Sunday, August 30, 2009

ऐसा पानी तौबा-तौबा

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स्वच्छ जलाशय का दूषित होता पानी
चूरू , 30 अगस्त। जिले में जलजनित बीमारियों के नित नए मामले सामने आने के बावजूद जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग लोगों की सेहत के प्रति कितना गंभीर है इसका अंदाजा राजकीय गोयनका उच्च माध्यमिक विद्यालय के पीछे स्थित स्वच्छ जलाशय को देखकर सहज लगाया जा सकता है। शहर के आधा दर्जन वार्डों के हजारों लोगों को पीने का पानी मुहैया करवाने वाला यह जलाशय लम्बे समय से सफाई की बाट जो रहा है। जलाशय के पानी को परिंदों व धूल-मिट्टी से बचाए रखने के लिए लगाई गई सीमेंट की चद्दरें टूटकर कब जलप्लावित हो गई विभाग को खबर ही नहीं है। अचम्भे की बात तो यह है कि ऐसे जलाशयों पर विभाग के कर्मचारी की नियमित नजर ही नहीं है। पत्रिका टीम ने रविवार को जलाशय को देखा तो पानी में पक्षियों के अण्डे व पंख आदि गंदगी तैरती नजर आई। जलाशय का करीब चालीस प्रतिशत हिस्सा ऊपर से खुला पड़ा था। अधिकारिक जानकारी के अनुसार सात सौ पचास किलोलीटर पानी क्षमता के इस जलाशय से वार्ड नम्बर 35 से 40 तथा वार्ड नम्बर एक के घरों में सुबह-शाम जलापूर्ति की जाती है। जलाशय पर तैनात हैल्पर सत्तार अली ने बताया कि 31 जुलाई को छत के नीचे लगा पाइप टूटने से आधा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इससे अधिकारियों को अवगत भी करवा दिया गया था।नहीं निकाली चद्दरेंजलाशय को सीमेंट की चार दर्जन से अधिक चद्दरों से ढका गया है। इनमें से जलाशय के पानी में डूबीं पांच चद्दरों को तो एक माह में भी बाहर नहीं निकाला जा सका है। इनके अलावा तीन चद्दरों का कुछ हिस्सा चौबीसों घंटे पानी में डूबा रहता है।
जल की शुद्धता का सवाल
आपणी योजना के कर्मसाना पम्पिंग स्टेशन से नहर का पानी शुद्धिकरण के बाद इस जलाशय में आता है। जलाशय के पास स्थित टंकी से पानी घरों में सप्लाई किया जाता है। जलाशय का कुछ हिस्सा ऊपर से खुला पड़ा होने से पानी की शुद्धता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। जलदाय महकमे के अधिकारियों का इस ओर तनिक भी ध्यान नहीं गया है जबकि जिले के सुजानगढ़ तहसील के गांव बडावर में दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त के कारण हाल ही तीन जने अकाल मौत का शिकार हो चुके हैं।
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तीन साल पहले इस जलाशय की आरसीसी की छत गिरने से इस पर सीमेंट की चद्दरें लगाई थीं। सीमेंट की चद्दरें टूटकर इसमें गिरने की मुझे जानकारी नहीं है। ऐसी बात है तो अविलम्ब छत की मरम्मत करवाकर जलाशय की सफाई करवा दी जाएगी।
-शेषराम वर्मा, सहायक अभियंता (शहर), जलदाय विभाग
टंकी ने उड़ाई नींद
हादसे को दे रही है निमंत्रण
चूरू, 30 अगस्त। वार्ड 21 स्थित पानी की टंकी ने लोगों की नींद उड़ा रखी है। जर्जरावस्था में खड़ी यह टंकी चौबीस पहर हादसे को दावत देती नजर आती है। हैरत की बात है कि जलदाय विभाग के पीठ पीछे स्थित इस टंकी को ढहाने अथवा मरम्मत कराने पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।बिसाऊ रोड स्थित पानी की इस टंकी का कभी प्लास्टर तो कभी सीढिय़ां गिरती रहती हैं। वर्तमान में टंकी के छज्जे का कुछ हिस्सा तो हवा में लटक रहा है। गिरने की कगार पर पहुंच चुकी इस टंकी से आस-पास लोगों में भय व्याप्त है। पानी का भार वहन करने लायक नहीं रहने पर विभाग ने इससे जलापूर्ति तो बंद कर दी मगर इसकी मरम्मत या इसे सुरक्षित नीचे गिराने की ओर ध्यान ही नहीं दिया।
पहले सीढ़ी गिरी अब छज्जा
वार्डवासियों की मानें तो करीब दो माह पहले टंकी के ऊपर स्थित लोहे की सीढिय़ां नीचे आ गिरी थीं और अब शनिवार रात दस बजे टंकी का छज्जा रैलिंग समेत भरभराकर नीचे गिर गया। प्लास्टर तो आए दिन गिरता रहता है।कब मिलेगी राहतटंकी का झुकाव पश्चिम दिशा की ओर है। इस ओर राजेन्द्र शर्मा, शंकरलाल शर्मा, सरला देवी व राजकुमार समेत कई लोगों के घर हैं। टंकी कभी भी इनके घरों पर गिर सकती है। विभाग के अधिकारी अब भी चेत जाएं तो परेशान लोगों को राहत मिल सकती है। कल को खुदा ना खास्ता टंकी से कुछ हो
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टंकी के दो पिलर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। टंकी पश्चिमी दिशा में कभी भी गिर सकती है। इससे कई परिवारों पर खतरा मंडरा रहा है। सीढिय़ां गिरी तो वार्डवासियों ने अभियंताओं से इसे गिराने की मांग भी की थी।
-मनोज कुमार शर्मा, वार्डवासी
टंकी करीब 1982 में बनी थी। सालभर से जर्जर है। इसका कुछ हिस्सा गिर चुका है। विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत करवाया तो जवाब मिला कि इसे गिराने के टेण्डर हो चुके हैं। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा मगर नतीजा सिफर
-कमल कुमार शर्मा, वार्डवासी
रात को दस बजे अचानक धमाके के साथ छज्जा नीचे आ गिरा। बच्चे डर गए और रोने लगे। वार्ड के अधिकांश लोग घरों से बाहर आ गए। टंकी से लोगों में भय व्याप्त है।
-नर्मदा देवी, वार्डवासी

