Wednesday, October 21, 2009

मतदाताओं में हजारों चेहरे नए

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स्थानीय निकाय चुनाव
चूरू में दस हजार 845 व राजगढ़ में तीन हजार 746 वोटर बढ़े
चूरू, 21 अक्टूबर। स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रशासन ने चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। वार्डों में सभांवित उम्मीदवारों के नामों की चर्चा भी होने लगी है। जल्द ही चुनाव की अधिसूचना जारी होने वाली है। जिले में चूरू नगरपरिषद व राजगढ़ नगरपालिका के चुनाव होंगे। निकाय के गत चुनाव की तुलना में इस बार चूरू व राजगढ़ निकाय के मतदाताओं में साढ़े चौदह हजार से अधिक नए चेहरे मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे।आधिकारिक जानकारी के अनुसार पांच साल के दौरान चूरू नगरपरिषद में 10 हजार 845 तथा राजगढ़ नगरपालिका में तीन हजार 746 मतदाता बढ़े हैं। वर्ष 2004 के चुनाव के बाद चूरू नगर परिषद के मतदाताओं की संख्या 63 हजार 537 से बढ़कर 74 हजार 382 तथा राजगढ़ नगरपालिका के मतदाताओं की संख्या 32 हजार 666 से बढ़कर 36 हजार 412 हो गई है। मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। नगरपरिषद के 45 वार्डों के कुल मतदाताओं में 39 हजार 438 पुरुष व 34 हजार 944 महिलाएं हैं।वर्ष 2004 के चुनाव के मुकाबले इस बार नगरपालिका क्षेत्र में तीन हजार 746 मतदाता बढ़े हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार नगरपालिका के कुल तीस वार्डों में से सबसे अधिक 116 मतदाता वार्ड 26 में बढ़े हैं। नगरपालिका के वार्डों की संख्या में वृद्धि नहीं हुई है।
सबसे अधिक, सबसे कम
आधिकारिक जानकारी के अनुसार मतदाता सूचियों के अंतिम प्रकाशन के समय
चूरू नगरपरिषद में सबसे अधिक तीन हजार 133 मतदाता वार्ड 10 तथा सबसे कम 853 मतदाता वार्ड 25 में हैं। नगरपरिषद के मतदाताओं में अनुसूचित जाति के सबसे अधिक एक हजार 180 मतदाता वार्ड 36 में तथा अनुसूचित जनजाति के सबसे अधिक 68 मतदाता वार्ड 28 में हैं।
सूची से 198 नाम हटाए
आधिकारिक जानकारी के अनुसार 22 सितम्बर 09 को प्रारूप प्रकाशन के बाद मतदाता सूचियों से 198 नाम हटाए गए हैं। वार्ड 21 की मतदाता सूची से 92, वार्ड 1 व 6 से छह-छह, वार्ड 4,42 व 45 से एक-एक, वार्ड 7, 17 व 18 से दस-दस, वार्ड 20 से 7, वार्ड 15 से 4, वार्ड 22 व 26 से तीन-तीन, वार्ड 32 से 39, वार्ड 43 से पांच नाम हटाए गए हैं।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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Saturday, October 10, 2009

ना कचरा उठेगा, ना आग बुझेगी!

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चूरू, 10 अक्टूबर। गंदे पानी से उफनतीं नालियां व गंदगी से अटीं तंग गलियां दीपावली पर भी चकाचक नहीं हो पाएंगी और आग जनित हादसों पर तत्काल काबू पाने की सोचना तो बेमानी होगी। दरअसल नगरपरिषद प्रशासन दीपोत्सव को लेकर तनिक भी गंभीर नहीं है। गली-मोहल्लों से साफ-सफाई और अग्निशमन की व्यवस्थाएं दीपावली को लेकर अब तक चाक-चौबंद नहीं की गई हैं। शनिवार को पत्रिका ने दोनों व्यवस्थाओं की पड़ताल की तो लगा कि दीपोत्सव पर नगर की स्वच्छता और सुन्दरता के प्रति नगरपरिषद अपने दायित्व और कत्र्तव्य बोध को पूरी तरह भुला चुकी है।सफाई व्यवस्था का तो आलम यह है कि वर्तमान में नई व पुरानी सड़क से लगते छह वार्डों से कचरा रोजाना उठाया जा रहा है जबकि शेष वार्डों में सफाई का नम्बर आठ दिन में एक बार आता है। ऐसे में दीपोत्सव पर नगरपरिषद के भरोसे शहर का सौन्दर्य शायद ही बढ़े। उधर, दीपावली पर आग जनित हादसे बढऩे की आशंका अधिक रहती है। लेकिन आग पर तत्काल काबू पाने के लिए अग्निशमन केन्द्र के पास लम्बी रेस के घोड़े ही नहीं हैं। दमकलकर्मियों के पास पर्याप्त संसाधन होना तो दूर की बात है। फिलहाल परिषद के पास तीन दमकल हैं। इनमें से पन्द्रह साल पुरानी एक दमकल तो लगभग कण्डम हो चुकी हैं। फिर भी उसे दौड़ाया जा रहा है। नगरपरिषद प्रशासन ने दीपावली को लेकर साफ-सफाई और अग्निशमन सेवा से जुड़े कार्मिकों को ना तो विशेष निर्देश दिए हैं और ना ही कोई अतिरिक्त व्यवस्थाएं की हैं।
101 नम्बर मिलेगा व्यस्त
अग्निशमन केन्द्र के टेलीफोन की स्थिति यह है कि वह दिनभर व्यस्त रहता है। केन्द्र पर तैनात कर्मचारियों की मानें तो उस पर चौबीस घंटों में पांच सौ से अधिक बार फोन आते हैं। जो सभी फाल्स होते हैं। ऐसे में दिवाली पर आवश्यकता पडऩे पर भी फोन स्वाभाविक रूप से व्यस्त मिलेगा। बार-बार अवगत करवाए जाने के बावजूद दीपोत्सव जैसे मौके पर भी नगरपरिषद प्रशासन ने इसका कोई हल नहीं निकाला है और ना ही कोई अन्य टेलीफोन की व्यवस्था की है।
सफाईकर्मी गिनती के
दीपावली पर सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी 138 कर्मचारियों के कंधों पर है। जोरदार बात तो यह है कि टै्रक्टर, लोडर, पम्प चालक और जमादार भी इन्हीं में से हैं। शहर में सफाईकर्मियों की संख्या गिनती की रह गई है। मोटे अनुमान के तौर पर शहर को छह सौ से अधिक सफाईकर्मियों की दरकार है। लेकिन उनकी संख्या बढ़ाने के लिए परिषद के पास बजट ही नहीं है। तंग गलियों से कचरा उठाने में सहायक 907 (छोटा ट्रक) का तो परिषद को चालक ही नहीं मिल रहा है।
कैसे हो चाक-चौबंद?
अग्निशमन अधिकारीलिपिक बने हुए हैं स्थायी फायरमैन।
अग्निरोधक संसाधनों काएईएन व जेईएन कीबीस बड़े वाहन व चालीस छोटे वाहनों कीपरिषद प्रशासन नहीं है गंभीर।शहरवासियों में जागरूकता का अभाव।
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दीपावली पर साफ-सफाई और दमकल सेवा में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। परिषद के अधिकारियों को सर्तक रहने के निर्देश दिए हैं। वैसे भी परिषद खुद कई समस्याओं से जूझ रही है।उम्मेद सिंह, उपखण्ड अधिकारी, चूरूआबादी के लिहाज से सफाईकर्मी काफी कम है। मुख्य सड़क से लगते वार्डों में ही सफाई व्यवस्था नियमित है। शेष वार्डों में आठवें दिन कचरा उठ पा रहा है। दीपावली पर सफाई की चाहकर भी विशेष व्यवस्था नहीं कर पाएंगे।
-संतलाल स्वामी, सफाई निरीक्षक
दीपावली पर विशेष सफाई व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान में सफाई व्यवस्था संतोषजनक है। अग्निशमन केन्द्र के नम्बरों का चार्ज वसूला जाए तो समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
-रमाकांत ओझा, सभापति, नगरपरिषद, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Thursday, October 8, 2009

