Sunday, July 18, 2010

छात्र घोलने लगे 'राजनीति' का रंग

[ छात्रसंघ चुनाव 2010 ] :
छात्र संगठन हुए सक्रिय,
चुनाव की प्रारम्भिक तैयारियां शुरू
चूरू. महाविद्यालयों में अगले माह प्रस्तावित छात्रसंघ चुनावों का रंग घुलने लगा है। चुनाव को लेकर जहां छात्रों के घुंघरू बंध गए हैं वहीं छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। संगठनों ने चुनाव की प्रारम्भिक तैयारियां शुरू कर दी है। कोई सदस्यता अभियान शुरू करने जा रहा है तो कोई पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाकर चुनावी रणनीति बनाने की तैयारी में हैं। छात्र संगठन महाविद्यालयों में सीटें बढ़ाने की मांग को लेकर गुरुवार तक धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। अब सीटें बढ़ाए जाने पर संगठनों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिले में सक्रिय एसएफआई, एनएसयूआई व एबीवीपी समस्त सरकारी महाविद्यालयों में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। हालांकि महाविद्यालय प्रबंधन को चुनाव के संबंध में अभी तक कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिली है। ऐसे में महाविद्यालय प्रबंधन असंमजस की स्थिति में है।

एसएफआई
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इण्डिया (एसएफआई) की रविवार को चूरू के शिक्षक भवन में जिला कमेटी की प्रथम बैठक होगी। इसमें लोहिया कॉलेज इकाई के साथ चुनाव रणनीति को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। पार्टी की सरदारशहर इकाई की बैठक सोमवार को होगी। जिलाध्यक्ष दीपचंद बलौदा ने बताया कि पार्टी की तारानगर में बैठक हो चुकी है। सुजानगढ़ में पार्टी कम सक्रिय होने के कारण वहां पर बाद में बैठक होगी।
एबीवीपी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) चुनावों को लेकर 19 जुलाई से सदस्यता अभियान शुरू करेगी। इस बार साढ़े तीन हजार नए सदस्यों के साथ सदस्यों की कुल संख्या दस हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य है। फिलहाल फतेहपुर में सीकर, चूरू, झुंझुनूं के कार्यकर्ताओं का दो दिवसीय अभ्यास शिविर चल रहा है। जिला प्रमुख ओमप्रकाश महर्षि के अनुसार अगस्त में उम्मीदवार तय किए जाएंगे।
एनएसयूआई
छात्रसंघ चुनाव की तैयारियों को लेकर एनएसयूआई भी पीछे नहीं है। पार्टी की जिला कार्यकारिणी की बैठक में प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे। प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारी तय होगी। जिलाध्यक्ष भींवाराम मेघवाल के अनुसार चुनाव रणनीति बनाने के लिए पार्टी पदाधिकारी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। जिला कार्यकारिणी की बैठक का समय और स्थान मंगलवार तक निर्धारित किया जाएगा।

यह रहेगा कार्यक्रम
राज्य सरकार ने छात्रसंघ चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 16 अगस्त को मतदाता सूचियां प्रकाशित की जाएंगी। 19 अगस्त तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे। 20 अगस्त को नाम वापस लिए जा सकेंगे। 21 अगस्त को अंतिम सूची प्रकाशित होगी। 25 अगस्त को सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक वोट डाले जाएंगे।
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चुनाव के संबंध में उच्च अधिकारियों से अभी तक कोई लिखित जानकारी नहीं आई है। टीवी और अखबारों से ही पता चला है कि 25 अगस्त को चुनाव हंै।अधिकृत सूचना मिलने पर महाविद्यालय स्तर पर चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी।
-एमडी गोरा, प्राचार्य, राजकीय लोहिया महाविद्यालय, चूरू

Thursday, July 15, 2010

बिना धुएं का खाना हुआ 'धुआं'