Friday, August 7, 2009

बिन बरसे फिरा पानी

बूटा-बूटा तोडऩे लगा दम, 40 हजार हैैक्टेयर की फसलें चौपट, 2 हजार हैक्टेयर रोजाना प्रभावित
विश्वनाथ सैनी
चूरू, 7 अगस्त।
थळी के धोरों में नीली छतरी वाले की मेहरबानी नहीं होने से खरीफ का बूटा-बूटा दम तोडऩे लगा है। मेहनत को मिट्टी में मिलती देख काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी हंै।
हालात इस कदर बिगड़ते जा रहे हैं कि दस-बारह दिन में फसलों की प्यास नहीं बुझी तो काश्तकारों की उम्मीदों पर बिन बरसे ही पानी फिर जाएगा। खेतों से अनाज की पैदावार तो दूर चारे के भी लाले पड़ जाएंगे।
विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में खरीफ फसलों की कुल बुवाई के करीब पांच प्रतिशत यानि 40 हजार 275 हैक्टेयर में फसलें पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। इसमें चारा पैदा होने की भी गुंजाइश नहीं बची है।

कितनी प्यास, कितनी उम्मीद
कृषि अधिकारियों की मानें तो आगामी पांच दिन में बारिश होती है तो खरीफ फसलों की प्रति हैक्टेयर अनुमानित पैदावार में से ग्वार की 75 प्रतिशत, बाजरा व मोठ की 70-70 प्रतिशत पैदावार ही हासिल हो सकेगी।
तीन-चार रोज में बारिश होने पर मूंग की साठ प्रतिशत पैदावार प्राप्त होने की गुंजाइश है। खरीफ की अन्य फसलों की स्थिति दयनीय है।

तापमान बना दुश्मन
सावन में अच्छी बारिश के बाद अगर तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस रहे तो फसलों के लिए वरदान साबित होता है मगर इस बार सावन सूखा बितने पर तापमान भी फसलों का दुश्मन बना हुआ है। कृषि विभाग के मौटे अनुमान के तौर पर जिले में रोजाना करीब दो हजार हैक्टेयर में फसल दम तोड़ रही है।

घट गया उत्पादन
फसल~~~~ नुकसान
बाजरा~~~~ 25-30
ग्वार~~~~~ 25
मोठ~~~~~ 30
मूंग~~~~~~40
मूंगफली~~~15-20
(कृषि विभाग के अनुसार नुकसान प्रतिशत में)

पैदावार में घाटा
ब्लॉक~~~~ नुकसान
रतनगढ़~~~40
चूरू~~~~~~35
सरदारशहर~ 32-33
तारानगर~~~31
राजगढ़~~~~28
सुजानगढ़~~20-25
(कृषि विभाग के अनुसार नुकसान प्रतिशत में)
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बारिश नहीं होने से आगामी सप्ताह में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा जाएंगी। फसलों से पैदावार तो दूर चारे की भी गुंजाइश नहीं रहेगी।
-रणजीतसिंह सर्वा, कृषि अधिकारी

Wednesday, July 29, 2009

लहराने लगा लहरिया

चूरू, 29 जुलाई। रक्षाबंधन के नजदीक आते ही कपड़ा बाजार की भी रौनक परवान चढऩे लगी है। कपड़ा व्यापारियों ने अपनी दुकानों के बाहर विभिन्न आकर्षक रंगों में बनीं लहरिए की साडिय़ों को प्रमुखता से सजाना शुरू कर दिया है। जिन्हें देखते ही राह चलती महिलाओं का बरबस ध्यान खिंचा चला जाता है। महिलाएं भले ही लहरिए की साड़ी ना खरीदें लेकिन दुकान पर रुककर और उसकी कीमत को मोल-भाव तो कर ही लेती हैं। उधर, राखियों की दुकानों में भी अब इजाफा होने लगा है। अब तक जनरल और स्टेशनरी की दुकान लगाने वाले व्यापारियों ने भी दुकान के बाहर अलग से थड़ी लगाकर उन पर राखियां सजा दी हैं। इन दुकानों पर ग्राहकों का हुजूम उमडऩे लगा है। ग्राहकों की भीड़ को देख दुकानदारों के चेहरे खिले दिखाई देते हैं। स्थिति यह है कि रक्षाबंधन पर इस बार दुकानदारों को अच्छी आमदनी की उम्मीद है।
ग्राहकों को लुभाने के लिए दुकानदार कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। एक ओर जहां दुकानदारों ने रंग-बिरंगी राखियां सजा दी हैं वहीं दूसरी ओर दुकानों के बाहर एक से बढ़कर एक डिजायन के रेडीमेड कपड़े लटका दिए हैं।
दुकानदार संदेश लोहिया ने बताया कि राखियों की खरीदारी दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। राखियों के रोजाना सौ से अधिक ग्राहक पहुुंच रहे हैं। इस बार डोरी और डायमण्ड वाली राखी सबसे अधिक पसंद की जा रही है। दुकानदार युनूस बताते हैं कि राखियों की बिक्री रविवार के बाद से परवान पर है। रोजाना तीन से चार हजार रुपए की राखियां आसानी से बिक रही है।

