Thursday, December 31, 2009

मैंने सुना नया साल आया

मैंने सुना नया साल आया
दिल के एफएम से जोड़ लो मन के तार...बजने दो फुल आवाज में प्यार भरे तराने...हटा दो खिड़कियों के सारे परदे...घुल जाने दो सासों में फिजां की महक...बाहों में समेट लो सूरज की किरणें...हवाओं को छू लेने दो तुम्हारे कपोल...उठा लो कलम और लिख दो अपनों के नाम कुछ संदेश...भेज दो सारे दोस्तों को एसएमएस...ठान लो कुछ नया करने की...ले लो संकल्प कुछ बनने का...कुछ पाने का...जिंदगानी के फ्लेशबैक में मार लो एक हल्का सा गोता...पता तो करो क्या पाया...क्या खोया...क्या चाहते थे...क्या मिला...कहां मारी बाजी...कहां पड़े कमजोर...।
जनाब मिल गया हो समय तो हटा दो दीवारों से कलेण्डर...मिला लो घड़ी के कांटे...क्योंकि मैंने सुना नया साल आया...फिर कुछ नया करने का जज्बा लाया...अपनों के नजदीक आने का एक और मौका आया...फिर एक शाम परिवारजन, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ जश्न मनाने का अवसर लाया...मत गंवाना किसी को बधाई देने का अवसर...फिर ना पड़े पछताना...अभी मान लो मेरा कहना...क्योंकि मैं भी यह बात 12 माह और 365 दिन बाद ही दोहरा सकूंगा...इस बीच मुझे दोष मत देना कि मैंने पहले नहीं बताया....कि नया साल आया...।
(पोस्ट पढऩे और ब्लॉग देखने वाले सभी दोस्तों को
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं)

Tuesday, December 29, 2009

मशीनी जुगाड़ रोकेगा जमीनी खिलवाड़

अत्याधुनिक मशीन खरीदने की कवायद
नाप-जोख में इस्तेमाल होगा ईटीएस व जीपीएस
पटवारियों का बचेगा समय
कोई नहीं उलझेगा आंकड़ों में
चूरू, 29 दिसम्बर। जमीनों के नाप-जोख में प्रशासनिक कारिंदों तथा जमीन हड़पने की नीयत रखने वाले पड़ोसी के हाथों होने वाली गड़बड़ी पर अब लगाम कसी जा सकेगी। अनपढ़ ग्रामीण भी पटवारियों के आंकड़ों के जाल में अब नहीं फंस पाएगा। जमीन के नाप-जोख में इंच भर की गड़बड़ी किए जाने की गुंजाइश नहीं बचेगी। यही नहीं बल्कि अब बड़े खेतों को नापने के लिए पटवारियों को घंटों तक नहीं जूझना पड़ेगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने पहल कर जमीनों को नापने की अत्याधुनिक मशीन इलेक्ट्रोनिक टोटल स्टेशन (ईटीएस) व ग्लोबल पोजीसिंग सिस्टम (जीपीएस) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जिला कलक्टर डा. केके पाठक की पहल पर नई दिल्ली की एक कम्पनी ट्रिम्बल ईटीएस व जीपीएस का प्रदर्शन भी कर चुकी है। अन्य कम्पनियों की मशीनों का भी प्रदर्शन होगा। जिले में कम से कम एक अत्याधुनिक मशीन खरीदी जानी तय है। मशीन की कीमत वाजिब रही तो जिले की प्रत्येक तहसील के लिए एक-एक मशीन खरीदी जाएगी।
मिलीमीटर तक का नाप
वर्तमान में जमीनों का नाप-जोख जरीब (कड़ी) व फीते से होता है।
जिसमें फुट या मीटर तक का ही सही आकलन हो सकता है। जबकि अत्याधुनिक मशीन से ऊंचाई, लम्बाई, चौड़ाई व गहराई को मिलीमीटर तक में नापा जा सकेगा। जमीन का पूरा नाप-जोख मशीन की डिस्पले पर खुद मालिक भी देख सकेगा। इससे नापने के बाद पटवारियों को ना तो कागज काले करने पडेंग़े और ना ही आंकड़ों में उलझना पड़ेगा। मशीन खुद ही सारा हिसाब-किताब कर देगी। कम्प्यूटर के माध्यम से नक्शा तक निकाला जा सकेगा।
कभी नहीं आएगा अंतर
पटवारियों के अनुसार गहरा गड्ढ़ा या ऊंचे टिब्बे वाली जमीन को समतल करने के बाद उसके वास्तविक नाप-जोख और पूर्व में करवाए नाप-जोख में अंतर आ जाता है। जबकि ईटीएस व जीपीएस से एक बार नाप-जोख होने के बाद भविष्य में कभी कोई अंतर नहीं आएगा। खास बात तो यह है कि जमीन के नाप-जोख के लिए एक बार कोई स्थायी बिन्दू तय करने के बाद विवाद की स्थिति में जमीन नापने की नौबत आने पर मशीन उस स्थायी बिन्दू को खुद ढंूढ़ लेगी।
ऐसा होगा नाप-जोख
इलेक्ट्रोनिक टोटल मशीन को ट्राईपोड पर रखकर स्थायी बिन्दू तय किया जाएगा। ईटीएस के सामने रखे रिफ्लेक्टर के बीच की दूरी की गणना कुछ ही क्षणों में हो जाएगी। रिफ्लेक्टर को अधिकतम तीन किलोमीटर दूर रखा जा सकेगा। इसके अलावा जीपीएस को तो हाथ में लेकर जमीन में एक बिन्दू से दूसरे बिन्दू तक ले जाने से ही दूरी की गणना हो जाएगी। दोनों ही प्रक्रिया इतनी सरल हैं कि अनपढ़ व्यक्ति भी आसानी से समझ सकता है।
जिला प्रशासन जमीनों की नाप-जोख के लिए अत्याधुनिक मशीन ईटीएस व जीपीएस खरीदना चाहता है। प्रशासन को इनकी तकनीकी जानकारी भी दे दी गई है। इनसे नाप-जोख किए जाने के बाद गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
-विरेन्द्र कुमार राय,डिप्टी बिजनेस मैनेजर, ट्रिम्बल, नई दिल्ली
जमाना हाइटेक हो गया है। ऐसे में जमीनी विवाद से बचने के लिए अत्याधुनिक मशीन खरीद रहे हैं। जिले में कम से कम एक मशीन खरीदी जाएगी। इसके अलावा नरेगा कार्य में सड़क, जोहड़ व मेड़बंदी के नाप-जोख में भी इन मशीनों को इस्तेमाल कर सकेंगे। लागत कम हुई तो प्रत्येक तहसील के लिए एक-एक मशीन खरीदेंगे।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू

Tuesday, December 22, 2009

भेदिए बताते सुराख

आगार प्रबंधन ने करवाई वीडियोग्राफी, रोडवेज बुकिंग स्थलों से उठाते हैं सवारी, दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है घाटा, गलफांस बनी 171 निजी बसें, रोजाना 50 हजार का चूना
चूरू, 22 दिसम्बर। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम में दिनोंदिन बढ़ते घाटे के लिए परिवहन महकमे के भेदिए ही जिम्मेदार हैं। विभागीय कारिंदे सरकार की नौकरी बजाते हुए निगम के हित में काम करने के भले ही लाख दावे कर रहे हों पर सच्चाई यह भी है कि निजी बस संचालकों को निगम की आय में सुराख करने की सीख भी उन्हीं की दी हुई है।इसे परिवहन विभाग की कथित अनदेखी कहें या निजी बस संचालकों से मिलीभगत कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाले निजी वाहनों से निगम को रोजाना तकरीबन पचास हजार रुपए का घाटा हो रहा है। ये वो बसें हैं जो निगम की नियमित बस सेवाओं के निर्धारित समय व निर्धारित मार्ग पर दस से पन्द्रह मिनट के अंतराल में संचालित हो रही हैं। हैरत की बात तो यह है कि अवैध रूप से संचालित इन निजी वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए महकमे के पास नियम भी हैं और कानून भी लेकिन उस पर अमल करना कोई नहीं चाहता।यह खुलासा चूरू आगार प्रबंधन की ओर से करवाई गई निजी बसों की वीडियोग्राफी में हुआ है। वीडियोग्राफी की रिपोर्ट बीते सप्ताह प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, जिला कलक्टर, जिला परिवहन अधिकारी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक सौंपी जा चुकी है लेकिन निजी बसों पर अंकुश की रणनीति बनाता कोई नहीं दिख रहा। पत्रिका को हाथ लगी इस रिपोर्ट के अनुसार जिला मुख्यालय से रोजाना 171 अवैध निजी बसें संचालित हो रही हैं। ये बसें राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध रूप से दौडऩे के साथ ही अधिकृत बुकिंग स्थल से सवारियां भी उठा रही रही हैं।
यूं लगाते हैं चूना
आधिकारिक जानकारी के अनुसार परिवहन महकमे की कागजी खानापूर्ति के नाम पर निजी बस संचालकों ने स्टेट कैरिज व कॉन्टे्रक्ट कैरिज परमिट ले रखे हैं। स्टेट कैरिज परमिट प्राप्त निजी बस को राष्ट्रीयकृत मार्ग की बजाय ग्रामीण मार्ग से गुजरना होता है। इसी तरह निर्धारित स्थान व निर्धारित समय के लिए कॉन्ट्रेक्ट कैरिज परमिट जारी किया जाता है। दोनों ही स्थिति में निजी बस चालक निगम के अधिकृत बुकिंग स्थल से सवारी नहीं ले सकते। हकीकत यह है कि परिवहन महकमे के अधिकारियों की मिलीभगत से निजी बस संचालक दोनों ही तरह के परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं।
हर बार टांय-टांय फिस्स
अवैध रूप से दौड़ती निजी बसों की रोकथाम के लिए परिवहन व पुलिस महकमे की प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद से निगम प्रबंधन अधिकृत बुकिंग स्थलों की वीडियोग्राफी करवाता है। लेकिन नतीजा हर बार सिफर रहता है। इससे पहले भी तीन बार वीडियोग्राफी करवाकर अवैध निजी बसों की पहचान उजागर की जा चुकी है। परिवहन विभाग ने निजी बसों पर अंकुश के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाए।
चूरू आगार का बढ़ता घाटा
वर्ष~~ ~~~~~~~~हानि
2006-07 ~~~~~8,0००
2007-08~~~~~~ 1,95,0००
2008-09~~~~~~1,41,000
2009-10~~~~~~ 61,49,000
(चालू वर्ष का घाटा नवम्बर तक का)
पंखा सर्किल
निगम के इस अधिकृत बुकिंग स्थल पर 25 नवम्बर को सुबह सवा सात से शाम साढ़े सात बजे तक वीडियोग्राफी करवाई गई। इस दौरान यहां से रतनगढ़, सुजानगढ़, डीडवाना व बीकानेर के लिए कुल 36 निजी बसें अवैध रूप से संचालित हुईं।
कलक्ट्रेट सर्किल
जयपुर से जोडऩे वाले इस प्रमुख मार्ग पर स्थित निगम के अधिकृत बुकिंग स्थल की 26 नवम्बर को सुबह पौने सात से शाम सवा सात बजे तक वीडियोग्राफी करवाई गई। इस बीच यहां से फतेहपुर, सीकर व जयपुर के लिए कुल 72 अवैध निजी बसें दौड़ीं।
लाल घंटाघर
27 नवम्बर को सुबह साढ़े सात से शाम आठ बजे निगम के इस अधिकृत बुंकिग स्थल की वीडियोग्राफी करवाई। इस दौरान यहां से झुंझुनूं वाया बिसाऊ तथा राजगढ़ वाया दूधवाखारा व ढाढऱ के लिए 6 3 अवैध निजी बसों का संचालन हुआ।
~~~~~~
सरकार के निर्देश पर रोडवेज के अधिकृत बुकिंग स्थलों की वीडियोग्राफी करवाकर आरटीओ, डीटीओ, कलक्टर व एसपी को हाल ही रिपोर्ट सुपुर्द की गई है। अवैध रूप से दौड़ती निजी बसों पर अंकुश के प्रति अधिकारियों की बेरुखी यूं ही बनी रही तो निगम कभी भी घाटे की स्थिति से नहीं उबर पाएगा।
