Friday, January 29, 2010

क्या यही प्यार है....


अपने एक लंगोटिया यार के दादाजी के श्राद्ध पर हमें जिगर के टुकड़े राधे की याद आ गई। राधे के गाल पसधारी के लड्डू जैसे और नाक सब्जी की तरह तीखी थी। उसकी बातों में खीर का सा मिठास और चेहरा पूड़ी की भांति गोल था। राधे और मैं हरियाणा में पढ़ा करते थे।12वीं कक्षा के दौरान एक दिन अपने मुंहबोले नानाजी के श्राद्ध के लिए राधे तीसरे कालांश के बाद स्कूल से गायब हो गया था और दूसरे दिन स्कूल आया तो पहले कालांश में मास्टरजी की मार के डर से पेंट में ही...........। समझ गए ना आप। 

राधे को मास्टरजी का बड़ा डर लगता था परन्तु वह प्यार और इश्क के मामले में इतना डरपोक नहीं था। बासंती बयार आई तो वह सहपाठी चम्पा को दिल दे बैठा। चम्पा कक्षा में मेरे बगल में और मैं राधे के बगल में बैठा करता था। उसका छात्रावास की गली से रोज स्कूल आना-जाना था। कभी-कभार तो वह हमारे साथ ही स्कूल जाती।एक दिन दोनों की आंख लड़ी, बात बढ़ी और प्यार हो गया। 

दोनों एक-दूसरे को टुकर-टुकर देखा करते थे। स्कूल में मास्टरजी जब भी कुछ लिखने के लिए ब्लैक बोर्ड की ओर मुड़ते तो राधे और चम्पा का मुंह मेरी ओर यानि वे दोनों एक-दूसरे को देखने लगते। एक दिन राधे ने मेरे से चम्पा के नाम प्रेमपत्र लिखवा डाला। नीली स्याही में डूबाकर दिल के सारे अरमान कागज पर उतरवा दिए। मुझे अपने बगल में और खुद चम्पा के बगल में बैठकर उसके हाथ में थमा दिया परवाना। निकाल ली दिल की सारी भड़ास।दो दिन बाद चम्पा ने कागज के एक छोटे से टुकड़े पर 143 लिखकर राधे से अपने प्यार का इजहार कर दिया।

वार्षिक परीक्षा तक दोनों का प्यार चला और फिर चम्पा अपने गांव चली गई। उसका गांव हरियाणा की खाप पंचायतों में से एक था। (हरियाणा का कुछ क्षेत्र खाप पंचायतों के रूप विख्यात है) राधे से चम्पा की जुदाई सही नहीं गई और वह इतवार को उससे मिलने गांव जाने लगा। गांव के बाहरी इलाके में दोनों एक नीम के पेड़ के नीचे घंटों बतियाते और सांझ ढलने से पहले जुदा हो जाते। 

दोनों का प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि उन्होंने जीवनभर साथ निभाने का फैसला कर लिया।कहते हैं कि इश्क और मुश्क ज्यादा दिन तक नहीं छिपते। चम्पा और राधे के साथ भी ऐसा ही हुआ। आखिर खाप पंचायतों के चौधरियों की नजर से वे बच नहीं पाए। हर दिन एक नया चौधरी उनके प्यार का दुश्मन बनता गया। दोनों सात फेरों में बंधने का ख्वाब सजाने लगे और मैं उनके विवाह के निमंत्रण पत्र का इंतजार कर रहा था।

एक रोज खबर मिली कि दोनों की किसी ने गला रेतकर हत्या कर दी। खाप पंचायतों के एक खेत में दोनों अचेत अवस्था में पड़े मिले। हत्यारों का कोई सुराग नहीं लगा। हां, यह जरूर तय था कि उनकी हत्या खाप पंचायतों में से ही किसी ने की है। मेरे दोस्त, सखा और मित्र राधे व चम्पा की प्रेम कहानी के साथ-साथ उनका भी अंत हो गया।

सवाल उनकी मौत का नहीं बल्कि सवाल यह है कि आखिर हरियाणा की खाप पंचायतों में प्रेमी जोड़ों को खुलकर जीने की आजादी कब मिलेगी? आजादी के साठ साल गुजरे जाने के बाद भी आखिर कब तक प्रेमी यूं ही मौत का शिकार होते रहेंगे? अपनी बर्बरता और मानवाधिकार की खुलेआम धज्जियां उडाने के लिए जानी जाने वाली खाप पंचायतों के लिए राधे और चम्पा को मौत के घाट उतारना कोई नया काम नहीं ।

ताज़ा घटनाक्रम पर नजर डालें तो पिछले साल नौ मई को कालीरमन खाप पंचायत के आदेश पर प्रेमी जसवीर और प्रेमिका सनिता की हत्या कर दी गई थी और इस साल 12 मार्च को करनाल जिले के मातौर गांव में बनवाला खाप ने वेदपाल और सोनिया को अलग होने का फरमान सुनाया। बाद में 26 जुलाई को वेदपाल भी खाप पंचायत का शिकार हो गया। 

अगस्त में झझर जिले के घाडऩा गांव में बतौर पति-पत्नी साथ रह रहे रवीन्द्र और शिल्पा को भाई-बहन बनाने के पक्ष में कायदान खाप ने चार दिन तक धरना दिया। विडम्बना है कि धरने में महिलाएं भी शामिल हुईं। इसी मामले को लेकर गांव बेरी में खाप पंचायत बैठी। प्रेमी-प्रेमिका को कभी गांव वापस न आने और रवीन्द्र के पिता को तीन महीने गांव से बाहर रहने का फरमान सुनाया गया।

ऑल इण्डिया वीमेंस एसोसिएशन एडवा की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में खाप पंचायतों समेत हर वर्ष करीब सौ प्रेमी जोड़ों की या तो हत्या कर दी जाती या उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता है। अकेली खाप पंचायतें हर माह आठ से दस प्रेमी जोड़ों के साथ यह अन्याय करती है।

गंगा मैया की कसम ना तो हमारा कोई राधे दोस्त था और ना ही राधे की प्रेमिका चम्पा। खाप पंचायतों के मन को झकझोर देने वाले नित नए कारनामे पढ़कर हमारी कलम चल गई...। प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

RAJNISH PARIHAR said...
बहुत ही खूब...!हम किसी के बारे में इतना अच्छा सोचते है.शायद यही प्यार है..
October 21, 2009 3:27 PM

RAJNISH PARIHAR said...
वैसे आपकी कहानी भी काफी दिलचस्प लगी,आता हूँ कभी चाय पर...