Monday, July 13, 2009

नरेगा पर निगेहबान होंगी "घाघ" आंखें

चूरू 13 जुलाई। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना (नरेगा) में अब धांधली और गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। यदि किसी ने करने की कोशिश भी की तो सरकार की नजरों से बच न पाएगा।नरेगा कार्यो पर अब अनुभवी आंखें निगेहबान होंगी। पचास से अघिक सेवानिवृत्त अघिकारी इस काम के लिए खास तौर पर प्रशिक्षित किए गए हैं। नरेगा के कामों में गड़बडियों के संभावित सुराखों की उन्हें सूक्ष्मता से जानकारी दी गई है।

इन अघिकारियों को नरेगा के स्टेट लेवल ऑब्जर्वर का ओहदा दिया गया है। इन्हें उन कार्यस्थलों पर भेजा जाएगा, जहां गड़बड़ी और धांधली की शिकायत होगी। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री कार्यालय एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय से ग्रामीण विकास विभाग को मिलने वाली ऎसी तमाम शिकायतों की इन अघिकारियों से जांच कराई जाएगी।
नरेगा कार्यस्थल पर पहुंचकर शिकायत की वास्तविकता तथा दोषियों का पता लगाने के साथ यह अघिकारी श्रमिकों से सीधा संवाद भी करेंगेे। श्रमिकों से प्राप्त हुई शिकायत तथा मीडिया की खबरों के आधार पर भी अघिकारी मामले की जांच करेंगे।

कितनी हैं शिकायतें
प्रदेश में नरेगा से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। मौटे अनुमान के अनुसार नरेगा की चार सौ से अघिक गंभीर शिकायते जांच के लिए लम्बित हैं। इनमें केवल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा संबंघित विभाग को सीधी प्राप्त हुई शिकायतें शामिल हैं। कई शिकायतें जिला स्तर पर ही जांच के लिए लम्बित हैं। प्रदेश स्तर पर बकाया शिकायतों में शेखावाटी के सीकर जिले की 15, झुन्झुनूं की 7 और चूरू की 19 शिकायतें शामिल हैं।

ये होंगे अघिकार
अघिकारियों को नरेगा की शिकायत की जांच तथा योजना की क्रियान्विति के स्तर को परखने का अघिकार दिया गया है। अघिकारी नरेगा की शिकायत की जांच के लिए संबंघित कार्यस्थल पर जाते समय रास्ते में पड़ने वाले अन्य कार्यस्थलों का भी निरीक्षण कर सकेंगे। इसके लिए अफसरों को नरेगा के 25 से 30 बिन्दुओं की जांच सूची उपलब्ध करवाई गई है।

ऊंचे ओहदे से हुए सेवानिवृत्त
आघिकारिक जानकारी के अनुसार नरेगा पर्यवेक्षक के लिए दो सौ से अघिक सेवानिवृत्त अघिकारियों ने आवेदन किया था। आवेदनकर्ताओं में से 50 से अघिक अघिकारियों को नरेगा के स्टेट लेवल ऑब्जर्वर के रूप में चुना गया। अघिकांश अघिकारी ऊंचे ओहदे से सेवानिवृत्त हुए हैं। इनमें अतिरिक्त आयुक्त आयकर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मुख्य वैज्ञानिक, आइएएस, आरएएस, विश्वविद्यालय के निदेशक, प्रोफेसर व बीएसएनएल आदि के सेवानिवृत्त अघिकारी शामिल हैं।

किस तरह की होती हैं शिकायतें
*नरेगा में निर्घारित समय पर काम नहीं मिलना
*भुगतान में देरी होना
* मस्टररोल में फर्जीवाड़ा और दिहाड़ी कम देना
*महिलाओं से छेड़छाड़ एवं दुराचार
*नरेगा स्थल पर आधारभूत सुविधाओं का अभाव
*नरेगा स्थल पर मशीनों से काम कराना
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सेवानिवृत्त अघिकारियों को नरेगा कार्यस्थलों की जिम्मेदारी सौंपी जाने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। इन्हें हाल ही जयपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया गया है। अघिकारियों को कार्यस्थल आवंटित किए जा रहे हैं। अघिकांश अघिकारी आगामी पखवाड़े से काम शुरू कर देंगे।
-राजेन्द्र भानावत, आयुक्त, नरेगा, जयपुर
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:

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1 टिप्पणियाँ:
Pawan Rana said...
Pawan Rana,
You have taken a step into a wide ocean, let leave all the things on time now. flow, grow and glow like lotus.
Best wihsed!