दिल के झरोखे से देखी हवेलियां

विदेशी पर्यटकों ने निहारा चूरू को
चूरू, 8 अक्टूबर। वाउ इट्स क्यूट..., वैरी नाइस पेंटिंग्स एण्ड डिजाइन..., आई लाइक दिस...। पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ ही चूरू के पर्यटन स्थलों पर विदेशी पर्यटकों के ये शब्द सुनाई देने लगे हैं। सीजन में पर्यटकों का पहला दल गुरुवार को चूरू आया। दल में शामिल हॉलैण्ड के 22 पर्यटकों ने घंटेभर तक चूरू के पर्यटन स्थलों को निहारा।
बाजार में खरीदारी की और जाते-जाते गांव ऊंटवालिया के जोहड़ में दोपहर का भोजन लिया। राजस्थान के 21 दिन के भ्रमण के लिए आया यह दल बुधवार को दिल्ली से महनसर गढ़ पहुंचा था। यहां से गुरुवार को गढ़ के गाइड लालसिंह शेखावत के साथ महनसर, रामगढ़ बिसाऊ होते हुए सुबह साढ़े 11 बजे चूरू पहुंचा।पर्यटकों ने चूरू में बागला, सुराणा व कोठारियों की हवेलियां देखी तथा सफेद घंटाघर व मुख्य बाजार में खरीदारी की। दल दोपहर को वापस महनसर गढ़ रवाना हो गया। शुक्रवार को बीकानेर जाएगा।
शेखावत ने बताया कि विदेशी पर्यटक राजस्थानी भोजन के कायल हैं। किसी को बाजरे की रोटी स्वाद लगती है तो कोई राजस्थानी दाल को अधिक पसंद करता है। गुरुवार को गांव ऊंटवालिया के पथराणा जोहड़ में दोपहर के भोजन में पर्यटक बाजरे की रोटी, लहसून की चटनी और दाल की प्रशंसा करते नहीं थके।
यहां के लोग वैरी फ्रेंडली
ग्रुप लीडर की हैसियत से राजस्थान का दस बार भ्रमण कर चुकी हूं। यहां की हवेलियां सबसे अधिक आकर्षित करती हैं। थोड़ी-थोड़ी हिन्दी भी बोल लेती हूं। हिन्दी में कहूं तो यहां की हवेलियां क्यूट हैं एण्ड लोग बहुत फ्रेंडली हैं।
दिन्या, ग्रुप लीडर, हॉलैण्ड
बार-बार बुलाए रामगढ़
पर्यटन स्थलों में रामगढ़ शेखावाटी की हवेलियों का कोई सानी नहीं है। इन्हें बार-बार देखने को मन करता है। राजस्थान आने का फिर मौका मिला तो रामगढ़ शेखावाटी जरूर आऊंगा।
-नैल्स, पर्यटक, हॉलैण्ड
देसी अंदाज निराला
यहां के बाजार में शौरगुल और प्रदूषण अधिक है। लोगों का रहन-सहन और अंदाज पूरी तरह से देसी है। पर्यटन के लिहाज से यहां काफी कुछ है। इनके आस-पास आधारभूत सुविधाएं बढ़ाई जाए तो पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।
-पास्कल, पर्यटक, हॉलैण्ड
सजी थाली लगे अच्छी
राजस्थान में जितनी मशक्कत खाना बनाने में की जाती है। उतने ही प्यार से भोजन परोसा भी जाता है। यहां के भोजन से सजी थाली मुझे खास पसंद है। स्वाद का तो कहना क्या?।
सेन्डर, पर्यटक, हॉलैण्ड
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

विनोद कुमार पांडेय said...
राजस्थान है ही ऐसा जगह लोगों का दिल जीत लेता है..बढ़िया प्रस्तुति...धन्यवाद!!!
October 12, 2009 10:06 PM

ललित शर्मा said...
थाने,म्हारी बधाई, चो्खो समाचार सुणायो, राजस्थान की धरती को दुनिया में जवाब ही कोनी,
October 12, 2009 11:17 PM

Monday, October 5, 2009

गलफांस बनी डिजायर

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शिक्षकों की पदोन्नति पर पदस्थापन का मामला
चूरू, 5 अक्टूबर। शिक्षकों की पदोन्नति पर पदस्थापन में विधायक की सिफारिशों को तव्वजो नहीं देने की मजबूरी शिक्षा विभाग के अधिकारियों व बाबुओं की नौकरी पर बन आई है। विधायक की शिकायत पर शिक्षामंत्री भंवरलाल मेघवालने राजगढ़ ब्लॉक के शिक्षकों की पदस्थापन सूची रद्द करने के साथ ही शिक्षा उपनिदेशक बलराम मीणा व जिला शिक्षा अधिकारी गजेन्द्र सिंह शेखावत को जयपुर तलब किया है। शिक्षा अधिकारी शिक्षकों के पदस्थापन से संबंधित रिकॉर्ड व बाबुओं को साथ लेकर मंगलवार को जयुपर जाएंगे। सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक व प्राथमिक कार्यालयों में आलम यह था कि शिक्षकों के पदस्थापन से जुड़े बाबू तो अपनी नौकरी को कोसते नजर आए।सूत्रों के अनुसार शिक्षकों के पदस्थापन की सूची से राजगढ़ के पूर्व विधायक नंदलाल पूनियां सबसे अधिक असंतुष्ट हैं। चूरू विधायक हाजी मकबूल मण्डेलिया भी खुश नहीं बताए जा रहे हैं। विधायक नंदलाल पूनियां ने अपने चहेतों को राजगढ़ ब्लॉक में लगाने के साथ ही करीब 20 शिक्षकों को ब्लॉक से बाहर पदस्थापित करने की डिजायर लगाई थी। अब पूनियां की शिकायत है कि शिक्षकों के पदस्थापन में उनके चहेतों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। चहेतों को राजगढ़ ब्लॉक में ही पदस्थापित करना था जबकि उन्हें अन्य ब्लॉकों में भेज दिया गया। उधर, विधायक हाजी मकबूल मण्डेलिया को पीड़ा है कि उनकी डिजायर पूरी तरह से अमल में नहीं लाई जा सकी है।उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग ने हाल ही प्रारम्भिक शिक्षा के 414 व माध्यमिक शिक्षा के 16 7 शिक्षकों को पातेय वेतन पर पदोन्नत कर पदस्थापित किया है। इनमें से राजगढ़ व चूरू ब्लॉक के 34 शिक्षकों को दूसरे ब्लॉकों में भेजा गया है।
नए सिरे से बनेगी सूची!
डिजायर के चलते हुई गड़बड़ी के कारण राजगढ़ ब्लॉक में पदस्थापित शिक्षकों की सूची नए सिरे से बनाई जाएगी। इसी के साथ ही परिवेदनाओं के चलते अन्य ब्लॉकों की सूचियों में भी संशोधन की गुंजाइश है।इनका कहना है
...राजगढ़ में अधिशेष शिक्षकों को ही दूसरे ब्लॉकों में पदस्थापित किया गया है। शिक्षामंत्री ने मंगलवार को जयपुर बुलाया है। राजगढ़ ब्लॉक की सूची नए सिरे से बनेगी या नहीं यह तो जयुपर जाने के बाद ही पता चल सकेगा।
-बलराम मीणा, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू
मेरे से डिजायर तो मांग ली। लेकिन शिक्षाधिकारियों ने अपनी मर्जी से शिक्षकों का पदस्थापन किया है। सोमवार सुबह मैंने शिक्षामंत्री से मुलाकात कर विरोध भी जताया है। मेरे ब्लॉक की सूची तो नए सिरे से बननी चाहिए।
-नंदलाल पूनियां, पूर्व विधायक, राजगढ़
शिक्षामंत्री ने राजगढ़ ब्लॉक में शिक्षकों के पदस्थापन की सूची रद्द करने के दूरभाष पर निर्देश दिए हैं। आगामी आदेशों तक पदोन्नत शिक्षकों को पदस्थापन के लिए कार्यमुक्त नहीं करने के लिए संबंधित संस्था प्रधानों को निर्देशित किया जा रहा है।
-गजेन्द्र सिंह शेखावत, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Friday, October 2, 2009