Thursday, January 7, 2010

मिट्टी व पानी की सेहत की होगी जांच

प्रदेश में खुलेंगी सत्ताइस प्रयोगशालाएं
12 जिलों में 15 स्थान चिह्नित,
बारह होंगी भ्रमणशील,
अप्रेल में शुरू होगी जांच
चूरू, 7 जनवरी। प्रदेश के किसानों को खेत की मिट्टी, पानी व उर्वरकता की जांच के लिए अब मिलों तक का सफर तय नहीं करना पड़ेगा। किसानों की इस समस्या का समाधान मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरकता प्रबंध की राष्ट्रीय परियोजना के प्रथम चरण के तहत प्रदेशभर में स्थापित होने वाली 27 प्रयोगशालाओं के माध्यम से होगा। इनमें प्रदेश के बारह जिलों में चौदह स्थानों पर मृदा परीक्षण व एक स्थान पर उर्वरक परीक्षण की स्थायी तथा प्रदेशभर में मृदा परीक्षण की बारह भ्रमणशील प्रयोगशालाएं शामिल हैं। स्थायी प्रयोगशालाओं के स्थान का चयन करने में सिंचित क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार समस्त पन्द्रह स्थायी प्रयोगशालाओं में अप्रेल 10 से जांच कार्य शुरू होने की उम्मीद है। प्रतापगढ़, सीकर, अजमेर, नागौर, बाडमेर, करौली, बीकानेर, जालौर व पाली में खुलने वाली प्रयोगशालाओं के भवन निर्माण की निविदाएं भी निकाली जा चुकी हैं। शेष प्रयोगशालाओं के लिए भूमि तलाश की जा रही है।—-निजी सहभागिता से संचालनमृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का संचालन निजी सहभागिता से होगा। सरकार की ओर से किसी एनजीओ या निजी कम्पनी को भूखण्ड आवंटन के साथ ही उस पर भवन निर्माण करवाकर प्रयोगशाला के आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। संचालनकर्ता को प्रयोगशाला में केवल अपना स्टाफ तैनात करना होगा। इसके अलावा कोटा में खुलने वाली उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला के संचालन का जिम्मा खुद सरकार के पास रहेगा।—-यह होगी सुविधामृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में खेत की मिट्टी व पानी की सम्पर्ण जांच हो सकेगी। इनमें मिट्टी के मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्व तथा पानी की क्षारियता, लवणीयता, पीएच व ईसी समेत कई जाचें शामिल हैं। जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी दिया जाएगा।—-फैक्ट फाइलआधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में कृषि जोतों की संख्या 58।2 लाख है। खेतों की मिट्टी व पानी आदि की जांच के लिए विभिन्न जिलों में 33 सरकारी व पांच निजी प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।
इन्हें मिली सौगात
जिला-----चयनित स्थान
चूरू-----साण्डवा
सीकर-----लक्ष्मणगढ़
सीकर-----श्रीमाधोपुर
प्रतापगढ़-----प्रतापगढ़
अजमेर-----केकड़ी
नागौर-----कुचामन
नागौर-----लाडनूं
बाडमेर----गुढ़ामलानी
करौली----हिण्डौन
बीकानेर----डूंगरगढ़
जालौर----सांचौर
पाली-----जैतारण
कोटा----- सांगोद
टोंक----- दूनी
कोटा-----कोटा
(कोटा में उर्वरक तथा शेष स्थानों पर मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं खुलेंगी)
—-
प्रदेश भर में सभी 15 स्थायी प्रयोगशालाओं में अप्रेल से जांच शुरू हो जाएगी। इनमें दस प्रयोगशालाओं के भवन निर्माण के टेण्डर हो चुके हैं। शेष के लिए भूमि आंवटन की कार्यवाही चल रही है।
-दयालसिंह चौधरी, संयुक्त निदेशक कृषि (गुण नियंत्रण), जयपुर
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जिले में मृदा परीक्षण की प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए सुजानगढ़ तहसील के गांव साण्डवा को चिह्नित किया है। इससे जिले के किसानों को खेत की मिट्टी व पानी की जांच के लिए जिला मुख्यालय पर स्थित एकमात्र प्रयोगशाला पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साण्डवा में प्रयोगशाला के लिए भूमि की तलाश शुरू कर दी है।
-भंवर सिंह राठौड़, उप निदेशक कृषि विभाग, चूरू

Monday, January 4, 2010

करोड़ों से बुझेगी लाखों की प्यास

मुख्यालय को भेजा कंटीजेंसी प्लान,
मंजूरी मिलते ही शुरू होगा काम,
चूरू, 4 जनवरी। सर्दियों में लोगों के प्यासे हलक तर करने के लिए जलदाय विभाग ने आठ करोड़ 89 लाख 38 हजार रुपए का कंटीजेंसी प्लान मुख्यालय को भेजा है। मुख्यालय की मंजूरी मिलने के बाद पेयजल संकट दूर करने के लिए प्लान के तहत कार्य शुरू हो जाएगा। अधिकारिक जानकारी के अनुसार कंटीजेंसी प्लान के तहत जनवरी से मार्च के दौरान जिले में 42 नए नलकूप व 85 नए हैण्डपम्प खोदे जाने प्रस्तावित हैं। साथ ही तीन पुराने नलकूपों को गहरा किया जाना है। इसके अलावा पेयजल किल्लत से जूझ रहे इलाकों में पानी के टैंकर भेजे जाने पर 38.55लाख तथा पेयजल स्रोतों की रखरखाव परतीन करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाने प्रस्तावित हंै।
दौड़ाएंगे पानी के टैंकर
जिलेवासियों की प्यास बुझाने के लिए पीएचईडी की ओर से पानी के टैंकर भी दौड़ाए जाएंगे। प्रस्ताव में चूरू खण्ड के गांवढाणी नायकान, ढाणी गुजरान, सूरतपुरा, रतनगढ़ खण्ड के गांव छावड़ी मीठी, भींचरी, तारानगर खण्ड के गांव कालोरी, देवीपुरा, राऊ टिब्बा, न्यांगली, पाबासी, रतनपुरा, जयपुरिया खालसा, जयपुरिया पट्टा, अमरपुरा धाम, लाखलाण छोटी, सिलायचो का बास, कोटवाद नाथावतान, ढाणी पूनियां, भैरूसिंह की ढाणी, धींगी, भैरूसर, ढाणी मोतीङ्क्षसह व मठोड़ी में पानी के टैंकर भेजे की आवश्कता जताई गई है।
इन गांवों में नलकूप
चूरू खण्ड के गांव नाकरासर, धोधलिया, खासोली, सुजानगढ़ खण्ड के गांव जैतासर, सिकराणाताल, सेठों की ढाणी, नब्बासर, खिंचीवाला, क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना मंगलूना पार्ट द्वितीय, लालगढ़, परेवड़ा, रतनगढ़ खण्ड के गांव बीरमसर में खिचड़ों की ढाणी, भूखरेड़ी में ढाणी धायलों की, लोहा में ढाणी मेघवाल, लूणासर, जेगनिया बीकान, आबड़सर, लाछड़सर, हुडेरा अगुणा, भानूदा बीदावतान, परसनेऊ, आलसर, नोसरिया, तारानगर खण्ड के गांव किरतान-खैरू बड़ी, आरडब्ल्यूएसएस बालान, आरडब्ल्यूएसएस बेवड़ में नलकूप खोदे जाने प्रस्तावित हंै।
यहां पर हैण्डपम्प
सुजानगढ़ खण्ड के गंाव जैतासर, मलसीसर, राजियासर खारा, धातरी, जोगलिया, ढाणी कुम्हारान, रामपुरा, अणखोल्यां, जीनरासर, बोथियाबास, राजपुरा, नीमड़ी चारणान, भानीसरिया, बामणिया, चाड़वास, भोजलाई, बिलासी, बासी अगुणी, भानीसरिया हीरावतान, नीमड़ी बिदावतान, चूहास, बिड़ास, तोलियासर, डूंगरास आथुणा, गोपालपुरा, बोबासर, रतनगढ़ खण्ड के गांव टीडियासर, छावड़ी खारी, भींचरी, भरपालसर बीदावतान, गोरीसर, मौलीसर छोटा, तारानगर खण्ड के गांव कालोड़ी, देवीपुरा, सुलखनिया बड़ा, राऊताल, रावतसर कूंजला, सांखण ताल, समरपुरा, पाबासी में हैण्डपम्प खोदे जाने प्रस्तावित हैं।
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जनवरी से मार्च 10 के लिएकंटीजेंसी प्लान का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा है।जिसे जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। आगामी तीन माह के दौरान जिले में कहीं भी पेयजल किल्लत नहीं आने दी जाएगी।
-अनिल श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, पीएचईडी, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Thursday, December 31, 2009

