Wednesday, July 29, 2009
लहराने लगा लहरिया
Monday, July 13, 2009
नरेगा पर निगेहबान होंगी "घाघ" आंखें
इन अघिकारियों को नरेगा के स्टेट लेवल ऑब्जर्वर का ओहदा दिया गया है। इन्हें उन कार्यस्थलों पर भेजा जाएगा, जहां गड़बड़ी और धांधली की शिकायत होगी। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री कार्यालय एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय से ग्रामीण विकास विभाग को मिलने वाली ऎसी तमाम शिकायतों की इन अघिकारियों से जांच कराई जाएगी।
नरेगा कार्यस्थल पर पहुंचकर शिकायत की वास्तविकता तथा दोषियों का पता लगाने के साथ यह अघिकारी श्रमिकों से सीधा संवाद भी करेंगेे। श्रमिकों से प्राप्त हुई शिकायत तथा मीडिया की खबरों के आधार पर भी अघिकारी मामले की जांच करेंगे।
कितनी हैं शिकायतें
प्रदेश में नरेगा से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। मौटे अनुमान के अनुसार नरेगा की चार सौ से अघिक गंभीर शिकायते जांच के लिए लम्बित हैं। इनमें केवल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा संबंघित विभाग को सीधी प्राप्त हुई शिकायतें शामिल हैं। कई शिकायतें जिला स्तर पर ही जांच के लिए लम्बित हैं। प्रदेश स्तर पर बकाया शिकायतों में शेखावाटी के सीकर जिले की 15, झुन्झुनूं की 7 और चूरू की 19 शिकायतें शामिल हैं।
ये होंगे अघिकार
अघिकारियों को नरेगा की शिकायत की जांच तथा योजना की क्रियान्विति के स्तर को परखने का अघिकार दिया गया है। अघिकारी नरेगा की शिकायत की जांच के लिए संबंघित कार्यस्थल पर जाते समय रास्ते में पड़ने वाले अन्य कार्यस्थलों का भी निरीक्षण कर सकेंगे। इसके लिए अफसरों को नरेगा के 25 से 30 बिन्दुओं की जांच सूची उपलब्ध करवाई गई है।
ऊंचे ओहदे से हुए सेवानिवृत्त
आघिकारिक जानकारी के अनुसार नरेगा पर्यवेक्षक के लिए दो सौ से अघिक सेवानिवृत्त अघिकारियों ने आवेदन किया था। आवेदनकर्ताओं में से 50 से अघिक अघिकारियों को नरेगा के स्टेट लेवल ऑब्जर्वर के रूप में चुना गया। अघिकांश अघिकारी ऊंचे ओहदे से सेवानिवृत्त हुए हैं। इनमें अतिरिक्त आयुक्त आयकर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मुख्य वैज्ञानिक, आइएएस, आरएएस, विश्वविद्यालय के निदेशक, प्रोफेसर व बीएसएनएल आदि के सेवानिवृत्त अघिकारी शामिल हैं।
किस तरह की होती हैं शिकायतें
*नरेगा में निर्घारित समय पर काम नहीं मिलना
*भुगतान में देरी होना
* मस्टररोल में फर्जीवाड़ा और दिहाड़ी कम देना
*महिलाओं से छेड़छाड़ एवं दुराचार
*नरेगा स्थल पर आधारभूत सुविधाओं का अभाव
*नरेगा स्थल पर मशीनों से काम कराना
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सेवानिवृत्त अघिकारियों को नरेगा कार्यस्थलों की जिम्मेदारी सौंपी जाने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। इन्हें हाल ही जयपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया गया है। अघिकारियों को कार्यस्थल आवंटित किए जा रहे हैं। अघिकांश अघिकारी आगामी पखवाड़े से काम शुरू कर देंगे।
-राजेन्द्र भानावत, आयुक्त, नरेगा, जयपुर
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:
Pawan Rana said...
Pawan Rana,
You have taken a step into a wide ocean, let leave all the things on time now. flow, grow and glow like lotus.
Best wihsed!
August 3, 2009 12:27 PM
Thursday, June 25, 2009
नमक पर अब पैनी नजर
Saturday, June 6, 2009
खिलाने से पहले छीना निवाला
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
Wednesday, June 3, 2009
पानी के नाम पर बंट रहा चरणामृत
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
Tuesday, June 2, 2009
सिर्फ आधा गिलास पानी!
