Thursday, December 31, 2009

मैंने सुना नया साल आया

मैंने सुना नया साल आया
दिल के एफएम से जोड़ लो मन के तार...बजने दो फुल आवाज में प्यार भरे तराने...हटा दो खिड़कियों के सारे परदे...घुल जाने दो सासों में फिजां की महक...बाहों में समेट लो सूरज की किरणें...हवाओं को छू लेने दो तुम्हारे कपोल...उठा लो कलम और लिख दो अपनों के नाम कुछ संदेश...भेज दो सारे दोस्तों को एसएमएस...ठान लो कुछ नया करने की...ले लो संकल्प कुछ बनने का...कुछ पाने का...जिंदगानी के फ्लेशबैक में मार लो एक हल्का सा गोता...पता तो करो क्या पाया...क्या खोया...क्या चाहते थे...क्या मिला...कहां मारी बाजी...कहां पड़े कमजोर...।
जनाब मिल गया हो समय तो हटा दो दीवारों से कलेण्डर...मिला लो घड़ी के कांटे...क्योंकि मैंने सुना नया साल आया...फिर कुछ नया करने का जज्बा लाया...अपनों के नजदीक आने का एक और मौका आया...फिर एक शाम परिवारजन, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ जश्न मनाने का अवसर लाया...मत गंवाना किसी को बधाई देने का अवसर...फिर ना पड़े पछताना...अभी मान लो मेरा कहना...क्योंकि मैं भी यह बात 12 माह और 365 दिन बाद ही दोहरा सकूंगा...इस बीच मुझे दोष मत देना कि मैंने पहले नहीं बताया....कि नया साल आया...।
(पोस्ट पढऩे और ब्लॉग देखने वाले सभी दोस्तों को
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं)

Tuesday, December 29, 2009

मशीनी जुगाड़ रोकेगा जमीनी खिलवाड़

अत्याधुनिक मशीन खरीदने की कवायद
नाप-जोख में इस्तेमाल होगा ईटीएस व जीपीएस
पटवारियों का बचेगा समय
कोई नहीं उलझेगा आंकड़ों में
चूरू, 29 दिसम्बर। जमीनों के नाप-जोख में प्रशासनिक कारिंदों तथा जमीन हड़पने की नीयत रखने वाले पड़ोसी के हाथों होने वाली गड़बड़ी पर अब लगाम कसी जा सकेगी। अनपढ़ ग्रामीण भी पटवारियों के आंकड़ों के जाल में अब नहीं फंस पाएगा। जमीन के नाप-जोख में इंच भर की गड़बड़ी किए जाने की गुंजाइश नहीं बचेगी। यही नहीं बल्कि अब बड़े खेतों को नापने के लिए पटवारियों को घंटों तक नहीं जूझना पड़ेगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने पहल कर जमीनों को नापने की अत्याधुनिक मशीन इलेक्ट्रोनिक टोटल स्टेशन (ईटीएस) व ग्लोबल पोजीसिंग सिस्टम (जीपीएस) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जिला कलक्टर डा. केके पाठक की पहल पर नई दिल्ली की एक कम्पनी ट्रिम्बल ईटीएस व जीपीएस का प्रदर्शन भी कर चुकी है। अन्य कम्पनियों की मशीनों का भी प्रदर्शन होगा। जिले में कम से कम एक अत्याधुनिक मशीन खरीदी जानी तय है। मशीन की कीमत वाजिब रही तो जिले की प्रत्येक तहसील के लिए एक-एक मशीन खरीदी जाएगी।
मिलीमीटर तक का नाप
वर्तमान में जमीनों का नाप-जोख जरीब (कड़ी) व फीते से होता है।
जिसमें फुट या मीटर तक का ही सही आकलन हो सकता है। जबकि अत्याधुनिक मशीन से ऊंचाई, लम्बाई, चौड़ाई व गहराई को मिलीमीटर तक में नापा जा सकेगा। जमीन का पूरा नाप-जोख मशीन की डिस्पले पर खुद मालिक भी देख सकेगा। इससे नापने के बाद पटवारियों को ना तो कागज काले करने पडेंग़े और ना ही आंकड़ों में उलझना पड़ेगा। मशीन खुद ही सारा हिसाब-किताब कर देगी। कम्प्यूटर के माध्यम से नक्शा तक निकाला जा सकेगा।
कभी नहीं आएगा अंतर
पटवारियों के अनुसार गहरा गड्ढ़ा या ऊंचे टिब्बे वाली जमीन को समतल करने के बाद उसके वास्तविक नाप-जोख और पूर्व में करवाए नाप-जोख में अंतर आ जाता है। जबकि ईटीएस व जीपीएस से एक बार नाप-जोख होने के बाद भविष्य में कभी कोई अंतर नहीं आएगा। खास बात तो यह है कि जमीन के नाप-जोख के लिए एक बार कोई स्थायी बिन्दू तय करने के बाद विवाद की स्थिति में जमीन नापने की नौबत आने पर मशीन उस स्थायी बिन्दू को खुद ढंूढ़ लेगी।
ऐसा होगा नाप-जोख
इलेक्ट्रोनिक टोटल मशीन को ट्राईपोड पर रखकर स्थायी बिन्दू तय किया जाएगा। ईटीएस के सामने रखे रिफ्लेक्टर के बीच की दूरी की गणना कुछ ही क्षणों में हो जाएगी। रिफ्लेक्टर को अधिकतम तीन किलोमीटर दूर रखा जा सकेगा। इसके अलावा जीपीएस को तो हाथ में लेकर जमीन में एक बिन्दू से दूसरे बिन्दू तक ले जाने से ही दूरी की गणना हो जाएगी। दोनों ही प्रक्रिया इतनी सरल हैं कि अनपढ़ व्यक्ति भी आसानी से समझ सकता है।
जिला प्रशासन जमीनों की नाप-जोख के लिए अत्याधुनिक मशीन ईटीएस व जीपीएस खरीदना चाहता है। प्रशासन को इनकी तकनीकी जानकारी भी दे दी गई है। इनसे नाप-जोख किए जाने के बाद गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
-विरेन्द्र कुमार राय,डिप्टी बिजनेस मैनेजर, ट्रिम्बल, नई दिल्ली
जमाना हाइटेक हो गया है। ऐसे में जमीनी विवाद से बचने के लिए अत्याधुनिक मशीन खरीद रहे हैं। जिले में कम से कम एक मशीन खरीदी जाएगी। इसके अलावा नरेगा कार्य में सड़क, जोहड़ व मेड़बंदी के नाप-जोख में भी इन मशीनों को इस्तेमाल कर सकेंगे। लागत कम हुई तो प्रत्येक तहसील के लिए एक-एक मशीन खरीदेंगे।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू

Tuesday, December 22, 2009

भेदिए बताते सुराख

आगार प्रबंधन ने करवाई वीडियोग्राफी, रोडवेज बुकिंग स्थलों से उठाते हैं सवारी, दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है घाटा, गलफांस बनी 171 निजी बसें, रोजाना 50 हजार का चूना
चूरू, 22 दिसम्बर। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम में दिनोंदिन बढ़ते घाटे के लिए परिवहन महकमे के भेदिए ही जिम्मेदार हैं। विभागीय कारिंदे सरकार की नौकरी बजाते हुए निगम के हित में काम करने के भले ही लाख दावे कर रहे हों पर सच्चाई यह भी है कि निजी बस संचालकों को निगम की आय में सुराख करने की सीख भी उन्हीं की दी हुई है।इसे परिवहन विभाग की कथित अनदेखी कहें या निजी बस संचालकों से मिलीभगत कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाले निजी वाहनों से निगम को रोजाना तकरीबन पचास हजार रुपए का घाटा हो रहा है। ये वो बसें हैं जो निगम की नियमित बस सेवाओं के निर्धारित समय व निर्धारित मार्ग पर दस से पन्द्रह मिनट के अंतराल में संचालित हो रही हैं। हैरत की बात तो यह है कि अवैध रूप से संचालित इन निजी वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए महकमे के पास नियम भी हैं और कानून भी लेकिन उस पर अमल करना कोई नहीं चाहता।यह खुलासा चूरू आगार प्रबंधन की ओर से करवाई गई निजी बसों की वीडियोग्राफी में हुआ है। वीडियोग्राफी की रिपोर्ट बीते सप्ताह प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, जिला कलक्टर, जिला परिवहन अधिकारी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक सौंपी जा चुकी है लेकिन निजी बसों पर अंकुश की रणनीति बनाता कोई नहीं दिख रहा। पत्रिका को हाथ लगी इस रिपोर्ट के अनुसार जिला मुख्यालय से रोजाना 171 अवैध निजी बसें संचालित हो रही हैं। ये बसें राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध रूप से दौडऩे के साथ ही अधिकृत बुकिंग स्थल से सवारियां भी उठा रही रही हैं।
यूं लगाते हैं चूना
आधिकारिक जानकारी के अनुसार परिवहन महकमे की कागजी खानापूर्ति के नाम पर निजी बस संचालकों ने स्टेट कैरिज व कॉन्टे्रक्ट कैरिज परमिट ले रखे हैं। स्टेट कैरिज परमिट प्राप्त निजी बस को राष्ट्रीयकृत मार्ग की बजाय ग्रामीण मार्ग से गुजरना होता है। इसी तरह निर्धारित स्थान व निर्धारित समय के लिए कॉन्ट्रेक्ट कैरिज परमिट जारी किया जाता है। दोनों ही स्थिति में निजी बस चालक निगम के अधिकृत बुकिंग स्थल से सवारी नहीं ले सकते। हकीकत यह है कि परिवहन महकमे के अधिकारियों की मिलीभगत से निजी बस संचालक दोनों ही तरह के परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं।
हर बार टांय-टांय फिस्स
अवैध रूप से दौड़ती निजी बसों की रोकथाम के लिए परिवहन व पुलिस महकमे की प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद से निगम प्रबंधन अधिकृत बुकिंग स्थलों की वीडियोग्राफी करवाता है। लेकिन नतीजा हर बार सिफर रहता है। इससे पहले भी तीन बार वीडियोग्राफी करवाकर अवैध निजी बसों की पहचान उजागर की जा चुकी है। परिवहन विभाग ने निजी बसों पर अंकुश के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाए।
चूरू आगार का बढ़ता घाटा
वर्ष~~ ~~~~~~~~हानि
2006-07 ~~~~~8,0००
2007-08~~~~~~ 1,95,0००
2008-09~~~~~~1,41,000
2009-10~~~~~~ 61,49,000
(चालू वर्ष का घाटा नवम्बर तक का)
पंखा सर्किल
निगम के इस अधिकृत बुकिंग स्थल पर 25 नवम्बर को सुबह सवा सात से शाम साढ़े सात बजे तक वीडियोग्राफी करवाई गई। इस दौरान यहां से रतनगढ़, सुजानगढ़, डीडवाना व बीकानेर के लिए कुल 36 निजी बसें अवैध रूप से संचालित हुईं।
कलक्ट्रेट सर्किल
जयपुर से जोडऩे वाले इस प्रमुख मार्ग पर स्थित निगम के अधिकृत बुकिंग स्थल की 26 नवम्बर को सुबह पौने सात से शाम सवा सात बजे तक वीडियोग्राफी करवाई गई। इस बीच यहां से फतेहपुर, सीकर व जयपुर के लिए कुल 72 अवैध निजी बसें दौड़ीं।
लाल घंटाघर
27 नवम्बर को सुबह साढ़े सात से शाम आठ बजे निगम के इस अधिकृत बुंकिग स्थल की वीडियोग्राफी करवाई। इस दौरान यहां से झुंझुनूं वाया बिसाऊ तथा राजगढ़ वाया दूधवाखारा व ढाढऱ के लिए 6 3 अवैध निजी बसों का संचालन हुआ।
~~~~~~
सरकार के निर्देश पर रोडवेज के अधिकृत बुकिंग स्थलों की वीडियोग्राफी करवाकर आरटीओ, डीटीओ, कलक्टर व एसपी को हाल ही रिपोर्ट सुपुर्द की गई है। अवैध रूप से दौड़ती निजी बसों पर अंकुश के प्रति अधिकारियों की बेरुखी यूं ही बनी रही तो निगम कभी भी घाटे की स्थिति से नहीं उबर पाएगा।
-बेनीप्रसाद शर्मा, मुख्य प्रबंधक, चूरू आगार
वीडियोग्राफी की कोई रिपोर्ट मुझे नहीं मिली है। वैसे भी वीडियोग्राफी कराने से कुछ नहीं होने वाला क्योंकि निजी बसों के मालिक बस संचालन के लिए प्रतिमाह टैक्स के रूप में 25-25 हजार रुपए देते हैं।
-जीआर महरड़ा,जिला परिवहन अधिकारी, चूरू
आगार प्रबंधन की ओर से अवैध रूप से संचालित बसों की वीडियोग्राफी की सीडी मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक व जिला परिवहन अधिकारी को निर्देशित किया जा चुका है। कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई, यह उनसे पूछने पर ही पता लगेगा।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, December 14, 2009

रोग ने बिगाड़ा शिक्षा योग

शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम
जिले में दस हजार से अधिक विद्यार्थी रोगग्रस्त
चूरू, 14 दिसम्बर। पेट में कीड़े कुलबुलाएं, शरीर को बार-बार खुजाना पड़े, फोड़े-फुंसी पर मक्खियां भिनभिनातीं रहे, दांत व कान में दर्द हो और नजर हो कमजोर। ऐसे में पढ़ाई का माहौल बने तो आखिर कैसे?। ऐसी समस्याओं से जिले में एक नहीं बल्कि दस हजार से अधिक विद्यार्थियों को जूझना पड़ रहा है। बात भले ही गले नहीं उतर रही हो मगर शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम 09-10 की रिपोर्ट तो यही कहती है।
कार्यक्रम के तहत 17 नवम्बर से 12 दिसम्बर तक जिलेभर के प्राथमिक तथा माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। परीक्षण में सामने आया कि छोटी-छोटी बीमारियां विद्यार्थियों की पढ़ाई का गणित बैठाने में बाधा बन रही हैं। ऐसे में अस्वस्थ पाए गए विद्यार्थियों को मौके पर दवा देने के साथ ही सौ विद्यार्थियों को अस्पताल में तत्काल इलाज करवाने की सलाह दी गई है। सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत चिकित्सा विभाग के सहयोग से चलाए गए कार्यक्रम के तहत चिकित्सा अधिकारी, एएनएम, जीएनएम व एलएचवी की टीम ने विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परखा है।

डेढ़ लाख से अधिक का परीक्षण
प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यक्रम के तहत जिलेभर के एक लाख 58 हजार 686 से अधिक विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की गई है। इनमें दस हजार 204 विद्यार्थी अस्वस्थ्य पाए गए। इनके अलावा चूरू में 8 1, राजगढ़ में 17 तथा तारानगर में दो विद्यार्थियों को उपचार के लिए अस्पताल में रेफर किया है। फिलहाल कुछेक टीमों की रिपोर्ट आनी शेष है। ऐसे में अस्वस्थ बच्चों की संख्या में इजाफा होने का अनुमान है।

स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदार
विद्यार्थियों के खराब स्वास्थ्य के संबंध में परिजनों के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदार है। कई स्कूलों में पेयजल टंकियों की साफ-सफाई के प्रति गंभीरता का अभाव है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों जलदाय विभाग ने जलमणि कार्यक्रम के तहत चूरू व तारानगर ब्लॉक के 256 राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पीने के पानी की जांच कराई तो 99 विद्यालयों का पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। 47 विद्यालयों के पानी में जीवाणु पाए गए तथा 52 विद्यालयों के पानी में वांछित रसायनों की मात्रा गड़बड़ मिली।

आंकड़ों की जुबानी (बीसीएमएचओ कार्यालयों के अनुसार)
ब्लॉक-----जांच-----अस्वस्थ-----रेफर
चूरू------19579---1687------81
राजगढ़----17471---1253------17
तारानगर---19945---2054------2
सुजानगढ़---33198---2456------0
सरदारशहर--40281---1174-----0
रतनगढ़----28212---1580------0

इन रोगों से पीडि़त
रोग--------विद्यार्थी
खून की कमी--1674
पेट में कीड़े----515
कान बहना-----596
रतौंधी--------88
फोड़े-फुंसी-----1625
खाज खुजली---991
नेत्र पीड़ा-----477
दंत पीड़ा-----506
अन्य-------3732
कुल -------10204
~~~~~~
कार्यक्रम के तहत हजारों विद्यार्थी अस्वस्थ पाए गए हैं। समस्त बच्चों को मौके पर ही दवा दे दी गई। जिन विद्यालयों में अस्वस्थ विद्यार्थियों की संख्या अधिक पाई गई है, उनमें पानी की टंकी व कक्षा कक्षों में साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था करने के लिए संस्था प्रधानों को निर्देश दिए जाएंगे।
-ओम प्रकाश जांगिड़, जिला परियोजना समन्वयक, सर्व शिक्षा अभियान, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, December 7, 2009

गांवों का सफर होगा सुहाना

155 ग्राम पंचायतों में भी दौडेंगी रोडवेज
निगम को प्रस्ताव भेजा

चूरू, 7 दिसम्बर। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम मुख्यालय अगर चूरू आगार के प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो जिले के करीब पांच सौ गांवों का सफर सुहाना हो जाएगा। आगार प्रबंधन ने जिले की 155 ग्राम पंचायतों को रोडवेज बस सेवा से जोडऩे का प्रस्ताव भेजा है।
सब कुछ प्रस्ताव के मुताबिक हुआ तो ग्रामीण विकास को रफ्तार पकडऩे में देर नहीं लगेगी। ग्रामीणों को बस सुविधा के लिए मीलों तक का सफर तय नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीणों को उनके गांव की मुख्य सड़क, चौक व चौराहे तक बस सेवा उपलब्ध हो सकेगी। इसके बाद जिले में एक भी ग्राम पंचायत सीधी बस सेवा से वंचित नहीं रहेगी। प्रस्ताव भेजने से पहले आगार प्रबंधन ने समस्त 155 ग्राम पंचायतों का दौरा कर करीब सौ नए मार्ग चिह्नित किए है।
प्रत्येक बस में प्रति किलोमीटर 39 यात्री सफर करने के अनुमान तथा रोजाना प्रति किलोमीटर औसत सवा नौ रुपए का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

36 बसें और मांगी
प्रबंधन ने समस्त 155 ग्राम पंचातयों को बस सेवा से जोडऩे के लिए मुख्यालय से 36 बसें और मांगी है। इनके अनुपात में पर्याप्त चालक व परिचालकों की आवश्यकता भी जताई है।

नौ हजार किमी में होगी सुविधा
निगम के इस प्रस्ताव से 155 ग्राम पंचायतों में नौ हजार एक सौ दो किलोमीटर के दायरे में लोगों को फायदा हो सकेगा। सबसे छोटा पांच किमी लम्बा रूट बीदासर से घंटियाल तथा सबसे बड़ा 119 किमी लम्बा रूट तारानगर से रावतसर के बीच निर्धारित किया गया है।

लाभान्वित होने वाली पंचायत
चूरू: बंूटिया, भामासी, लालासर बणीरोतान, दूधवाखारा, देपालसर, श्योपुरा, सहनाली छोटी, खण्डवा, रीबिया, जोड़ी, कोटवाद, मोलीसर बड़ा, आसलखेड़ी, खींवसर, मेहरी, झारिया, लोहसना बड़ा, घांघू, रतनगढ़: भाणुदा, कांगड़, मेलूसर, नौसरिया, गोलसर, नुवां, सिकराली, बीनादेसर, रतनादेसर, भुखरेड़ी, रतनसरा, दाउदसर, बछरारा, टिडियासर, सीतसर, रतनसरा, जांदवा।तारानगर : कालवास, बाय, पण्डरेउ ताल, रेड़ी, लूणास, सोमसीसर, नेठवा, अलायला, मिखाला, मेघसर, गाजुवास, सात्यंू, राजपुरा, ढाणी कुम्हारान।राजगढ़ : कालाना ताल, विजयपुरा, मण्ड्रेला, ढाणी मौजी, नेशल छोटी, सांखण ताल, बीजावास, नौरंगपुरा, सुलखनिया छोटा, नूहंद, जसवंतपुरा, बेवड़, कालरी, राघा छोटी, राघा बड़ी, खेरू बड़ी, सूरतपुरा, न्यांगल छोटी, ख्याली, ढंढाल लेखू, नवां, भैंसली, रामपुरा, धानोठी बड़ी, बाघेला, पहाड़सर, गुलपुरा, बिरमी खालसा, कांजण, घणाउ, खुडी, लाखलाण, भुवाड़ी, महलाना उतरादा, ढिगारला, ढाणी बड़ी।सरदारशहर : अजीतसर, रूपलीसर, दुलरासर, देराजसर, जैतसीसर, बुकलसर, बड़ा, पिचकराई ताल, फोगां, डालमाण, मालसर, मालकसर, भोजासर छोटा, नैणासर, सुमेरियान, आसपालसर, शिमला, बोघेरा, बिल्यूबास, रामपुरा, रातुसर, रणसीसर, तोलासर, बिकमसरा, रामसीसर, रंगाईसर, कीकासर, बैजासर, अड़सीसर, राजासर, बीकान, भोजूसर, बुकलसर बड़ा, पातलीसर, ढाणी पांचरा, मेहरी, जयसिंहसर, मेहरासर उपाधियान, कल्यापुरा। सुजानगढ़ : ढढ़ेरू, ढाणी कालेरा, जोगलिया, जैतासर, सिमसिया, आबसर, हरासर, राजियासर मीठा, ऊंटालड़, ऊंटवाला, भासीणा, बाघसर, आथूणा, कानूता, जीली, बोबासर, बड़ावर, भानिसरिया तेज, सारोठिया, लालगढ़, पारेवड़ा, लोहारा, मुंदड़ा, जोगलसर, चरला, सड़ू, कल्याणसर, बाड़सर, गिरवरसर, साण्डवा, मलसीसर, मुरढाकिया, खारिया, कनीराम, नौरंगसर, गोपालपुरा, बालेरा, दुंकर, घंटियाल, अमरसर।

रोजाना तय होगा इतना
तहसील-----किमी-----बस
चूरू------812------3
राजगढ़----1770-----7
सरदारशहर--2846----11
सुजानगढ़---1976----8
रतनगढ़-----868----4
तारानगर-----730----3

फैक्ट फाइल
कुल ग्राम पंचायत -249
राष्ट्रीयकृत सड़क मार्गों पर स्थित पंचायत-60
पूर्व में जोड़ी गईं पंचायतें- 34
नई जुडऩे वाली पंचायतें-155
संचालन के लिए प्रस्तावित किलोमीटर-९१०२
अतिरिक्त बसों की मांग-36-
---
जिले की 155 ग्राम पंचायतों को रोडवेज बस सेवा से जोडऩे का प्रस्ताव हाल ही मुख्यालय को भेजा है। इसी वित्तीय वर्ष में इसे मंजूरी मिलनी की उम्मीद है। इसके बाद जिले की समस्त पंचायतों को रोडवेज सेवा नसीब हो सकेगी।
-बेनी प्रसाद शर्मा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज आगार, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

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