Monday, November 30, 2009

कन्यादान पर डाका !

चूरू। समाज कल्याण विभाग में सहयोग योजना के 'पेड' पर भ्रष्टाचार की 'बेल' पनप रही है। बिचौलिए गरीब की बेटी का कन्यादान लूट रहे हैं और शासन-प्रशासन आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है। हैरत की बात है कि कन्यादान पर डाका डालने के इस षड्यंत्र में विभागीय कर्मचारियों की भी हिस्सेदारी है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ही चूरू तहसील की घांघू ग्राम पंचायत में आठ अपात्र महिलाओं को सहयोग योजना राशि से लाभान्वित करवाकर बिचौलियों ने हजारों रूपए डकार लिए हैं। जबकि जरूरत मंद योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए हैं।तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार गरीब की बेटी का कन्यादान लूटने के लिए बनाई योजना में बिचौलियों ने एक ऎसी महिला की दोबारा शादी करवा दी जो पहले ही दो बच्चों की मां है।
इतना ही नहीं कई पढी-लिखी महिलाओं को अनपढ घोषित करवा दिया जबकि गांव की स्कूल में उनका नामांकन दर्ज है। हद तो तब हो गई जब वर्तमान में नाबालिग कन्याओं के भी फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर उन्हें योजना के तहत पात्र बनवा दिया। विभागीय अनदेखी का आलम तो यह है कि लाभांवित महिलाओं के नाम 2002 की बीपीएल सूची में ही शामिल नहीं हैं।किसी भी स्तर पर नहीं हुई तस्दीक
योजना के तहत पात्र महिलाओं का चयन करने में आवेदक का जन्म प्रमाण पत्र, बीपीएल कार्ड की सत्यापित फोटोकॉपी, बीपीएल सूची क्रमांक तथा यदि उपलब्ध हो तो शादी का कार्ड भी प्रस्तुत करना पडता है।पात्र महिलाओं को लाभांवित कराने के लिए विभागीय स्तर पर कितनी अनदेखी बरती गई इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है जबकि संबंघित क्षेत्र के छात्रावास अधीक्षक से आवेदक के तथ्यों की तस्दीक कराए जाने का प्रावधान है।
केस एक
घांघू निवासी अमीलाल की पुत्री मुकेश को योजना के तहत करीब दस हजार रूपए से लाभांवित किया गया है। मुकेश वर्तमान में दो बच्चों की मां है। उसकी शादी चार साल पहले हो चुकी थी। बिचौलिए और विभागीय कर्मचारियों ने कन्यादान राशि को हडपने के लिए उसकी शादी 25 अपे्रल 09 को होना बताया है। बकौल मुकेश अभी तक उसे साढे पांच हजार रूपए ही मिले हैं। बिचौलिए ने उसे कुल नौ हजार रूपए स्वीकृत होना बताया था।मुकेश की ही बहन सुमन को भी योजना के तहत पांच हजार रूपए से लाभान्वित किया गया है। बिचौलिए ने उसके आवेदन में सुमन को अनपढ बतलाया है जबकि वह गांव के राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में पढती थी। उसका नामांकन नम्बर 598 है। उसने कक्षा छह तक विद्यालय से उत्तीर्ण की है। बकौल मुकेश सुमन को तो बिचौलिए ने अभी एक रूपया भी नहीं दिया है।
केस दो
घांघू निवासी हनुमान धाणक की पुत्री कांता व सुनीता को पांच-पांच हजार रूपए की सहायता स्वीकृत की गई है। दोनों का विवाह दस दिसम्बर 07 को होना बताया गया है। गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड में सुनीता की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1580 पर 10 अगस्त 93 तथा कांता की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1579 पर 5 जून 95 दर्ज है। ऎसे में विवाह के समय सुनीता की उम्र महज 14 वर्ष तथा कांता की उम्र 12 वर्ष है। इस स्थिति में दोनों ही बहनें नाबालिग होने पर योजना के तहत कन्यादान राशि की पात्र नहीं हैं।
केस तीन
