Wednesday, October 28, 2009

गूंज उठी शहनाइयां

घोड़ी, बैण्ड-बाजा, हलवाई, धर्मशालाएं-गेस्ट हाउस हुए बुक
चूरू, 28 अक्टूबर। देवउठनी एकादशी के साथ ही अंचल में गुरुवार से शादियों का सीजन शुरू हो गया है। देवउठनी का अबूझ सावा होने के कारण कई स्थानों पर शहनाई गूजेंगी तथा डीजे और बैण्ड के बोल सुनाई पड़ेंगे। घोड़ी, बैण्ड, टेण्ट, वाहन व धर्मशालाओं की कई महीनों तक की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। हलवाई, पण्डित, विवाह स्थल सजाने वाले और दुकानदारों की व्यस्तता बढ़ गई है। गुरुवार को शादियों की धूम के साथ ही तुलसी विवाह की परम्परा भी निभाई जाएगी।

आए हम बाराती...
चहुंओर सावों की धूम होने के कारण वाहन मालिकों के चेहरे खिल उठे हैं। बारात के लिए जीप, कार और बसों की कई महीनों तक की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। महालक्ष्मी ट्रेवल्स के राजेश जांगिड़ के अनुसार बसों का किराया कम से कम 21 सौ रुपए लिया जा रहा है। शादियों की सीजन में यात्री वाहनों की कमी होने से अन्य वाहन चालकों को भी अच्छी कमाई की उम्मीद है।

घोड़ी पर होकर सवार...
दूल्हे राजा को घोड़ी पर बैठाकर तोरणद्वार तक पहुंचाने के लिए घोड़ी मालिकों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। घोड़ी को दुल्हन की तरह सजाने के साथ ही उसकी खुराक भी बढ़ा दी गई है। घोड़ी मालिक कमल कुमार ने बताया कि घोड़ी को रोजाना तीन किलोग्राम दूध पिलाया जा रहा है तथा घी खिलाना भी शुरू कर दिया है। शादी में घोड़ी को दो घंटे तक ले जाने पर 11 सौ तथा फुल टाइम के 21 सौ रुपए लिए जा रहे हैं। छह फरवरी तक के लिए घोडिय़ों की एडवांस बुकिंग हो चुकी हैं।

बहारों फूल बरसाओ...
शादियों की धूम शुरू होने से पुष्प भण्डारों पर बहार आ गई है। गजरे और फूल मालाएं तैयार करने का कार्य जोरों पर है। पुष्प भण्डार के मालिक बुद्धमल सैनी ने बताया कि सौ रुपए से दो हजार रुपए की वरमालाएं तैयार की गई हैं। देवउठनी एकादशी पर दस से पन्द्रह क्विंटल फूल बिकने की उम्मीद है। दूल्हे राजा के लिए वाहनों के सजने का सिलसिला सुबह दस बजे बाद से शुरू होगा। पांच सौ से पांच हजार रुपए तक में वाहन सजाए जाएंगे।

सजना है मुझे सजना...
शादी के मौके पर ब्यूटी पार्लरों में रौनक लौट आई है। दुल्हनें सजने-संवरने में कोई कमी नहीं छोड़ रही हैं। दुल्हन की सहेलियों में भी उत्साह देखा जा रहा है। दूल्हा और दुल्हन के साथ-साथ सजने के लिए उनके दोस्त और परिजन भी ब्यूटी पार्लर पहुंच रहे हैं। कायाकल्प ब्यूटी पार्लर संचालक मंजू शर्मा ने बताया कि देवउठनी को कई दुल्हनों ने एडवांस बुकिंग करवाई है। दुल्हनें सजने-संवरने में ग्यारह सौ से पांच हजार रुपए तक खर्च कर रही हैं।

मुहूर्त अबूझ, सावे 22 नवंबर से
ज्योतिषाचार्य पण्डित बालकृष्ण कौशिक ने बताया कि देवउठनी एकादशी का पौराणिक महत्व के कारण इस दिन अबूझ सावों की धूम रहती है। लोग विवाह के लिए इसे खासा महत्व देते हैं। एकादशी को दोपहर 12.55 से रात 1.30 बजे तक मृत्युलोक भद्रा होने से फेरे या पाणिग्रहण संस्कार उक्त समय निकालकर ही कराया जाना बेहतर है। उन्होंने बताया कि सूर्य के वृश्चिक राशि में आने के बाद ही सावे 22 नवंबर से शुरू होंगे। फिलहाल सूर्य तुला राशि में विचरण कर रहा है।

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Tuesday, October 27, 2009

सीधे सवालों के टेढ़े जवाब

प्रभारी सचिव भाणावत ने अधिकारियों को सुनाई खरी-खरी
चूरू, 27 अक्टूबर। आपको विद्युत सुविधा से वंचितों की संख्या ही मालूम नहीं तो लक्ष्य कैसे हासिल करोगे...क्या कहा चारे की कमी नहीं है... प्रशासन ने तो 18 स्थानों पर चारा डिपो खोले हैं...आप निरीक्षण तो खूब करते हो मगर उनका परिणाम तो कुछ भी नहीं निकला...श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान हुआ ही नहीं और आपने मजदूरी का औसत आंकड़ा भी निकाल लिया...सीएमएचओ आप सो रहे हो...रात को कहां गए थे...स्वास्थ्य का ध्यान रखों, आपके कंधों पर पूरे जिले के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है...।
सीधे-सीधे सवालों के ऐसे जवाब मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों की बैठक में सामने आए। दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार को चूरू आए प्रभारी सचिव राजेन्द्र भाणावत ने अधिकारियों की जमकर क्लास ली। कुछेक को छोड़ कोई भी अधिकारी प्रभारी सचिव के सीधे-सीधे सवालों का ढंग से जवाब नहीं दे पाया। आलम यह था कि अधिकारी, प्रभारी सचिव के हर दूसरे सवाल में उलझते गए।
प्रभारी सचिव भाणावत ने जोधपुर विद्युत वितरण निगम के अधीक्षण अभियंता एनएन चौहान से विद्युत सुविधा से जुडऩे लायक ढाणियों की संख्या के बारे में पूछा मगर उन्हें पता ही नहीं था। पशुपालन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि जिले में चारे की कमी नहीं खल रही है। इस पर प्रभारी सचिव ने कहा कि आपको पता नहीं है तो यह नहीं बोले कि सब कुछ ठीक है। क्योंकि अधिकारी की जानकारी और ग्रामीण स्तर की समस्या की वास्तविक स्थिति में अंतर रहेगा तो असंतोष बढ़ेगा।
प्रभारी सचिव ने डीएसओ हरलाल सिंह से कहा कि विभिन्न योजनाओं के तहत राशन सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंची या नहीं.. इसका कैसे पता लगाते हो। डीएसओ इस सवाल का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। सीएमएचओ वीके जिंदल की सबसे अधिक खिंचाई की गई।
जिंदल प्रभारी सचिव के कई सवालों के जवाब में न केवल उलझ गए बल्कि गलत जानकारी देने से भी नहीं चुके। एक सवाल के जवाब में सीएमएचओ ने कम्पाउण्डर मरीज को चिकित्सकीय परामर्श देने का अधिकार रखने की बात कही तो प्रभारी सचिव ने खासी नाराजगी जताई। प्रभारी सचिव ने सबसे अधिक लम्बे समय तक नरेगा पर चर्चा की।
नरेगा के जेईएन अनिल माथुर से उन्होंने न्यूनतम मजदूरी, स्वीकृत व अधूरे पड़े कार्यों समेत कई सवाल किए। 15 अक्टूबर तक के पखवाड़े में न्यूनतम मजदूरी औसत 8 3 रुपए का जवाब सुन प्रभारी सचिव ने कहा कार्य का नाप-जोख हुआ ही नहीं और आपने औसत मजदूरी कैसे निकाल ली। बैठक में जिला कलक्टर डा. केके पाठक, एडीएम बीएल मेहरड़ा, एएसपी अनिल क्याल समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

हर एक को दिए निर्देश
~अधिक से अधिक राशन टिकटों का हो वितरण।
~नरेगा में टांके निर्माण के साथ अन्य योजनाओं से पौधे दो।
~नरेगा श्रमिकों को 15 दिन में हो मजदूरी का भुगतान।
~जेईएन व मेट की नाप-जोख में अंतर होने पर हो सख्त कार्रवाई।
~जिले में पचास फीसदी मेट महिलाएं हो।
~विद्यार्थियों की फर्जी संख्या दिखाने वाले स्कूल हो बंद।
~निजी अस्पताल व जांच केन्द्रों के आंकड़ें भी एकत्रित किए जाए।
~नरेगा में जहां कुछ काम अधूरे हैं वहां नए कार्य न हो स्वीकृत।
~सरपंचों को सामग्री राशि स्वीकृत करने में विशेष सावधानी बरतें।
आंकड़ों में नरेगा की तस्वीर
~नरेगा में 28 हजार 74 श्रमिक कार्यरत हैं।
~नरेगा के आठ हजार कामों में से एक हजार 6 7 पूरे हुए ।
~श्रमिकों को रोजाना की मजूदरी औसत 83 रुपए मिलती है।
~70 रुपए से कम रोजाना किसी भी श्रमिक को नहीं मिलते।
~रोजाना के 70-80 रुपए पाने वाले 187 श्रमिक हैं।
~870 श्रमिक रोजाना 80-90 रुपए मजदूरी पाते हैं।
~केवल दस श्रमिकों को रोजाना 90-100 रुपए मिलते हैं।
~जिले में महिला मेट केवल दस फीसदी हैं।

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Saturday, October 24, 2009

दो सौ 72 शिक्षक पदस्थापित

परिवेदनाओं का निस्तारण
चूरू, 24 अक्टूबर। शिक्षा विभाग ने तृतीय से द्वितीय श्रेणी में पातेय वेतन पर पदोन्नत माध्यमिक विद्यालयों के दो सौ 72 शिक्षकों को पदस्थापित किया है। माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में पदस्थापित शिक्षकों की सूची चस्पा कर दी गई। विभागीय जानकारी के अनुसार मण्डल के पांचों जिलों के 158 शिक्षकों को परिवेदनाओं का निस्तारण करने के बाद फिर से इधर-उधर किया गया है। झुंझुनूं जिले के अनुसूचित जाति के 104 तथा सामान्य के दस शिक्षकों के पूर्व में पदोन्नति पर पदस्थापित होने से वंचित रह जाने के कारण अब उन्हें भी लाभान्वित किया गया है।
विभागीय सूत्रों ने बताया गत माह तृतीय से द्वितीय श्रेणी में पदोन्नति पर पदस्थापित किए जाने के बाद करीब 250 शिक्षकों ने अन्य विद्यालयों में पदस्थापित किए जाने की परिवेदना लगाई थी। इनमे से 158 शिक्षकों को द्वितीय से प्रथम श्रेणी में पदोन्नति के बाद खाली हुए पदों पर पदस्थापित किया गया है।

इनको दी प्राथमिकता
परिवेदनाओं के निस्तारण में महिला शिक्षक तथा असाध्य रोग से पीडि़त शिक्षकों को उनके ब्लॉक में पदस्थापित किए जाने को प्राथमिकता दी गई है। मण्डल में 15-16 महिला शिक्षक तथा असाध्य रोग से पीडि़त 5-6 शिक्षकों को अन्य ब्लॉक से खुद के ब्लॉक में पदस्थापित किया गया है।

फिर इधर-उधर
चूरू-45
बीकानेर-10
झुंझुनूं-47
हनुमानगढ़-30
श्रीगंगानगर-26
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झुंझुनूं जिले में एससी के 104 तथा सामान्य के दस शिक्षक पदोन्नति पर पदस्थापित होने से रह गए थे। इनके अलावा 158 शिक्षकों को परिवेदनाओं के निस्तारण करके पदस्थापित किया है।
-बीएल मीणा,उप निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Friday, October 23, 2009

पर्दे के पीछे क्या है...

रामलीला के पात्रों की असल जिंदगी
चूरू, 23 सितम्बर। संवाद कौशल और अभिनय कला के बूते रंगमंच पर रामायण के पात्रों का जीवंत चित्रण कर लोगों का विशुद्ध मनोरंजन एवं ज्ञानवद्र्धन करने वाले रंगकर्मियों के लिए दर्शकों से मिलने वाली दाद और वाह-वाही भले ही दम तोड़ती नाट्यविधा के लिए संजीवनी बूटी का सा काम करती हो, तालियों की गडग़ड़ाहट सुन इन कलाकारों का मन मयूर नाचने लगता हो और थकान दूर हो जाती हो। किसी की शाबासी या आलिंगन उनके लिए वरदान बन जाता हो। लेकिन सच्चाई यह नहीं है। इन कलाकारों की असल जिंदगी इतनी सुनहरी और रूपहली कतई नहीं है। असल जिंदगी बड़ी ही जटिल, मेहनतकश और दुविधाओं से परिपूर्ण है। चेहरे पर हास्य का भाव है और दिल के किसी कोने में गम और दर्द की टीस छिपी है। महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मंदी से जूझते हालातों में पारिवारिक रिश्ते और सामाजिक समरसता बनाए रखना इनके लिए भी आम जन की तरह ही मुश्किल है।मर्यादा पुरुषोत्तम राम, महाप्रतापी और आज्ञाकारी लक्ष्मण, धरती पुत्री व पतिव्रता सीता तथा महान पंडि़त, तंत्र-मंत्र-यंत्र के ज्ञाता और तपस्वी अहंकारी रावण जैसे पात्रों को रंगमंच पर अपने अभिनय से जीवंत बना देने वाले इन कलाकारों की असल जिंदगी को पत्रिका ने लोको स्थित हनुमान कला मंच की ओर से मंचित रामलीला के पात्रों में खोजा तो पाया।
हनुमानजी चार बच्चों के पिता
पवन पुत्र एवं बाल ब्रह्मचारी वीर हनुमान की भूमिका निभाने वाले श्रवण कुमार चार बच्चों के पिता हैं। पेशे से फार्मासिस्ट श्रवण पुत्र मोह में परिवार नियोजन नहीं अपना पाए। वैसे रामलीला के पात्र के रूप में भगवान श्रीराम की आज्ञा पर संजीवनी बूंटी के लिए औषधियों से भरा पहाड़ हाथ पर उठाकर लाने वाले श्रवण हारी-बीमारी में परिवारजनों के उपचार के लिए महंगाई से हार जाते हैं।
सीता को डांटते हैं लक्ष्मण
रामायण के पात्र के रूप में भाभी सीता को मां से भी बढ़कर मानने वाले लक्ष्मण (नंदकिशोर बरोड़) असल जिंदगी में पेशे से शिक्षक हैं। मजे की बात है कि रामलीला में सीता बने (पृथ्वी सिंह) उनकी स्कूल में पढ़ते हैं। शिष्य होने के नाते स्कूलमें कभी-कभी गुरुजी की डांट भी सुननी पड़ती है तो मार भी खानी पड़ती है।
श्रीराम की शिष्य है सीता
रामलीला के मंच पर भरे स्वयंवर में भगवान श्रीराम के गले में वर माला डाल कर उनसे परिणयसूत्र में बंधने वाली सीता असल जिंदगी में रामजी का ही शिष्य है। सीता की भूमिका निभा रहे पृथ्वीसिंह का कहना है कि मंच पर उनके पति मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम असल जिंदगी में भी उनके लिए वंदनीय एवं पूजनीय हैं। दरअसल भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे घनश्याम पेशे से शिक्षक हैं और वे पृथ्वी सिंह को स्कूल में पढ़ाते भी हैं।
हंसी में छुपा गम
चेहरे के हाव-भाव और संवादों से दर्शकों को सबसे अधिक गुदगुदाने वाले हास्य कलाकार (प्रदीप कुमार) की जिंदगी में अन्य कलाकारों की तुलना में सबसे अधिक गम है। डेढ़ माह पहले ही उनकी माता का निधन हुआ। उनके पित तो उन्हें इससे पहले ही छोड़ गए। दिल के किसी कोने में उनके लिए गम और दर्द बसा होने के बावजूद इस हास्य कलाकार ने उसे कभी चेहरे पर झलकने नहीं दिया।
राम जी को चाहिए लव-कुश
महर्षि वशिष्ट के गुरुकुल में रहकर शिक्षा पाने वाले भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे घनश्याम दत्त असल जिंदगी में भी गुणी, ज्ञानी, अनुशासित और आज्ञावान हैं। बीएससी, बीएड तक शिक्षा ग्रहण करने वाले घनश्याम घर में भी मर्यादित व्यवहार करते हैं। श्रीराम जी बने घनश्याम की अब एक ही मुराद है वे असल जिंदगी में भी लव-कुश के पिता बने।
रफीक है महापंडि़त रावण
रामायण के पात्रों में महाज्ञानी, महापंडि़त रावण के बारे में भले ही लोग कहते होंगे कि रावण ब्राह्मणकुल का (हिन्दू) था, परन्तु रामलीला के मंच पर रावण की भूमिका मोहम्मद रफीक अंसारी बखूबी निभा रहे हैं। पेशे से शिक्षक अंसारी 12 साल से रामलीला से जुड़े हैं।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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भत्ता नहीं प्रशिक्षण लो

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अक्षत कौशल योजना
चूरू, 23 अक्टूबर। स्नातक बेरोजगारों को अक्षत योजना के तहत अब भत्ता नहीं मिलेगा। बेरोजगारी भत्ता चाहने वालों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार ने बेरोजगारी भत्ते की 'अक्षत योजना में संशोधन कर 'अक्षत कौशल योजना के नाम से नई योजना लागू की है। अब बेरोजगारों को भत्ते की राशि की बजाय 'कौशल वाउचर मिलेगा, जिसे दिखाकर वह प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेगा। भत्ते की राशि बेरोजगारों को प्रशिक्षित करने वाली संस्था को दी जाएगी।
यहां मिलेगा प्रशिक्षण
बेरोजगारों को प्रशिक्षण देने के लिए जिले में तीस संस्थानों को अधिकृत किया गया है। चूरू तहसील में दस, सादुलपुर में तीन, सरदारशहर में छह, सुजानगढ़ में सात, रतनगढ़ व तारानगर में दो-दो संस्थाएं प्रशिक्षण देंगी। बेरोजगारों को कम्प्यूटर, फाइनेंस, बैंकिंग, स्पोकन इंग्लिश, रिटेल मैनेजमेंट समेत विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अधिकांश शर्तें पुरानी
एक अक्टूबर से प्रदेशभर में लागू अक्षत कौशल योजना में अधिकांश शर्तें अक्षत योजना के समान होंगी। बेरोजगारों को प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा। अभ्यर्थी के पास स्नातक की डिग्री तथा रोजगार कार्यालय में छह माह पुराना पंजीयन होना जरूरी है। अक्षत योजना के तहत पुरुषों को 400, महिलाओं को 500 तथा निशक्तजनों को 600 रुपए का अधिकतम दो साल के लिए मिलते थे। अब इतनी ही राशि का प्रशिक्षण मिलेगा।इतनों का भत्ता बकायाजुलाई 07 से शुरू हुई बेरोजगारी भत्ते की अक्षत योजना पिछले छह माह से दम तोड़ रही थी। जिले में जुलाई 07 से 31 मार्च 09 तक 2 हजार 66 बेरोजगारों को भत्ता दिया जा चुका है। अप्रेल 09 से सितम्बर तक 263 आवेदकों को भत्ते का इंतजार है।
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नई योजना से जिले में बेरोजगारी कम होगी। पांच सौ कौशल वाउचर प्राप्त हो चुके हैं। जल्द ही आवेदन पत्र स्वीकार किए जाएंगे।-एनएस महला, जिला रोजगार अधिकारी, चूरूयोजना के तहत बेरोजगारों को प्रशिक्षित करने की तैयारी शुरू कर दी है। कौशल वाउचर वितरित होने के साथ संस्थान में प्रशिक्षण देना शुरू करेंगे।
-कौशल दाधीच, संभाग समन्वयक, कम्प्यूकोम सॉफ्टवेयर, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

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saakarsansthan said...
dally update karte hai kya?
October 26, 2009 3:11 PM

धरतीपुत्रों के दिन फिरेंगे

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जिले में खुलेगा कृषि विज्ञान केन्द्र
गाजसर और चांदगोठी में तलाशी भूमि

चूरू, 23 अक्टूबर। जिले के काश्तकारों के दिन जल्द ही बहुरेंगे। किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीक व फसलों की उन्नत किस्म की जानकारी देने तथा प्रशिक्षित करने के लिए जिले में एक और कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) खोले जाने की कवायद तेज हो गई है। केवीके के लिए चूरू तहसील के गांव गाजसर और सादुलपुर तहसील के गांव चांदगोठी से 20-20 हैक्टेयर जमीन का प्रस्ताव राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर को भेजा गया है।
दोनों गांवों में से एक गांव के प्रस्ताव को मंजूरी मिलनी है। केवीके खोले जाने का काम चालू वित्तीय वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है। चूरू के साथ ही जयुपर, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, अलवर व जैसलमेर में भी एक-एक कृषि विज्ञान केन्द्र और खोला जाएगा।
इसलिए पड़ी जरूरत
जिले की सरदारशहर तहसील मुख्यालय पर 1993 से कृषि विज्ञान केन्द्र संचालित है। क्षेत्र बड़ा होने के कारण अन्य तहसीलों के किसानों को केवीके का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। नया केवीके राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के अधीन काम करेगा। प्रत्येक केवीके से तीन-तीन तहसीलों के काश्तकारों को जोड़ा जाएगा।
यह होगा फायदा
केवीके में किसानों की खेती से जुड़ी तमाम समस्याओं का समाधान होगा। यहां पर शस्य विज्ञान, गृह विज्ञान, कीट, पौध, पशु व उद्यान विशेषज्ञों की सेवाएं मिल सकेंगी। कृषि की उन्नत किस्मों के प्रदर्शन लगाए जाएंगे। विशेषज्ञ किसानों को खेती की विभिन्न जानकारी देने के साथ ही आवश्यक प्रशिक्षण भी देंगे।
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मेरे नेतृत्व में संयुक्त निदेशक कृषि और सरदारशहर केवीके प्रभारी की कमेटी ने केवीके के लिए दो गांवों से जमीन का प्रस्ताव राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय को महीने भर पहले भेजा है। दोनों में से एक गांव में जल्द ही केवीके खोला जाएगा।
जीएल यादव, क्षेत्रीय निदेशक कृषि अनुसंधान केन्द्र, फतेहपुर शेखावाटी
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:
संगीता पुरी said...
बहुत अच्‍छी खबर है .. इसपर जल्‍द अमल हो .. किसान भाइयों को बधाई !!
October 24, 2009 7:40 PM

Wednesday, October 21, 2009

बसों में बरसा धन

दिल्ली व जयपुर रूट पर सबसे अधिक कमाई
चूरू, 21 अक्टूबर। घाटे से जूझ रहे चूरू आगार की बसों में दीपावली पर जमकर धन बरसा है। बसों में यात्रीभार बढऩे का सिलसिला धनतेरस से शुरू हुआ और भैया दूज तक बना रहा। त्योहारी सीजन में आगार को हर रूट पर बसों से कमाई हुई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 15 से 19 अक्टूबर तक बसों का यात्रीभार औसत 71 फीसदी रहा तथा 25 लाख 77 हजार 536 रुपए की आय प्राप्त हुई है। इस दौरान सबसे अधिक कमाई 5 लाख 73 हजार 193 रुपए छोटी दिवाली के दिन हुई। पांचों दिनों में सबसे कम आय रामनवमी को 3 लाख 25 हजार 447 रुपए की हुई।इस दिन बसों का यात्रीभार 63 फीसदी रहा जबकि सामान्य दिनों में आगार की बसों का यात्रीभार औसत 60-62 फीसदी रहता है। रोडवेज सूत्रों का मानना है कि अंचल में ब्रॉडगेज का कार्य चलने से बंद हुई रेल सेवा के कारण भी बसों में यात्री भार ज्यादा रहा।राजधानी वाले रूट कमाऊआगार को सबसे अधिक कमाई राजधानी से जोडऩे वाले रूटों पर हुई है। इनमें चूरू-जयपुर वाया सीकर तथा चूरू-दिल्ली वाया झुंझुनूं रूट शामिल है। बढ़ते यात्रीभार को देखते हुए आगार प्रबंधन ने जयपुर रूट पर एक तथा दिल्ली रूट पर तीन अतिरिक्त बसें भी दौड़ाई। उधर, सरदारशहर रूट पर बसें डीजल व रखरखाव का खर्च भी नहीं निकाल पाई।आमान परिवर्तन से फायदा सादुलपुर-रतनगढ़ के बीच हो रहे आमान परिवर्तन के चलते ट्रेनें बंद होने का फायदा रोडवेज बसों को हुआ है। यही कारण है कि गत पांच दिवसीय दीपोत्सव की तुलना में इस बार बसों की कुल आय में करीब तीस हजार रुपए तथा यात्रीभार में 2.6 फीसदी का इजाफा हुआ है। गत वर्ष 26 से 30 अक्टूबर तक बसों का यात्रीभार औसत 68.4 प्रतिशत रहा। ----बसों से अच्छी आय हुई है। चार स्थानों पर चैक पोस्ट भी स्थापित की गई थी। आमान परिवर्तन के चलते ट्रेनें बंद होने के कारण आय में गत वर्ष की तुलना में इजाफा हुआ है।-बेनीप्रसाद शर्मा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज आगार, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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RAJNISH PARIHAR said...
चलो इस आमान परिवर्तन के बहाने ही सही,रोडवेज को कुछ फायदा तो हुआ....!शायद कुछ हालात सुधर जाए...
October 22, 2009 3:25 PM

मतदाताओं में हजारों चेहरे नए

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स्थानीय निकाय चुनाव
चूरू में दस हजार 845 व राजगढ़ में तीन हजार 746 वोटर बढ़े
चूरू, 21 अक्टूबर। स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रशासन ने चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। वार्डों में सभांवित उम्मीदवारों के नामों की चर्चा भी होने लगी है। जल्द ही चुनाव की अधिसूचना जारी होने वाली है। जिले में चूरू नगरपरिषद व राजगढ़ नगरपालिका के चुनाव होंगे। निकाय के गत चुनाव की तुलना में इस बार चूरू व राजगढ़ निकाय के मतदाताओं में साढ़े चौदह हजार से अधिक नए चेहरे मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे।आधिकारिक जानकारी के अनुसार पांच साल के दौरान चूरू नगरपरिषद में 10 हजार 845 तथा राजगढ़ नगरपालिका में तीन हजार 746 मतदाता बढ़े हैं। वर्ष 2004 के चुनाव के बाद चूरू नगर परिषद के मतदाताओं की संख्या 63 हजार 537 से बढ़कर 74 हजार 382 तथा राजगढ़ नगरपालिका के मतदाताओं की संख्या 32 हजार 666 से बढ़कर 36 हजार 412 हो गई है। मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। नगरपरिषद के 45 वार्डों के कुल मतदाताओं में 39 हजार 438 पुरुष व 34 हजार 944 महिलाएं हैं।वर्ष 2004 के चुनाव के मुकाबले इस बार नगरपालिका क्षेत्र में तीन हजार 746 मतदाता बढ़े हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार नगरपालिका के कुल तीस वार्डों में से सबसे अधिक 116 मतदाता वार्ड 26 में बढ़े हैं। नगरपालिका के वार्डों की संख्या में वृद्धि नहीं हुई है।
सबसे अधिक, सबसे कम
आधिकारिक जानकारी के अनुसार मतदाता सूचियों के अंतिम प्रकाशन के समय
चूरू नगरपरिषद में सबसे अधिक तीन हजार 133 मतदाता वार्ड 10 तथा सबसे कम 853 मतदाता वार्ड 25 में हैं। नगरपरिषद के मतदाताओं में अनुसूचित जाति के सबसे अधिक एक हजार 180 मतदाता वार्ड 36 में तथा अनुसूचित जनजाति के सबसे अधिक 68 मतदाता वार्ड 28 में हैं।
सूची से 198 नाम हटाए
आधिकारिक जानकारी के अनुसार 22 सितम्बर 09 को प्रारूप प्रकाशन के बाद मतदाता सूचियों से 198 नाम हटाए गए हैं। वार्ड 21 की मतदाता सूची से 92, वार्ड 1 व 6 से छह-छह, वार्ड 4,42 व 45 से एक-एक, वार्ड 7, 17 व 18 से दस-दस, वार्ड 20 से 7, वार्ड 15 से 4, वार्ड 22 व 26 से तीन-तीन, वार्ड 32 से 39, वार्ड 43 से पांच नाम हटाए गए हैं।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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Saturday, October 10, 2009

ना कचरा उठेगा, ना आग बुझेगी!

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चूरू, 10 अक्टूबर। गंदे पानी से उफनतीं नालियां व गंदगी से अटीं तंग गलियां दीपावली पर भी चकाचक नहीं हो पाएंगी और आग जनित हादसों पर तत्काल काबू पाने की सोचना तो बेमानी होगी। दरअसल नगरपरिषद प्रशासन दीपोत्सव को लेकर तनिक भी गंभीर नहीं है। गली-मोहल्लों से साफ-सफाई और अग्निशमन की व्यवस्थाएं दीपावली को लेकर अब तक चाक-चौबंद नहीं की गई हैं। शनिवार को पत्रिका ने दोनों व्यवस्थाओं की पड़ताल की तो लगा कि दीपोत्सव पर नगर की स्वच्छता और सुन्दरता के प्रति नगरपरिषद अपने दायित्व और कत्र्तव्य बोध को पूरी तरह भुला चुकी है।सफाई व्यवस्था का तो आलम यह है कि वर्तमान में नई व पुरानी सड़क से लगते छह वार्डों से कचरा रोजाना उठाया जा रहा है जबकि शेष वार्डों में सफाई का नम्बर आठ दिन में एक बार आता है। ऐसे में दीपोत्सव पर नगरपरिषद के भरोसे शहर का सौन्दर्य शायद ही बढ़े। उधर, दीपावली पर आग जनित हादसे बढऩे की आशंका अधिक रहती है। लेकिन आग पर तत्काल काबू पाने के लिए अग्निशमन केन्द्र के पास लम्बी रेस के घोड़े ही नहीं हैं। दमकलकर्मियों के पास पर्याप्त संसाधन होना तो दूर की बात है। फिलहाल परिषद के पास तीन दमकल हैं। इनमें से पन्द्रह साल पुरानी एक दमकल तो लगभग कण्डम हो चुकी हैं। फिर भी उसे दौड़ाया जा रहा है। नगरपरिषद प्रशासन ने दीपावली को लेकर साफ-सफाई और अग्निशमन सेवा से जुड़े कार्मिकों को ना तो विशेष निर्देश दिए हैं और ना ही कोई अतिरिक्त व्यवस्थाएं की हैं।
101 नम्बर मिलेगा व्यस्त
अग्निशमन केन्द्र के टेलीफोन की स्थिति यह है कि वह दिनभर व्यस्त रहता है। केन्द्र पर तैनात कर्मचारियों की मानें तो उस पर चौबीस घंटों में पांच सौ से अधिक बार फोन आते हैं। जो सभी फाल्स होते हैं। ऐसे में दिवाली पर आवश्यकता पडऩे पर भी फोन स्वाभाविक रूप से व्यस्त मिलेगा। बार-बार अवगत करवाए जाने के बावजूद दीपोत्सव जैसे मौके पर भी नगरपरिषद प्रशासन ने इसका कोई हल नहीं निकाला है और ना ही कोई अन्य टेलीफोन की व्यवस्था की है।
सफाईकर्मी गिनती के
दीपावली पर सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी 138 कर्मचारियों के कंधों पर है। जोरदार बात तो यह है कि टै्रक्टर, लोडर, पम्प चालक और जमादार भी इन्हीं में से हैं। शहर में सफाईकर्मियों की संख्या गिनती की रह गई है। मोटे अनुमान के तौर पर शहर को छह सौ से अधिक सफाईकर्मियों की दरकार है। लेकिन उनकी संख्या बढ़ाने के लिए परिषद के पास बजट ही नहीं है। तंग गलियों से कचरा उठाने में सहायक 907 (छोटा ट्रक) का तो परिषद को चालक ही नहीं मिल रहा है।
कैसे हो चाक-चौबंद?
अग्निशमन अधिकारीलिपिक बने हुए हैं स्थायी फायरमैन।
अग्निरोधक संसाधनों काएईएन व जेईएन कीबीस बड़े वाहन व चालीस छोटे वाहनों कीपरिषद प्रशासन नहीं है गंभीर।शहरवासियों में जागरूकता का अभाव।
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दीपावली पर साफ-सफाई और दमकल सेवा में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। परिषद के अधिकारियों को सर्तक रहने के निर्देश दिए हैं। वैसे भी परिषद खुद कई समस्याओं से जूझ रही है।उम्मेद सिंह, उपखण्ड अधिकारी, चूरूआबादी के लिहाज से सफाईकर्मी काफी कम है। मुख्य सड़क से लगते वार्डों में ही सफाई व्यवस्था नियमित है। शेष वार्डों में आठवें दिन कचरा उठ पा रहा है। दीपावली पर सफाई की चाहकर भी विशेष व्यवस्था नहीं कर पाएंगे।
-संतलाल स्वामी, सफाई निरीक्षक
दीपावली पर विशेष सफाई व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान में सफाई व्यवस्था संतोषजनक है। अग्निशमन केन्द्र के नम्बरों का चार्ज वसूला जाए तो समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
-रमाकांत ओझा, सभापति, नगरपरिषद, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Thursday, October 8, 2009

दिल के झरोखे से देखी हवेलियां

विदेशी पर्यटकों ने निहारा चूरू को
चूरू, 8 अक्टूबर। वाउ इट्स क्यूट..., वैरी नाइस पेंटिंग्स एण्ड डिजाइन..., आई लाइक दिस...। पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ ही चूरू के पर्यटन स्थलों पर विदेशी पर्यटकों के ये शब्द सुनाई देने लगे हैं। सीजन में पर्यटकों का पहला दल गुरुवार को चूरू आया। दल में शामिल हॉलैण्ड के 22 पर्यटकों ने घंटेभर तक चूरू के पर्यटन स्थलों को निहारा।
बाजार में खरीदारी की और जाते-जाते गांव ऊंटवालिया के जोहड़ में दोपहर का भोजन लिया। राजस्थान के 21 दिन के भ्रमण के लिए आया यह दल बुधवार को दिल्ली से महनसर गढ़ पहुंचा था। यहां से गुरुवार को गढ़ के गाइड लालसिंह शेखावत के साथ महनसर, रामगढ़ बिसाऊ होते हुए सुबह साढ़े 11 बजे चूरू पहुंचा।पर्यटकों ने चूरू में बागला, सुराणा व कोठारियों की हवेलियां देखी तथा सफेद घंटाघर व मुख्य बाजार में खरीदारी की। दल दोपहर को वापस महनसर गढ़ रवाना हो गया। शुक्रवार को बीकानेर जाएगा।
शेखावत ने बताया कि विदेशी पर्यटक राजस्थानी भोजन के कायल हैं। किसी को बाजरे की रोटी स्वाद लगती है तो कोई राजस्थानी दाल को अधिक पसंद करता है। गुरुवार को गांव ऊंटवालिया के पथराणा जोहड़ में दोपहर के भोजन में पर्यटक बाजरे की रोटी, लहसून की चटनी और दाल की प्रशंसा करते नहीं थके।
यहां के लोग वैरी फ्रेंडली
ग्रुप लीडर की हैसियत से राजस्थान का दस बार भ्रमण कर चुकी हूं। यहां की हवेलियां सबसे अधिक आकर्षित करती हैं। थोड़ी-थोड़ी हिन्दी भी बोल लेती हूं। हिन्दी में कहूं तो यहां की हवेलियां क्यूट हैं एण्ड लोग बहुत फ्रेंडली हैं।
दिन्या, ग्रुप लीडर, हॉलैण्ड
बार-बार बुलाए रामगढ़
पर्यटन स्थलों में रामगढ़ शेखावाटी की हवेलियों का कोई सानी नहीं है। इन्हें बार-बार देखने को मन करता है। राजस्थान आने का फिर मौका मिला तो रामगढ़ शेखावाटी जरूर आऊंगा।
-नैल्स, पर्यटक, हॉलैण्ड
देसी अंदाज निराला
यहां के बाजार में शौरगुल और प्रदूषण अधिक है। लोगों का रहन-सहन और अंदाज पूरी तरह से देसी है। पर्यटन के लिहाज से यहां काफी कुछ है। इनके आस-पास आधारभूत सुविधाएं बढ़ाई जाए तो पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।
-पास्कल, पर्यटक, हॉलैण्ड
सजी थाली लगे अच्छी
राजस्थान में जितनी मशक्कत खाना बनाने में की जाती है। उतने ही प्यार से भोजन परोसा भी जाता है। यहां के भोजन से सजी थाली मुझे खास पसंद है। स्वाद का तो कहना क्या?।
सेन्डर, पर्यटक, हॉलैण्ड
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:
2 टिप्पणियाँ:

विनोद कुमार पांडेय said...
राजस्थान है ही ऐसा जगह लोगों का दिल जीत लेता है..बढ़िया प्रस्तुति...धन्यवाद!!!
October 12, 2009 10:06 PM

ललित शर्मा said...
थाने,म्हारी बधाई, चो्खो समाचार सुणायो, राजस्थान की धरती को दुनिया में जवाब ही कोनी,
October 12, 2009 11:17 PM

Monday, October 5, 2009

गलफांस बनी डिजायर

4बार पढ़ा गया
शिक्षकों की पदोन्नति पर पदस्थापन का मामला
चूरू, 5 अक्टूबर। शिक्षकों की पदोन्नति पर पदस्थापन में विधायक की सिफारिशों को तव्वजो नहीं देने की मजबूरी शिक्षा विभाग के अधिकारियों व बाबुओं की नौकरी पर बन आई है। विधायक की शिकायत पर शिक्षामंत्री भंवरलाल मेघवालने राजगढ़ ब्लॉक के शिक्षकों की पदस्थापन सूची रद्द करने के साथ ही शिक्षा उपनिदेशक बलराम मीणा व जिला शिक्षा अधिकारी गजेन्द्र सिंह शेखावत को जयपुर तलब किया है। शिक्षा अधिकारी शिक्षकों के पदस्थापन से संबंधित रिकॉर्ड व बाबुओं को साथ लेकर मंगलवार को जयुपर जाएंगे। सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक व प्राथमिक कार्यालयों में आलम यह था कि शिक्षकों के पदस्थापन से जुड़े बाबू तो अपनी नौकरी को कोसते नजर आए।सूत्रों के अनुसार शिक्षकों के पदस्थापन की सूची से राजगढ़ के पूर्व विधायक नंदलाल पूनियां सबसे अधिक असंतुष्ट हैं। चूरू विधायक हाजी मकबूल मण्डेलिया भी खुश नहीं बताए जा रहे हैं। विधायक नंदलाल पूनियां ने अपने चहेतों को राजगढ़ ब्लॉक में लगाने के साथ ही करीब 20 शिक्षकों को ब्लॉक से बाहर पदस्थापित करने की डिजायर लगाई थी। अब पूनियां की शिकायत है कि शिक्षकों के पदस्थापन में उनके चहेतों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। चहेतों को राजगढ़ ब्लॉक में ही पदस्थापित करना था जबकि उन्हें अन्य ब्लॉकों में भेज दिया गया। उधर, विधायक हाजी मकबूल मण्डेलिया को पीड़ा है कि उनकी डिजायर पूरी तरह से अमल में नहीं लाई जा सकी है।उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग ने हाल ही प्रारम्भिक शिक्षा के 414 व माध्यमिक शिक्षा के 16 7 शिक्षकों को पातेय वेतन पर पदोन्नत कर पदस्थापित किया है। इनमें से राजगढ़ व चूरू ब्लॉक के 34 शिक्षकों को दूसरे ब्लॉकों में भेजा गया है।
नए सिरे से बनेगी सूची!
डिजायर के चलते हुई गड़बड़ी के कारण राजगढ़ ब्लॉक में पदस्थापित शिक्षकों की सूची नए सिरे से बनाई जाएगी। इसी के साथ ही परिवेदनाओं के चलते अन्य ब्लॉकों की सूचियों में भी संशोधन की गुंजाइश है।इनका कहना है
...राजगढ़ में अधिशेष शिक्षकों को ही दूसरे ब्लॉकों में पदस्थापित किया गया है। शिक्षामंत्री ने मंगलवार को जयपुर बुलाया है। राजगढ़ ब्लॉक की सूची नए सिरे से बनेगी या नहीं यह तो जयुपर जाने के बाद ही पता चल सकेगा।
-बलराम मीणा, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू
मेरे से डिजायर तो मांग ली। लेकिन शिक्षाधिकारियों ने अपनी मर्जी से शिक्षकों का पदस्थापन किया है। सोमवार सुबह मैंने शिक्षामंत्री से मुलाकात कर विरोध भी जताया है। मेरे ब्लॉक की सूची तो नए सिरे से बननी चाहिए।
-नंदलाल पूनियां, पूर्व विधायक, राजगढ़
शिक्षामंत्री ने राजगढ़ ब्लॉक में शिक्षकों के पदस्थापन की सूची रद्द करने के दूरभाष पर निर्देश दिए हैं। आगामी आदेशों तक पदोन्नत शिक्षकों को पदस्थापन के लिए कार्यमुक्त नहीं करने के लिए संबंधित संस्था प्रधानों को निर्देशित किया जा रहा है।
-गजेन्द्र सिंह शेखावत, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Friday, October 2, 2009

पंचायतीराज का स्वर्णिम सफर

देश में में पंचायतीराज व्यवस्था ने पचास वर्ष का सफर तय कर लिया है। आज राजस्थान का नागौर जिला पंचायतीराज की स्थापना का साक्षी बन खुद को एक बार फिर से गौरवान्वित महसूस कर रहा है। पंचायतीराज का स्वर्ण जयंती समारोह नागौर के उस ऐतिहासिक मैदान में मनाया जा रहा है, जहां देश के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने दो अक्टूबर 1959 को पंचायतीराज की नींव रखी थी। समारोह में नेहरू की तरह दो बार प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल करने वाले डा. मनमोहन सिंह व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत राजनीति की कई जानी-मानी हस्तियां शिरकत करेंगी। स्वतंत्रता के बाद देश में कई बदलाव हुए। कई नई व्यवस्थाएं लागू हुई। आखिर पंचायतीराज व्यवस्था की जरूरत क्यों महसूस की गई और इसे किस तरह अंतिम रूप दिया गया। मन को कुरेदते इन सवालों का जवाब खोजा तो पाया कि आजादी के बाद देश के समग्र विकास में अधिकतम लोगों को सहभागी बनाने के लिए विकेन्द्रीकरण की नीति अपनाई गई। पंचायतीराज भी उसी दिशा में उठाया गया एक कदम था।जब देश में पंचवर्षीय योजना लागू करने पर विचार किया जा रहा था तब ग्रामीण क्षेत्र में जनता का सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता सुनिश्चित करना आवश्यक समझा गया। इस आवश्यकता ने भी पंचायतीराज को आधार प्रदान किया।लोकतंत्र में अटूट विश्वास रखने वाले पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने 1952 में सामुदायिक विकास कार्यक्रम शुरू किया। लेकिन इसमें ग्रामीण विकास की बजाय सरकारी मशीनरी के विकास पर अधिक जोर देने के कारण कार्यक्रम विफल हो गया। परिणाम स्वरूप सरकार ने 1957 में पंचायतीराज के संबंध में बलवंतराय मेहता समिति का गठन किया।समिति ने अपनी रिपोर्ट में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण और सामुदायिक विकास कार्यक्रम को सफल बनाने का उल्लेख करते हुए पंचायतीराज की नींव रखने की सिफारिश की। नौ सितम्बर 1959 को राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद बिल पारित कर विकेन्द्रीकृत व्यवस्था लागू की। इसके बाद दो अक्टूबर को राजस्थान को देश में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की शुरुआत करने का गौरव प्राप्त हुआ।आंकड़ों की जुबानीवर्तमान में राजस्थान में सात संभाग, 33 जिले, 32 जिला परिषदें, 192 उपखण्ड, 243 तहसीलें, 237 पंचायत समितियां है। 237 पंचायत समितियों में से हाल ही छह पंचायत समितियों को फिर से ग्राम पंचायतों का दर्जा दे दिया गया है। लिहाजा ग्राम पंचायतों की संख्या 9195 हो गई हैं। पंचायतीराज के 2010 में होने वाले चुनावों से पूर्व चल रही परिसीमन की प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों की संख्या 12 हजार के लगभग हो जाएगी।महिलाओं की भागीदारी कमचूरू जिले में पंचायतराज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है।हर स्तर पर पुरुषों का वर्चस्व है। जिला परिषद के कुल 26 सदस्योंं में महज आठ महिलाएं हैं। वर्तमान में जिले की छह पंचायत समितियों में प्रधान के पद पर मात्र दो महिलाएं काबिज हैं। जिले की 249 ग्राम पंचायतों में से भी अधिकांश की बागडोर पुरुषों के हाथ में है।सरपंच या कठपुतली?देश में पंचायतीराज की नींव रखे जाने के पचास वर्ष बाद भी कई महिला सरपंच पति की कठपुतली बनी हुई हैं। गत वर्ष अपे्रल में चूरू पंचायत समिति की एक सरपंच से रूबरू होने का मौका मिला। दोपहर में फोटोग्राफर के साथ सरपंच के घर पहुंचा। सरपंच के घर पर मौजूद एक रिश्तेदार से जब उनके बारे में पूछा तो जवाब मिला कि वे किसी काम से बाहर गए हैं। शाम तक आएंगे। रिश्तेदार से सरपंच के मोबाइल नम्बर लेकर बात की तो माजरा समझ में आया। दरअसल घर, रिश्तेदारी और गांव में महिला की बजाय उनके पति को सरपंच माना जाता है। बाद में पता चला कि असल सरपंच तो घर पर ही हैं।नए दौर में किया प्रवेश देश की लगभग तीन चौथाई आबादी गांवों में रहती है। गांवों के विकास पर ही काफी हद तक भारत का विकास निर्भर है। यहां महात्मा गांधी का कथन बिल्कुल सटीक बैठता है कि यदि गांव नष्ट होते हैं तो भारत नष्ट हो जाएगा। भारत के पिछले इतिहास पर यदि नजर डालें तो देखेंगे कि गांव के आपसी झगड़ों का निपटारा गांवों की पंचायतें करती थीं। पंचों का फैसला सर्वमान्य होता था। मोर्यकाल में गांव के चुने हुए लोगों की सभा, ग्रामसभा कहलाती थी। जिसका प्रधान ग्रामिक होता था। मुगलकाल में भी गांव, शासन की सबसे छोटी इकाई था। गांव का प्रधान अधिकारी वहां का मुखिया होता था, जिसे मुकद्दम कहते थे। अंग्रेजी राज में गांव की पंचायतें धीरे-धीरे समाप्त हो गईं। गांवों का समस्त कार्य प्रांतीय सरकारें करने लगीं। 18 8 2 में लॉर्ड रिपन ने स्थानीय शासन की स्थापना का प्रयास किया। लेकिन वह सफल नहीं हो सका।स्थानीय स्वायत्त संस्थाओं की जांच के लिए 18 8 2 व 1907 में ब्रिटिश शासकों ने शाही आयोग का गठन किया। 1920 में संयुक्त प्रान्त, असम, बंगाल, बिहार, पंजाब व मद्रास में पंचायतों की स्थापना के लिए कानून बनाए गए। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में नया संविधान लागू होने के साथ ही पंचायतीराज अर्थात ग्रामीण स्थानीय शासन ने नए दौर में प्रवेश किया।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:


1 टिप्पणियाँ:
चेतना के स्वर said...
achchi khabar likh dali hai dada congratsisko bhi padhna or thoda sa batanahttp://chetna-ujala.blogspot.com/2009/10/blog-post.html
October 27, 2009 3:13 PM

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