Wednesday, October 13, 2010

आए, खाए और चल दिए

चूरू सर्किट हाउस प्रबंधन बेबस
राजनीति व प्रशासन के 50 से अधिक दिग्गजों के लाखों बकाया
चूरू। 'आए, खाए और खिसके' का जुमला कई दिग्गज राजनेताओं और वरिष्ठ अफसरों पर सटीक बैठ रहा है। इन सब पर चूरू के सर्किट हाउस में ठहरने और भोजन की एवज में लाखों रुपए बकाया हैं। राजकीय अतिथि के रूप में बकाया राशि छोड़कर जाने वालों में तो पूर्व प्रधानमंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर कई जाने-माने मंत्री तक शामिल हैं। ऐसे सांसद और आईएएस अधिकारियों की भी कमी नहीं, जो सर्किट हाउस के बिलों के भुगतान को अब तक गंभीरता से नहीं लिया है। यही नहीं बल्कि चूरू में तैनात रहे एक जिला कलक्टर, उपखण्ड अधिकारी और कोतवाल भी मुफ्त में खाना खाने से नहीं चूके। जनप्रतिनिधियों और हुक्मरानों की यह हकीकत पत्रिका की पड़ताल में सामने आई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार 1997 से 31 अगस्त 2010 तक की अवधि के दौरान राजकीय अतिथि, सांसद, मंत्री और अधिकारियों समेत कुल 57 व्यक्तियों के सर्किट हाउस में ठहरने और भोजन के बदले एक लाख 67 हजार 71 रुपए बकाया हैं। हालांकि राजकीय अतिथियों के बिलों की राशि का भुगतान करना सामान्य प्रशासन विभाग तथा चुनाव कार्य के चलते चूरू आने वाले आला अधिकारियों के बिलों का भुगतान करना जिला कलक्टर की जिम्मेदारी है। शेष को व्यक्तिगत रूप से भुगतान करना होता है। बकाया वसूली के लिए सर्किट हाउस प्रबंधन के समय-समय पर पत्र जारी किए जाने के बावजूद बकायादारों का आंकड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। स्थिति यह है कि बकाया वसूलने में सर्किट हाउस प्रबंधन पूरी तरह बेबस है।

बकाया एक नजर में
नाम---------------व्यक्ति----------बकाया
राजकीय अतिथि-------19------------27629
मंत्री व सांसद---------11------------32437
महामहिम राज्यपाल-----2--------------6071
कलक्ट्रेट चूरू---------9-------------72261
प्रशासनिक अधिकारी---14--------------25281
अन्य----------------2--------------3392
कुल----------------57------------167071
(आंकड़े सर्किट हाउस के अनुसार)

पूर्व प्रधानमंत्री गुजराल भी शामिल
सर्किट हाउस में ठहरने और भोजन की एवज में जिन पन्द्रह राजकीय अतिथियों के नाम से राशि बकाया है, उनमें पूर्व प्रधानमंत्री इन्द्रकुमार गुजराल, पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चोटाला, पूर्व केन्द्रीय खनिज मंत्री शीशराम ओला व पूर्व पेट्रोलियम मंत्री मणीशंकर अय्यर समेत अनेक नाम शामिल हैं। राजकीय अतिथियों में से सबसे अधिक राशि 13 हजार 709 रुपए हरियाणा के तत्कालीन (2003) शहरी विकास राज्य मंत्री सुभाष गोयल तथा सबसे कम 420 रुपए तत्कालीन (2001) राज्यसभा सांसद अुर्जन सिंह के बकाया है।

सांसद बुडानिया सबसे आगे
बकाया के मामले में राज्य सभा सांसद नरेन्द्र बुडानिया पहले पायदान पर हैं। सांसद बुडानिया को 4 नवम्बर 2001 से 13 दिसम्बर 2003 तक की अवधि के लिए सर्किट हाउस प्रशासन को 18 हजार 709 रुपए चुकाने हैं। जबकि सबसे कम 132 रुपए बीसूका के तत्कालीन (2003) उपाध्यक्ष करण सिंह यादव के नाम बकाया है। इनके अलावा दस हजार रुपए से अधिक बकाया राशि वालों में आईएएस अधिकारी टीके सिंह, आईआरएस बीके मोहंती, आईआरएस जीएम प्रकाश और आईएएस टी डब्लू बरगप्पा का नाम भी शामिल है।
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राजकीय अतिथि, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के यहां ठहरने और भोजन के करीब एक लाख 6 7 हजार 71 रुपए बकाया हैं। राजकीय अतिथियों के बकाया का भुगतान सामान्य प्रशासन विभाग तथा चुनाव कार्य से आने वाले अधिकारियों के बकाया का भुगतान कलक्ट्रेट की ओर से किया जाता है। संबंधित विभाग और व्यक्ति को बकाया चुकाने के लिए समय-समय पर पत्र भेजते रहते हैं।
-संतोष कुमावत, प्रबंधक, सर्किट हाउस, चूरू
चुनाव पर्यवेक्षकों के विश्राम और भोजन के बिलों की बकाया राशि का भुगतान हमें करना है। कितना बकाया है इसकी जानकारी नहीं है। पता करके ही बता सकूंगा। बजट के अभाव में भुगतान में देरी हो गई होगी। जल्द ही भुगतान करवा दिया जाएगा।
-विकास एस भाले, कलक्टर, चूरू

Monday, October 4, 2010

आईटी की राह में ढिलाई का 'वायरस'

भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र :
गांधी जयंती को गुजरी डेडलाइन, 86 पंचायतों में तो काम ही शुरू नहीं हुआ, 31 मार्च नई तिथि निर्धारित
चूरू। ग्राम पंचायतों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने वाली भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र (आईटी सेंटर) योजना की रफ्तार ढिलाई के वायरस की गिरफ्त में है। यही वजह है कि सेंटरों का निर्माण पूर्ण होने की पहली संभावित तिथि दो अक्टूबर (गांधी जयंती) गुजर गई, मगर जिले की 249 ग्राम पंचायतों में से 246 में सेंटर अभी भी सपना बना हुआ है। निर्धारित तिथि तक महज तीन पंचायतों में सेंटर निर्माण का काम पूर्ण हुआ है। 86 ग्राम पंचायतों में तो सेंटर का शुरू ही नहीं हो सका है। जिन ग्राम पंचायतों सेंटर निर्माणाधीन है, उनकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं कही जा सकती है। अब रा'य सरकार के निर्देश जिला प्रशासन ने समस्त केन्द्रों का निर्माण कार्य पूर्ण करने की नई तिथि 31 मार्च 2011 तय की है, किन्तु नई तिथि तक कार्य पूर्ण होने की भी कोई गारण्टी नहीं है।

टेण्डर समेत कई रोड़े
आधिकारिक जानकारी के अनुसार सेंटरों के निर्माण की राह में उनकी टेण्डर प्रक्रिया ही रोड़ा साबित हो रही है। जिला प्रशासन ने सेंटरों की निर्माण सामग्री के लिए अप्रेल में टेण्डर प्रक्रिया शुरू की थी। सरपंचों की बजाय जिला कलक्टर की ओर से टेण्डर प्रक्रिया शुरू करने पर सरपंच शुरू से ही इसके खिलाफ थे। इसके अलावा कुछ पंचायतों में जगह उपलब्ध नहीं होने और सामग्री नहीं पहुंचाने से भी योजना के क्रियान्वयन में बाधा आ रही है। रही-सही कसर सरपंच व ग्रामसेवकों की पिछले दिनों हुई हड़ताल ने पूरी कर दी।