-बेनीप्रसाद शर्मा, मुख्य प्रबंधक, चूरू आगार
वीडियोग्राफी की कोई रिपोर्ट मुझे नहीं मिली है। वैसे भी वीडियोग्राफी कराने से कुछ नहीं होने वाला क्योंकि निजी बसों के मालिक बस संचालन के लिए प्रतिमाह टैक्स के रूप में 25-25 हजार रुपए देते हैं।
-जीआर महरड़ा,जिला परिवहन अधिकारी, चूरू
आगार प्रबंधन की ओर से अवैध रूप से संचालित बसों की वीडियोग्राफी की सीडी मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक व जिला परिवहन अधिकारी को निर्देशित किया जा चुका है। कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई, यह उनसे पूछने पर ही पता लगेगा।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, December 14, 2009

रोग ने बिगाड़ा शिक्षा योग

शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम
जिले में दस हजार से अधिक विद्यार्थी रोगग्रस्त
चूरू, 14 दिसम्बर। पेट में कीड़े कुलबुलाएं, शरीर को बार-बार खुजाना पड़े, फोड़े-फुंसी पर मक्खियां भिनभिनातीं रहे, दांत व कान में दर्द हो और नजर हो कमजोर। ऐसे में पढ़ाई का माहौल बने तो आखिर कैसे?। ऐसी समस्याओं से जिले में एक नहीं बल्कि दस हजार से अधिक विद्यार्थियों को जूझना पड़ रहा है। बात भले ही गले नहीं उतर रही हो मगर शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम 09-10 की रिपोर्ट तो यही कहती है।
कार्यक्रम के तहत 17 नवम्बर से 12 दिसम्बर तक जिलेभर के प्राथमिक तथा माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। परीक्षण में सामने आया कि छोटी-छोटी बीमारियां विद्यार्थियों की पढ़ाई का गणित बैठाने में बाधा बन रही हैं। ऐसे में अस्वस्थ पाए गए विद्यार्थियों को मौके पर दवा देने के साथ ही सौ विद्यार्थियों को अस्पताल में तत्काल इलाज करवाने की सलाह दी गई है। सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत चिकित्सा विभाग के सहयोग से चलाए गए कार्यक्रम के तहत चिकित्सा अधिकारी, एएनएम, जीएनएम व एलएचवी की टीम ने विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परखा है।

डेढ़ लाख से अधिक का परीक्षण
प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यक्रम के तहत जिलेभर के एक लाख 58 हजार 686 से अधिक विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की गई है। इनमें दस हजार 204 विद्यार्थी अस्वस्थ्य पाए गए। इनके अलावा चूरू में 8 1, राजगढ़ में 17 तथा तारानगर में दो विद्यार्थियों को उपचार के लिए अस्पताल में रेफर किया है। फिलहाल कुछेक टीमों की रिपोर्ट आनी शेष है। ऐसे में अस्वस्थ बच्चों की संख्या में इजाफा होने का अनुमान है।

स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदार
विद्यार्थियों के खराब स्वास्थ्य के संबंध में परिजनों के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदार है। कई स्कूलों में पेयजल टंकियों की साफ-सफाई के प्रति गंभीरता का अभाव है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों जलदाय विभाग ने जलमणि कार्यक्रम के तहत चूरू व तारानगर ब्लॉक के 256 राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पीने के पानी की जांच कराई तो 99 विद्यालयों का पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। 47 विद्यालयों के पानी में जीवाणु पाए गए तथा 52 विद्यालयों के पानी में वांछित रसायनों की मात्रा गड़बड़ मिली।

आंकड़ों की जुबानी (बीसीएमएचओ कार्यालयों के अनुसार)
ब्लॉक-----जांच-----अस्वस्थ-----रेफर
चूरू------19579---1687------81
राजगढ़----17471---1253------17
तारानगर---19945---2054------2
सुजानगढ़---33198---2456------0
सरदारशहर--40281---1174-----0
रतनगढ़----28212---1580------0

इन रोगों से पीडि़त
रोग--------विद्यार्थी
खून की कमी--1674
पेट में कीड़े----515
कान बहना-----596
रतौंधी--------88
फोड़े-फुंसी-----1625
खाज खुजली---991
नेत्र पीड़ा-----477
दंत पीड़ा-----506
अन्य-------3732
कुल -------10204
~~~~~~
कार्यक्रम के तहत हजारों विद्यार्थी अस्वस्थ पाए गए हैं। समस्त बच्चों को मौके पर ही दवा दे दी गई। जिन विद्यालयों में अस्वस्थ विद्यार्थियों की संख्या अधिक पाई गई है, उनमें पानी की टंकी व कक्षा कक्षों में साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था करने के लिए संस्था प्रधानों को निर्देश दिए जाएंगे।
-ओम प्रकाश जांगिड़, जिला परियोजना समन्वयक, सर्व शिक्षा अभियान, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, December 7, 2009

