अंग्रेजी व्याख्याता ओमप्रकाश तंवर व हीरालाल महर्षि बीएड महाविद्यालयों में चले गए। तब से डाइट में अंग्रेजी का कोई प्रशिक्षण शिविर नहीं लगाया जा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या है लिंग्वा लैब&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;लिंग्वा लैब का नाम लैंगवेज से पड़ा है। लैब का उद्देश्य विद्यार्थियों का उच्चारण सुधार कर अंग्रेजी बोलने की झिझक दूर करना है। लैब में विद्यार्थियों को अंगे्रजी की विशेष अभ्यास पुस्तिका से देखकर अंग्रेजी में अपनी भाषा टेप रिकॉर्डर में रिकॉर्ड करनी पड़ती है, जिसे हैडफोन के जरिए सुनने पर एक विशेष मशीन की मदद से उच्चारण आसानी से सुधारा जा सकता है। यह प्रक्रिया इतनी सरल है कि इससे कम समय में फटाफट अंग्रेजी बोलनी सीखी जा सकती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;amp;&amp;amp;&lt;br /&gt;अंग्रेजी का एक भी व्याख्याता नहीं है। इस समस्या की ओर आयुक्तालय का ध्यान दिलाया जा चुका है। जल्द ही व्याख्याताओं की तबादला सूची जारी होने वाली है। यहां के खाली पद भी भरे जाने की उम्मीद है। किसी कारणवश यदि ऐसा नहीं हुआ तो वैकल्पिक व्यवस्था से पढ़ाएंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-एमडी गोरा, प्राचार्य, लोहिया महाविद्यालय, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;लैब से जिलेभर के शिक्षक लाभान्वित हो सकते हैं। फिलहाल प्रशिक्षक के अभाव में लैब बंद कर रखी है। सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से प्रशिक्षक तैनात किए जाने हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-सत्यनारायण स्वामी, प्रभारी, लिंग्वा लैब, डाइट, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-5488526266657530471?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/5488526266657530471/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/08/blog-post_2042.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/5488526266657530471'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/5488526266657530471'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/08/blog-post_2042.html' title='अंग्रेजी की राह में &apos;कांटे&apos;'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-2486630514402359592</id><published>2010-08-11T15:57:00.001+05:30</published><updated>2010-08-11T16:05:10.151+05:30</updated><title type='text'>प्रवेश तो दे देंगे, बैठाएंगे कहां?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;महाविद्यालय हलचल :&lt;/em&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;जिले के मॉडल कॉलेज में कमरों का टोटा, सेक्शन बढऩे से बढ़ी परेशानी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चूरू. महाविद्यालयों में हाल ही सीटें बढ़ाए जाने से भले ही विद्यार्थी खुशी से फूले नहीं समा रहे हों मगर चूरू के राजकीय लोहिया महाविद्यालय प्रबंधन के लिए बढ़ी हुई सीटें कोढ़ में खाज साबित हो रही हैं। दरअसल जिले के सबसे बड़े और मॉडल कॉलेज का दर्जा प्राप्त इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों को बैठाने के लिए पर्याप्त कक्षा कक्ष नहीं हैं। लम्बे समय से पर्याप्त कक्षा कक्षों की समस्या से जूझ रहे लोहिया महाविद्यालय में इस बार कला संकाय में 160 व वाणिज्य संकाय में 80 सीटें बढऩे से विद्यार्थियों को बैठाने को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। फिलहाल महाविद्यालय में कक्षाएं लगाने के लिए आवश्यकता की तुलना में कम कक्ष ही उपलब्ध हैं। महाविद्यालय में तीन संकायों के यूजी व पीजी के विद्यार्थियों की संख्या चार हजार के आस-पास है। वाणिज्य संकाय की कक्षाएं सुबह 8 बजे, कला संकाय की 9 बजे व विज्ञान संकाय की 10 बजे शुरू होती हैं। दोपहर 12 बजे बाद तो महाविद्यालय में विकट स्थिति पैदा हो जाती है। विद्यार्थियों को बैठने के लिए कमरे खाली नहीं मिलते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कितनी है आवश्यकता&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;महाविद्यालय में यूजी कक्षाओं के कुल चालीस सेक्शन हैं। इनमें तीनों संकाय के प्रथम वर्ष के 18, द्वितीय वर्ष के 12, तृतीय वर्ष के 10 सेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा एमकॉम में एबीएसटी, ईएफएम, बीएडएम, एमए में राजनीतिक विज्ञान व इतिहास और एएससी में केमिस्ट्री, बॉटनी और जूलॉजी के कक्षाओं के लिए कम से कम 16 कक्षा कक्षों की आवश्यकता है। महाविद्यालय को प्रभावी शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए 56 कक्षा कक्षों की दरकार है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;क्या है उपलब्धता&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;महाविद्यालय की ऊपरी व निचली मंजिल पर कुल 87 कमरें बने हुए हैं। इनमें से प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, स्टाफ, प्रयोगशालाएं, लेखा शाखा, स्टोर, नॉलेज सेंटर, पुस्तकालय, कॉमन रूम, कम्प्यूटर फेसिलिटी सेंटर, एनएसएस व एनसीसी आदि के लिए पचास से अधिक कमरे आवंटित हैं। कक्षा कक्ष के रूप में 35-40 कमरे काम लिए जा रहे हैं। महाविद्यालय के छह कमरों में विधि महाविद्यालय संचालित है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या है समाधान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;महाविद्यालय में कक्षा कक्षों की संख्या बढ़ाने के लिए किसी संकाय का अलग से ब्लॉक बनवाने की यूजीसी से मांग की जा सकती है। इसके अलावा महाविद्यालय के छात्रावास में वैकल्पिक व्यवस्था भी की जा सकती है। जानकारी के अनुसार महाविद्यालय के पास स्थित छात्रावास में कुल 128 कमरे हैं। विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावास का आधा परिसर ही काम आ रहा है। छात्रावास में कम छात्र संख्या वाली कक्षाएं लगाए जाने पर भी विचार किया जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;amp;&amp;amp;&lt;br /&gt;महाविद्यालय ने निश्चित रूप से कक्षा कक्षों की कमी है। फिर भी शिक्षण व्यवस्था किसी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दी जा रही है। इस बार आवश्यकता पड़ी तो पोर्च व गैलेरी में कक्षाएं संचालित कर लेंगे। इसके अलावा छात्रावास के खाली कमरे काम में ले लेंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-एमडी गोरा, प्राचार्य, लोहिया महाविद्यालय, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;amp;&amp;amp;&lt;br /&gt;महाविद्यालय में छात्र संख्या चार हजार के आस-पास रहती है। मगर कक्षा कक्षों का हमेशा से अभाव ही रहा है। छात्रावास के खाली कमरों को काम लिया जा सकता है। हालांकि छात्रावास के कमरे अपेक्षाकृत छोटे हैं मगर उनमें पीजी की कक्षाएं आसानी से संचालित की जा सकती हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-भंवर सिंह सामौर, पूर्व प्राचार्य, लोहिया महाविद्यालय, &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;२0 जुलाई 2010&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-2486630514402359592?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/2486630514402359592/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/08/blog-post_11.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2486630514402359592'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2486630514402359592'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/08/blog-post_11.html' title='प्रवेश तो दे देंगे, बैठाएंगे कहां?'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-8711462857385506515</id><published>2010-08-04T15:22:00.004+05:30</published><updated>2010-08-04T16:23:46.366+05:30</updated><title type='text'>पढ़ाई का पीटे 'ढोल', गुणवत्ता में 'गोल'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;चूरू&lt;/span&gt;. जिले के सरकारी विद्यालय बच्चों को पढ़ाने का भले ही 'ढोल' पीट रहे हो मगर पढ़ाई से गुणवत्ता 'गोल' होती जा रही गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर &lt;span class=""&gt;पकड़&lt;/span&gt; नहीं बना पा रहे हैं। विद्यालयों की यह कड़वी सच्चाई क्वालिटी इंश्योरेंश परीक्षण में सामने आई है। जिलेभर के एक हजार 55 राजकीय उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह &lt;span class=""&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TFk_OEwunVI/AAAAAAAAAkA/msyWjtBww5M/s1600/Page+1+copy.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5501497930838613330" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 235px; CURSOR: hand; HEIGHT: 182px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TFk_OEwunVI/AAAAAAAAAkA/msyWjtBww5M/s320/Page+1+copy.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;व&lt;/span&gt; सात के 32 हजार 146 विद्यार्थियों की इस साल दस से बारह जनवरी को विशेष परीक्षा हुई, जिसमें विद्यार्थियों से गणित, अंग्रेजी व विज्ञान विषय के प्रश्न हल करवाए गए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार परीक्षण के परिणामों को हाल ही अंतिम रूप दिया गया है। जिले को 59 प्रतिशत अंकों के साथ 'सीÓ ग्रेड में रखा गया है। जिलेभर के 86 विद्यालय तो उत्तीर्ण होने योग्य अंक भी हासिल नहीं कर पाए हैं। इन्हें आठ से 35 प्रतिशत तक अंक प्राप्त हुए हैं। 150 विद्यालयों को डी ग्रेड मिली हैं। महज 123 विद्यालयों को 8 0 या इससे अधिक प्रतिशत अंक हासिल हुए हैं। जिले में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सुजानगढ़ के गांव सारोठिया का राजकीय माध्यमिक विद्यालय तथा सरदारशहर के गांव रायपुरिया का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर रहे। तारानगर के गांव राजपुरा का राजकीय माध्यमिक विद्यालय फिसड्डी रहा। &lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5501493242827541970" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 323px; CURSOR: hand; HEIGHT: 135px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TFk69MjyjdI/AAAAAAAAAj4/EggSPQO4mKI/s320/Page+1+copy.jpg" border="0" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;माध्यमिक स्कूल भी फेल&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पढ़ाई के मामले में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय अधिक फिसड्डी रहे हैं मगर राजकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति भी अच्छी नहीं कही जा सकती। जिले में एक दर्जन से अधिक माध्यमिक स्तर के विद्यालय परीक्षण में खरे नहीं उतर पाए हैं। सुुजानगढ़ में गांव शोभासर, छापर, जैतासर, ईंयारा, चूरू में आसलखेड़ी, खींवासर, सिरसला, बालरासर आथुना, हरिया देवी दूधवा, राजगढ़ में भोजाण, पहाड़सर, जसवंतपुरा, बैरासर छोटा, ददरेवा, तारानगर में धीरवास बड़ा, राजुपरा, तारानगर, कोहिणा, सरदारशहर में दूलरासर तथा रतनगढ़ में परसनेऊ, राजलदेसर, जांदवा, लोहा व भुखरेड़ी में स्थित माध्यमिक स्तर के विद्यालय को निम्न ग्रेड मिली है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;ऐसे हुई परीक्षा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;एसएसए के तहत क्वालिटी इंश्योरेंस परीक्षण हुआ। राजस्थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद जयपुर के स्तर पर प्रश्न तैयार कर विद्यालयों में पहुंचाए गए। बेरोजगार प्रशिक्षक अध्यापक व कार्यरत सरकारी शिक्षकों ने विद्यालयों में जाकर कक्षा छह व सात के विद्यार्थियों की परीक्षा ली। कॉपियों की जांच ब्लॉक पर बीआरसीएफ कार्यालय में अनुभवी शिक्षकों से करवाई गई।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;किसके कितने फेल&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;ब्लॉक स्कूल&lt;br /&gt;सुजानगढ़ 9&lt;br /&gt;चूरू 27&lt;br /&gt;राजगढ़ 15&lt;br /&gt;तारानगर 11&lt;br /&gt;सरदारशहर 10&lt;br /&gt;रतनगढ़ 14&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यह रहा पैमाना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;ग्रेड-----&lt;/span&gt; प्राप्तांक&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;ए-----&lt;/span&gt; 80 या इससे अधिक प्रतिशत&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;बी-----&lt;/span&gt; 65 से 79 प्रतिशत&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;सी-----&lt;/span&gt; 50 से 64 प्रतिशत&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;डी-----&lt;/span&gt; 36 से 49 प्रतिशत&lt;br /&gt;ई----- 36 प्रतिशत से नीचे&lt;br /&gt;--&lt;br /&gt;क्वालिटी इंश्योरेंश परीक्षण के जरिए जिलेभर के एक हजार से अधिक स्कूलों के 32 हजार 146 विद्यार्थी की परीक्षा लेकर गुणवत्ता परखी गई। परीक्षण के परिणाम को हाल ही अंतिम रूप दिया गया है। जिले को सी ग्रेड मिली है। न्यून परिणाम वाले विद्यालय में जनवरी व फरवरी में अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी।&lt;br /&gt;-जगदीश प्रसाद गोदारा, कार्यक्रम सहायक, एसएसए चूरू&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-8711462857385506515?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/8711462857385506515/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/08/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8711462857385506515'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8711462857385506515'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/08/blog-post.html' title='पढ़ाई का पीटे &apos;ढोल&apos;, गुणवत्ता में &apos;गोल&apos;'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TFk_OEwunVI/AAAAAAAAAkA/msyWjtBww5M/s72-c/Page+1+copy.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-483891815924049124</id><published>2010-07-18T16:07:00.000+05:30</published><updated>2010-07-21T16:24:53.548+05:30</updated><title type='text'>छात्र घोलने लगे 'राजनीति' का रंग</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;[ छात्रसंघ चुनाव 2010 ] :&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;छात्र संगठन हुए सक्रिय, &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;चुनाव की प्रारम्भिक तैयारियां शुरू&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;चूरू. महाविद्यालयों में अगले माह प्रस्तावित छात्रसंघ चुनावों का रंग घुलने लगा है। चुनाव को लेकर जहां छात्रों के घुंघरू बंध गए हैं वहीं छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। संगठनों ने चुनाव की प्रारम्भिक तैयारियां शुरू कर दी है। कोई सदस्यता अभियान शुरू करने जा रहा है तो कोई पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाकर चुनावी रणनीति बनाने की तैयारी में हैं। छात्र संगठन महाविद्यालयों में सीटें बढ़ाने की मांग को लेकर गुरुवार तक धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। अब सीटें बढ़ाए जाने पर संगठनों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिले में सक्रिय एसएफआई, एनएसयूआई व एबीवीपी समस्त सरकारी महाविद्यालयों में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। हालांकि महाविद्यालय प्रबंधन को चुनाव के संबंध में अभी तक कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिली है। ऐसे में महाविद्यालय प्रबंधन असंमजस की स्थिति में है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;एसएफआई &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इण्डिया (एसएफआई) की रविवार को चूरू के शिक्षक भवन में जिला कमेटी की प्रथम बैठक होगी। इसमें लोहिया कॉलेज इकाई के साथ चुनाव रणनीति को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। पार्टी की सरदारशहर इकाई की बैठक सोमवार को होगी। जिलाध्यक्ष दीपचंद बलौदा ने बताया कि पार्टी की तारानगर में बैठक हो चुकी है। सुजानगढ़ में पार्टी कम सक्रिय होने के कारण वहां पर बाद में बैठक होगी।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;एबीवीपी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) चुनावों को लेकर 19 जुलाई से सदस्यता अभियान शुरू करेगी। इस बार साढ़े तीन हजार नए सदस्यों के साथ सदस्यों की कुल संख्या दस हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य है। फिलहाल फतेहपुर में सीकर, चूरू, झुंझुनूं के कार्यकर्ताओं का दो दिवसीय अभ्यास शिविर चल रहा है। जिला प्रमुख ओमप्रकाश महर्षि के अनुसार अगस्त में उम्मीदवार तय किए जाएंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;एनएसयूआई&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;छात्रसंघ चुनाव की तैयारियों को लेकर एनएसयूआई भी पीछे नहीं है। पार्टी की जिला कार्यकारिणी की बैठक में प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे। प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारी तय होगी। जिलाध्यक्ष भींवाराम मेघवाल के अनुसार चुनाव रणनीति बनाने के लिए पार्टी पदाधिकारी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। जिला कार्यकारिणी की बैठक का समय और स्थान मंगलवार तक निर्धारित किया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यह रहेगा कार्यक्रम&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;राज्य सरकार ने छात्रसंघ चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 16 अगस्त को मतदाता सूचियां प्रकाशित की जाएंगी। 19 अगस्त तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे। 20 अगस्त को नाम वापस लिए जा सकेंगे। 21 अगस्त को अंतिम सूची प्रकाशित होगी। 25 अगस्त को सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक वोट डाले जाएंगे। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;~~~~~~&lt;br /&gt;चुनाव के संबंध में उच्च अधिकारियों से अभी तक कोई लिखित जानकारी नहीं आई है। टीवी और अखबारों से ही पता चला है कि 25 अगस्त को चुनाव हंै।अधिकृत सूचना मिलने पर महाविद्यालय स्तर पर चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-एमडी गोरा, प्राचार्य, राजकीय लोहिया महाविद्यालय, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-483891815924049124?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/483891815924049124/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post_18.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/483891815924049124'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/483891815924049124'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post_18.html' title='छात्र घोलने लगे &apos;राजनीति&apos; का रंग'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-930572122769795090</id><published>2010-07-15T12:17:00.003+05:30</published><updated>2010-07-15T12:39:18.791+05:30</updated><title type='text'>बिना धुएं का खाना हुआ 'धुआं'</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;strong&gt;चूरू ।&lt;/strong&gt; जिले के एक हजार से अघिक सरकारी स्कूलों में मिड डे मील कार्यक्रम के तहत बच्चों को बिना धुएं का भोजन खिलाए जाने का सरकार का सपना धुआं होता जा रहा है। स्कूलों में रसोई गैस की उपलब्धता अब तक सुनिश्चित नहीं हो पाई है। इसके लिए भले ही रसद विभाग, शिक्षा विभाग व गैस वितरिकों के अलग-अलग दावे-प्रतिदावे रहे हों, मगर स"ााई है कि इस लक्ष्य को पाने में किसी ने भी स"ो मन से कतई प्रयास नहीं किए हैं। &lt;img style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 401px; CURSOR: hand; HEIGHT: 222px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://www.gravis.org.in/en/education/Mid%20Day%20meal%20preparation%20in%20school.JPG" border="0" /&gt;&lt;br /&gt;रसद विभाग की मानें तो उन्हें इस संबंध में गैस वितरिकों की ओर से कनेक्शन मुहैया नहीं करवाने की पहले कभी शिकायत ही नहीं मिली । रसद विभाग इस बारे में आगे खोज-खबर कब लेगा यह तो पता नहीं लेकिन गैस वितरकों का यह कहना है कि उन तक कनेक्शन लेने के लिए स्कूलों ने गंभीर प्रयास ही नहीं किए।&lt;br /&gt;उधर, स्कूलों का तर्क है कि आवेदन करने के बाद वितरकों से कई बार सम्पर्क साधा गया किन्तु कनेक्शन देने में उन्होंने रूचि एवं तत्परता नहीं दर्शाई। रसोई गैस के अभाव में भोजन पकाना टेढी खीर साबित हो रहा है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;strong&gt;कब-कब जारी की राशि&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;शिक्षा विभाग ने रसोई गैस कनेक्शन के लिए मिड डे मील कार्यक्रम से जुडे 136 विद्यालयों के खातों में 1 अक्टूबर 2008 को पांच-पांच हजार रूपए के हिसाब से 6 लाख 80 हजार रूपए जमा करवाए थे। इस साल मार्च में 575 स्कूलों को 23 लाख रूपए जारी किए गए। वर्तमान में किसी भी स्कूल को गैस कनेक्शन नहीं मिल पाया है। कुछ विद्यालयों को छोडकर शेष विद्यालयों ने तो रसोई गैस पाने की दिशा में कदम ही नहीं बढाए हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;strong&gt;1231 स्कूलों में समस्या&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;जिले के 1 हजार 8 8 5 स्कूल में 2 लाख 933 विद्यार्थी मिड डे मील का पोषाहार पा रहे हैं। इनमें दस फीसदी स्कूलों ने अपने स्तर पर रसोई गैस की व्यवस्था कर रखी है जबकि 46 6 स्कूलों में अन्नपूर्णा सहकारी समितियो के माध्यम से पोषाहार पहुंचाया जा रहा है। शेष एक हजार 231 स्कूलों में शाला विकास प्रबंध समिति लकडी व गोबर के उपले से पोषाहार पकाने को मजबूर है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;strong&gt;जोखिम के साथ बीमारी भी&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;स्कूलों में चूल्हे पर लकडी व गोबर के उपलों से भोजन पकाने पर धूएं के कारण विद्यार्थियों का दम घुटता है। इससे विद्यार्थियो के बीमारियों की चपेट में आने की आशंका भी बनी रहती है। साथ ही पकाने के बाद चूल्हे में लकडियां जलती रहने के कारण छोटे ब"ाों का विशेष्ा ध्यान रखना पडता है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;strong&gt;यह होता है पकाना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कार्यक्रम के तहत कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को मध्यान अवकाश में भोजन परोसा जाता है। सप्ताह में चार दिन रोटी-सब्जी व दाल-रोटी तथा दो दिन मीठे या नमकीन चावल तथा दाल-खिचडी खिलाई जाती है।