चूरू, 26 फरवरी। ड्राईविंग लाइसेंस बनवाने के लिए अब चालक को सड़क सुरक्षा नियमों की पूरी जानकारी रखनी होगी। लर्निंग लाइसेंस बनाने की नई व्यवस्था के तहत जिला परिवहन कार्यालय में टच स्क्रीन मशीन आवेदक का सड़क सुरक्षा जानकारी का टेस्ट लेगी। टेस्ट में खरा उतरने वाले चालक को ही ट्रायल के बाद लाइसेंस जारी किया जा सकेगा। राज्य सरकार ने डीटीओ कार्यालय में टच स्क्रीन मशीन उपलब्ध करवा दी है। मार्च से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
देना होगा सही जबाव
टच स्क्रीन मशीन में सड़क सुरक्षा से संबंधित 100 सवाल फीड हैं। टेस्ट में टच स्क्रीन मशीन की स्क्रीन पर आवदेक के सामने एक-एक करके 15 सवाल उभरेंगे। 15 सवालों में से नौ का सही जवाब देने वाला आवेदक लाइसेंस लेने लायक समझा जाएगा। फेल घोषित किए गए आवेदक को लाइसेंस के लिए एक सप्ताह बाद दुबारा फीस जमा करवाकर टेस्ट उत्तीर्ण करना पड़ेगा।चार में से एक सहीटेस्ट में टच स्क्रीन मशीन की स्क्रीन पर प्रत्येक सवाल के साथ ही चार वैकल्पिक उत्तर भी प्रदर्शित होंगे। आवेदक को चार में से एक सही सवाल को टच करना होगा। करीब दस मिनट के टेस्ट के तुरंत बाद मशीन परिणाम घोषित कर देगी। टेस्ट के लिए मशीन में हिन्दी और अंग्रेजी भाषा की सुविधा उपलब्ध है। चालक अपनी सुविधानुसार भाषा का चयन कर सकेगा।
निरीक्षक नहीं लेंगे साक्षात्कार
टच स्क्रीन मशीन का टेस्ट उत्तीर्ण करने के बाद परिवहन विभाग के निरीक्षक आवेदक का साक्षात्कार नहीं लेंगे। फिलहाल आवेदक की सड़क सुरक्षा की जानकारी का स्तर परिवहन विभाग के निरीक्षक परखते हैं। जान-पहचान के चलते कई आवेदक एकाध सवालों का जवाब देकर लर्निंग लाइसेंस हथिया लेते हैं। टच स्क्रीन टेस्ट व्यवस्था शुरू होने के बाद आवेदक अब ऐसा नहीं कर सकेंगे। ये होंगे सवालटच स्क्रीन मशीन में साइन बोर्ड, इंडीकेटर, ट्रैफिक सिग्नल, जेब्रा व डिवाइडर लाइन, यातायात पुलिस, लाल, पीली और हरी लाइट समेत सड़क सुरक्षा से सम्बन्धित सौ सवालों की प्रश्नावली फीड की गई है।
इनका कहना...
लाइसेंस लेने वालों में यातायात नियमों की जानकारी का स्तर बढ़ाने के लिए टच स्क्रीन मशीन से टेस्ट लिया जाएगा। मशीन उपलब्ध हो गई है। मार्च से टेस्ट शुरू हो जाएगा।
-जीआर मेहरड़ा, जिला परिवहन अधिकारी, चूरू--विश्वनाथ सैनीआगे पढ़ें...
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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Sunday, February 22, 2009
सरकार बदली, योजनाएं अटकीं
वित्तीय स्वीकृति पर रोकराज बदलने के साथ ही जिले में भाजपा सरकार की ओर से शुरू की गई योजनाओं के क्रियान्वयन पर नई सरकार ने ब्रेक लगा दिए हैं। ऐसे में गांवों में विकास कार्य प्रभावित होने को हैं।चूरू, 22 फरवरी। सरकार बदलने से जिले में गुरु गोलवलकर जन भागीदारी विकास योजना एवं दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना के करीब पचास से अधिक गांवों में लाखों के विकास कार्य अटक गए हैं। प्रदेश की नई सरकार के भाजपा कार्यकाल में शुरू हुई इन योजनाओं को हाल ही बंद करने का निर्णय किए जाने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। गुरु गोलवलकर योजना में वर्ष 2008-09 के दौरान 69 कार्यो की प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी की गई। इनमें से 37 कार्यों को ही वित्तीय स्वीकृति मिली है। शेष 32 कार्यों की वित्तीय स्वीकृति पर रोक लगा दी गई है। उधर, वर्ष 2007-08 में दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना के लिए चयनित गांव चूरू तहसील के दूधवाखारा और सरदारशहर तहसील के पूलासर में करीब 15-15 लाख रुपए के विकास कार्यों की स्वीकृति अब जारी नहीं की जाएगी।लौटाने लगे पंजीयन शुल्कगुरु गोलवलकर योजना के प्रस्ताव के साथ पंजीयन शुल्क के रूप में जमा किए पांच-पांच हजार रुपए प्रशासन लौटाने लगा है। योजना बंद होने की भनक लगते ही ग्रामीण पंजीयन शुल्क लेने के जिला परिषद पहुंचने लगे हैं। योजना के तहत जिले को आवंटित किए गए 83.50 लाख के बजट में से 41.75 लाख रुपए अटक गए हैं।अटक गए ये कामअधिकारिक जानकारी के अनुसार सरदारशहर के सवाई बड़ी में गोशाला के चारदीवारी, थिरपाली बड़ी के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में बरामदा व एक भवन, चूरू के ढाढर में श्मशाम भूमि में विश्राम घर, राजगढ़ के रतनपुरा में सामुदायिक भवन व खेल मैदान के चारदीवारी, घणाऊ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान के चारदीवारी, सिद्धमुख में प्रवेश निर्माण, रतनगढ़ के गोगासर में सभा भवन का निर्माण, लाछड़सर के गोशाला में टिन शेड निर्माण, नोसरिया में सहकारी समिति के चारदीवारी, सुजानगढ़ के जोगलिया में सामुदायिक भवन निर्माण, सालासर के चांदपोल मंदिर के पास सीमेंट सड़क, ठठावता में धर्मशाला में दो कमरों का निर्माण, तारानगर के कालवास के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में दो भवन निर्माण समेत जिलेभर कुल 32 स्थानों के कार्य अटक गए हैं।
योजना के माध्यम से गांव में दो विश्राम घर व दो स्कूलों में हॉल का निर्माण करवाया जा चुका है। अब शमशान भूमि में विश्राम घर बनवाने चाहते थे। योजना बंद होने पर पंजीयन शुल्क लेने आए हैं।-चिमनाराम, ग्रामीण, ढाढर
जिन कार्यों की वित्तीय स्वीकृत जारी की जा चुकी है। उन्हें पूरा करवाया जाएगा। अन्य कार्यों की वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं की जा रही है। गुरु गोलवलकर योजना के पंजीयन शुल्क राशि लौटा रहे हैं।-बीआर डेलू, सीईओ, जिला परिषद, चूरू-----विश्वनाथ सैनी आगे पढ़ें...
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Saturday, February 21, 2009
थळी में चंग के रंग
कारीगरों ने शुरू की तैयारी
चूरू, 20 फरवरी। फिजा में बासंती बयार है...थळी में फाग की मस्ती छाने को है...चौक, गुवाड़ और गली-मोहल्लों में शाम को युवाओं की भीड़ जुटने लगी है...ऐसे में फाग प्रेमियों को मस्ती से सराबोर कर देने के लिए चंग बनाने वालों ने अपने काम की गति दे दी है।जिला मुख्यालय पर नरसिंह भवन के पीछे 12 महादेव के पास दो हजार से अधिक चंग तैयार करने का काम प्रगति पर है। 29साल से चंग बनाने में जुटे भागीरथ चंदेल ने बताया कि फाल्गुन से दो माह पहले चंग बनाने की तैयारी शुरू हो गई थी।शिवपंचमी के बाद से चंग की बिक्री शुरू होगी और महाशिवरात्रि के बाद इनकी बिक्री परवान चढ़ेगी। चंदेल ने बताया कि चूरू में ढाई सौ से लेकर साढ़े चार सौ रुपए तक के चंग उपलब्ध हैं। बीकानेर का प्लास्टिक से बना चंग करीब ढाई सौ रुपय में बेचा जा रहा है। चंग बनाने के लिए हरियाणा के रेवाड़ी जिले के कोसली गांव से बड़ी संख्या में घेरे मंगवाए गए हैं।पड़ौसी शहरों में भी मांगजिला मुख्यालय पर ऑर्डर पर चंग बनाए जा रहे हैं। चूरू समेत पड़ौसी जिलों के फतेहपुर, मंडावा, रामगढ़, लक्ष्मणगढ़, कोलिंडा, भादरा, बिसाऊ कस्बे से भी चंग की मांग है। चूरू में बनी चंग की सबसे अधिक खरीदारी तारानगर, सीकर के लक्ष्मणगढ़ व फतेहपुर तथा झुंझुनूं के मंडावा व बिसाऊ के फाग प्रेमी करते हैं।कम हो गया रुझानचंग बनाने से जुड़े लोगों की मानें तो शेखावाटी और थळी में चंग के शौकीन कम होते जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में चंग की मांग काफी कम हो गई है। अब अंचल में वह जमाना नहीं रहा जब फाग के रसिए होली से महीने भर पहले चंग थाम लेते थे। ग्रामीण क्षेत्र में होली से दस दिन पहले चंग की थाप सुनाई देती है। ऐसे बनता है चंगथळी में बकरा व भेड़ की खाल के चंग तैयार किए जाते हैं। खाल को नमक के पानी साफ कर आक के दूध में भिगो देते हैं। इससे खाल कड़क होकर आवाज करने लगती है। तैयार खाल को घेरे पर चढ़ा कर मैदा और गौंद की सहायता से चस्पा कर दी जाती है। करीब दो घंटे धूप में सूखाने के बाद चंग तैयार हो जाता है।विरासत में मिला हुनरबकौल भागीरथ चंदेल चंग बनाने का काम उन्हें विरासत में मिला है। चंदेल परिवार वर्षों से चंग बनाने में जुटा है। वर्षों गिरधारी लाल चंदेल और बिरजाराम चंदेल के बनाए चंग भी फाग प्रेमियों को खासे रास आते थे। वर्तमान में चंदेल परिवार के करीब 30 से अधिक महिला-पुरुष परंपरागत काम को जारी रखे हुए हैं।प्रस्तुति-विश्वनाथ सैनी आगे पढ़ें...
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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नरेगा की हालत भी खस्ता
काम पूरा, मजदूरी कम
चूरू 20 फरवरी। मेहनतकश लोगों की नैया पार लगाने वाली राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना (नरेगा) की जिले में हालत खस्ता है। योजना को लागू हुए एक वर्ष होने को है मगर अनियमितताएं इसका पीछा नहीं छोड़ रही हैं। आठ घंटे तक खून-पसीना एक करने के बावजूद कम मजदूरी मिलना श्रमिकों के लिए पीड़ादायी बना हुआ है। प्रशासन के पास उचित मजदूरी दिलाने की गुहार लगाते ज्ञापनों का अम्बार लग चुका है मगर प्रशासन ने अभी तक किसी भी कार्य पर मजदूरी का सत्यापन कराने की जहमत नहीं उठाई है। कागजों में सिमटी सुविधाएंयोजना के तहत श्रमिकों को मिलने वालीं सुविधाएं कागजों में सिमट गई हैं। नियमानुसार कार्यस्थल पर श्रमिकों के पांच वर्ष से छोटे बच्चों के लिए पालने की सुविधा होनी चाहिए मगर जिले में पालनों की खरीद निविदाओं में उलझ कर रह गई है। मौके पर टैंट और पेजयल सुविधाओं की स्थिति भी किसी छिपी नहीं। नियम ताक मेंजिला प्रशासन ने योजना के नियमों को ठेंगा दिखाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। आंकड़ों पर गौर करें तो गत दस माह में योजना के नियमों को ताक में रख 33 हजार 366 श्रमिकों को मजदूरी का नकद भुगतान किया गया। नकद भुगतान में श्रमिकों के साथ अन्याय की गुंजाइश रहती है। जिले में योजना के तहत एक लाख 63 हजार 624 लोगों को रोजगार मिला है। इनमें से एक लाख 30 हजार 258 श्रमिकों के ही बैंक व डाकघर में खाते खोले गए हैं। योजना के नियमों में स्पष्ट उल्लेख है कि श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान बैंक व डाकघर खाते के माध्यम से ही किया जाना है।मजदूरी 17 रुपएतारानगर के राजपुरा के हिमताणा जोहड़ पर खुदाई में लगे श्रमिकों को फरवरी में 17 रुपए प्रतिदिन मजदूरी मिली है। श्रमिकों ने मजदूरी लेने से इनकार कर विरोध में पंचायत समिति कार्यालय पहुंचकर जेईएन का घेराव किया। इससे पहले सुजानगढ़ के गांवों में श्रमिकों को दस रुपए से भी कम मजदूरी का भुगतान किए जाने की शिकायतें मिली थी।श्रमिक बेराजगारवर्ष 2008-09 की स्वीकृत कार्य पूरे होने से सरदारशहर तहसील के पिचकराई ताल में 15 फरवरी से नरेगा कार्य बंद। ऐसे में सैकड़ों लोग बेरोजगार हो गए। नरेगा कार्य शुरू करवाने के लिए ग्रामीण पंचायत समिति मुख्यालय पर धरना देने की चेतावनी दी है।फैक्ट फाइल-8 हजार 392 कार्यों के प्रस्ताव मिले-1 हजार 313 कार्य पूरे-2 हजार 45 कार्य जारी-5 हजार 34 काम नहीं हुए शुरू-2 लाख 20 हजार 200 बने जॉबकार्ड-10 माह में 382 से अधिक शिकायत-33 हजार 366 श्रमिकों का नहीं खुला खाता-32 हजार 833 श्रमिक हुए बेरोजगारआगे पढ़ें...