गांवों का सफर होगा सुहाना

155 ग्राम पंचायतों में भी दौडेंगी रोडवेज
निगम को प्रस्ताव भेजा

चूरू, 7 दिसम्बर। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम मुख्यालय अगर चूरू आगार के प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो जिले के करीब पांच सौ गांवों का सफर सुहाना हो जाएगा। आगार प्रबंधन ने जिले की 155 ग्राम पंचायतों को रोडवेज बस सेवा से जोडऩे का प्रस्ताव भेजा है।
सब कुछ प्रस्ताव के मुताबिक हुआ तो ग्रामीण विकास को रफ्तार पकडऩे में देर नहीं लगेगी। ग्रामीणों को बस सुविधा के लिए मीलों तक का सफर तय नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीणों को उनके गांव की मुख्य सड़क, चौक व चौराहे तक बस सेवा उपलब्ध हो सकेगी। इसके बाद जिले में एक भी ग्राम पंचायत सीधी बस सेवा से वंचित नहीं रहेगी। प्रस्ताव भेजने से पहले आगार प्रबंधन ने समस्त 155 ग्राम पंचायतों का दौरा कर करीब सौ नए मार्ग चिह्नित किए है।
प्रत्येक बस में प्रति किलोमीटर 39 यात्री सफर करने के अनुमान तथा रोजाना प्रति किलोमीटर औसत सवा नौ रुपए का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