&lt;br /&gt;नवम्बर 2009 में कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। आज तक कनेक्शन नहीं मिला। एजेंसी का तर्क है कि कनेक्शन के दस्तावेज संभाग मुख्यालय बीकानेर भेज दिए गए। बीकानेर से कर्मचारी आकर कनेक्शन जारी करेंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-छगनलाल शर्मा, संस्था प्रधान, राउप्रावि नम्बर आठ, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;संस्थाओं को गैस कनेक्शन एग्जम्पटेड श्रेणी में दिया जाता है। जो संभाग स्तरीय ऑफिस से जारी किया जाएगा। करीब 25 विद्यालयों के मामले बीकानेर भिजवाए हुए हैं। स्कूलों को जल्द ही कनेक्शन दिलवाया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-श्यामसुन्दर बगडिया, संचालक, बगडिया गैस एजेंसी, चूरू&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;स्कूलों में रसोई गैस कनेक्शन नहीं मिलने की जानकारी आज ही बैठक में मिली है। एजेंसियों व शिक्षा अघिकारियों से इस संबंध में चर्चा कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-हरलाल सिंह, रसद अघिकारी, चूरू&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;गत शनिवार को गांव श्योपुरा के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया तो उपलों से पोषाहार पकाया जा रहा था। दो साल से गैस कनेक्शन का इंतजार है। इस संबंध में मंगलवार को आयुक्त को भी पत्र लिखा गया है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-युनूस अली, सहायक प्रभारी, मिड डे मील कार्यक्रम, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-930572122769795090?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/930572122769795090/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post_15.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/930572122769795090'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/930572122769795090'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post_15.html' title='बिना धुएं का खाना हुआ &apos;धुआं&apos;'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-2733879971561671592</id><published>2010-07-13T12:17:00.002+05:30</published><updated>2010-07-13T12:29:50.305+05:30</updated><title type='text'>एक बार बीमा तीन साल लाभ</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;गाय बीमा-भैंस बीमा योजना&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चूरू।&lt;/strong&gt; गाय और भैंस का बीमा करवाने के लिए पशुपालकों को विभाग के हर साल चक्कर नहीं लगाने पडेंगे। अब पशुओं का तीन साल तक का बीमा एक ही बार में करवाया जा सकेगा। यह सब चालू वित्तीय वर्ष से शुरू हुई गाय बीमा-भैंस बीमा योजना के तहत होगा। इससे पूर्व पशुपालक कामधेनू व भैंस बीमा योजना के अन्तर्गत पशुओं का एक बार में एक ही साल का बीमा करवा सकते थे।&lt;br /&gt;खास बात यह है कि योजना से अघिकतम पशुपालक लाभान्वित हो सकेंगे, क्योंकि पूर्व में एक वर्ष तक का बीमा होने पर दूसरे वर्ष का लक्ष्य भी उन्हीं पशुओं का बीमा करके पूर्ण कर दिया जाता था। अब तीन वर्ष तक का बीमा एक साथ होने पर बीमा का लक्ष्य पूरा करने के लिए हर वर्ष नए पशुओं का बीमा करना होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बीमा का लक्ष्य&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;राजस्थान लाइव स्टॉक डवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से लागू की गई योजना के अन्तर्गत चालू वित्तीय वर्ष के दौरान प्रदेशभर में 85 हजार पशुओं के बीमा का लक्ष्य रखा गया है। चूरू में तीन हजार व सीकर और झुंझुनूं में पांच-पांच हजार पशुओं का बीमा किया जाना है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बार-बार नहीं लेने पडेंगे प्रमाण पत्र&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पूर्व में पशुपालकों को बीमा करवाने के लिए प्रति वर्ष चिकित्सकों से पशु का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेना पडता था। अब तीन साल में एक ही बार लिए गए प्रमाण पत्र से काम चल सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सालभर का प्रीमियम बचेगा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नई योजना से पशुपालकों को आर्थिक लाभ भी होगा। पशुपालक एक साल के बीमा प्रीमियम की राशि बचा सकेंगे। पूर्व में गाय का बीमा कराने पर प्रीमियम के रूप में प्रतिवर्ष 300 रूपए तथा भैंस का बीमा कराने पर प्रतिवर्ष 600 रूपए जमा कराने पडते थे। अब तीन साल का बीमा प्रीमियम क्रमश: 600 व 1200 रूपए एक साथ एक ही बार जमा होंगे।&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;योजना के तहत पशुओं का बीमा करना शुरू कर दिया है। योजना से किसानों को कई लाभ होंगे। एक बार बीमा करवाने के बाद तीन साल तक चिंता मुक्त हो सकेेगे। जिले में चालू वित्तीय वर्ष में तीन हजार गाय व भैंस का बीमा करना है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-विजय मोहन चौधरी, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-2733879971561671592?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/2733879971561671592/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post_13.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2733879971561671592'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2733879971561671592'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post_13.html' title='एक बार बीमा तीन साल लाभ'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-1705938176058589704</id><published>2010-07-12T14:18:00.000+05:30</published><updated>2010-12-12T14:32:56.241+05:30</updated><title type='text'>कल्याण की राह में अधिकारी रोड़ा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;[सशस्त्र झण्डा दिवस आज] झण्डा दिवस के ध्वज व स्टीकरों के लाखों बकाया&lt;br /&gt;चूरू। शहीदों की शहादत पर गर्व महसूस करने वाले अधिकारी ही उनके परिवार और आश्रितों के कल्याण की राह में बाधा बने हुए हैं। बात भले ही गले नहीं उतर रही हो, परन्तु सरकारी कार्यालयों में धूल फांकते सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के स्टीकर और ध्वज देख इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। आलम यह है कि अधिकांश अधिकारी शहीदों के आश्रितों को संभल प्रदान करने मेंं कतई गंभीर नहीं है। झण्डा दिवस के मौके पर पत्रिका टीम ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय के रिकॉर्ड खंगाले तब अधिकारियों का यह दूसरा चेहरा सामने आया।&lt;br /&gt;जिलेभर में 63 अधिकारी शहीदों के आश्रितों के कल्याण के 11 लाख 62 हजार 750 रुपयों पर कुंडली मारे बैठे हैं। अधिकारियों को इस राशि के स्टीकर और ध्वज 1996 से 2009 के दौरान वितरित किए गए थे। ऐसे में अधिकारियों के भरोसे शहीदों के परिवारों का मनोबल बढ़ाने की सोचना बेमानी होगा। हालांकि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी जिलेभर के 96 अधिकारियों को 100 से 6000 स्टीकर व ध्वज वितरित किए जाएंगे। लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ अगर कोई कदम नहीं उठाया गया तो इस साल के स्टीकरों और ध्वज को भी सरकारी कार्यालयों में धूल फांकने में देर नहीं लगेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बढ़ता बकाया का आंकड़ा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वर्ष ---------बकाया&lt;br /&gt;1996-------- 2000&lt;br /&gt;1997-------- 2000&lt;br /&gt;1998-------- 500&lt;br /&gt;1999-------- 2300&lt;br /&gt;2000-------- 1200&lt;br /&gt;2001-------- 400&lt;br /&gt;2003-------- 13000&lt;br /&gt;2004-------- 3000&lt;br /&gt;2005-------- 5700&lt;br /&gt;2006-------- 26920&lt;br /&gt;2007-------- 43600&lt;br /&gt;2008-------- 476800&lt;br /&gt;2009-------- 585330&lt;br /&gt;कुल----------11,62,750&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सर्वाधिक लापरवाह डीटीओ&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कल्याण की राह में रोड़ा बनने वाले अधिकारियों में बकाया के लिहाज से जिला परिवहन अधिकारी पहले पायदान पर हैं। डीटीओ पर वर्ष 2008 के एक लाख 97 हजार रुपए तथा वर्ष 2009 के दो लाख 25 हजार रुपए बकाया हैं। पीएचईडी के एसई व एसपी पर बकाया का आंकड़ा एक लाख को पार कर चुका है। बकाया के मामले में अन्य अधिकारियों की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या झण्डा दिवस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;देश की आन, बान और शान के लिए जान की बाजी लगाने वाले शहीद की याद और सेवारत सैनिकों के साथ राष्ट्र की एकजुटता दर्शाने के उदे्श्य से प्रतिवर्ष सात दिसम्बर को देशभर में झण्डा दिवस मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न विभागों को विशेष प्रकार के ध्वज व स्टीकर वितरित किए जाते हैं। जिन्हें वाहनों पर लगाकर या जन समूह को वितरित कर राशि जुटाई जाती है। यह राशि जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से अमल गमैटेड फण्ड में भेजी जाती है। जिसका उपयोग युद्ध विकलांग एवं शहीदों के परिवारों का पुर्नवास, सेवानिवृत व सेवारत सैनिकों एवं उनके परिवारों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यूं जमा होगी राशि&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इस वर्ष प्रति स्टीकर दस रुपए तथा प्रति वाहन पताका (ध्वज) पचास रुपए निर्धारित किए गए हैं। स्टीकर व ध्वज से एकत्रित की गई राशि अधिकारियों को नकद, ड्राफ्ट या चेक के माध्यम से जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय में जनवरी तक जमा करानी होगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अधिकारियों के वेतन में से काटेंगे&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इस वर्ष स्टीकर एवं ध्वज का वितरण करने के एक माह ही इसकी समीक्षा की जाएगी। वर्षों पुराने बकाया की भरपाई संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन में से काटकर करेंगे। इस बार बचे हुए स्टीकर व ध्वज को कार्यालय में रखने की बजाय सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय वापस लौटा देंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-विकास एस भाले, जिला कलक्टर एवं जिला सैनिक बोर्ड के अध्यक्ष, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-1705938176058589704?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/1705938176058589704/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post_12.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1705938176058589704'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1705938176058589704'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post_12.html' title='कल्याण की राह में अधिकारी रोड़ा'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-2135189347208476418</id><published>2010-07-12T10:26:00.003+05:30</published><updated>2010-07-12T10:45:07.188+05:30</updated><title type='text'>सिमटेंगे बिखरे गांव</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;पंचायत स्तर पर रायशुमारी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;विश्वनाथ सैनी @ चूरू।&lt;/strong&gt; एक होकर भी अनेक नाम से पहचाने जाने वाले जिले के कई राजस्व गांवों को एक नाम और एक पहचान दी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर उपजे इस विचार को हकीकत में बदलने के लिए पंचायत स्तर पर रायशुमारी शुरू हो चुकी है। ग्रामीणों की सर्व सहमति बनी और राजनीतिक स्वीकृति मिली तो इन गांवों की कायाकल्प हो जाएगी। जिले के करीब 148 राजस्व गांव व्यवहारिक तौर पर 64 गांव ही हैं। छोटे-छोटे भू-भागों में बंटे होने तथा जाति व गौत्र विशेष के नाम से पैतृक पहचान पाने के कारण ये गांव एक होकर भी अनेक बने हुए हैं।&lt;br /&gt;उदाहरण के तौर पर चूरू तहसील का गांव धीरासर रिकॉर्ड में धीरासर बीकान, धीरासर शेखावतान व धीरासर चारणान नाम से दर्ज है। कई गांव दिशा के नाम पर उतरादा व दिखनादा, आथुना व आगुना जैसे नामों में विभक्त हैं। इसी प्रकार कुछ गांव क्षेत्रफल के लिहाज से बैरासर बडा, छोटा, व मझला में बंट गए। एकीकरण की प्रक्रिया में गांव धीरासर के विभाज्य नाम बीकान, शेखावतान व चारणान हटा दिए जाएंगे। ऎसे ही बडा, छोटा हटा कर गांव बैरासर नाम से ही जाना जाएगा। राजस्व रिकॉर्ड में गांव का नाम एक ही रहेगा। भविष्य में गांव के मूल नाम के आधार पर ही उसका जमाबंदी रिकॉर्ड प्राप्त किया जा सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;देंगे मिश्रित नाम &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जिन राजस्व गांवों का नाम गांव के वास्तविक नाम से मिलता-जुलता नहीं है। उन्हें एकीकरण में एक मिश्रित नाम दिया जाएगा। जैसे सुजानगढ तहसील के गांव देवाणी में शामिल राजस्व गांव रामपुर को मर्ज करने पर गांव का नया नाम देवाणी-रामपुर होगा। इस तरह की स्थिति का सामना रतननगर, छापर, बीदासर व सुजानगढ नगरपालिका क्षेत्र में शामिल राजस्व गांवों के नए नाम को लेकर भी होगी। रतननगर में थैलासर, छापर में पाण्डोराई, नरबदाबास, चेतावास, बीड छापर, बीदासर में दडीबा व चक दडीबा आदि ऎसे ही राजस्व गांव शामिल हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या रहेगी प्रक्रिया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;गांवों के एकीकरण के संबंध में ग्रामीणों की राय जानने के लिए संबंघित पंचायतों को पत्र भेजे हैं। पंचायतों से सहमति मिलने के बाद एकीकरण के प्रस्ताव राजस्व मण्डल अजमेर को भिजवाए जाएंगे। जहां से प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। इस पर राजनीतिक चिंतन व मंथन होने पर सरकार की ओर से अघिसूचना जारी होगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;होंगे लाभ&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;-आबादी के हिसाब से गांव का कद बढेगा&lt;br /&gt;-गांव को भविष्य में बैंकिंग व संचार सुविधाएं मिल सकेंगी&lt;br /&gt;-पानी, बिजली, शिक्षा, चिकित्सा सुविधाएं होंगी बेहतर&lt;br /&gt;-प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुदृढ बनाई जा सकेंगी&lt;br /&gt;-सरकारी योजनाओं का होगा प्रभावी क्रियान्वयन&lt;br /&gt;-यातायात व आवागमन साधनों में होगा इजाफा&lt;br /&gt;-गांव नगरपालिका बनने के कगार पर पहुंच जाएगा&lt;br /&gt;-सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ होगी&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कुछ नुकसान भी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;- राजस्व गांव के नाम मिलने वाली अतिरिक्त सुविधा छिनेगी&lt;br /&gt;-राजस्व जमाबंदी का रिकॉर्ड एक ही स्थान पर रहेगा&lt;br /&gt;-सरकारी कर्मचारियों की संख्या कम होगी&lt;br /&gt;---------&lt;br /&gt;गांवों के एकीकरण की दिशा में कदम बढा दिए हैं। 64 वास्तविक गांवों में उनके मिलते-जुलते नामों के 148 राजस्व गांवों को एकीकरण के लिए चिह्नित किया है। पंचायतों को इस संबंध में पत्र भेजे हैं। पंचायतों की सहमति मिलते ही राजस्व मण्डल को एकीकरण के प्रस्ताव भेजेंगे। इससे ग्रामीणों को नुकसान की तुलना में फायदे अघिक होंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-2135189347208476418?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/2135189347208476418/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2135189347208476418'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2135189347208476418'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='सिमटेंगे बिखरे गांव'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-8960429686547065744</id><published>2010-06-23T14:24:00.004+05:30</published><updated>2010-06-29T10:45:31.550+05:30</updated><title type='text'>ऊपर वाले से जोड़ लो कनेक्शन</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;दोस्तों,&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; बचपन में हमने दो ही कनेक्शनों का नाम सुना था। एक पानी का और दूसरा बिजली का। पानी के कनेक्शन को लेकर घर में हल्ला तब होता था जब नल से पानी की बजाय हवा आकर रह जाती थी। उस वक्त बाबा पानी महकमे के अधिकारियों को न केवल खूब खरी-खरी सुनाते बल्कि पानी का कनेक्शन ही बदलने तक का मानस बना लेते थे।&lt;br /&gt;बिजली का कनेक्शन तो हर चार-छह महीने बाद घर में बवाल मचा ही देता था। सैकड़ों में आने वाला बिजली का बिल अचानक हजारों में आता देख परिवार में हर किसी को जोर का झटका धीरे से लगता। घर में तीन लट्टू और एक पंखे पर खर्च की गई बिजली के पेटे डेढ़ हजार से अधिक का बिल आने पर बाबा बिल की राशि में संशोधन कराने के लिए महकमे के एईएन, जेईएन व कभी-कभी तो एसई तक पर भड़ास निकाल आते। अधिकारी एक ही जवाब देते कि आपका विद्युत मीटर धीमे चलता है। पिछले कई माह के बिलों की राशि इस बार जुड़कर आ गई। ऐसा वाकया कई बार होने पर बाबा ने एक बार तो बिजली का कनेक्शन ही कटवा दिया था। हालांकि बाद में बिल में संशोधन भी हो गया और हमारा घर रोशन भी।&lt;br /&gt;खैर, छोड़ो उस वक्त हम निकर पहना करते थे, लेकिन पतलून पहननी शुरू की तब एक और कनेक्शन का नाम सुना। वो था टेलीफोन का कनेक्शन। मोहल्ले में एक फैक्ट्री मालिक ने पहली बार टेलीफोन का कनेक्शन लिया तो उन्होंने हर घर में मिठाई बांटी। वो बात &lt;span class=""&gt;बात में&lt;/span&gt; ऐसा महसूस कराते कि पूरी दुनिया से उनका घर बैठे कनेक्शन जुड़ गया। मोहल्ले में किसी के भाई, बेटे या रिश्तेदार का उनके टेलीफोन पर फोन आ जाता तो वे ऐसे बुलाने जाते जैसे फोन नहीं बल्कि वो व्यक्ति खुद चलकर उनसे बात करने आया हो।&lt;br /&gt;भाई, मुद्दे की बात तो यह है कि अल्ला की मेहरबानी से हम पढ़ लिख लिए और दो पैसे कमाने भी लगे। मगर पिछले दिनों कालू कसाई की छोरी को छेड़ने के एक झूठे मामले में हम फंस गए। तब हमें हमारे तीन साल पुराने एक भायले ने एक और कनेक्शन के बारें में बताया। और वो था डीटीजी। पड़ गए ना सोच में। डीटीजी यानि डायरेक्ट टू गॉड।&lt;br /&gt;जी, हां दोस्तों जिसने डीटीजी को जान लिया उसने मानों जिंदगी की आधी जंग जीत ली। ऊपर वाले से अगर सीधा जुड़ाव हो तो हमारी बिजली-पानी की तो क्या जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानी को हल होते देर नहीं लगती। बशर्त उस अदृश्य शक्ति से हमारा कनेक्शन मजबूत हो यानि उसके प्रति अटूट आस्था और श्रद्धा में कोई कमी नहीं हो। उसने हमारे जीवन में जो होना है और जो ना होना है...वह पहले ही तय कर रखा है। किसी अनहोनी की आशंका में दिल घबरा जाए तो सब कुछ ऊपर वाले पर छोड़ दो। और इस विश्वास के साथ आगे बढ़ जाओ कि लाइफ में जो होगा अच्छा होगा...और जो नहीं हो रहा वो भी अच्छा हो रहा है...हमारे साथ कभी गलत नहीं होगा क्योंकि ऊपर वाले के साथ अपना कनेक्शन अच्छा है।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-8960429686547065744?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/8960429686547065744/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_23.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8960429686547065744'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8960429686547065744'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_23.html' title='ऊपर वाले से जोड़ लो कनेक्शन'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-7632876608845658123</id><published>2010-06-17T12:20:00.000+05:30</published><updated>2010-06-17T12:26:04.505+05:30</updated><title type='text'>एक शाम ग्रामीणों के नाम</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;पंचायतों में लगेगी चौपाल, अधिकारी सुनेंगे गांव की समस्या&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चूरू. गांव की मुख्य समस्याओं के समाधान को लेकर ग्रामीणों को अब अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, क्योंकि अधिकारी खुद ग्रामीणों के बीच एक शाम बिताकर समस्याओं का समाधान करेंगे। इसके लिए प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायत मुख्यालय पर शाम को चौपाल लगाई जाएगी। गांव की अधिकांश समस्याओं का समाधान मौके पर ही होगा जबकि शेष समस्याओं को सरकार के पास भेजा जाएगा।