Sunday, August 30, 2009
ऐसा पानी तौबा-तौबा
Friday, August 7, 2009
बिन बरसे फिरा पानी
विश्वनाथ सैनी
चूरू, 7 अगस्त। थळी के धोरों में नीली छतरी वाले की मेहरबानी नहीं होने से खरीफ का बूटा-बूटा दम तोडऩे लगा है। मेहनत को मिट्टी में मिलती देख काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी हंै।
हालात इस कदर बिगड़ते जा रहे हैं कि दस-बारह दिन में फसलों की प्यास नहीं बुझी तो काश्तकारों की उम्मीदों पर बिन बरसे ही पानी फिर जाएगा। खेतों से अनाज की पैदावार तो दूर चारे के भी लाले पड़ जाएंगे।
विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में खरीफ फसलों की कुल बुवाई के करीब पांच प्रतिशत यानि 40 हजार 275 हैक्टेयर में फसलें पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। इसमें चारा पैदा होने की भी गुंजाइश नहीं बची है।
कितनी प्यास, कितनी उम्मीद
कृषि अधिकारियों की मानें तो आगामी पांच दिन में बारिश होती है तो खरीफ फसलों की प्रति हैक्टेयर अनुमानित पैदावार में से ग्वार की 75 प्रतिशत, बाजरा व मोठ की 70-70 प्रतिशत पैदावार ही हासिल हो सकेगी।
तीन-चार रोज में बारिश होने पर मूंग की साठ प्रतिशत पैदावार प्राप्त होने की गुंजाइश है। खरीफ की अन्य फसलों की स्थिति दयनीय है।
तापमान बना दुश्मन
सावन में अच्छी बारिश के बाद अगर तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस रहे तो फसलों के लिए वरदान साबित होता है मगर इस बार सावन सूखा बितने पर तापमान भी फसलों का दुश्मन बना हुआ है। कृषि विभाग के मौटे अनुमान के तौर पर जिले में रोजाना करीब दो हजार हैक्टेयर में फसल दम तोड़ रही है।
घट गया उत्पादन
फसल~~~~ नुकसान
बाजरा~~~~ 25-30
ग्वार~~~~~ 25
मोठ~~~~~ 30
मूंग~~~~~~40
मूंगफली~~~15-20
(कृषि विभाग के अनुसार नुकसान प्रतिशत में)
पैदावार में घाटा
ब्लॉक~~~~ नुकसान
रतनगढ़~~~40
चूरू~~~~~~35
सरदारशहर~ 32-33
तारानगर~~~31
राजगढ़~~~~28
सुजानगढ़~~20-25
(कृषि विभाग के अनुसार नुकसान प्रतिशत में)
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बारिश नहीं होने से आगामी सप्ताह में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा जाएंगी। फसलों से पैदावार तो दूर चारे की भी गुंजाइश नहीं रहेगी।
-रणजीतसिंह सर्वा, कृषि अधिकारी
Wednesday, July 29, 2009
लहराने लगा लहरिया
Monday, July 13, 2009
नरेगा पर निगेहबान होंगी "घाघ" आंखें
इन अघिकारियों को नरेगा के स्टेट लेवल ऑब्जर्वर का ओहदा दिया गया है। इन्हें उन कार्यस्थलों पर भेजा जाएगा, जहां गड़बड़ी और धांधली की शिकायत होगी। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री कार्यालय एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय से ग्रामीण विकास विभाग को मिलने वाली ऎसी तमाम शिकायतों की इन अघिकारियों से जांच कराई जाएगी।
नरेगा कार्यस्थल पर पहुंचकर शिकायत की वास्तविकता तथा दोषियों का पता लगाने के साथ यह अघिकारी श्रमिकों से सीधा संवाद भी करेंगेे। श्रमिकों से प्राप्त हुई शिकायत तथा मीडिया की खबरों के आधार पर भी अघिकारी मामले की जांच करेंगे।
कितनी हैं शिकायतें
प्रदेश में नरेगा से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। मौटे अनुमान के अनुसार नरेगा की चार सौ से अघिक गंभीर शिकायते जांच के लिए लम्बित हैं। इनमें केवल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा संबंघित विभाग को सीधी प्राप्त हुई शिकायतें शामिल हैं। कई शिकायतें जिला स्तर पर ही जांच के लिए लम्बित हैं। प्रदेश स्तर पर बकाया शिकायतों में शेखावाटी के सीकर जिले की 15, झुन्झुनूं की 7 और चूरू की 19 शिकायतें शामिल हैं।
ये होंगे अघिकार
अघिकारियों को नरेगा की शिकायत की जांच तथा योजना की क्रियान्विति के स्तर को परखने का अघिकार दिया गया है। अघिकारी नरेगा की शिकायत की जांच के लिए संबंघित कार्यस्थल पर जाते समय रास्ते में पड़ने वाले अन्य कार्यस्थलों का भी निरीक्षण कर सकेंगे। इसके लिए अफसरों को नरेगा के 25 से 30 बिन्दुओं की जांच सूची उपलब्ध करवाई गई है।