पंचायतीराज का स्वर्णिम सफर

देश में में पंचायतीराज व्यवस्था ने पचास वर्ष का सफर तय कर लिया है। आज राजस्थान का नागौर जिला पंचायतीराज की स्थापना का साक्षी बन खुद को एक बार फिर से गौरवान्वित महसूस कर रहा है। पंचायतीराज का स्वर्ण जयंती समारोह नागौर के उस ऐतिहासिक मैदान में मनाया जा रहा है, जहां देश के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने दो अक्टूबर 1959 को पंचायतीराज की नींव रखी थी। समारोह में नेहरू की तरह दो बार प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल करने वाले डा. मनमोहन सिंह व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत राजनीति की कई जानी-मानी हस्तियां शिरकत करेंगी। स्वतंत्रता के बाद देश में कई बदलाव हुए। कई नई व्यवस्थाएं लागू हुई। आखिर पंचायतीराज व्यवस्था की जरूरत क्यों महसूस की गई और इसे किस तरह अंतिम रूप दिया गया। मन को कुरेदते इन सवालों का जवाब खोजा तो पाया कि आजादी के बाद देश के समग्र विकास में अधिकतम लोगों को सहभागी बनाने के लिए विकेन्द्रीकरण की नीति अपनाई गई। पंचायतीराज भी उसी दिशा में उठाया गया एक कदम था।जब देश में पंचवर्षीय योजना लागू करने पर विचार किया जा रहा था तब ग्रामीण क्षेत्र में जनता का सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता सुनिश्चित करना आवश्यक समझा गया। इस आवश्यकता ने भी पंचायतीराज को आधार प्रदान किया।लोकतंत्र में अटूट विश्वास रखने वाले पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने 1952 में सामुदायिक विकास कार्यक्रम शुरू किया। लेकिन इसमें ग्रामीण विकास की बजाय सरकारी मशीनरी के विकास पर अधिक जोर देने के कारण कार्यक्रम विफल हो गया। परिणाम स्वरूप सरकार ने 1957 में पंचायतीराज के संबंध में बलवंतराय मेहता समिति का गठन किया।समिति ने अपनी रिपोर्ट में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण और सामुदायिक विकास कार्यक्रम को सफल बनाने का उल्लेख करते हुए पंचायतीराज की नींव रखने की सिफारिश की। नौ सितम्बर 1959 को राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद बिल पारित कर विकेन्द्रीकृत व्यवस्था लागू की। इसके बाद दो अक्टूबर को राजस्थान को देश में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की शुरुआत करने का गौरव प्राप्त हुआ।आंकड़ों की जुबानीवर्तमान में राजस्थान में सात संभाग, 33 जिले, 32 जिला परिषदें, 192 उपखण्ड, 243 तहसीलें, 237 पंचायत समितियां है। 237 पंचायत समितियों में से हाल ही छह पंचायत समितियों को फिर से ग्राम पंचायतों का दर्जा दे दिया गया है। लिहाजा ग्राम पंचायतों की संख्या 9195 हो गई हैं। पंचायतीराज के 2010 में होने वाले चुनावों से पूर्व चल रही परिसीमन की प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों की संख्या 12 हजार के लगभग हो जाएगी।महिलाओं की भागीदारी कमचूरू जिले में पंचायतराज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है।हर स्तर पर पुरुषों का वर्चस्व है। जिला परिषद के कुल 26 सदस्योंं में महज आठ महिलाएं हैं। वर्तमान में जिले की छह पंचायत समितियों में प्रधान के पद पर मात्र दो महिलाएं काबिज हैं। जिले की 249 ग्राम पंचायतों में से भी अधिकांश की बागडोर पुरुषों के हाथ में है।सरपंच या कठपुतली?देश में पंचायतीराज की नींव रखे जाने के पचास वर्ष बाद भी कई महिला सरपंच पति की कठपुतली बनी हुई हैं। गत वर्ष अपे्रल में चूरू पंचायत समिति की एक सरपंच से रूबरू होने का मौका मिला। दोपहर में फोटोग्राफर के साथ सरपंच के घर पहुंचा। सरपंच के घर पर मौजूद एक रिश्तेदार से जब उनके बारे में पूछा तो जवाब मिला कि वे किसी काम से बाहर गए हैं। शाम तक आएंगे। रिश्तेदार से सरपंच के मोबाइल नम्बर लेकर बात की तो माजरा समझ में आया। दरअसल घर, रिश्तेदारी और गांव में महिला की बजाय उनके पति को सरपंच माना जाता है। बाद में पता चला कि असल सरपंच तो घर पर ही हैं।नए दौर में किया प्रवेश देश की लगभग तीन चौथाई आबादी गांवों में रहती है। गांवों के विकास पर ही काफी हद तक भारत का विकास निर्भर है। यहां महात्मा गांधी का कथन बिल्कुल सटीक बैठता है कि यदि गांव नष्ट होते हैं तो भारत नष्ट हो जाएगा। भारत के पिछले इतिहास पर यदि नजर डालें तो देखेंगे कि गांव के आपसी झगड़ों का निपटारा गांवों की पंचायतें करती थीं। पंचों का फैसला सर्वमान्य होता था। मोर्यकाल में गांव के चुने हुए लोगों की सभा, ग्रामसभा कहलाती थी। जिसका प्रधान ग्रामिक होता था। मुगलकाल में भी गांव, शासन की सबसे छोटी इकाई था। गांव का प्रधान अधिकारी वहां का मुखिया होता था, जिसे मुकद्दम कहते थे। अंग्रेजी राज में गांव की पंचायतें धीरे-धीरे समाप्त हो गईं। गांवों का समस्त कार्य प्रांतीय सरकारें करने लगीं। 18 8 2 में लॉर्ड रिपन ने स्थानीय शासन की स्थापना का प्रयास किया। लेकिन वह सफल नहीं हो सका।स्थानीय स्वायत्त संस्थाओं की जांच के लिए 18 8 2 व 1907 में ब्रिटिश शासकों ने शाही आयोग का गठन किया। 1920 में संयुक्त प्रान्त, असम, बंगाल, बिहार, पंजाब व मद्रास में पंचायतों की स्थापना के लिए कानून बनाए गए। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में नया संविधान लागू होने के साथ ही पंचायतीराज अर्थात ग्रामीण स्थानीय शासन ने नए दौर में प्रवेश किया।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:
चेतना के स्वर said...
achchi khabar likh dali hai dada congratsisko bhi padhna or thoda sa batanahttp://chetna-ujala.blogspot.com/2009/10/blog-post.html
October 27, 2009 3:13 PM