&lt;br /&gt;आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले की कुल 249 ग्राम पंचायतों में से पांच-सात का एक समूह बनाया जाएगा। प्रत्येक समूह पर एक दिन शाम को चौपाल लगाकर अधिकारी ग्रामीणों से रू-ब-रू होंगे। चौपाल का नेतृत्व उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार व नायब तहसीलदार में से कोई एक करेगा। इनके अलावा चौपाल में बिजली, पानी, चिकित्सा, नरेगा व शिक्षा विभाग आदि के अधिकारी तथा सरपंच व ग्राम सेवक और पटवारी भी मौजूद रहेंगे।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दिन में करेंगे समीक्षा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चौपाल से पूर्व दिन में विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी गांव में जाकर योजनाओं की समीक्षा करेंगे। शाम को चौपाल में ग्रामीणों के साथ समस्याओं के समाधान पर विस्तार से चर्चा करेंगे। नरेगा श्रमिकों को काम नहीं मिलने, भुगतान में देरी होने, पेयजल किल्लत, विद्यालय में स्टाफ लगाने जैसी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाएगा जबकि विद्यालय, स्वास्थ्य केन्द्र आदि की क्रमोन्नति के प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवाए जाएंगे।&lt;br /&gt;---&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इनका कहना है...&lt;/strong&gt;गांवों में चौपाल लगाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। दो ग्राम पंचायतों का कार्यक्रम भी तय कर लिया है। जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में चौपाल लगाएंगे। इससे गांव की समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-डा.केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-7632876608845658123?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/7632876608845658123/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_17.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7632876608845658123'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7632876608845658123'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_17.html' title='एक शाम ग्रामीणों के नाम'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-8147205396245834939</id><published>2010-06-16T21:19:00.002+05:30</published><updated>2010-06-16T21:38:34.421+05:30</updated><title type='text'>गड़बड़ी के सारे सुराख बंद</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;राज्य में 15 अगस्त से लागू होगा ई-मस्टररोल&lt;br /&gt;सबसे पहले चूरू ने किया था जारी&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;चूरू। महात्मा गांधी रोजगार गारण्टी योजना में मस्टररोल के जरिए होने वाली गड़बड़ी के सारे सुराख जल्द ही बंद हो जाएंगे। अब मस्टररोल में ना तो श्रमिकों के फर्जी नाम लिखे जा सकेंगे और ना ही हाजिरी में कांट-छांट की जा सकेगी। यह सब ई-मस्टररोल से संभव होगा। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग आगामी 15 अगस्त से प्रदेशभर में ई-मस्टररोल व्यवस्था लागू करने जा रहा है।&lt;br /&gt;राज्य में पहली बार ई-मस्टररोल गत वर्ष सितम्बर में चूरू जिला प्रशासन की ओर से अपने सुजानगढ़ ब्लॉक में जारी किया गया था। चूरू जिले में ई-मस्टररोल की सफलता के बाद विभाग ने इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू करने का निर्णय किया है। विभाग ने ग्राम सेवक, ग्राम रोजगार सहायक, मेटों व अन्य संबंधित व्यक्तियों को ई-मस्टररोल व्यवस्था का प्रशिक्षण देने के लिए समस्त जिलों को मार्गदर्शिका भी भेजी है।&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अक्टूबर से होगा अनिवार्य&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;महानरेगा में 16 अगस्त से शुरू होने वाले पखवाड़़े से जिले की एक पंचायत समिति में ई-मस्टररोल जारी करना होगा। वहां पर पायलट के रूप में यह व्यवस्था 15 सितम्बर तक चलेगी। इस अवधि के अनुभव के आधार पर एक अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े से सम्पूर्ण जिले में ई-मस्टररोल जारी होंगे।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यूं कसी जाएगी लगाम&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;फिलहाल नरेगा में श्रमिकों की मांग के आधार पर पंचायत समिति कार्यालय से कार्य का नाम व अवधि अंकित कर मस्टररोल जारी किए जाते हैं। जिनमें मेट मस्टररोल में श्रमिकों के नाम दर्ज कर हाजिरी भरता है। मस्टररोल में श्रमिकों के फर्जी नाम व हाजिरी में गड़बड़ी कर नरेगा की राशि डकारने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। ई-मस्टररोल भी साधारण मस्टररोल की तरह ही होगा, लेकिन इसे जारी करते समय श्रमिक का नाम, परिवार का बीपीएल नम्बर, मुखिया का नाम और काम की अवधि कम्प्यूटर से दर्ज की जाएगी।&lt;br /&gt;---&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बैकलॉग भी नहीं रहेगा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;ई-मस्टररोल जारी होने से मैनेजमेंट इंर्फोमेशन सिस्टम (एमआईएस) में मस्टररोल डाटा फीडिंग का बैकलॉग भी नहीं रहेगा। साधारण मस्टररोल से कम्प्यूटर में श्रमिकों के तमाम डाटा फीड करने में करीब डेढ़ माह तक बैकलॉग रहता है। जिससे नरेगा में बजट जारी होने में देरी होती है। ई-मस्टररोल में श्रमिकों की अधिकांश सूचनाएं पहले से ही दर्ज होने के कारण पखवाड़ा पूर्ण होने के दूसरे ही दिन एमआईएस में डाटा फीड किए जा सकेंगे।&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;महानरेगा में ई-मस्टररोल लागू करने के संबंध में समस्त जिलों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अगस्त व सितम्बर में इसे पायलट के रूप में लागू कर एक अक्टूबर से अनिवार्य किया जाएगा।इससे निश्चित रूप से मस्टररोल में की जाने वाले गड़बडिय़ां रोकी जा सकेगी।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-तन्मय कुमार, आयुक्त, महानरेगा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मस्टररोल के माध्यम से नरेगा में गड़बड़ी की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए पिछले साल सितम्बर में चूरू ने सुजानगढ़ ब्लॉक में राज्य में पहला ई-मस्टररोल जारी किया था। बाद में इसका सॉफ्टवेयर जोधपुर को भी उपलब्ध करवाया गया। अब यह व्यवस्था प्रदेशभर में लागू होने जा रही है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-डा.केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-8147205396245834939?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/8147205396245834939/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_16.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8147205396245834939'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8147205396245834939'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_16.html' title='गड़बड़ी के सारे सुराख बंद'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-7922816052813823685</id><published>2010-06-15T20:02:00.002+05:30</published><updated>2010-06-15T20:12:39.749+05:30</updated><title type='text'>पढाई होगी रूचिकर</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;चूरू । कला संकाय में इतिहास हो या विज्ञान में शरीर की संरचना या फिर वाणिज्य में वर्षो पुरानी लेखा पद्धतियां। सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थी इन सबके बारे में किताबों में पढने के साथ कम्प्यूटर पर इनसे संबंघित फोटो, विजुअल, डायग्राम व ग्राफ आदि भी देख सकेंगे।शिक्षा निदेशालय ने माध्यमिक स्तर के हजारों विद्यालयों में नए सत्र की पढाई के साथ इस नई व्यवस्था को शुरू करने की तैयारी कर ली है।&lt;br /&gt;राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत नई व्यवस्था के प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रस्तावों को केन्द्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद विद्यालयों में नई व्यवस्था से संबंघित सामग्री खरीदी जाएगी। इसमें विभिन्न विषयों से संबंघित सीडी शामिल हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;शुरूआत साढे चार हजार स्कूलों से&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नई व्यवस्था की शुरूआत प्रदेश के उन साढे चार हजार माध्यमिक विद्यालयों से होगी, जिनमें कम्प्यूटर की सुविधा उपलब्ध है। प्रदेश में फिलहाल ढाई हजार सरकारी विद्यालय कम्प्यूटर शिक्षा से जुडे हुए हैं। आगामी दो-ढाई माह में आईसीटी प्रोजेक्ट के जरिए दो हजार विद्यालयों को कम्प्यूटर शिक्षा से और जोडा जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;अपने स्तर पर खरीदेंगे सामग्री&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;निदेशालय की ओर से संबंघित विद्यालयों को नई व्यवस्था में शामिल किए गए विषय की सूची उपलब्ध करवाई जाएगी। विद्यालय प्रबंधन को अपने स्तर पर कम्प्यूटर से पढाई की सामग्री खरीदनी होगी। इसमें पत्र-पत्रिकाओं के लिए उपलब्ध करवाए जाने वाला बजट काम में लिया जा सकेगा।&lt;br /&gt;------&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;साढे चार हजार सरकारी विद्यालयों में तीनों संकायों में पढाई की नई व्यवस्था लागू करने की तैयारियां शुरू कर दी है। नए सत्र से इसकी शुरूआत की उम्मीद है। इससे विद्यार्थी संबंघित विषय को रूचि लेकर समझ सकेंगे। साथ ही कम्प्यूटर का भी ज्ञान हो जाएगा।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;-भास्कर ए सावंत, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-7922816052813823685?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/7922816052813823685/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_15.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7922816052813823685'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7922816052813823685'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_15.html' title='पढाई होगी रूचिकर'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-5163665982009999434</id><published>2010-06-14T14:01:00.002+05:30</published><updated>2010-06-14T14:13:13.445+05:30</updated><title type='text'>लिंग्वा लैब सिखाएगी अंगे्रजी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;शिक्षा संभाग मुख्यालयों पर होगी सुविधा&lt;br /&gt;निदेशालय ने बनाया प्रस्ताव&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;चूरू।&lt;/strong&gt; नए शिक्षा सत्र में सरकारी विद्यालयों के बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकेंगे। इसके लिए बच्चों को अलग से इंग्लिश स्पीकिंग का कोर्स करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सब लिंग्वा लैब से संभव होगा। शिक्षा निदेशालय ने शिक्षा संभाग मुख्यालय पर एक-एक लिंग्वा लैब खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत खुलने वाली लिंग्वा लैबों के प्रस्तावों को अंतिम रूप दे दिया गया है। तीस जून से पूर्व समस्त प्रस्ताव स्वीकृति के लिए केन्द्र सरकार को भिजवाए जाएंगे। सब कुछ ठीक रहा तो नए शिक्षा सत्र में सभी लिंग्वा लैब शुरू हो जाएंगी। प्रत्येक लैब में एक साथ कम से कम तीस विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।&lt;br /&gt;------&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;राज्य में सात &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;लैब&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;शिक्षा संभाग मुख्यालय चूरू, जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर व अजमेर पर स्थित माध्यमिक विद्यालय में लिंग्वा लैब खोली जाएंगी। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही विद्यालय का चयन किया जाएगा। लैब में संबंधित विद्यालय समेत आस-पास के कई सरकारी विद्यालयों के बच्चे अंगे्रजी बोलने का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंंगे।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ऐसे सही होगा &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;उच्चारण &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;लैब में जरूरत के हिसाब से विभिन्न विशेष मशीनें उपलब्ध करवाई जाएगी। जिनमें रिकॉर्डर की भी सुविधा होगी। विद्यार्थी मशीन के सामने बैठकर अंग्रेजी में बोले गए शब्दों व वाक्यों को हैडफोन के जरिए फिर से सुन सकेंगे। साथ ही मशीन अंग्रेजी में बात भी करेगी, जिससे विद्यार्थी अपना उच्चारण सुधार सकेंगे।&lt;br /&gt;------&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इनका कहना...&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;शिक्षा में नवाचारों के तहत लिंग्वा लैब खोलने की योजना तैयार कर ली है। लैब के प्रस्ताव इसी माह केन्द्र सरकार को भेजे जाएंगे। नए शिक्षा सत्र से लैबों की शुरुआत की उम्मीद है। योजना सफल रही तो अन्य विद्यालयों में भी इसे लागू करने पर विचार करेंगे। &lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;strong&gt;-भास्कर ए सावंत, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-5163665982009999434?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/5163665982009999434/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_14.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/5163665982009999434'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/5163665982009999434'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_14.html' title='लिंग्वा लैब सिखाएगी अंगे्रजी'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-9216325885898165520</id><published>2010-06-06T11:52:00.005+05:30</published><updated>2010-06-06T12:47:35.597+05:30</updated><title type='text'>वन्य जीवों को भाए धोरे</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;वन्यजीव गणना-2010 : आंकड़ा दस हजार के पार&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;विश्वनाथ सैनी @ चूरू। थळी की आबो-हवा वन प्राणियों को खासी रास आ रही है। यही कारण है कि धोरों में वन्यजीवों का कुनबा बढ़ गया है। जिले के वन क्षेत्र में वन प्राणियों का आंकड़ा दस हजार पार हो चुका है।&lt;br /&gt;इस की वन्यजीव गणना में गत वर्ष की तुलना में 900 से अधिक नए वन्यजीव सामने आए हैं। जंगली बिल्ली के अलावा किसी भी &lt;span class=""&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TAtIt5UAttI/AAAAAAAAAiI/vS9sf4qrYGs/s1600/ch0203cm.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5479553324942407378" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 278px; CURSOR: hand; HEIGHT: 217px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TAtIt5UAttI/AAAAAAAAAiI/vS9sf4qrYGs/s320/ch0203cm.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;वन&lt;/span&gt; प्राणी की संख्या में कमी नहीं आई है। सबसे अधिक इजाफा साण्डा की संख्या में हुआ है।&lt;br /&gt;आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले के कुल 71 सौ हैक्टेयर वन क्षेत्र में दस हजार 336 वन्यजीव विचरण कर रहे हैं। इनमें 934 वन्यजीव इस बार बढ़े हैं। इस साल 28 व 29 अप्रेल को जिले में वन्यजीवों को गिना गया था।&lt;br /&gt;वन क्षेत्र में जलस्रोतों व वन्यजीवों के आने-जाने के मुख्य रास्तों पर वनकर्मियों ने चौबीसों घंटे नजर रख गणना की थी। वन्यजीव गणना की रिपोर्ट को विभाग ने हाल ही अंतिम रूप दिया है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;अभयारण्य में आधे से ज्यादा&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;जिले के कुल वन क्षेत्र के करीब दस फीसदी हिस्से में फैले विश्व प्रसिद्ध कृष्ण मृग तालछापर अभयारण्य में आधे से ज्यादा वन्य जीवों ने डेरा डाल रखा है। वन अधिकारियों की मानें तो अभयारण्य व उसके आस-पास के क्षेत्र में छह हजार 329 विचरण करते देखे गए हैं। अभ्यारण्य में इस बार कृष्ण मृगों की संख्या 1910 से बढ़कर 2025 हो गई है। कृष्ण मृगों की संख्या और भी बढ़ सकती थी, लेकिन गत वर्ष मई के अंतिम सप्ताह में बारिश व तेज तूफान के कारण छह दर्जन से अधिक कृष्ण मृग अकाल मौत का शिकार हो गए। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;बढऩे के कारण&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वन अधिकारी जिले में वन्यजीवों की संख्या बढऩे को अच्छा संकेत मान रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो वन क्षेत्र में सघन पौधरोपण, जन जागरुकता एवं वनकर्मियों की सतर्कता से वनजीव खुद को पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करने लगे हैं। इस बार ईको रिस्टोरेशन के तहत भी वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के लिए विशेष कार्य करवाए जाने की कवायद की जा रही है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;आंकड़ों की जुबानी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वन्यजीव---------2009--------- बढ़े&lt;br /&gt;काले हरिण-------1910---------115&lt;br /&gt;मरु लोमड़ी-------116-----------०8&lt;br /&gt;चिंकारा-----------2663---------42&lt;br /&gt;नीलगाय---------976------------60&lt;br /&gt;मरु &lt;span class=""&gt;बिल्ली------&lt;/span&gt;०4--------------15&lt;br /&gt;गिद्ध-------------42-------------०6&lt;br /&gt;चील/बाज----------71--------- 70&lt;br /&gt;साण्डा---------3489---------620&lt;br /&gt;जंगली बिल्ली131----------- ०2 (घटे)&lt;br /&gt;-------&lt;br /&gt;वन्यजीवों की संख्या बढऩा अच्छा संकेत है। विभाग भी यही प्रयास करता है कि वन्यजीवों को जिले में अनुकूल वातावरण मिले। इस बार ईको रिस्टोरेशन के तहत भी वन क्षेत्र में वन्यजीवों को पानी उपलब्ध करवाने समेत कई काम करवाए जाने प्रस्तावित हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-केसी शर्मा, डीएफओ, चूरू&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-9216325885898165520?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/9216325885898165520/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_06.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/9216325885898165520'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/9216325885898165520'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post_06.html' title='वन्य जीवों को भाए धोरे'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TAtIt5UAttI/AAAAAAAAAiI/vS9sf4qrYGs/s72-c/ch0203cm.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-3838048421265478119</id><published>2010-06-02T14:11:00.002+05:30</published><updated>2010-06-06T18:03:43.599+05:30</updated><title type='text'>सशक्तीकरण खुद से शुरू</title><content type='html'>&lt;u&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;राजस्थान के चूरू में पैदा हुई मंजु राजपाल अभी भीलवाडा जिले की कलेक्टर हैं। अपने बेहतरीन काम के बलबूते बेस्ट कलेक्टर का अवार्ड पाने वाली मंजु से खास बातचीत।&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/u&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TAYcir0dErI/AAAAAAAAAh4/1VDEMnLhm8I/s1600/prayagra.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5478097378946650802" style="WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 254px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TAYcir0dErI/AAAAAAAAAh4/1VDEMnLhm8I/s320/prayagra.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या बचपन से ही आईएएस बनने का ख्वाब था&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;मैं पढाई में बचपन से होनहार थी। तभी प्रशासनिक सेवा में जाना तय कर लिया था। पोस्ट गे्रजुएट (अर्थशास्त्र) में गोल्ड मैडल हासिल किया। इसके बाद कभी किसी दूसरे क्षेत्र के बारे में सोचा तक नहीं। मैंने ठान लिया था कि प्रशासनिक सेवा में जाकर रहूंगी। पहली बार आरएएस बनी। फिर आईआरएस और उसके बाद छठी रैंक हासिल करके आईएएस बनने का ख्वाब पूरा हुआ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सपनों को पूरा करने में परिवार की मदद।&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;परिवार का सपोर्ट नहीं मिलता तो शायद यहां नहीं होती। हमारे परिवार में लडके इतना नहीं पढ पाए, लेकिन हम लडकियों ने पढकर आगे बढना चाहा तो सबने हौसला बढाया। मैंने सिविल परीक्षा की तैयारी चूरू जैसे छोटे शहर में रहकर की। यह सब परिवार की सोच और सहयोग से ही मुमकिन हुआ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के दौरान कोई मुश्किल क्षण।&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डूंगरपुर में कलेक्टर रहते हुए (2006 में) मैंने जिन चुनौतियों सामना किया, वो आज भी स्मृतियों में है। पूरा इलाका बाढ के पानी से घिर गया था। चारों ओर हाहाकार मच गया। लोग डूब रहे थे। उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था। उच्च अघिकारियों से हमारा संपर्क टूट चुका था। उस दौरान बाढ पीडितों को चिकित्सा और राशन सुविधा मुहैया करवाने के साथ-साथ उन्हें यकीन दिलाना जरूरी था कि प्रशासन उनके साथ है। हमने रातों-रात सारी व्यवस्था दुरूस्त की। पीडितों तक समय पर भोजन सामग्री पहुुंचाई और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फील्ड में ज्यादातर लोगों की क्या मांगें रहती हैं&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;लोगों की मांगें क्षेत्र विशेष निर्भर पर करती हैं। भीलवाडा में रोजगार की कोई कमी नहीं है, मगर यहां लोग पानी को लेकर सबसे अघिक परेशान रहते हैं। डूंगरपुर में सबसे बडी समस्या रोजगार की थी। सीकर में लोग शिक्षित हैं। वहां लोगों में प्रशासनिक सिस्टम को लेकर अच्छी समझ है। यही कारण है कि सीकर जिले में लोग कोई विशेष्ा मांग करने की बजाय सिस्टम में बदलाव चाहते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;प्रशासनिक काम के बीच जनप्रतिनिघियों के बेवजह दखल के बारे में राय।