चूरू । जिले के एक हजार से अघिक सरकारी स्कूलों में मिड डे मील कार्यक्रम के तहत बच्चों को बिना धुएं का भोजन खिलाए जाने का सरकार का सपना धुआं होता जा रहा है। स्कूलों में रसोई गैस की उपलब्धता अब तक सुनिश्चित नहीं हो पाई है। इसके लिए भले ही रसद विभाग, शिक्षा विभाग व गैस वितरिकों के अलग-अलग दावे-प्रतिदावे रहे हों, मगर स"ााई है कि इस लक्ष्य को पाने में किसी ने भी स"ो मन से कतई प्रयास नहीं किए हैं।
रसद विभाग की मानें तो उन्हें इस संबंध में गैस वितरिकों की ओर से कनेक्शन मुहैया नहीं करवाने की पहले कभी शिकायत ही नहीं मिली । रसद विभाग इस बारे में आगे खोज-खबर कब लेगा यह तो पता नहीं लेकिन गैस वितरकों का यह कहना है कि उन तक कनेक्शन लेने के लिए स्कूलों ने गंभीर प्रयास ही नहीं किए।
उधर, स्कूलों का तर्क है कि आवेदन करने के बाद वितरकों से कई बार सम्पर्क साधा गया किन्तु कनेक्शन देने में उन्होंने रूचि एवं तत्परता नहीं दर्शाई। रसोई गैस के अभाव में भोजन पकाना टेढी खीर साबित हो रहा है।


कब-कब जारी की राशि
शिक्षा विभाग ने रसोई गैस कनेक्शन के लिए मिड डे मील कार्यक्रम से जुडे 136 विद्यालयों के खातों में 1 अक्टूबर 2008 को पांच-पांच हजार रूपए के हिसाब से 6 लाख 80 हजार रूपए जमा करवाए थे। इस साल मार्च में 575 स्कूलों को 23 लाख रूपए जारी किए गए। वर्तमान में किसी भी स्कूल को गैस कनेक्शन नहीं मिल पाया है। कुछ विद्यालयों को छोडकर शेष विद्यालयों ने तो रसोई गैस पाने की दिशा में कदम ही नहीं बढाए हैं।


1231 स्कूलों में समस्या
जिले के 1 हजार 8 8 5 स्कूल में 2 लाख 933 विद्यार्थी मिड डे मील का पोषाहार पा रहे हैं। इनमें दस फीसदी स्कूलों ने अपने स्तर पर रसोई गैस की व्यवस्था कर रखी है जबकि 46 6 स्कूलों में अन्नपूर्णा सहकारी समितियो के माध्यम से पोषाहार पहुंचाया जा रहा है। शेष एक हजार 231 स्कूलों में शाला विकास प्रबंध समिति लकडी व गोबर के उपले से पोषाहार पकाने को मजबूर है।


जोखिम के साथ बीमारी भी
स्कूलों में चूल्हे पर लकडी व गोबर के उपलों से भोजन पकाने पर धूएं के कारण विद्यार्थियों का दम घुटता है। इससे विद्यार्थियो के बीमारियों की चपेट में आने की आशंका भी बनी रहती है। साथ ही पकाने के बाद चूल्हे में लकडियां जलती रहने के कारण छोटे ब"ाों का विशेष्ा ध्यान रखना पडता है।


यह होता है पकाना
कार्यक्रम के तहत कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को मध्यान अवकाश में भोजन परोसा जाता है। सप्ताह में चार दिन रोटी-सब्जी व दाल-रोटी तथा दो दिन मीठे या नमकीन चावल तथा दाल-खिचडी खिलाई जाती है।
नवम्बर 2009 में कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। आज तक कनेक्शन नहीं मिला। एजेंसी का तर्क है कि कनेक्शन के दस्तावेज संभाग मुख्यालय बीकानेर भेज दिए गए। बीकानेर से कर्मचारी आकर कनेक्शन जारी करेंगे।
-छगनलाल शर्मा, संस्था प्रधान, राउप्रावि नम्बर आठ, चूरू



संस्थाओं को गैस कनेक्शन एग्जम्पटेड श्रेणी में दिया जाता है। जो संभाग स्तरीय ऑफिस से जारी किया जाएगा। करीब 25 विद्यालयों के मामले बीकानेर भिजवाए हुए हैं। स्कूलों को जल्द ही कनेक्शन दिलवाया जाएगा।
-श्यामसुन्दर बगडिया, संचालक, बगडिया गैस एजेंसी, चूरू