मैंने सुना नया साल आया

मैंने सुना नया साल आया
दिल के एफएम से जोड़ लो मन के तार...बजने दो फुल आवाज में प्यार भरे तराने...हटा दो खिड़कियों के सारे परदे...घुल जाने दो सासों में फिजां की महक...बाहों में समेट लो सूरज की किरणें...हवाओं को छू लेने दो तुम्हारे कपोल...उठा लो कलम और लिख दो अपनों के नाम कुछ संदेश...भेज दो सारे दोस्तों को एसएमएस...ठान लो कुछ नया करने की...ले लो संकल्प कुछ बनने का...कुछ पाने का...जिंदगानी के फ्लेशबैक में मार लो एक हल्का सा गोता...पता तो करो क्या पाया...क्या खोया...क्या चाहते थे...क्या मिला...कहां मारी बाजी...कहां पड़े कमजोर...।
जनाब मिल गया हो समय तो हटा दो दीवारों से कलेण्डर...मिला लो घड़ी के कांटे...क्योंकि मैंने सुना नया साल आया...फिर कुछ नया करने का जज्बा लाया...अपनों के नजदीक आने का एक और मौका आया...फिर एक शाम परिवारजन, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ जश्न मनाने का अवसर लाया...मत गंवाना किसी को बधाई देने का अवसर...फिर ना पड़े पछताना...अभी मान लो मेरा कहना...क्योंकि मैं भी यह बात 12 माह और 365 दिन बाद ही दोहरा सकूंगा...इस बीच मुझे दोष मत देना कि मैंने पहले नहीं बताया....कि नया साल आया...।
(पोस्ट पढऩे और ब्लॉग देखने वाले सभी दोस्तों को
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं)

Tuesday, December 29, 2009

मशीनी जुगाड़ रोकेगा जमीनी खिलवाड़

अत्याधुनिक मशीन खरीदने की कवायद
नाप-जोख में इस्तेमाल होगा ईटीएस व जीपीएस
पटवारियों का बचेगा समय
कोई नहीं उलझेगा आंकड़ों में
चूरू, 29 दिसम्बर। जमीनों के नाप-जोख में प्रशासनिक कारिंदों तथा जमीन हड़पने की नीयत रखने वाले पड़ोसी के हाथों होने वाली गड़बड़ी पर अब लगाम कसी जा सकेगी। अनपढ़ ग्रामीण भी पटवारियों के आंकड़ों के जाल में अब नहीं फंस पाएगा। जमीन के नाप-जोख में इंच भर की गड़बड़ी किए जाने की गुंजाइश नहीं बचेगी। यही नहीं बल्कि अब बड़े खेतों को नापने के लिए पटवारियों को घंटों तक नहीं जूझना पड़ेगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने पहल कर जमीनों को नापने की अत्याधुनिक मशीन इलेक्ट्रोनिक टोटल स्टेशन (ईटीएस) व ग्लोबल पोजीसिंग सिस्टम (जीपीएस) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जिला कलक्टर डा. केके पाठक की पहल पर नई दिल्ली की एक कम्पनी ट्रिम्बल ईटीएस व जीपीएस का प्रदर्शन भी कर चुकी है। अन्य कम्पनियों की मशीनों का भी प्रदर्शन होगा। जिले में कम से कम एक अत्याधुनिक मशीन खरीदी जानी तय है। मशीन की कीमत वाजिब रही तो जिले की प्रत्येक तहसील के लिए एक-एक मशीन खरीदी जाएगी।
मिलीमीटर तक का नाप
वर्तमान में जमीनों का नाप-जोख जरीब (कड़ी) व फीते से होता है।
जिसमें फुट या मीटर तक का ही सही आकलन हो सकता है। जबकि अत्याधुनिक मशीन से ऊंचाई, लम्बाई, चौड़ाई व गहराई को मिलीमीटर तक में नापा जा सकेगा। जमीन का पूरा नाप-जोख मशीन की डिस्पले पर खुद मालिक भी देख सकेगा। इससे नापने के बाद पटवारियों को ना तो कागज काले करने पडेंग़े और ना ही आंकड़ों में उलझना पड़ेगा। मशीन खुद ही सारा हिसाब-किताब कर देगी। कम्प्यूटर के माध्यम से नक्शा तक निकाला जा सकेगा।
कभी नहीं आएगा अंतर
पटवारियों के अनुसार गहरा गड्ढ़ा या ऊंचे टिब्बे वाली जमीन को समतल करने के बाद उसके वास्तविक नाप-जोख और पूर्व में करवाए नाप-जोख में अंतर आ जाता है। जबकि ईटीएस व जीपीएस से एक बार नाप-जोख होने के बाद भविष्य में कभी कोई अंतर नहीं आएगा। खास बात तो यह है कि जमीन के नाप-जोख के लिए एक बार कोई स्थायी बिन्दू तय करने के बाद विवाद की स्थिति में जमीन नापने की नौबत आने पर मशीन उस स्थायी बिन्दू को खुद ढंूढ़ लेगी।
ऐसा होगा नाप-जोख
इलेक्ट्रोनिक टोटल मशीन को ट्राईपोड पर रखकर स्थायी बिन्दू तय किया जाएगा। ईटीएस के सामने रखे रिफ्लेक्टर के बीच की दूरी की गणना कुछ ही क्षणों में हो जाएगी। रिफ्लेक्टर को अधिकतम तीन किलोमीटर दूर रखा जा सकेगा। इसके अलावा जीपीएस को तो हाथ में लेकर जमीन में एक बिन्दू से दूसरे बिन्दू तक ले जाने से ही दूरी की गणना हो जाएगी। दोनों ही प्रक्रिया इतनी सरल हैं कि अनपढ़ व्यक्ति भी आसानी से समझ सकता है।
जिला प्रशासन जमीनों की नाप-जोख के लिए अत्याधुनिक मशीन ईटीएस व जीपीएस खरीदना चाहता है। प्रशासन को इनकी तकनीकी जानकारी भी दे दी गई है। इनसे नाप-जोख किए जाने के बाद गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
-विरेन्द्र कुमार राय,डिप्टी बिजनेस मैनेजर, ट्रिम्बल, नई दिल्ली
जमाना हाइटेक हो गया है। ऐसे में जमीनी विवाद से बचने के लिए अत्याधुनिक मशीन खरीद रहे हैं। जिले में कम से कम एक मशीन खरीदी जाएगी। इसके अलावा नरेगा कार्य में सड़क, जोहड़ व मेड़बंदी के नाप-जोख में भी इन मशीनों को इस्तेमाल कर सकेंगे। लागत कम हुई तो प्रत्येक तहसील के लिए एक-एक मशीन खरीदेंगे।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू

Tuesday, December 22, 2009

भेदिए बताते सुराख

आगार प्रबंधन ने करवाई वीडियोग्राफी, रोडवेज बुकिंग स्थलों से उठाते हैं सवारी, दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है घाटा, गलफांस बनी 171 निजी बसें, रोजाना 50 हजार का चूना
चूरू, 22 दिसम्बर। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम में दिनोंदिन बढ़ते घाटे के लिए परिवहन महकमे के भेदिए ही जिम्मेदार हैं। विभागीय कारिंदे सरकार की नौकरी बजाते हुए निगम के हित में काम करने के भले ही लाख दावे कर रहे हों पर सच्चाई यह भी है कि निजी बस संचालकों को निगम की आय में सुराख करने की सीख भी उन्हीं की दी हुई है।इसे परिवहन विभाग की कथित अनदेखी कहें या निजी बस संचालकों से मिलीभगत कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाले निजी वाहनों से निगम को रोजाना तकरीबन पचास हजार रुपए का घाटा हो रहा है। ये वो बसें हैं जो निगम की नियमित बस सेवाओं के निर्धारित समय व निर्धारित मार्ग पर दस से पन्द्रह मिनट के अंतराल में संचालित हो रही हैं। हैरत की बात तो यह है कि अवैध रूप से संचालित इन निजी वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए महकमे के पास नियम भी हैं और कानून भी लेकिन उस पर अमल करना कोई नहीं चाहता।यह खुलासा चूरू आगार प्रबंधन की ओर से करवाई गई निजी बसों की वीडियोग्राफी में हुआ है। वीडियोग्राफी की रिपोर्ट बीते सप्ताह प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, जिला कलक्टर, जिला परिवहन अधिकारी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक सौंपी जा चुकी है लेकिन निजी बसों पर अंकुश की रणनीति बनाता कोई नहीं दिख रहा। पत्रिका को हाथ लगी इस रिपोर्ट के अनुसार जिला मुख्यालय से रोजाना 171 अवैध निजी बसें संचालित हो रही हैं। ये बसें राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध रूप से दौडऩे के साथ ही अधिकृत बुकिंग स्थल से सवारियां भी उठा रही रही हैं।
यूं लगाते हैं चूना
आधिकारिक जानकारी के अनुसार परिवहन महकमे की कागजी खानापूर्ति के नाम पर निजी बस संचालकों ने स्टेट कैरिज व कॉन्टे्रक्ट कैरिज परमिट ले रखे हैं। स्टेट कैरिज परमिट प्राप्त निजी बस को राष्ट्रीयकृत मार्ग की बजाय ग्रामीण मार्ग से गुजरना होता है। इसी तरह निर्धारित स्थान व निर्धारित समय के लिए कॉन्ट्रेक्ट कैरिज परमिट जारी किया जाता है। दोनों ही स्थिति में निजी बस चालक निगम के अधिकृत बुकिंग स्थल से सवारी नहीं ले सकते। हकीकत यह है कि परिवहन महकमे के अधिकारियों की मिलीभगत से निजी बस संचालक दोनों ही तरह के परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं।
हर बार टांय-टांय फिस्स
अवैध रूप से दौड़ती निजी बसों की रोकथाम के लिए परिवहन व पुलिस महकमे की प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद से निगम प्रबंधन अधिकृत बुकिंग स्थलों की वीडियोग्राफी करवाता है। लेकिन नतीजा हर बार सिफर रहता है। इससे पहले भी तीन बार वीडियोग्राफी करवाकर अवैध निजी बसों की पहचान उजागर की जा चुकी है। परिवहन विभाग ने निजी बसों पर अंकुश के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाए।
चूरू आगार का बढ़ता घाटा
वर्ष~~ ~~~~~~~~हानि
2006-07 ~~~~~8,0००
2007-08~~~~~~ 1,95,0००
2008-09~~~~~~1,41,000
2009-10~~~~~~ 61,49,000
(चालू वर्ष का घाटा नवम्बर तक का)
पंखा सर्किल
निगम के इस अधिकृत बुकिंग स्थल पर 25 नवम्बर को सुबह सवा सात से शाम साढ़े सात बजे तक वीडियोग्राफी करवाई गई। इस दौरान यहां से रतनगढ़, सुजानगढ़, डीडवाना व बीकानेर के लिए कुल 36 निजी बसें अवैध रूप से संचालित हुईं।
कलक्ट्रेट सर्किल
जयपुर से जोडऩे वाले इस प्रमुख मार्ग पर स्थित निगम के अधिकृत बुकिंग स्थल की 26 नवम्बर को सुबह पौने सात से शाम सवा सात बजे तक वीडियोग्राफी करवाई गई। इस बीच यहां से फतेहपुर, सीकर व जयपुर के लिए कुल 72 अवैध निजी बसें दौड़ीं।
लाल घंटाघर
27 नवम्बर को सुबह साढ़े सात से शाम आठ बजे निगम के इस अधिकृत बुंकिग स्थल की वीडियोग्राफी करवाई। इस दौरान यहां से झुंझुनूं वाया बिसाऊ तथा राजगढ़ वाया दूधवाखारा व ढाढऱ के लिए 6 3 अवैध निजी बसों का संचालन हुआ।
~~~~~~
सरकार के निर्देश पर रोडवेज के अधिकृत बुकिंग स्थलों की वीडियोग्राफी करवाकर आरटीओ, डीटीओ, कलक्टर व एसपी को हाल ही रिपोर्ट सुपुर्द की गई है। अवैध रूप से दौड़ती निजी बसों पर अंकुश के प्रति अधिकारियों की बेरुखी यूं ही बनी रही तो निगम कभी भी घाटे की स्थिति से नहीं उबर पाएगा।
-बेनीप्रसाद शर्मा, मुख्य प्रबंधक, चूरू आगार
वीडियोग्राफी की कोई रिपोर्ट मुझे नहीं मिली है। वैसे भी वीडियोग्राफी कराने से कुछ नहीं होने वाला क्योंकि निजी बसों के मालिक बस संचालन के लिए प्रतिमाह टैक्स के रूप में 25-25 हजार रुपए देते हैं।
-जीआर महरड़ा,जिला परिवहन अधिकारी, चूरू
आगार प्रबंधन की ओर से अवैध रूप से संचालित बसों की वीडियोग्राफी की सीडी मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक व जिला परिवहन अधिकारी को निर्देशित किया जा चुका है। कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई, यह उनसे पूछने पर ही पता लगेगा।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, December 14, 2009

रोग ने बिगाड़ा शिक्षा योग

शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम
जिले में दस हजार से अधिक विद्यार्थी रोगग्रस्त
चूरू, 14 दिसम्बर। पेट में कीड़े कुलबुलाएं, शरीर को बार-बार खुजाना पड़े, फोड़े-फुंसी पर मक्खियां भिनभिनातीं रहे, दांत व कान में दर्द हो और नजर हो कमजोर। ऐसे में पढ़ाई का माहौल बने तो आखिर कैसे?। ऐसी समस्याओं से जिले में एक नहीं बल्कि दस हजार से अधिक विद्यार्थियों को जूझना पड़ रहा है। बात भले ही गले नहीं उतर रही हो मगर शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम 09-10 की रिपोर्ट तो यही कहती है।
कार्यक्रम के तहत 17 नवम्बर से 12 दिसम्बर तक जिलेभर के प्राथमिक तथा माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। परीक्षण में सामने आया कि छोटी-छोटी बीमारियां विद्यार्थियों की पढ़ाई का गणित बैठाने में बाधा बन रही हैं। ऐसे में अस्वस्थ पाए गए विद्यार्थियों को मौके पर दवा देने के साथ ही सौ विद्यार्थियों को अस्पताल में तत्काल इलाज करवाने की सलाह दी गई है। सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत चिकित्सा विभाग के सहयोग से चलाए गए कार्यक्रम के तहत चिकित्सा अधिकारी, एएनएम, जीएनएम व एलएचवी की टीम ने विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परखा है।

डेढ़ लाख से अधिक का परीक्षण
प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यक्रम के तहत जिलेभर के एक लाख 58 हजार 686 से अधिक विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की गई है। इनमें दस हजार 204 विद्यार्थी अस्वस्थ्य पाए गए। इनके अलावा चूरू में 8 1, राजगढ़ में 17 तथा तारानगर में दो विद्यार्थियों को उपचार के लिए अस्पताल में रेफर किया है। फिलहाल कुछेक टीमों की रिपोर्ट आनी शेष है। ऐसे में अस्वस्थ बच्चों की संख्या में इजाफा होने का अनुमान है।

स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदार
विद्यार्थियों के खराब स्वास्थ्य के संबंध में परिजनों के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदार है। कई स्कूलों में पेयजल टंकियों की साफ-सफाई के प्रति गंभीरता का अभाव है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों जलदाय विभाग ने जलमणि कार्यक्रम के तहत चूरू व तारानगर ब्लॉक के 256 राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पीने के पानी की जांच कराई तो 99 विद्यालयों का पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। 47 विद्यालयों के पानी में जीवाणु पाए गए तथा 52 विद्यालयों के पानी में वांछित रसायनों की मात्रा गड़बड़ मिली।

आंकड़ों की जुबानी (बीसीएमएचओ कार्यालयों के अनुसार)
ब्लॉक-----जांच-----अस्वस्थ-----रेफर
चूरू------19579---1687------81
राजगढ़----17471---1253------17
तारानगर---19945---2054------2
सुजानगढ़---33198---2456------0
सरदारशहर--40281---1174-----0
रतनगढ़----28212---1580------0

इन रोगों से पीडि़त
रोग--------विद्यार्थी
खून की कमी--1674
पेट में कीड़े----515
कान बहना-----596
रतौंधी--------88
फोड़े-फुंसी-----1625
खाज खुजली---991
नेत्र पीड़ा-----477
दंत पीड़ा-----506
अन्य-------3732
कुल -------10204
~~~~~~
कार्यक्रम के तहत हजारों विद्यार्थी अस्वस्थ पाए गए हैं। समस्त बच्चों को मौके पर ही दवा दे दी गई। जिन विद्यालयों में अस्वस्थ विद्यार्थियों की संख्या अधिक पाई गई है, उनमें पानी की टंकी व कक्षा कक्षों में साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था करने के लिए संस्था प्रधानों को निर्देश दिए जाएंगे।
-ओम प्रकाश जांगिड़, जिला परियोजना समन्वयक, सर्व शिक्षा अभियान, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, December 7, 2009