&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इस मामले में अब तक भाग्यशाली हूं। कहीं भी इस तरह की समस्या का सामना नहीं करना पडा। मेरा मानना है कि जनता की पहली पहुंच जनप्रतिनिघि हंै। जनता की समस्या प्रशासन के पास चाहे सीधी आए या जनप्रतिनिघि के माध्यम से, प्रशासन को इसे अपने काम में दखलअंदाजी नहीं मानना चाहिए। वैसे भी प्रशासन का लक्ष्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है। इस बीच जनप्रतिनिघियों का सुझाव और मार्गदर्शन मिले तो बेहतर होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जीवन की सबसे बडी खुशी।&lt;br /&gt;करीब चार साल पहले डूंगरपुर में एक साथ दो से ढाई लाख लोगों को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से रोजगार दिलाया तो बडी खुशी हुई। दरअसल डूंगरपुर ट्राइबल एरिया है। वहां रोजगार काफी कम था। लोग पलायन करने को मजबूर थे, लेकिन अघिक पढे-लिखे नहीं होने के कारण दूसरों शहरों में भी अच्छा रोजगार नहीं मिल पा रहा था। मुझे खुशी इस बात की है कि डूंगरपुर में नरेगा की शुरूआत मेरे समय में हुई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महिलाओं से क्या कहना चाहेंगी&lt;br /&gt;महिलाओं को तय करना चाहिए कि जिन कठिन परिस्थितियों से उन्हें गुजरना पडा है, उस स्थिति से उनकी बेटी को न गुजरना पडे। इसका एकमात्र रास्ता शिक्षा है। शिक्षा से ही महिलाएं आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बन सकती हैं। वैसे भी सशक्तीकरण खुद से आता है। बाल विवाह और अशिक्षा महिलाओं के लिए सबसे बडी चुनौतियां हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-3838048421265478119?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/3838048421265478119/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/3838048421265478119'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/3838048421265478119'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/06/blog-post.html' title='सशक्तीकरण खुद से शुरू'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TAYcir0dErI/AAAAAAAAAh4/1VDEMnLhm8I/s72-c/prayagra.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-868545105359870042</id><published>2010-05-29T12:20:00.006+05:30</published><updated>2010-05-30T12:02:05.576+05:30</updated><title type='text'>'गजलर' बुझाएंगे प्यास</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;पांच स्थानों का चयन, सालभर मिल सकेगा पानी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;विश्वनाथ सैनी @ चूरू।&lt;br /&gt;वन्यजीवों को भीषण गर्मी में प्यास बुझाने के लिए अब जंगल में ज्यादा नहीं भटकना पड़ेगा। वन विभाग ने वन्यजीवों के पानी के लिए होने वाले पलायन को रोकने तथा वन सम्पदा को संरक्षित और संवद्धित बनाने के लिए महती योजना बनाई है। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;जयपुर के डेली न्यूज़ में छपी खबर &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5476944947429800194" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 370px; CURSOR: hand; HEIGHT: 204px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TAIEaV3seQI/AAAAAAAAAhw/hC8DlnKj2d4/s320/forest.jpg" border="0" /&gt; &lt;p align="justify"&gt;इसके तहत वन क्षेत्रों में पानी के ऐसे कुण्ड विकसित किए जाएंगे जहां बरसात का पानी एकत्र कर वन्य जीवों को सालभर पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। विशेष तौर पर बनने वाले कुण्डों को गजलर कहा जाएगा।&lt;br /&gt;शुरुआती चरण में तालछापर कृष्णमृग अभयारण्य समेत वन क्षेत्र में पांच स्थानों का गजलर के लिए चयन किया गया है। योजना सफल रही तो इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। समस्त गजलर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना के माध्यम से विभाग की ईको रिस्टोरेशन योजना के तहत बनेंगे। विभाग ने गजलर के प्रस्ताव हाल ही मुख्यालय को भिजवाए &lt;/p&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;हैं।&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;/span&gt;चालू वित्तीय वर्ष में इनका निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।&lt;br /&gt;वन क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए वर्तमान में बने जलस्रोतों की तुलना में गजलर में 35 से 40 हजार लीटर से अधिक पानी संग्रहित किया जा सकेगा। बारिश के पानी से एक बार गजलर भर जाने पर सालभर तक पानी की कमी नहीं रहेगी। बारिश नहीं हुई तो टैंकर के जरिए गजलर को भरा जा सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बूंद-बूंद आ सकेगी काम&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;गजलर का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है, जिससे बारिश के पानी की बूंद-बूंद वन्यजीवों के काम आ सकेगी। बारिश का पानी सबसे पहले चालीस हजार लीटर क्षमता के एक कुण्ड में जमा होगा। कुण्ड ऊपर से बंद होगा, लेकिन उसके पास बनने वाले विशेष घाट में कुण्ड का पानी पहुंचेगा, घाट पर पानी की उपलब्धता कुण्ड में भरे पानी के दबाव के अनुपात में कम-ज्यादा होती रहेगी। इससे पानी की छीजत नहीं होगी।जहां वन्यजीव हलक तर कर सकेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चयन का रखा खास आधार&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वन विभाग ने गजलर निर्माण के चयन का खास आधार रखा है। गजलर उन स्थानों पर बनाया जाएगा जहां वर्तमान में वन सम्पदा की स्थिति खराब है। पेड़-पौध, झाड़, खरपतवार, घास आदि विकसित नहीं हो पा रही है। साथ ही वहां पानी के अभाव में वन्यजीवों को विचरण नहीं हो पाता है। गजलर के निर्माण से वन्यजीव पानी पीने तो वहां पहुंचेंगे ही साथ ही पानी होने पर आस-पास के क्षेत्र में बीजारोपण के माध्यम से पौध, घास आदि विकसित कर क्षेत्र को हराभरा किया जा सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कटाई व चराई पर प्रतिबंध&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नए सिरे से विकसित किए गए क्षेत्र में पौधों व पेड़ों की कटाई व चराई पर प्रतिबन्ध रहेगा। इनक्षेत्रों को तारबंदी कर सुरक्षित किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों से लगते क्षेत्र में पक्की दीवार का निर्माण कराया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चयनित वन क्षेत्र&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;-लीलकी बीड़&lt;br /&gt;-सांखू बीड़&lt;br /&gt;-तालछापर कृष्णमृग अभयारण्य&lt;br /&gt;-तारानगर बीड़&lt;br /&gt;-ढाणी लालसिंह पुरा बीड़&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;जिले में वन्यजीव&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;काले हरिण -2025&lt;br /&gt;चिंकारा -2705&lt;br /&gt;नीलगाय -1036&lt;br /&gt;जंगली बिल्ली -129&lt;br /&gt;मरु लोमड़ी -124&lt;br /&gt;गिद्ध -48&lt;br /&gt;चील/बाज -141&lt;br /&gt;साण्डा -4109&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इनका कहना है...&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;महानरेगा के माध्यम से ईको रिस्टोरेशन योजना के तहत गजलर निर्माण के प्रस्ताव मुख्यालय को भेजे हैं। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करवा देंगे। जिले में गजलरों की शुरुआत पांच स्थानों से होगी।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-केसी शर्मा, डीएफओ, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-868545105359870042?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/868545105359870042/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post_29.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/868545105359870042'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/868545105359870042'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post_29.html' title='&apos;गजलर&apos; बुझाएंगे प्यास'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/TAIEaV3seQI/AAAAAAAAAhw/hC8DlnKj2d4/s72-c/forest.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-6801585012371911135</id><published>2010-05-26T12:49:00.003+05:30</published><updated>2010-05-27T13:08:57.915+05:30</updated><title type='text'>पढ़बा सूं रैग्या टाबर</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;सर्वे में हुआ खुलासा, सर्वाधिक सरदारशहर में&lt;br /&gt;नए शिक्षा सत्र से जोडऩे के होंगे खास प्रयास&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;विश्वनाथ सैनी @ चूरू&lt;br /&gt;जिले में करीब सात हजार बच्चे शिक्षा से महरूम हैं। इनमें अधिकांश ने तो स्कूल की दहलीज पर कभी कदम ही नहीं रखा जबकि शेष ने बीच में पढ़ाई छोडऩे के बाद फिर कभी स्कूल की सुध नहीं ली। सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से हाल ही करवाए गए चाइल्ड ट्रेकिंग सर्वे में यह आंकड़ा सामने आया है। &lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5475849839527207122" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 302px; CURSOR: hand; HEIGHT: 158px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S_4garBmINI/AAAAAAAAAho/LzHvjlMU4rA/s320/6.jpg" border="0" /&gt;&lt;br /&gt;सर्वे के दौरान बच्चे पढऩे-लिखने की उम्र में घरेलू कामों में जुटे अथवा गली-मोहल्लों में मटरगस्ती करते मिले। परिवार की माली हालत खराब होने के कारण कई बच्चे कहीं ना कहीं मजदूरी करते भी पाए गए। सर्वे में इन बच्चों को अनामांकित व ड्रापआउट के रूप में चिह्नित किया गया है। अब नए शिक्षा सत्र में इन बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोडऩे के विशेष प्रयास किए जाएंगे।&lt;br /&gt;आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिलेभर में कुल 6 हजार 956 बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। छह से चौदह साल तक के इन बच्चों में से अधिकांश कभी स्कूल नहीं गए। शेष ने स्कूल में कभी ना कभी दाखिला तो लिया लेकिन आठवीं कक्षा से पूर्व ही पढ़ाई छोड़ दी।&lt;br /&gt;शिक्षकों ने विद्यालय रिकॉर्ड तथा घर-घर जाकर बच्चों का सर्वे किया है। पढ़ाई से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रखने वाले सबसे अधिक 1 हजार 795 बच्चे सरदारशहर ब्लॉक तथा सबसे कम 276 बच्चे सादुलपुर ब्लॉक में सामने आए हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नए सत्र मे पढ़ाएंगे&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सर्वे में चिह्नित किए गए बच्चों का जुलाई से शुरू हो रहे प्रवेशोत्सव के दौरान स्कूलों में दाखिला करवाने का प्रयास किया जाएगा। अभिभावकों को बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित भी करेंगे। इसके अलावा आवासीय ब्रिज कोर्स, गैर आवासीय ब्रिज कोर्स, शिक्षा मित्र केन्द्र, कस्तूरबा गांधी विद्यालय आदि में भी बच्चों के लिए पढऩे-लिखने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कहां कितने वंचित&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;ब्लॉक बच्चे&lt;br /&gt;तारानगर- 1025&lt;br /&gt;सरदारशहर- 1795&lt;br /&gt;राजगढ़- 276&lt;br /&gt;चूरू- 670&lt;br /&gt;रतनगढ़- 1680&lt;br /&gt;सुजानगढ़- 1510&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;16 से 21 मई तक हुए सर्वे के दौरान जिले में करीब सात हजार बच्चे अनामांकित व ड्रापआउट हैं। सर्वे की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है। नए शिक्षा सत्र में इन बच्चों को पढ़ाया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-मोहन लाल त्रिवेदी, प्रभारी अधिकारी, वैकल्पिक शिक्षा (एसएसए) चूरू&lt;/strong&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-6801585012371911135?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/6801585012371911135/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post_26.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6801585012371911135'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6801585012371911135'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post_26.html' title='पढ़बा सूं रैग्या टाबर'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S_4garBmINI/AAAAAAAAAho/LzHvjlMU4rA/s72-c/6.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-91063956325002346</id><published>2010-05-25T10:57:00.002+05:30</published><updated>2010-05-25T11:26:45.986+05:30</updated><title type='text'>तपिश से बुझेगी धोरों की प्यास</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;इस बार अच्छी बारिश के आसार&lt;br /&gt;मानसून एक जुलाई तक आने की उम्मीद&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कार्यालय संवाददाता @ चूरू. थळी में पड़ रही भीषण गर्मी भले ही लोगों के पसीने छुड़ा रही हो, लेकिन यह अच्छी बारिश का संकेत भी है। सब कुछ ठीक रहा तो इस बार थळी के धोरों की प्यास पूरी तरह बुझ सकेगी। थळी की भौगोलिक एवं पारस्थितिकी स्थितियां इस तरह की हैं कि यहां जितनी तेज गर्मी पड़ती है उतनी ही अधिक बारिश की संभावना बनती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार गत वर्षों की तुलना में इन्द्रदेव अधिक मेहरबान होने के आसार बन रहे हैं।&lt;br /&gt;चूरू में इस सत्र का सर्वाधिक तापमान 48 .4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा चुका है। इसके अलावा सर्दियों में इस बार गत वर्ष की तुलना में अधिक बर्फबारी हुई थी। फिलहाल अधिकतम तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।&lt;br /&gt;साथ ही आंधियों के चलने का क्रम भी जारी है। ऐसे में प्रदेश के पश्चिमी इलाके में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता जा रहा है। जो पूर्व की ओर से आने वाले मानसून को तेजी से अपनी ओर खींचेगा। पूर्व से मानसून के दिल्ली व हरियाणा होते हुए 25 जून तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में दस्तक देने की उम्मीद है। शेखावाटी में मानसून के 1 जुलाई को पहुंचने का अनुमान है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;तो झूमके बरसेंगे बदरा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में जिले की परिस्थितियां अच्छी बारिश के अनुकूूल हैं। जब-जब भी ऐसे ही हालात बने हैं। तब-तब प्रदेशभर के खेतों में बदरा झूमकर बरसे हैं। इसके अलावा अगर जून में ज्यादा बारिश ना हो तो अच्छा है। क्योंकि इससे पश्चिमी इलाकों में निम्न दबाव का क्षेत्र बना रहे ताकि जून के अंतिम सप्ताह में पूरे वेग के साथ मानसून प्रदेश में पहुंच सके।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;मिट्टी की करामात&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;थळी के धोरों की मिट्टी की करामात के कारण जिले को सर्दियों में कड़ाके की ठण्ड और गर्मियों में भीषण गर्मी की सौगात मिली है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जिले की मिट्टी की स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी काफी कम है। इस वजह से गर्मियों में मिट्टी जल्दी गर्म और सर्दियों में जल्दी ठण्डी हो जाती है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;बारिश का रास्ता &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;प्रदेश में बंगाल की खाड़ी से उठने वाला मानसून मेहरबान होता है। खाड़ी से चलकर मानसून हिमालय की वादियों में पहुंचता है। यहां से बर्मा की पहाडिय़ों से टकराने के बाद पूर्व से पश्चिम की ओर रुख करता है। पश्चिम की ओर पहुंचते-पहुंचते मानसून कमजोर पड़ता जाता है। पश्चिमी इलाकों में जितना अधिक निम्न दबाव का क्षेत्र बनेगा। मानसून भी उतनी तेजी के साथ दस्तक देगा।&lt;br /&gt;------&lt;br /&gt;इस बार मानसून पूरी तरह मेहरबान होने की संभावना है क्योंकि लगातार आंधियां चल रही है और सर्दियों में बर्फबारी भी ज्यादा हुई है। साथ ही तापमान भी बढ़ रहा है। कुल मिलाकर परिस्थितियां मानसून को बुलाने के अनुकूल है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;- जिलेसिंह राव, प्रभारी अधिकारी, मौसम केन्द्र, चूरू&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-91063956325002346?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/91063956325002346/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post_25.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/91063956325002346'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/91063956325002346'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post_25.html' title='तपिश से बुझेगी धोरों की प्यास'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-493513513787770039</id><published>2010-05-12T13:14:00.000+05:30</published><updated>2010-05-13T13:30:05.993+05:30</updated><title type='text'>दवा खरीद में नियम हवा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;चूरू  सहकारी&lt;/span&gt; उपभोक्ता होलसेल भण्डार की दवा की दुकानों पर दवाइयो की आड में भ्रष्टाचार की बेल पनप रही है। जिला प्रशासन की ओर से गठित एक विशेष कमेटी की जांच में यह खुलासा हुआ है। जिले में होलसेल भण्डार की 11 दुकानों के लिए प्रतिवर्ष करोडों रूपए की दवाइयां बिना किसी निविदा प्रक्रिया अपनाएं खरीदी जा रही हैं।&lt;br /&gt;वित्तीय वर्ष 2009-10 में दो करोड 13 लाख 73 हजार रूपए की दवाइयां बिना निविदा के खरीदी गई हैं। इनमें साठ से सत्तर फीसदी दवाइयां ब्रांडेड हैं, जो जेनरिक दवा के मुकाबले दो-तीन गुना अघिक महंगी होती हैं। जबकि होलसेल भण्डार की दुकानों पर अघिक से अघिक जेनरिक दवाइयां ही होनी चाहिए, ताकि रोगियों को सस्ती दर पर दवाइयां उपलब्ध हो सके।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;यूं हुआ &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;खुलासा&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;दस दिन पूर्व जिला कलक्टर डा. केके पाठक ने राजकीय भरतीया अस्पताल स्थित उपभोक्ता होलसेल भण्डार के तीन नम्बर मेडिकल स्टोर का औचक निरीक्षण किया तो वहां जेनरिक के स्थान पर ब्रांडेड दवाइयां बिकती मिली। इस पर पाठक ने उपखण्ड अघिकारी उम्मेद सिंह, माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के एएओ देवीदत्त पारीक, राजकीय भरतीया अस्पताल के कनिष्ठ लेखाकार रतनलाल सैनी, डा. बीएल नायक तथा कोषाघिकारी अंजू गोयल की एक कमेटी गठित कर मामले की जांच करवाई। फिलहाल कमेटी वर्ष 2009-10 में खरीदी गई दवाओं के नाम, दर, मात्रा समेत अन्य बिन्दुओं की जांच कर रही है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;प्रदेश भर में &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;गडबडझाला &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;निरीक्षण के बाद होलसेल भण्डार ने कारण बताओ नोटिस के जवाब में माना कि दवा की खरीद में गडबडझाला चूरू ही नहीं बल्कि प्रदेश भर में हो रहा है। दवा खरीदने में कहीं पर भी निविदाएं आमंत्रित नहीं की जाती। प्रदेश में होलसेल भण्डार की दवा की करीब 520 दुकानें हैं। गत वित्तीय वर्ष के दौरान पडोसी जिले सीकर में एक करोड 75 लाख तथा झुंझुनूं में 2 करोड 4 लाख 82 हजार रूपए की दवाइयां इसी तरह से खरीदी गई हैं।&lt;br /&gt;-----&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;चिकित्सक ब्रांड बदल-बदल कर दवाइयां लिखते हैं। इसलिए निविदा प्रक्रिया संभव नहीं है। जेनरिक दवाइयों की मांग काफी कम है। प्रशासन के निर्देश पर अब निविदा प्रक्रिया शुरू करने तथा जेनरिक दवाओं की मात्रा बढाने की तैयारी कर रहे हैं। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;-रामावतार स्वामी, &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;अघिशासी अघिकारी (कार्यवाहक), &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;सहकारी उपभोक्त होलसेल भण्डार, चूरू &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भण्डार की दुकानों पर बडे पैमाने पर अनियमितताएं हैं। यह सब मिलीभगत से हो रहा है। प्रारम्भिक जांच में गत वित्तीय वर्ष के दौरान दो करोड से अघिक की दवा बिना निविदा के खरीदने की जानकारी मिली है। कमेटी से मामले की विस्तृत जांच करवा रहे हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। &lt;strong&gt;-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू  &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-493513513787770039?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/493513513787770039/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post_12.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/493513513787770039'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/493513513787770039'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post_12.html' title='दवा खरीद में नियम हवा'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-4054272431794371882</id><published>2010-05-12T11:56:00.002+05:30</published><updated>2010-05-12T12:07:27.917+05:30</updated><title type='text'>लीबिया में कामगारों पर संकट</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;मजदूरों को ना तो पगार मिली है और ना ही राशन&lt;br /&gt;चूरू, 11 मई।