यहां भी रफ्तार धीमी
आईटी सेंटर निर्माण के लिए ग्राम पंचायत ही नहीं बल्कि पंचायत समिति मुख्यालयों पर भी रफ्तार धीमी है। जिले की छह पंचायत समितियों में से सुजानगढ़ व राजगढ़ में सेंटर का काम पूर्ण हो पाया है। चूरू व सरदारशहर में सेंटर का काम समाप्ति की ओर है। रतनगढ़ में सेंटर का काम छत से नीचे तथा तारानगर में छह डाले जाने के स्तर तक का काम पूर्ण हो गया है। गौरतलब है कि पंचायत समिति मुख्यालय पर सेंटर निर्माण पूर्ण करने की तिथि 15 अगस्त थी, जो डेढ़ माह पूर्व ही गुजर गई।

क्या है योजना
भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक सेंटर स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक सेंटर पर महानरेगा से दस लाख रुपए खर्च करेंगे। सेंटर पर पांच कम्प्यूटर उपलब्ध करवाए जाएंगे, जहां गांव के युवाओं को
कम्प्यूटर का प्रशिक्षण दिया जा सकेगा और महानरेगा के कार्यों की ऑन डाटा फीडिंग हो सकेगी। साथ ही अन्य विभागों की योजनाओं के आंकड़े भी
पंचायत स्तर पर आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। इसके अलावा ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं के आवेदन पत्र भरने की भी सुविधा मिलेगी।

163 सेंटर निर्माणाधीन
जिले की छहों पंचायत समितियों की 163 ग्राम पंचायतों में सेंटर निर्माणाधीन हैं। इनमें से 44 पंचायतों में सेंटर का काम नींव स्तर तक पूरा हो पाया है। 38 पंचायतों में दो से पांच फीट तक तथा 47 पंचायतों में छत के आस-पास तक का काम हुआ है। इनके अलावा 34 पंचायतों की सेंटरों का काम समाप्ति की ओर है।

आंकड़ों की जुबानी
पं. स~~~~~बनेंगेकाम शुरू नहीं
चूरू~~~~~~~35~~~~~ 4
सुजानगढ़~~~51 ~~~~~-
सरदारशहर~~~~~48~~~~~ 6
राजगढ़~~~~~~~55~~~~~ 41
तारानगर~~~~~~~28~~~~~ 12
रतनगढ़~~~~~~32~~~~~ 23
कुल~~~~~ 249 ~~~~~86
(आंकड़े जिला परिषद के अनुसार)
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यह सही है कि पंचायत समिति व ग्राम पंचायत मुख्यालय पर बनने वाले सेवा केन्द्रों के निर्माण की अंतिम तिथियां निकल गई हैं। फिर भी चूरू जिला योजना के क्रियान्वयन को लेकर प्रदेशभर में अव्वल है। शेष 8 6 ग्राम पंचायतों में भी जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। पंचायतों में जगह नहीं मिलने, निर्माण सामग्री नहीं पहुंचने और ग्रामसेवकों व सरपंचों की हड़ताल समेत कारणों से देरी हुई है। अब सरकार से 31 मार्च तक का समय लिया गया है।नई तिथि तक समस्त केन्द्रों का कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है।
-अबरार अहमद, मुख्य कार्यकारी अधिकारी,
जिला परिषद, चूरू

Sunday, October 3, 2010

दिल्ली की नजर चूरू के मौसम पर

[कॉमनवैल्थ गेम्स] रात को भी मौसम के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं
चूरू। मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले चूरू जिले पर एक बार फिर से दिल्ली की नजर है। तीन अक्टूबर से दिल्ली में शुरू हो रहे राष्ट्रमण्डल खेलों ने चूरू के मौसम की अहमियत बढ़ा दी है। मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए दिन के साथ-साथ रात को भी मौसम के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। दिल्ली स्थित मौसम विभाग के निर्देश पर चूरू के मौसम केन्द्र में दस सितम्बर से शुरू हुई वैकल्पिक व्यवस्था बीस अक्टूबर तक जारी रहेगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार चूरू मौसम केन्द्र पर रोजाना तीन घंटे के अंतराल में तापमान, हवा का रुख, नमी और वायुदाब की जानकारी जुटाईजाएगी। सुबह और शाम को आसमान में बैलून छोड़कर छह किलोमीटर ऊपर की हवा की दिशा और रफ्तार की जानकारी जुटाई जाती है। लेकिन अब राष्ट्रमण्डल खेलों को हुए तीन घंटे की बजाय एक-एक घंटे के अंतराल में मौसम के हाल का पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा दोपहर और रात को भी बैलून छोड़े जा रहे हैं।
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यह होगा फायदा
प्रदेश में चूरू स्थित मौसम केन्द्र अन्य केन्द्रों की तुलना में दिल्ली के अधिक नजदीक है। यहां पर बनने वाला मौसम तंत्र दिल्ली के मौसम को भी प्रभावित कर सकता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रदेश में चूरू के अलावा बीकानेर, श्रीगंगानगर, जयपुर और कोटा समेत अन्य स्थानों से मौसम के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इससे दिल्ली मौसम विभाग तीन घंटे की बजाय एक-एक घंटे के अंतराल में दिल्ली के आस-पास के मौसम का हाल बताने में सक्षम होगा।
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मुख्यालय के आदेश पर राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए मौसम के आंकड़े जुटाने की वैकल्पिक व्यवस्था बीस अक्टूबर तक जारी रहेगी। अब तीन घंटे की बजाय प्रत्येक घंटे के अंतराल में मौसम के आंकड़े जुटाकर दिल्ली भेज रहे हैं।
-जिलेसिंह राव, प्रभारी अधिकारी, मौसम केन्द्र चूरू