August 3, 2009 12:27 PM

Thursday, June 25, 2009

नमक पर अब पैनी नजर

व्यापारियों को जांच किट वितरित
राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम
चूरू, 25 जून। आयोडीनयुक्त नमक के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया। नमक के थोक व्यापारियों को अपने प्रतिष्ठान पर ही आयोडीनयुक्त नमक की जांच करने के लिए गुरुवार सुबह जिला परिषद सभागार में जांच के किट उपलब्ध करवाए गए। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग व यूनीसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम के तहत आयोडीनयुक्त नमक को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कार्यवाहक जिला कलक्टर बीएल मेहरड़ा ने व्यापारियों को नमक की खरीद में विशेष सजगता एवं सतकर्ता बरतने की नसीहत दी। सीएमएचओ प्रशांत खत्री, जिला प्रजनन शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डा। अजय चौधरी, नांवा लवण विभाग के उप अधीक्षक आरके सौगरा, संभागीय सलाहकार गोकुल वर्मा समेत नमक के कई थोक व्यापारी इस मौके पर मौजूद थे।
दुकानदार रखें प्रमाण पत्रकार्यक्रम में बताया गया कि नमक के थोक व्यापारियों को नमक निर्माता कम्पनियों से उनके ब्रांड में आयोडीन की निर्धारित मात्रा 30 पीपीएम का प्रमाण प्राप्त करना होगा। आयोडीनयुक्त नमक का नमूना फेल होने पर व्यापारी के पास कम्पनी का प्रमाण पत्र नहीं मिलने पर व्यापारी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
पैंतालीस नमूने फेल
आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले में मार्च, अप्रेल व मई के दौरान लिए गए 58 ब्रांडों के 118 नमूनों की जांच के बाद 45 नमूने आयोडीनयुक्त नमक के मापदण्डों पर खरा नहीं उतर पाए। चिकित्सा विभाग की ओर से 25 हानिकारक ब्रांडों की रिपोर्ट हाल ही जिला प्रशासन को सौंपी गई थी।
मुहिम का लक्ष्य जुलाई
आयोडीनयुक्त नमक के नाम पर साधारण नमक आपूर्ति करने वालों के खिलाफ 'आयोडीनयुक्त नमक-एक नया आंदोलन नामक मुहिम छेड़ी है। मुहिम का लक्ष्य जुलाई 09 तक जिले की समस्त दुकानों पर आयोडीनयुक्त नमक की उपलब्धता शत-प्रतिशत करना है।

Saturday, June 6, 2009

खिलाने से पहले छीना निवाला

राजगढ़ के 18 गांवों में परोसना था पोषाहार
चूरू, 6 जून। सरकारी आदेशों की बानगी तो देखिए कि जिले के अभावग्रस्त गांवों के विद्यालयों में बच्चों को गर्मियों की छुट्टियों में मिड डे मील के तहत भोजन परोसने का कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही बंद हो गया। पोषाहार कार्यक्रम जिले की राजगढ़ तहसील के उन 18 गांवों में शुरू किया जाना था, जिनमें फरवरी माह में ओलावृष्टि हुई थी। ओलावृष्टि से रबी की फसलों में हुए भारी नुकसान के कारण सभी गांवों को अभावग्रस्त घोषित किया गया है। सूत्रों के अनुसार दो जून 09 को मिड डे मील कार्यक्रम के शासन सचिव ने चूरू जिले के अभावग्रस्त गांवों के विद्यालयों में बच्चों को पोषाहार परोसने का आदेश जारी किया था। तीन जून को जिलास्तरीय अधिकारियों ने आदेश की पालना की तैयारी भी शुरू कर दी लेकिन इसी दिन प्राप्त हुए शासन सचिव के एक अन्य आदेश की पालना में कार्यक्रम बंद कर दिया गया।
अभावग्रस्त गांव
राजगढ़ तहसील के नेशल, भैंसली, बीराण, सुलखणियां बड़ा, बास किरताण, खुंडियाबास, बास भरीण्ड, किरताण, नंदा का बास, बास चनानी, बांगड़वा, बेवड़, भरीण्ड, गुगलवा, नवां, हमीरवास व बास लालङ्क्षसह के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान पोषाहार खिलाया जाना था।
प्रयास ही नहीं किए
छुट्टियों में अभावग्रस्त गांवों के विद्यालयों में बच्चों को पोषाहार नहीं खिलाने पर अफसरों का तर्क है कि गर्मी के कारण बच्चे पोषाहार खाने के लिए स्कूल ही नहीं आएंगे। यह बात दीगर है कि बच्चों को स्कूल तक लाने के प्रयास ही नहीं किए गए।अन्य जिलों से मिली सूचनाओं के आधार पर ग्रीष्मवकाश में बच्चे पोषाहार खाने के लिए स्कूलों में नहीं आ रहे हैं। इसलिए कार्यक्रम शुरू नहीं किया जा सका।
-बीआर डेलू, सीईओ, जिला परिषद, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Wednesday, June 3, 2009