&lt;/strong&gt; खाड़ी देश लीबिया में कमाने गए भारतीय मजदूर संकट में हैं। एक निजी कम्पनी ने मजदूरों को बंधक बना रखा है। पांच माह से मजदूरों को ना तो पगार मिली है और ना ही राशन। मजदूर समुद्र का खारा पीने तथा राहगीरों से भीख मांगने को मजबूर हैं।&lt;br /&gt;देशभर के करीब सौ मजदूरों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा रहा है। इनमें चूरू जिले के सोलह मजदूर शामिल हैं। मजदूरों ने सोमवार को अपने परिजनों को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत करवाया है। परिजनों ने मंगलवार को जिला कलक्टर डा. केके पाठक से मुलाकात कर मजदूरों की रिहाई की गुहार लगाई है।&lt;br /&gt;परिजनों की ओर से कलक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में लिखा है कि लीबिया में अल एकलेल कॉन्ट्रेक्ट कम्पनी ने मजदूरों का भुगतान रोककर उन्हें चार दीवारी में बंद कर रखा है। मजदूर सीकर जिले की फतेहपुर तहसील के गांव अठवास निवासी एजेंट सांवरमल झाझडिय़ा के माध्यम से नौ माह पहले लीबिया गए थे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;प्रोजेक्ट पूरा हो गया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जानकारी के अनुसार कम्पनी विला निर्माण के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। करीब दो माह पहले प्रोजेक्ट पूरा हो गया। नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाने के कारण मजदूरों को ना तो रोजगार मिल पा रहा है और ना ही बकाया पगार।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;आधे से ज्यादा शेखावाटी के&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;मजदूरों को लीबिया भेजने वाले एजेंट झाझडिय़ा की मानें तो अल एकलेल कॉन्ट्रेक्ट कम्पनी में ऐसी स्थिति का सामना चूरू जिले के सोलह मजदूर ही नहीं बल्कि देशभर के करीब सौ मजदूरों को करना पड़ रहा है। इनमें से पचास-साठ मजदूर अकेले शेखावाटी के हैं। विला निर्माण का प्रोजेक्ट पूरा होने तथा नया प्रोजेक्ट शुरू होने में हो रही देरी के कारण मजदूर परेशान हैं। मजदूर बकाया मजदूरी की मांग को लेकर कम्पनी का राशन लेने से भी इनकार कर रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;ये हैं वो मजदूर&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;सोलह मजदूरों में चूरू तहसील के गांव जुहारपुरा का भींवाराम, भागीरथ मल, धीरासर का राजूराम, रायपुरिया का प्रभूदयाल, तारानगर तहसील के गांव सोमसीसर का मेधाराम, रतनगढ़ तहसील के गांव गोगासर का पूर्णमल, सेहला का बजरंग, चैनपुरा का भजनलाल, नरेश कुमार, रघुनाथपुरा का बृजलाल, खिलेरिया का आसूदास, लोहा का तोलाराम, लधासर का मेंधाराम, नागरमल, सुजानगढ़ तहसील का गणेशाराम यादव, गांव भींवसर का बेगाराम शामिल है।&lt;br /&gt;-------&lt;br /&gt;लीबिया गए सोलह मजदूरों के परिजनों ने उन्हें रिहा कराने की मांग की है। इस संबंध में प्रमुख सचिव को लिखा गया है। साथ ही पुलिस को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। &lt;strong&gt;-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-4054272431794371882?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/4054272431794371882/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4054272431794371882'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4054272431794371882'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='लीबिया में कामगारों पर संकट'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-7230094535244717489</id><published>2010-05-07T22:56:00.001+05:30</published><updated>2010-05-12T12:23:11.231+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मां'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मदर्स डे'/><title type='text'>मां तुझमें रब दिखता है...</title><content type='html'>&lt;p align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मां.&lt;/span&gt;..&lt;/span&gt;बस तुम्हारा नाम लेने भर से रूह को सुकून मिल जाता है...तुम्हें दूर से भी देख लूं तो फिर दुनिया में कुछ देखने की हसरत नहीं रहती...तेरी परछाई में भी मैं अपना वजूद ढूंढ लेता हूं...तेरी धुंधली तस्वीर में भी मुझे अपना अक्श साफ नजर आता है...तेरे आंचल की ओट मिल जाए तो जेठ की तपती दुपहरी हो या पौष की सर्द रात बिना उफ किए गुजार दूं...तू रख दे अगर हाथ सिर पर तो फिर जमाने से मुझे कुछ नहीं चाहिए...मैं तो तेरा स्पर्श पाकर ही निहाल हो उठता हूं।&lt;br /&gt;सच में मां तुम ऐसी थीं...ऐसी हों और खुदा के वास्ते ऐसी ही रहना...। बचपन से मुझे लगता आया है कि भले ही तुम्हारे चेहरे पर झूरियां पर जाए...बाल झक सफेद हों जाए...पर तुम्हारा प्यार कभी कम नहीं होगा। मां में कई बार सोचता हूं कि जब मैंने बचपन में तुतलाती जुबान से पहली बार तुम्हें 'मां' कहकर पुकारा तो तू शायद हँसी होगी या फिर मेरी नकल की होगी...यह तो तू ही जानें...पर मैं दावे से कह सकता हूं कि तेरी हँसी में भी सुखद अहसास था...तेरी नकल ने मुझे कुछ और शब्द सीखने को प्रेरित किया होगा।&lt;br /&gt;जब मैंने चलने के लिए पहली बार जमीन पर कदम बढ़ाया तो मेरी नन्ही अंगुली तुमने जरूर थामी होगी...मुझे पल भर के लिए भी गिरने नहीं दिया होगा...या कभी लडख़ड़ाकर गिर भी गया तो तुमने आंसू नहीं आने दिए होंगे...। तुम्हारे हाथों का स्पर्श ही मेरी चोट पर मरहम का काम कर गया होगा...।&lt;br /&gt;मां मैं तुम्हारे लिए तो वहीं नन्हा बच्चा हूं...और रहूंगा, पर दुनिया की नजर मैं 23 होली, दिवाली और बसंत देख चुका हूं...मुझसे लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं...पढऩे वाला हर बंदा सोच रहा होगा कि आज एकाएक मुझे तुम्हारी याद कैसे आ गई...तेरे नाम पर मेरी कलम क्यों चल पड़ी...।&lt;br /&gt;बता दूं कि मां मैं तुझे शब्दों में ढालना चाहता हूं...तेरी यादों को फिर से दिल के करीब लाने की चाहत है मेरी...मुझे तेरा प्यार भरा स्पर्श आज भी याद है...तेरे हाथ की रोटी का कसेला स्वाद तो मैं कैसे भूल जाऊं...तेरी डांट-फटकार में भी प्यार छिपा होता था...जिसे भूल जाना मेरे बस की बात नहीं...।&lt;br /&gt;मेरे बचपन में ही पिताजी के गुजरने का गम तो मुझे ताउम्र सालता रहेगा पर तुमने कभी उनकी कमी महसूस नहीं होने दी...मां होते हुए तुमने मुझे पिता का भी प्यार दिया...। आज मैं जहां भी हूं...जिस हाल में भी हूं...सब का श्रेय लेने का हक है...तुम्हें। सच कहूं तो मां तुझमे रब दिखता है...।&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-7230094535244717489?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/7230094535244717489/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2009/12/blog-post_5768.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7230094535244717489'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7230094535244717489'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2009/12/blog-post_5768.html' title='मां तुझमें रब दिखता है...'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-1422787541221673527</id><published>2010-05-01T11:46:00.000+05:30</published><updated>2010-05-03T11:59:24.334+05:30</updated><title type='text'>18 सौ अंकतालिका रद्दी की टोकरी में</title><content type='html'>&lt;strong&gt;डाइट स्टाफ की भूल, संस्था प्रधानों की लापरवाही&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सैकड़ों परीक्षार्थियों का परिणाम प्रभावित&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चूरू, 30 अप्रेल। &lt;/strong&gt;आठवीं बोर्ड परीक्षा को गंभीरता से नहीं लेने की वजह से इस बार अठारह सौ परीक्षार्थियों की अंकतालिकाएं रद्दी की टोकरी में डाल दी गई हैं। यह सब डाइट कर्मचारियों की मानवीय भूल व संस्था प्रधानों की लापरवाही के चलते हुआ है।&lt;br /&gt;हैरत की बात है कि जहां डाइट परीक्षार्थियों की मूल अंकतालिका में बोनस अंक दर्ज करना ही भूल गया तो संस्था प्रधान सत्रांक तक सही नहीं भेज पाए। हालांकि डाइट ने अब त्रुटियां सुधारकर प्रभावित परीक्षार्थियों को नई अंकतालिकाएं जारी कर दी हैं।&lt;br /&gt;इससे कई परीक्षार्थी फेल से पास तो कई फेल पूरक की श्रेणी में आ गए हैं। जिलेभर के कुल 1 हजार 798 परीक्षार्थियों का परिणाम प्रभावित हुआ है। अंकतालिकाओं की त्रुटियां सुधरवाने से परीक्षार्थियों को नुकसान की बजाय फायदा ही हुआ है, लेकिन परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को मानसिक रूप से तो परेशान होना ही पड़ा है। इसकी कोईजवाबदेही तय नहीं की गई है।&lt;br /&gt;गौरतलब है कि बोर्ड परीक्षा परिणामों के तनाव के कारण विद्यार्थियों में बढ़ती आत्महत्या करने की प्रवृति पर प्रभावी अंकुश के मद्देनजर केन्द्र और राज्य सरकार बोर्ड परीक्षा प्रक्रिया ही बदलने जा रही है।&lt;br /&gt;---&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;परीक्षार्थी ऐसे हुए प्रभावित&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डाइट ने किसी विषय में सत्रांक समेत कुल 35 अंक हासिल करने वाले परीक्षार्थियों को बोनस के रूप में एक अंक दिया था, जो तकनीकी खामी की वजह से अंकतालिका में दर्ज नहीं किया जा सका। इससे 778 परीक्षार्थियों का मूल परीक्षा परिणाम तो 718 का पूरक परीक्षा परिणाम प्रभावित हुआ है। शेष की अंकतालिका में मामूली अंतर आया है।&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मांगे साठ भेज दिए बीस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आठवीं कक्षा के अधिकांश विषयों के सत्रांक बीस में से भेजे जाते हैं जबकि कार्यानुभव, कला शिक्षा व स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा विषय के सत्रांक 6 0 में से भेजने होते हैं। सुजानगढ़ तहसील के गांव धात्री के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय ने अपने समस्त 25 परीक्षार्थियों के तीनों विषयों के सत्रांक 6 0 की बजाय 20 में से भेज दिए। डाइट ने विद्यालय प्रबंधन को गलती की जानकारी दी तो अब फिर से सत्रांक भेजे गए हैं। ऐसे में सभी विद्यार्थियों को नई अंकतालिका जारी करनी पड़ी है।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;1998 में भी हुआ ऐसा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;डाइट सूत्रों के अनुसार 1998 में जन्मतिथि गलत दर्ज हो जाने के कारण एक हजार से अधिक अंकतालिकाएं बेकार हो गई थीं। इसके बाद इतनी बड़ी संख्या में अंकतालिकाएं कभी खराब नहीं हुई। विद्यालयों की गलती की वजह से दर्जनों अंकतालिकाएं प्रतिवर्ष रद्दी की टोकरी में फेंकनी पड़ती हैं। इस बार डाइट से भी भूल होने के कारण खराब अंकतालिकाओं का आंकड़ा हजार को पार कर गया।&lt;br /&gt;-----&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इनका कहना है....&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;करीब 18 सौ अंकतालिकाओं में त्रुटियां रह गई हैं। इससे परीक्षार्थियों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया गया है। त्रुटियां ठीक करवाकर नई अंकतालिकाएं जारी कर दी हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-महावीर सिंह सिंघल, प्राचार्य, डाइट, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-1422787541221673527?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/1422787541221673527/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/18.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1422787541221673527'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1422787541221673527'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/05/18.html' title='18 सौ अंकतालिका रद्दी की टोकरी में'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-8513126192988488872</id><published>2010-04-30T11:17:00.001+05:30</published><updated>2010-05-03T11:45:18.379+05:30</updated><title type='text'>आपणी की निशानी गंदला पानी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;स्वच्छता की कसौटी पर खरा नहीं &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नमूनों की जांच में हुआ &lt;/strong&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;खुलासा &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span&gt;चूरू&lt;/span&gt;, 29 अप्रेल। &lt;/strong&gt;आपणी योजना का पानी शुद्धता और स्वच्छता की कसौटी पर पूर्णतया खरा नहीं उतर पाया है।नहर के गंदले पानी को साफ करने के मापदण्डों की जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। योजना के कर्मसाना फिल्टर प्लांट पर तो पानी की स्वच्छता के लिए फिटकरी (एलएम डोज) अंदाजे से डाली जा रही है। वांछित मात्रा से कम फिटकरी डाले जाने का ही परिणाम है कि घरों में गंदले पानी की ही आपूर्ति होती रही है। शिकायत मिलने पर जलदाय विभाग के लोग उपभोक्ता की लाइन में कई रिसाव होने का बहाना बनाकर सच्चाई को झुठलाते रहे हैं।यह खुलासा जलदाय विभाग के रसायनज्ञों की एक टीम की ओर से की गई जांच में हुआ है। रसायनज्ञों ने जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। जिसमें कर्मसाना फिल्टर प्लांट में नहर के पानी की टर्बिडिटी के अनुसार फिटकरी की मात्रा रोजाना तय करने तथा साहवा फिल्टर प्लांट पर बंद पड़ी प्रयोगशाला को अति शीघ्र शुरू करवाने की सिफारिश की गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ऐसे हुआ खुलासा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सीकर, चूरू व झुंझुनूं के रसायनज्ञों की टीम ने बीस अप्रेल को कर्मसाना व साहवा फिल्टर प्लांट व फील्ड से पानी के 19 नमूने लिए थे। चूरू स्थित जलदाय विभाग की प्रयोगशाला में नमूनों की गहनता से जांच की गई। दोनों फिल्टर प्लांटों का पानी जीवाणु व रासायनिक परीक्षण में सफल रहा परन्तु कर्मसाना फिल्टर प्लांट के पानी में फिल्टरेशन की प्रक्रिया में कमी उजागर हुई है। यहां से फिल्टर होकर घरों तक पहुंच रहे पानी में गंदलापन यानि टर्बिडिटी 6 एनटीयू (नेथलोमेट्रिक टर्बिडिटी यूनिट) पाई गई। जबकि पानी में वांछित मात्रा में फिटकरी मिलाई जाती तो टर्बिडिटी की मात्रा शून्य तक आ सकती थी। हालांकि पानी में दस एनटीयू तक की टर्बिडिटी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं है लेकिन निर्धारित मात्रा से अधिक तथा हानिकारक तत्वों के कारण टर्बिडिटी होने पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;रोज तय हो मापदण्ड&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;फिल्टर प्लांट पर नहर का पानी पहुंचते ही लैब में पानी की टर्बिडिटी की लैब में जांच कर उसमें मिलाई जाने वाली फिटकरी की मात्रा तय की जाती है। पानी की टर्बिडिटी घटती-बढ़ती रहती है। इसलिए फिटकरी डालने से पूर्व टर्बिडिटी जांच की प्रक्रिया रोजाना अपनाई जानी आवश्यक है। जबकि वर्तमान में सारा काम अनुमान से हो रहा है। टर्बिडिटी जांच के लिए प्लांट पर पर्याप्त स्टाफ ही नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/p&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;टर्बिडिटी के कारण&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;-नहर में पानी के प्रवाह का तेज होना।&lt;br /&gt;-पानी की पम्पिंग तेजी से होने।&lt;br /&gt;-अत्यधिक गर्मी व अधिक वाष्पीकरण।&lt;br /&gt;-नहर में कचरा डाल दिए जाने।&lt;br /&gt;-नहरबंदी के चलते रुका पानी आने।&lt;br /&gt;-पानी में शैवाळ जमे होने।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;--------&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;नमूनों की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। कर्मसाना फिल्टर प्लांट पर समुचित एलएम डोज के लिए संबंधित अधिकारियों को लिखा गया है। साथ ही साहवा फिल्टर प्लांट स्थित प्रयोगशाला को शीघ्र शुरू करवाने की आवश्यकता जताई है।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;-सुशील कुमार शर्मा, कनिष्ठ रसायनज्ञ, पीएचईडी, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-8513126192988488872?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/8513126192988488872/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_30.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8513126192988488872'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8513126192988488872'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_30.html' title='आपणी की निशानी गंदला पानी'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-5617108707553640039</id><published>2010-04-22T13:27:00.001+05:30</published><updated>2010-04-23T13:48:38.852+05:30</updated><title type='text'>कम बोएंगे कम ही काटेंगे</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;खरीफ की बुवाई घटने का अनुमान, विभाग ने तय किए लक्ष्य&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चूरू, 22 अप्रेल।&lt;/strong&gt; कृषि विभाग ने खरीफ की बुवाई व उत्पादन के लक्ष्य तय कर लिए हैं। इस बार बुवाई क्षेत्रफल घटने के साथ ही प्रति हैक्टेयर हजारों किलोग्राम उत्पादन औंधे मुंह गिरने का अनुमान है। विभाग ने खरीफ फसलों के १२ हजार 400 क्विंटल बीज तथा 4 हजार 300 मेट्रिक टन उर्वरक भी मुख्यालय से मांग लिए हैं।&lt;br /&gt;विभागीय जानकारी के अनुसार इस बार 11 लाख 32 हजार हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई होने का अनुमान है, जो गत वर्ष की वास्तविक बुवाई से 51 हजार हैक्टेयर कम है।&lt;br /&gt;मौसम मेहरबान रहा तो इस बार कम से कम जिले में खरीफ की 5 लाख 15 हजार मेट्रिक टन पैदावार होने की उम्मीद है। हालांकि गत वर्ष 5 लाख 31.5 हजार मेट्रिक टन पैदावार हुई थी।&lt;br /&gt;इसी प्रकार खेतों में प्रति हैक्टेयर उत्पादन भी घटेगा। इस बार बाजरा, मूंग, मोठ, मूंगफली, तिल व ग्वार का प्रति हैक्टेयर 3 हजार 295 किलोग्राम उत्पादन होने का अनुमान है। जबकि गत वर्ष प्रति हैक्टेयर 4 हजार 8 25 किलोग्राम उत्पादन प्राप्त हुआ था। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इतने बीज मांगें&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;फसल मात्रा&lt;br /&gt;बाजरा 4600&lt;br /&gt;मूंग 2300&lt;br /&gt;मोठ 4500&lt;br /&gt;ग्वार 1000&lt;br /&gt;(आंकड़े क्विंटल में)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इतनी चाहिए खाद&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;खाद मात्रा&lt;br /&gt;यूरिया 3000&lt;br /&gt;डीएपी 1000&lt;br /&gt;एसएसपी 200&lt;br /&gt;एनपीके 100&lt;br /&gt;(आंकड़े मेट्रिक टन में)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बुवाई का अनुमान&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;फसल क्षेत्रफल&lt;br /&gt;बाजरा 425000&lt;br /&gt;मूंग 30000&lt;br /&gt;मोठ 360000&lt;br /&gt;मूंगफली 16000&lt;br /&gt;तिल 1500&lt;br /&gt;ग्वार 299500&lt;br /&gt;(आंकड़े हैक्टेयर में) &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;------&lt;br /&gt;खरीफ फसलों की बुवाई, उत्पादन के लक्ष्य तथा बीज व खाद की मांग तय कर ली है। बारिश की अनियमितता के कारण इस बार बुवाई कम होने के आसार हैं। इससे कुल उत्पादन भी घटेगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-हरपाल सिंह, कृषि अधिकारी, चूरू&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-5617108707553640039?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/5617108707553640039/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_22.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/5617108707553640039'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/5617108707553640039'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_22.html' title='कम बोएंगे कम ही काटेंगे'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-3007094938108329849</id><published>2010-04-20T14:08:00.004+05:30</published><updated>2010-04-27T13:00:51.168+05:30</updated><title type='text'>अजब 13 की गजब कहानी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;ग्राम से गदर तक रहा साथ&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;रा&lt;/strong&gt;शिफल&lt;/span&gt; और अंकों के फेर में पडऩा मुझे कतई पसंद नहीं। मेरे शब्दकोष में दोनों के कोई मायने नहीं हैं। खासकर पत्रकारिता जैसे चुनौतिपूर्ण क्षेत्र में कॅरियर बनाने की जद्दोजहद शुरू करने &lt;span class=""&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S81prriVrqI/AAAAAAAAAfI/YMrcEIkM_PQ/s1600/award1331.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5462138122212322978" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 165px; CURSOR: hand; HEIGHT: 481px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S81prriVrqI/AAAAAAAAAfI/YMrcEIkM_PQ/s320/award1331.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;के&lt;/span&gt; बाद से मैंने अपने आप में यह बदलाव महसूस किया है। मेरा मानना है कि राशिफल और शुभ अंक हमें दिमागी तौर पर संतुष्ट या विचलित कर सकते हैं। इससे ज्यादा दोनों में कुछ नहीं रखा।