स्कूलों में रसोई गैस कनेक्शन नहीं मिलने की जानकारी आज ही बैठक में मिली है। एजेंसियों व शिक्षा अघिकारियों से इस संबंध में चर्चा कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
-हरलाल सिंह, रसद अघिकारी, चूरू


गत शनिवार को गांव श्योपुरा के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया तो उपलों से पोषाहार पकाया जा रहा था। दो साल से गैस कनेक्शन का इंतजार है। इस संबंध में मंगलवार को आयुक्त को भी पत्र लिखा गया है।
-युनूस अली, सहायक प्रभारी, मिड डे मील कार्यक्रम, चूरू

Tuesday, July 13, 2010

एक बार बीमा तीन साल लाभ

गाय बीमा-भैंस बीमा योजना
चूरू। गाय और भैंस का बीमा करवाने के लिए पशुपालकों को विभाग के हर साल चक्कर नहीं लगाने पडेंगे। अब पशुओं का तीन साल तक का बीमा एक ही बार में करवाया जा सकेगा। यह सब चालू वित्तीय वर्ष से शुरू हुई गाय बीमा-भैंस बीमा योजना के तहत होगा। इससे पूर्व पशुपालक कामधेनू व भैंस बीमा योजना के अन्तर्गत पशुओं का एक बार में एक ही साल का बीमा करवा सकते थे।
खास बात यह है कि योजना से अघिकतम पशुपालक लाभान्वित हो सकेंगे, क्योंकि पूर्व में एक वर्ष तक का बीमा होने पर दूसरे वर्ष का लक्ष्य भी उन्हीं पशुओं का बीमा करके पूर्ण कर दिया जाता था। अब तीन वर्ष तक का बीमा एक साथ होने पर बीमा का लक्ष्य पूरा करने के लिए हर वर्ष नए पशुओं का बीमा करना होगा।

बीमा का लक्ष्य
राजस्थान लाइव स्टॉक डवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से लागू की गई योजना के अन्तर्गत चालू वित्तीय वर्ष के दौरान प्रदेशभर में 85 हजार पशुओं के बीमा का लक्ष्य रखा गया है। चूरू में तीन हजार व सीकर और झुंझुनूं में पांच-पांच हजार पशुओं का बीमा किया जाना है।

बार-बार नहीं लेने पडेंगे प्रमाण पत्र
पूर्व में पशुपालकों को बीमा करवाने के लिए प्रति वर्ष चिकित्सकों से पशु का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेना पडता था। अब तीन साल में एक ही बार लिए गए प्रमाण पत्र से काम चल सकेगा।

सालभर का प्रीमियम बचेगा
नई योजना से पशुपालकों को आर्थिक लाभ भी होगा। पशुपालक एक साल के बीमा प्रीमियम की राशि बचा सकेंगे। पूर्व में गाय का बीमा कराने पर प्रीमियम के रूप में प्रतिवर्ष 300 रूपए तथा भैंस का बीमा कराने पर प्रतिवर्ष 600 रूपए जमा कराने पडते थे। अब तीन साल का बीमा प्रीमियम क्रमश: 600 व 1200 रूपए एक साथ एक ही बार जमा होंगे।
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योजना के तहत पशुओं का बीमा करना शुरू कर दिया है। योजना से किसानों को कई लाभ होंगे। एक बार बीमा करवाने के बाद तीन साल तक चिंता मुक्त हो सकेेगे। जिले में चालू वित्तीय वर्ष में तीन हजार गाय व भैंस का बीमा करना है।
-विजय मोहन चौधरी, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, चूरू

