Monday, November 12, 2007

शेखावाटी के पर्यटन स्थल कहेंगे 'पधारो म्हारे देश'

पर्यटन पर खर्च होंगे छह करोड़
चूरू, 12 नवम्बर। पर्यटन के लिहाज से विश्वभर में पहचान बना चुके शेखावाटी के पर्यटन स्थल अब नए रंग-रूप में पर्यटकों से कहेंगे पधारो म्हारे देश। इसके लिए सीकर, चूरू और झुंझुनूं के चुनिंदा पर्यटक स्थलों का पुनरूद्धार, सरंक्षण तथा सौंदर्यीकरण किया जाएगा। यह सब केन्द्र सरकार की शेखावाटी सर्किट परियोजना के तहत होगा।
परियोजना के माध्यम से शखावाटी के पर्यटन स्थलों पर ६ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इनमें शेखावाटी के गांवों, कस्बों और शहरों में स्थित पर्यटन स्थलों का पुनरूद्धार, नवीनीकरण, संरक्षण तथा साफ-सफाई कार्य करवाएं जाएंगे। जून में तीनों जिलो से मुख्य पर्यटन स्थलों का विकास करवाने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेजा जा चुका है। प्रस्ताव पास होने के बाद विकास कार्य शुरू हो जाएंगे। प्रस्ताव में चूरू से सेठाणी जोहड, चूरू किला, टकनेत की छतरी, तालछापर इत्यादी के पुनरूद्धार, संरक्षण, साफ-सफाई तथा नवीनीकरण के लिए एक करोड़ २० लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा तालछापर में पर्यटकों के विश्राम के लिए पांच भवन बनेंगे, शौचालय की सुविधा होगी तथा पार्किग माकूल व्यवस्था की जाएगी। इसी तरह से झुंझुनूं के पर्यटन स्थलों पर २ करोड़ १० लाख खर्च करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें मेड़ता की बावड़ी, चौबिस कोसी परिक्रमा में आने वाले पर्यटक स्थल, किरोड़ी स्थित कुण्ड का विकास करना तथा लोहार्गल में पर्यटक विश्रामगृह व शौचालय बनाना शामिल है। नवलगढ़ के घेर का मंदिर तथा सादुलपुर की छतरी का सौन्दर्यीकरण व झुंझुनूं में स्थित पर्यटक स्वागत केन्द्र तथा गांधी चौक का जीर्णोद्धार होगा। झुंझुनूं, खेतड़ी और मंडावा की सड़कों पर पर्यटन स्थलों के दिशा-निर्देश बोर्ड भी लगेंगे। झुंझुनूं और चूरू की तरह ही सीकर के चुनिंदा पर्यटक स्थलों का विकास किया जाएगा। चूरू के जिला कलेक्टर अर्जुन मेघवाल के अनुसार शेखावाटी सर्किट परियोजना के माध्यम से शेखावाटी के तीनो जिलों के मुख्य पर्यटन स्थलों को एक सर्किट से भी जोड़ा जाएगा। सर्किट से जुडऩे के बाद सभी पर्यटन स्थलों का भ्रमण एक साथ ही किया जा सकेगा। यह भ्रमण यात्रा बस द्वारा झुंझुनूं के मंडावा के पर्यटन स्थलों से शुरू होगी। मात्र दो दिन में पर्यटकों को शेखावाटी के मुख्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण करवाकर वापस मंडावा पहुंचेगी। परियोजना में पर्यटक स्थलों पर पर्यटकों के रात्रि विश्राम की व्यवस्था करने का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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योजना के तहत शेखावाटी के तीनो जिलो के पर्यटक स्थलों पर खर्च होने वाली राशि का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजे गए है। संभवत इस साल के अंत तक प्रस्ताव पास हो जाएंगे। प्रस्तावा में पास होने वाली राशि ही प्रत्यके जिले में खर्च की जाएगी। सीकर से भेजे गए प्रस्ताव में कुछ बदलाव हुआ है, जिसकी सूचना अभी हमारे पास नहीं है।
संजय जौहरी-सहायक निदेशक पर्यटन विभाग,झुंंझुनूं

Monday, October 22, 2007

'उम्मीद' की फसल

चूरू, २२ अक्टूबर। चूरू जिले के किसान फसलों का बीमा कराने से कतराते हैं। हालांकि पिछले तीन साल में जिले के करीब एक लाख किसानों को तीस करोड़ से अधिक का मुआवजा मिला है लेकिन मुआवजा निर्धारण के लिए तहसील को इकाई माने जाने से हजारों किसान फसल बर्बाद होने के बाद भी मुआवजे से वंचित रह गए। जिले की केन्द्रीय सहकारी बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2004 में खरीफ फसलों में हुए नुकसान का साढ़े चार करोड़ से अधिक मुआवजा किसानों को दिया गया। रबी सीजन में दो करोड़ से अधिक मुआवजा दिया गया। 2005 में छह करोड़ से अधिक तथा 2006 में छह करोड़ अ_ïावन लाख से रुपए से अधिक मुआवजा किसानों को मिला। इसके बावजूद तहसील को इकाई मानने के कारण कई हजार किसानों को मुआवजा नहीं मिला क्योंकि उनके गांव जिस तहसील में थे वह सूखाग्रस्त घोषित नहीं हुई थी। यहां उल्लेखनीय है कि चूरू जिले के विभिन्न इलाकों में कई ग्राम पंचायतें और राजस्व गांव सूखा पीडि़त होते हैं लेकिन औसत वर्षा के आधार पर उनकी तहसील सूखाग्रस्त नहीं मानी जाती। इस वजह से हकदार होने के बावजूद उन्हें मुआवजा नहीं मिल पाता है।
क्या है योजना
अकाल पीडि़त इलाकों में किसानों को राहत देने के लिए राष्टï्रीय कृषि बीमा योजना 2003 से लागू हुई है। योजना के तहत फसलों का न्यूनतम प्रीमियम किसानों से लिया जाता है।
आधारभूत नियम
योजना के नियमानुसार किसानों को बीमा का लाभ देने के लिए तहसील स्तर पर सूखा घोषित किया जाता है। जिस तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है उसी के किसानों को बीमा का लाभ मिलता है।
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योजना में तहसील को इकाई माना जाता है जबकि वास्तव में राजस्व गांव और पंचायत को इकाई माना जाना चाहिए। कई बार ऐसा हो चुका है कि आधी तहसील में अकाल पड़ा है और आधी में जमाना हुआ है।
इन्द्र सिंह शेखावत- वरिष्ठ प्रबंधक- केन्द्रीय सहकारी बैंक
इस नियम पर योजना के शुरुआत में ही अंगूली उठाई गई थी। सही मायने में इस नियम में बदलाव की आवश्यकता है। सहायक कृषि अधिकारी-शंकरलाल बेड़ायोजना तो सही है, लेकिन तहसील की अपेक्षा पंचायत को सूखाग्रस्त किया जाना चाहिए तभी किसानों को योजना का वास्तविक लाभ मिल पाएगा। रामनारायण जाट- गांव- लोहसना बड़ा, चूरू

हिसाब-किताब

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