&lt;br /&gt;दोस्तों हाल ही मैंने ग्राम से 'ग्राम गदर' (पुरस्कार) तक कľ सफर तय किया तो महीने के तेरहवें दिन ने मुझे शुभ अंक के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।&lt;br /&gt;मुझे अब लगने लगा है कि मेरे कॅरियर और 13 तारीख का चोली-दामन का सा साथ हो गया है। यह सब एकाएक नहीं हुआ, बल्कि पिछले चार साल से ऐसा हो रहा है। यह जरूर है कि इसका अहसास मुझे हाल ही हुआ है। कॅरियर के हर छोटे-बड़े फैसलों में महीने का तेरहवां दिन अहम भूमिका निभा रहा है।&lt;br /&gt;वर्ष 2006 में स्नातक पूरी करने के बाद पत्रकारिता को बतौर कॅरियर चुना तो जयपुर स्थित द माइंडपूल स्कूल ऑफ जर्नलिज्म में 13 जुलाई को दाखिल हुआ। उस वक्त जिंदगी में 13 के अंक ने पहली बार प्रवेश लिया और अब तक बखूबी साथ दे रहा है।&lt;br /&gt;पत्रकारिता का छह माह तक किताबी ज्ञान लेने के बाद संस्थान ने मुझे राजस्थान पत्रिका के सीकर संस्करण में खबरनवीब बनने भेजा। यहां पर 13 फरवरी 2007 से प्रशिक्षण का आगाज हुआ। सीकर में एक माह भी नहीं बीता कि संस्थान ने राजस्थान पत्रिका के बंगलौर संस्करण में प्रशिक्षण लेने का फरमान सुना दिया।&lt;br /&gt;सात मार्च 2007 को झुंझुनूं जिले की नवलगढ़ तहसील के गांव झाझड़ से बंगलौर के लिए रवाना हुआ। कुछ दिन पूना में चचेरे भाई के पास रुककर 12 मार्च को बंगलौर पहुंचा। बंगलौर के बारे में जैसा लोगों से सुना वो उससे भी अधिक सुन्दर था। पहले दिन किराए का मकान देखने तथा सफर की थकान मिटाने के कारण विधिवत रूप से 13 मार्च को बंगलौर संस्करण ज्वाइन कर सका।&lt;br /&gt;बंगलौर में पत्रकारिता के काफी गुर सीखे। खुद को दक्षिण भारतीय संस्कृति में ढालने का प्रयास kइया. साथ ही कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा पर भी पकड़ बनानी चाही। इन सब के बीच कब छह माह बीत गए पता ही &lt;span class=""&gt;नहीं&lt;strong&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;चला।&lt;/span&gt; आखिर मैंने प्रशिक्षण पूरा होते ही बंगलौर छोड़ दिया। यह भी इत्तेफाक ही था कि जिस दिन बंगलौर से जयपुर के लिए रवाना हुआ, वह दिन अगस्त माह का तेहरवां दिन था।&lt;br /&gt;इसके बाद अक्टूबर 07 में अगला पड़ाव फिर से सीकर संस्करण होते हुए राजस्थान पत्रिका के चूरू ब्यूरो कार्यालय में डाला। यहां जो कुछ सीखने को मिला, दूसरी जगह वह शायद ही मिलता। चूरू में रहकर न केवल मैंने ग्रामीण पत्रकारिता को करीब से जाना बल्कि विधानसभा, लोकसभा, निकाय और पंचायत चुनाव भी देखे। चुनावों में हर दृष्टिकोण से खबरें बनाईं। साथ ही ग्रामीण पत्रकारिता से भी जुड़ाव रहा।&lt;br /&gt;समय का पहिया घूमा और 2010 में &lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;प&lt;/strong&gt;त्रकारिता&lt;/span&gt; के तीन साल पूरे कर लिए। इस साल अप्रेल में कट्स इंटरनेशनल की ओर से गांवों में जल संरक्षण एवं प्रबंधन विषय पर उत्कृष्ठ लेखन के कारण मुझे प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्राम गदर के लिए चुन लिया गया। दोस्तों मेरे कॅरियर का सबसे खुशनसीब यह दिन 13 अप्रेल था। अब तो शायद आपको भी यकीन हो गया होगा मेरी अजब कहानी में 13 का अंक कुछ गजब ढा रहा है। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-3007094938108329849?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/3007094938108329849/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/13.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/3007094938108329849'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/3007094938108329849'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/13.html' title='अजब 13 की गजब कहानी'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S81prriVrqI/AAAAAAAAAfI/YMrcEIkM_PQ/s72-c/award1331.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-2515601955208564664</id><published>2010-04-18T20:31:00.000+05:30</published><updated>2010-04-19T21:00:44.477+05:30</updated><title type='text'>अपनों ने ही बना दी पराई</title><content type='html'>&lt;strong&gt;किस्से और कहानियां बनी पेयजल उपलब्धता, &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;आगामी सरकारी योजनाएं खटाई में पडऩे के आसार&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;सन्तोष गुप्ता/विश्वनाथ सैनी&lt;br /&gt;चूरू, 18 अप्रेल। लोगों ने घरों में घड़े भरकर रखना बंद कर दिया था। गृहिणियां रात सुकून से सोने लगी थी। अल सुबह उठने और मीलों पैदल चलने व सिर पर घड़े रख पानी लाने की चिंता उन्हें सताती नहीं थी। मेहमान के आने पर बच्चे दौड़कर सीधे टूटी से गिलास में ही ताजा पानी भर ले आते थे। रात को दो बजे भी पानी की जरूरत होती तो टूटी खोलते ही पानी उपलब्ध हो जाता था। मवेशियों की खेळियां और परिंदों के परिण्डे तक दिन भर भरे रहते थे। गांव के लोग पानी का मूल्य समझने लगे थे। नल से&lt;br /&gt;पानी व्यर्थ बहते कोई देख लेता था तो तुरन्त टोक देता था या खुद टूटी बंद कर देता था। चौबीस घंटे पीने के लिए शीतल, शुद्ध और स्वच्छ पानी की उपलब्धता बनी रहती थी। ये बाते भले ही अब किस्से और कहानी सी लगती हों लेकिन यह सच्चाई है जो अब चूरू, झुंझुनूं और हनुमानगढ़ वासियों की जुबान से किस्से और कहानी बनकर निकल रही है। समय का चक्का तो अपनी गति से चलता रहा। गांव के लोग उसकी चाल के साथ कदमताल नहीं कर सके। वह तो न चाल समझ सके न चरित्र जान सके। पीने के पानी के अभाव में जीते हुए उसे एकाएक जो सुकून मिला वह उसे भी संजोए नहीं रख सके। खुशी मिले उन्हें बमुश्किल एक दशक भी नहीं बीता अपनों के बीच ही अपनों के ही हाथों आपणी योजना पराई होती दिखी।&lt;br /&gt;राजस्थान पत्रिका की टीम ने दम तोडऩे के कगार पर पहुंची आपणी योजना का हाल जाना तो हैरानी हुई। सिर्फ सात साल पुरानी योजना को समय के साथ सम्बल और समृद्धता मिलने के बजाय जिसने जब चाहा जहां मौका मिला पराई नार की तरह बुरीनजर डालने से बाज नहीं आया। अब ढाणी और गुवाड़ में लगी टूटी दिनभर खुली रहती है पर उसमें पानी की बूंद नहीं टपकती। पाइप से गांव तक पीने का पानी महीनेभर में आए कि पन्द्रह दिन में कुछ निश्चित नहीं रहा। महिलाओं की दिनचर्या प्रभावित हो गई। चौका-चूल्हे से पहले पीने के पानी की जुगाड़ में उनकी रातों की नींद उड़ गई और दिन का चेन जाता रहा। पानी का इन्तजार करना तो अब ग्रामीणों के बस में रहा ही नहीं सो हर कोई पानी के जुगाड़ में फिर सेे जुटा दिखा। पत्रिका टीम ने पाया कि इन्दिरा गांधी नहर से पानी छोड़े जानेसे लेकर गांवों में पानी पहुंचने के बीच की तमाम व्यवस्थाएं पानी संग्रहण, भण्डारण, शुद्धिकरण और वितरण नियत मानदण्डों पर कहीं खरी नहीं उतर रही। न तो पानी का संग्रहण अपेक्षित है न भण्डारण सुरक्षित और संरक्षित है। शुद्धिकरण और स्वच्छता तो भगवान भरोसे है। वितरण व्यवस्था उन्हीं लोगों ने चौपट कर रखी है जिन्हें उसकी चौकीदारी का जिम्मा सौंपा था। चूरू, झुंझुनूं और हनुमानगढ़ के सैकड़ों ग्रामीण और कुछ शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए बनी जनसहभागिता के मूल आधार वाली पीने के पानी की इस योजना का इस तरह गला ही सूख जाएगा ऐसा तो योजना बनाने वाले ने भी कल्पना नहीं की होगी। हालात यह हैं कि आपणी योजना का वर्तमान ही नहीं उससे जुड़ी भविष्य की उज्जवल संभावनाएं भी पूरी क्षीण होती दिखाई देने लगी हैं।&lt;br /&gt;राज्य सरकार तो चूरू की आपणी योजना को दिखा विश्व बैंक से इसे राज्य के अन्य जिलों में लागू करने का सुखद सपना देख रही है। जबकि स्थिति यह है कि योजना निकट भविष्य में चूरू में ही ठीक से संचालित हो सके इसमें संशय है। खुद जलदाय विभाग के अधिकारियों का दावा है कि कि जिन क्षेत्रों में योजना के जरिए पाइप लाइन से जलापूर्ति की जा रही है वहां इतने अवैध कनेक्शन है कि योजना का उस उपभोक्ता को लाभ दे पाना ही मुश्किल हो गया है जो कि सद्इच्छा से लाभ  चाहता है।&lt;br /&gt;मोटे अनुमान के अनुसार योजना से जुड़े गांवों में करीब तीस से चालीस हजार अवैध कनेक्शन हैं। यह सब कैसे हुए? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? यदि इन सबकी जांच और झंझटों में उलझा न भी जाए तो कम से कम अब इस पर तो ठोस कदम उठाने की जरूरत है ही कि अवैध कनेक्शनों को काटा कैसे जाए? फिर यह कि योजना से जुड़े अंतिम छोर के व्यक्ति और गांव तक पानी पाइप के जरिए कैसे पहुंचाया जाए? यह सच्चाई है कि योजना की पाइप लाइन में नियमित पानी प्रवाह नहीं बने रहने से उसके जोड़ों में लगी रिंगों को दीमक चट कर जाती है। इससे स्थिति यह हो गई है एक किलो मीटर के रास्ते में बीसियों जगह रिसाव हो गए।&lt;br /&gt;अब भला पानी भेजने वाले और पानी पाने वाले सबकी नीयत साफ भी हो तो आखिर तक पानी पहुंचने की स्थिति ही नहीं बनती। पम्प हाउस से निकलने वाला पानी गांव की टंकी तक पूरा पहुंचता ही नहीं तो गुवाड़ी में लगी टूटी से पानी टपकेगा कैसे? योजना को संचालित करने वाले जलदाय महकमें के कारिंदें ग्रामीणों को कहते हैं कि वे पूरा पानी भेज रहे हैं गांव में जिन लोगों ने अवैध कनेक्शन किए हैं उन्हें काट दे तो पाइप में पानी आ जाएगा। ग्रामीण कहते है कि अवैध कनेक्शन काट दिए फिर भी पानी नहीं पहुंचा क्यों कि लाइन में पूरा पानी छोड़ा ही नहीं जाता। उनका आरोप है कि विभाग के लोग पानी माफिया से मिलकर पानी बेच रहे हैं। पानी पंचायतों और विभागीय अधिकारियों के बीच चलती इस नूरा कुश्ती ने स्थिति यह कर दी कि पम्प हाउस के नजदीक के गांवों में भी पाइप लाइन के जरिए एक माह में भी जलापूर्ति नहीं की जा रही। टैंकरों से जलापूर्ति में सबकी चांदी बन रही है और पाइप लाइन दीमक चट कर रही है। पत्रिका टीम ने देखा कि मौजूदा हालात में पानी नहीं पीकर भी ग्रामीण सुरक्षित रह सकता है पानी पीकर तो उसे जलजनित बीमारी घेर ले तो कोई बड़ी बात नहीं। आपणी योजना का पानी जिस स्त्रोत से और जिस वितरिका के माध्यम से जिन जगहों पर होता हुआ जिस हालत में पहुंच रहा है, वह शब्दों में बयां करना मुश्किल है। फिर उसे जिस तरह से स्वच्छ और शुद्ध किया जा रहा है यह इस बात से समझा जा सकता है कि पानी के ऑटोमेटिक ट्रीटमेंट प्लांट वर्षों से बंद पड़े हैं।&lt;br /&gt;अनुभवी तकनीकी रसायन विशेषज्ञ प्लांट पर नियुक्त ही नहीं है। अनुमान के आधार पर हैल्परों से पानी की शुद्धता व स्वच्छता व्यवस्था बनाई रखी जा रही है। इन सब हालातों में जलदाय विभाग के आला से अदने अभियंता चाहे जो दावे व वादे करते हो इसमें कोई दोराय नहीं कि मौजूदा हाल और हालात अपेक्षानुकूल नहीं रहे। फिर भी अभी बहुत समय है। पानी की कीमत को जाना जाए और उसके उपयोग के प्रति जागा जाए। रिस-रिसकर व्यर्थ बहते पानी और ईंट-ईंटकर ढहते साधन-संसाधन को बचाया जाए। इस बार सिर्फ एक तरफा नहीं बल्कि चौतरफा समझ, संकल्प और समर्पण की जरूरत होगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;फैक्ट फाइल&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;1994- शुरुआत&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;2003- गांव-गांव पहुंचा पानी&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;2 हजार किमी में- उच्चगुणवत्ता की पाइप लाइन&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;20 हजार वर्ग किमी- क्षेत्रफल में फैली&lt;br /&gt;------&lt;br /&gt;24 घंटे- जलापूर्ति का दावा&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;485 गांव व 05 कस्बे- वर्तमान में जुड़े हैं&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;20 गांव-सरदारशहर के जुड़े ही नहीं&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;70 गांव- योजना से कटने को हैं तैयार&lt;br /&gt;------&lt;br /&gt;09 लाख- लोग लाभान्वित&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;04 स्थानों पर-जल शुद्धिकरण सयंत्र&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;02 स्थानों पर- बड़े जल भंडारण गृह&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;योजना की मूल भावना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भ-जल की गुणवत्ता संबंधी समस्याओं से जूझ रहे चूरू, झुंझुनंू व हनुमानगढ़ जिले के लगभग बीस हजार वर्ग किलोमीटर में पीने के लिए नहर का शुद्ध व स्वच्छ पानी मुहैया करवाने की दृष्टि से वर्ष 1994 में आपणी योजना बनाई गई। मरु क्षेत्र में भागीरथी साबित हुई आपणी योजना में करोड़ों रुपए का वित्तभार संयुक्त रूप से जर्मन सरकार व राजस्थान सरकार ने वहन किया। योजना के प्रथम चरण में 370 गांव व दो शहरों के लगभग नौ लाख लोग लाभान्वित होने थे।&lt;br /&gt;---------&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;निशचित रूप से आपणी योजना में ढेरों विकृतियां पैदा हो गई हैं। वर्षों पुरानी इस व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। योजना की स्थिति दयनीय होने लिए ग्रामीण भी बराबर के जिम्मेदार हैं। प्रत्येक गांव में औसत ढाई सौ अवैध कनेक्शन हैं। सबसे अधिक समस्या राजगढ़ के गांवों में है। योजना के मूल स्वरूप को वापस लाने के लिए फिल्टर प्लांट, पाइप लाइन, साफ-सफाई, तीन सौ गांवों में मीटर बदलने तथा स्टाफ की कमी दूर करने के पांच सौ करोड़ रुपए के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-श्रवण कुमार शर्मा, अधीक्षण अभियंता,  आपणी योजना, चूरू&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;ना पूरा पानी, ना सफाई&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;घासला अगुना पम्प हाउस से जुड़े गांव भुम्भाड़ा में जलापूर्ति अनियमित है। पानी पंचायत भंग होने के कगार पर है। मेहलाणा, बास धेतरवाल व मेहलाणा दिखणादा व उत्तरादा में जलापूर्ति प्रभावित है। हौज के तल में खड्डा है, आधा पानी तो जमीन में ही समा जाता है। हौज की अर्से से सफाई ही नहीं हुई। पम्प का स्टाटर खराब पड़ा है। ब्लीचिंग पाउण्डर ही नहीं है। महलाणा के लोग पांच टंकियों पर कनेक्शन तथा घासला से रोजाणी बाइपास लाइन चाहते हैं।इसके लिए वे खाई खोदने को भी तैयार हैं।वर्तमान में योजना से झुंझुनूं व चूरू &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;--------&lt;br /&gt;जिले के राजगढ़, तारानगर, चूरू, रतननगर व बिसाऊ कस्बा तथा करीब 485 गांव जुड़े हैं। योजना की अस्सी फीसदी दुर्गति अवैध कनेक्शनों के कारण हुई है। दस फीसदी व्यवस्थागत खामियां तथा दस फीसदी विभागीय लापरवाही भी जिम्मेदार है। योजना की सबसे बड़ी त्रास्दी यह है इसके शुरू होने के बाद से ही रख-रखाव पर कभी कोई बड़ी राशि खर्च नहीं की गई। इसे&lt;br /&gt;बस चलाते गए। इसलिए वर्तमान में इस स्थिति का सामना करना पड़ा है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-पीसी शर्मा, एक्सईएन, आपणी योजना, तारानगर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जारी...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-2515601955208564664?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/2515601955208564664/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_18.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2515601955208564664'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2515601955208564664'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_18.html' title='अपनों ने ही बना दी पराई'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-6240797903982559991</id><published>2010-04-17T20:20:00.000+05:30</published><updated>2010-04-20T20:41:17.839+05:30</updated><title type='text'>बेटियों ने बजाया डंका</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;चूरू।&lt;/strong&gt; आठवीं बोर्ड परीक्षा में जिले की बेटियों ने खूब नाम कमाया है। बेटियों ने कुल परीक्षा परिणाम में बाजी मारने के साथ ही बोर्ड की अस्थायी वरीयता सूची में भी छात्रों की कडी टक्कर दी है। जिले में 79 छात्राओं ने अस्थायी वरीयता सूची में जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है। इनमें से 18 छात्राओं ने जिला स्तर पर जबकि शेष ने तहसील स्तर पर परचम लहराया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डाइट सूत्रों के अनुसार इस बार आठवीं बोर्ड परीक्षा में जिलेभर की कुल 16 हजार 313 छात्राएं शामिल हुईं। इनमें से 11 हजार 6 20 छात्राओं ने अगली कक्षा में जगह बनाई है। छात्राओं का कुल परीक्षा परिणाम 71.23 प्रतिशत रहा है, जो छात्रों से 1.11 प्रतिशत अघिक है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;जिला स्तर पर पूजा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;बोर्ड की जिला स्तरीय अस्थायी वरीयता सूची में छात्रा वर्ग में सुजानगढ के बाल भारती विद्यापीठ बालिका विद्यालय की छात्रा पूजा चौहान ने 94.67 फीसदी अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जिला स्तर के 25 स्थानों पर कुल 42 विद्यार्थी काबिज हुए हैं। इनमें 18 छात्राएं हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;तहसील स्तर पर सिरमौर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;बोर्ड की तहसील स्तरीय अस्थायी वरीयता सूची में कुल 6 1छात्राएं शामिल हैं। इनमें से श्री भारती आदर्श विद्यापीठ सीनियर सैकण्डरी विद्यालय की कनुप्रिया वर्मा सरदारशहर तहसील में तथा श्री गांधी बाल निकेतन की मेघना शर्मा रतनगढ तहसील में सिरमौर रही हंै। मेघना ने 93 प्रतिशत तथा कनुप्रिया ने 90.22 अंक हासिल किए हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इतनी छात्राएं मेरिट में&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;तहसील - छात्रा&lt;br /&gt;चूरू - 13&lt;br /&gt;रतनगढ - 14&lt;br /&gt;राजगढ - 7&lt;br /&gt;तारानगर - 8&lt;br /&gt;सुजानगढ - 9&lt;br /&gt;सरदारशहर - 10&lt;br /&gt;~~~~&lt;br /&gt;इसमें कोई शक नहीं कि लडकों की तुलना में लडकियां पढाई पर अघिक ध्यान देती हैं। लडकियां घरेलू कामकाज में हाथ बंटाने के बावजूद अच्छे अंको से पास हुई हैं। इस बार भी छात्राओं का परीक्षा परिणाम शानदार रहा है। जो बालिका शिक्षा को बढावा देने के लिहाज से अच्छा है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-महावीर सिंघल, प्राचार्य, डाइट, चूरू&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-6240797903982559991?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/6240797903982559991/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_17.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6240797903982559991'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6240797903982559991'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_17.html' title='बेटियों ने बजाया डंका'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-7879548552682531050</id><published>2010-04-10T13:38:00.001+05:30</published><updated>2010-04-11T13:57:58.578+05:30</updated><title type='text'>पंचायत भवनों का निखरेगा रूप</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;पांच-पांच हजार रूपए उपलब्ध करवाए जाएंगे&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;चूरू।&lt;/strong&gt; इसे महात्मा गांधी रोजगार गारण्टी योजना के सुचारू संचालन का प्रयास कहे या ग्राम पंचायत को आदर्श बनाने की कवायद। कारण जो भी हो मगर पंचायत भवन का रूप निखरना तय है। अब पंचायत भवन न केवल बाहर बल्कि भीतर से भी चमक उठेगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है।&lt;br /&gt;जिले की समस्त 249 ग्राम पंचायतों को महानरेगा की प्रशासनिक मद से पांच-पांच हजार रूपए उपलब्ध करवाए जाएंगे। जिसका उपयोग पंचायत भवन की दीवारों पर सफेदी, दरवाजों व खिडकियों पर रंग-रोगन, आवश्यक सामग्री जैसे फर्नीचर, पंखा व दरी खरीदने तथा पानी की सुविधा उपलब्ध कराने में करना होगा।&lt;br /&gt;इससे न केवल पंचायत भवन सुव्यवस्थित एवं सुदृढ होगा बल्कि ग्राम सेवकों व ग्राम रोजगार सहायकों को महानरेगा का कार्य सम्पादित करने में भी आसानी रहेगी। अघिकारिक जानकारी के अनुसार जिले के समस्त कार्यक्रम अघिकारियों को दस अप्रेल तक अपने क्षेत्र की समस्त ग्राम पंचायतों के खातों में पांच हजार रूपए हस्तांतरित करने तथा अपनी निगरानी में ग्राम सेवकों के माध्यम से 25 अप्रेल तक राशि का उपयोग करवाने के आदेश दिए जा चुके हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;~~~~~&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;नरेगा का नाम भी होगा &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;गां&lt;/strong&gt;वों&lt;/span&gt; में महानरेगा की कागजी कार्यवाही पंचायत भवन में बैठकर पूरी की जाती है। योजना का समस्त रिकॉर्ड भी पंचायत भवन में रखा जाता है। ऎसे में अब पंचायत भवन पर पंचायत के नाम के साथ-साथ 'महानरेगा संदर्भ केन्द्र' मोटे अक्षरों में लिखवाया जाएगा।&lt;br /&gt;~~~~~~~&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;हर भवन की होगी श्रेणी&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;पं&lt;/strong&gt;चायत भवनों को निखारने के लिए 25 अप्रेल तक का समय तय किया गया है। इसके बाद विभिन्न अघिकारियों से पंचायत भवन का निरीक्षण करवाया जाएगा। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर पंचायत की अ, ब,स एवं द श्रेणी निर्घारित की जाएगी। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;~~~~&lt;br /&gt;पंचायत भवनों की दशा सुधारने की दिशा में कदम बढा दिए हैं। कार्यक्रम अघिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इसमें निरीक्षण का भी प्रावधान रखा है। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करेंगे।