Sunday, September 20, 2009

ब्रॉडगेज की राह में फाटक बने रोड़ा

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सादुलपुर-रतनगढ़ आमान परिवर्तन
चूरू, 20 सितम्बर। सादुलपुर-रतनगढ़ के बीच आमान परिवर्तन की राह में नए फाटक की मांग रोड़ा बन गई हैं। सादुलपुर के गांव डोकवा व तारानगर के गांव हडिय़ाल में ग्रामीण ब्रॉडगेज की राह रोके बैठे हैं। फाटक स्वीकृत नहीं होने तक ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हैं जबकि रेलवे अधिकारी मांग के सामने लाचार हैं।रेलवे ने विवादित स्थान को छोड़ आमान परिवर्तन की गाड़ी भले आगे बढ़ा ली है, पर ऐसे में रेल पटरियों पर धरना देकर बैठे ग्रामीणों के हटे बिना रेल सेवा का लाभ तय समय पर मिलना मुश्किल हो चला है। आखिर ग्रामीणों की समस्या का समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है...? रेलवे को किन परेशानियों से जूझना पड़ेगा ? क्या हो सकता है समस्या का समाधान? आदि सवाल आमजन को कुरेदने लगे है।
पत्रिका ने इन सवालों पर पड़ताल की तो कुछ यूं बनी उम्मीद।एक करोड़ रुपए की दरकारपटरियों पर नया फाटक स्वीकृत करवाने वाले को रेलवे में कम से कम एक करोड़ रुपए एक मुश्त जमा कराने पड़ते हैं। यह राशि राज्य सरकार, नगरपालिका, पंचायत, सार्वजनिक निर्माण विभाग या जनप्रतिनिधि कोटे से जमा करवाई जा सकती है। गत वर्ष सादुलपुर-रेवाड़ी के बीच गांव कालरी में एमपी कोटे व सादुलपुर-हिसार के बीच गांव इंदासर के पास राज्य सरकार के सहयोग से नया फाटक खुलवाया गया था।
दीपावली तक लाना है इंजन
सादुलपुर से रतनगढ़ के बीच करीब सौ किलोमीटर लम्बे ट्रेक पर रेल प्रशासन दीपावली से पहले ब्रॉडगेज इंजन बतौर ट्रायल दौड़ाना चाहता है क्योंकि आमान परिवर्तन में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व बिहार के एक हजार व पांच सौ स्थानीय श्रमिक लगे हुए हैं। दीपावली पर श्रमिकों के घर जाने से पहले बड़ी लाइन बिछाने का काम पूरा होने पर ही मार्च 2010 तक ब्रॉडगेज ट्रेनों की सुविधा मुहैया हो सकेगी।
ना उखाडऩे दी ना बिछाने
आधिकारिक जानकारी के अनुसार हडिय़ाल टमकोर मार्ग पर फाटक की मांग पर अड़े ग्रामीणों ने बड़ी लाइन नहीं बिछाने दी है जबकि डोकवा में दो-तीन किलोमीटर में मीटरगेज लाइनों को ही उखाड़ा नहीं जा सका। ग्रामीणों के प्रदर्शन के चलते हडिय़ाल-टमकोर मार्ग पर करीब अस्सी मीटर में बिना आमान परिवर्तन के श्रमिक आगे बढ़ चुके हैं।
-----हम ग्रामीणों की मांग मानने को तैयार हैं मगर रेलवे नियमों के अनुसार करीब एक करोड़ रुपए एक मुश्त जमा कराने होंगे। यह राशि चाहे पंचायत जमा करवाए या राज्य सरकार या फिर कोई जनप्रतिनिधि। आमान परिवर्तन की राह में ग्रामीण यूं रोड़े बने रहे तो क्षेत्रवासियों को ब्रॉडगेज का लाभ मिलने में देरी होगी।
-एनके शर्मा, उप मुख्य अभियंता, उत्तर-पश्चिम रेलवे, बीकानेर
------आमान परिवर्तन के कारण रेलवे के पोल संख्या 246 /5-6 पर हडिय़ाल-टमकोर का रास्ता बंद हो हो गया है। इससे आस-पास के पचास गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलमंत्री ममता बनर्जी को रेलवे के खर्च पर हडिय़ाल टमकोर मार्ग पर फाटक बनवाने के लिए लिखा गया है। लोगों की समस्या का समाधान जल्द ही होगा।
-नरेन्द्र बुडानिया, सांसद, चूरू
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इस सम्बन्ध में सचिव सार्वजनिक निर्माण विभाग को अवगत करा दिया गया है। समस्या के हल के लिए प्रशासनिक दृष्टि से पूरे प्रयास किए जा रहे हैंं। शीघ्र ही परिणाम सामने आएंगे।
-डा।केके पाठक,कलक्टर, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Saturday, September 19, 2009

चक दिया चूरू

54वीं राज्यस्तरीय 19 वर्षीय हॉकी प्रतियोगिता जीत
चूरू। गांव में हॉकी खेलने की शुरूआत करने वाली चूरू की बेटियों ने कमाल कर दिखाया है। बेटियों ने जालोर के खेल स्टेडियम में शुक्रवार को 54वीं राज्यस्तरीय 19 वर्षीय हॉकी प्रतियोगिता जीत ली है। सुबह नौ बजे खेले गए फाइनल मुकाबले में जिले की टीम ने सीकर को दो-एक से हराया। जोश और उत्साह से लबरेज जिले की टीम अपने दमदार प्रदर्शन की बदौलत पहली बार 19 वर्षीय हॉकी प्रतियोगिता पर कब्जा जमाने में कामयाब हुई है। इससे पहले चूरू की टीम 1999 में तीसरे स्थान पर रही थी। जिले में शुक्रवार को टीम के जीत की सूचना मिलते ही खेल प्रेमियों व शिक्षा महकमे में खुशी की लहर दौड़ गई। विजेता टीम संभवतया शनिवार को चूरू आएगी। शिक्षा विभाग और विभिन्न संगठनों की ओर से टीम का शानदार स्वागत किया जाएगा। साहवा की सरोज पारीक की कप्तानी में जिले की टीम ने प्रदेशभर की 16 टीमों को पीछे छोड़कर प्रतियोगिता का ताज हथियाया है।कोच जसवंत राव, हाकम अली, दल प्रभारी महेन्द्र प्रजापत व प्रबंधक चन्द्रकला चाहर के नेतृत्व में टीम जालौर गई थी। इसमें 16 सदस्य थे। प्रतियोगिता में 13 सितम्बर से अंतिम गोल तक चूरू की टीम का दबदबा रहा। उद्घाटन मैच में टीम ने गत वर्ष की विजेता अजमेर को दो-शून्य से हराया। इसके अलावा अजमेर, झुंझुनूं, हनुमानगढ़ और भीलवाड़ा के सामने जीत दर्ज की।
पांच मिनट में दागे दो गोल
हाकम अली ने पत्रिका को दूरभाष पर बताया कि टीम ने फाइनल मैच में दो गोल दागे और दोनों ही गोल सेंटर फॉरवर्ड खिलाड़ी रमनदीप की हॉकी से निकले। मैच शुरू होने के दस मिनट बाद सीकर ने एक गोल दागकर बढ़त हासिल की। चूरू टीम ने हिम्मत नहीं हारी और मैच पर पकड़ बनाए रखी। हॉफ टाइम के बाद मैच के शुरूआती पांच मिनट में चूरू की रमनदीप ने पांच मिनट में एक के बाद एक गोल दागकर जीत की इबादत लिखी। गोलकीपर सुचित्रा को बेस्ट प्लेयर का पुरस्कार दिया गया है।
अपनों ने लगाया गले
राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का खिताब जीतने की सूचना मिलते जालौर में रह रहे चूरू के लोगों ने टीम को हाथों में उठा लिया। जालौर में बीएसएनएल में कार्यरत चूरू तहसील के गांव लोसनाबड़ा के जयसिंह पूनियां ने खिलाडियों को नाश्ता और गोविन्द राम शर्मा ने भोजन करवाया। जालौर कोतवाली में तैनात गांव बेवड़ निवासी हैड कॉस्टेबल विनोद पूनियां ने भी टीम को भोजन के लिए आमंत्रित किया। दूसरे जिले में अपनों का प्यार पाकर खिलाड़ी निहाल हो गए।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Tuesday, September 15, 2009