36 बसें और मांगी
प्रबंधन ने समस्त 155 ग्राम पंचातयों को बस सेवा से जोडऩे के लिए मुख्यालय से 36 बसें और मांगी है। इनके अनुपात में पर्याप्त चालक व परिचालकों की आवश्यकता भी जताई है।

नौ हजार किमी में होगी सुविधा
निगम के इस प्रस्ताव से 155 ग्राम पंचायतों में नौ हजार एक सौ दो किलोमीटर के दायरे में लोगों को फायदा हो सकेगा। सबसे छोटा पांच किमी लम्बा रूट बीदासर से घंटियाल तथा सबसे बड़ा 119 किमी लम्बा रूट तारानगर से रावतसर के बीच निर्धारित किया गया है।

लाभान्वित होने वाली पंचायत
चूरू: बंूटिया, भामासी, लालासर बणीरोतान, दूधवाखारा, देपालसर, श्योपुरा, सहनाली छोटी, खण्डवा, रीबिया, जोड़ी, कोटवाद, मोलीसर बड़ा, आसलखेड़ी, खींवसर, मेहरी, झारिया, लोहसना बड़ा, घांघू, रतनगढ़: भाणुदा, कांगड़, मेलूसर, नौसरिया, गोलसर, नुवां, सिकराली, बीनादेसर, रतनादेसर, भुखरेड़ी, रतनसरा, दाउदसर, बछरारा, टिडियासर, सीतसर, रतनसरा, जांदवा।तारानगर : कालवास, बाय, पण्डरेउ ताल, रेड़ी, लूणास, सोमसीसर, नेठवा, अलायला, मिखाला, मेघसर, गाजुवास, सात्यंू, राजपुरा, ढाणी कुम्हारान।राजगढ़ : कालाना ताल, विजयपुरा, मण्ड्रेला, ढाणी मौजी, नेशल छोटी, सांखण ताल, बीजावास, नौरंगपुरा, सुलखनिया छोटा, नूहंद, जसवंतपुरा, बेवड़, कालरी, राघा छोटी, राघा बड़ी, खेरू बड़ी, सूरतपुरा, न्यांगल छोटी, ख्याली, ढंढाल लेखू, नवां, भैंसली, रामपुरा, धानोठी बड़ी, बाघेला, पहाड़सर, गुलपुरा, बिरमी खालसा, कांजण, घणाउ, खुडी, लाखलाण, भुवाड़ी, महलाना उतरादा, ढिगारला, ढाणी बड़ी।सरदारशहर : अजीतसर, रूपलीसर, दुलरासर, देराजसर, जैतसीसर, बुकलसर, बड़ा, पिचकराई ताल, फोगां, डालमाण, मालसर, मालकसर, भोजासर छोटा, नैणासर, सुमेरियान, आसपालसर, शिमला, बोघेरा, बिल्यूबास, रामपुरा, रातुसर, रणसीसर, तोलासर, बिकमसरा, रामसीसर, रंगाईसर, कीकासर, बैजासर, अड़सीसर, राजासर, बीकान, भोजूसर, बुकलसर बड़ा, पातलीसर, ढाणी पांचरा, मेहरी, जयसिंहसर, मेहरासर उपाधियान, कल्यापुरा। सुजानगढ़ : ढढ़ेरू, ढाणी कालेरा, जोगलिया, जैतासर, सिमसिया, आबसर, हरासर, राजियासर मीठा, ऊंटालड़, ऊंटवाला, भासीणा, बाघसर, आथूणा, कानूता, जीली, बोबासर, बड़ावर, भानिसरिया तेज, सारोठिया, लालगढ़, पारेवड़ा, लोहारा, मुंदड़ा, जोगलसर, चरला, सड़ू, कल्याणसर, बाड़सर, गिरवरसर, साण्डवा, मलसीसर, मुरढाकिया, खारिया, कनीराम, नौरंगसर, गोपालपुरा, बालेरा, दुंकर, घंटियाल, अमरसर।

रोजाना तय होगा इतना
तहसील-----किमी-----बस
चूरू------812------3
राजगढ़----1770-----7
सरदारशहर--2846----11
सुजानगढ़---1976----8
रतनगढ़-----868----4
तारानगर-----730----3