घांघू निवासी भगवाना राम मेघवाल की पुत्री सुमन व गांव के बुधराम धाणक की पुत्री चंदा की अपात्रता के लिहाज से स्थिति लगभग समान है। दोनों की शादी जून 09 में होने के साथ ही इनका परिवार बीपीएल सूची 2002 में भी शामिल नहीं है। गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड में सुमन की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1871 पर 12 अगस्त 94 तथा चन्दा (चन्द्रावली के नाम) की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1577 पर 6 मई 94 दर्ज है। ऎसे में दोनों की उम्र विवाह के समय 18 वर्ष से कम है।
केस चार
घांघू निवासी धर्मपाल धाणक की पुत्री पूनम व सुलोचना को भी योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। आवेदन पत्र में इनकी शादी भी 25 अप्रेल 09 को होना दर्शाई गई है। राजकीय उ“ा प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार नामांकन संख्या 1600 पर सुलोचना की जन्मतिथि (सुमन नाम से) 10 मार्च 94 है। इनका परिवार भी अन्य परिवारों की तरह बीपीएल सूची 2002 में शामिल नहीं है।
क्या है योजना
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों की बेटियों की शादी के अवसर पर सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए एक अपे्रल 2005 से 'सहयोग योजना' चल रही है। योजना के तहत शादी से एक माह पहले या एक माह बाद आवेदन किया जा सकता है।पात्रता के लिए लडकी का परिवार बीपीएल सूची 2002 में शामिल होने के साथ ही विवाह के समय उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। पात्र महिला को बतौर कन्यादान सरकार की ओर से करीब दस से बीस हजार रूपए तक की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाती है।
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मेरी दोनों बेटियों का चयन गांव के नेतराम मेघवाल ने करवाया था। उसके अनुसार मुकेश को नौ हजार रूपए तथा सुमन को पांच हजार रूपए स्वीकृत किए गए थे। उनमें से फिलहाल सुमन को कुछ नहीं दिया जबकि मुकेश को साढे पांच हजार रूपए दिए गए हैं। मेरी बेटी मुकेश की शादी हुए करीब तीन वर्ष से ज्यादा समय हो गया है। उसके दो बच्चे हैं।
- अमीलाल नायक (मुकेश के पिता), घांघू
एक अखबार में मेरी पंचायत की कई महिलाओं को सहयोग योजना के चैक वितरित करने की फोटो से यह जानकारी मिली। उनमें से किसी का भी परिवार पंचायत की बीपीएल सूची 2002 में शामिल नहीं है। मुकेश नामक एक महिला की शादी को तो काफी साल हो गए, वह योजना के तहत कैसे लाभान्वित हुए हुई। यह बात समझ से परे है।
-नाथी देवी, सरपंच, घांघू
जैसा आप बता रहे हो वैसा नहीं हो सकता। मेरे कार्यकाल में एक भी स्वीकृति जारी नहीं हुई है। किसी आवेदक ने तथ्य छुपाए हैं तो उसके और सूचनाओं का सत्यापन करने वाले स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई होगी। पहले की स्वीकृतियों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
-रामनिवास यादव, समाज कल्याण अघिकारी, चूरू
घांघू ही नहीं बल्कि सीकर, चूरू व झुंझुनूं के कई आवेदकों को राशि दिलाने में मैंने सहयोग किया है। किसी भी अपात्र को लाभान्वित नहीं किया गया है। किसी आवेदक ने कोई तथ्य छुपाया है या नहीं। इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
-नेतराम मेघवाल, घांघू
स्कूल के रजिस्टर के अनुसार गांव की मुकेश व सुमन स्कूल में पढी है। इन्हें किसी भी सूरत में अनपढ नहीं कहा जा सकता।
-करूणा बुंदेला, प्रधानाध्यापिका राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय, घांघू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

RAJNISH PARIHAR said...
sharmnaak....
December 2, 2009 4:16 PM

दीपिका said...
aaj v aise ghatnaon ki sankhya ghati nahi hai. sirf kahne ko hum aadhunik evam educated hai. par lagta nahi...
December 5, 2009 11:31 AM

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