पानी के नाम पर बंट रहा चरणामृत

चहुंओर हाहाकार 96 घंटे से नहीं टपका बूंद पानी स्थिति सुधरने के आसार आज चूरू, 3 जून पेयजल की भंयकर किल्लत के चलते जलदाय महकमा चार दिन से चूरू शहर में पानी के नाम पर चरणामृत बांट रहा है। शहर के आधा दर्जन वार्डों में 96 घंटों से पानी की एक बूंद भी नल से नहीं टपकी। शेष वार्डों में आवश्यकता की तुलना में गिलासभर पानी भी सप्लाई नहीं हो रहा है। शहर में चहुंओर पानी के लिए हाहाकार मचा है। बच्चे, बूढ़े, महिलाएं, युवक सभी सुबह-शाम पानी की जुगत में इधर से उधर भटक रहे हैं। जहां-तहां सार्वजनिक नलों पर पानी उपलब्ध हो रहा है वहां पानी भरने वालों का तांता लग जाता है। गली-मोहल्लों में टैंकरों के पहुंचते ही लोग खाली बरतन लिए दौड़े चले आते हैं। बच्चों के लिए गर्मियों की छुट्टियां मौज-मस्ती के बजाय पानी की माथा-पच्ची में ही बीत रही हैं। ऊपर से गर्मी और उमस की मार ने लोगों का बुरा हाल कर रखा है। न खाना भाता है न सोना सुहाता है। घरती से उठती तपन और चिपचिपाता बदन काम करने की क्षमता को क्षीण बना रहा है।यह बात दीगर है कि अंधड़ से आपणी योजना के कर्मसाना पम्ंिपग स्टेशन के दो विद्युत टावर गिरने से गड़बड़ाई जलापूर्ति बुधवार तक बहाल होने के आसार है। आपणी योजना के अभियंताओं का दावा है कि विद्युत व्यवस्था सुचारू कर दी गई है। बुधवार सुबह से जलापूर्ति नियमित हो जाएगी।
टैंकर का बेसब्री से इंतजार
शहर के वार्ड 38 , 37, 23, 30, मोचीवाड़ा, सब्जी मण्डी, पंचमुखी बालाजी व रामदेव मंदिर इलाके में लोगों के हलक टैंकरों से तर किए जा रहा हैं। बुधवार को लोगों को टैंकरों का बेसब्री से इंतजार रहा। मोहल्ले में टैंकर पहुंचते ही लोगों में पानी भरने की होड़ मच गई। विभाग के तीन टैंकर रोजना 15 से 20 फेरे लगा रहे हैं। हालत यह है कि जहां भी टैंकर पहुंचता है पानी भरने वाले इतने लोग जमा हो जाते है कि घर के सदस्यों के लिए वांछित पानी की अपेक्षा उन्हें उपलब्ध पानी चरणामृत लगता है।
सप्लायर्स की बल्ले-बल्ले
शहर में पानी की कमी के कारण वाटर सप्लायर्स की चार दिन से बल्ले-बल्ले हो रही है। पानी के कंटेनरों की मांग दोगुनी हो गई है। शहर में तीनवाटर सप्लायर्स हैं। तीनों ही के यहां इन दिनों लक्ष्मी मेहरबान है।
तब जाकर मिलेेगा पानी
कर्मसाना पम्ंिपग स्टेशन से जलापूर्ति शुरू होने के तकरीबन 16 घंटे बाद मीठा पानी घरों में पहुंच सकेगा। मीठे पानी को कर्मसाना से चूरू तक पहुंचने में करीब आठ घंटे लगेंगे। इतना ही समय पीएचईडी की टंकियां भरने में लगेगा।
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कर्मसाना पमिपग स्टेशन की विद्युत आपूर्ति सुचारू हो गई है। मीठे पानी की आपूर्ति शुरू कर दी है। पानी की टंकियां भरते ही जलापूर्ति बुधवार सुबह तक सामान्य होने की उम्मीद है।
-महासिंह बेनीवाल, अधीक्षण अभियंता, चूरू
पानी की स्थिति सामान्य रहने पर प्रतिदिन सौ कंटेनर बेचता था। सरकारी जलापूर्ति ठप होने से कंटेनरों की मांग दो-ढाई गुनी हो गई है।
-मनोहर सिंह, वाटर सप्लायर, चूरू
शहर के आधा दर्जन इलाकों में पीएचईडी का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। टैंकरों से जलापूर्ति कर लोगों की प्यास बुझाई जा रही है।
-शेषराम वर्मा, सहायक अभियंता, चूरू (शहर)
भाईजी, चार दिन सूं पाणी कोनी आयो। नहाणो-धोणो तो दूर वार्ड में पीबा का पाणी को भी टोटो है।
-खातुन, वार्डवासी, वार्ड 25
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Tuesday, June 2, 2009

सिर्फ आधा गिलास पानी!

आपणी योजना की पेयजल आपूर्ति बंद-सारा दारोमदार पीएचईडी पर-जिलेभर में पानी की भयंकर किल्लत-आमजन
चूरू , 2 जून। गत तीन दिन से जलदाय महकमा चूरू शहरवासियों को आवश्यकता की तुलना में आधा गिलास पानी उपलब्ध करवा रहा है। यह हालात अंधड़ के कारण दो विद्युत टावर गिर जाने से आपणी योजना के कर्मसाना पम्ंिपग स्टेशन पर जल शुद्धिकरण ठप हो जाने से पैदा हुए हैं। अगले एक-दो दिन में हालात सुधरने के भी आसार नहीं हैं। घरों में घड़े रीते पड़े हैं। कंठ सूखने लगे हैं। लोगों को पानी मोल मंगा कर गले तर करने पड़ रहे हैं। चूरू शहरवासियों को रोजाना 16 हजार किलो लीटर पानी की आवश्यकता है मगर विभाग के पास साठे आठ हजार किलो लीटर पानी से एक भी बूंद पानी अधिक नहीं है। यह साठे आठ हजार किलोलीटर पानी भी विभाग को अपने 98 स्थानीय कुओं और टयूबवैलों से प्राप्त हो रहा है। आपणी योजना की पेयजल आपूर्ति तीन दिन से बंद है। ऐसे में शहरवासियों को भयंकर पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। लोगों की प्यास बुझाने के लिए विभाग की ओर से शहर में तीन टैंकर २४ घंटे दौड़ाए जा रहे हैं जो कि क्षेत्रफल और आवश्यकता की तुलना में ऊंट के मूंह में जीरा समान है। शहरवासियों के हलक पूरी तरह से तर नहीं हो पा रहे हैं।
खाली हो गई टंकियां
फिलहाल आपणी योजना और पीएचईडी की पेयजल टंकियां खाली हो गई है। पीएचईडी के जलस्त्रोतों से पानी उपलब्ध होने के साथ-साथ ही सप्लाई किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि शहर के सभी वार्डों में थोड़ा-थोड़ा पानी छोड़ा जा रहा है जबकि हकीकत कुछ अलग है। कई वार्डों को तीन दिन से पानी नहीं मिल रहा है।
अंधड़ कोढ़ में खाज
गर्मियों में आपणी योजना और पीएचईडी मिलकर भी शहरवासियों को पूरा पानी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे थे। ऐसे में आपणी योजना की पेयजल आपूर्ति ठप होना विभाग के लिए कोढ़ में खाज साबित हुआ है।
गरीबों के कैसे हों हलक तर
पेयजल किल्लत से गरीब तबका बेहद परेशान है। हालांकि विभाग टैंकरों से पानी की सप्लाई कर समस्या का समाधान करने दावा कर रहा है मगर प्रति टैंकर के दो सौ 21 रुपए देना गरीबों के बस की बात नहीं है। यह राशि क्षेत्रवासियों को सामूहिक एकत्र कर चुकानी होती है। हैसियत वाले ही पूरा टैंकर स्वयं मंगा रहे हैं।
---आपणी योजना की पेयजल आपूर्ति बंद है। विभाग के स्थानीय जलस्त्रोतों से काम चलाया जा रहा है। शहर में कहीं भी पेयजल आपूर्ति बंद नहीं है। थोड़ा-थोड़ा पानी सभी इलाकों में दिया जा रहा है। इसके अलावा शहर में तीन टैंकर भी 24 घंटे उपलब्ध हैं।-पीएल वर्मा, एक्सईएन, पीएचईडी, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Friday, May 22, 2009