Monday, July 12, 2010

कल्याण की राह में अधिकारी रोड़ा

[सशस्त्र झण्डा दिवस आज] झण्डा दिवस के ध्वज व स्टीकरों के लाखों बकाया
चूरू। शहीदों की शहादत पर गर्व महसूस करने वाले अधिकारी ही उनके परिवार और आश्रितों के कल्याण की राह में बाधा बने हुए हैं। बात भले ही गले नहीं उतर रही हो, परन्तु सरकारी कार्यालयों में धूल फांकते सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के स्टीकर और ध्वज देख इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। आलम यह है कि अधिकांश अधिकारी शहीदों के आश्रितों को संभल प्रदान करने मेंं कतई गंभीर नहीं है। झण्डा दिवस के मौके पर पत्रिका टीम ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय के रिकॉर्ड खंगाले तब अधिकारियों का यह दूसरा चेहरा सामने आया।
जिलेभर में 63 अधिकारी शहीदों के आश्रितों के कल्याण के 11 लाख 62 हजार 750 रुपयों पर कुंडली मारे बैठे हैं। अधिकारियों को इस राशि के स्टीकर और ध्वज 1996 से 2009 के दौरान वितरित किए गए थे। ऐसे में अधिकारियों के भरोसे शहीदों के परिवारों का मनोबल बढ़ाने की सोचना बेमानी होगा। हालांकि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी जिलेभर के 96 अधिकारियों को 100 से 6000 स्टीकर व ध्वज वितरित किए जाएंगे। लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ अगर कोई कदम नहीं उठाया गया तो इस साल के स्टीकरों और ध्वज को भी सरकारी कार्यालयों में धूल फांकने में देर नहीं लगेगी।

बढ़ता बकाया का आंकड़ा
वर्ष ---------बकाया
1996-------- 2000
1997-------- 2000
1998-------- 500
1999-------- 2300
2000-------- 1200
2001-------- 400
2003-------- 13000
2004-------- 3000
2005-------- 5700
2006-------- 26920
2007-------- 43600
2008-------- 476800
2009-------- 585330
कुल----------11,62,750

सर्वाधिक लापरवाह डीटीओ
कल्याण की राह में रोड़ा बनने वाले अधिकारियों में बकाया के लिहाज से जिला परिवहन अधिकारी पहले पायदान पर हैं। डीटीओ पर वर्ष 2008 के एक लाख 97 हजार रुपए तथा वर्ष 2009 के दो लाख 25 हजार रुपए बकाया हैं। पीएचईडी के एसई व एसपी पर बकाया का आंकड़ा एक लाख को पार कर चुका है। बकाया के मामले में अन्य अधिकारियों की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है।

क्या झण्डा दिवस
देश की आन, बान और शान के लिए जान की बाजी लगाने वाले शहीद की याद और सेवारत सैनिकों के साथ राष्ट्र की एकजुटता दर्शाने के उदे्श्य से प्रतिवर्ष सात दिसम्बर को देशभर में झण्डा दिवस मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न विभागों को विशेष प्रकार के ध्वज व स्टीकर वितरित किए जाते हैं। जिन्हें वाहनों पर लगाकर या जन समूह को वितरित कर राशि जुटाई जाती है। यह राशि जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से अमल गमैटेड फण्ड में भेजी जाती है। जिसका उपयोग युद्ध विकलांग एवं शहीदों के परिवारों का पुर्नवास, सेवानिवृत व सेवारत सैनिकों एवं उनके परिवारों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है।

यूं जमा होगी राशि
इस वर्ष प्रति स्टीकर दस रुपए तथा प्रति वाहन पताका (ध्वज) पचास रुपए निर्धारित किए गए हैं। स्टीकर व ध्वज से एकत्रित की गई राशि अधिकारियों को नकद, ड्राफ्ट या चेक के माध्यम से जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय में जनवरी तक जमा करानी होगी।

अधिकारियों के वेतन में से काटेंगे
इस वर्ष स्टीकर एवं ध्वज का वितरण करने के एक माह ही इसकी समीक्षा की जाएगी। वर्षों पुराने बकाया की भरपाई संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन में से काटकर करेंगे। इस बार बचे हुए स्टीकर व ध्वज को कार्यालय में रखने की बजाय सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय वापस लौटा देंगे।
-विकास एस भाले, जिला कलक्टर एवं जिला सैनिक बोर्ड के अध्यक्ष, चूरू