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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लेबल: मिले रोजगार तो बदले तस्वीर-2
Thursday, February 19, 2009
खेती नहीं फायदे का सौदा
थळी अंचल में मेहनतकश लोगों की कमी नहीं है मगर रोजगार के साधन अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं। उपलब्ध रोजगार के साधनों में से अधिकांश की स्थिति दयनीय है। ऐसे में जिले की आबादी के एक बड़े हिस्से के सामने पेट भरने का संकट उत्पन्न हो गया है। समस्या के प्रति न सरकार गंभीर है ना ही जनप्रतिनिधि। रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण कृषि, उद्योग, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना व पलायन की राह में आ रही समस्याओं को उजागर करती समाचार श्रंखला की पहली रिपोर्ट।न अधिकारी चिन्तित ना राजनेताओं को परवाहविश्वनाथ सैनीचूरू, 19 फरवरी। जिले का कृषि क्षेत्र लोगों को रोजगार मुहैया करवाने में नाकारा साबित हो रहा है। करीब 13 लाख से अधिक हैक्टेयर में फैले कृषि क्षेत्र में जहां भौगोलिक परिस्थितियां लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर रही हैं वहीं सरकार की अनदेखी भी इस क्षेत्र को रोजगार विहीन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। स्टाफ के नाम पर गिनती के कर्मचारियों की बदौलत कृषि विभाग चाहकर भी किसानों का मददगार नहीं बन पा रहा है। स्टाफ की कमी के चलते अधिकांश योजनाएं विभाग की फाइलों से ही बाहर नहीं निकल पाती हैं। ऐसे में ना तो किसानों को खेतों में योजना का लाभ मिल पाता और ना ही लोगों को रोजगार उपलब्ध हो पा रहा। जिले के करीब ढाई लाख से अधिक किसानों के सामने कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति अखरने वाली है। विभाग को दरकारकृषि अधिकारियों के अनुसार जिले में करीब 27 सहायक कृषि अधिकारी, 180 कृषि पर्यवेक्षक व कम से कम प्रत्येक पंचायत समिति सहायक निदेशक (कृषि विस्तार) की दरकार है। जिले में सहायक कृषि अधिकारी के पांच पद स्वीकृत हैं। फिलहाल सभी पद खाली हैं। कृषि पर्यवेक्षक के स्वीकृति नौ पदों में तीन खाली चल रहे हैं। पडौसी जिले श्रीगंगानगर, नागौर, झुंझुनूं, सीकर, हनुमानगढ़ के कृषि स्टाफ की तुलना में चूरू जिले में स्टाफ की स्थिति ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।उम्मीदों पर पानीजिले की भौगोलिक परिस्थितियां भी कृषि क्षेत्र में रोजगार की दृष्टि से अनुकूल नहीं है। कृषि से रोजगार मिलने की संभावना पर पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि के बाद एक बड़े क्षेत्र में पूरी तरह पानी फिर चुका है। प्रतिकूल मौसम के चलते कड़ाके की सर्दी और झुलसा देने वाली गर्मी भी प्राय: प्रतिवर्ष किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। अंचल में गर्मियों में अधिकतम तापमान 50 तथा सर्दियों में न्यूनतम तापमान शून्य से 4.6 डिग्री सैल्शियस नीचे तक रिकॉर्ड किया गया है। हाल ही में ओलावृष्टि से रबी की अधिकांश फसलें तबाह हो गई हैं। जिले के अकेले राजगढ़ इलाके के 21 गांवों में 75 फीसदी तक नुकसान आंका गया है।-- फैक्ट फाइल--> कृषि भूमि-13 लाख 85 हजार हैक्टेयर> सिंचित-85 हजार हैक्टेयर> असिंचित-13 लाख हैक्टेयर> कुल किसान-ढाई लाख से अधिक>कृषि तकनीकी स्टाफ-12 व्यक्ति____स्टाफ बढऩे से सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक तत्काल पहुंचाने में मदद मिलेगी साथ ही योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित भी किया जा सकेगा। ऐसे में निश्चित रूप से जिले के कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।-भंवरसिंह राठौड़, उपनिदेशक, कृषि विभाग, चूरू आगे पढ़ें...
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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लेबल: मिले रोजगार तो बदले तस्वीर-1
पानी न बन जाए कहानी
विश्व भू-जल दिवस आजभू-जल का अत्यधिक दोहन व पानी बचाने के प्रति जागरूकता के अभाव के कारण जिले का भू-जल स्तर रसातल में जा चुका है। स्थिति ये है कि भू-जल स्तर के लगातार गिरने से पीने योग्य पानी रासायनिक गुणवत्ता की कसौटी पर खरा नहीं उतर रहा है। बरसात के पानी की बूंद-बूंद नहीं बचाई गई तो वो दिन दूर नहीं जब जिलेवासी पीने के पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो जाएंगे। चूरू, 9 जूनपानी के अंधाधुंध दोहन के चलते जिले में भू-जल स्तर में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है जिससे कुओं की जल देय क्षमता पर विपरीत असर पड़ा है। भू-जल विभाग के सर्वे के मुताबिक जिले में भू-जल दोहन में राजगढ़ तहसील की स्थिति सबसे खतरनाक है। भू-जल दोहन में चूरू, सरदारशहर व रतनगढ़ तहसील की स्थिति वर्ष 2006 में वर्षा पूर्व हुए सर्वे के मुताबिक तो संतोषजनक है। पानी के संरक्षण व अनावश्यक दोहन के प्रति जागरूकता नहीं आई तो जिले में पानी एक दिन कहानी बनकर रह जाएगा।कारण- बढ़ती जनसंख्या- अनियंत्रित दोहन- बारिश कम होना- जल की अधिक खपत वाली फसलों का उत्पादन- परम्परात जल स्रोत पर ध्यान नहींसमस्याएं- भू-जल स्तर रसातल में जाएगा- भू-जल संसाधनों में कमी- सूख जाएंगे कुएं-बावड़ी- भू-जल की गुणवत्ता में गिरावट- भू-जल दोहन के लिए ऊर्जा की अधिक खपतउपाय- जल संरक्षण के परम्परागत स्रोतों की सुध लें- बारिश के पानी की बूंद-बूंद बचाएं- पानी का व्यर्थ उपयोग न हो- सिंचाई में आधुनिक तकनीक का उपयोग- कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावाऐसे घटा भू-जल स्तरतहसील पुनर्भरण---उपलब्धता--- दोहनराजगढ़ 6.4------5.7------ 25.2सुजानगढ़ 37.16---33.44---- 32.56 रतनगढ़ 26.93----24.90---- 14.57सरदारशहर62.26---56.04---- 16.18 चूरू----9.79-----8.81-----7.82(आंकड़े भू-जल सम्भावित क्षेत्रों में वार्षिक पुनर्भरण और दोहन से संबंधित हैं। सभी आंकड़े एमसीएम इकाई में हैं)गांवों में स्थिति खतरनाकजिले की प्रत्येक तहसील में कुछ गांवों में भू-जल स्तर गिरने की स्थिति खतरनाक है। भू-जल स्तर में अधिक गिरावट वाले गांवों में कुओं की जलदेय क्षमता भी कम होती जा रही है।तहसील---गांव----स्तर गिराचूरू-----41-----0.33 मीटरराजगढ़---38----1.06 मीटरसुजानगढ़--21----2.36 मीटररतनगढ़--35-----0.42 मीटरसरदारशहर--06---1.42 मीटर(आंकड़े 2005 से 2006 की अवधि में ऐसे गांवों के हैं जिनमें सबसे अधिक मीटर भू-जल स्तर गिरा है। )कहां-कितनी गिरावटवर्ष 1984 से 2006 की अवधि में चूरू तहसील के भू-जल स्तर में 0.13 मीटर, सुजानगढ़ तहसील में 4.08, राजगढ़ तहसील में 4.18 व रतनगढ़ में 2.10 मीटर औसत गिरावट दर्ज की गई है। इस अवधि में तारानगर तहसील में भू-जल स्तर बढ़ा है। तारानगर तहसील का अधिकांश भू-जल लवणीय होने के कारण दोहन की दर लगभग शून्य है।इनका कहना...निश्चित रूप से जिले में भू-जल स्तर की स्थिति चिंताजनक है। हर साल जिले में भू-जल स्तर गिरता जा रहा है। पानी के संरक्षण को बढ़ावा नहीं दिया गया तो कुछ सालों में स्थिति ज्यादा खतरनाक हो सकती है।- लक्ष्मण सिंह राठौड़, भू-जल वैज्ञानिक, चूरू---विश्वनाथ सैनीआगे पढ़ें...
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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Saturday, February 14, 2009
धरती पुत्रों को मिलेगी कृषक रत्न उपाघि
चूरू। सोना उगाने वाले प्रदेश के किसानों को राज्य सरकार ने तीन प्रकार की उपाघि से अलंकृत करने की तैयारी शुरू कर दी है। एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी (आत्मा) के माध्यम से किसानों को नकद पुरस्कार के साथ-साथ कृषक रत्न, कृषक श्री और कृषक मित्र की उपाघि से नवाजा जाएगा।कृषि निदेशालय ने जिले से सम्मानित होने योग्य किसानों की सूची मांगी है। सूची के आधार पर प्रदेश के तीन किसानों को कृषक रत्न, प्रत्येक जिले के तीन किसानों को कृषक श्री और प्रदेश की प्रत्येक पंचायत समिति के तीन किसानों को कृषक मित्र की उपाघि से सम्मानित किया जाएगा।समिति करेगी चयनजिला आत्मा प्रबंधन समिति प्रत्येक पंचायत समिति में चार-चार किसानों का पुरस्कार के लिए चयन करेगी। चयन में जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पूर्व में सम्मानित हो चुके किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित सूची का जिला कलक्टर एवं जिला प्रमुख से अनुमोदन करवाकर एक किसान का नाम कृषि निदेशालय को राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए भेजा जाएगा। कृषक रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाले किसान के अलावा पुरस्कार के लिए जिले के शेष किसानों के नामों की घोषणा जिला स्तर पर की जाएगी।विशेष दक्षता जरूरीपुरस्कार की दौड में शामिल होने के लिए किसानों का कृषि, उद्यान, डेयरी व पशुपालन में से किसी एक में दक्ष होना जरूरी है। कृषि क्षेत्र से खेती के 21 मूलमंत्रों की पालना करते हुए गुणवत्तायुक्त उत्पादन लेने वाले, उद्यान क्षेत्र से हाइटेक उद्यानिकी व माइक्रो इरिगेशन से सिंचाई तथा पशुपालन क्षेत्र से उन्नत नस्ल के पशु रखने, पशुओं के नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार, कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष्ा ध्यान देने वाले किसानों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।अघिक अंक वाला होगा हकदारपुरस्कार का हकदार वही किसान होगा जो चयन प्रक्रिया में शामिल किसानों में सबसे अघिक अंक हासिल करेगा। प्रत्येक किसान को कुल उत्पादन के 20 अंक, उत्पादन की गुणवत्ता के 20 अंक, आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल करने के 40 अंक तथा नवाचार के 20 अंक दिए जाएंगे।पुरस्कार की राशिकृषक रत्न, कृषक श्री और कृषक मित्र प्राप्त करने वाले प्रत्येक किसान को प्रशस्ति पत्र के साथ क्रमश: 21, 11 व पांच हजार का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।किसानों को उपाधि से अलंकृत करने की इस अनूठी योजना के तहत आत्मा के परियोजना निदेशकों को मार्च तक किसानों की सूची भेजने के निर्देश दिए हैं। सूची प्राप्त होने के बाद सम्मान समारोह की तिथि तय की जाएगी।-हरवंश यादव, अतिरिक्त निदेशक (कृषि विस्तार), कृषि निदेशालय, जयपुरयोजना से किसान प्रोत्साहित होंगे। कृषि निदेशालय के निर्देश पर पंचायत समितिवार किसानों की सूची तैयार की जा रही है।-हरजीराम बारूपाल, परियोजना निदेशक, आत्मा, चूरूआगे पढ़ें...