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;-अबरार अहमद, अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं सीईओ जिला परिषद, चूरू &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-7879548552682531050?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/7879548552682531050/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_10.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7879548552682531050'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7879548552682531050'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post_10.html' title='पंचायत भवनों का निखरेगा रूप'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-6231368448282242681</id><published>2010-04-07T10:26:00.000+05:30</published><updated>2010-04-08T10:39:36.678+05:30</updated><title type='text'>एक किलोमीटर में एक ही स्कूल</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;चूरू। गांवों के दर्जनों विद्यालयों में जल्द ही भारी उलट-फेर होगा। अब छात्रों के साथ-साथ अध्यापकों को भी नए विद्यालय में जाना पडेगा। यह सब विद्यालयों के एकीकरण के तहत होगा। शिक्षा महकमे ने एकीकरण की कवायद शुरू कर दी है। विभाग के कर्मचारी एकीकरण के प्रस्ताव तैयार करने में जुट गए हैं। ग्रामीण विद्यालयों की तमाम जानकारियां जुटाई जा रही हैं।&lt;br /&gt;एकीकरण की प्रक्रिया से गांव में एक किलोमीटर के दायरे में स्थित विद्यालय ही प्रभावित होंगे। शहरी क्षेत्र के विद्यालय पर इसका कोई असर नहीं पडेगा।&lt;br /&gt;एक किलोमीटर के दायरे में एक ही स्तर के एक से अघिक विद्यालय होने पर सबको एक विद्यालय में समाहित किया जाएगा। उप्रावि व माध्यमिक स्तर के विद्यालयों के एकीकरण कक्षा 6 , 7 व 8 की छात्र संख्या के आधार पर होगा। जिन विद्यालयों में तीनों कक्षाओं की छात्र संख्या अघिक होगी, वह विद्यालय ही संचालित किया जा सकेगा।&lt;br /&gt;प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए ब्लॉक, जिला व निदेशालय स्तर पर तीन समितियां गठित की गई हंै। ब्लॉक स्तरीय समिति 15 अप्रेल को जिला स्तर पर तथा जिला स्तरीय समिति को 17 अप्रेल को निदेशालय स्तर पर एकीकरण के प्रस्ताव भेजने हैं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;* ग्रामीण क्षेत्र में विद्यालय&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;* प्राथमिक-638&lt;br /&gt;*उच्च प्राथमिक-644&lt;br /&gt;* माध्यमिक-199&lt;br /&gt;* उच्च माध्यमिक-83&lt;br /&gt;(शिक्षा विभाग के अनुसार)&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;* शिक्षकों को आवास सुविधा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;एकीकरण से छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों को भी फायदा होगा। छात्रों को जहां शिक्षकों की कमी से नहीं जूझना पडेगा वहीं शिक्षकों को आवास की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। एकीकरण के बाद खाली हुए विद्यालयों का छात्रावास व स्टाफ के निवास के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। खाली भवन के उपयोग का निर्णय वरिष्ठतम प्रधानाध्यापक एवं शाला प्रबंध समिति करेगी।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;* शहरी क्षेत्र की स्थिति खराब&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;एकीकरण में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों को शामिल किया गया है, लेकिन शहरी क्षेत्र की स्थिति अघिक खराब है। एक किलोमीटर के दायरे में एक ही स्तर के कई विद्यालय संचालित हो रहे हैं। विभागीय जानकारी के मुताबिक शहरी क्षेत्र के विद्यालयों के भी एकीकरण की आवश्यकता है। जिले के शहरी क्षेत्र में 24 उच्च माध्यमिक, 36 माध्यमिक, 91 प्राथमिक तथा 8 7 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;-----&lt;br /&gt;एकीकरण की तैयारियां शुरू कर दी है। विद्यालयों में प्रस्ताव के प्रारूप भिजवाए हैं। 17 अप्रेल को समस्त प्रस्ताव निदेशालय को भेजे जाएंगे।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;-सांवर मल गहनोलिया, सहायक निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-6231368448282242681?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/6231368448282242681/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6231368448282242681'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/6231368448282242681'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/04/blog-post.html' title='एक किलोमीटर में एक ही स्कूल'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-7845888622344109020</id><published>2010-03-30T14:30:00.003+05:30</published><updated>2010-03-31T14:41:44.884+05:30</updated><title type='text'>आंगनबाडी केन्द्रों पर मांग सकेंगे काम</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;चूरू 29 मार्च ।&lt;/strong&gt; पारदर्शिता को लेकर हिचकोले खाती महानरेगा की नैया आंगनबाडी केन्द्र पार लगाएंगे। अब आंगनबाडी केन्द्रों पर न केवल नरेगा में कार्यरत श्रमिकों की सूची हर पखवाडे देखी जा सकेगी बल्कि नरेगा में काम मांगने वालों को सरपंच, ग्राम सेवक व ग्राम रोजगार सहायक आदि के चक्कर भी नहीं लगाने &lt;span class=""&gt;पडेंगे।&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S7MRCvs2O6I/AAAAAAAAAfA/BDQP-qm7c5E/s1600/images.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5454722312537783202" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 177px; CURSOR: hand; HEIGHT: 130px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S7MRCvs2O6I/AAAAAAAAAfA/BDQP-qm7c5E/s320/images.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt; महानरेगा में यह नई व्यवस्था एक अप्रेल से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चूरू जिले में लागू होगी।&lt;br /&gt;जयपुर में हाल ही सम्पन्न बैठक में पंचायती राज विभाग के मंत्री, महानरेगा की पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व विंग की मुखिया एवं सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा राय समेत अन्य अघिकारियों ने चूरू जिला प्रशासन की इस योजना को स्वीकृति दी है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;* केन्द्र पर मांग पत्र &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;योजना के तहत जिले के प्रत्येक आंगनबाडी केन्द्र पर नरेगा के कम से कम दो सौ मांग पत्र रखवाएं जाएंगे। केन्द्र से कोई भी व्यक्ति काम मांग पत्र प्राप्त करने के साथ ही जमा भी करवा सकेगा। इस काम की देखरेख का जिम्मा आंगनबाडी कार्यकर्ता को सौंपा जाएगा। इसके लिए कार्यकर्ता को प्रतिमाह करीब दो सौ रूपए मानदेय मिलेगा। जिले में पांच सौ की आबादी पर एक आंगनबाडी केन्द्र स्थापित है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;* हर पखवाडे जारी होगी सूची&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नरेगा में सौ दिन काम कर चुके तथा कार्यरत श्रमिकों की सूची साल के अंत में पंचायत भवन पर चस्पा की जाती है। जिसमें पारदर्शिता की गुंजाइश कम रहती है। लेकिन अब एक अप्रेल के बाद पंचायत समिति से कम्प्यूटराइज्ड मस्टररोल जारी होने के साथ ही श्रमिकों की सूची आंगनबाडी केन्द्रों पर उपलब्ध करवाई दी जाएगी। जिसे कोई भी व्यक्ति देख सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;*प्रदेशभर में लागू होने की उम्मीद&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पारदर्शिता बनाए रखने व श्रमिकों की ढेरों समस्याओं का समाधान करने वाली यह नई व्यवस्था छह माह बाद प्रदेशस्तर पर लागू होने की उम्मीद है। गत वर्ष सितम्बर में चूरू जिला प्रशासन ने महानरेगा में देश में पहली बार कम्प्यूटराइज्ड मस्टररोल जारी किया था। जिसे वर्तमान में प्रदेशभर में लागू कर दिया गया है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;*यह होगा लाभ&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;नई व्यवस्था के लागू होने के बाद काम मांगने वालों को ग्राम पंचायत कार्यालय नियमित नहीं खुलने, सरपंच, ग्रामसेवक व ग्राम रोजगार सहायक द्वारा द्वेषता के चलते काम नहीं देने, गांव से पंचायत मुख्यालय तक मीलों का सफर तय करने की समस्या से निजात मिल सकेगी।&lt;br /&gt;------&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;महानरेगा को अघिक पारदर्शी बनाने की यह नई व्यवस्था इस साल एक अप्रेल से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चूरू में लागू की जा रही है। परिणाम अच्छे रहे तो उम्मीद है कि आगामी छह माह में इसे प्रदेश स्तर पर लागू कर दिया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-7845888622344109020?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/7845888622344109020/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_30.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7845888622344109020'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/7845888622344109020'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_30.html' title='आंगनबाडी केन्द्रों पर मांग सकेंगे काम'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S7MRCvs2O6I/AAAAAAAAAfA/BDQP-qm7c5E/s72-c/images.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-1031076110946114206</id><published>2010-03-23T14:23:00.000+05:30</published><updated>2010-03-24T14:25:51.436+05:30</updated><title type='text'>नया तंत्र बिजली में फूंकेगा मंत्र</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class="fullpost"&gt; चूरू। ग्रामीण क्षेत्रों में फीडर सुधार कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के बाद अब निगम ने शहरी रोशनी पर नजर टिका दी है। शहरी क्षेत्रों में वॉल्टेज की समस्या से निजात पाने तथा तकनीकी छीजत घटाने के मकसद से निगम ने नए तंत्र पर काम शुरू कर दिया है।&lt;br /&gt;निगम के नए कार्यक्रम आर-एपीडीआरपी के तहत जिले में पचास हजार से अघिक आबादी वाले छह शहर व कस्बों का चयन किया गया है। कार्यक्रम के तहत चयनित क्षेत्रों के लिए विशेष योजना तैयार कर स्वीकृत के लिए मुख्यालय को भिजवाई जा चुकी है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो शहरी क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में नई जान आ जाएगी। उपभोक्ताओं को सुचारू बिजली आपूर्ति मिलने के साथ ही तकनीकी छीजत भी घटकर 15 प्रतिशत तक आने की उम्मीद है।&lt;br /&gt;कार्यक्रम में शामिल चूरू, सादुलपुर, सरदारशहर, बीदासर, सुजानगढ व रतनगढ में फिलहाल 25 से 50 प्रतिशत तक छीजत हो रही है। कार्यक्रम के तहत विभिन्न स्थानों पर 33 केवी के नए जीएसएस स्थापित किए जाएंगे। जिला मुख्यालय पर मोचाीवाडा व लाल घंटाघर के पास जीएसएस प्रस्तावित है। इसके अलावा लम्बी लाइन को छोटी करने के लिए चूरू शहर में करीब 70 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाने हैं।&lt;br /&gt;ये होंगे काम&lt;br /&gt;* जहां थ्री फेज ट्रांसफार्मर लगाना संभव नहीं वहां पर सिंगल फेज ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे।&lt;br /&gt;* एलटी लाइन को छोटा किया जाएगा ताकि वोल्टेज पूरा मिल सके।&lt;br /&gt;* मुख्य स्थान पर टावर लगाए जाएंगे।&lt;br /&gt;* सामान्य कण्डक्टर की जगह विशेष कण्डक्टर लगेंगे।&lt;br /&gt;* विभिन्न स्थान पर 33 केवी के जीएसएस स्थापित होंगे।&lt;br /&gt;* 11 केवी की नई विद्युत लाइन डाली जाएगी।&lt;br /&gt;* पुराने व डिफेक्टिव मीटर बदलेंगे&lt;br /&gt;* घरों के बाहर लगेंगे मीटर।&lt;br /&gt;शहरी क्षेत्र में सुचारू बिजली की आपूर्ति तथा छीजत का प्रतिशत घटाकर 15 फीसदी तक लाने के लिए मुख्यालय को आर-एपीडीआरपी के तहत प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।-एनएम चौहान, अधीक्षण अभियंता, जोधपुर विद्युत वितरण निगम, चूरू&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-1031076110946114206?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/1031076110946114206/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1031076110946114206'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/1031076110946114206'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html' title='नया तंत्र बिजली में फूंकेगा मंत्र'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-8962025470163992035</id><published>2010-03-21T20:35:00.003+05:30</published><updated>2010-03-22T15:13:55.705+05:30</updated><title type='text'>कली को खिलने दो</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;मेरी तरह आपका भी दिल चाहता होगा कि घर के किसी कोने में कोई बगिया हो...उसमें अलग-अलग रंगों के ढेरों फूल मुस्कुराते नजर आए...रोजाना एक नई कली खिले और फूल बने...ताकि घर का कोना-कोना महक उठे...घर का हर सदस्य उनकी महक का आदी हो जाए...बारिश, आंधी या तूफान में उन्हें जरा सी भी चोट पहुंचे तो दिल बेचैन हो उठे...घर आने वाले हर मेहमान उनकी तारीफ करते नहीं थके...एक-एक कली मानो जाने-अनजाने मेहमान से बतियातीं दिखे...।&lt;br /&gt;पर हर कली के खिलने का अपना एक मौसम होता है...किसी को खून जमा देने वाली सर्दी प्यारी लगती है तो कोई भीषण गर्मी में भी खिल उठती है...बगिया में शायद ही कभी ऐसी कली खिले...जो हर मौसम में हंसती रहे...उसकी महक हर वक्त हमारे साथ रहे...लेकिन दोस्तों दुनिया बनाने वाला एक ऐसी कली भी बनाता है...जिसकी हम कल्पना कर रहे हैं...जो घर तो क्या हमारी पूरी दुनिया महका सकती हो...पर विडम्बना है कि लोग उस कली को खिलने से पहले उजाड़ रहे हैं...।&lt;br /&gt;उसके लिए अपनी मां की कोख सबसे सुरक्षित जगह है...फिर भी देश के लाखों लोग रोजाना उसके खून से अपने हाथ रंग रहे हैं...मेरे अपने अंचल शेखावाटी के लोग तो काफी पढ़-लिख रहे हैं...शायद यहां पर उस नन्ही की जान लेने वाले बहुत कम होंगे...यह बात सिर्फ दो दिन पहले तक मेरा भ्रम थी...।&lt;br /&gt;स्वयंसेवी संस्था शिक्षित रोजगार केन्द्र की 20 मार्च को सीकर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस यह खुलासा हुआ कि शेखावाटी में हर साल 46 हजार कन्याओं की गर्भ में ही हत्या कर दी जाती है...और घिनौने कार्य में सीकर जिला पहले पायदान पर है...जहां हर साल 18 हजार कन्या भ्रूण हत्याएं होती हैं...वहीं झुंझुनूं जिले में 15 हजार व चूरू जिले में 13 हजार कन्याओं को जन्म लेने से पूर्व ही मार दिया जाता है...।&lt;br /&gt;शेखावाटी के तीनों जिलों में से चूरू में इस सामाजिक बुराई का आंकड़ा सबसे कम है। दोस्तों सवाल आंकड़ों का नहीं बल्कि यह है कि आखिर यह अपराध खत्म होने का नाम क्यों नहीं ले रहा...क्यों बेटियों से उनका जन्म लेने का हक छीना जा रहा है...? क्यों उन्हें दुनिया में आने से पहले विदा किया जा रहा है...? आखिर 21वीं सदी में भी लोग पुत्रमोह के जाल से मुक्त क्यों नहीं हो पा रहे हैं...? आज तो बेटियां बुलंद हौसलों के दम पर ऊंची उड़ान भर रही हैं...इसके बावजूद लोग उनकी किलकारी सुनना क्यों पसंद नहीं कर रहे हैं...हरके सवाल मन को झकझोर देता है...।&lt;br /&gt;चूरू में भले ही यह आंकड़ा 13  हजार को छू रहा हो...मगर इसका यह मतलब कतई नहीं कि यहां के वाशिन्दे बेटियों से प्यार नहीं करते...चंद उदाहरण देखें तो सबसे पहले नाम जिला कलक्टर डा. केके पाठक का लेना चाहूंगा...हालांकि उनकी शादी हाल ही हुई है...हाल ही उन्होंने कन्या भू्रण हत्या को रोकने का संदेश देता वार्षिक कलेण्डर जारी किया है...जिसमें संदेश के रूप में लिखी कविताएं पढ़कर उस अबोली के प्रति उनकी समझ का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है...सारी कविताएं उन्होंने खुद लिखी हैं...इसी कड़ी में दूसरा नाम युवा साहित्यकार दूलाराम सहारण का लेना चाहूंगा जो अपनी नन्ही और प्यारी सी बेटी &lt;a href="http://kritikachoudhary.blogspot.com/"&gt;कृतिका चौधरी &lt;/a&gt;के नाम से एक ब्लॉग संपादित कर रहे हैं....दोस्तों इस कड़ी में आपका नाम भी शामिल हो सकता है...।&lt;br /&gt;कन्या भ्रूण हत्या रोकें...दूसरों को भी इसकी रोकथाम के लिए प्रेरित करें।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-8962025470163992035?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/8962025470163992035/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_21.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8962025470163992035'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8962025470163992035'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_21.html' title='कली को खिलने दो'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-3773629118965580244</id><published>2010-03-17T17:59:00.007+05:30</published><updated>2010-03-18T12:03:04.171+05:30</updated><title type='text'>तन्हाई के आलम में...</title><content type='html'>&lt;span style="font-size:85%;"&gt;मैं और मेरी तन्हाई अक्सर मिलकर बातें किया करते हैं...&lt;br /&gt;कि ये प्यार क्यों होता है&lt;br /&gt;प्यार में ये दर्द क्यों होता है&lt;br /&gt;उस दर्द में भी हल्का मजा क्यों होता है&lt;br /&gt;कोई अपना नहीं फिर भी उसका इंतजार क्यों होता है&lt;br /&gt;मैं और मेरी तन्हाई अक्सर मिलकर बातें किया करते हैं....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्यों भीग जाती है ये पलकें किसी की याद में&lt;br /&gt;क्यों उदास हो जाता है ये दिल किसी की याद में&lt;br /&gt;क्यों बेचैन हो जाता है ये मन किसी की याद में&lt;br /&gt;क्यों नहीं मिलता वो सुकून हमें, तड़प है जिसकी याद में&lt;br /&gt;मैं और मेरी तन्हाई अक्सर मिलकर बातें किया करते हैं...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्यों हमारी नजर को तलाश एक नजर की है&lt;br /&gt;क्यों हमारी चाहत को तलाश एक चाहत की है&lt;br /&gt;क्यों हमारे दिल को तलाश एक हमसफर की है&lt;br /&gt;क्यों हमारे दिल को तलाश एक अनदेखे सहारे की है&lt;br /&gt;मैं और मेरी तन्हाई अक्सर मिलकर बातें किया करते हैं...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्यों हर सवाल का जवाब नहीं मिलता हमको&lt;br /&gt;क्यों खुदा से मांगा हर ख्वाब नहीं मिलता हमको&lt;br /&gt;यदि जवाब मिलता है हमें तो वो क्यों पसंद नहीं हमको&lt;br /&gt;क्या यह सच है कि प्यार में ऐसा ही होता है&lt;br /&gt;मैं और मेरी तन्हाई अक्सर मिलकर बातें करते हैं...&lt;br /&gt;कि ये प्यार क्यों होता है&lt;br /&gt;प्यार में ये दर्द क्या होता है&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;----- &lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5449853708562038258" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 242px; CURSOR: hand; HEIGHT: 152px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S6HFEsivffI/AAAAAAAAAeg/2okjVOE2Fe0/s320/images222.jpg" border="0" /&gt;&lt;br /&gt;यह कविता मेरे दोस्त गिरीश जांगिड़ ने मुझे अहमदाबाद से मेल की है। वह एमबीए की पढ़ाई कर रहा है। हम दोनों अपने गांव की एक ही स्कूल में पढ़ा करते थे। एक दिन उसने मेरे ब्लॉग पर 'मैं और मेरी तन्हाई' शीर्षक से प्रकाशित पोस्ट पढ़कर कहा कि यह सब बातें काल्पनिक हैं। इनका वास्तविक जीवन से कोई लेना-देना नहीं। मैंने कहा कि कभी कल्पना करके देखना वास्तविक जीवन की झलक उसमें साफ दिखाई देगी। मैंने उसे &lt;a href="http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/02/blog-post_3007.html"&gt;'मैं और मेरी तन्हाई'&lt;/a&gt; विषय पर लिखने को कहा। दो दिन बाद उसकी कविता मेरे सामने थी।&lt;br /&gt;दोस्तों, क्या आपकों नहीं लगता कि इस कविता में कहीं ना कहीं किसी ना किसी की वास्तविकता छुपी हुई है। किसी का दर्द इससे बयां हो रहा है। काफी हद तक यह युवा दिलों की कहानी लग रही है। हम में से पता नहीं कितनों की यह आपबीती हो सकती है। प्यार में तन्हाई ना हो, भला ऐसा भी कभी हो सकता है।&lt;br /&gt;दोस्तों, बिन मांगे एक छोटी सी सलाह देना चाहूंगा कल्पना का कभी मन में गला मत घोट देना, क्योंकि खुदा हर किसी को कल्पनाशील नहीं बनाता। कभी अपने मन को टटोलना कल्पना खुद आपके सामने होगी। यदि ऐसा होता है तो उसे शब्दों के पंख लगाने में देर मत करना। ताकि उड़ सके वो नीले गगन में।&lt;br /&gt;दोस्तों, शायद आप यकीं नहीं करोगे कि मैंने तन्हाई को अपना सबसे अच्छा दोस्त बना रखा है। जब मैं तन्हा हो जाता हूं तो वह हर बार पूरी शिद्दत से मेरा साथ देती है। तन्हाई एक दिन बता रही थी कि उसके किसी भी दोस्त को उससे शिकायत नहीं है और ना ही कोई गिला-शिकवा।&lt;br /&gt;दोस्तों मेरी तन्हाई को मैंने शब्द कुछ यूं दिए....&lt;br /&gt;यहां पर देखें&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;a href="http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/02/blog-post_3007.html"&gt;http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/02/blog-post_3007.html&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;आपकी भी कोई कल्पना हो तो जरूर लिखना&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-3773629118965580244?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/3773629118965580244/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_17.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/3773629118965580244'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/3773629118965580244'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_17.html' title='तन्हाई के आलम में...'