सिमटेंगे बिखरे गांव

पंचायत स्तर पर रायशुमारी
विश्वनाथ सैनी @ चूरू। एक होकर भी अनेक नाम से पहचाने जाने वाले जिले के कई राजस्व गांवों को एक नाम और एक पहचान दी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर उपजे इस विचार को हकीकत में बदलने के लिए पंचायत स्तर पर रायशुमारी शुरू हो चुकी है। ग्रामीणों की सर्व सहमति बनी और राजनीतिक स्वीकृति मिली तो इन गांवों की कायाकल्प हो जाएगी। जिले के करीब 148 राजस्व गांव व्यवहारिक तौर पर 64 गांव ही हैं। छोटे-छोटे भू-भागों में बंटे होने तथा जाति व गौत्र विशेष के नाम से पैतृक पहचान पाने के कारण ये गांव एक होकर भी अनेक बने हुए हैं।
उदाहरण के तौर पर चूरू तहसील का गांव धीरासर रिकॉर्ड में धीरासर बीकान, धीरासर शेखावतान व धीरासर चारणान नाम से दर्ज है। कई गांव दिशा के नाम पर उतरादा व दिखनादा, आथुना व आगुना जैसे नामों में विभक्त हैं। इसी प्रकार कुछ गांव क्षेत्रफल के लिहाज से बैरासर बडा, छोटा, व मझला में बंट गए। एकीकरण की प्रक्रिया में गांव धीरासर के विभाज्य नाम बीकान, शेखावतान व चारणान हटा दिए जाएंगे। ऎसे ही बडा, छोटा हटा कर गांव बैरासर नाम से ही जाना जाएगा। राजस्व रिकॉर्ड में गांव का नाम एक ही रहेगा। भविष्य में गांव के मूल नाम के आधार पर ही उसका जमाबंदी रिकॉर्ड प्राप्त किया जा सकेगा।

देंगे मिश्रित नाम
जिन राजस्व गांवों का नाम गांव के वास्तविक नाम से मिलता-जुलता नहीं है। उन्हें एकीकरण में एक मिश्रित नाम दिया जाएगा। जैसे सुजानगढ तहसील के गांव देवाणी में शामिल राजस्व गांव रामपुर को मर्ज करने पर गांव का नया नाम देवाणी-रामपुर होगा। इस तरह की स्थिति का सामना रतननगर, छापर, बीदासर व सुजानगढ नगरपालिका क्षेत्र में शामिल राजस्व गांवों के नए नाम को लेकर भी होगी। रतननगर में थैलासर, छापर में पाण्डोराई, नरबदाबास, चेतावास, बीड छापर, बीदासर में दडीबा व चक दडीबा आदि ऎसे ही राजस्व गांव शामिल हैं।

क्या रहेगी प्रक्रिया
गांवों के एकीकरण के संबंध में ग्रामीणों की राय जानने के लिए संबंघित पंचायतों को पत्र भेजे हैं। पंचायतों से सहमति मिलने के बाद एकीकरण के प्रस्ताव राजस्व मण्डल अजमेर को भिजवाए जाएंगे। जहां से प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। इस पर राजनीतिक चिंतन व मंथन होने पर सरकार की ओर से अघिसूचना जारी होगी।

होंगे लाभ
-आबादी के हिसाब से गांव का कद बढेगा
-गांव को भविष्य में बैंकिंग व संचार सुविधाएं मिल सकेंगी
-पानी, बिजली, शिक्षा, चिकित्सा सुविधाएं होंगी बेहतर
-प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुदृढ बनाई जा सकेंगी
-सरकारी योजनाओं का होगा प्रभावी क्रियान्वयन
-यातायात व आवागमन साधनों में होगा इजाफा
-गांव नगरपालिका बनने के कगार पर पहुंच जाएगा
-सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ होगी
कुछ नुकसान भी
- राजस्व गांव के नाम मिलने वाली अतिरिक्त सुविधा छिनेगी
-राजस्व जमाबंदी का रिकॉर्ड एक ही स्थान पर रहेगा
-सरकारी कर्मचारियों की संख्या कम होगी
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गांवों के एकीकरण की दिशा में कदम बढा दिए हैं। 64 वास्तविक गांवों में उनके मिलते-जुलते नामों के 148 राजस्व गांवों को एकीकरण के लिए चिह्नित किया है। पंचायतों को इस संबंध में पत्र भेजे हैं। पंचायतों की सहमति मिलते ही राजस्व मण्डल को एकीकरण के प्रस्ताव भेजेंगे। इससे ग्रामीणों को नुकसान की तुलना में फायदे अघिक होंगे।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू

हिसाब-किताब

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