फैक्ट फाइल
कुल ग्राम पंचायत -249
राष्ट्रीयकृत सड़क मार्गों पर स्थित पंचायत-60
पूर्व में जोड़ी गईं पंचायतें- 34
नई जुडऩे वाली पंचायतें-155
संचालन के लिए प्रस्तावित किलोमीटर-९१०२
अतिरिक्त बसों की मांग-36-
---
जिले की 155 ग्राम पंचायतों को रोडवेज बस सेवा से जोडऩे का प्रस्ताव हाल ही मुख्यालय को भेजा है। इसी वित्तीय वर्ष में इसे मंजूरी मिलनी की उम्मीद है। इसके बाद जिले की समस्त पंचायतों को रोडवेज सेवा नसीब हो सकेगी।
-बेनी प्रसाद शर्मा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज आगार, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, November 30, 2009

कन्यादान पर डाका !

चूरू। समाज कल्याण विभाग में सहयोग योजना के 'पेड' पर भ्रष्टाचार की 'बेल' पनप रही है। बिचौलिए गरीब की बेटी का कन्यादान लूट रहे हैं और शासन-प्रशासन आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है। हैरत की बात है कि कन्यादान पर डाका डालने के इस षड्यंत्र में विभागीय कर्मचारियों की भी हिस्सेदारी है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ही चूरू तहसील की घांघू ग्राम पंचायत में आठ अपात्र महिलाओं को सहयोग योजना राशि से लाभान्वित करवाकर बिचौलियों ने हजारों रूपए डकार लिए हैं। जबकि जरूरत मंद योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए हैं।तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार गरीब की बेटी का कन्यादान लूटने के लिए बनाई योजना में बिचौलियों ने एक ऎसी महिला की दोबारा शादी करवा दी जो पहले ही दो बच्चों की मां है।
इतना ही नहीं कई पढी-लिखी महिलाओं को अनपढ घोषित करवा दिया जबकि गांव की स्कूल में उनका नामांकन दर्ज है। हद तो तब हो गई जब वर्तमान में नाबालिग कन्याओं के भी फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर उन्हें योजना के तहत पात्र बनवा दिया। विभागीय अनदेखी का आलम तो यह है कि लाभांवित महिलाओं के नाम 2002 की बीपीएल सूची में ही शामिल नहीं हैं।किसी भी स्तर पर नहीं हुई तस्दीक
योजना के तहत पात्र महिलाओं का चयन करने में आवेदक का जन्म प्रमाण पत्र, बीपीएल कार्ड की सत्यापित फोटोकॉपी, बीपीएल सूची क्रमांक तथा यदि उपलब्ध हो तो शादी का कार्ड भी प्रस्तुत करना पडता है।पात्र महिलाओं को लाभांवित कराने के लिए विभागीय स्तर पर कितनी अनदेखी बरती गई इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है जबकि संबंघित क्षेत्र के छात्रावास अधीक्षक से आवेदक के तथ्यों की तस्दीक कराए जाने का प्रावधान है।
केस एक
घांघू निवासी अमीलाल की पुत्री मुकेश को योजना के तहत करीब दस हजार रूपए से लाभांवित किया गया है। मुकेश वर्तमान में दो बच्चों की मां है। उसकी शादी चार साल पहले हो चुकी थी। बिचौलिए और विभागीय कर्मचारियों ने कन्यादान राशि को हडपने के लिए उसकी शादी 25 अपे्रल 09 को होना बताया है। बकौल मुकेश अभी तक उसे साढे पांच हजार रूपए ही मिले हैं। बिचौलिए ने उसे कुल नौ हजार रूपए स्वीकृत होना बताया था।मुकेश की ही बहन सुमन को भी योजना के तहत पांच हजार रूपए से लाभान्वित किया गया है। बिचौलिए ने उसके आवेदन में सुमन को अनपढ बतलाया है जबकि वह गांव के राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में पढती थी। उसका नामांकन नम्बर 598 है। उसने कक्षा छह तक विद्यालय से उत्तीर्ण की है। बकौल मुकेश सुमन को तो बिचौलिए ने अभी एक रूपया भी नहीं दिया है।
केस दो
घांघू निवासी हनुमान धाणक की पुत्री कांता व सुनीता को पांच-पांच हजार रूपए की सहायता स्वीकृत की गई है। दोनों का विवाह दस दिसम्बर 07 को होना बताया गया है। गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड में सुनीता की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1580 पर 10 अगस्त 93 तथा कांता की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1579 पर 5 जून 95 दर्ज है। ऎसे में विवाह के समय सुनीता की उम्र महज 14 वर्ष तथा कांता की उम्र 12 वर्ष है। इस स्थिति में दोनों ही बहनें नाबालिग होने पर योजना के तहत कन्यादान राशि की पात्र नहीं हैं।