घटता रकबा, बढ़ती हिम्मत
चूरू, 22 मई। पशुओं के चरने के लिए छोड़ी गई भूमि में भूमाफिया चर रहे हैं। कई गांवों में गोचर का रकबा ही गायब हो गया है। वर्ष 2005-06 में जिले में 37 हजार 905 हेक्टेयर गोचर भूमि थी जिसमें से 82 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमणकारियों के पेट में समा गई। इसी के चलते जिले में गोचर भूमि का रकबा 37 हजार 823 हेक्टेयर रह गया। कई तहसीलों में गोचर भूमि का नामोनिशान तक मिट गया है। गोचर भूमि उदरस्थ करने में वन विभाग भी पीछे नहीं है। विभाग को चारागाह विकास के लिए ग्राम पंचायतें पांच वर्ष की अवधि के लिए गोचर भूमि आवंंटित करती है। चारागाह का सम्पूर्ण विकास हो जाने के बाद भी वन विभाग आवंटित भूमि को लौटाता नहीं है। तारानगर की करीब 75 बीघा ऐसी ही भूमि पर वन विभाग कुंडली मारे बैठा है। यह भूमि पांच वर्ष पूर्व वन विभाग को आवंटित की गई थी।जिला कलेक्टर अर्जुन मेघवाल का कहना है कि जिले में वर्षों से गोचर भूमि पर बसे लोगों के कब्जों को नियमित कर दिया गया है। इससे गोचर की भूमि का रकबा कम हो गया है।
कागजों में हटते हैं अतिक्रमण
गोचर भूमि पर अतिक्रमण अपराध है। अतिक्रमणकारी पर जुर्माने के साथ तीन माह की सजा सुनाए जाने का भी प्रावधान भी है। सूत्रों के अनुसार केवल 12 फीसदी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होते हैं शेष से जुर्माना वसूलकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। अधिकांश मामलों में मौके पर अतिक्रमण रहता है जबकि कागजों में उसे हटाया हुआ दिखा दिया जाता है।
क्या है गोचर भूमि
गोचर भूमि के संबंध में अक्सर लोगों में भ्रांति है कि गायों के चरने के लिए छोड़ी गई भूमि को गोचर भूमि कहते हैं। हकीकत में गोचर भूमि से तात्पर्य ऐसी भूमि से है जिसमें गांव के सभी पशुओं को चरने की आजादी होती है। राज्य के कई इलाकों में इसे ओरण भी कहा जाता है। गोचर भूमि और ओरण राज्य में पशुपालन की रीढ़ माना जाता रहा है।
गंभीर है समस्या
गोचर भूमि पर अतिक्रमण की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। अतिक्रमण के मामले साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं। गोचर भूमि बचाने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। गत 12 माह में तहसील में 129 बीघा 12 बिस्वा से अतिक्रमण हटाए गए हैं।
-बागदान, तहसीलदार, तारानगर
नहीं हुई सजा
गोचर पर अतिक्रमण गंभीर समस्या है। हर साल गोचर से अतिक्रमण हटाए जाते हैं। अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है। मेरे कार्यकाल में एक भी अतिक्रमणकारी को सजा नहीं हुई।
-रूलीराम, तहसीलदार, चूरू
जल्द लौटाएंगेविभिन्न योजनाओं के तहत गोचर भूमि ली गई है। इन भूमियों पर वृक्षारोपण भी किया गया है। तारानगर में 75 बीघा भूमि लौटाने के लिए तहसीलदार को पत्र लिखा है।
-मनफूल सिंह, सहायक वन संरक्षक, चूरू
----विश्वनाथ सैनी