गांवों का सफर होगा सुहाना

155 ग्राम पंचायतों में भी दौडेंगी रोडवेज
निगम को प्रस्ताव भेजा

चूरू, 7 दिसम्बर। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम मुख्यालय अगर चूरू आगार के प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो जिले के करीब पांच सौ गांवों का सफर सुहाना हो जाएगा। आगार प्रबंधन ने जिले की 155 ग्राम पंचायतों को रोडवेज बस सेवा से जोडऩे का प्रस्ताव भेजा है।
सब कुछ प्रस्ताव के मुताबिक हुआ तो ग्रामीण विकास को रफ्तार पकडऩे में देर नहीं लगेगी। ग्रामीणों को बस सुविधा के लिए मीलों तक का सफर तय नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीणों को उनके गांव की मुख्य सड़क, चौक व चौराहे तक बस सेवा उपलब्ध हो सकेगी। इसके बाद जिले में एक भी ग्राम पंचायत सीधी बस सेवा से वंचित नहीं रहेगी। प्रस्ताव भेजने से पहले आगार प्रबंधन ने समस्त 155 ग्राम पंचायतों का दौरा कर करीब सौ नए मार्ग चिह्नित किए है।
प्रत्येक बस में प्रति किलोमीटर 39 यात्री सफर करने के अनुमान तथा रोजाना प्रति किलोमीटर औसत सवा नौ रुपए का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

36 बसें और मांगी
प्रबंधन ने समस्त 155 ग्राम पंचातयों को बस सेवा से जोडऩे के लिए मुख्यालय से 36 बसें और मांगी है। इनके अनुपात में पर्याप्त चालक व परिचालकों की आवश्यकता भी जताई है।

नौ हजार किमी में होगी सुविधा
निगम के इस प्रस्ताव से 155 ग्राम पंचायतों में नौ हजार एक सौ दो किलोमीटर के दायरे में लोगों को फायदा हो सकेगा। सबसे छोटा पांच किमी लम्बा रूट बीदासर से घंटियाल तथा सबसे बड़ा 119 किमी लम्बा रूट तारानगर से रावतसर के बीच निर्धारित किया गया है।

लाभान्वित होने वाली पंचायत
चूरू: बंूटिया, भामासी, लालासर बणीरोतान, दूधवाखारा, देपालसर, श्योपुरा, सहनाली छोटी, खण्डवा, रीबिया, जोड़ी, कोटवाद, मोलीसर बड़ा, आसलखेड़ी, खींवसर, मेहरी, झारिया, लोहसना बड़ा, घांघू, रतनगढ़: भाणुदा, कांगड़, मेलूसर, नौसरिया, गोलसर, नुवां, सिकराली, बीनादेसर, रतनादेसर, भुखरेड़ी, रतनसरा, दाउदसर, बछरारा, टिडियासर, सीतसर, रतनसरा, जांदवा।तारानगर : कालवास, बाय, पण्डरेउ ताल, रेड़ी, लूणास, सोमसीसर, नेठवा, अलायला, मिखाला, मेघसर, गाजुवास, सात्यंू, राजपुरा, ढाणी कुम्हारान।राजगढ़ : कालाना ताल, विजयपुरा, मण्ड्रेला, ढाणी मौजी, नेशल छोटी, सांखण ताल, बीजावास, नौरंगपुरा, सुलखनिया छोटा, नूहंद, जसवंतपुरा, बेवड़, कालरी, राघा छोटी, राघा बड़ी, खेरू बड़ी, सूरतपुरा, न्यांगल छोटी, ख्याली, ढंढाल लेखू, नवां, भैंसली, रामपुरा, धानोठी बड़ी, बाघेला, पहाड़सर, गुलपुरा, बिरमी खालसा, कांजण, घणाउ, खुडी, लाखलाण, भुवाड़ी, महलाना उतरादा, ढिगारला, ढाणी बड़ी।सरदारशहर : अजीतसर, रूपलीसर, दुलरासर, देराजसर, जैतसीसर, बुकलसर, बड़ा, पिचकराई ताल, फोगां, डालमाण, मालसर, मालकसर, भोजासर छोटा, नैणासर, सुमेरियान, आसपालसर, शिमला, बोघेरा, बिल्यूबास, रामपुरा, रातुसर, रणसीसर, तोलासर, बिकमसरा, रामसीसर, रंगाईसर, कीकासर, बैजासर, अड़सीसर, राजासर, बीकान, भोजूसर, बुकलसर बड़ा, पातलीसर, ढाणी पांचरा, मेहरी, जयसिंहसर, मेहरासर उपाधियान, कल्यापुरा। सुजानगढ़ : ढढ़ेरू, ढाणी कालेरा, जोगलिया, जैतासर, सिमसिया, आबसर, हरासर, राजियासर मीठा, ऊंटालड़, ऊंटवाला, भासीणा, बाघसर, आथूणा, कानूता, जीली, बोबासर, बड़ावर, भानिसरिया तेज, सारोठिया, लालगढ़, पारेवड़ा, लोहारा, मुंदड़ा, जोगलसर, चरला, सड़ू, कल्याणसर, बाड़सर, गिरवरसर, साण्डवा, मलसीसर, मुरढाकिया, खारिया, कनीराम, नौरंगसर, गोपालपुरा, बालेरा, दुंकर, घंटियाल, अमरसर।

रोजाना तय होगा इतना
तहसील-----किमी-----बस
चूरू------812------3
राजगढ़----1770-----7
सरदारशहर--2846----11
सुजानगढ़---1976----8
रतनगढ़-----868----4
तारानगर-----730----3

फैक्ट फाइल
कुल ग्राम पंचायत -249
राष्ट्रीयकृत सड़क मार्गों पर स्थित पंचायत-60
पूर्व में जोड़ी गईं पंचायतें- 34
नई जुडऩे वाली पंचायतें-155
संचालन के लिए प्रस्तावित किलोमीटर-९१०२
अतिरिक्त बसों की मांग-36-
---
जिले की 155 ग्राम पंचायतों को रोडवेज बस सेवा से जोडऩे का प्रस्ताव हाल ही मुख्यालय को भेजा है। इसी वित्तीय वर्ष में इसे मंजूरी मिलनी की उम्मीद है। इसके बाद जिले की समस्त पंचायतों को रोडवेज सेवा नसीब हो सकेगी।
-बेनी प्रसाद शर्मा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज आगार, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, November 30, 2009

कन्यादान पर डाका !