Friday, September 24, 2010

तीसरी आंख भी रखेगी निगरानी

आरएएस की परीक्षा, प्रत्येक केन्द्र की होगी वीडियोग्राफी
चूरू। बोर्ड परीक्षाओं और मतदान प्रक्रिया की तर्ज पर अब आरएएस परीक्षा पर भी तीसरी आंख से निगरानी रखी जाएगी। प्रदेश में 29 सितम्बर को हो रही आरएएस परीक्षा के प्रत्येक केन्द्र पर इस बार से एक-एक वीडियोग्राफर तैनात किया जाएगा।
वीडियोग्राफर केन्द्र पर प्रश्न पत्र के लिफाफे खोलने से लेकर परीक्षा के बाद लिफाफे को फिर से सील किए जाने तथा औचक निरीक्षण समेत केन्द्र की समस्त गतिविधियों को कैमरे में कैद करेगा। परीक्षा के बाद प्रत्येक केन्द्र की वीडियोग्राफी की सीडी बनाकर आरपीएससी मुख्यालय अजमेर पहुंचाई जाएगी।
परीक्षा की गोपनीयता बरकरार रखने के लिए वीडियोग्राफी के अलावा भी कई कदम उठाए गए हैं। अब निजी परीक्षा केन्द्रों पर एक की बजाय दो पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे। साथ ही छह परीक्षा केन्द्रों पर एक-एक फ्लाइंग स्क्वायड लगाएंगे।
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कम्प्यूटर से जारी होगा प्रवेश पत्र
आरपीएससी की ओर से मूल प्रवेश पत्र प्राप्त करने से वंचित रहे परीक्षार्थियों के लिए इस बार डुप्लीकेट प्रवेश पत्र जारी करने की भी नई व्यवस्था की गई है। आरपीएससी ने प्रत्येक जिले में विशेष सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाया है। जिसमें परीक्षार्थियों की सूची व जानकारी मय फोटो के उपलब्ध है। डुप्लीकेट प्रवेश पत्र चाहने वालेे परीक्षार्थियों को अपनी दो फोटो व पांच रुपए की डीडी के साथ परीक्षा कंट्रोल कक्ष में उपस्थित होना होगा। परीक्षार्थी की पुख्ता पहचान के बाद उसे कम्प्यूटर से मूल प्रवेश पत्र की प्रतिलिपि जारी कर दी जाएगी। पूर्व में अधिकारी अपने स्तर पर प्रमाणित कर डुप्लीकेट प्रवेश पत्र जारी करते थे।
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आरएएस परीक्षा को लेकर इस बार कई नए कदम उठाए गए हैं। प्रत्येक केन्द्र की समस्त गतिविधियों को वीडियो में कैद करने और निजी केन्द्रों पर दो-दो पर्यवेक्षक तैनात करने का निर्णय किया है। साथ ही डुप्लीकेट प्रवेश पत्र भी कम्प्यूटर से जारी करेंगे।
-डॉ. केके पाठक, सचिव, आरपीएससी, अजमेर

Tuesday, September 21, 2010

ब्लॉक स्तर पर होगी मौसम की भविष्यवाणी

जयपुर समेत चार जिलों में लगेंगे अत्याधुनिक राडार,
मौसम विभाग के डीजीएम अजीत त्यागी चूरू आए
चूरू। देश में अब ब्लॉक स्तर तक मौसम की भविष्यवाणी की जा सकेगी। इसके लिए मौसम केन्द्रों को हाइटेक करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। चुनिंदा मौसम केन्द्रों पर डोप्लर वैदर राडार लगाए जाने के साथ ही करीब दो हजार स्थानों पर स्वचालित मौसम केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं।
मौसम विभाग नई दिल्ली के डीजीएम डॉ. अजीत त्यागी ने सोमवार को पत्रिका से बातचीत में यह जानकारी दी। डॉ. त्यागी चूरू में स्वचालित मौसम केन्द्र का उद्घाटन करने आए हुए थे। उन्होंने बताया कि जयपुर मौसम केन्द्र में जनवरी 2011 के अंत तक डोप्लर वैदर राडार काम करना शुरू कर देगा। जिससे प्रदेश में चार सौ किलोमीटर की परिधि के मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। 12 जिलों में स्वचालित मौसम केन्द्र स्थापित कर दिए गए हैं जबकि शेष 21 जिलों में मौसम केन्द्र जल्द स्थापित होंगे। देशभर में 50 डोप्लर वैदर राडार और दो हजार स्वचालित मौसम केन्द्र की योजना बनाई गई है। जिसके प्रथम चरण का काम शुरू हो गया है। दूसरे चरण का आगाज 2012 में होगा।

सुपर कम्प्यूटर बनेंगे मददगार
डॉ. त्यागी ने बताया कि डोप्लर वैदर राडार और स्वचालित मौसम केन्द्र से आंकड़े सीधे दिल्ली, पुणे व मुम्बई में तुरंत प्राप्त किए जा सकेंगे, जहां सुपर कम्प्यूटर से आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन एवं विश्लेषण कर ब्लॉक स्तर तक के तापमान, हवा, बारिश व नमी आदि की भविष्यवाणी की जा सकेगी। फिलहाल मौसम विभाग जिला स्तर तक के मौसम का हाल बताने में सक्षम है।

कोटा में भी लगेगा राडार
डॉ. त्यागी ने बताया कि प्रदेश में श्री गंगानगर और जैसलमेर में डोप्लर वैदर राडार लगा हुआ हैं, मगर दोनों ही पुरानी तकनीक से काम कर रहे हैं। अत्याधुनिक राडार सबसे पहले जयपुर में लगेगा। इसके बाद कोटा का नम्बर आएगा। साथ ही श्रीगंगानगर और जैसलमेर स्थित पुराने राडार को भी बदला जाएगा।

पल-पल के मौसम पर होगी पकड़
चूरू में स्वचालित मौसम केन्द्र शुरू
चूरू। जिला मुख्यालय स्थित मौसम केन्द्र हाइटेक हो गया है। यहां पर सोमवार से स्वचालित मौसम केन्द्र ने काम करना शुरू कर दिया है। अब जिले के पल-पल के मौसम पर केन्द्र की पकड़ हो जाएगी। मौसम विभाग नई दिल्ली के डीजीएम डॉ. अजीत त्यागी व मौसम विभाग जयपुर के निदेशक एसएस सिंह ने सुबह दस बजे केन्द्र का फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया। डॉ. त्यागी ने बताया कि चूरू मौसम केन्द्र पर तीन घंटे के अंतराल में ही मौसम की जानकारी ले पाना संभव हो पा रहा था जबकि मौसम की भविष्यवाणी करने के लिहाज से चूरू देशभर में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में यहां पर लम्बे समय से स्वचालित मौसम केन्द्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब दस मिनट के अंतराल में मौसम का हाल जाना जा सकेगा।
प्रदेश के 12 जिलों में स्वचालित मौसम केन्द्र स्थापित करने में चूरू को भी प्राथमिकता से लिया गया है। निदेशक एसएस सिंह ने बताया कि स्वचालित मौसम केन्द्र शुरू होने पर पाला पडऩे, ओले गिरने व भारी बारिश आदि का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। चूरू केन्द्र प्रभारी जिलेसिंह राव ने डॉ. त्यागी व सिंह को केन्द्र का निरीक्षण करवाया। इस मौके पर सहायक मौसम वैज्ञानिक जयपुर एनके मल्होत्रा, आरएस सिहाग, गोपाल लाल वर्मा आदि उपस्थित थे।

Friday, September 17, 2010

सरपंची के फेर में बच्चे हुए जवां

दो सरपंचों समेत तीन के निर्वाचन अवैध घोषित करने की सिफारिश
शिकायत की जांच में हुआ खुलासा, जन्मतिथि के बनाए फर्जी दस्तावेज

चूरू। जिले में दो सरपंच और एक उप सरपंच की पंचायती छिनने के आसार हैं। जिला प्रशासन ने तीनों के निवार्चन अवैध घोषित करने की आलाधिकारियों को सिफारिश की है। तीनों पर चुनाव घोषणा पत्र में संतान संबंधित वास्तविक तथ्य छिपाने का आरोप है। पंचायत चुनाव के बाद जिला प्रशासन को मिली शिकायतों की जांच में तीनों को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है।
तीनों ने अपनी पंचायती चलाने के लिए न केवल अपने बच्चों की वास्तविक उम्र काफी बढ़ा दी बल्कि नई जन्मतिथि के फर्जी दस्तावेज भी तैयार करवा लिए। शिकायतों की गहन जांच के बाद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अबरार अहमद ने संभागीय आयुक्त बीकानेर को सरदारशहर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मेहरासर चाचेरा की सरपंच सुवा कंवर, पिचकराई ताल की सरपंच मंजू देवी पारीक और चूरू पंचायत समिति की ग्राम पंचायत जसरासर के वार्ड पंच पूर्णाराम के निर्वाचन को अवैध घोषित करने की सिफारिश की है। इनके अलावा सुजानगढ़ व सादुलपुर पंचायत समिति के एक-एक सरपंच के खिलाफ जांच जारी है।