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S6HFEsivffI/AAAAAAAAAeg/2okjVOE2Fe0/s72-c/images222.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-4102007013925865290</id><published>2010-03-11T15:03:00.000+05:30</published><updated>2010-03-14T21:20:31.698+05:30</updated><title type='text'>जाळों ने रोका पानी का प्रवाह</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;अब दो दिन से मिलेगा पानी, पर्याप्त आपूर्ति भी नहीं संभव&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चूरू, 11 मार्च। गर्मी अभी बढऩी शुरू ही हुई है कि पीने के पानी की कमी से लोगों के कण्ठ सूखने लगे हैं। जलदाय विभाग ने चूरू में अब 48 घंटे में जलापूर्ति शुरू कर दी है। उपलब्ध मीठे पानी की भी स्थिति यह है कि आने वाले दिनों में इतना भी पानी आपूर्ति नहीं किया जा सकेगा जितना अब तक किया जा रहा था। यानि जलापूर्ति का अंतराल भी बढ़ गया और पानी की उपलब्ध मात्रा भी घट गई। ऐसा प्रकृति प्रदत्त बरसात की कमी से तो है ही इसके अतिरिक्त विभागीय अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही बरते जाने से भी है।&lt;br /&gt;जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ के गांव गंधेली से मसीता वाली हैड के बीच रावतसर वितरिका तथा गंधेली से कर्मसाना व ललानिया कैनाल की लम्बे समय से सफाई नहीं की गई है। इससे कैनाल और वितरिकाओं में पेड़-पौधे उग आए हंै। जाळे व मिट्टी (गाद) जमा होने से जल प्रवाह क्षमता प्रभावित हो गई है। हालात यह है कि एक दिन में पचास क्यूसेक के बजाय आठ-नौ क्यूसेक पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है।आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह सब विभागीय क्षेत्राधिकार की लड़ाई में लम्बित रहा। वितरिकाएं सिंचाई विभाग क्षेत्राधिकार में है जबकि कैनाल जलदाय विभाग के क्षेत्राधिकार में आती है। इनमें सामान्य तौर पर प्रति दो माह में सफाईकी जानी चाहिए थी। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस ओर उच्चाधिकारियों को ध्यान दिलाए जाने के बाद भी कतई गंभीरता से नहीं लिया गया।&lt;br /&gt;मोटे तौर पर देखा जाए तो 'बाड़ खेत ने खायÓ वाली कहावत आपणी योजना पर सटीक बैठ रही है। गर्मियों की शुरुआत में ही योजना की जलापूर्ति व्यवस्था गड़बड़ा गई है। चूरू-बिसाऊ परियोजना के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र को दो दिन में एक बार मीठा पानी दिया जाने लगा है। निकट भविष्य में अन्य क्षेत्रों की जलापूर्ति में भी कटौती की जा सकती है। इंदिरा गांधी नहर से जुड़ी वितरिकाओं व कैनाल में घटते जल प्रवाह के चलते जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में गर्मियों में मीठे पानी की भंयकर किल्लत रहने की आशंका पैदा हो गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;45 की बजाय 10 क्यूसेक&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;जिले में मीठे पानी की जलापूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए इंदिरा गांधी नहर से रोजाना 45 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। जबकि इन दिनों महज 10 क्यूसेक पानी मिल पा रहा है। हालांकि नहर से पानी तो छोड़ा जा रहा है, लेकिन वितरिका व कैनाल की सफाई के अभाव में पानी पहुंच नहीं पा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चूरू-बिसाऊ परियोजना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सबसे अधिक परेशानी चूरू-बिसाऊ परियोजना से जुड़े उपभोक्ताओं को होगी। परियोजना को रोजाना 18 हजार किलोलीटर पानी की तुलना में 7 हजार किलोलीटर पानी मिल रहा है। वह भी एक दिन के अंतराल से आपूर्ति किया जा रहा है। गत गर्मियों में रोजाना 15 हजार किलोलीटर से अधिक पानी मिला था।&lt;br /&gt;सन्तोष गुप्ता/विश्वनाथ सैनी &lt;span class="fullpost"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-4102007013925865290?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/4102007013925865290/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_11.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4102007013925865290'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/4102007013925865290'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post_11.html' title='जाळों ने रोका पानी का प्रवाह'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-2657932584068449269</id><published>2010-03-08T11:09:00.002+05:30</published><updated>2010-03-08T15:27:23.393+05:30</updated><title type='text'>बुलंद हौसलों की उड़ान</title><content type='html'>&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;महिला&lt;/span&gt; दिवस पर कुछ खास&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S5SS4CM2p8I/AAAAAAAAAeI/jKsuJSVy-qs/s1600-h/Page+2+copy.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446139340758886338" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 256px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S5SS4CM2p8I/AAAAAAAAAeI/jKsuJSVy-qs/s320/Page+2+copy.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; महिला दिवस पर राजस्थान पत्रिका के चूरू पुलआउट में छपे इस लेख को अच्छी तरह देखने के लिए यहां क्लिक करें &lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S5SS4CM2p8I/AAAAAAAAAeI/jKsuJSVy-qs/s1600-h/Page+2+copy.jpg"&gt; &lt;/a&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S5SS4CM2p8I/AAAAAAAAAeI/jKsuJSVy-qs/s1600-h/Page+2+copy.jpg"&gt;http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S5SS4CM2p8I/AAAAAAAAAeI/jKsuJSVy-qs/s1600-h/Page+2+copy.jpg&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-2657932584068449269?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/2657932584068449269/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2657932584068449269'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/2657932584068449269'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='बुलंद हौसलों की उड़ान'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S5SS4CM2p8I/AAAAAAAAAeI/jKsuJSVy-qs/s72-c/Page+2+copy.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-742937992098942303</id><published>2010-02-26T19:46:00.001+05:30</published><updated>2010-02-26T19:40:46.258+05:30</updated><title type='text'>तुमको ना भूल पाएंगे अलसीसर</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;शेखावाटी की हवेलियाँ और उन &lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;पर &lt;/strong&gt;बनी&lt;/span&gt; चित्रकारी आपको राजस्थान के शाही अंदाज से रूबरू करवाती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;मरूधरा के धोरों के बीच रचा बसा झुंझुनू जिले का अलसीसर अपनी ऐतिहासिक हवेलियों, कुए-बावडी, छतरिया, जोहड़, और मंदिरों की स्थापत्य कला के दम पर पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है. सात संदर पार से पर्यटक यहाँ की कला और संस्कृति को निहारने के लिए आते हैं. जब पर्यटक यहाँ आकर ग्रामीण झोंपडियाँ, परम्परागत चारपाई, पत्थर की बैंचों पर बैठता है, तो उसको के रहन सहन का आनद मिलता है. भ्रमण कार्यक्रम में किसानों के पर्यटकों को दही बिलोना, दूध निकलना, रोटी बनाना, सूट काटना, दरी बुनाई, फसल कटाई, निराई व गुडाई दिखाई जाती है. विदेशी पर्यटक यहाँ के ग्रामीण में रच-बस जाते है. यही कारण हिया कि वे यहाँ के शादी- विवाह में बाकायदा शामिल होकर कन्यादान तक रस्म तक निभाते हैं. पर्यटक अलसीसर के रीति रिवाज, तीज त्योंहार, शादी, बाण-बिंदोरी व धार्मिक में दिल खोलकर शामिल होते हैं. इससे लोक संस्कृति को तो बढावा मिल ही रहा है साथ ही ग्रामीणों कि आजीविका का माध्यम भी बन रहे हैं. यहाँ पर ऐतिहासिक हवेलियों में बनी दो बड़ी होटलों समेत तीस से अधिक ऐसे हैं जो बरबस ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. यह बात दीगर है कि जिले के पर्यटन स्थल के रूप में अलसीसर कभी भी प्रसिद्ध नहीं हुआ है लकिन पर्यटकों का जमावडा इसे पर्यटन स्थल के रूप में इंगित करता है.विवाह समारोह में नाचते-गाते जागरण में भजनों पर थिरकते व तीज-त्योहारों का ग्रामीणों के साथ मिलकर लुफ्त उठाते पर्यटक अलसीसर कि गलियों में आसानी से देखे जा सकते हैं. गागा नवमी को बीहड़ में लगने वाले मेले मेले में भी पर्यटक अच्छी तादाद में आते हैं. दस फीसदी से अधिक पर्यटक यहाँ कि हवेलियों कि कलात्मक शैली के साथ-साथ विवाह समारोह व जागरण में शामिल होने को तवज्जो देते हैं. जागरण चाहे सत्यनारायण मंदिर में हो या किसी मोह्हले में पर्यटक पूरी तरह से शरीक होते हैं। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;इसलिए आते है पर्यटक&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;खेतानोकि हवेली में मुनीम रह चुके हरिराम चौमाल के मुताबिक अलसीसर में लक्खाराम, मालीराम, फूलचंद खेतान, झाबरमल सेठ, तेजपाल सेठ, गणेश नारायण, पूनियां, इंदरसिंह व रामदेव झुंझुनू वालों कि हवेली, छतु सिंह कि छतरियां, लक्ष्मीनाथ और सत्यनारायण मंदिर, झाबरमल, सीताराम व रामाजसराया के कुए तथा मरोदियों का तलब आदि दर्शनीय स्थल है. इनमें झाबरमल और लखाराम जी की हवेलियाँ के कमरों की दीवारों पर की गयी चित्रकारी पर्यटकों को काफी लुभाती है. मीठिया कुवे पर बनीं छतरियों के शिलालेख और कुए के अन्दर साठ फीट तक कि गयी चित्रकारी को देख पर्यटक दांतों टेल ऊँगली दबा लेते हैं&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;पर्यटकों कि शादी&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;होटल के सामने से बारात गुजर रही हो तो पर्यटक बारात में शामिल होने से नहीं चूकते. पर्यटन स्थलों के साथ साथ पर्यटकों को यहाँ कि आबो हवा भी काफी लुभाती है. गत दो वर्षों में दो विदेशी जोड़े अलसीसर कि ज़मी पर राजस्थानी परंपरा से सात फेरे लेकार जीवनसाथी बन चुके हैं. बताया जाता है कि दोनों जोडों ने वेबसाइट पर अलसीसर की कलात्मक शैली को देख ग्रामीण रीति रिवाज़ से शादी करने की सोची।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;आय का जरिया&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;कस्बे में आने वाले पर्यटक न केवल होटलों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहे हैं बल्कि ग्रामीणों कि आय का जरिया भी बन चुके हैं. होटल इन्द्रविलास के मेनेजर के.सी. शर्मा बताते हैं कि पर्यटक यहाँ से मसाले, साहित्य, हेंडी क्राफ्ट उत्पाद, ग्रामीण कपडे, कैर, सांगरी व् मिटटी के बर्तन खरीदना अधिक पसंद करते हैं. पशुपालकों और वाहन मालिकों को भी अच्छी आय होती है।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;जुडाव सहकारी बैंक का&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;अलसीसर में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए केंद्रीय सहकारी बैंक पर्यटकों से जुड़कर आय बढाने की कवायद शुरू कर चूका है. अलसीसर ग्राम सेवा सहकारी समिति कि और से यहाँ पर ग्रामीण और आधुनिक शैली को मिलाकर अष्टकोंनीय झोपडा बनाया गया है. झोपडे के अन्दर व सामने ग्रामीण परिवेश के सामान रखे गए हैं. पर्यटकों को इसमें आराम करने कि सुविधा दी जायेगी तथा कालबेलिया नृत्य व कठपुतलियों का खेल दिखाया जायेगा। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;सर्वाधिक पर्यटक जर्मनी के&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;जिला मुख्यालय से पच्चीस किलोमीटर दूर स्थित यह क़स्बा सड़कों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुड़ा हुआ है. यहाँ पर जयपुर, दिल्ली और बीकानेर होते हुए हर साल जर्मनी, फ्रांस, स्वीजरलैण्ड, इटली, स्पेन, इंग्लैंड और अमेरिका के हाजोरों पर्यटक आते हैं. हर दूसरे दिन 25 से 30 पर्यटकों का दल यहाँ पहुँच जाता है. अलसीसर आने वाले पर्यटक में अधिक संख्या जर्मनी के पर्यटकों कि होती है। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;कैसे &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;पंहुचे&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;जयपुर, चूरू और झुंझुनू से अलसीसर बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है. चूरू से 40 किमी, झुंझुनू से 25 किमी, जयपुर से 210 किमी। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://vishwanathnews.blogspot.com/2008/04/blog-post_30.html"&gt;आगे पढ़ें...&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-size:130%;color:#3333ff;"&gt;&lt;em&gt;2008 में राजस्थान पत्रिका के परिवार परिशिष्ट में प्रकाशित &lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;color:#3333ff;"&gt;&lt;em&gt;लेख&lt;br /&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-742937992098942303?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/742937992098942303/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/02/blog-post_7638.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/742937992098942303'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/742937992098942303'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/02/blog-post_7638.html' title='तुमको ना भूल पाएंगे अलसीसर'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-8877211261717329006</id><published>2010-02-11T15:48:00.011+05:30</published><updated>2010-02-12T12:12:43.162+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='वेलेंटाइन-डे'/><title type='text'>ढाई आखर प्रेम का...</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;चूरू&lt;/span&gt; 11 फरवरी।&lt;/strong&gt; दोस्तों, इंसान की जिंदगी में कभी ना कभी कोई ना कोई जरूर दस्तक देता है। खासकर जवानी में। क्योंकि यह उम्र ही ऐसी होती है, इसमें दिल किसी &lt;/span&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S3PsNGP_H8I/AAAAAAAAAco/QXYtnaMOYnM/s1600-h/CAF22DJ7.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5436948884926439362" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 201px; CURSOR: hand; HEIGHT: 173px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S3PsNGP_H8I/AAAAAAAAAco/QXYtnaMOYnM/s200/CAF22DJ7.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;के लिए धड़कता है तो दुनिया की भीड़ में अलग दिखने के लिए मचलता भी है। इस उम्र में किसी का दिल लेना...किसी को अपना बनाना और किसी के ख्यालों में गुम हो जाना कोई नई बात नहीं है। जवां दिलों की ख्वाहिशों को तो मानों पंख लग जाते हैं। दुनिया हसीन और आसमां रंगीन नजर आने लग जाता है। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;जाने कब और कहां...किस पर नजर ठहर जाए...कोई नहीं जानता है। ''आंख लड़ी, बात बड़ी और प्यार हो गया।'' इसके बाद तो प्रेमी जोड़े हर पल-हर लम्हे को अपने अंदाज से जीने लगते हैं। चाहे दिन हो या रात...दोनों को एकांत की तलाश रहती है। तकदीर से कभी एकांत के दो पल मिल जाए तो वे खुद को खुशनसीब समझने लगते हैं। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;दोनों की बातों का सिलसिला कभी खत्म होने का नाम ही नहीं लेता। प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए चांद तारे तोड़ लाने का वादा तक करता है तो प्रेमिका उसके लिए सारे जमाने को छोडऩे को तैयार हो जाती है। दोनों सात जन्मों तक साथ &lt;/span&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S3PtsKujh8I/AAAAAAAAAcw/4oFhg2inwBo/s1600-h/CAEXDDG2.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5436950518215968706" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 220px; CURSOR: hand; HEIGHT: 209px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S3PtsKujh8I/AAAAAAAAAcw/4oFhg2inwBo/s200/CAEXDDG2.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;निभाने की कसमें तक खा लेते &lt;span class=""&gt;हैं। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;&lt;span class=""&gt;प्यार&lt;/span&gt; हमसफर बन जाए तो कहना ही क्या? जिंदगी प्यार के सहारे कैसे कट जाए...कुछ पता नहीं चलता। मगर दोस्तों सभी जोड़ों को यह मौका नहीं मिलता। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;हर प्यार परवान तो चढ़ता है मगर जरूरी नहीं उसे मंजिल मिले ही। अधिकतर मामलों में दोनों के बीच परिवार खुद दीवार बन जाते हैं। जिसे तोड़ पाना दोनों को अपने बुते से बाहर लगने लगता है। समाज भी दोनों के रिश्ते को मंजूरी नहीं देता। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;इन सब के बावजूद कभी कभी प्यार कामयाब भी हो जाता है। तो यूं मानों प्यार की असली अग्नि परीक्षा शुरू हुई है। &lt;span class=""&gt;दो&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S3Pwrc3tymI/AAAAAAAAAc4/OdbrZpd8Xhw/s1600-h/images.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5436953804441242210" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 211px; CURSOR: hand; HEIGHT: 118px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S3Pwrc3tymI/AAAAAAAAAc4/OdbrZpd8Xhw/s320/images.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;नों&lt;/span&gt; को एक ही छत के नीचे रहते अपने प्यार की ज्योति को जगाए रखना होगा। प्रेम जैसा रिश्ता जितना मजबूत है उससे लाख गुना अधिक नाजूक है। तभी तो रहिम जी कह गए ''रहिमन धागा प्रेम का तोड़ा मत चटकाय, टूटे से फिर ना जुड़े ...जुड़े तो गांठ पड़ जाए''। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;दोस्तों अपने प्यार में कभी गांठ मत पडऩे देना, क्योंकि जिंदगी में यह मौका नसीब वालों को मिलता है। प्यार एक ऐसी &lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S3P1GZ6XktI/AAAAAAAAAdA/iHuOTts6jvc/s1600-h/CAIIRZTW.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5436958665550041810" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 185px; CURSOR: hand; HEIGHT: 159px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S3P1GZ6XktI/AAAAAAAAAdA/iHuOTts6jvc/s320/CAIIRZTW.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;कश्ती है जिसमें सवार होने वाले जोड़े एक-दूसरे के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण भाव रखकर ही अपनी नैया पार लगा सकते हैं। वरना पता नहीं नैया कब डूब जाए। कब प्यार ऐसा गम दे जाए जिसके घाव जीते जी नहीं  &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3942795092936816848-8877211261717329006?l=vishwanathnews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/feeds/8877211261717329006/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/02/blog-post_11.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8877211261717329006'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3942795092936816848/posts/default/8877211261717329006'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vishwanathnews.blogspot.com/2010/02/blog-post_11.html' title='ढाई आखर प्रेम का...'/><author><name>VISHWANATH SAINI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02440482571982801230</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='29' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/-fh6Tpg4nsa0/TXXPxDDdSqI/AAAAAAAAApU/NeBLipB8vHU/s220/Copy%2Bof%2Bmy%2Bphoto.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_6pKtENkBGKk/S3PsNGP_H8I/AAAAAAAAAco/QXYtnaMOYnM/s72-c/CAF22DJ7.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3942795092936816848.post-4484330962416494147</id><published>2010-02-10T20:07:00.003+05:30</published><updated>2010-12-09T19:21:54.377+05:30</updated><title type='text'>फेल हुए तो नहीं मिलेगा लाइसेंस</title><content type='html'>&lt;span class="fullpost"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;strong&gt;चू&lt;/strong&gt;रू&lt;/span&gt;, 26 फरवरी। ड्राईविंग लाइसेंस बनवाने के लिए अब चालक को सड़क सुरक्षा नियमों की पूरी जानकारी रखनी होगी। लर्निंग लाइसेंस बनाने की नई व्यवस्था के तहत जिला परिवहन कार्यालय में टच स्क्रीन मशीन आवेदक का सड़क सुरक्षा जानकारी का टेस्ट लेगी। टेस्ट में खरा उतरने वाले चालक को ही ट्रायल के बाद लाइसेंस जारी किया जा सकेगा। राज्य सरकार ने डीटीओ कार्यालय में टच स्क्रीन मशीन उपलब्ध करवा दी है। मार्च से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देना होगा सही जबाव&lt;br /&gt;टच स्क्रीन मशीन में सड़क सुरक्षा से संबंधित 100 सवाल फीड हैं। टेस्ट में टच स्क्रीन मशीन की स्क्रीन पर आवदेक के सामने एक-एक करके 15 सवाल उभरेंगे। 15 सवालों में से नौ का सही जवाब देने वाला आवेदक लाइसेंस लेने लायक समझा जाएगा। फेल घोषित किए गए आवेदक को लाइसेंस के लिए एक सप्ताह बाद दुबारा फीस जमा करवाकर टेस्ट उत्तीर्ण करना पड़ेगा।चार में से एक सहीटेस्ट में टच स्क्रीन मशीन की स्क्रीन पर प्रत्येक सवाल के साथ ही चार वैकल्पिक उत्तर भी प्रदर्शित होंगे। आवेदक को चार में से एक सही सवाल को टच करना होगा। करीब दस मिनट के टेस्ट के तुरंत बाद मशीन परिणाम घोषित क