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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Friday, February 6, 2009
विद्यार्थी होंगे फेल, कौन कसेगा नकेल !
चूरू। जिले के ढाई सौ से अघिक सरकारी विद्यालयों में व्यवस्थाएं नियंत्रण से बाहर है। संस्था प्रधान की कुर्सी खाली होने के कारण इनमें विद्यार्थियों की पढाई और शिक्षकों के आने-जाने पर नियंत्रण नहीं है। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों की तुलना में उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति ज्यादा खराब है। संस्था प्रधान के खाली पदों की लम्बी फेहरिस्त आठवीं तक के विद्यालयों में है। शिक्षा विभाग के आंकडों की मानें तो जिले के 767 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 217 व तीन सौ नौ माध्यमिक विद्यालयों में से दस तथा एक सौ सात उच्च माध्यमिक विद्यालयों में से 26 में संस्था प्रधान नहीं है।आसान नहीं नियंत्रण रखनाआठवीं तक के विद्यालयों में संस्था प्रधान की जिम्मेदारी तृतीय श्रेणी के सीनियर शिक्षक को सौंपी जाती है। अस्थायी तौर पर हैडमास्टर बने तृतीय श्रेणी शिक्षक के लिए समान गे्रड के अन्य शिक्षकों पर नियंत्रण रखा पाना आसान नहीं है।वित्तीय मामलों में भी देरीमाध्यमिक विद्यालयों में संस्था प्रधान का पद रिक्त होने के कारण प्रशासनिक जिम्मेदारी द्वितीय श्रेणी शिक्षक एवं वित्तीय अघिकार जिला शिक्षा अघिकारी को सौंपे जाते हैं। उच्च माध्यमिक विद्यालयों में वित्तीय अघिकार सीनियर व्याख्याता को सौंपने की प्रक्रिया में दो माह से अघिक समय लग जाता है। ऎसे में बिना संस्था प्रधान वाले विद्यालयों के वित्तीय मामलों में अक्सर देरी हो जाती है।माध्यमिक विद्यालयजिले में माध्यमिक स्तर तक के 309 विद्यालय हैं। इनमें से मंदीताल, साण्डवा, ईयारा, सारसर, पांचेरा, बरजांगसर, पिचकराईताल, लुहारा, न्यांगल छोटी और बूंटिया के विद्यालय में संस्था प्रधान का पद खाली है।उ.मा. विद्यालयजिले में उच्च माध्यमिक स्तर के 107 विद्यालय हैं। इनमें सिधमुख, सरदारशहर, मालकसर, सुजानगढ, बालरासर आथूना, भामासी, जोडी, रतनगढ, पडिहारा, बीरमसर, जयसंगसर, राघाबडी, हरासर, सिरसला, धीरवासबडा, भगेला, लाखाऊ, मेणासर, पाबूसर, सोनपालसर, भींवसर, चक राजियासर मीठा, खण्डवा, बंधानाऊ, नुहंद व रेडी भूरावास विद्यालय में संस्था प्रधान नहीं है।घर का मालिक नहीं होगा तो व्यवस्था तो गडबडाएगी ही। सेवानिवृति व तबादले के कारण कई स्कूलों में संस्था प्रधान का पद रिक्त है।
-गजेन्द्र सिंह शेखावत, जिला शिक्षा अघिकारी (माध्यमिक), चूरू
अनेक स्कूलों की यह मुख्य समस्या है। हम वर्षों से इसका सामना कर रहे हैं। निदेशालय ने संस्था प्रधान की समस्त जिम्मेदारी बीईईओ को सौंप रखी है।
-हरनारायण, जिला शिक्षा अघिकारी (प्रारम्भिक), चूरूआगे पढ़ें...
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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Wednesday, February 10, 2010
दफन न हो जाए विरासत
बजट 'ऊंट के मुंह में जीरा' होने के कारण यहां के ऐतिहासिक स्थल बदहाल हैं।
चूरू, 13 अप्रेल। संरक्षण के अभाव में थळी की विरासत धोरों में दफन होने के कगार पर है। जिला मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित रतननगर कस्बे के ऐतिहासिक स्थल वैभव खो चुके हैं।विरासत संरक्षण योजना का बजट 'ऊंट के मुंह में जीरा' होने के कारण यहां के ऐतिहासिक स्थल बदहाल हैं। संरक्षण योजना के लिए रतननगर नगरपालिका ने 2006-07 में 95.84 लाख, 2007-08 में 92.47 लाख तथा 2008-09 में 79.80 लाख रुपए का प्रस्ताव स्थानीय निकाय निदेशालय जयपुर को लगातार भेजा लेकिन अभी तक फूटी कौड़ी भी मिली। पालिका को योजना शुरू होने के बाद 2005-06 में जरूर 27 लाख रुपए मिले। इस राशि का अधिकांश हिस्सा नगरपालिका ने अन्य मदों पर खर्च कर दिया।इन कामों का इंतजारयोजना के तहत बकाया कामों की फेहरिस्त लम्बी है। बजट के अभाव में गौरव पथ व थैलासर-रतननगर सीमा पर हैरिटेज दरवाजे, शहर पन्ना परकोटे की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, औंकारगिरि आश्रम के पास व देपालसर तिराहे पर सर्किल, अम्बेडकर सर्किल से औंकारगिरि आश्रम तक सौन्दर्यीकरण, लक्ष्मीनारायण मंदिर की मरम्मत होनी है।
इसलिए है खास
विरासत संरक्षण योजना में चूरू के साथ शामिल रतननगर कस्बा कलात्मक हवेलियों और उनके भित्ति चित्रों के कारण खास है। यहां पर पर्यटक प्रयागनाथ व औंकारनाथ गिरि आश्रम, ऐतिहासिक गाड़ोदिया छतरी, द्वारकाधीश व रघुनाथ मंदिर, शहर पन्ना परकोटा व हवेलियों को निहारते हैं।
----बजट आवंटित नहीं होने के कारण विरासत संरक्षण योजना से कस्बा लाभान्वित नहीं हो पा रहा है। बजट मिलते ही बकाया कामों को प्राथमिकता से करवाया जाएगा।
- सत्यनारायण सैनी, अध्यक्ष, नगरपालिका, रतननगर
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:
लेबल: संरक्षण की दरकार-2
चूरू, 13 अप्रेल। संरक्षण के अभाव में थळी की विरासत धोरों में दफन होने के कगार पर है। जिला मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित रतननगर कस्बे के ऐतिहासिक स्थल वैभव खो चुके हैं।विरासत संरक्षण योजना का बजट 'ऊंट के मुंह में जीरा' होने के कारण यहां के ऐतिहासिक स्थल बदहाल हैं। संरक्षण योजना के लिए रतननगर नगरपालिका ने 2006-07 में 95.84 लाख, 2007-08 में 92.47 लाख तथा 2008-09 में 79.80 लाख रुपए का प्रस्ताव स्थानीय निकाय निदेशालय जयपुर को लगातार भेजा लेकिन अभी तक फूटी कौड़ी भी मिली। पालिका को योजना शुरू होने के बाद 2005-06 में जरूर 27 लाख रुपए मिले। इस राशि का अधिकांश हिस्सा नगरपालिका ने अन्य मदों पर खर्च कर दिया।इन कामों का इंतजारयोजना के तहत बकाया कामों की फेहरिस्त लम्बी है। बजट के अभाव में गौरव पथ व थैलासर-रतननगर सीमा पर हैरिटेज दरवाजे, शहर पन्ना परकोटे की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, औंकारगिरि आश्रम के पास व देपालसर तिराहे पर सर्किल, अम्बेडकर सर्किल से औंकारगिरि आश्रम तक सौन्दर्यीकरण, लक्ष्मीनारायण मंदिर की मरम्मत होनी है।
इसलिए है खास
विरासत संरक्षण योजना में चूरू के साथ शामिल रतननगर कस्बा कलात्मक हवेलियों और उनके भित्ति चित्रों के कारण खास है। यहां पर पर्यटक प्रयागनाथ व औंकारनाथ गिरि आश्रम, ऐतिहासिक गाड़ोदिया छतरी, द्वारकाधीश व रघुनाथ मंदिर, शहर पन्ना परकोटा व हवेलियों को निहारते हैं।
----बजट आवंटित नहीं होने के कारण विरासत संरक्षण योजना से कस्बा लाभान्वित नहीं हो पा रहा है। बजट मिलते ही बकाया कामों को प्राथमिकता से करवाया जाएगा।
- सत्यनारायण सैनी, अध्यक्ष, नगरपालिका, रतननगर
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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लेबल: संरक्षण की दरकार-2
रेडियो बनेगा किसानों का साथी
जिलों में स्थापित होगें कम्युनिटी रेडियो स्टेशन
भीलवाड़ा का प्रस्ताव मंजूर
चूरू, 1 जनवरी। खेती से जुड़ी तमाम जानकारियों के लिए कृषि विभाग के साथ अब रेडियो भी किसानों का मददगार बनेगा। किसानों को घर बैठे खेती की जानकारी उपलब्ध कराने की एक अनूठी योजना पर काम शुरू हो गया है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो जल्द ही प्रदेश के सभी किसान कम्यूनिटी रेडियो के माध्यम से अपने जिले की खेती की समस्त जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे। एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी (आत्मा) की कैफेटेरिया गतिविधि डी-2 के तहत प्रदेश के 32 जिलों में कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन स्थापित किया जाएगा।आत्मा की नोडल एजेंसी ने परियोजना निदेशकों को कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन स्थापना संबंधी दिशा-निर्देश भेजकर प्रस्ताव मांगे है। नोडल एजेंसी के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों से कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन स्थापना के लिए प्रस्ताव आने शुरू हो गए हैं। अधिकांश रेडियो स्टेशन कृषि विज्ञान केन्द्रों में स्थापित किए जाएंगे। भीलवाड़ा के कृषि विज्ञान केन्द्र में कम्यूनिटी रेडियो स्थापित करने के प्रस्ताव को भारत सरकार की मंजूरी मिल गई है। करौली जिले का प्रस्ताव भी भारत सरकार का भेजा जा चुका है। प्रदेश के शेष जिलों के प्रस्ताव प्रारम्भिक चरण में हैं।
सीमित होगा दायरा
कम्यूनिटी रेडियो की फ्रिक्वेंसी का दायरा जिला स्तर तक ही सीमित होगा। रेडियो स्थापना के प्रस्ताव में शामिल स्थानों में से जिले के बीचों बीच स्थित स्थान को प्राथमिकता दी जा रही है। किसान अपने जिले में कहीं पर भी रेडियो के माध्यम से कृषि की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
ये जानकारी होंगी हासिल
कम्यूनिटी रेडियो के माध्यम से किसानों को फसलों की बुवाई से लेकर कटाई और मण्डियों में बेचने तक की तमाम जानकारी हासिल हो सकेंगी। इसके लिए कृषि विशेषज्ञों एवं प्रगतिशील किसानों को समय-समय पर रेडियो स्टेशन पर आमंत्रित किया जाएगा।फसलों की पैदावार बढ़ाने, समय के हिसाब फसलों की देखभाल, फसलों के कीट प्रबंधन विशेष जोर दिया जाएगा। इनके अलावा किसानों को घर बैठे-बैठे जिले के प्रगतिशील किसानों की सफलता की कहानी खुद उन्हीं की जुबानी सुनने को मिलेगी।
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भीलवाड़ा के केवीके में कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। करौली का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। अन्य जिलों से भी प्रस्ताव मांगे हैं।
-केपी गुप्ता, नोडल प्रभारी, आत्मा सेल, जयपुर-
जिला मुख्यालय पर कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन की स्थापना पर विचार किया जा रहा है। जनवरी में परियोजना के बोर्ड की जगह में स्थान तय प्रस्ताव नोडल एजेंसी को भेजेंगे।
-डा. हरजीराम बारुपाल, परियोजना निदेशक आत्मा, चूरूआगे पढ़ें...