चूरू। समाज कल्याण विभाग में सहयोग योजना के 'पेड' पर भ्रष्टाचार की 'बेल' पनप रही है। बिचौलिए गरीब की बेटी का कन्यादान लूट रहे हैं और शासन-प्रशासन आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है। हैरत की बात है कि कन्यादान पर डाका डालने के इस षड्यंत्र में विभागीय कर्मचारियों की भी हिस्सेदारी है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ही चूरू तहसील की घांघू ग्राम पंचायत में आठ अपात्र महिलाओं को सहयोग योजना राशि से लाभान्वित करवाकर बिचौलियों ने हजारों रूपए डकार लिए हैं। जबकि जरूरत मंद योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए हैं।तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार गरीब की बेटी का कन्यादान लूटने के लिए बनाई योजना में बिचौलियों ने एक ऎसी महिला की दोबारा शादी करवा दी जो पहले ही दो बच्चों की मां है।
इतना ही नहीं कई पढी-लिखी महिलाओं को अनपढ घोषित करवा दिया जबकि गांव की स्कूल में उनका नामांकन दर्ज है। हद तो तब हो गई जब वर्तमान में नाबालिग कन्याओं के भी फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर उन्हें योजना के तहत पात्र बनवा दिया। विभागीय अनदेखी का आलम तो यह है कि लाभांवित महिलाओं के नाम 2002 की बीपीएल सूची में ही शामिल नहीं हैं।किसी भी स्तर पर नहीं हुई तस्दीक
योजना के तहत पात्र महिलाओं का चयन करने में आवेदक का जन्म प्रमाण पत्र, बीपीएल कार्ड की सत्यापित फोटोकॉपी, बीपीएल सूची क्रमांक तथा यदि उपलब्ध हो तो शादी का कार्ड भी प्रस्तुत करना पडता है।पात्र महिलाओं को लाभांवित कराने के लिए विभागीय स्तर पर कितनी अनदेखी बरती गई इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है जबकि संबंघित क्षेत्र के छात्रावास अधीक्षक से आवेदक के तथ्यों की तस्दीक कराए जाने का प्रावधान है।
केस एक
घांघू निवासी अमीलाल की पुत्री मुकेश को योजना के तहत करीब दस हजार रूपए से लाभांवित किया गया है। मुकेश वर्तमान में दो बच्चों की मां है। उसकी शादी चार साल पहले हो चुकी थी। बिचौलिए और विभागीय कर्मचारियों ने कन्यादान राशि को हडपने के लिए उसकी शादी 25 अपे्रल 09 को होना बताया है। बकौल मुकेश अभी तक उसे साढे पांच हजार रूपए ही मिले हैं। बिचौलिए ने उसे कुल नौ हजार रूपए स्वीकृत होना बताया था।मुकेश की ही बहन सुमन को भी योजना के तहत पांच हजार रूपए से लाभान्वित किया गया है। बिचौलिए ने उसके आवेदन में सुमन को अनपढ बतलाया है जबकि वह गांव के राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में पढती थी। उसका नामांकन नम्बर 598 है। उसने कक्षा छह तक विद्यालय से उत्तीर्ण की है। बकौल मुकेश सुमन को तो बिचौलिए ने अभी एक रूपया भी नहीं दिया है।
केस दो
घांघू निवासी हनुमान धाणक की पुत्री कांता व सुनीता को पांच-पांच हजार रूपए की सहायता स्वीकृत की गई है। दोनों का विवाह दस दिसम्बर 07 को होना बताया गया है। गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड में सुनीता की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1580 पर 10 अगस्त 93 तथा कांता की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1579 पर 5 जून 95 दर्ज है। ऎसे में विवाह के समय सुनीता की उम्र महज 14 वर्ष तथा कांता की उम्र 12 वर्ष है। इस स्थिति में दोनों ही बहनें नाबालिग होने पर योजना के तहत कन्यादान राशि की पात्र नहीं हैं।
केस तीन
घांघू निवासी भगवाना राम मेघवाल की पुत्री सुमन व गांव के बुधराम धाणक की पुत्री चंदा की अपात्रता के लिहाज से स्थिति लगभग समान है। दोनों की शादी जून 09 में होने के साथ ही इनका परिवार बीपीएल सूची 2002 में भी शामिल नहीं है। गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड में सुमन की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1871 पर 12 अगस्त 94 तथा चन्दा (चन्द्रावली के नाम) की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1577 पर 6 मई 94 दर्ज है। ऎसे में दोनों की उम्र विवाह के समय 18 वर्ष से कम है।
केस चार
घांघू निवासी धर्मपाल धाणक की पुत्री पूनम व सुलोचना को भी योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। आवेदन पत्र में इनकी शादी भी 25 अप्रेल 09 को होना दर्शाई गई है। राजकीय उ“ा प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार नामांकन संख्या 1600 पर सुलोचना की जन्मतिथि (सुमन नाम से) 10 मार्च 94 है। इनका परिवार भी अन्य परिवारों की तरह बीपीएल सूची 2002 में शामिल नहीं है।
क्या है योजना
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों की बेटियों की शादी के अवसर पर सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए एक अपे्रल 2005 से 'सहयोग योजना' चल रही है। योजना के तहत शादी से एक माह पहले या एक माह बाद आवेदन किया जा सकता है।पात्रता के लिए लडकी का परिवार बीपीएल सूची 2002 में शामिल होने के साथ ही विवाह के समय उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। पात्र महिला को बतौर कन्यादान सरकार की ओर से करीब दस से बीस हजार रूपए तक की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाती है।
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मेरी दोनों बेटियों का चयन गांव के नेतराम मेघवाल ने करवाया था। उसके अनुसार मुकेश को नौ हजार रूपए तथा सुमन को पांच हजार रूपए स्वीकृत किए गए थे। उनमें से फिलहाल सुमन को कुछ नहीं दिया जबकि मुकेश को साढे पांच हजार रूपए दिए गए हैं। मेरी बेटी मुकेश की शादी हुए करीब तीन वर्ष से ज्यादा समय हो गया है। उसके दो बच्चे हैं।
- अमीलाल नायक (मुकेश के पिता), घांघू
एक अखबार में मेरी पंचायत की कई महिलाओं को सहयोग योजना के चैक वितरित करने की फोटो से यह जानकारी मिली। उनमें से किसी का भी परिवार पंचायत की बीपीएल सूची 2002 में शामिल नहीं है। मुकेश नामक एक महिला की शादी को तो काफी साल हो गए, वह योजना के तहत कैसे लाभान्वित हुए हुई। यह बात समझ से परे है।
-नाथी देवी, सरपंच, घांघू
जैसा आप बता रहे हो वैसा नहीं हो सकता। मेरे कार्यकाल में एक भी स्वीकृति जारी नहीं हुई है। किसी आवेदक ने तथ्य छुपाए हैं तो उसके और सूचनाओं का सत्यापन करने वाले स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई होगी। पहले की स्वीकृतियों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
-रामनिवास यादव, समाज कल्याण अघिकारी, चूरू
घांघू ही नहीं बल्कि सीकर, चूरू व झुंझुनूं के कई आवेदकों को राशि दिलाने में मैंने सहयोग किया है। किसी भी अपात्र को लाभान्वित नहीं किया गया है। किसी आवेदक ने कोई तथ्य छुपाया है या नहीं। इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
-नेतराम मेघवाल, घांघू
स्कूल के रजिस्टर के अनुसार गांव की मुकेश व सुमन स्कूल में पढी है। इन्हें किसी भी सूरत में अनपढ नहीं कहा जा सकता।
-करूणा बुंदेला, प्रधानाध्यापिका राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय, घांघू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