केस-एक
सरदारशहर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मेहरासर चाचेरा की सरपंच सुवा कंवर ने अपनी पांचवीं संतान पुत्र भूपेन्द्र उर्फ भवानी सिंह की वास्तविक जन्मतिथि छिपाई है। शिवाजी पब्लिक शिक्षण संस्थान मेहरासर चाचेरा और नेहरू बाल निकेतन उप्रावि भोजरासर के रिकॉर्ड में भूपेन्द्र की जन्मतिथि 5 दिसम्बर 1999 है जबकि सुवा कंवर ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में जन्मतिथि 21 अप्रेल 94 अंकित की गई है।

केस-दो
सरदारशहर तहसील की ग्राम पंचायत पिचकराईताल की सरपंच मंजू देवी पारीक ने अपनी चौथी संतान पुत्र आनंद की जन्मतिथि में हेरफेर किया है। चुनाव घोषणा पत्र में आनंद की जन्मतिथि ग्राम पंचायत से जारी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर 10 दिसम्बर 1991 अंकित की गई है। जबकि जन्म प्रमाण पत्र चुनाव के बाद 18 फरवरी 2010 को जारी करवाया गया। रामावि और ज्ञान ज्योति उप्रा शिक्षण संस्थान बरजांगसर के रिकॉर्ड के मुताबिक आनंद की जन्मतिथि 4 दिसम्बर 1996 है।

केस-तीन
तीसरा मामला चूरू पंचायत समिति की ग्राम पंचायत जसरासर के वार्ड पंच पूर्णाराम के निर्वाचन का है। पूर्णाराम बाद में उप सरपंच चुन गए थे। इन्होंने चुनाव घोषणा पत्र मेंं अपनी छठी संतान पुत्री गायत्री का जन्म 6 अपे्रल 198 5 व सातवीं संतान पुत्री बनारसी का जन्म 13 अप्रेल 198 8 को होना बताया है। जबकि गांव धीरावास के राजकीय माध्यमिक विद्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक गायत्री की वास्तविक जन्मतिथि 15 सितम्बर 1998 व बनारसी की जन्मतिथि 10 अक्टूबर 1999 है।

इनकी जांच जारी
इनके अलावा सुजानगढ़ पंचायत समिति की गोपालपुरा ग्राम पंचायत के सरपंच अमराराम मेघवाल व सादुलपुर ग्राम पंचायत के सरपंच न्यांगल छोटी के निर्वाचन पर भी तलवार लटक रही है। जिला प्रशासन को दोनों सरपंचों के खिलाफ संतान सम्बन्धित तथ्य छुपाने की शिकायत मिली है। जिसकी संबंधित विकास अधिकारी से जांच करवाई जा रही है।
क्या है नियम
राजस्थान पंचायत राज निर्वाचन नियम 1994 में निर्धारित तिथि 27 नवम्बर 1995 के बाद किसी के तीसरी संतान पैदा होने पर वह चुनाव लडऩे का अपात्र हो जाता है। इसके बावजूद अगर चुनाव जीतता है तो शिकायत मिलने पर उसका निर्वाचन अवैध घोषित किया जा सकता है।

इनका कहना है...
दो सरपंच व एक उप सरपंच के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की बीडीओ व बीईईओ से विस्तृत जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर तीनों के निर्वाचन को अवैध घोषित किए जाने की संभागीय आयुक्त को सिफारिश की गई है। दो सरपंचों के खिलाफ प्राप्त शिकायत की जांच जारी है।
-अबरार अहमद, सीईओ, जिला परिषद चूरू

Wednesday, September 1, 2010

घर का बीज पडोसी रहे सींच

चूरू। घर का जोगी जोगणा आन गांव का सिद्ध वाली कहावत चूरू जिले के गांव गुडाण निवासी प्रगतिशील किसान महावीर सिंह आर्य पर सटीक बैठ रही है। किसान आर्य की ओर से तैयार की गई गेहूं की नई किस्म 'महा किसान क्रांति' व 'महा किसान वरदान' को प्रदेश में भले ही पहचान नहीं मिल पाई हो, मगर पडोसी राज्य उत्तर-प्रदेश व हरियाणा के किसानों के लिए ये किस्में वरदान साबित हो रही हैं। किसान इन किस्मों के बीजों की बुवाई कर मालामाल हो रहे हैं। यूपी के मुजफ्फनगर, एलम, बागपत, कासिमपुर, खेडी, निरपुदा व सिसोली तथा हरियाणा के भिवानी, लुहारू, बहल व दादरी इलाके के सैकडों खेत क्रांति व वरदान किस्म से लहलहा चुके हैं।
इस बार रबी के सीजन में उत्तर प्रदेश के करीब 250 तथा हरियाणा के 20 किसानों ने इन किस्म के गेहूं की बम्पर पैदावार हासिल की है। रबी की फसल के आगामी सीजन में उत्तर प्रदेश में दोनों किस्में काम लेने वाले किसानों की संख्या दोगुनी होने का अनुमान है। जानकारी के अनुसार आर्य की ओर से तैयार गेहूं की दोनों ही किस्म यूपी की स्थानीय किस्म पीवीडब्ल्यू 377 व यूपी 2338 किस्म तथा हरियाणा की 306 किस्म से पैदावार समेत चारा व रोग प्रतिरोधक क्षमता में अघिक उन्नत साबित हो रही है। इससे हरियाणा में किसान 35 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की तुलना में 50 से 60 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तथा यूपी के किसान 45-50 क्विंटल प्रति हैक्टेयर के मुकाबले 60 से 70 क्विंटल प्रति हैक्टेयर पैदावार प्राप्त कर रहे हैं।

पड़ोसी राज्यों के खेतों में यूं पहुंचा बीज
वर्ष 2007-08 में झुंझुनूं जिले के पिलानी में लगे किसान मेले में महावीर सिंह आर्य ने दोनों ही किस्म के बीजों की प्रदर्शनी लगाई थी। मेले में आए यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के गांव एलम के किसान सुनील ने आर्य से बीस किलोग्राम बीज खरीदे थे। सुनील में यूपी में दो बीघा में बुवाई की और पहली बार नौ क्विंटल पैदावार हासिल की। इससे कम समय में ही दोनों किस्मों ने मुजफ्फर नगर समेत आस-पास के कई जिलों में पहचान बना ली। इसी प्रकार वर्ष 2008-09 में हरियाणा के भिवानी जिले के दिगावा में एनएचआरडीएफ की ओर से लगाए गए मेले में आर्य ने दोनों ही किस्मों की प्रदर्शनी लगाई। हरियाणा के कई किसानों ने आर्य से इनके बीज खरीदे। इसके बाद दोनों ही राज्यों के किसान आर्य से लगातार सम्पर्क में रहे और समय-समय पर गुडाण आकर बीज प्राप्त किए।