ऊंचे ओहदे से हुए सेवानिवृत्त
आघिकारिक जानकारी के अनुसार नरेगा पर्यवेक्षक के लिए दो सौ से अघिक सेवानिवृत्त अघिकारियों ने आवेदन किया था। आवेदनकर्ताओं में से 50 से अघिक अघिकारियों को नरेगा के स्टेट लेवल ऑब्जर्वर के रूप में चुना गया। अघिकांश अघिकारी ऊंचे ओहदे से सेवानिवृत्त हुए हैं। इनमें अतिरिक्त आयुक्त आयकर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मुख्य वैज्ञानिक, आइएएस, आरएएस, विश्वविद्यालय के निदेशक, प्रोफेसर व बीएसएनएल आदि के सेवानिवृत्त अघिकारी शामिल हैं।
किस तरह की होती हैं शिकायतें
*नरेगा में निर्घारित समय पर काम नहीं मिलना
*भुगतान में देरी होना
* मस्टररोल में फर्जीवाड़ा और दिहाड़ी कम देना
*महिलाओं से छेड़छाड़ एवं दुराचार
*नरेगा स्थल पर आधारभूत सुविधाओं का अभाव
*नरेगा स्थल पर मशीनों से काम कराना
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सेवानिवृत्त अघिकारियों को नरेगा कार्यस्थलों की जिम्मेदारी सौंपी जाने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। इन्हें हाल ही जयपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया गया है। अघिकारियों को कार्यस्थल आवंटित किए जा रहे हैं। अघिकांश अघिकारी आगामी पखवाड़े से काम शुरू कर देंगे।
-राजेन्द्र भानावत, आयुक्त, नरेगा, जयपुर
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:
Pawan Rana said...
Pawan Rana,
You have taken a step into a wide ocean, let leave all the things on time now. flow, grow and glow like lotus.
Best wihsed!
August 3, 2009 12:27 PM
Thursday, June 25, 2009
नमक पर अब पैनी नजर
Saturday, June 6, 2009
खिलाने से पहले छीना निवाला
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
Wednesday, June 3, 2009
पानी के नाम पर बंट रहा चरणामृत
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
Tuesday, June 2, 2009
सिर्फ आधा गिलास पानी!
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
Friday, May 22, 2009
Thursday, May 21, 2009
धोरों में पला, एवरेस्ट पर चला
Saturday, April 25, 2009
बॉर्डर नाकों पर खुफिया नजर
24 स्थानों पर बनेंगे चैक पोस्टसीसी कैमरों से होगी निगरानी
चूरू, 25 अप्रेल। लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा से सटी अन्तरराज्यीय सीमा पर खुफिया कैमरे नजर रखेंगे। कैमरे सादुलपुर उपखण्ड से सटी हरियाणा सीमा पर स्थित 24 चैकपोस्टों पर लगाए जाएंगे। इनमें से 14 चैकपोस्ट राजस्थान में होंगी। बॉर्डर पर स्थापित चैक पोस्टों पर एक-एक क्लोज सर्किट (सीसी) कैमरा लगाया जाएगा। जिला प्रशासन सीसी कैमरे जुटाने के साथ ही उन स्थानों की पहचान में लगा हुआ है जहां चैकपोस्ट बनाए जाएंगे। अधिकारिक जानकारी के अनुसार हरियाणा से लगती सीमा से जिले में घुसने के अनेक रास्ते हैं जिनमें से उन रास्तों पर चैकपोस्ट लगाई जाएगी जिन्हें तस्कर और अंतराज्यीय अपराधी अक्सर इस्तेमाल करते रहे हैं। वाहनों के नम्बर होंगे नोट खुफिया कैमरा चैक पोस्ट के ऐसे स्थान पर लगाया जाएगा जहां से जिले की सीमा में घुसने वाले वाहनों के नम्बर तक आसानी से कैमरे की आंख में कैद हो सकें। इससे चैक पोस्ट नाका तोड़कर भागने वाले वाहनों की पहचान कर चालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।
वाहन आने पर कैमरा होगा ऑन
अधिकारिक जानकारी के अनुसार चैक पोस्ट पर लगे सीसी कैमरे को वाहन आने पर ही ऑन किया जाएगा। चैकपोस्ट पर पुलिस कर्मियों के अलावा कैमरा संचालन के लिए तीन पारियों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