सूखे के घावों पर लगेगा मरहम

जिला प्रशासन ने बनाया एक अरब से अधिक का कंटीजेंसी प्लान
चूरू, 15 सितम्बर। अरमानों पर पानी फिरने से चिंतित किसान हों या चारे के अभाव में पशुओं की हालत देख परेशान होता पशुपालक, कृषि आधारित रोजगार की उम्मीद छोड़ घर बैठने को मजबूर बेरोजगार हों या फिर आर्थिक मदद का इंतजार करता असहाय। मानसून की बेरुखी के कारण पीड़ा सहने वाले इन लोगों के घावों पर मरहम लगाने की प्रशासन ने तैयारी कर ली है। जिले के सभी 912 अभावग्रस्त गांवों के लिए प्रशासन ने सितम्बर 09 से मार्च 2010 तक की एक अरब दस करोड़ 34 लाख 12 हजार रुपए की आकस्मिक योजना आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग को भेजी है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो सूखे से प्रभावित लोगों को चालू माह से राहत मिलनी शुरू हो जाएगी।
तीन लाख को मिल सकेगा रोजगार
योजना के तहत अभावग्रस्त गांवों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के अभावा अन्य कार्यों में तीन लाख लोगों को मार्च 2010 तक रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। सितम्बर में 15 हजार 200, अक्टूबर में 24 हजार 250, नवम्बर में 34 हजार 350, दिसम्बर में 45 हजार 290, जनवरी में 56 हजार 280, फरवरी में 62 हजार 210 व मार्च में 65 हजार 250 लोगों को रोजगार मुहैया करवाने का लक्ष्य रखा गया है।
असहायों को मदद
योजना के तहत असहाय व्यक्तियों की प्रतिमाह छह सौ रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी। प्रशासन ने सुजानगढ़ में 1458 , रतनगढ़ में 600, सरदारशहर में 2110, चूरू में 375, तारानगर में 1177 तथा राजगढ़ में 26 15 असहाय व्यक्तियों को चिन्हित किया है।
रोजाना दौड़ेंगे 93 टैंकर
मानसूनी के दगा देने के कारण लोगों को पेयजल समस्या का भी सामना करना पड़ेगा। प्यासे हलक तर करने के लिए योजना के तहत जिले के 74 गांवों में पानी के रोजाना 93 टैंकर दौड़ेंगे। प्राथमिक तौर पर योजना में सुजानगढ़ के 16, रतनगढ़ के 8, सरदारशहर के 10, चूरू के 7, तारानगर के 9 तथा राजगढ़ के 24 गांवों को शामिल किया है।
गोशालाओं को अनुदान
जिले की 38 पंजीकृत व 10 अपंजीकृत गोशालाओं में पल रहे चौदह हजार से अधिक पशु भी योजना से लाभान्वित होंगे। योजना के तहत सुजानगढ़ की 14, रतनगढ़ की 7, सरदारशहर की 10, चूरू की 5, तारानगर की 8 तथा राजगढ़ की 4 गोशालाओं को अनुदान दिया जाएगा।
नौ सौ से अधिक चारा डिपो
योजना के अनुसार जिले में अक्टूबर से चारे की कमी को देखते हुए पशुधन को बचाने के लिए मार्च 2010 तक 2 लाख 79 हजार 200 मैट्रिक टन चारे की आवश्यकता होगी। अक्टूबर में 45, नवम्बर में 120, दिसम्बर में 150, जनवरी में 208, फरवरी में 208 तथा मार्च 249 स्थानों पर चारा डिपो खोले जाएंगे। इनसे प्रतिमाह 85 हजार से साढ़े चार लाख पशुओं को चारा मिल सकेगा।
किस पर होगा कितना खर्च
मद राशि (लाखों में)
मजदूरी 746 3।७०
चारा 2233।६०
गोशाला 547।५०
चिकित्सा120।००
असहाय 3००।06
जल 131।६६
अन्य 237।६०
-----
जिले के 912 गांव अभावग्रस्त घोषित किए गए हैं। आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग को एक अरब से अधिक की आकस्मिक योजना भेजी है। जल्द ही योजना के स्वीकृत होने की उम्मीद है।
-डा। केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:
Udan Tashtari said...
आभार इस आलेख और जानकारी के लिए.
September 17, 2009 8:23 AM

सैकड़ों पद फिर भी रहेंगे खाली

नहीं मिले पदोन्नति के पात्र शिक्षक
चूरू, 15 सितम्बर। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों पर हजारों शिक्षकों की पदोन्नति के बावजूद समस्त पद नहीं भरे जा सकेंगे। विभाग को खाली पद भरने के लिए निर्धारित कोटेवार पात्र शिक्षक नहीं मिले हैं। अकेले बीकानेर मण्डल में शिक्षकों के करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। हालांकि शिक्षा अधिकारियों का दावा है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। समानीकरण व शैक्षणिक व्यवस्था के चलते स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पदोन्नति के लिए सामान्य वर्ग में 31 मार्च 1997 तथा अनुसूचित जाति (एससी) व अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग में 31 मार्च 2004 तक के शिक्षकों को पात्र माना गया है। इनमें पांच साल तक के अनुभव वाले शिक्षकों को ही शामिल किया गया है।

नहीं मिले एससी-एसटी के शिक्षक
बीकानेर मण्डल में खाली रहने वाले पद सबसे अधिक एससी और एसटी कोटे के हैं। मण्डल के पांचों जिलों में एससी के 484 व एसटी के 360 शिक्षकों के खाली पदों की तुलना में पात्र शिक्षक क्रमश: 404 व 139 हैं। मण्डल में एससी कोटे के 80 व एसटी कोटे के 221 शिक्षकों के पद खाली रखने पड़ेंगे। इसके विपरित सामान्य वर्ग में पुरुष शिक्षकों के समस्त पद भरने के बावजूद सैकड़ों पात्र शिक्षक बच जाएंगे।

महिला शिक्षकों की भारी कमी
शिक्षकों के खाली रहने वालों पदों में आधे से अधिक पद महिला शिक्षकों के हैं। एससी व एसटी की महिला शिक्षकों के खाली पद मण्डल के किसी भी जिले में पूरे नहीं भरे जा सकेंगे।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार चूरू और श्रीगंगानगर में एससी व एसटी वर्ग में पदोन्नति की पात्र महिला शिक्षक एक भी नहीं हैं। बीकानेर में एससी के 14 व एसटी के 10 खाली पदों की तुलना में एक-एक पात्र महिला शिक्षक ही उपलब्ध हैं। हनुमानगढ़ में भी लगभग ऐसी ही स्थिति है। झुंझुनूं में एससी के 24 व एसटी के18 खाली पदों की तुलना में क्रमश: 19 व 12 पात्र महिला शिक्षक उपलब्ध हैं।
—-
जिले-----खाली पद---पात्र शिक्षक
चूरू------690-----500
झुंझुनूं----625------597
बीकानेर---543------468
हनुमानगढ़-516------444
श्रीगंगानगर644------615
योग----3018------2624
(इनमें सामान्य, एससी व एसटी के महिला व पुरुष शिक्षक शामिल हैं)