हम दिलाएंगे पहचान
चूरू के किसान की ओर से तैयार गेहूं की नई किस्मों का यूपी व हरियाणा में बडे पैमाने पर उपयोग होना हम सब के लिए गर्व की बात है। प्रदेश के किसानों का इनसे लाभान्वित नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में पहले जानकारी नहीं थी। आपने इस ओर ध्यान दिलाया है। गेहूं की इन किस्मों की प्रदेशभर में भी पहचान हो, इसके लिए उच्च अघिकारियों से चर्चा की जाएगी।
-होशियार सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग, चूरू

दिनोंदिन बढती मांग
गेहूं की उन्नत किस्में तैयार करने में बीते दो दशक से काम रहा हूं। महा किसान क्रांति व महा किसान वरदान नामक किस्म सबसे अघिक सफल रही हैं। दोनों ही किस्मों के पेटेंट की प्रक्रिया चल रही है। इसकेे लिए राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान अहमदाबाद की टीम भी कई बार गुडाण आ चुकी है। हरियाणा व यूपी में दोनों किस्मों की मांग दिनोंदिन बढती जा रही है।
-महावीर सिंह आर्य, किसान, गांव गुडाण, राजगढ (चूरू)

500 किसान बोएंगे
ढाई वर्ष पूर्व मुजफ्फनगर के किसान सुनील ने राजस्थान के किसान महावीर सिंह आर्य से लाई दो नई किस्मों की जानकारी दी थी। दोनों ही किस्म हमारी स्थानीय किस्मों से अघिक पैदावार देती हैं। पिछले कई साल से मैं दोनों को काम में ले रहा हूं। इस बार हमारे यहां के करीब पांच सौ किसान क्रांति व वरदान किस्म के गेहूं की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं।
-नरेन्द्र सिंह (किसान), निरपुदा, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश

पर्याप्त बीज का अभाव
गेहूं की महा किसान क्रांति व महा किसान वरदान किस्म का उपयोग करने से हमें स्थानीय किस्म से 15-25 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक अघिक पैदावार प्राप्त होती है। गुडाण निवासी प्रगतिशील किसान आर्य से एक किसान मेले में बीज खरीदा था। हरियाणा के कई जिलों में इन किस्मों की मांग बढ रही है, मगर आर्य पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।
-हीरानंद श्योराण (किसान), गांव पहाडी, जिला भिवानी, हरियाणा

Friday, August 13, 2010

बारिश ने बरसाए 'रिकॉर्ड'

गत वर्ष से 20 एमएम अधिक बरसात
दस वर्षों के औसत से 46 एमएम कम

चूरू। जिले में इस बार मानसून नित नए रिकॉर्ड कायम कर रहा हैं। गत वर्ष की कुल बारिश का रिकॉर्ड तो सभी ब्लॉकों में टूट चुका है जबकि आधा सावन और पूरा भादो अभी बाकी है। जिले में अब 46 एमएम बरसात और होती है तो इस बार गत दस वर्षों की औसत बारिश का रिकॉर्ड भी टूट जाएगा।
जिले के छहों ब्लॉकों में इस बार अब तक 1 हजार 718 एमएम बारिश हो चुकी है, जो वर्ष 2009 से 119 एमएम, वर्ष 2002 से 745 एमएम तथा वर्ष 2000 से 321 एमएम अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार जिले में जून से सितम्बर के अंत तक मानसून सक्रिय रहता है। इस बार शुरुआत से ही अच्छी बारिश हो रही है।
जिले में बीते चौबीस घंटों के दौरान चूरू व सरदारशहर में झमाझम हुई। सरदारशहर में बुधवार रात करीब 50 एमएम पानी बरसा जबकि चूरू में दोपहर को 4.4 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जिले के शेष इलाकों में कहीं बादल छाए रहे तो कहीं बूंदाबांदी हुई। दिन का अधिकतम तापमान 34.3 व न्यूनतम तापमान 26.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

इस बार की बारिश
ब्लॉक वर्षा
चूरू 296
सरदारशहर 201
रतनगढ़ 318
सुजानगढ़ 236
राजगढ़ 259
तारानगर 408
औसत 286.33
(वर्षा एमएम में, भू- राजस्व शाखा के अनुसार)

गत दस वर्ष की स्थिति
साल -----------वर्षा
2000--------- 233
2001 ---------372
2002 ---------162
2003 ---------414
2004 ---------309
2005 ---------355
2006 ---------297
2007 ---------405
2008 --------506
2009 --------266
तारानगर पर अधिक मेहरबान
जिले में इस बार अब तक बदरा तारानगर ब्लॉक पर सबसे अधिक मेहरबान हुए हैं। यहां पर 408 एमएम बारिश हो चुकी है, जो तारानगर में वर्ष 2000, 02, 03, 06 व 09 के दौरान हुई कुल बारिश से अधिक है। उधर, अब तक सबसे कम 201 एमएम बारिश सरदारशहर ब्लॉक में रिकॉर्ड की गई है।

फसलों में कीट व रोग का प्रकोप
अच्छी बारिश के चलते खेतों में खरीफ फसलें लहलहाने लगी हैं। कीट व रोगों ने भी फसलों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. होशियार सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने गुरुवार को चूरू तहसील के गांव बीनासर व देपालसर आदि के खेतों का दौरा किया तो मंूग,मोठ ग्वार में रोग का प्रकोप पाया गया। हालांकि कीट व रोग अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए फसलों को खास नुकसान नहीं हो रहा है। टीम ने किसानों को कीट व रोगों से बचाव की सलाह दी है। टीम में कृषि अधिकारी भारत भूषण शर्मा, कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ. मुकेश शर्मा, जीएस पुण्डीर आदि शामिल थे।

Wednesday, August 11, 2010

अंग्रेजी की राह में 'कांटे'

महाविद्यालय हलचल :
लोहिया महाविद्यालय में अंग्रेजी का एक भी व्याख्याता नहीं
चूरू. विदेशी भाषा सीख कर कॅरियर बनाने की सोच रहे राजकीय लोहिया महाविद्यालय के सैकड़ों विद्यार्थियों का सपना टूटता नजर आ रहा है। समस्या यह है कि नए सत्र का आगाज हो चुका है मगर महाविद्यालय में अंग्रेजी का एक भी व्याख्याता नहीं है। ऐसे में अनिवार्य अंग्रेजी और अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थियों की राह में 'कांटेÓ दिखाए दे रहे हैं। नए सत्र में अंग्रेजी की कक्षाएं शुरू करने को लेकर महाविद्यालय प्रबंधन की भी चिंता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। उधर, डाइट में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को अंग्रेजी में अधिक पारंगत करने के लिए स्थापित लिंग्वा लैब प्रशिक्षक के अभाव में बंद पड़ी है। यहां पर इस साल मार्च में ही प्रशिक्षक का पद खाली हो गया था। लोहिया महाविद्यालय की लिंग्वा लैब का हाल ऐसा ही है। अंग्रेजी का व्याख्याता उपलब्ध नहीं होने के कारण पिछले साल अक्टूबर से लैब पर ताला लगा हुआ है। महाविद्यालय ने अंग्रेजी व्याख्याता नियुक्त किए जाने का प्रस्ताव आयुक्तालय को भेजा है। प्रस्ताव पर अमल जब होगा तब होगा इस शिक्षा सत्र में तो विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी पढऩे की राह में बाधा ही है।