केस तीन
घांघू निवासी भगवाना राम मेघवाल की पुत्री सुमन व गांव के बुधराम धाणक की पुत्री चंदा की अपात्रता के लिहाज से स्थिति लगभग समान है। दोनों की शादी जून 09 में होने के साथ ही इनका परिवार बीपीएल सूची 2002 में भी शामिल नहीं है। गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड में सुमन की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1871 पर 12 अगस्त 94 तथा चन्दा (चन्द्रावली के नाम) की जन्मतिथि नामांकन संख्या 1577 पर 6 मई 94 दर्ज है। ऎसे में दोनों की उम्र विवाह के समय 18 वर्ष से कम है।
केस चार
घांघू निवासी धर्मपाल धाणक की पुत्री पूनम व सुलोचना को भी योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। आवेदन पत्र में इनकी शादी भी 25 अप्रेल 09 को होना दर्शाई गई है। राजकीय उ“ा प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार नामांकन संख्या 1600 पर सुलोचना की जन्मतिथि (सुमन नाम से) 10 मार्च 94 है। इनका परिवार भी अन्य परिवारों की तरह बीपीएल सूची 2002 में शामिल नहीं है।
क्या है योजना
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों की बेटियों की शादी के अवसर पर सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए एक अपे्रल 2005 से 'सहयोग योजना' चल रही है। योजना के तहत शादी से एक माह पहले या एक माह बाद आवेदन किया जा सकता है।पात्रता के लिए लडकी का परिवार बीपीएल सूची 2002 में शामिल होने के साथ ही विवाह के समय उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। पात्र महिला को बतौर कन्यादान सरकार की ओर से करीब दस से बीस हजार रूपए तक की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाती है।
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मेरी दोनों बेटियों का चयन गांव के नेतराम मेघवाल ने करवाया था। उसके अनुसार मुकेश को नौ हजार रूपए तथा सुमन को पांच हजार रूपए स्वीकृत किए गए थे। उनमें से फिलहाल सुमन को कुछ नहीं दिया जबकि मुकेश को साढे पांच हजार रूपए दिए गए हैं। मेरी बेटी मुकेश की शादी हुए करीब तीन वर्ष से ज्यादा समय हो गया है। उसके दो बच्चे हैं।
- अमीलाल नायक (मुकेश के पिता), घांघू
एक अखबार में मेरी पंचायत की कई महिलाओं को सहयोग योजना के चैक वितरित करने की फोटो से यह जानकारी मिली। उनमें से किसी का भी परिवार पंचायत की बीपीएल सूची 2002 में शामिल नहीं है। मुकेश नामक एक महिला की शादी को तो काफी साल हो गए, वह योजना के तहत कैसे लाभान्वित हुए हुई। यह बात समझ से परे है।
-नाथी देवी, सरपंच, घांघू
जैसा आप बता रहे हो वैसा नहीं हो सकता। मेरे कार्यकाल में एक भी स्वीकृति जारी नहीं हुई है। किसी आवेदक ने तथ्य छुपाए हैं तो उसके और सूचनाओं का सत्यापन करने वाले स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई होगी। पहले की स्वीकृतियों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
-रामनिवास यादव, समाज कल्याण अघिकारी, चूरू
घांघू ही नहीं बल्कि सीकर, चूरू व झुंझुनूं के कई आवेदकों को राशि दिलाने में मैंने सहयोग किया है। किसी भी अपात्र को लाभान्वित नहीं किया गया है। किसी आवेदक ने कोई तथ्य छुपाया है या नहीं। इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
-नेतराम मेघवाल, घांघू
स्कूल के रजिस्टर के अनुसार गांव की मुकेश व सुमन स्कूल में पढी है। इन्हें किसी भी सूरत में अनपढ नहीं कहा जा सकता।
-करूणा बुंदेला, प्रधानाध्यापिका राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय, घांघू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

RAJNISH PARIHAR said...
sharmnaak....
December 2, 2009 4:16 PM

दीपिका said...
aaj v aise ghatnaon ki sankhya ghati nahi hai. sirf kahne ko hum aadhunik evam educated hai. par lagta nahi...
December 5, 2009 11:31 AM