जी का जंजाल बना परिवार नियोजन
चूरू।छोटा परिवार-सुखी परिवार की नसीहत देने वाले परिवार नियोजन कार्यक्रम ने जिले में कई परिवारों को दुखी कर दिया है। कार्यक्रम के तहत शिविरों में नसबंदी करवाने वाले महिला व पुरूषों को शिविर के दौरान चिकित्सा विभाग द्वारा बरती गई लापरवाही का खामियाजा भुगतना पडा है।गत दो वर्ष के आंकडों पर गौर करें तो चूरू जिले में ऎसे परिवारों की संख्या करीब 64 है जिन्हें नसबंदी ऑपरेशन विफल हो जाने के कारण मानसिक परेशानी भगुतनी पडी है। नसबंदी ऑपरेशन विफल होने पर हाल ही 20 महिलाओं को मुआवजा राशि के रूप में तीस-तीस हजार रूपए के चेक वितरित किए गए हैं मगर जिले के 24 परिवारों को अभी मुआवजे का इंतजार है।
बढा विफलता का ग्राफ
कार्यक्रम के तहत वर्ष 2006-07 के दौरान लगभग आठ हजार एक नसबंदी ऑपरेशन किए गए। इनमें से 20 ऑपरेशन विफल हो गए। वर्ष 2007-08 में आठ हजार 307 महिला/पुरूषों का नसबंदी ऑपरेशन किया गया। इनमें विफल ऑपरेशन का आंकडा 44 रहा। इनमें तीन पुरूष भी शामिल हैं।फिर पति की बारीजिले में अघिकांश ऑपरेशन दूरबीन की सहायता से किए गए हैं। महिला का नसबंदी ऑपरेशन विफल होने पर दूरबीन से दुबारा ऑपरेशन करना लगभग संभव नहीं है। ऎसे में महिला को या तो सर्जरी से ऑपरेशन करवाना पडता या फिर उसके पति को ऑपरेशन के लिए आगे आना पडता है।
ऎसे होते हैं प्रोत्साहित
कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन करवाने पर सरकार की ओर से संबंघित महिला को 600 तथा पुरूष को 1100 रूपए दिए जाते हैं। महिला को ऑपरेशन के लिए प्रेरित करने वाले को 150 तथा पुरूष को प्रेरित करने वाले को 200 रूपए दिए जाते हैं। ऑपरेशन विफल होने पर बीमा कम्पनी की ओर से एक ही बार मुआवजा दिया जाता है।
इनका कहना...
जिले में नसबंदी के 0।6 से 2 प्रतिशत तक ऑपरेशन विफल होते हैं। पीडित परिवार को बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाता है। शेष रहे 24 परिवारों को आगामी दो माह में मुआवजे का भुगतान हो जाएगा।
प्रशांत खत्री, उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अघिकारी, चूरू
कोष पर अफसरों की कुंडली
सशस्त्र सेना झंडा दिवस के स्टीकरों के लाखों रूपये बकाया
चूरू, 15 जनवरी। देश की आन, बान और शान के लिए जान की बाजी लगाने वाले सपूतों के परिवार और उनके आश्रितों के कल्याण की राशि पर शेखावाटी के अफसर कुंडली मारे बैठे हैं। देश को सबसे अघिक फौजी देने वाले शेखावाटी में अघिकारियों की लापरवाही के चलते चूरू, सीकर, झुंझुनूं , नीमकाथाना और चिडावा सैनिक कल्याण कार्यालय का लक्ष्य प्रतिवर्ष अधूरा रह जाता है। अंचल के घिकांश विभाग सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के स्टीकरों की धनराशि एकत्रित करने के प्रति गंभीर नहीं हैं।
वितरित करने होते हैं स्टीकर
सैनिक कल्याण कार्यालय की ओर से विभिन्न विभाग और संस्थाओं को सशस्त्र सेना झण्डा दिवस (7 दिसम्बर) के स्टीकर उपलब्ध करवाए जाते हैं। विभाग को जन समूह में स्टीकरों का वितरण कर धनराशि एकत्रित करनी होती है। स्टीकर शर्ट की जेब व वाहनों पर चस्पा किए जाते हैं। स्टीकरों के बदले एकत्रित की गई धनराशि सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से अमल गमैटेड फण्ड में भेजी जाती है। सैनिक परिवार एवं उनके आश्रितों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं में इस राशि का उपयोग किया जाता है।
12 साल से नहीं ली
चूरू और सुजानगढ केतहसीलदारों पर स्टीकरों की राशि 1996 से बकाया है। इनके अलावा सार्वजनिक निर्माण विभाग के अघिशाषी अभियंता, जोधपुर विद्युत वितरण निगम के सहायक व अघिशाषी अभियंता, समाज कल्याण अघिकारी, एसपी कार्यालय, सीएसडी कैंटीन, सरदारशहर बीईईओ व चूरू, माध्यमिक के डीडी, आपणी योजना, सभी नगरपालिकाएं, तहसीलदार, विकास अघिकारी, उपपंजीयक अघिकारी पर 1996 से 2007 तक के 1 लाख 73 हजार 8 91 रूपए बकाया हैं।
दो साल के 70 हजार बकाया
नीमकाथाना सैनिक कल्याण कार्यालय में दो साल से तीन तहसीलों के विभिन्न विभाग एवं अघिकारियों पर लगभग 70 हजार रूपए बकाया हैं। इनमें श्रीमाधोपुर आगार प्रबंधक के 5 हजार, तहसीलदार के दस हजार, तीनों तहसीलों के विकास अघिकारियों के 41 हजार 6 00, श्रीमाधोपुर व नीमकाथाना विकास अघिकारी के 11 हजार 200 रूपए शामिल हैं।
नहीं चुकाए लाखों रूपए
चिडावा सैनिक कल्याण कार्यालय में चार तहसीलोे के थानाघिकारियों, एसडीएम, तहसीलदार व बीडीओ व कुछ महाविद्यालयों पर 2004 से पहले के 6 3 हजार 127 रूपए, 2005 के 56 हजार 540 रूपए, 2006 के 1 लाख 75 हजार 125 रूपए तथा 2007 के एक लाख 6 4 हजार 26 5 रूपए बकाया हैं। चिडावा में अक्टूबर 2004 से सैनिक कल्याण कार्यालय खोला गया था।
बताने को तैयार नहीं
अफसोस की बात है कि खुद फौज में रह चुके सीकर और झुंझुनूं सैनिक कल्याण अघिकारी झण्डा दिवस के स्टीकरों की बकाया राशि नहीं चुकाने वाले विभागों का नाम बताने से भी कतराते हैं। जबकि दोनों ही अघिकारी स्वीकार करते हैं कि उनके जिले में भी अघिकारियों पर स्टीकरों के लाखों रूपए बकाया हैं।
इनका कहना है...
.सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के स्टीकरों की राशि करीब तीस विभागों पर बकाया है। कई विभागों के सहयोग के अभाव में सैनिक कल्याण कार्यालय का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है।-मेजर रामकुमार कस्वां, जिला सैनिक कल्याण अघिकारी, प्रतिक्रियाएँ: 6 टिप्पणियाँ इस संदेश के लिए लिंक
चूरू, 15 जनवरी। देश की आन, बान और शान के लिए जान की बाजी लगाने वाले सपूतों के परिवार और उनके आश्रितों के कल्याण की राशि पर शेखावाटी के अफसर कुंडली मारे बैठे हैं। देश को सबसे अघिक फौजी देने वाले शेखावाटी में अघिकारियों की लापरवाही के चलते चूरू, सीकर, झुंझुनूं , नीमकाथाना और चिडावा सैनिक कल्याण कार्यालय का लक्ष्य प्रतिवर्ष अधूरा रह जाता है। अंचल के घिकांश विभाग सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के स्टीकरों की धनराशि एकत्रित करने के प्रति गंभीर नहीं हैं।
वितरित करने होते हैं स्टीकर
सैनिक कल्याण कार्यालय की ओर से विभिन्न विभाग और संस्थाओं को सशस्त्र सेना झण्डा दिवस (7 दिसम्बर) के स्टीकर उपलब्ध करवाए जाते हैं। विभाग को जन समूह में स्टीकरों का वितरण कर धनराशि एकत्रित करनी होती है। स्टीकर शर्ट की जेब व वाहनों पर चस्पा किए जाते हैं। स्टीकरों के बदले एकत्रित की गई धनराशि सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से अमल गमैटेड फण्ड में भेजी जाती है। सैनिक परिवार एवं उनके आश्रितों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं में इस राशि का उपयोग किया जाता है।
12 साल से नहीं ली
चूरू और सुजानगढ केतहसीलदारों पर स्टीकरों की राशि 1996 से बकाया है। इनके अलावा सार्वजनिक निर्माण विभाग के अघिशाषी अभियंता, जोधपुर विद्युत वितरण निगम के सहायक व अघिशाषी अभियंता, समाज कल्याण अघिकारी, एसपी कार्यालय, सीएसडी कैंटीन, सरदारशहर बीईईओ व चूरू, माध्यमिक के डीडी, आपणी योजना, सभी नगरपालिकाएं, तहसीलदार, विकास अघिकारी, उपपंजीयक अघिकारी पर 1996 से 2007 तक के 1 लाख 73 हजार 8 91 रूपए बकाया हैं।
दो साल के 70 हजार बकाया
नीमकाथाना सैनिक कल्याण कार्यालय में दो साल से तीन तहसीलों के विभिन्न विभाग एवं अघिकारियों पर लगभग 70 हजार रूपए बकाया हैं। इनमें श्रीमाधोपुर आगार प्रबंधक के 5 हजार, तहसीलदार के दस हजार, तीनों तहसीलों के विकास अघिकारियों के 41 हजार 6 00, श्रीमाधोपुर व नीमकाथाना विकास अघिकारी के 11 हजार 200 रूपए शामिल हैं।
नहीं चुकाए लाखों रूपए
चिडावा सैनिक कल्याण कार्यालय में चार तहसीलोे के थानाघिकारियों, एसडीएम, तहसीलदार व बीडीओ व कुछ महाविद्यालयों पर 2004 से पहले के 6 3 हजार 127 रूपए, 2005 के 56 हजार 540 रूपए, 2006 के 1 लाख 75 हजार 125 रूपए तथा 2007 के एक लाख 6 4 हजार 26 5 रूपए बकाया हैं। चिडावा में अक्टूबर 2004 से सैनिक कल्याण कार्यालय खोला गया था।
बताने को तैयार नहीं
अफसोस की बात है कि खुद फौज में रह चुके सीकर और झुंझुनूं सैनिक कल्याण अघिकारी झण्डा दिवस के स्टीकरों की बकाया राशि नहीं चुकाने वाले विभागों का नाम बताने से भी कतराते हैं। जबकि दोनों ही अघिकारी स्वीकार करते हैं कि उनके जिले में भी अघिकारियों पर स्टीकरों के लाखों रूपए बकाया हैं।
इनका कहना है...
.सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के स्टीकरों की राशि करीब तीस विभागों पर बकाया है। कई विभागों के सहयोग के अभाव में सैनिक कल्याण कार्यालय का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है।-मेजर रामकुमार कस्वां, जिला सैनिक कल्याण अघिकारी, प्रतिक्रियाएँ: 6 टिप्पणियाँ इस संदेश के लिए लिंक
मैं और मेरी तन्हाई
जब दिल की बात जुबां पर नहीं आए...बार-बार समझाने के बावजूद गले तक आकर अटक जाए...दिल में हल्की सी आहट हो...दिलों-दिमाग काम करना बंद कर दें...मन हल्का और सिर भारी हो जाए...हालात ऐसे कि ना दुआ लगे और ना ही दवा...रगों में दौड़ रहे खून की दौड़ मानो थम सी जाए...दिल को कहीं भी सुकून नहीं मिले...मन उदास हो जाए...हाल-ए-दिल किसी भी तरह बयां न हो तो मैं मेरा वर्षों पुराना फार्मूला अपनाता हूं...