RAJNISH PARIHAR said...
sharmnaak....
December 2, 2009 4:16 PM

दीपिका said...
aaj v aise ghatnaon ki sankhya ghati nahi hai. sirf kahne ko hum aadhunik evam educated hai. par lagta nahi...
December 5, 2009 11:31 AM

Friday, November 20, 2009

पुलिस के हाथ हुए मजबूत

एएसआई भी रखेगा पिस्टल
बंदूक की जगह लेगी एके-47
चूरू, 20 नवम्बर। शातिर अपराधियों का सामना करने, बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने और आतंकी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस के हाथ पहले से अधिक मजबूत हो गए हैं। चूरू जिला पुलिस के पास अत्याधुनिक हथियारों की पहली खेप पहुंच चुकी है। इनमें एके-47 और ऑटोमैटिक रायफल्स शामिल हैं। अगली खेप जल्द ही पहुंचने की उम्मीद है। पुलिस प्रशासन ने उपलब्ध आधुनिक हथियारों का सिपाहियों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिलाना शुरू कर दिया है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो जिले की पुलिस को साधन, संसाधनों की दृष्टि से अपराधियों के सामने हताश नहीं होना पड़ेगा। बेहतरीन संसाधनों के रहते पुलिस का इकबाल आने वाले कल में और बुलन्द होगा।
हर एएसआई रखेगा पिस्टल
हथियारों की संख्या में इजाफा होने के बाद प्रत्येक एएसआई 9-एमएम की पिस्टल रख सकेगा। फिलहाल पुलिस उप निरीक्षक से लेकर जिला पुलिस अधीक्षक तक की रैंक के अधिकारियों के पास ही 9-एमएम की पिस्टल उपलब्ध हैं। वर्तमान में जिले में करीब एक सौ सहायक पुलिस उप निरीक्षक तैनात हैं।
यूं होगा फायदा
शातिर अपराधियों से मुकाबला करने और जन आंदोलन के दौरान उग्र भीड़ को नियंत्रित करने में नए हथियार पुलिस के लिए काफी मददगार होंगे। वाटर केनन से भीड़ पर तेजी से पानी डाला जा सकेगा तो व्रज वाहन से आंसू गैस के गोले धड़ाधड़ छोड़े जा सकेंगे। स्टन ग्रेनेड और रबड़ बुलैट भीड़ व अपराधियों को बेहोश करने में काम आएंगे। नए हथियार उन परिस्थितियों में अधिक कारगर साबित होंगे जहां पुलिस फायरिंग की नौबत आ जाती है या जहां दो गुटों में टकराव के कारण जनहानी होने की आशंका अधिक रहती है।
ये पहुंच चुके हैं
तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार जिला पुलिस के पास अब तक एके-47, एसएलआर रायफल्स, फायबर ग्लास की लाठी, ढाल, हैलमेट व जैकेट पहुंच चुके हैं। इनका प्रशिक्षण भी दिया जाने लगा है।
ये खरीदे जा रहे हैं
छोटे बोर के हथियार इनमें 9-एमएम की पिस्टल व रबर बुलैट शामिल है।
इनका भेजा प्रस्ताव
स्टन ग्रेनेड, वाटर केनन और अग्निवर्षा मय वज्र वाहन।
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पुलिस का इकबाल हर हाल में बुलन्द है और रहेगा। शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने और आंतकी घटनाओं से निपटने के लिए हथियारों की संख्या बढ़ाई जा रही है। कई आधुनिक हथियार पहुंच चुके हैं। नफरी को नए हथियारों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
-निसार अहमद फारुकी, पुलिस अधीक्षक, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:

RAJNISH PARIHAR said...
pulis inka pryog aatm raksha me hi kare....
November 21, 2009 10:03 AM

Tuesday, November 10, 2009

अनार्थिक स्कूलों पर तलवार

चूरू, 10 नवम्बर। शिक्षा विभाग के लिए सिरदर्द बने अनार्थिक व कागजी विद्यालयों पर ताले की तैयारी शुरू हो चुकी है। ऐसे विद्यालयों की सूचनाएं नए सिरे से जुटाई जा रही हैं। शिक्षा अधिकारी तीस सितम्बर 09 तक की छात्र संख्या को आधार मानकर विद्यालय को अनार्थिक घोषित किए जाने की मशक्कत कर रहे हैं। अधिकांश अनार्थिक विद्यालयों में नाममात्र के बच्चे पढ़ रहे हैं। हालांकि इससे उनकी पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उन्हें पढऩे के लिए नजदीक के अन्य विद्यालय में भेजा जाएगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार 12 नवम्बर को चूरू में हनुमानगढ़, झुंझुनूं, श्रीगंगानगर व बीकानेर के जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा चर्चा करेंगे तथा 16 नवम्बर को शिक्षा संकुल जयपुर में शिक्षामंत्री भंवरलाल मेघवाल प्रदेशभर के अनार्थिक विद्यालयों की समीक्षा करेंगे।

ये हैं श्रेणियां

अनार्थिक व कागजी विद्यालयों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें छात्र संख्या शून्य, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में छात्र संख्या बीस से कम तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक छात्र संख्या बीस से अधिक मगर कक्षा छह, सात और आठ में छात्र संख्या बीस से कम श्रेणी शामिल है।

दूसरे स्कूल में पढ़ेंगे

जिन प्राथमिक विद्यालयों की सभी कक्षाओं में छात्र संख्या बीस से कम तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों की कक्षा छह, सात और आठ में छात्र संख्या बीस है उन पर ताला लगाकर उनके विद्यार्थियों को नजदीक के अन्य सरकारी स्कूल में पढ़ाया जाएगा। प्राथमिक विद्यालय एक किलोमीटर तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय दो किलोमीटर के दायरे में स्थित अन्य सरकारी विद्यालय में मर्ज होंगे।

आधे जिले की स्थिति

जिले के छह ब्लॉक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारियों में से तीन ने अनार्थिक विद्यालयों की सूचना डीईओ ऑफिस भेज भी दी है जबकि शेष ब्लॉकों में शिक्षा अधिकारी सूचना को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार रतनगढ़, चूरू व सुजानगढ़ में 55 विद्यालय अनार्थिक हैं। खास बात यह है कि इनमें से शिक्षामंत्री के गृह क्षेत्र सुजानगढ़ के 11 विद्यालय कागजों में चल रहे हैं। शेष तारानगर, सादुलपुर और सरदार शहर में करीब पच्चीस विद्यालयों के अनार्थिक घोषित होने की और सम्भावना है।

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अनार्थिक विद्यालयों की सूचियां तैयार की जा रही हैं। तीन बीईईओ ने सूचना भेज दी है। शेष को बुधवार सुबह 11 बजे तक सूचना भेजने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
-ओमप्रकाश जांगिड़, जिला प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी, चूरू

अनार्थिक एवं कागजी विद्यालयों की सूचनाएं नए सिरे से जुटाई जा रही हैं। विद्यालयों में तीस सितम्बर 09 की छात्र संख्या को आधार माना गया है।

-शिवजी राम चौधरी, उपनिदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा, चूरू