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
Friday, May 22, 2009
Thursday, May 21, 2009
धोरों में पला, एवरेस्ट पर चला
Saturday, April 25, 2009
बॉर्डर नाकों पर खुफिया नजर
24 स्थानों पर बनेंगे चैक पोस्टसीसी कैमरों से होगी निगरानी
चूरू, 25 अप्रेल। लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा से सटी अन्तरराज्यीय सीमा पर खुफिया कैमरे नजर रखेंगे। कैमरे सादुलपुर उपखण्ड से सटी हरियाणा सीमा पर स्थित 24 चैकपोस्टों पर लगाए जाएंगे। इनमें से 14 चैकपोस्ट राजस्थान में होंगी। बॉर्डर पर स्थापित चैक पोस्टों पर एक-एक क्लोज सर्किट (सीसी) कैमरा लगाया जाएगा। जिला प्रशासन सीसी कैमरे जुटाने के साथ ही उन स्थानों की पहचान में लगा हुआ है जहां चैकपोस्ट बनाए जाएंगे। अधिकारिक जानकारी के अनुसार हरियाणा से लगती सीमा से जिले में घुसने के अनेक रास्ते हैं जिनमें से उन रास्तों पर चैकपोस्ट लगाई जाएगी जिन्हें तस्कर और अंतराज्यीय अपराधी अक्सर इस्तेमाल करते रहे हैं। वाहनों के नम्बर होंगे नोट खुफिया कैमरा चैक पोस्ट के ऐसे स्थान पर लगाया जाएगा जहां से जिले की सीमा में घुसने वाले वाहनों के नम्बर तक आसानी से कैमरे की आंख में कैद हो सकें। इससे चैक पोस्ट नाका तोड़कर भागने वाले वाहनों की पहचान कर चालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।
वाहन आने पर कैमरा होगा ऑन
अधिकारिक जानकारी के अनुसार चैक पोस्ट पर लगे सीसी कैमरे को वाहन आने पर ही ऑन किया जाएगा। चैकपोस्ट पर पुलिस कर्मियों के अलावा कैमरा संचालन के लिए तीन पारियों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
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14 चैक पोस्टों पर सीसी कैमरों की मदद ली जाएगी। कैमरों की तैनाती के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इससे सीमा पर निगरानी रखने में खासी आसानी हो जाएगी।- डा. केके पाठक,जिला निर्वाचन अधिकारी, चूरू
Monday, April 20, 2009
जी हूजूर! मिलेंगे थार में भी खजूर
अरब देशों से मंगवाए पौधे, काश्तकारों को अनुदान पर मिलेंगे
चूरू, 20 अप्रैल। प्रदेश के पश्चिमी इलाके की पहचान अब रेत के समंदर के साथ-साथ खजूर की खेती से भी होगी। काश्तकारों को इसी साल अगस्त-सितम्बर में खजूर के पौधे मिलने शुरू हो जाएंगे। आय व रोजगार बढ़ाने के उदे्श्य से शुरू की गई राज्य सरकार की अनूठी योजना के तहत यह सब होगा। योजना में जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, गंगानगर व हनुमानगढ़ को शामिल किया गया है। चूरू जिले को भी योजना में शामिल कर लिया गया है।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार खजूर की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए दुनियां में विख्यात संयुक्त अरब अमीरात एवं सऊदी अरब से खजूर के 68 हजार 200 पौधे मंगवाए जा चुके हैं। जोधपुर की चोपासनी नर्सरी में पौधों को रखवाया गया है। अरब देशों में टिश्यू कल्चर से लैब में इन पौधों को तैयार किया जाता है। कृषि विभाग ने योजना के तहत पश्चिमी क्षेत्र में करीब साढ़े चार सौ हैक्टेयर में खजूर की खेती किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
निजी कम्पनी करेगी मदद
खजूर की खेती के लिए खेत तैयार करने, पौधे रोपने, खाद व उर्वरकों का उपयोग, सिंचाई, पौध संरक्षण, मौसम से पौधों का बचाव करने में गुजरात के बलसाड़ की एक निजी कम्पनी काश्तकारों की मदद करेगी। अधिकारिक जानकारी के अनुसार करीब तीन साल बाद खजूर की पैदावार शुरू होगी। इस अवधि में पौधा खराब होने पर कम्पनी की ओर से किसान को बदले में दूसरा पौधा उपलब्ध करवाया जाएगा।
