राधे को मास्टरजी का बड़ा डर लगता था परन्तु वह प्यार और इश्क के मामले में इतना डरपोक नहीं था। बासंती बयार आई तो वह सहपाठी चम्पा को दिल दे बैठा। चम्पा कक्षा में मेरे बगल में और मैं राधे के बगल में बैठा करता था। उसका छात्रावास की गली से रोज स्कूल आना-जाना था। कभी-कभार तो वह हमारे साथ ही स्कूल जाती।एक दिन दोनों की आंख लड़ी, बात बढ़ी और प्यार हो गया।
दोनों एक-दूसरे को टुकर-टुकर देखा करते थे। स्कूल में मास्टरजी जब भी कुछ लिखने के लिए ब्लैक बोर्ड की ओर मुड़ते तो राधे और चम्पा का मुंह मेरी ओर यानि वे दोनों एक-दूसरे को देखने लगते। एक दिन राधे ने मेरे से चम्पा के नाम प्रेमपत्र लिखवा डाला। नीली स्याही में डूबाकर दिल के सारे अरमान कागज पर उतरवा दिए। मुझे अपने बगल में और खुद चम्पा के बगल में बैठकर उसके हाथ में थमा दिया परवाना। निकाल ली दिल की सारी भड़ास।दो दिन बाद चम्पा ने कागज के एक छोटे से टुकड़े पर 143 लिखकर राधे से अपने प्यार का इजहार कर दिया।
दोनों का प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि उन्होंने जीवनभर साथ निभाने का फैसला कर लिया।कहते हैं कि इश्क और मुश्क ज्यादा दिन तक नहीं छिपते। चम्पा और राधे के साथ भी ऐसा ही हुआ। आखिर खाप पंचायतों के चौधरियों की नजर से वे बच नहीं पाए। हर दिन एक नया चौधरी उनके प्यार का दुश्मन बनता गया। दोनों सात फेरों में बंधने का ख्वाब सजाने लगे और मैं उनके विवाह के निमंत्रण पत्र का इंतजार कर रहा था।
अगस्त में झझर जिले के घाडऩा गांव में बतौर पति-पत्नी साथ रह रहे रवीन्द्र और शिल्पा को भाई-बहन बनाने के पक्ष में कायदान खाप ने चार दिन तक धरना दिया। विडम्बना है कि धरने में महिलाएं भी शामिल हुईं। इसी मामले को लेकर गांव बेरी में खाप पंचायत बैठी। प्रेमी-प्रेमिका को कभी गांव वापस न आने और रवीन्द्र के पिता को तीन महीने गांव से बाहर रहने का फरमान सुनाया गया।
ऑल इण्डिया वीमेंस एसोसिएशन एडवा की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में खाप पंचायतों समेत हर वर्ष करीब सौ प्रेमी जोड़ों की या तो हत्या कर दी जाती या उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता है। अकेली खाप पंचायतें हर माह आठ से दस प्रेमी जोड़ों के साथ यह अन्याय करती है।
प्रतिक्रियाएँ:
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2 टिप्पणियाँ:
RAJNISH PARIHAR said...
बहुत ही खूब...!हम किसी के बारे में इतना अच्छा सोचते है.शायद यही प्यार है..
October 21, 2009 3:27 PM
RAJNISH PARIHAR said...
वैसे आपकी कहानी भी काफी दिलचस्प लगी,आता हूँ कभी चाय पर...