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14 चैक पोस्टों पर सीसी कैमरों की मदद ली जाएगी। कैमरों की तैनाती के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इससे सीमा पर निगरानी रखने में खासी आसानी हो जाएगी।- डा. केके पाठक,जिला निर्वाचन अधिकारी, चूरू
Monday, April 20, 2009
जी हूजूर! मिलेंगे थार में भी खजूर
अरब देशों से मंगवाए पौधे, काश्तकारों को अनुदान पर मिलेंगे
चूरू, 20 अप्रैल। प्रदेश के पश्चिमी इलाके की पहचान अब रेत के समंदर के साथ-साथ खजूर की खेती से भी होगी। काश्तकारों को इसी साल अगस्त-सितम्बर में खजूर के पौधे मिलने शुरू हो जाएंगे। आय व रोजगार बढ़ाने के उदे्श्य से शुरू की गई राज्य सरकार की अनूठी योजना के तहत यह सब होगा। योजना में जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, गंगानगर व हनुमानगढ़ को शामिल किया गया है। चूरू जिले को भी योजना में शामिल कर लिया गया है।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार खजूर की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए दुनियां में विख्यात संयुक्त अरब अमीरात एवं सऊदी अरब से खजूर के 68 हजार 200 पौधे मंगवाए जा चुके हैं। जोधपुर की चोपासनी नर्सरी में पौधों को रखवाया गया है। अरब देशों में टिश्यू कल्चर से लैब में इन पौधों को तैयार किया जाता है। कृषि विभाग ने योजना के तहत पश्चिमी क्षेत्र में करीब साढ़े चार सौ हैक्टेयर में खजूर की खेती किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
निजी कम्पनी करेगी मदद
खजूर की खेती के लिए खेत तैयार करने, पौधे रोपने, खाद व उर्वरकों का उपयोग, सिंचाई, पौध संरक्षण, मौसम से पौधों का बचाव करने में गुजरात के बलसाड़ की एक निजी कम्पनी काश्तकारों की मदद करेगी। अधिकारिक जानकारी के अनुसार करीब तीन साल बाद खजूर की पैदावार शुरू होगी। इस अवधि में पौधा खराब होने पर कम्पनी की ओर से किसान को बदले में दूसरा पौधा उपलब्ध करवाया जाएगा।
इसलिए चुना पश्चिमी क्षेत्र
खजूर की खेती के लिए शुष्क एवं अद्र्ध शुष्क क्षेत्र, लम्बे समय तक गर्मी, कम बारिश एवं बहुत कम आर्द्रता वाला क्षेत्र उपयुक्त है। खजूर के पेड़ पर जुलाई-अगस्त में फल पकते हैं। इस दौरान अधिक बारिश एवं नमी युक्त वातावरण होने से पके फल सड़ जाते हैं। खजूर का पौधा गर्मियों में अधिकतम 50 डिग्री सैल्सियश एवं सर्दियों में शून्य से पांच डिग्री सैल्सियश नीचे तक का तापमान कुछ हद तक सह लेता है। खजूर के फल आने के समय 24 से 40 डिग्री सैल्सियश तापमान उपयुक्त माना जाता है। तमाम विशेषताओं के चलते खजूर की खेती के लिए प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र का चयन किया गया है। चूरू जिला भी इस लिहाज से खजूर की खेती के लिए अनुकूल है।
नब्बे फीसदी अनुदान
काश्तकारों को आठ गुना आठ मीटर की दूरी पर प्रति हैक्टेयर में कम से कम 156 पौधे लगाने होंगे। पौधे की कीमत 2 हजार 500 से 3 हजार 500 रुपए आएगी। काश्तकारों को 'पहले आओ पहले पाओ' की नीति के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे।------पौधे मंगवाए जा चुके हैं। अगस्त-सितम्बर में वितरित किए जाएंगे। खजूर के फल बेचने के लिए काश्तकारों को स्थानीय स्तर पर बाजार आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से भी प्रयास किए जाएंगे।
-दयालसिंह, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग,जोधपुर
इस संबंध में 15 अप्रेल 09 को जयपुर में सेमीनार हुई थी। जिले में खजूर की खेती की अपार संभावना है। क्षेत्र के किसानों को भी पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे।
-भंवरसिंह राठौड़, उपनिदेशक, कृषि (विस्तार), चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:
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1 टिप्पणियाँ:
Anil said...
ये काम पहले नहीं कर सकते थे क्या? बारिश न होने की स्थिति में मरुस्थल में खजूर उगाकर लोगों को रोजी-रोटी दी जा सकती है। खबर के लिये भंवरसिंह जी और आपका धन्यवाद!
April 21, 2009 1:14 PM