इसलिए चुना पश्चिमी क्षेत्र
खजूर की खेती के लिए शुष्क एवं अद्र्ध शुष्क क्षेत्र, लम्बे समय तक गर्मी, कम बारिश एवं बहुत कम आर्द्रता वाला क्षेत्र उपयुक्त है। खजूर के पेड़ पर जुलाई-अगस्त में फल पकते हैं। इस दौरान अधिक बारिश एवं नमी युक्त वातावरण होने से पके फल सड़ जाते हैं। खजूर का पौधा गर्मियों में अधिकतम 50 डिग्री सैल्सियश एवं सर्दियों में शून्य से पांच डिग्री सैल्सियश नीचे तक का तापमान कुछ हद तक सह लेता है। खजूर के फल आने के समय 24 से 40 डिग्री सैल्सियश तापमान उपयुक्त माना जाता है। तमाम विशेषताओं के चलते खजूर की खेती के लिए प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र का चयन किया गया है। चूरू जिला भी इस लिहाज से खजूर की खेती के लिए अनुकूल है।
नब्बे फीसदी अनुदान
काश्तकारों को आठ गुना आठ मीटर की दूरी पर प्रति हैक्टेयर में कम से कम 156 पौधे लगाने होंगे। पौधे की कीमत 2 हजार 500 से 3 हजार 500 रुपए आएगी। काश्तकारों को 'पहले आओ पहले पाओ' की नीति के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे।------पौधे मंगवाए जा चुके हैं। अगस्त-सितम्बर में वितरित किए जाएंगे। खजूर के फल बेचने के लिए काश्तकारों को स्थानीय स्तर पर बाजार आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से भी प्रयास किए जाएंगे।
-दयालसिंह, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग,जोधपुर
इस संबंध में 15 अप्रेल 09 को जयपुर में सेमीनार हुई थी। जिले में खजूर की खेती की अपार संभावना है। क्षेत्र के किसानों को भी पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे।
-भंवरसिंह राठौड़, उपनिदेशक, कृषि (विस्तार), चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:
Anil said...
ये काम पहले नहीं कर सकते थे क्या? बारिश न होने की स्थिति में मरुस्थल में खजूर उगाकर लोगों को रोजी-रोटी दी जा सकती है। खबर के लिये भंवरसिंह जी और आपका धन्यवाद!
April 21, 2009 1:14 PM
Saturday, January 19, 2008
19 री बीनणी आसी रीपिया सागै ल्यासी
Monday, November 12, 2007
शेखावाटी के पर्यटन स्थल कहेंगे 'पधारो म्हारे देश'
चूरू, 12 नवम्बर। पर्यटन के लिहाज से विश्वभर में पहचान बना चुके शेखावाटी के पर्यटन स्थल अब नए रंग-रूप में पर्यटकों से कहेंगे पधारो म्हारे देश। इसके लिए सीकर, चूरू और झुंझुनूं के चुनिंदा पर्यटक स्थलों का पुनरूद्धार, सरंक्षण तथा सौंदर्यीकरण किया जाएगा। यह सब केन्द्र सरकार की शेखावाटी सर्किट परियोजना के तहत होगा।
Monday, October 22, 2007
'उम्मीद' की फसल
मुआवजा मिला है लेकिन मुआवजा निर्धारण के लिए तहसील को इकाई माने जाने से हजारों किसान फसल बर्बाद होने के बाद भी मुआवजे से वंचित रह गए। जिले की केन्द्रीय सहकारी बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2004 में खरीफ फसलों में हुए नुकसान का साढ़े चार करोड़ से अधिक मुआवजा किसानों को दिया गया। रबी सीजन में दो करोड़ से अधिक मुआवजा दिया गया। 2005 में छह करोड़ से अधिक तथा 2006 में छह करोड़ अ_ïावन लाख से रुपए से अधिक मुआवजा किसानों को मिला। इसके बावजूद तहसील को इकाई मानने के कारण कई हजार किसानों को मुआवजा नहीं मिला क्योंकि उनके गांव जिस तहसील में थे वह सूखाग्रस्त घोषित नहीं हुई थी। यहां उल्लेखनीय है कि चूरू जिले के विभिन्न इलाकों में कई ग्राम पंचायतें और राजस्व गांव सूखा पीडि़त होते हैं लेकिन औसत वर्षा के आधार पर उनकी तहसील सूखाग्रस्त नहीं मानी जाती। इस वजह से हकदार होने के बावजूद उन्हें मुआवजा नहीं मिल पाता है।