प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Friday, November 6, 2009

उम्मीद की फसल

2बार पढ़ा गया
राष्ट्रीय कृषि बीमा योजनाआधों को भी नहीं मिला क्लेम

चूरू, 6 नवम्बर। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना एक बार फिर से जिले के तीस हजार से अधिक किसानों के लिए महज उम्मीद की फसल साबित हुई है। वर्ष 2008-09 के दौरान रबी की फसलों का बीमा करवाने वाले जिले के 59 हजार 556 किसानों में से तारानगर व सुजानगढ़ तहसील के 20 हजार 538 किसानों को हाल ही बीमा क्लेम स्वीकृत हुआ है। जिले की चूरू, सरदारशहर, रतनगढ़ व राजगढ़ तहसील के किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिला है। तारानगर तहसील के किसानों को चना तथा सुजानगढ़ तहसील के किसानों को गेहूं, मैथी व सरसों का बीमा क्लेम स्वीकृत किया गया है।

यह है समस्या

योजना के नियमानुसार किसानों को बीमा का लाभ देने के लिए तहसील स्तर पर सूखा घोषित किया जाता है। जिस तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है उसी के किसानों को बीमा का लाभ मिलता है। भले ही सभी किसानों का नुकसान हुआ हो या नहीं। जबकि दूसरी ओर अन्य तहसीलों के विभिन्न गांवों में नुकसान झेलने के बावजूद किसान बीमा के लाभ से वंचित हो जाते हैं। बीमा क्लेम के निर्धारण में तहसील की बजाय गांव को इकाई माने जाने की मांग किसान व किसान संघों की ओर से लम्बे समय से की जा रही है। लेकिन नतीजा सिफर है।

आंकड़ों की जुबानी

आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्ष 08-09 के दौरान जिले के 59 हजार 556 किसानों ने दो लाख 74 हजार 238 हैक्टेयर में खड़ी फसलों का बीमा करवाया तथा बीमाकर्ता कम्पनी को प्रीमियम के रूप में दो करोड़ 45 लाख 33 हजार 448 रुपए जमा करवाए। बदले में 20 हजार 538 किसानों को 12 करोड़ 42 लाख 51 हजार 6 57 रुपए बीमा क्लेम स्वीकृत हुआ है।

~~~~~~

कम्पनी ने तहसील को इकाई मानकर बीमा क्लेम स्वीकृत किया है। राशि जल्द ही किसानों के खाते में जमा करवा दी जाएगी। तहसील की बजाय गांव को इकाई माने जाने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।

-ओमप्रकाश सेन, प्रतिनिधि, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी

योजना के तहत फसल की कम से कम 16 अलग-अलग खेतों से क्रॉप कटिंग होती है। क्रॉप कटिंग के लिए खेतों का चयन औचक (रेंडमली) होता है। फिर पिछले पांच से दस साल तक के औसत उत्पादन से तुलना की जाती है। जिस तहसील का उत्पादन औसत से कम होता उसमें किसानों को बीमा क्लेम स्वीकृत किया जाता है। जिले में सुजानगढ़ व तारानगर तहसील के अलावा अन्य तहसीलों में उत्पादन औसत से कम नहीं रहा इसलिए इनके किसानों के लिए बीमा क्लेम स्वीकृत नहीं हो सका।-

भंवरसिंह राठौड़, उप निदेशक, कृषि विभाग, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:

चेतना के स्वर said...
gazzab dada lage raho congrats
November 9, 2009 7:37 PM

Monday, November 2, 2009

लाखों की रकम हजारों ने की हजम

उपभोक्ताओं पर एक करोड़ से अधिक बकाया
निगम लेगा रिकवरी एजेंटों की मदद
तीन हजार से अधिक डिफाल्टर घोषित
चूरू। पहले तो फोन पर जी भर कर बातें कर ली और जब बिल के भुगतान का समय आया तो मुकर गए। बिल की राशि ऎसे हजम कर ऎसी डकार ली कि निगम के बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद कान पर जूं नहीं रेंगी। भारत संचार निगम के साथ ऎसा व्यवहार करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या हजारों में है।सरकार के लाखों रूपयों चुकाने को लेकर नीयत में खोट रखने वाले इन उपभोक्ताओं से बकाया वसूलना अब टेढी खीर साबित हो रहा है। ऎसे में निगम ने निजी एजेंट की सेवा लेने की तैयारी करने के साथ ही कई उपभोक्ताओं के खिलाफ सिविल कोर्ट की शरण भी ली है।विभागीय जानकारी के मुताबिक वर्तमान में लगभग 18 हजार उपभोक्ताओं पर फोन के बिलों के रूप में एक करोड 6 लाख रूपए बकाया चल रहे हैं।
इसके अलावा मोबाइल (पोस्टपेड), लैण्ड लाइन व डब्ल्यूएलएल के तीन हजार 41 ऎसे उपभोक्ता हैं, जो डिफाल्टर घोषित किए जा चुके हैं। बकाया के चलते इनका कनेक्शन भी काट दिया गया है। इन पर 59 लाख 97 हजार 546 रूपए बकाया हैं, जिनकी प्राप्ति की उम्मीद काफी कम है।
नहीं बरतते सख्ती
बीएसएनएल सरकारी कम्पनी होने के कारण बकाया वसूलने में उपभोक्ताओं के साथ अन्य निजी कम्पनियों की तरह सख्ती नहीं बरत पाती है। निगम अघिकारी अपने स्तर पर बकाया वसूली का प्रयास करते आए हैं लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं निकले। अब एक निजी एजेंट की भी सेवा ली जाएगी। इसके लिए निगम ने हाल ही निविदा जारी की है।
कुल उपभोक्ता
सेवा-----------------धारक
मोबाइल(पोस्टपेड)--2000
लैण्डलाइन----------40,0०0
डब्ल्यूएलएल ------ 10,०००
कौन-कितना डिफाल्टर
सेवा--------------उपभोक्ता---बकाया राशि
लैण्ड लाइन-------1311 -------8,16,०२९
मोबाइल(पोस्टपेड) 214 --------3,27,928
डब्ल्यूएलएल----- 1514 --------8,53,५८९
कब से बकाया
समय--------- उपभोक्ता--------- राशि
3-6माह------671 --------------7,77,661
6-12माह----- 1244 ------------7,66,833
12-24माह---- 1126 ------------4,52,752
कोर्ट की शरण
आधिकारिक जानकारी के अनुसार बकाया नहीं चुकाने वाले कई उपभोक्ताओं के खिलाफ निगम ने हाल ही सिविल कोर्ट की शरण ली है। इसके अलावा लम्बे समय पर निगम की राशि पर कुण्डली मारे बैठे एसटीडी/पीसीओ धारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की भी तैयारी की जा रही है।
यहां के उपभोक्ता शामिल
जिला मुख्यालय स्थित भारत दूरसंचार निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक कार्यालय के अधीन चूरू जिला समेत बीकानेर जिले के डूंगरगढ़ तहसील के उपभोक्ता आते हैं।
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हजारों उपभोक्ता कई महिनों से बकाया राशि नहीं चुका रहे हैं। अब बकाया वसूली के प्रयास तेज कर दिए हैं। कुछ उपभोक्ताओं के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज करवाया है। इसके अलावा एक निजी एजेंट के लिए निविदा भी निकाली है।
-जसवीर सिंह त्यागी, महाप्रबंधक, बीएसएनएल, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:


2 टिप्पणियाँ:

परमजीत बाली said...
अच्छी जानकारी दी।आभार।
November 3, 2009 5:12 PM

RAJNISH PARIHAR said...
बकाया वसूल करने के लिए सब तरीके अपनाने ही होंगे..वरना अन्य सरकारी विभागों की भांति BSNL का भी भट्ठा बैठ जायेगा...
November 7, 2009 10:47 AM