तीनों पद खाली
जिले के इस एक मात्र मॉडल कॉलेज में अंगे्रजी व्याख्याताओं के कुल तीन पद स्वीकृत हैं, इनमें से एक पद करीब दस साल से खाली पड़ा है जबकि पिछले साल अक्टूबर में उप प्राचार्य पद पर प्रमोशन पाकर व्याख्याता जीएस महला राजकीय रूईया महाविद्यालय रामगढ़ शेखावाटी में तथा एचआर ईसराण राजकीय महाविद्यालय सरदारशहर चले गए। तब से लोहिया महाविद्यालय में अंग्रेजी पढ़ाने वाला कोई नहीं है। इससे विद्यार्थी अंग्रेजी पढऩे से वंचित हो रहे हैं।

लैब पर जड़ा ताला
महाविद्यालय में करीब चार वर्ष पूर्व स्थापित लिंग्वा लैब पर वर्तमान में स्टाफ के अभाव में ताला लगा हुआ है। लैब में माइक्रोफोन, हैडफोन, ऑडियो कैसेट आदि उपकरण धूल फांक रहे हैं। महाविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थियों की संख्या तकरीबन पांच सौ के आस-पास है। साथ ही तीनों संकायों में अनिवार्य विषय के रूप में अंग्रेजी चुनने वाले विद्यार्थी भी सैकड़ों में हैं।

डाइट में लिंग्वा लैब को प्रशिक्षक का इंतजार
डाइट में राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों में अंग्रेजी विषय पढ़ाने का स्तर सुधारने के उद्देश्य से नवम्बर 2008 में लिंग्वा लैब की स्थापना की गई। जिले के एक हजार 460 प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों में से अब तक180 को ही प्रशिक्षित किया गया है। 24 शिक्षकों को एक साथ प्रशिक्षण देने की क्षमता वाली यह लैब 23 मार्च 2010 के बाद से बंद पड़ी है। यहां पर प्रशिक्षक के रूप में तैनात सेवानिवृत अंग्रेजी व्याख्याता ओमप्रकाश तंवर व हीरालाल महर्षि बीएड महाविद्यालयों में चले गए। तब से डाइट में अंग्रेजी का कोई प्रशिक्षण शिविर नहीं लगाया जा रहा है।

क्या है लिंग्वा लैब
लिंग्वा लैब का नाम लैंगवेज से पड़ा है। लैब का उद्देश्य विद्यार्थियों का उच्चारण सुधार कर अंग्रेजी बोलने की झिझक दूर करना है। लैब में विद्यार्थियों को अंगे्रजी की विशेष अभ्यास पुस्तिका से देखकर अंग्रेजी में अपनी भाषा टेप रिकॉर्डर में रिकॉर्ड करनी पड़ती है, जिसे हैडफोन के जरिए सुनने पर एक विशेष मशीन की मदद से उच्चारण आसानी से सुधारा जा सकता है। यह प्रक्रिया इतनी सरल है कि इससे कम समय में फटाफट अंग्रेजी बोलनी सीखी जा सकती है।

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अंग्रेजी का एक भी व्याख्याता नहीं है। इस समस्या की ओर आयुक्तालय का ध्यान दिलाया जा चुका है। जल्द ही व्याख्याताओं की तबादला सूची जारी होने वाली है। यहां के खाली पद भी भरे जाने की उम्मीद है। किसी कारणवश यदि ऐसा नहीं हुआ तो वैकल्पिक व्यवस्था से पढ़ाएंगे।
-एमडी गोरा, प्राचार्य, लोहिया महाविद्यालय, चूरू
लैब से जिलेभर के शिक्षक लाभान्वित हो सकते हैं। फिलहाल प्रशिक्षक के अभाव में लैब बंद कर रखी है। सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से प्रशिक्षक तैनात किए जाने हैं।
-सत्यनारायण स्वामी, प्रभारी, लिंग्वा लैब, डाइट, चूरू

प्रवेश तो दे देंगे, बैठाएंगे कहां?

महाविद्यालय हलचल :
जिले के मॉडल कॉलेज में कमरों का टोटा, सेक्शन बढऩे से बढ़ी परेशानी
चूरू. महाविद्यालयों में हाल ही सीटें बढ़ाए जाने से भले ही विद्यार्थी खुशी से फूले नहीं समा रहे हों मगर चूरू के राजकीय लोहिया महाविद्यालय प्रबंधन के लिए बढ़ी हुई सीटें कोढ़ में खाज साबित हो रही हैं। दरअसल जिले के सबसे बड़े और मॉडल कॉलेज का दर्जा प्राप्त इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों को बैठाने के लिए पर्याप्त कक्षा कक्ष नहीं हैं। लम्बे समय से पर्याप्त कक्षा कक्षों की समस्या से जूझ रहे लोहिया महाविद्यालय में इस बार कला संकाय में 160 व वाणिज्य संकाय में 80 सीटें बढऩे से विद्यार्थियों को बैठाने को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। फिलहाल महाविद्यालय में कक्षाएं लगाने के लिए आवश्यकता की तुलना में कम कक्ष ही उपलब्ध हैं। महाविद्यालय में तीन संकायों के यूजी व पीजी के विद्यार्थियों की संख्या चार हजार के आस-पास है। वाणिज्य संकाय की कक्षाएं सुबह 8 बजे, कला संकाय की 9 बजे व विज्ञान संकाय की 10 बजे शुरू होती हैं। दोपहर 12 बजे बाद तो महाविद्यालय में विकट स्थिति पैदा हो जाती है। विद्यार्थियों को बैठने के लिए कमरे खाली नहीं मिलते।

कितनी है आवश्यकता
महाविद्यालय में यूजी कक्षाओं के कुल चालीस सेक्शन हैं। इनमें तीनों संकाय के प्रथम वर्ष के 18, द्वितीय वर्ष के 12, तृतीय वर्ष के 10 सेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा एमकॉम में एबीएसटी, ईएफएम, बीएडएम, एमए में राजनीतिक विज्ञान व इतिहास और एएससी में केमिस्ट्री, बॉटनी और जूलॉजी के कक्षाओं के लिए कम से कम 16 कक्षा कक्षों की आवश्यकता है। महाविद्यालय को प्रभावी शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए 56 कक्षा कक्षों की दरकार है।

क्या है उपलब्धता

महाविद्यालय की ऊपरी व निचली मंजिल पर कुल 87 कमरें बने हुए हैं। इनमें से प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, स्टाफ, प्रयोगशालाएं, लेखा शाखा, स्टोर, नॉलेज सेंटर, पुस्तकालय, कॉमन रूम, कम्प्यूटर फेसिलिटी सेंटर, एनएसएस व एनसीसी आदि के लिए पचास से अधिक कमरे आवंटित हैं। कक्षा कक्ष के रूप में 35-40 कमरे काम लिए जा रहे हैं। महाविद्यालय के छह कमरों में विधि महाविद्यालय संचालित है।

क्या है समाधान
महाविद्यालय में कक्षा कक्षों की संख्या बढ़ाने के लिए किसी संकाय का अलग से ब्लॉक बनवाने की यूजीसी से मांग की जा सकती है। इसके अलावा महाविद्यालय के छात्रावास में वैकल्पिक व्यवस्था भी की जा सकती है। जानकारी के अनुसार महाविद्यालय के पास स्थित छात्रावास में कुल 128 कमरे हैं। विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावास का आधा परिसर ही काम आ रहा है। छात्रावास में कम छात्र संख्या वाली कक्षाएं लगाए जाने पर भी विचार किया जा सकता है।