मण्डल में शिक्षकों की पदोन्नति के बाद भी करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। निर्धारित कोटे के पात्र शिक्षक ही नहीं मिले तो पद कहां से भरे। हालांकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
-बलराम मीणा, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

सैकड़ों पद फिर भी रहेंगे खाली

नहीं मिले पदोन्नति के पात्र शिक्षक
चूरू, 15 सितम्बर। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों पर हजारों शिक्षकों की पदोन्नति के बावजूद समस्त पद नहीं भरे जा सकेंगे। विभाग को खाली पद भरने के लिए निर्धारित कोटेवार पात्र शिक्षक नहीं मिले हैं। अकेले बीकानेर मण्डल में शिक्षकों के करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। हालांकि शिक्षा अधिकारियों का दावा है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। समानीकरण व शैक्षणिक व्यवस्था के चलते स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पदोन्नति के लिए सामान्य वर्ग में 31 मार्च 1997 तथा अनुसूचित जाति (एससी) व अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग में 31 मार्च 2004 तक के शिक्षकों को पात्र माना गया है। इनमें पांच साल तक के अनुभव वाले शिक्षकों को ही शामिल किया गया है।
नहीं मिले एससी-एसटी के शिक्षक
बीकानेर मण्डल में खाली रहने वाले पद सबसे अधिक एससी और एसटी कोटे के हैं। मण्डल के पांचों जिलों में एससी के 484 व एसटी के 360 शिक्षकों के खाली पदों की तुलना में पात्र शिक्षक क्रमश: 404 व 139 हैं। मण्डल में एससी कोटे के 80 व एसटी कोटे के 221 शिक्षकों के पद खाली रखने पड़ेंगे। इसके विपरित सामान्य वर्ग में पुरुष शिक्षकों के समस्त पद भरने के बावजूद सैकड़ों पात्र शिक्षक बच जाएंगे।
महिला शिक्षकों की भारी कमी
शिक्षकों के खाली रहने वालों पदों में आधे से अधिक पद महिला शिक्षकों के हैं। एससी व एसटी की महिला शिक्षकों के खाली पद मण्डल के किसी भी जिले में पूरे नहीं भरे जा सकेंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार चूरू और श्रीगंगानगर में एससी व एसटी वर्ग में पदोन्नति की पात्र महिला शिक्षक एक भी नहीं हैं। बीकानेर में एससी के 14 व एसटी के 10 खाली पदों की तुलना में एक-एक पात्र महिला शिक्षक ही उपलब्ध हैं। हनुमानगढ़ में भी लगभग ऐसी ही स्थिति है। झुंझुनूं में एससी के 24 व एसटी के18 खाली पदों की तुलना में क्रमश: 19 व 12 पात्र महिला शिक्षक उपलब्ध हैं।
जिले-----खाली पद---पात्र शिक्षक
चूरू------690-----५००
झुंझुनूं----625------५९७
बीकानेर---543------468
हनुमानगढ़-516------४४४
श्रीगंगानगर644------६१५
योग----3018------२६२४
(इनमें सामान्य, एससी व एसटी के महिला व पुरुष शिक्षक शामिल हैं)
मण्डल में शिक्षकों की पदोन्नति के बाद भी करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। निर्धारित कोटे के पात्र शिक्षक ही नहीं मिले तो पद कहां से भरे। हालांकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
-बलराम मीणा, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, September 14, 2009

वो तो दिल में बसता है...

सका नाम लेने भर से रूह को सुकून मिलता है...दुनियाभर के लोग जिसकी आस्था के समुद्र में गोता लगा रहे हैं...जिसके बारे में कहा जाता है कि उसके घर देर है मगर अंधेर नहीं...जिसे लोग हर लम्हा हर पल अपने पास महसूस करते हैं...वह लोगों की खुशियों में भी शरीक होता है और दुखों में भी...गमों का पहाड़ टूटने पर वह जीने का सहारा बनने से भी नहीं कतराता...एक दिन मेरा पागल मन उसको खोजने निकल पड़ा...उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर में ढूंढा...राह में मिलने वाले हर बंदे से उसका ठिकाना पूछा...मगर हर चौखट पर उसका रूप बदला हुआ था...और हर गली में उसका नाम अलग था...उसके इतने सारे रूप देख और नाम सुन तो पागल मन और बावला हो गया...बेचारे मन के कुछ भी समझ में नहीं आया...मुझसे बोल रहा था कि उसे खुदा कहूं या भगवान, उसका नाम रब है या परमेश्वर...रहीम चाचा को तो वो हाथों की लकीरों में दिखाई देता है...और राम को दीये की लो में...करतार सिंह तो पंचों में भी उस परमेश्वर को देख लेता है...और माइकल तो उसे हर लम्हा अपने नजदीक मानता है...दुनिया में वो ही एक ऐसा शख्स है... जो लोगों को आंखें बंद करने के बाद भी साफ नजर आता है...पागल मन का हाल जान तो मैं भी अजीब उलझन में फंस गया...क्योंकि ना तो मैंने कभी उस शख्स को देखा है और ना ही कभी उससे बात की है...बेचैन मन को कैसे समझाऊं कि वह कौन है?...जो संगीत में है...माँ-बाबा में दिखाई देता है...गरीब की दुआओं में जिसका जिक्र होता है...जो हवाओं की दिशा बदलने की ताकत रखता हो...नदियों और नालों की रूख जो मोड़ दे...जिसका वास्ता देने पर लोगों की रूह कांप उठती हो...जिसे लोग पत्थर में देखते हैं... पूजते हैं...यहां तक की उससे बात भी करते हैं...जिसे अग्नि का रूप मान लोग सात जन्मों तक प्यार के बंधन में बंध जाते हैं...जिसको साक्षी मान प्रेमी जोड़े जिंदगीभर के लिए एक-दूसरे के हो जाते हैं...हर शख्स उसके लिए 24 घंटों में से कुछ समय निकालता है...पागल मन ने मेरे चैहरे को पढ़ लिया...उसने भांप लिया कि मैं उस अनदेखे शख्स की टोह लेने में कामयाब नहीं हुआ...उसे बता नहीं पाऊंगा कि वो कौन है?... पागल ने लम्बी सांस ली और तस्सली से मेरे पास आकर बैठ गया...मैं जिस मन को लम्बे समय से पागल समझ रहा था...उसकी बातें सुन तो मेरा वर्षों पुराना भ्रम मिनटों में टूट गया...एकाएक मेरी नजरें उसके सामने झुक गई...उस मन ने मुझे बताया कि मंदिर में भी वही शख्स है जो मस्जिद में है...गुरुद्वारा और गिरजाघर के उसके रूप में भी कोई अंतर नहीं है...इन चारों का असली रूप तो हमारे दिल में बसता है...उसे हम किसी भी नाम से जानें...यह उसने हम पर छोड़ रखा है...---विश्वनाथ सैनी
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

Pankaj Mishra said...
बहूत अच्छा लिखा है आपने
September 14, 2009 2:05 PM

Ram said...
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September 14, 2009 2:31 PM