मैं गुमसुम बैठकर उसका इंतजार करता हूं...उसकी आहट ही मुझे सुकून देना शुरू कर देती है...ऐसे हालात में वह बिना किसी देरी के मेरे पास आ जाती है...कुछ ही देर में वह मेरे साथ होती है...हमारे पास कोई दूजा नहीं होता....जब हम दोनों अकेले होते हैं तो घंटों बतियाते हैं...वह ज्यादा कुछ नहीं बोलती बस हरामखोर मेरी सुनती ही जाती है...लोग इसे तन्हाई के नाम से जानते हैं...मगर मैं इससे दोस्त के रूप में परिचित हूं...मेरी इस दोस्त को कभी कम मत आंकना क्योंकि यह बड़े काम की चीज है...इसने अच्छे-अच्छे लोगों का दुख की घड़ी में साथ निभाया है...
जितना मैं इसे जानता हूं... उसके आधार कहना गलत नहीं होगा कि तन्हाई यूं ही किसी का साथ नहीं देती...साथ दे भी तो यह बात नहीं करती और बात कर भी ले तो यह अपने बारें में कभी कुछ नहीं बताती....मगर मेरे साथ यह ऐसा नहीं करती...इसका कारण तो मुझे पता नहीं...मगर मैं उसे अच्छी तरह जानता हूं...कई बार इसने मेरा साथ दिया है...मेरी सुनी ही नहीं बल्कि अपनी भी काफी बातें मुझे बताई है...
एक दिन यह बता रही थी कि इसका कोई स्थायी ठिकाना नहीं है...इसे यह भी पता नहीं होता है कि इसे कहां जाना है...कब वापस आना है...कहीं जाकर करना क्या है...कितनी देर रहना है...ये तमाम परेशानियों के बावजूद यह वर्षों से लोगों का साथ दे रही है...मैंने एक दिन इससे पूछा कि तुम्हे कैसे पता लगता है कि मैं तुम्हे याद कर रहा हूं...तुम्हारी जरूरत महसूस कर रहा हूं... और कभी भी ऐसा नहीं होता कि तुम कहीं दूसरी जगह व्यस्त हो...जवाब सुन तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई....
एक हल्की सी सांस लेते कहा कि जब कोई दिल टूट जाए...कोई मुझे दिल से याद करे...कोई मेरे बिना रह नहीं सके.. तो मुझे आना ही पड़ता है...मैं अपने साथी को कभी एकेलापन महसूस नहीं होने देती हूं...पागल, मैं तो हवा हूं कहीं व्यस्त कैसे हो सकती हूं. हां इतना जरूर है कि मेरा साथ लोगों को जरूर महसूस होता है...मेरे आने का पता तो लग जाता है मगर कब गई इसकी किसी को भनक तक नहीं लगती...क्या करूं दोस्तों, मैं अक्सर मेरी तन्हाई के साथ घंटों बैठकर बतियाता हूं...इसे मेरी कमजोरी कहे या मेरी होशियारी मगर मुझे तन्हाई के साथ कुछ पल बिताने की आदत सी हो गई है...आप भी ऐसा करके देखना बड़ा सुकून मिलेगा....
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:
लेबल: तन्हाई
1 टिप्पणियाँ:
manoj said...
meri tanhaaii ka lekh pada aur mujhe bahut achchh laga.
February 19, 2009 11:18 AM
मैं गुमसुम बैठकर उसका इंतजार करता हूं...उसकी आहट ही मुझे सुकून देना शुरू कर देती है...ऐसे हालात में वह बिना किसी देरी के मेरे पास आ जाती है...कुछ ही देर में वह मेरे साथ होती है...हमारे पास कोई दूजा नहीं होता....जब हम दोनों अकेले होते हैं तो घंटों बतियाते हैं...वह ज्यादा कुछ नहीं बोलती बस हरामखोर मेरी सुनती ही जाती है...लोग इसे तन्हाई के नाम से जानते हैं...मगर मैं इससे दोस्त के रूप में परिचित हूं...मेरी इस दोस्त को कभी कम मत आंकना क्योंकि यह बड़े काम की चीज है...इसने अच्छे-अच्छे लोगों का दुख की घड़ी में साथ निभाया है...
जितना मैं इसे जानता हूं... उसके आधार कहना गलत नहीं होगा कि तन्हाई यूं ही किसी का साथ नहीं देती...साथ दे भी तो यह बात नहीं करती और बात कर भी ले तो यह अपने बारें में कभी कुछ नहीं बताती....मगर मेरे साथ यह ऐसा नहीं करती...इसका कारण तो मुझे पता नहीं...मगर मैं उसे अच्छी तरह जानता हूं...कई बार इसने मेरा साथ दिया है...मेरी सुनी ही नहीं बल्कि अपनी भी काफी बातें मुझे बताई है...
एक दिन यह बता रही थी कि इसका कोई स्थायी ठिकाना नहीं है...इसे यह भी पता नहीं होता है कि इसे कहां जाना है...कब वापस आना है...कहीं जाकर करना क्या है...कितनी देर रहना है...ये तमाम परेशानियों के बावजूद यह वर्षों से लोगों का साथ दे रही है...मैंने एक दिन इससे पूछा कि तुम्हे कैसे पता लगता है कि मैं तुम्हे याद कर रहा हूं...तुम्हारी जरूरत महसूस कर रहा हूं... और कभी भी ऐसा नहीं होता कि तुम कहीं दूसरी जगह व्यस्त हो...जवाब सुन तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई....
एक हल्की सी सांस लेते कहा कि जब कोई दिल टूट जाए...कोई मुझे दिल से याद करे...कोई मेरे बिना रह नहीं सके.. तो मुझे आना ही पड़ता है...मैं अपने साथी को कभी एकेलापन महसूस नहीं होने देती हूं...पागल, मैं तो हवा हूं कहीं व्यस्त कैसे हो सकती हूं. हां इतना जरूर है कि मेरा साथ लोगों को जरूर महसूस होता है...मेरे आने का पता तो लग जाता है मगर कब गई इसकी किसी को भनक तक नहीं लगती...क्या करूं दोस्तों, मैं अक्सर मेरी तन्हाई के साथ घंटों बैठकर बतियाता हूं...इसे मेरी कमजोरी कहे या मेरी होशियारी मगर मुझे तन्हाई के साथ कुछ पल बिताने की आदत सी हो गई है...आप भी ऐसा करके देखना बड़ा सुकून मिलेगा....
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:
लेबल: तन्हाई
1 टिप्पणियाँ:
manoj said...
meri tanhaaii ka lekh pada aur mujhe bahut achchh laga.
February 19, 2009 11:18 AM
वो तो दिल में बसता है...
जिसका नाम लेने भर से रूह को सुकून मिलता है...दुनियाभर के लोग जिसकी आस्था के समुद्र में गोता लगा रहे हैं...जिसके बारे में कहा जाता है कि उसके घर देर है मगर अंधेर नहीं...जिसे लोग हर लम्हा हर पल अपने पास महसूस करते हैं...वह लोगों की खुशियों में भी शरीक होता है और दुखों में भी...गमों का पहाड़ टूटने पर वह जीने का सहारा बनने से भी नहीं कतराता...एक दिन मेरा पागल मन उसको खोजने निकल पड़ा...उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर में ढूंढा...राह में मिलने वाले हर बंदे से उसका ठिकाना पूछा...मगर हर चौखट पर उसका रूप बदला हुआ था...और हर गली में उसका नाम अलग था...उसके इतने सारे रूप देख और नाम सुन तो पागल मन और बावला हो गया...बेचारे मन के कुछ भी समझ में नहीं आया...मुझसे बोल रहा था कि उसे खुदा कहूं या भगवान, उसका नाम रब है या परमेश्वर...रहीम चाचा को तो वो हाथों की लकीरों में दिखाई देता है...और राम को दीये की लो में...करतार सिंह तो पंचों में भी उस परमेश्वर को देख लेता है...और माइकल तो उसे हर लम्हा अपने नजदीक मानता है...दुनिया में वो ही एक ऐसा शख्स है... जो लोगों को आंखें बंद करने के बाद भी साफ नजर आता है...पागल मन का हाल जान तो मैं भी अजीब उलझन में फंस गया...क्योंकि ना तो मैंने कभी उस शख्स को देखा है और ना ही कभी उससे बात की है...बेचैन मन को कैसे समझाऊं कि वह कौन है?...जो संगीत में है...माँ-बाबा में दिखाई देता है...गरीब की दुआओं में जिसका जिक्र होता है...जो हवाओं की दिशा बदलने की ताकत रखता हो...नदियों और नालों की रूख जो मोड़ दे...जिसका वास्ता देने पर लोगों की रूह कांप उठती हो...जिसे लोग पत्थर में देखते हैं... पूजते हैं...यहां तक की उससे बात भी करते हैं...जिसे अग्नि का रूप मान लोग सात जन्मों तक प्यार के बंधन में बंध जाते हैं...जिसको साक्षी मान प्रेमी जोड़े जिंदगीभर के लिए एक-दूसरे के हो जाते हैं...हर शख्स उसके लिए 24 घंटों में से कुछ समय निकालता है...पागल मन ने मेरे चैहरे को पढ़ लिया...उसने भांप लिया कि मैं उस अनदेखे शख्स की टोह लेने में कामयाब नहीं हुआ...उसे बता नहीं पाऊंगा कि वो कौन है?... पागल ने लम्बी सांस ली और तस्सली से मेरे पास आकर बैठ गया...मैं जिस मन को लम्बे समय से पागल समझ रहा था...उसकी बातें सुन तो मेरा वर्षों पुराना भ्रम मिनटों में टूट गया...एकाएक मेरी नजरें उसके सामने झुक गई...उस मन ने मुझे बताया कि मंदिर में भी वही शख्स है जो मस्जिद में है...गुरुद्वारा और गिरजाघर के उसके रूप में भी कोई अंतर नहीं है...इन चारों का असली रूप तो हमारे दिल में बसता है...उसे हम किसी भी नाम से जानें...यह उसने हम पर छोड़ रखा है...---विश्वनाथ सैनी
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:
लेबल: मेरा मन...
2 टिप्पणियाँ:
Pankaj Mishra said...
बहूत अच्छा लिखा है आपने
September 14, 2009 2:05 PM
Ram said...
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प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:
लेबल: मेरा मन...
2 टिप्पणियाँ:
Pankaj Mishra said...