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महाविद्यालय ने निश्चित रूप से कक्षा कक्षों की कमी है। फिर भी शिक्षण व्यवस्था किसी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दी जा रही है। इस बार आवश्यकता पड़ी तो पोर्च व गैलेरी में कक्षाएं संचालित कर लेंगे। इसके अलावा छात्रावास के खाली कमरे काम में ले लेंगे।
-एमडी गोरा, प्राचार्य, लोहिया महाविद्यालय, चूरू

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महाविद्यालय में छात्र संख्या चार हजार के आस-पास रहती है। मगर कक्षा कक्षों का हमेशा से अभाव ही रहा है। छात्रावास के खाली कमरों को काम लिया जा सकता है। हालांकि छात्रावास के कमरे अपेक्षाकृत छोटे हैं मगर उनमें पीजी की कक्षाएं आसानी से संचालित की जा सकती हैं।
-भंवर सिंह सामौर, पूर्व प्राचार्य, लोहिया महाविद्यालय,
२0 जुलाई 2010

Wednesday, August 4, 2010

पढ़ाई का पीटे 'ढोल', गुणवत्ता में 'गोल'

चूरू. जिले के सरकारी विद्यालय बच्चों को पढ़ाने का भले ही 'ढोल' पीट रहे हो मगर पढ़ाई से गुणवत्ता 'गोल' होती जा रही गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पकड़ नहीं बना पा रहे हैं। विद्यालयों की यह कड़वी सच्चाई क्वालिटी इंश्योरेंश परीक्षण में सामने आई है। जिलेभर के एक हजार 55 राजकीय उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह सात के 32 हजार 146 विद्यार्थियों की इस साल दस से बारह जनवरी को विशेष परीक्षा हुई, जिसमें विद्यार्थियों से गणित, अंग्रेजी व विज्ञान विषय के प्रश्न हल करवाए गए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार परीक्षण के परिणामों को हाल ही अंतिम रूप दिया गया है। जिले को 59 प्रतिशत अंकों के साथ 'सीÓ ग्रेड में रखा गया है। जिलेभर के 86 विद्यालय तो उत्तीर्ण होने योग्य अंक भी हासिल नहीं कर पाए हैं। इन्हें आठ से 35 प्रतिशत तक अंक प्राप्त हुए हैं। 150 विद्यालयों को डी ग्रेड मिली हैं। महज 123 विद्यालयों को 8 0 या इससे अधिक प्रतिशत अंक हासिल हुए हैं। जिले में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सुजानगढ़ के गांव सारोठिया का राजकीय माध्यमिक विद्यालय तथा सरदारशहर के गांव रायपुरिया का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर रहे। तारानगर के गांव राजपुरा का राजकीय माध्यमिक विद्यालय फिसड्डी रहा।
माध्यमिक स्कूल भी फेल
पढ़ाई के मामले में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय अधिक फिसड्डी रहे हैं मगर राजकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति भी अच्छी नहीं कही जा सकती। जिले में एक दर्जन से अधिक माध्यमिक स्तर के विद्यालय परीक्षण में खरे नहीं उतर पाए हैं। सुुजानगढ़ में गांव शोभासर, छापर, जैतासर, ईंयारा, चूरू में आसलखेड़ी, खींवासर, सिरसला, बालरासर आथुना, हरिया देवी दूधवा, राजगढ़ में भोजाण, पहाड़सर, जसवंतपुरा, बैरासर छोटा, ददरेवा, तारानगर में धीरवास बड़ा, राजुपरा, तारानगर, कोहिणा, सरदारशहर में दूलरासर तथा रतनगढ़ में परसनेऊ, राजलदेसर, जांदवा, लोहा व भुखरेड़ी में स्थित माध्यमिक स्तर के विद्यालय को निम्न ग्रेड मिली है।

ऐसे हुई परीक्षा
एसएसए के तहत क्वालिटी इंश्योरेंस परीक्षण हुआ। राजस्थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद जयपुर के स्तर पर प्रश्न तैयार कर विद्यालयों में पहुंचाए गए। बेरोजगार प्रशिक्षक अध्यापक व कार्यरत सरकारी शिक्षकों ने विद्यालयों में जाकर कक्षा छह व सात के विद्यार्थियों की परीक्षा ली। कॉपियों की जांच ब्लॉक पर बीआरसीएफ कार्यालय में अनुभवी शिक्षकों से करवाई गई।

किसके कितने फेल
ब्लॉक स्कूल
सुजानगढ़ 9
चूरू 27
राजगढ़ 15
तारानगर 11
सरदारशहर 10
रतनगढ़ 14

यह रहा पैमाना
ग्रेड----- प्राप्तांक
ए----- 80 या इससे अधिक प्रतिशत
बी----- 65 से 79 प्रतिशत
सी----- 50 से 64 प्रतिशत
डी----- 36 से 49 प्रतिशत
ई----- 36 प्रतिशत से नीचे
--
क्वालिटी इंश्योरेंश परीक्षण के जरिए जिलेभर के एक हजार से अधिक स्कूलों के 32 हजार 146 विद्यार्थी की परीक्षा लेकर गुणवत्ता परखी गई। परीक्षण के परिणाम को हाल ही अंतिम रूप दिया गया है। जिले को सी ग्रेड मिली है। न्यून परिणाम वाले विद्यालय में जनवरी व फरवरी में अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी।
-जगदीश प्रसाद गोदारा, कार्यक्रम सहायक, एसएसए चूरू

Sunday, July 18, 2010

छात्र घोलने लगे 'राजनीति' का रंग

[ छात्रसंघ चुनाव 2010 ] :
छात्र संगठन हुए सक्रिय,
चुनाव की प्रारम्भिक तैयारियां शुरू
चूरू. महाविद्यालयों में अगले माह प्रस्तावित छात्रसंघ चुनावों का रंग घुलने लगा है। चुनाव को लेकर जहां छात्रों के घुंघरू बंध गए हैं वहीं छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। संगठनों ने चुनाव की प्रारम्भिक तैयारियां शुरू कर दी है। कोई सदस्यता अभियान शुरू करने जा रहा है तो कोई पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाकर चुनावी रणनीति बनाने की तैयारी में हैं। छात्र संगठन महाविद्यालयों में सीटें बढ़ाने की मांग को लेकर गुरुवार तक धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। अब सीटें बढ़ाए जाने पर संगठनों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिले में सक्रिय एसएफआई, एनएसयूआई व एबीवीपी समस्त सरकारी महाविद्यालयों में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। हालांकि महाविद्यालय प्रबंधन को चुनाव के संबंध में अभी तक कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिली है। ऐसे में महाविद्यालय प्रबंधन असंमजस की स्थिति में है।