Thursday, May 21, 2009

धोरों में पला, एवरेस्ट पर चला

चूरू, 21 मई। चाहे बर्फीली हवा हो या तूफान, खून जमा देने वाली सर्दी हो या ऑक्सीजन की कमी। हिमालय की वादियों की ये तमाम बाधाएं चूरू के सपूत गौरव शर्मा को माउण्ट एवरेस्ट फतह करने से नहीं रोक पाईं। जोश, जुनून और उत्साह से लबरेज गौरव ने दो महीने के अदम्य साहस के बाद आखिर 20 मई को इतिहास रच ही दिया। आइए आपकों भी रू-ब-रू करवाते हैं गौरव के बढ़ते कदमों से....
- 15 मार्च 09- चूरू से माउण्ट एवरेस्ट के लिए रवाना।- 18 मार्च 09- नेपाल की राजधानी काण्डमांडू
- 16 अप्रेल 09- बर्फीली रात में दो बजे खुम्बू ग्लेशियर पार कर प्रथम कैम्प में रखा कदम।
- 21 अप्रेल 09- इक्कीस हजार फीट ऊंचाई पर स्थित द्वितीय कैम्प पर रात दो बजे से चढ़ाई शुरू
- 28 अप्रेल 09- द्वितीय कैम्प में पांच दिन ठहरने के बाद वापस प्रथम कैम्प और 24 हजार फीट ऊंचाई पर स्थित तीसरे कैम्प की ओर बढ़ा।
- 11 मई 09- तीसरे कैम्प पर सफलतापूर्वक रखा कदम। 17 हजार 500 फीट ऊंचे बेस कैम्प पर चढ़ाई के लिए किया मौसम साफ होने का इंतजार।
- 17 मई 09- माउण्ट एवरेस्ट फतह करने से चंद कदम दूर। सुबह चार बजे बेस कैम्प से रवाना।
- 20 मई 09- सूर्योदय से पहले गौरव ने रचा इतिहास। सुबह साढ़े छह बजे धोरों के लाल के कदमों ने चूमीं एवेरेस्ट की चोटी।

Saturday, April 25, 2009

बॉर्डर नाकों पर खुफिया नजर

24 स्थानों पर बनेंगे चैक पोस्टसीसी कैमरों से होगी निगरानी

चूरू, 25 अप्रेल। लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा से सटी अन्तरराज्यीय सीमा पर खुफिया कैमरे नजर रखेंगे। कैमरे सादुलपुर उपखण्ड से सटी हरियाणा सीमा पर स्थित 24 चैकपोस्टों पर लगाए जाएंगे। इनमें से 14 चैकपोस्ट राजस्थान में होंगी। बॉर्डर पर स्थापित चैक पोस्टों पर एक-एक क्लोज सर्किट (सीसी) कैमरा लगाया जाएगा। जिला प्रशासन सीसी कैमरे जुटाने के साथ ही उन स्थानों की पहचान में लगा हुआ है जहां चैकपोस्ट बनाए जाएंगे। अधिकारिक जानकारी के अनुसार हरियाणा से लगती सीमा से जिले में घुसने के अनेक रास्ते हैं जिनमें से उन रास्तों पर चैकपोस्ट लगाई जाएगी जिन्हें तस्कर और अंतराज्यीय अपराधी अक्सर इस्तेमाल करते रहे हैं। वाहनों के नम्बर होंगे नोट खुफिया कैमरा चैक पोस्ट के ऐसे स्थान पर लगाया जाएगा जहां से जिले की सीमा में घुसने वाले वाहनों के नम्बर तक आसानी से कैमरे की आंख में कैद हो सकें। इससे चैक पोस्ट नाका तोड़कर भागने वाले वाहनों की पहचान कर चालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।

वाहन आने पर कैमरा होगा ऑन

धिकारिक जानकारी के अनुसार चैक पोस्ट पर लगे सीसी कैमरे को वाहन आने पर ही ऑन किया जाएगा। चैकपोस्ट पर पुलिस कर्मियों के अलावा कैमरा संचालन के लिए तीन पारियों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।

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14 चैक पोस्टों पर सीसी कैमरों की मदद ली जाएगी। कैमरों की तैनाती के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इससे सीमा पर निगरानी रखने में खासी आसानी हो जाएगी।- डा. केके पाठक,जिला निर्वाचन अधिकारी, चूरू

Monday, April 20, 2009

जी हूजूर! मिलेंगे थार में भी खजूर

अरब देशों से मंगवाए पौधे, काश्तकारों को अनुदान पर मिलेंगे

चूरू, 20 अप्रैल। प्रदेश के पश्चिमी इलाके की पहचान अब रेत के समंदर के साथ-साथ खजूर की खेती से भी होगी। काश्तकारों को इसी साल अगस्त-सितम्बर में खजूर के पौधे मिलने शुरू हो जाएंगे। आय व रोजगार बढ़ाने के उदे्श्य से शुरू की गई राज्य सरकार की अनूठी योजना के तहत यह सब होगा। योजना में जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, गंगानगर व हनुमानगढ़ को शामिल किया गया है। चूरू जिले को भी योजना में शामिल कर लिया गया है।

अधिकारिक जानकारी के अनुसार खजूर की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए दुनियां में विख्यात संयुक्त अरब अमीरात एवं सऊदी अरब से खजूर के 68 हजार 200 पौधे मंगवाए जा चुके हैं। जोधपुर की चोपासनी नर्सरी में पौधों को रखवाया गया है। अरब देशों में टिश्यू कल्चर से लैब में इन पौधों को तैयार किया जाता है। कृषि विभाग ने योजना के तहत पश्चिमी क्षेत्र में करीब साढ़े चार सौ हैक्टेयर में खजूर की खेती किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

निजी कम्पनी करेगी मदद

खजूर की खेती के लिए खेत तैयार करने, पौधे रोपने, खाद व उर्वरकों का उपयोग, सिंचाई, पौध संरक्षण, मौसम से पौधों का बचाव करने में गुजरात के बलसाड़ की एक निजी कम्पनी काश्तकारों की मदद करेगी। अधिकारिक जानकारी के अनुसार करीब तीन साल बाद खजूर की पैदावार शुरू होगी। इस अवधि में पौधा खराब होने पर कम्पनी की ओर से किसान को बदले में दूसरा पौधा उपलब्ध करवाया जाएगा।