Thursday, September 10, 2009

छतों पर मंडराती मौत


हाईटेंशन लाइन के करीब तक मकान की मंजिल बनाने को बेपरवाह, जिला प्रशासन के कानों तक आए दिन होती इंसान की मौत की नहीं पहुंचती चीत्कार।
चूरू, 10 सितम्बर। शहर की आधा दर्जन से अधिक कॉलोनियों में छतों पर मौत मंडरा रही है। इस स्थिति से हर कोई जो परोक्ष या अपरोक्ष जुड़ा है अच्छी तरह वाकिफ है, किन्तु लाचार है। जिला प्रशासन ने तो जैसे गांधीजी के तीन बंदरों वाली कहावत को आत्मसात कर लिया है। उसके कानों तक आए दिन होती इंसान की मौत की चीत्कार नहीं पहुंचती। विद्युत निगम तो चूरू वासियों के घरों पर विद्युत तारों के रूप में लटकती मौत को देख आंखे मूंद लेता है। नगर परिषद ने तो वर्षों से मुंह पर चुप्पी या चिप्पी लगा रखी है। ऐसा नहीं कि सामने खड़ी साक्षात मौत से कोई डरता नहीं, हर एक खौफजदा है। हर कोई चाहता भी है कि समाधान हो पर पहल करने वाले नहीं मिलते। राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी ने इस गंभीर समस्या को एक दशक से भी अधिक समय से जस का तस बना रखा है। नियम और कानून तो यहां बेमानी हैं। लोग भी अपने घर में रहने की चाहत में जैसे मौत को भी अनदेखा करने से नहीं चूक रहे। हाईटेंशन लाइन के करीब तक मकान की मंजिल बनाने को बेपरवाह है। पत्रिका ने शहर का दौरा कर जाना तो हाल-ए-नजारा यह रहा।

क्या कहते हैं नियम
आधिकारिक जानकारी के अनुसार किसी भूमि पर विद्युत लाइन खींचे जाने के बाद भूखण्ड आवंटित करवाकर कोई निर्माण कार्य करे और छत से विद्युत लाइन गुजरे तो भूखण्ड मालिक को लाइन शिफ्ट करवाने का खर्चा वहन करना पड़ता है। इसके विपरित परिस्थिति में निगम अपने खर्च पर लाइन शिफ्ट करता है। लाइन शिफ्ट भी नहीं हो सके तो निगम को उसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पड़ते हैं।

हर स्तर पर अनदेखी
शहर में चाहे सैनिक बस्ती हो या शेखावत कॉलोनी या कोई और। छत पर मंडराती मौत के मामले में मकान मालिकों और निगम दोनों ने अनदेखी की है। कॉलोनी के प्लानरों ने तारों की परवाह किए बगैर भूखण्ड आवंटित कर दिए और रातों-रात उनमें भवन खड़े कर दिए। निगम की लापरवाही यह है कि उसने विद्युत लाइन शिफ्ट करने की कभी कोई योजना नहीं बनाई।

#उस्मानाबाद कॉलोनी
रोडवेज बस स्टैण्ड के पास स्थित इस कॉलोनी में आधारभूत सुविधाओं के अभाव के साथ-साथ छत से गुजरते विद्युत तार सबसे बड़ी समस्या हैं। समस्या समाधान के लिए अधिकारियों का कई बार दरवाजा खटखटा चुके कॉलोनीवासी अब लाइन शिफ्टिंग की उम्मीद छोड़ चुके हैं। विद्युत तारों से एक दर्जन से अधिक परिवार पीडि़त हैं।
---
भूखण्ड से विद्युत तार हटने की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में निर्माणाधीन मकान की छत की ऊंचाई 15 फीट की बजाय सात फीट ही रखी है। छत पर कभी ना कभी तो चढऩा ही पड़ेगा इसलिए छत की ऊंचाई कम करके विद्युत खतरे का उपाय खोजा है। इसके अलावा हम कर भी क्या सकते हैं।
-यासिन तेली, उस्मानाबाद कॉलोनी

#सैनिक बस्ती
चूरू में निगम की लापरवाही का सैनिक बस्ती से बेहतर कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। कॉलोनी की दो दर्जन से अधिक छतों पर मौत मंडरा रही है। सबसे अधिक यहीं के वाशिंदे करंट की चपेट में आए हैं। तीन-चार व्यक्तियों को तो जिंदगी से भी हाथ धोना पड़ा है।
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करीब चार साल पूर्व छत से गुजरते चार तार छत पर टिक गए थे। इससे दो बार छत की दीवार तोडऩी पड़ी और छत पर जाना बंद हुआ सो अलग। बारिश में तो मकान की दीवारों में करंट आने लगता है। ऐसे कई बार सड़क पर आना पड़ा है।
-शांति देवी, सैनिक बस्ती

#ओम कॉलोनी
11 केवी लाइन से कॉलोनी के आधा दर्जन से अधिक घरों पर खतरा मंडरा रहा है। 12 वर्ष पहले भंवरलाल शर्मा के छत पर हादसा हुआ तो निगम अभियंताओं ने छत पर ही खम्भा लगाकर तार ऊंचे कर दिए। निगम के अभियंता शेष घरों की छतों से तार हटाने या उन्हें ऊंचे करने के लिए शायद एक और हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
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मकानों का काम चल रहा था तब मिस्त्री को चाय पकड़ाने छत पर गई तो करंट से झुलस गई। तीन दिन से होश आया और तीन माह तक इलाज चला। बारिश और तूफान में करंट के डर से बच्चे तो क्या बड़ों को भी छत पर नहीं जाने देते।
-शांति देवी, ओम कॉलोनी

#शेखावत कॉलोनी
कॉलोनी में 11 केवी और 33 केवी कई घरों की छतों से गुजरती है। लोग चौबीसों घंटें मौत के सांये में बीताते हैं। 33 केवी के नीचे के घरों में बारिश और आंधी में अक्सर हवाई करंट आता है।अधिकांश लोग विद्युत तारों की समस्या के कारण कॉलोनी में भूखण्ड खरीदने पर पछता रहे हैं। कॉलोनी में छोटे-बड़े हादसे आए दिन होते हैं।
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भूखण्ड खरीदा तब निगम ने कहा कि निर्माण कार्य शुरू होगा तब लाइन शिफ्ट कर देंगे। वर्षों पुरानी यह समस्या आज भी जस की तस है। हम तो लाइन शिफ्टिंग का चार्ज तक देने को तैयार हैं मगर निगम समस्या की गंभीरता को समझे तब समाधान हो।
-इकबाल खां, शेखावत कॉलोनी

#पूनियां कॉलोनी
कॉलोनी में डेढ़ दर्जन से अधिक घरों की छत से 11 केवी की लाइन गुजर रही है। प्रेमप्रकाश सहारण के नोहरे में तो लोहे का खम्भा तक लगा हुआ है। कॉलोनीवासियों के अनुसार गांधी कॉलोनी से पूनियां कॉलोनी के बीच खींची गई इस विद्युत लाइन से कॉलोनीवासी भयभित हैं। लोगों में निगम के अभियंताओं के प्रति भारी रोष भी है।
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चौबीसों घंटे भय समाया रहता है। छत के बीचोंबीच से गुजरती 11केवी लाइन के कारण रात को बाहर भी नहीं सोते हैं। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या से अवगत करवा दिया मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
-इन्द्रचंद राठी, पूनियां कॉलोनी

#वन विहार कॉलोनी/प्रतिभा नगर
वन विहार कॉलोनी और प्रतिभा नगर में छत के नजदीक से गुजरते विद्युत तार हर समय हादसे को निमंत्रण दे रहे हैं। निगम के अभियंताओं के सुध नहीं लेने के कारण लोगों ने अपने स्तर पर सुरक्षा बरत रखी है। कहीं पर ईंटों की ऊंची दीवार बनाई गई तो कहीं पर तारों में पाइप डलवाकर सुरक्षित कर रखा है।
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छत के नजदीक से गुजर रहे तारों की समस्या की कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। आखिर हमने ही ईंट लगाकर बच्चों को तारों के नजदीक जाने से रोक रखा है। विद्युत तारों की समस्या से आखिर कब तक जूझना पड़ेगा।
-तुलसी देवी, प्रतिभा नगर

हादसे दर हादसे
--8 सितम्बर 09 सैनिक बस्ती में छत पर निर्माण कार्य करवाते समय विद्युत लाइन के सम्पर्क में आने से अकबर हुसैन की मौत। इससे पहले भी तीन व्यक्ति गंवा चुके हैं जान।
--1 सितम्बर 09 को वार्ड 22 में छत पर खेल रहा सात वर्षीय समीर करंट से झुलसा।
आठ माह पहले शेखावत कॉलोनी स्थित मस्जिद की छत पर तार छूने से अकरम इलाही झुलसा।
--करीब ढाई साल पहले उस्मानाबाद कॉलोनी में छत पर प्लास्तर करते समय विद्युत तार के सम्पर्क में आने से आरिफ हुआ घायल।
--करीब 12 साल पहले ओम कॉलोनी में निर्माणधीन मकान की छत से गुजर रहे तार के सम्पर्क में आने से शांति देवी मरते-मरते बची।

इतने पास से खतरा
लाइन----नजदीक---नीचे
33केवी---2मीटर----3.7मीटर
11केवी---1.2मीटर--3.7मीटर
132केवी--3मीटर----5मीटर
(निगम के एसई के अनुसार )
-----------------
जन सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर कोर्ट आइपीसी और सीआरपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्रसंज्ञान लेकर क्षतिकारक चीज का हटाने का आदेश दे सकती है।
-हेमंत शर्मा, वकील, चूरू

छत से लाइन शिफ्टिंग के मेरे पास सैकड़ों आवेदन आ चुके हैं। यह तो भूखण्ड आवंटन करने वाले और लेने वाले दोनों की गलती है। सैनिक बस्ती की छतों से हाईटेंशन लाइन का खतरा दूर करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए निगम को कॉलोनी का सर्वे करने के आदेश दिए जा चुके हैं।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू

कॉलोनियों से लाइन गुजरी तब मकान नहीं बने हुए थे। यह तो प्लॉट काटने वालों और विद्युत लाइनों के नीचे मकान बनाने वालों की गलती है। खतरा तो है मगर निगम कर भी क्या सकता है। सैनिक बस्ती में समस्या सबसे गंभीर है। कॉलोनी से लाइन शिफ्ट करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा हुआ है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद लाइन शिफ्ट की जाएगी।
-केआर मेहता, अधीक्षण अभियंता, जोधपुर डिस्कॉम

समस्या गंभीर है। शहर की 25 फीसदी आबादी इससे प्रभावित है। लाइन शिङ्क्षफ्टग की पहले एक योजना तो बनी मगर उसका कोई नतीजा नहीं निकला। वैसे भी यह राज्यस्तर का मामला है। समस्या के समाधान के लिए शहरवासियों को मिलकर प्रयास करने की दरकार है। परिषद अपने स्तर पर मदद करने में कोई कमी नहीं रहने देगी।
-रमाकांत ओझा, सभापति, नगर परिषद, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी



Friday, September 4, 2009

बंद होंगे गड़बड़ी के सुराख

नरेगा में नई व्यवस्था, शुरुआत सुजानगढ़ ब्लॉक से
विश्वनाथ सैनी
चूरू, 4 सितम्बर। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना (नरेगा) में अब सरकारी राशि का रिसाव नहीं हो सकेगा। नरेगा में भ्रष्टाचारियों की जेबें भरने वाले सुराखों का जिला प्रशासन ने तोड़ निकाल लिया है। खुद प्रशासन के लिए सिरदर्द बन चुके नरेगा के उन तमाम सुराखों को जल्द ही बंद किया जाएगा। इसके लिए न केवल मस्टररोल का प्रारूप बदला गया है बल्कि नरेगा कार्य के निरीक्षण के लिए तीसरी आंख की भी मदद ली जाएगी।जिला प्रशासन की नई व्यवस्था में नरेगा का मस्टररोल जारी होने से लेकर श्रमिकों के हाथ में मजदूरी पहुंचने तक का सारा काम-काज कम्प्यूटराइज होगा। नरेगा के ए- फोर साइज के नए मस्टररोल का उपयोग पहली बार आगामी पखवाड़े से सुजानगढ़ ब्लॉक में किया जाएगा। बाद में जिलेभर में इसका उपयोग होगा।

नहीं लिख सकेंगे फर्जी नाम
नरेगा के भ्रष्टाचारी नए मस्टररोल में श्रमिकों के फर्जी नाम किसी भी सूरत में दर्ज नहीं कर सकेंगे। क्योंकि मस्टररोल में अब श्रमिकों के नाम का कॉलम खाली ही नहीं मिलेगा। नया मस्टररोल जारी करने से पहले उसमें उन सभी श्रमिकों के नाम कम्प्यूटर से दर्ज किए जाएंगे, जिन्होंने नरेगा में काम की मांग की है। फिलहाल जारी होने वाले मस्टररोल में श्रमिकों के नाम के कॉलम समेत समस्त कॉलम खाली होते हैं। ऐसे में काम की मांग नहीं करने वाले श्रमिक का नाम मस्टररोल में दर्जकर भ्रष्टाचारी सरकारी राशि डकारने में कामयाब हो जाते हैं।

कांट-छांट की गुंजाइश नहीं
नए मस्टररोल में श्रमिकों के नाम, पंजीकरण संख्या, हाजिरी और मजदूरी में कांट-छांट की गुंजाइश न के बराबर है। नए मस्टररोल में हाजिरी और मजदूरी को छोड़ शेष समस्त सूचनाएं उसे जारी करने के साथ ही कम्प्यूटर से दर्ज कर दी जाएंगी। मेट को अब हाजिरी के कॉलम में 'एÓ और 'पीÓ की बजाय एक से दस तक की संख्या क्रमवार लिखनी होगी। अनुपस्थित श्रमिक के कॉलम में क्रोस लगाना होगा। भ्रष्टाचारी किसी श्रमिक की हाजिरी में गड़बड़ करना चाहेगा तो उसे समस्त श्रमिकों की क्रम संख्या में कांट-छांट करनी पड़ेगी। ऐसे में हाजिरी की गड़बड़ी आसानी से पकड़ में आ जाएगी।

हर ब्लॉक में फ्लाइंग स्क्वायड
नरेगा में मस्टररोल की नई व्यवस्था के अलावा प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक अधिकारी के नेतृत्व में फ्लाइंग स्क्वायड टीम गठित की जाएगी। खास बात यह है कि भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर फ्लाइंग स्क्वायड टीम नरेगा कार्यस्थल का निरीक्षण करने के साथ ही उसकी वीडियोग्राफी भी करेगी। इससे शिकायत की जांच को सही दिशा देने में आसानी होगी। टीम के नेतृत्व की जिम्मेदारी रोजाना बदलती रहेगी। टीम का नेतृत्व वह अधिकारी करेगा जो उस दिन अपने क्षेत्र में उपस्थित हो।

यह भी होगा फायदा
जिले में कार्यरत नरेगा श्रमिकों की संख्या का पता मिनटों में लगाया जा सकेगा।-मस्टररोल में श्रमिकों की पंजीकरण संख्या, अकाउण्ट नम्बर व मजदूरी लिखने में नहीं हो सकेगी गड़बड़ी।-जिले में नहीं रहेगा नरेगा का बैकलॉग।-नरेगा का बजट जारी होने में नहीं होगी देरी।-लम्बे-चौड़े मस्टररोल की घट जाएगी साइज।

इनका कहना है...
नई व्यवस्था से नरेगा की कई खामियों को दूर किया जा सकेगा। नया मस्टररोल दिल्ली एनआईसी ने काफी पहले डिजाइन किया था मगर प्रदेश के किसी भी जिले में इसे नहीं अपनाया गया। आगामी पखवाड़े से चूरू के सुजानगढ़ में पहली बार इसके तहत काम होगा।
-डा. केके पाठक,जिला कलक्टर, चूरू