बहूत अच्छा लिखा है आपने
September 14, 2009 2:05 PM
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September 14, 2009 2:31 PM
Sunday, February 7, 2010
हाइटेक होगा लोहिया महाविद्यालय
वेबसाइट पर होंगी समस्त सूचनाएं
चूरू, 21 जून। जिला मुख्यालय पर स्थित लोहिया महाविद्यालय से जुड़ी तमाम सूचनाएं अब दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर प्राप्त की जा सकेंगी। चालू सत्र में विद्यार्थियों को कॉलेज के संकाय, सीटों की संख्या, स्टाफ, विभागाध्यक्ष, गत वर्षों का परीक्षा परिणाम, कॉलेज के होनहार छात्रों की सूची समेत कई जानकारी प्राप्त करने के लिए महाविद्यालय के गलियारों में चक्कर नहीं लगाने पडेंग़े। यह सब जानकारी महाविद्यालय की वेबसाइट पर होगी। इस बार महाविद्यालय में छात्राओं के कॉमन रूम का विस्तार करने के साथ ही पांच कक्षा-कक्षों का भी निर्माण करवाया गया है। गत वर्ष शुरू किए गए नॉलेज सेंटर के साथ-साथ इस बार महाविद्यालय के विद्यार्थियों को नेटवर्क रिसोर्स सेंटर की भी सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
नेट से होंगे अपडेट
महाविद्यालय की वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट एलसीसी डॉट एसी डॉट इन को हर दिन अपडेट किया जाएगा। फिलहाल वेबसाइट पर महाविद्यालय की सूचनाएं लोड की जा रही हैं। वेबसाइट पर विद्यार्थी महाविद्यालय के संबंध में सुझाव भी दे सकेंगे।एनआरसी करेगा मददइस बार महाविद्यालय में नेटवर्क रिसोर्स सेटर स्थापित किया गया है जो सरकारी कॉलेजों के पीजी विभागों को आपस में जोडऩे के साथ ही उनका यूजीसी से सम्पर्क करवाएगा। सेंटर से विद्यार्थी और व्याख्याता नवीन शोधपत्रों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
----महाविद्यालय को पूरी तरह से हाइटेक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे न केवल विद्यार्थी बल्कि महाविद्यालय स्टाफ भी लाभान्वित होगा।-जीएस महला, इंचार्ज, तकनीकी टीम, लोहिया महाविद्यालय, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
पहुंच से दूर होता पानी
मानसून पूर्व सर्वे की रिपोर्ट चिंताजनक
मीठा पानी 1.25 मीटर और नीचे चला गया
चूरू, 27 अगस्त। थळी में पानी पहुंच से दूर होता जा रहा है। लोगों को हलक तर करने के लिए धरती में सुराख हर साल गहरे करने पड़ रहे हैं। हालात इस कदर बिगड़ते जा रहे हैं कि जिले में मीठे पानी का भूजल स्तर ऊपर आने का नाम नहीं ले रहा है। खारा पानी भी पाताल की राह पकड़ चुका है। बारिश की बूंद-बूंद को सहेजने के प्रति बेरुखी यूं ही बरकरार रही तो वह दिन दूर नहीं जब बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है। भूजल विभाग की ओर से 15 मई से 15 जून तक किए गए सर्वे में चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। थळी के लिए यह बात चौंकाने वाली बात है कि बीते एक साल में ही मीठा पानी का स्तर 1.25 मीटर और नीचे चला गया है।
ब्लॉकों के बिगड़ते हालात
मीठा पानी 1.25 मीटर और नीचे चला गया
चूरू, 27 अगस्त। थळी में पानी पहुंच से दूर होता जा रहा है। लोगों को हलक तर करने के लिए धरती में सुराख हर साल गहरे करने पड़ रहे हैं। हालात इस कदर बिगड़ते जा रहे हैं कि जिले में मीठे पानी का भूजल स्तर ऊपर आने का नाम नहीं ले रहा है। खारा पानी भी पाताल की राह पकड़ चुका है। बारिश की बूंद-बूंद को सहेजने के प्रति बेरुखी यूं ही बरकरार रही तो वह दिन दूर नहीं जब बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है। भूजल विभाग की ओर से 15 मई से 15 जून तक किए गए सर्वे में चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। थळी के लिए यह बात चौंकाने वाली बात है कि बीते एक साल में ही मीठा पानी का स्तर 1.25 मीटर और नीचे चला गया है।
ब्लॉकों के बिगड़ते हालात
भूजल स्तर के मामले में जिले के तारानगर के अलावा सभी ब्लॉक की स्थिति विकराल होती जा रही है। तारानगर ब्लॉक में पानी अत्यधिक खारा होने के कारण वैसे भी पीने योग्य नहीं है। वर्ष 2008 से पहले जिले का राजगढ़ ब्लॉक डार्क जोन (अत्यधिक चिंताजनक) में था। अब इस श्रेणी में सुजानगढ़ ब्लॉक भी शामिल हो गया है। रतनगढ़ ब्लॉक की स्थिति संतोषजनक से चिंताजनक की ओर तेजी से बढ़ रही है। चूरू व सरदारशहर की स्थिति केवल संतोषजनक ही है।
बचा लो बारिश की बूंद-बूंद
जिलेवासियों को भविष्य में हलक आसानी से तर करने के लिए अभी से बारिश की बूंद-बंूद सहेजनी होगी। पानी के अंधाधुंध दोहन की बजाय भूजल के पुनर्भरण के प्रति अधिक जागरूक होना होगा। जिले में जल संरक्षण के लिए कूप पुनर्भरण समेत कई सरकारी योजनाएं चल रही हैं मगर नतीजे उत्साहजनक नहीं हैं। इतना नीचे गया पानीजिले में मीठा पानी तेजी से पाताल में समा रहा है। वर्ष 1995 के बाद से चूरू ब्लॉक के गांव लाखाऊ जोन में 6.87 मीटर, राजगढ़ ब्लॉक के गांव थिरपाली बड़ी जोन में 17.77 मीटर, रतनगढ़ ब्लॉक के गांव जेगणिया बीदावतान जोन में 6.15 मीटर, सरदारशहर ब्लॉक के गांव राजासर बीकान जोन में 4.68 मीटर, सुजानगढ़ ब्लॉक के गांव तेहनदेसर जोन में 24.83 मीटर तक मीठा पानी पाताल में समा चुका है।
भारी पड़ेगी मानसून की बेरुखी
इस बार भूजल स्तर बढ़ाने में मानसून की बेरुखी भी भारी पड़ेगी। कृषि विभाग के अनुसार जिले में 23 अगस्त तक औसत 200 एमएम बारिश हुई है, जो सामान्य से 160 एमएम कम है। चूरू में 130 एमएम, सरदारशहर व रतनगढ़ में 176 एमएम, सुजानगढ़ में 328 एमएम, राजगढ़ में 174 तथा तारानगर में 217 एमएम बारिश हो पाई है।
घटता भूजल स्तर
ब्लॉक~~~~1995~~~~२००९
चूरू~~~~~34.49~~~~36.२२
राजगढ़~~~~37.25~~~~42.०३
रतनगढ़~~~~50.26~~~~53.०३
सरदारशहर~~~~51.28~~~~51.५१
सुजानगढ़~~~~48.38~~~~51.५२
तारानगर~~~~25.44~~~~*23.९९
(*तारानगर ब्लॉक में पानी खारा होने के कारण पुनर्भरण की तुलना में दोहन कम होने से भूजल स्तर बढ़ा है, आंकड़े मीटर में)
~~~~~~
जिले में भूजल स्तर की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। मानसून पूर्व सर्वे में इस बार भी स्थिति चिंताजनक पाई गई है। लोगों को जल संरक्षण के प्रति अविलम्ब जागरूक होने की दरकरार है।
-लक्ष्मण सिंह राठौड़, कनिष्ठ, भूजल वैज्ञानिक, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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swrsrk said...
Bhaut Badia Vishwantha JiKhabar pasnad ayye. Lage rahe sukha dur kabhi to hogaBest wishes from Pawan Rana
August 29, 2009 10:17 AM
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प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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Saturday, February 6, 2010
'पधारो म्हारे देश'
शेखावाटी के पर्यटन स्थल पर खर्च होंगे छह करोड़
चूरू, 12 नवम्बर। पर्यटन के लिहाज से विश्वभर में पहचान बना चुके शेखावाटी के पर्यटन स्थल अब नए रंग-रूप में पर्यटकों से कहेंगे पधारो म्हारे देश। इसके लिए सीकर, चूरू और झुंझुनूं के चुनिंदा पर्यटक स्थलों का पुनरूद्धार, सरंक्षण तथा सौंदर्यीकरण किया जाएगा। यह सब केन्द्र सरकार की शेखावाटी सर्किट परियोजना के तहत होगा।
परियोजना के माध्यम से शखावाटी के पर्यटन स्थलों पर ६ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इनमें शेखावाटी के गांवों, कस्बों और शहरों में स्थित पर्यटन स्थलों का पुनरूद्धार, नवीनीकरण, संरक्षण तथा साफ-सफाई कार्य करवाएं जाएंगे। जून में तीनों जिलो से मुख्य पर्यटन स्थलों का विकास करवाने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेजा जा चुका है। प्रस्ताव पास होने के बाद विकास कार्य शुरू हो जाएंगे।
प्रस्ताव में चूरू से सेठाणी जोहड, चूरू किला, टकनेत की छतरी, तालछापर इत्यादी के पुनरूद्धार, संरक्षण, साफ-सफाई तथा नवीनीकरण के लिए एक करोड़ २० लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा तालछापर में पर्यटकों के विश्राम के लिए पांच भवन बनेंगे, शौचालय की सुविधा होगी तथा पार्किग माकूल व्यवस्था की जाएगी।
इसी तरह से झुंझुनूं के पर्यटन स्थलों पर २ करोड़ १० लाख खर्च करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें मेड़ता की बावड़ी, चौबिस कोसी परिक्रमा में आने वाले पर्यटक स्थल, किरोड़ी स्थित कुण्ड का विकास करना तथा लोहार्गल में पर्यटक विश्रामगृह व शौचालय बनाना शामिल है। नवलगढ़ के घेर का मंदिर तथा सादुलपुर की छतरी का सौन्दर्यीकरण व झुंझुनूं में स्थित पर्यटक स्वागत केन्द्र तथा गांधी चौक का जीर्णोद्धार होगा। झुंझुनूं, खेतड़ी और मंडावा की सड़कों पर पर्यटन स्थलों के दिशा-निर्देश बोर्ड भी लगेंगे। झुंझुनूं और चूरू की तरह ही सीकर के चुनिंदा पर्यटक स्थलों का विकास किया जाएगा।
चूरू के जिला कलेक्टर अर्जुन मेघवाल के अनुसार शेखावाटी सर्किट परियोजना के माध्यम से शेखावाटी के तीनो जिलों के मुख्य पर्यटन स्थलों को एक सर्किट से भी जोड़ा जाएगा। सर्किट से जुडऩे के बाद सभी पर्यटन स्थलों का भ्रमण एक साथ ही किया जा सकेगा। यह भ्रमण यात्रा बस द्वारा झुंझुनूं के मंडावा के पर्यटन स्थलों से शुरू होगी। मात्र दो दिन में पर्यटकों को शेखावाटी के मुख्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण करवाकर वापस मंडावा पहुंचेगी। परियोजना में पर्यटक स्थलों पर पर्यटकों के रात्रि विश्राम की व्यवस्था करने का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
इनका कहना है
इस योजना के तहत शेखावाटी के तीनो जिलो के पर्यटक स्थलों पर खर्च होने वाली राशि का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजे गए है। संभवत इस साल के अंत तक प्रस्ताव पास हो जाएंगे। प्रस्तावा में पास होने वाली राशि ही प्रत्यके जिले में खर्च की जाएगी। सीकर से भेजे गए प्रस्ताव में कुछ बदलाव हुआ है, जिसकी सूचना अभी हमारे पास नहीं है।
संजय जौहरी-सहायक निदेशक पर्यटन विभाग,
चूरू, 12 नवम्बर। पर्यटन के लिहाज से विश्वभर में पहचान बना चुके शेखावाटी के पर्यटन स्थल अब नए रंग-रूप में पर्यटकों से कहेंगे पधारो म्हारे देश। इसके लिए सीकर, चूरू और झुंझुनूं के चुनिंदा पर्यटक स्थलों का पुनरूद्धार, सरंक्षण तथा सौंदर्यीकरण किया जाएगा। यह सब केन्द्र सरकार की शेखावाटी सर्किट परियोजना के तहत होगा।
परियोजना के माध्यम से शखावाटी के पर्यटन स्थलों पर ६ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इनमें शेखावाटी के गांवों, कस्बों और शहरों में स्थित पर्यटन स्थलों का पुनरूद्धार, नवीनीकरण, संरक्षण तथा साफ-सफाई कार्य करवाएं जाएंगे। जून में तीनों जिलो से मुख्य पर्यटन स्थलों का विकास करवाने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेजा जा चुका है। प्रस्ताव पास होने के बाद विकास कार्य शुरू हो जाएंगे।
प्रस्ताव में चूरू से सेठाणी जोहड, चूरू किला, टकनेत की छतरी, तालछापर इत्यादी के पुनरूद्धार, संरक्षण, साफ-सफाई तथा नवीनीकरण के लिए एक करोड़ २० लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा तालछापर में पर्यटकों के विश्राम के लिए पांच भवन बनेंगे, शौचालय की सुविधा होगी तथा पार्किग माकूल व्यवस्था की जाएगी।
इसी तरह से झुंझुनूं के पर्यटन स्थलों पर २ करोड़ १० लाख खर्च करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें मेड़ता की बावड़ी, चौबिस कोसी परिक्रमा में आने वाले पर्यटक स्थल, किरोड़ी स्थित कुण्ड का विकास करना तथा लोहार्गल में पर्यटक विश्रामगृह व शौचालय बनाना शामिल है। नवलगढ़ के घेर का मंदिर तथा सादुलपुर की छतरी का सौन्दर्यीकरण व झुंझुनूं में स्थित पर्यटक स्वागत केन्द्र तथा गांधी चौक का जीर्णोद्धार होगा। झुंझुनूं, खेतड़ी और मंडावा की सड़कों पर पर्यटन स्थलों के दिशा-निर्देश बोर्ड भी लगेंगे। झुंझुनूं और चूरू की तरह ही सीकर के चुनिंदा पर्यटक स्थलों का विकास किया जाएगा।
चूरू के जिला कलेक्टर अर्जुन मेघवाल के अनुसार शेखावाटी सर्किट परियोजना के माध्यम से शेखावाटी के तीनो जिलों के मुख्य पर्यटन स्थलों को एक सर्किट से भी जोड़ा जाएगा। सर्किट से जुडऩे के बाद सभी पर्यटन स्थलों का भ्रमण एक साथ ही किया जा सकेगा। यह भ्रमण यात्रा बस द्वारा झुंझुनूं के मंडावा के पर्यटन स्थलों से शुरू होगी। मात्र दो दिन में पर्यटकों को शेखावाटी के मुख्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण करवाकर वापस मंडावा पहुंचेगी। परियोजना में पर्यटक स्थलों पर पर्यटकों के रात्रि विश्राम की व्यवस्था करने का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
इनका कहना है
इस योजना के तहत शेखावाटी के तीनो जिलो के पर्यटक स्थलों पर खर्च होने वाली राशि का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजे गए है। संभवत इस साल के अंत तक प्रस्ताव पास हो जाएंगे। प्रस्तावा में पास होने वाली राशि ही प्रत्यके जिले में खर्च की जाएगी। सीकर से भेजे गए प्रस्ताव में कुछ बदलाव हुआ है, जिसकी सूचना अभी हमारे पास नहीं है।
संजय जौहरी-सहायक निदेशक पर्यटन विभाग,
12नवम्बर 07 को राजस्थान पत्रिका में छपी
Friday, January 29, 2010
क्या यही प्यार है....