इसलिए चुना पश्चिमी क्षेत्र

खजूर की खेती के लिए शुष्क एवं अद्र्ध शुष्क क्षेत्र, लम्बे समय तक गर्मी, कम बारिश एवं बहुत कम आर्द्रता वाला क्षेत्र उपयुक्त है। खजूर के पेड़ पर जुलाई-अगस्त में फल पकते हैं। इस दौरान अधिक बारिश एवं नमी युक्त वातावरण होने से पके फल सड़ जाते हैं। खजूर का पौधा गर्मियों में अधिकतम 50 डिग्री सैल्सियश एवं सर्दियों में शून्य से पांच डिग्री सैल्सियश नीचे तक का तापमान कुछ हद तक सह लेता है। खजूर के फल आने के समय 24 से 40 डिग्री सैल्सियश तापमान उपयुक्त माना जाता है। तमाम विशेषताओं के चलते खजूर की खेती के लिए प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र का चयन किया गया है। चूरू जिला भी इस लिहाज से खजूर की खेती के लिए अनुकूल है।

नब्बे फीसदी अनुदान

काश्तकारों को आठ गुना आठ मीटर की दूरी पर प्रति हैक्टेयर में कम से कम 156 पौधे लगाने होंगे। पौधे की कीमत 2 हजार 500 से 3 हजार 500 रुपए आएगी। काश्तकारों को 'पहले आओ पहले पाओ' की नीति के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे।------पौधे मंगवाए जा चुके हैं। अगस्त-सितम्बर में वितरित किए जाएंगे। खजूर के फल बेचने के लिए काश्तकारों को स्थानीय स्तर पर बाजार आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से भी प्रयास किए जाएंगे।

-दयालसिंह, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग,जोधपुर

इस संबंध में 15 अप्रेल 09 को जयपुर में सेमीनार हुई थी। जिले में खजूर की खेती की अपार संभावना है। क्षेत्र के किसानों को भी पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे।

-भंवरसिंह राठौड़, उपनिदेशक, कृषि (विस्तार), चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:

Anil said...
ये काम पहले नहीं कर सकते थे क्या? बारिश न होने की स्थिति में मरुस्थल में खजूर उगाकर लोगों को रोजी-रोटी दी जा सकती है। खबर के लिये भंवरसिंह जी और आपका धन्यवाद!
April 21, 2009 1:14 PM




Saturday, January 19, 2008

19 री बीनणी आसी रीपिया सागै ल्यासी

चूरू, 3 जनवरी
दुल्हन के साथ सरकार की ओर से नकदी भी दी जाए तो किसे अच्छा नहीं लगेगा। बाल विवाहों के लिए चर्चित राजस्थान जैसे राज्य में इस पर नियंत्रण व आबादी में वृद्धि थामने के प्रयास बतौर केन्द्र सरकार की एक योजना के लिए जिले की गोपालपुरा ग्राम पंचायत का चयन किया गया है। चूरू जिले की गोपालपुरा ग्राम पंचायत में प्रयोग के तौर पर इस योजना को शुरू किया जाना है। गोपालपुरा ग्राम पंचायत को इस योजना के क्रियान्वयन में सफलता मिलती है तो केन्द्र सरकार की इस योजना (जनसंख्या नियंत्रण कोष)को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।ये है योजनायोजना के तहत चयनित ग्राम पंचायत की लड़की की 19 वर्ष की उम्र में शादी की जाती है अथवा इसी पंचायत का लड़का 19 वर्ष की दुल्हन लाता है तो उन्हें ग्राम पंचायत की ओर से 11 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि के रुप में दिए जाएंगे। यह दम्पति शादी के तीन साल बाद पहली संतान को जन्म देता है तो लड़की के जन्म पर 11 हजार रुपए तथा लड़के के जन्म पर 5 हजार रुपए की एफडी करवाई जाएगी। ठीक तीन साल के अंतराल के बाद दूसरी संतान होने और महिला द्वारा नसबंदी करवाने पर ग्राम पंचायत की ओर से इनकी संतान की दूसरी बार भी उतनी ही राशि की एफडी करवाई जाएगी।
इनको मिलेगा लाभ
योजना का लाभ बीपीएल परिवार की दुल्हन व दूल्हे को दिया जाएगा। एपीएल परिवार की दुल्हन व दूल्हे को ग्राम पंचायत में विचार-विर्मश करने के बाद इसका लाभ दिया जाएगा। योजना पांच साल तक लागू रहेगी। ग्राम पंचायत की ओर से इसकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यशाला व शिविर भी लगाएं जाएंगे। जिसका संपूर्ण खर्चा सरकार की ओर से वहन किया जाएगा।
ये होंगे परिणाम
बाल विवाह में कमी करने में योजना कारगर साबित होगी। साथ ही जनसंख्या पर भी नियंत्रण होगा। महिलाओं में परिपक्व उम्र में मां बनने का रुझान बढ़ेगा। योजना का सबसे अधिक लाभ बीपीएल परिवारों को मिलेगा। प्रोत्साहन राशि लड़की के विवाह में आर्थिक सम्बल प्रदान करेगी।
इनका कहना है
26 नवम्बर को दिल्ली में हुई एक कार्यशाला में गोपालपुरा का चयन किया गया था। योजना का प्लान बनाकर भेजा जा चुका है। अब जल्द ही योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।-सविता राठी, सरपंच,गोपालपुरा
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी