Monday, November 30, 2009

कन्यादान पर डाका !

चूरू। समाज कल्याण विभाग में सहयोग योजना के 'पेड' पर भ्रष्टाचार की 'बेल' पनप रही है। बिचौलिए गरीब की बेटी का कन्यादान लूट रहे हैं और शासन-प्रशासन आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है। हैरत की बात है कि कन्यादान पर डाका डालने के इस षड्यंत्र में विभागीय कर्मचारियों की भी हिस्सेदारी है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ही चूरू तहसील की घांघू ग्राम पंचायत में आठ अपात्र महिलाओं को सहयोग योजना राशि से लाभान्वित करवाकर बिचौलियों ने हजारों रूपए डकार लिए हैं। जबकि जरूरत मंद योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए हैं।तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार गरीब की बेटी का कन्यादान लूटने के लिए बनाई योजना में बिचौलियों ने एक ऎसी महिला की दोबारा शादी करवा दी जो पहले ही दो बच्चों की मां है।
इतना ही नहीं कई पढी-लिखी महिलाओं को अनपढ घोषित करवा दिया जबकि गांव की स्कूल में उनका नामांकन दर्ज है। हद तो तब हो गई जब वर्तमान में नाबालिग कन्याओं के भी फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर उन्हें योजना के तहत पात्र बनवा दिया। विभागीय अनदेखी का आलम तो यह है कि लाभांवित महिलाओं के नाम 2002 की बीपीएल सूची में ही शामिल नहीं हैं।किसी भी स्तर पर नहीं हुई तस्दीक
योजना के तहत पात्र महिलाओं का चयन करने में आवेदक का जन्म प्रमाण पत्र, बीपीएल कार्ड की सत्यापित फोटोकॉपी, बीपीएल सूची क्रमांक तथा यदि उपलब्ध हो तो शादी का कार्ड भी प्रस्तुत करना पडता है।पात्र महिलाओं को लाभांवित कराने के लिए विभागीय स्तर पर कितनी अनदेखी बरती गई इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है जबकि संबंघित क्षेत्र के छात्रावास अधीक्षक से आवेदक के तथ्यों की तस्दीक कराए जाने का प्रावधान है।
केस एक
घांघू निवासी अमीलाल की पुत्री मुकेश को योजना के तहत करीब दस हजार रूपए से लाभांवित किया गया है। मुकेश वर्तमान में दो बच्चों की मां है। उसकी शादी चार साल पहले हो चुकी थी। बिचौलिए और विभागीय कर्मचारियों ने कन्यादान राशि को हडपने के लिए उसकी शादी 25 अपे्रल 09 को होना बताया है। बकौल मुकेश अभी तक उसे साढे पांच हजार रूपए ही मिले हैं। बिचौलिए ने उसे कुल नौ हजार रूपए स्वीकृत होना बताया था।मुकेश की ही बहन सुमन को भी योजना के तहत पांच हजार रूपए से लाभान्वित किया गया है। बिचौलिए ने उसके आवेदन में सुमन को अनपढ बतलाया है जबकि वह गांव के राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में पढती थी। उसका नामांकन नम्बर 598 है। उसने कक्षा छह तक विद्यालय से उत्तीर्ण की है। बकौल मुकेश सुमन को तो बिचौलिए ने अभी एक रूपया भी नहीं दिया है।
केस दो
घांघू निवासी हनुमान धाणक की पुत्री कांता व सुनीता को पांच-पांच हजार रूपए की सहायता स्वीकृत की गई है। दोनों का विवाह दस दिसम्बर 07 को होना बताया गया है। गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड में सुनीता की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1580 पर 10 अगस्त 93 तथा कांता की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1579 पर 5 जून 95 दर्ज है। ऎसे में विवाह के समय सुनीता की उम्र महज 14 वर्ष तथा कांता की उम्र 12 वर्ष है। इस स्थिति में दोनों ही बहनें नाबालिग होने पर योजना के तहत कन्यादान राशि की पात्र नहीं हैं।
केस तीन
घांघू निवासी भगवाना राम मेघवाल की पुत्री सुमन व गांव के बुधराम धाणक की पुत्री चंदा की अपात्रता के लिहाज से स्थिति लगभग समान है। दोनों की शादी जून 09 में होने के साथ ही इनका परिवार बीपीएल सूची 2002 में भी शामिल नहीं है। गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड में सुमन की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1871 पर 12 अगस्त 94 तथा चन्दा (चन्द्रावली के नाम) की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1577 पर 6 मई 94 दर्ज है। ऎसे में दोनों की उम्र विवाह के समय 18 वर्ष से कम है।
केस चार
घांघू निवासी धर्मपाल धाणक की पुत्री पूनम व सुलोचना को भी योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। आवेदन पत्र में इनकी शादी भी 25 अप्रेल 09 को होना दर्शाई गई है। राजकीय उ“ा प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार नामांकन संख्या 1600 पर सुलोचना की जन्मतिथि (सुमन नाम से) 10 मार्च 94 है। इनका परिवार भी अन्य परिवारों की तरह बीपीएल सूची 2002 में शामिल नहीं है।
क्या है योजना
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों की बेटियों की शादी के अवसर पर सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए एक अपे्रल 2005 से 'सहयोग योजना' चल रही है। योजना के तहत शादी से एक माह पहले या एक माह बाद आवेदन किया जा सकता है।पात्रता के लिए लडकी का परिवार बीपीएल सूची 2002 में शामिल होने के साथ ही विवाह के समय उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। पात्र महिला को बतौर कन्यादान सरकार की ओर से करीब दस से बीस हजार रूपए तक की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाती है।
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मेरी दोनों बेटियों का चयन गांव के नेतराम मेघवाल ने करवाया था। उसके अनुसार मुकेश को नौ हजार रूपए तथा सुमन को पांच हजार रूपए स्वीकृत किए गए थे। उनमें से फिलहाल सुमन को कुछ नहीं दिया जबकि मुकेश को साढे पांच हजार रूपए दिए गए हैं। मेरी बेटी मुकेश की शादी हुए करीब तीन वर्ष से ज्यादा समय हो गया है। उसके दो बच्चे हैं।
- अमीलाल नायक (मुकेश के पिता), घांघू
एक अखबार में मेरी पंचायत की कई महिलाओं को सहयोग योजना के चैक वितरित करने की फोटो से यह जानकारी मिली। उनमें से किसी का भी परिवार पंचायत की बीपीएल सूची 2002 में शामिल नहीं है। मुकेश नामक एक महिला की शादी को तो काफी साल हो गए, वह योजना के तहत कैसे लाभान्वित हुए हुई। यह बात समझ से परे है।
-नाथी देवी, सरपंच, घांघू
जैसा आप बता रहे हो वैसा नहीं हो सकता। मेरे कार्यकाल में एक भी स्वीकृति जारी नहीं हुई है। किसी आवेदक ने तथ्य छुपाए हैं तो उसके और सूचनाओं का सत्यापन करने वाले स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई होगी। पहले की स्वीकृतियों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
-रामनिवास यादव, समाज कल्याण अघिकारी, चूरू
घांघू ही नहीं बल्कि सीकर, चूरू व झुंझुनूं के कई आवेदकों को राशि दिलाने में मैंने सहयोग किया है। किसी भी अपात्र को लाभान्वित नहीं किया गया है। किसी आवेदक ने कोई तथ्य छुपाया है या नहीं। इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
-नेतराम मेघवाल, घांघू
स्कूल के रजिस्टर के अनुसार गांव की मुकेश व सुमन स्कूल में पढी है। इन्हें किसी भी सूरत में अनपढ नहीं कहा जा सकता।
-करूणा बुंदेला, प्रधानाध्यापिका राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय, घांघू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

RAJNISH PARIHAR said...
sharmnaak....
December 2, 2009 4:16 PM

दीपिका said...
aaj v aise ghatnaon ki sankhya ghati nahi hai. sirf kahne ko hum aadhunik evam educated hai. par lagta nahi...
December 5, 2009 11:31 AM

Friday, November 20, 2009

पुलिस के हाथ हुए मजबूत

एएसआई भी रखेगा पिस्टल
बंदूक की जगह लेगी एके-47
चूरू, 20 नवम्बर। शातिर अपराधियों का सामना करने, बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने और आतंकी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस के हाथ पहले से अधिक मजबूत हो गए हैं। चूरू जिला पुलिस के पास अत्याधुनिक हथियारों की पहली खेप पहुंच चुकी है। इनमें एके-47 और ऑटोमैटिक रायफल्स शामिल हैं। अगली खेप जल्द ही पहुंचने की उम्मीद है। पुलिस प्रशासन ने उपलब्ध आधुनिक हथियारों का सिपाहियों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिलाना शुरू कर दिया है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो जिले की पुलिस को साधन, संसाधनों की दृष्टि से अपराधियों के सामने हताश नहीं होना पड़ेगा। बेहतरीन संसाधनों के रहते पुलिस का इकबाल आने वाले कल में और बुलन्द होगा।
हर एएसआई रखेगा पिस्टल
हथियारों की संख्या में इजाफा होने के बाद प्रत्येक एएसआई 9-एमएम की पिस्टल रख सकेगा। फिलहाल पुलिस उप निरीक्षक से लेकर जिला पुलिस अधीक्षक तक की रैंक के अधिकारियों के पास ही 9-एमएम की पिस्टल उपलब्ध हैं। वर्तमान में जिले में करीब एक सौ सहायक पुलिस उप निरीक्षक तैनात हैं।
यूं होगा फायदा
शातिर अपराधियों से मुकाबला करने और जन आंदोलन के दौरान उग्र भीड़ को नियंत्रित करने में नए हथियार पुलिस के लिए काफी मददगार होंगे। वाटर केनन से भीड़ पर तेजी से पानी डाला जा सकेगा तो व्रज वाहन से आंसू गैस के गोले धड़ाधड़ छोड़े जा सकेंगे। स्टन ग्रेनेड और रबड़ बुलैट भीड़ व अपराधियों को बेहोश करने में काम आएंगे। नए हथियार उन परिस्थितियों में अधिक कारगर साबित होंगे जहां पुलिस फायरिंग की नौबत आ जाती है या जहां दो गुटों में टकराव के कारण जनहानी होने की आशंका अधिक रहती है।
ये पहुंच चुके हैं
तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार जिला पुलिस के पास अब तक एके-47, एसएलआर रायफल्स, फायबर ग्लास की लाठी, ढाल, हैलमेट व जैकेट पहुंच चुके हैं। इनका प्रशिक्षण भी दिया जाने लगा है।
ये खरीदे जा रहे हैं
छोटे बोर के हथियार इनमें 9-एमएम की पिस्टल व रबर बुलैट शामिल है।
इनका भेजा प्रस्ताव
स्टन ग्रेनेड, वाटर केनन और अग्निवर्षा मय वज्र वाहन।
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पुलिस का इकबाल हर हाल में बुलन्द है और रहेगा। शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने और आंतकी घटनाओं से निपटने के लिए हथियारों की संख्या बढ़ाई जा रही है। कई आधुनिक हथियार पहुंच चुके हैं। नफरी को नए हथियारों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
-निसार अहमद फारुकी, पुलिस अधीक्षक, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:

RAJNISH PARIHAR said...
pulis inka pryog aatm raksha me hi kare....
November 21, 2009 10:03 AM

Tuesday, November 10, 2009

अनार्थिक स्कूलों पर तलवार

चूरू, 10 नवम्बर। शिक्षा विभाग के लिए सिरदर्द बने अनार्थिक व कागजी विद्यालयों पर ताले की तैयारी शुरू हो चुकी है। ऐसे विद्यालयों की सूचनाएं नए सिरे से जुटाई जा रही हैं। शिक्षा अधिकारी तीस सितम्बर 09 तक की छात्र संख्या को आधार मानकर विद्यालय को अनार्थिक घोषित किए जाने की मशक्कत कर रहे हैं। अधिकांश अनार्थिक विद्यालयों में नाममात्र के बच्चे पढ़ रहे हैं। हालांकि इससे उनकी पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उन्हें पढऩे के लिए नजदीक के अन्य विद्यालय में भेजा जाएगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार 12 नवम्बर को चूरू में हनुमानगढ़, झुंझुनूं, श्रीगंगानगर व बीकानेर के जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा चर्चा करेंगे तथा 16 नवम्बर को शिक्षा संकुल जयपुर में शिक्षामंत्री भंवरलाल मेघवाल प्रदेशभर के अनार्थिक विद्यालयों की समीक्षा करेंगे।

ये हैं श्रेणियां

अनार्थिक व कागजी विद्यालयों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें छात्र संख्या शून्य, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में छात्र संख्या बीस से कम तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक छात्र संख्या बीस से अधिक मगर कक्षा छह, सात और आठ में छात्र संख्या बीस से कम श्रेणी शामिल है।

दूसरे स्कूल में पढ़ेंगे

जिन प्राथमिक विद्यालयों की सभी कक्षाओं में छात्र संख्या बीस से कम तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों की कक्षा छह, सात और आठ में छात्र संख्या बीस है उन पर ताला लगाकर उनके विद्यार्थियों को नजदीक के अन्य सरकारी स्कूल में पढ़ाया जाएगा। प्राथमिक विद्यालय एक किलोमीटर तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय दो किलोमीटर के दायरे में स्थित अन्य सरकारी विद्यालय में मर्ज होंगे।

आधे जिले की स्थिति

जिले के छह ब्लॉक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारियों में से तीन ने अनार्थिक विद्यालयों की सूचना डीईओ ऑफिस भेज भी दी है जबकि शेष ब्लॉकों में शिक्षा अधिकारी सूचना को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार रतनगढ़, चूरू व सुजानगढ़ में 55 विद्यालय अनार्थिक हैं। खास बात यह है कि इनमें से शिक्षामंत्री के गृह क्षेत्र सुजानगढ़ के 11 विद्यालय कागजों में चल रहे हैं। शेष तारानगर, सादुलपुर और सरदार शहर में करीब पच्चीस विद्यालयों के अनार्थिक घोषित होने की और सम्भावना है।

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अनार्थिक विद्यालयों की सूचियां तैयार की जा रही हैं। तीन बीईईओ ने सूचना भेज दी है। शेष को बुधवार सुबह 11 बजे तक सूचना भेजने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
-ओमप्रकाश जांगिड़, जिला प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी, चूरू

अनार्थिक एवं कागजी विद्यालयों की सूचनाएं नए सिरे से जुटाई जा रही हैं। विद्यालयों में तीस सितम्बर 09 की छात्र संख्या को आधार माना गया है।

-शिवजी राम चौधरी, उपनिदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा, चूरू



प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Friday, November 6, 2009

उम्मीद की फसल

2बार पढ़ा गया
राष्ट्रीय कृषि बीमा योजनाआधों को भी नहीं मिला क्लेम

चूरू, 6 नवम्बर। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना एक बार फिर से जिले के तीस हजार से अधिक किसानों के लिए महज उम्मीद की फसल साबित हुई है। वर्ष 2008-09 के दौरान रबी की फसलों का बीमा करवाने वाले जिले के 59 हजार 556 किसानों में से तारानगर व सुजानगढ़ तहसील के 20 हजार 538 किसानों को हाल ही बीमा क्लेम स्वीकृत हुआ है। जिले की चूरू, सरदारशहर, रतनगढ़ व राजगढ़ तहसील के किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिला है। तारानगर तहसील के किसानों को चना तथा सुजानगढ़ तहसील के किसानों को गेहूं, मैथी व सरसों का बीमा क्लेम स्वीकृत किया गया है।

यह है समस्या

योजना के नियमानुसार किसानों को बीमा का लाभ देने के लिए तहसील स्तर पर सूखा घोषित किया जाता है। जिस तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है उसी के किसानों को बीमा का लाभ मिलता है। भले ही सभी किसानों का नुकसान हुआ हो या नहीं। जबकि दूसरी ओर अन्य तहसीलों के विभिन्न गांवों में नुकसान झेलने के बावजूद किसान बीमा के लाभ से वंचित हो जाते हैं। बीमा क्लेम के निर्धारण में तहसील की बजाय गांव को इकाई माने जाने की मांग किसान व किसान संघों की ओर से लम्बे समय से की जा रही है। लेकिन नतीजा सिफर है।

आंकड़ों की जुबानी

आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्ष 08-09 के दौरान जिले के 59 हजार 556 किसानों ने दो लाख 74 हजार 238 हैक्टेयर में खड़ी फसलों का बीमा करवाया तथा बीमाकर्ता कम्पनी को प्रीमियम के रूप में दो करोड़ 45 लाख 33 हजार 448 रुपए जमा करवाए। बदले में 20 हजार 538 किसानों को 12 करोड़ 42 लाख 51 हजार 6 57 रुपए बीमा क्लेम स्वीकृत हुआ है।

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कम्पनी ने तहसील को इकाई मानकर बीमा क्लेम स्वीकृत किया है। राशि जल्द ही किसानों के खाते में जमा करवा दी जाएगी। तहसील की बजाय गांव को इकाई माने जाने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।

-ओमप्रकाश सेन, प्रतिनिधि, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी

योजना के तहत फसल की कम से कम 16 अलग-अलग खेतों से क्रॉप कटिंग होती है। क्रॉप कटिंग के लिए खेतों का चयन औचक (रेंडमली) होता है। फिर पिछले पांच से दस साल तक के औसत उत्पादन से तुलना की जाती है। जिस तहसील का उत्पादन औसत से कम होता उसमें किसानों को बीमा क्लेम स्वीकृत किया जाता है। जिले में सुजानगढ़ व तारानगर तहसील के अलावा अन्य तहसीलों में उत्पादन औसत से कम नहीं रहा इसलिए इनके किसानों के लिए बीमा क्लेम स्वीकृत नहीं हो सका।-

भंवरसिंह राठौड़, उप निदेशक, कृषि विभाग, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:

चेतना के स्वर said...
gazzab dada lage raho congrats
November 9, 2009 7:37 PM

Monday, November 2, 2009

लाखों की रकम हजारों ने की हजम

उपभोक्ताओं पर एक करोड़ से अधिक बकाया
निगम लेगा रिकवरी एजेंटों की मदद
तीन हजार से अधिक डिफाल्टर घोषित
चूरू। पहले तो फोन पर जी भर कर बातें कर ली और जब बिल के भुगतान का समय आया तो मुकर गए। बिल की राशि ऎसे हजम कर ऎसी डकार ली कि निगम के बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद कान पर जूं नहीं रेंगी। भारत संचार निगम के साथ ऎसा व्यवहार करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या हजारों में है।सरकार के लाखों रूपयों चुकाने को लेकर नीयत में खोट रखने वाले इन उपभोक्ताओं से बकाया वसूलना अब टेढी खीर साबित हो रहा है। ऎसे में निगम ने निजी एजेंट की सेवा लेने की तैयारी करने के साथ ही कई उपभोक्ताओं के खिलाफ सिविल कोर्ट की शरण भी ली है।विभागीय जानकारी के मुताबिक वर्तमान में लगभग 18 हजार उपभोक्ताओं पर फोन के बिलों के रूप में एक करोड 6 लाख रूपए बकाया चल रहे हैं।
इसके अलावा मोबाइल (पोस्टपेड), लैण्ड लाइन व डब्ल्यूएलएल के तीन हजार 41 ऎसे उपभोक्ता हैं, जो डिफाल्टर घोषित किए जा चुके हैं। बकाया के चलते इनका कनेक्शन भी काट दिया गया है। इन पर 59 लाख 97 हजार 546 रूपए बकाया हैं, जिनकी प्राप्ति की उम्मीद काफी कम है।
नहीं बरतते सख्ती
बीएसएनएल सरकारी कम्पनी होने के कारण बकाया वसूलने में उपभोक्ताओं के साथ अन्य निजी कम्पनियों की तरह सख्ती नहीं बरत पाती है। निगम अघिकारी अपने स्तर पर बकाया वसूली का प्रयास करते आए हैं लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं निकले। अब एक निजी एजेंट की भी सेवा ली जाएगी। इसके लिए निगम ने हाल ही निविदा जारी की है।
कुल उपभोक्ता
सेवा-----------------धारक
मोबाइल(पोस्टपेड)--2000
लैण्डलाइन----------40,0०0
डब्ल्यूएलएल ------ 10,०००
कौन-कितना डिफाल्टर
सेवा--------------उपभोक्ता---बकाया राशि
लैण्ड लाइन-------1311 -------8,16,०२९
मोबाइल(पोस्टपेड) 214 --------3,27,928
डब्ल्यूएलएल----- 1514 --------8,53,५८९
कब से बकाया
समय--------- उपभोक्ता--------- राशि
3-6माह------671 --------------7,77,661
6-12माह----- 1244 ------------7,66,833
12-24माह---- 1126 ------------4,52,752
कोर्ट की शरण
आधिकारिक जानकारी के अनुसार बकाया नहीं चुकाने वाले कई उपभोक्ताओं के खिलाफ निगम ने हाल ही सिविल कोर्ट की शरण ली है। इसके अलावा लम्बे समय पर निगम की राशि पर कुण्डली मारे बैठे एसटीडी/पीसीओ धारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की भी तैयारी की जा रही है।
यहां के उपभोक्ता शामिल
जिला मुख्यालय स्थित भारत दूरसंचार निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक कार्यालय के अधीन चूरू जिला समेत बीकानेर जिले के डूंगरगढ़ तहसील के उपभोक्ता आते हैं।
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हजारों उपभोक्ता कई महिनों से बकाया राशि नहीं चुका रहे हैं। अब बकाया वसूली के प्रयास तेज कर दिए हैं। कुछ उपभोक्ताओं के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज करवाया है। इसके अलावा एक निजी एजेंट के लिए निविदा भी निकाली है।
-जसवीर सिंह त्यागी, महाप्रबंधक, बीएसएनएल, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

परमजीत बाली said...
अच्छी जानकारी दी।आभार।
November 3, 2009 5:12 PM

RAJNISH PARIHAR said...
बकाया वसूल करने के लिए सब तरीके अपनाने ही होंगे..वरना अन्य सरकारी विभागों की भांति BSNL का भी भट्ठा बैठ जायेगा...
November 7, 2009 10:47 AM

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