अपने एक लंगोटिया यार के दादाजी के श्राद्ध पर हमें जिगर के टुकड़े राधे की याद आ गई। राधे के गाल पसधारी के लड्डू जैसे और नाक सब्जी की तरह तीखी थी। उसकी बातों में खीर का सा मिठास और चेहरा पूड़ी की भांति गोल था। राधे और मैं हरियाणा में पढ़ा करते थे।12वीं कक्षा के दौरान एक दिन अपने मुंहबोले नानाजी के श्राद्ध के लिए राधे तीसरे कालांश के बाद स्कूल से गायब हो गया था और दूसरे दिन स्कूल आया तो पहले कालांश में मास्टरजी की मार के डर से पेंट में ही...........। समझ गए ना आप।
राधे को मास्टरजी का बड़ा डर लगता था परन्तु वह प्यार और इश्क के मामले में इतना डरपोक नहीं था। बासंती बयार आई तो वह सहपाठी चम्पा को दिल दे बैठा। चम्पा कक्षा में मेरे बगल में और मैं राधे के बगल में बैठा करता था। उसका छात्रावास की गली से रोज स्कूल आना-जाना था। कभी-कभार तो वह हमारे साथ ही स्कूल जाती।एक दिन दोनों की आंख लड़ी, बात बढ़ी और प्यार हो गया।
दोनों एक-दूसरे को टुकर-टुकर देखा करते थे। स्कूल में मास्टरजी जब भी कुछ लिखने के लिए ब्लैक बोर्ड की ओर मुड़ते तो राधे और चम्पा का मुंह मेरी ओर यानि वे दोनों एक-दूसरे को देखने लगते। एक दिन राधे ने मेरे से चम्पा के नाम प्रेमपत्र लिखवा डाला। नीली स्याही में डूबाकर दिल के सारे अरमान कागज पर उतरवा दिए। मुझे अपने बगल में और खुद चम्पा के बगल में बैठकर उसके हाथ में थमा दिया परवाना। निकाल ली दिल की सारी भड़ास।दो दिन बाद चम्पा ने कागज के एक छोटे से टुकड़े पर 143 लिखकर राधे से अपने प्यार का इजहार कर दिया।
राधे को मास्टरजी का बड़ा डर लगता था परन्तु वह प्यार और इश्क के मामले में इतना डरपोक नहीं था। बासंती बयार आई तो वह सहपाठी चम्पा को दिल दे बैठा। चम्पा कक्षा में मेरे बगल में और मैं राधे के बगल में बैठा करता था। उसका छात्रावास की गली से रोज स्कूल आना-जाना था। कभी-कभार तो वह हमारे साथ ही स्कूल जाती।एक दिन दोनों की आंख लड़ी, बात बढ़ी और प्यार हो गया।
दोनों एक-दूसरे को टुकर-टुकर देखा करते थे। स्कूल में मास्टरजी जब भी कुछ लिखने के लिए ब्लैक बोर्ड की ओर मुड़ते तो राधे और चम्पा का मुंह मेरी ओर यानि वे दोनों एक-दूसरे को देखने लगते। एक दिन राधे ने मेरे से चम्पा के नाम प्रेमपत्र लिखवा डाला। नीली स्याही में डूबाकर दिल के सारे अरमान कागज पर उतरवा दिए। मुझे अपने बगल में और खुद चम्पा के बगल में बैठकर उसके हाथ में थमा दिया परवाना। निकाल ली दिल की सारी भड़ास।दो दिन बाद चम्पा ने कागज के एक छोटे से टुकड़े पर 143 लिखकर राधे से अपने प्यार का इजहार कर दिया।
वार्षिक परीक्षा तक दोनों का प्यार चला और फिर चम्पा अपने गांव चली गई। उसका गांव हरियाणा की खाप पंचायतों में से एक था। (हरियाणा का कुछ क्षेत्र खाप पंचायतों के रूप विख्यात है) राधे से चम्पा की जुदाई सही नहीं गई और वह इतवार को उससे मिलने गांव जाने लगा। गांव के बाहरी इलाके में दोनों एक नीम के पेड़ के नीचे घंटों बतियाते और सांझ ढलने से पहले जुदा हो जाते।
दोनों का प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि उन्होंने जीवनभर साथ निभाने का फैसला कर लिया।कहते हैं कि इश्क और मुश्क ज्यादा दिन तक नहीं छिपते। चम्पा और राधे के साथ भी ऐसा ही हुआ। आखिर खाप पंचायतों के चौधरियों की नजर से वे बच नहीं पाए। हर दिन एक नया चौधरी उनके प्यार का दुश्मन बनता गया। दोनों सात फेरों में बंधने का ख्वाब सजाने लगे और मैं उनके विवाह के निमंत्रण पत्र का इंतजार कर रहा था।
दोनों का प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि उन्होंने जीवनभर साथ निभाने का फैसला कर लिया।कहते हैं कि इश्क और मुश्क ज्यादा दिन तक नहीं छिपते। चम्पा और राधे के साथ भी ऐसा ही हुआ। आखिर खाप पंचायतों के चौधरियों की नजर से वे बच नहीं पाए। हर दिन एक नया चौधरी उनके प्यार का दुश्मन बनता गया। दोनों सात फेरों में बंधने का ख्वाब सजाने लगे और मैं उनके विवाह के निमंत्रण पत्र का इंतजार कर रहा था।
एक रोज खबर मिली कि दोनों की किसी ने गला रेतकर हत्या कर दी। खाप पंचायतों के एक खेत में दोनों अचेत अवस्था में पड़े मिले। हत्यारों का कोई सुराग नहीं लगा। हां, यह जरूर तय था कि उनकी हत्या खाप पंचायतों में से ही किसी ने की है। मेरे दोस्त, सखा और मित्र राधे व चम्पा की प्रेम कहानी के साथ-साथ उनका भी अंत हो गया।
सवाल उनकी मौत का नहीं बल्कि सवाल यह है कि आखिर हरियाणा की खाप पंचायतों में प्रेमी जोड़ों को खुलकर जीने की आजादी कब मिलेगी? आजादी के साठ साल गुजरे जाने के बाद भी आखिर कब तक प्रेमी यूं ही मौत का शिकार होते रहेंगे? अपनी बर्बरता और मानवाधिकार की खुलेआम धज्जियां उडाने के लिए जानी जाने वाली खाप पंचायतों के लिए राधे और चम्पा को मौत के घाट उतारना कोई नया काम नहीं ।
ताज़ा घटनाक्रम पर नजर डालें तो पिछले साल नौ मई को कालीरमन खाप पंचायत के आदेश पर प्रेमी जसवीर और प्रेमिका सनिता की हत्या कर दी गई थी और इस साल 12 मार्च को करनाल जिले के मातौर गांव में बनवाला खाप ने वेदपाल और सोनिया को अलग होने का फरमान सुनाया। बाद में 26 जुलाई को वेदपाल भी खाप पंचायत का शिकार हो गया।
अगस्त में झझर जिले के घाडऩा गांव में बतौर पति-पत्नी साथ रह रहे रवीन्द्र और शिल्पा को भाई-बहन बनाने के पक्ष में कायदान खाप ने चार दिन तक धरना दिया। विडम्बना है कि धरने में महिलाएं भी शामिल हुईं। इसी मामले को लेकर गांव बेरी में खाप पंचायत बैठी। प्रेमी-प्रेमिका को कभी गांव वापस न आने और रवीन्द्र के पिता को तीन महीने गांव से बाहर रहने का फरमान सुनाया गया।
ऑल इण्डिया वीमेंस एसोसिएशन एडवा की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में खाप पंचायतों समेत हर वर्ष करीब सौ प्रेमी जोड़ों की या तो हत्या कर दी जाती या उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता है। अकेली खाप पंचायतें हर माह आठ से दस प्रेमी जोड़ों के साथ यह अन्याय करती है।
अगस्त में झझर जिले के घाडऩा गांव में बतौर पति-पत्नी साथ रह रहे रवीन्द्र और शिल्पा को भाई-बहन बनाने के पक्ष में कायदान खाप ने चार दिन तक धरना दिया। विडम्बना है कि धरने में महिलाएं भी शामिल हुईं। इसी मामले को लेकर गांव बेरी में खाप पंचायत बैठी। प्रेमी-प्रेमिका को कभी गांव वापस न आने और रवीन्द्र के पिता को तीन महीने गांव से बाहर रहने का फरमान सुनाया गया।
ऑल इण्डिया वीमेंस एसोसिएशन एडवा की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में खाप पंचायतों समेत हर वर्ष करीब सौ प्रेमी जोड़ों की या तो हत्या कर दी जाती या उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता है। अकेली खाप पंचायतें हर माह आठ से दस प्रेमी जोड़ों के साथ यह अन्याय करती है।
गंगा मैया की कसम ना तो हमारा कोई राधे दोस्त था और ना ही राधे की प्रेमिका चम्पा। खाप पंचायतों के मन को झकझोर देने वाले नित नए कारनामे पढ़कर हमारी कलम चल गई...। प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:
लेबल: लव आजकल
2 टिप्पणियाँ:
RAJNISH PARIHAR said...
बहुत ही खूब...!हम किसी के बारे में इतना अच्छा सोचते है.शायद यही प्यार है..
October 21, 2009 3:27 PM
RAJNISH PARIHAR said...
वैसे आपकी कहानी भी काफी दिलचस्प लगी,आता हूँ कभी चाय पर...
प्रतिक्रियाएँ:
लेबल: लव आजकल
2 टिप्पणियाँ:
RAJNISH PARIHAR said...
बहुत ही खूब...!हम किसी के बारे में इतना अच्छा सोचते है.शायद यही प्यार है..
October 21, 2009 3:27 PM
RAJNISH PARIHAR said...
वैसे आपकी कहानी भी काफी दिलचस्प लगी,आता हूँ कभी चाय पर...