एसएफआई
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इण्डिया (एसएफआई) की रविवार को चूरू के शिक्षक भवन में जिला कमेटी की प्रथम बैठक होगी। इसमें लोहिया कॉलेज इकाई के साथ चुनाव रणनीति को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। पार्टी की सरदारशहर इकाई की बैठक सोमवार को होगी। जिलाध्यक्ष दीपचंद बलौदा ने बताया कि पार्टी की तारानगर में बैठक हो चुकी है। सुजानगढ़ में पार्टी कम सक्रिय होने के कारण वहां पर बाद में बैठक होगी।
एबीवीपी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) चुनावों को लेकर 19 जुलाई से सदस्यता अभियान शुरू करेगी। इस बार साढ़े तीन हजार नए सदस्यों के साथ सदस्यों की कुल संख्या दस हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य है। फिलहाल फतेहपुर में सीकर, चूरू, झुंझुनूं के कार्यकर्ताओं का दो दिवसीय अभ्यास शिविर चल रहा है। जिला प्रमुख ओमप्रकाश महर्षि के अनुसार अगस्त में उम्मीदवार तय किए जाएंगे।
एनएसयूआई
छात्रसंघ चुनाव की तैयारियों को लेकर एनएसयूआई भी पीछे नहीं है। पार्टी की जिला कार्यकारिणी की बैठक में प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे। प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारी तय होगी। जिलाध्यक्ष भींवाराम मेघवाल के अनुसार चुनाव रणनीति बनाने के लिए पार्टी पदाधिकारी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। जिला कार्यकारिणी की बैठक का समय और स्थान मंगलवार तक निर्धारित किया जाएगा।

यह रहेगा कार्यक्रम
राज्य सरकार ने छात्रसंघ चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 16 अगस्त को मतदाता सूचियां प्रकाशित की जाएंगी। 19 अगस्त तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे। 20 अगस्त को नाम वापस लिए जा सकेंगे। 21 अगस्त को अंतिम सूची प्रकाशित होगी। 25 अगस्त को सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक वोट डाले जाएंगे।
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चुनाव के संबंध में उच्च अधिकारियों से अभी तक कोई लिखित जानकारी नहीं आई है। टीवी और अखबारों से ही पता चला है कि 25 अगस्त को चुनाव हंै।अधिकृत सूचना मिलने पर महाविद्यालय स्तर पर चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी।
-एमडी गोरा, प्राचार्य, राजकीय लोहिया महाविद्यालय, चूरू

Thursday, July 15, 2010

बिना धुएं का खाना हुआ 'धुआं'

चूरू । जिले के एक हजार से अघिक सरकारी स्कूलों में मिड डे मील कार्यक्रम के तहत बच्चों को बिना धुएं का भोजन खिलाए जाने का सरकार का सपना धुआं होता जा रहा है। स्कूलों में रसोई गैस की उपलब्धता अब तक सुनिश्चित नहीं हो पाई है। इसके लिए भले ही रसद विभाग, शिक्षा विभाग व गैस वितरिकों के अलग-अलग दावे-प्रतिदावे रहे हों, मगर स"ााई है कि इस लक्ष्य को पाने में किसी ने भी स"ो मन से कतई प्रयास नहीं किए हैं।
रसद विभाग की मानें तो उन्हें इस संबंध में गैस वितरिकों की ओर से कनेक्शन मुहैया नहीं करवाने की पहले कभी शिकायत ही नहीं मिली । रसद विभाग इस बारे में आगे खोज-खबर कब लेगा यह तो पता नहीं लेकिन गैस वितरकों का यह कहना है कि उन तक कनेक्शन लेने के लिए स्कूलों ने गंभीर प्रयास ही नहीं किए।
उधर, स्कूलों का तर्क है कि आवेदन करने के बाद वितरकों से कई बार सम्पर्क साधा गया किन्तु कनेक्शन देने में उन्होंने रूचि एवं तत्परता नहीं दर्शाई। रसोई गैस के अभाव में भोजन पकाना टेढी खीर साबित हो रहा है।


कब-कब जारी की राशि
शिक्षा विभाग ने रसोई गैस कनेक्शन के लिए मिड डे मील कार्यक्रम से जुडे 136 विद्यालयों के खातों में 1 अक्टूबर 2008 को पांच-पांच हजार रूपए के हिसाब से 6 लाख 80 हजार रूपए जमा करवाए थे। इस साल मार्च में 575 स्कूलों को 23 लाख रूपए जारी किए गए। वर्तमान में किसी भी स्कूल को गैस कनेक्शन नहीं मिल पाया है। कुछ विद्यालयों को छोडकर शेष विद्यालयों ने तो रसोई गैस पाने की दिशा में कदम ही नहीं बढाए हैं।


1231 स्कूलों में समस्या
जिले के 1 हजार 8 8 5 स्कूल में 2 लाख 933 विद्यार्थी मिड डे मील का पोषाहार पा रहे हैं। इनमें दस फीसदी स्कूलों ने अपने स्तर पर रसोई गैस की व्यवस्था कर रखी है जबकि 46 6 स्कूलों में अन्नपूर्णा सहकारी समितियो के माध्यम से पोषाहार पहुंचाया जा रहा है। शेष एक हजार 231 स्कूलों में शाला विकास प्रबंध समिति लकडी व गोबर के उपले से पोषाहार पकाने को मजबूर है।


जोखिम के साथ बीमारी भी
स्कूलों में चूल्हे पर लकडी व गोबर के उपलों से भोजन पकाने पर धूएं के कारण विद्यार्थियों का दम घुटता है। इससे विद्यार्थियो के बीमारियों की चपेट में आने की आशंका भी बनी रहती है। साथ ही पकाने के बाद चूल्हे में लकडियां जलती रहने के कारण छोटे ब"ाों का विशेष्ा ध्यान रखना पडता है।


यह होता है पकाना
कार्यक्रम के तहत कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को मध्यान अवकाश में भोजन परोसा जाता है। सप्ताह में चार दिन रोटी-सब्जी व दाल-रोटी तथा दो दिन मीठे या नमकीन चावल तथा दाल-खिचडी खिलाई जाती है।
नवम्बर 2009 में कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। आज तक कनेक्शन नहीं मिला। एजेंसी का तर्क है कि कनेक्शन के दस्तावेज संभाग मुख्यालय बीकानेर भेज दिए गए। बीकानेर से कर्मचारी आकर कनेक्शन जारी करेंगे।
-छगनलाल शर्मा, संस्था प्रधान, राउप्रावि नम्बर आठ, चूरू



संस्थाओं को गैस कनेक्शन एग्जम्पटेड श्रेणी में दिया जाता है। जो संभाग स्तरीय ऑफिस से जारी किया जाएगा। करीब 25 विद्यालयों के मामले बीकानेर भिजवाए हुए हैं। स्कूलों को जल्द ही कनेक्शन दिलवाया जाएगा।
-श्यामसुन्दर बगडिया, संचालक, बगडिया गैस एजेंसी, चूरू

स्कूलों में रसोई गैस कनेक्शन नहीं मिलने की जानकारी आज ही बैठक में मिली है। एजेंसियों व शिक्षा अघिकारियों से इस संबंध में चर्चा कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
-हरलाल सिंह, रसद अघिकारी, चूरू


गत शनिवार को गांव श्योपुरा के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया तो उपलों से पोषाहार पकाया जा रहा था। दो साल से गैस कनेक्शन का इंतजार है। इस संबंध में मंगलवार को आयुक्त को भी पत्र लिखा गया है।
-युनूस अली, सहायक प्रभारी, मिड डे मील कार्यक्रम, चूरू