Thursday, January 7, 2010
मिट्टी व पानी की सेहत की होगी जांच
प्रदेश में खुलेंगी सत्ताइस प्रयोगशालाएं
12 जिलों में 15 स्थान चिह्नित,
बारह होंगी भ्रमणशील,
अप्रेल में शुरू होगी जांच
चूरू, 7 जनवरी। प्रदेश के किसानों को खेत की मिट्टी, पानी व उर्वरकता की जांच के लिए अब मिलों तक का सफर तय नहीं करना पड़ेगा। किसानों की इस समस्या का समाधान मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरकता प्रबंध की राष्ट्रीय परियोजना के प्रथम चरण के तहत प्रदेशभर में स्थापित होने वाली 27 प्रयोगशालाओं के माध्यम से होगा। इनमें प्रदेश के बारह जिलों में चौदह स्थानों पर मृदा परीक्षण व एक स्थान पर उर्वरक परीक्षण की स्थायी तथा प्रदेशभर में मृदा परीक्षण की बारह भ्रमणशील प्रयोगशालाएं शामिल हैं। स्थायी प्रयोगशालाओं के स्थान का चयन करने में सिंचित क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार समस्त पन्द्रह स्थायी प्रयोगशालाओं में अप्रेल 10 से जांच कार्य शुरू होने की उम्मीद है। प्रतापगढ़, सीकर, अजमेर, नागौर, बाडमेर, करौली, बीकानेर, जालौर व पाली में खुलने वाली प्रयोगशालाओं के भवन निर्माण की निविदाएं भी निकाली जा चुकी हैं। शेष प्रयोगशालाओं के लिए भूमि तलाश की जा रही है।—-निजी सहभागिता से संचालनमृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का संचालन निजी सहभागिता से होगा। सरकार की ओर से किसी एनजीओ या निजी कम्पनी को भूखण्ड आवंटन के साथ ही उस पर भवन निर्माण करवाकर प्रयोगशाला के आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। संचालनकर्ता को प्रयोगशाला में केवल अपना स्टाफ तैनात करना होगा। इसके अलावा कोटा में खुलने वाली उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला के संचालन का जिम्मा खुद सरकार के पास रहेगा।—-यह होगी सुविधामृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में खेत की मिट्टी व पानी की सम्पर्ण जांच हो सकेगी। इनमें मिट्टी के मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्व तथा पानी की क्षारियता, लवणीयता, पीएच व ईसी समेत कई जाचें शामिल हैं। जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी दिया जाएगा।—-फैक्ट फाइलआधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में कृषि जोतों की संख्या 58।2 लाख है। खेतों की मिट्टी व पानी आदि की जांच के लिए विभिन्न जिलों में 33 सरकारी व पांच निजी प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।
इन्हें मिली सौगात
जिला-----चयनित स्थान
चूरू-----साण्डवा
सीकर-----लक्ष्मणगढ़
सीकर-----श्रीमाधोपुर
प्रतापगढ़-----प्रतापगढ़
अजमेर-----केकड़ी
नागौर-----कुचामन
नागौर-----लाडनूं
बाडमेर----गुढ़ामलानी
करौली----हिण्डौन
बीकानेर----डूंगरगढ़
जालौर----सांचौर
पाली-----जैतारण
कोटा----- सांगोद
टोंक----- दूनी
कोटा-----कोटा
(कोटा में उर्वरक तथा शेष स्थानों पर मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं खुलेंगी)
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प्रदेश भर में सभी 15 स्थायी प्रयोगशालाओं में अप्रेल से जांच शुरू हो जाएगी। इनमें दस प्रयोगशालाओं के भवन निर्माण के टेण्डर हो चुके हैं। शेष के लिए भूमि आंवटन की कार्यवाही चल रही है।
-दयालसिंह चौधरी, संयुक्त निदेशक कृषि (गुण नियंत्रण), जयपुर
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जिले में मृदा परीक्षण की प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए सुजानगढ़ तहसील के गांव साण्डवा को चिह्नित किया है। इससे जिले के किसानों को खेत की मिट्टी व पानी की जांच के लिए जिला मुख्यालय पर स्थित एकमात्र प्रयोगशाला पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साण्डवा में प्रयोगशाला के लिए भूमि की तलाश शुरू कर दी है।
-भंवर सिंह राठौड़, उप निदेशक कृषि विभाग, चूरू
Monday, January 4, 2010
करोड़ों से बुझेगी लाखों की प्यास
मुख्यालय को भेजा कंटीजेंसी प्लान,
मंजूरी मिलते ही शुरू होगा काम,
चूरू, 4 जनवरी। सर्दियों में लोगों के प्यासे हलक तर करने के लिए जलदाय विभाग ने आठ करोड़ 89 लाख 38 हजार रुपए का कंटीजेंसी प्लान मुख्यालय को भेजा है। मुख्यालय की मंजूरी मिलने के बाद पेयजल संकट दूर करने के लिए प्लान के तहत कार्य शुरू हो जाएगा। अधिकारिक जानकारी के अनुसार कंटीजेंसी प्लान के तहत जनवरी से मार्च के दौरान जिले में 42 नए नलकूप व 85 नए हैण्डपम्प खोदे जाने प्रस्तावित हैं। साथ ही तीन पुराने नलकूपों को गहरा किया जाना है। इसके अलावा पेयजल किल्लत से जूझ रहे इलाकों में पानी के टैंकर भेजे जाने पर 38.55लाख तथा पेयजल स्रोतों की रखरखाव परतीन करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाने प्रस्तावित हंै।
मंजूरी मिलते ही शुरू होगा काम,
चूरू, 4 जनवरी। सर्दियों में लोगों के प्यासे हलक तर करने के लिए जलदाय विभाग ने आठ करोड़ 89 लाख 38 हजार रुपए का कंटीजेंसी प्लान मुख्यालय को भेजा है। मुख्यालय की मंजूरी मिलने के बाद पेयजल संकट दूर करने के लिए प्लान के तहत कार्य शुरू हो जाएगा। अधिकारिक जानकारी के अनुसार कंटीजेंसी प्लान के तहत जनवरी से मार्च के दौरान जिले में 42 नए नलकूप व 85 नए हैण्डपम्प खोदे जाने प्रस्तावित हैं। साथ ही तीन पुराने नलकूपों को गहरा किया जाना है। इसके अलावा पेयजल किल्लत से जूझ रहे इलाकों में पानी के टैंकर भेजे जाने पर 38.55लाख तथा पेयजल स्रोतों की रखरखाव परतीन करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाने प्रस्तावित हंै।
दौड़ाएंगे पानी के टैंकर
जिलेवासियों की प्यास बुझाने के लिए पीएचईडी की ओर से पानी के टैंकर भी दौड़ाए जाएंगे। प्रस्ताव में चूरू खण्ड के गांवढाणी नायकान, ढाणी गुजरान, सूरतपुरा, रतनगढ़ खण्ड के गांव छावड़ी मीठी, भींचरी, तारानगर खण्ड के गांव कालोरी, देवीपुरा, राऊ टिब्बा, न्यांगली, पाबासी, रतनपुरा, जयपुरिया खालसा, जयपुरिया पट्टा, अमरपुरा धाम, लाखलाण छोटी, सिलायचो का बास, कोटवाद नाथावतान, ढाणी पूनियां, भैरूसिंह की ढाणी, धींगी, भैरूसर, ढाणी मोतीङ्क्षसह व मठोड़ी में पानी के टैंकर भेजे की आवश्कता जताई गई है।
जिलेवासियों की प्यास बुझाने के लिए पीएचईडी की ओर से पानी के टैंकर भी दौड़ाए जाएंगे। प्रस्ताव में चूरू खण्ड के गांवढाणी नायकान, ढाणी गुजरान, सूरतपुरा, रतनगढ़ खण्ड के गांव छावड़ी मीठी, भींचरी, तारानगर खण्ड के गांव कालोरी, देवीपुरा, राऊ टिब्बा, न्यांगली, पाबासी, रतनपुरा, जयपुरिया खालसा, जयपुरिया पट्टा, अमरपुरा धाम, लाखलाण छोटी, सिलायचो का बास, कोटवाद नाथावतान, ढाणी पूनियां, भैरूसिंह की ढाणी, धींगी, भैरूसर, ढाणी मोतीङ्क्षसह व मठोड़ी में पानी के टैंकर भेजे की आवश्कता जताई गई है।
इन गांवों में नलकूप
चूरू खण्ड के गांव नाकरासर, धोधलिया, खासोली, सुजानगढ़ खण्ड के गांव जैतासर, सिकराणाताल, सेठों की ढाणी, नब्बासर, खिंचीवाला, क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना मंगलूना पार्ट द्वितीय, लालगढ़, परेवड़ा, रतनगढ़ खण्ड के गांव बीरमसर में खिचड़ों की ढाणी, भूखरेड़ी में ढाणी धायलों की, लोहा में ढाणी मेघवाल, लूणासर, जेगनिया बीकान, आबड़सर, लाछड़सर, हुडेरा अगुणा, भानूदा बीदावतान, परसनेऊ, आलसर, नोसरिया, तारानगर खण्ड के गांव किरतान-खैरू बड़ी, आरडब्ल्यूएसएस बालान, आरडब्ल्यूएसएस बेवड़ में नलकूप खोदे जाने प्रस्तावित हंै।
चूरू खण्ड के गांव नाकरासर, धोधलिया, खासोली, सुजानगढ़ खण्ड के गांव जैतासर, सिकराणाताल, सेठों की ढाणी, नब्बासर, खिंचीवाला, क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना मंगलूना पार्ट द्वितीय, लालगढ़, परेवड़ा, रतनगढ़ खण्ड के गांव बीरमसर में खिचड़ों की ढाणी, भूखरेड़ी में ढाणी धायलों की, लोहा में ढाणी मेघवाल, लूणासर, जेगनिया बीकान, आबड़सर, लाछड़सर, हुडेरा अगुणा, भानूदा बीदावतान, परसनेऊ, आलसर, नोसरिया, तारानगर खण्ड के गांव किरतान-खैरू बड़ी, आरडब्ल्यूएसएस बालान, आरडब्ल्यूएसएस बेवड़ में नलकूप खोदे जाने प्रस्तावित हंै।
यहां पर हैण्डपम्प
सुजानगढ़ खण्ड के गंाव जैतासर, मलसीसर, राजियासर खारा, धातरी, जोगलिया, ढाणी कुम्हारान, रामपुरा, अणखोल्यां, जीनरासर, बोथियाबास, राजपुरा, नीमड़ी चारणान, भानीसरिया, बामणिया, चाड़वास, भोजलाई, बिलासी, बासी अगुणी, भानीसरिया हीरावतान, नीमड़ी बिदावतान, चूहास, बिड़ास, तोलियासर, डूंगरास आथुणा, गोपालपुरा, बोबासर, रतनगढ़ खण्ड के गांव टीडियासर, छावड़ी खारी, भींचरी, भरपालसर बीदावतान, गोरीसर, मौलीसर छोटा, तारानगर खण्ड के गांव कालोड़ी, देवीपुरा, सुलखनिया बड़ा, राऊताल, रावतसर कूंजला, सांखण ताल, समरपुरा, पाबासी में हैण्डपम्प खोदे जाने प्रस्तावित हैं।
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जनवरी से मार्च 10 के लिएकंटीजेंसी प्लान का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा है।जिसे जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। आगामी तीन माह के दौरान जिले में कहीं भी पेयजल किल्लत नहीं आने दी जाएगी।
-अनिल श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, पीएचईडी, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
सुजानगढ़ खण्ड के गंाव जैतासर, मलसीसर, राजियासर खारा, धातरी, जोगलिया, ढाणी कुम्हारान, रामपुरा, अणखोल्यां, जीनरासर, बोथियाबास, राजपुरा, नीमड़ी चारणान, भानीसरिया, बामणिया, चाड़वास, भोजलाई, बिलासी, बासी अगुणी, भानीसरिया हीरावतान, नीमड़ी बिदावतान, चूहास, बिड़ास, तोलियासर, डूंगरास आथुणा, गोपालपुरा, बोबासर, रतनगढ़ खण्ड के गांव टीडियासर, छावड़ी खारी, भींचरी, भरपालसर बीदावतान, गोरीसर, मौलीसर छोटा, तारानगर खण्ड के गांव कालोड़ी, देवीपुरा, सुलखनिया बड़ा, राऊताल, रावतसर कूंजला, सांखण ताल, समरपुरा, पाबासी में हैण्डपम्प खोदे जाने प्रस्तावित हैं।
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जनवरी से मार्च 10 के लिएकंटीजेंसी प्लान का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा है।जिसे जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। आगामी तीन माह के दौरान जिले में कहीं भी पेयजल किल्लत नहीं आने दी जाएगी।
-अनिल श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, पीएचईडी, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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