Friday, November 20, 2009

पुलिस के हाथ हुए मजबूत

एएसआई भी रखेगा पिस्टल
बंदूक की जगह लेगी एके-47
चूरू, 20 नवम्बर। शातिर अपराधियों का सामना करने, बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने और आतंकी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस के हाथ पहले से अधिक मजबूत हो गए हैं। चूरू जिला पुलिस के पास अत्याधुनिक हथियारों की पहली खेप पहुंच चुकी है। इनमें एके-47 और ऑटोमैटिक रायफल्स शामिल हैं। अगली खेप जल्द ही पहुंचने की उम्मीद है। पुलिस प्रशासन ने उपलब्ध आधुनिक हथियारों का सिपाहियों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिलाना शुरू कर दिया है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो जिले की पुलिस को साधन, संसाधनों की दृष्टि से अपराधियों के सामने हताश नहीं होना पड़ेगा। बेहतरीन संसाधनों के रहते पुलिस का इकबाल आने वाले कल में और बुलन्द होगा।
हर एएसआई रखेगा पिस्टल
हथियारों की संख्या में इजाफा होने के बाद प्रत्येक एएसआई 9-एमएम की पिस्टल रख सकेगा। फिलहाल पुलिस उप निरीक्षक से लेकर जिला पुलिस अधीक्षक तक की रैंक के अधिकारियों के पास ही 9-एमएम की पिस्टल उपलब्ध हैं। वर्तमान में जिले में करीब एक सौ सहायक पुलिस उप निरीक्षक तैनात हैं।
यूं होगा फायदा
शातिर अपराधियों से मुकाबला करने और जन आंदोलन के दौरान उग्र भीड़ को नियंत्रित करने में नए हथियार पुलिस के लिए काफी मददगार होंगे। वाटर केनन से भीड़ पर तेजी से पानी डाला जा सकेगा तो व्रज वाहन से आंसू गैस के गोले धड़ाधड़ छोड़े जा सकेंगे। स्टन ग्रेनेड और रबड़ बुलैट भीड़ व अपराधियों को बेहोश करने में काम आएंगे। नए हथियार उन परिस्थितियों में अधिक कारगर साबित होंगे जहां पुलिस फायरिंग की नौबत आ जाती है या जहां दो गुटों में टकराव के कारण जनहानी होने की आशंका अधिक रहती है।
ये पहुंच चुके हैं
तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार जिला पुलिस के पास अब तक एके-47, एसएलआर रायफल्स, फायबर ग्लास की लाठी, ढाल, हैलमेट व जैकेट पहुंच चुके हैं। इनका प्रशिक्षण भी दिया जाने लगा है।
ये खरीदे जा रहे हैं
छोटे बोर के हथियार इनमें 9-एमएम की पिस्टल व रबर बुलैट शामिल है।
इनका भेजा प्रस्ताव
स्टन ग्रेनेड, वाटर केनन और अग्निवर्षा मय वज्र वाहन।
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पुलिस का इकबाल हर हाल में बुलन्द है और रहेगा। शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने और आंतकी घटनाओं से निपटने के लिए हथियारों की संख्या बढ़ाई जा रही है। कई आधुनिक हथियार पहुंच चुके हैं। नफरी को नए हथियारों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
-निसार अहमद फारुकी, पुलिस अधीक्षक, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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RAJNISH PARIHAR said...
pulis inka pryog aatm raksha me hi kare....
November 21, 2009 10:03 AM

Tuesday, November 10, 2009

अनार्थिक स्कूलों पर तलवार

चूरू, 10 नवम्बर। शिक्षा विभाग के लिए सिरदर्द बने अनार्थिक व कागजी विद्यालयों पर ताले की तैयारी शुरू हो चुकी है। ऐसे विद्यालयों की सूचनाएं नए सिरे से जुटाई जा रही हैं। शिक्षा अधिकारी तीस सितम्बर 09 तक की छात्र संख्या को आधार मानकर विद्यालय को अनार्थिक घोषित किए जाने की मशक्कत कर रहे हैं। अधिकांश अनार्थिक विद्यालयों में नाममात्र के बच्चे पढ़ रहे हैं। हालांकि इससे उनकी पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उन्हें पढऩे के लिए नजदीक के अन्य विद्यालय में भेजा जाएगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार 12 नवम्बर को चूरू में हनुमानगढ़, झुंझुनूं, श्रीगंगानगर व बीकानेर के जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा चर्चा करेंगे तथा 16 नवम्बर को शिक्षा संकुल जयपुर में शिक्षामंत्री भंवरलाल मेघवाल प्रदेशभर के अनार्थिक विद्यालयों की समीक्षा करेंगे।

ये हैं श्रेणियां

अनार्थिक व कागजी विद्यालयों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें छात्र संख्या शून्य, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में छात्र संख्या बीस से कम तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक छात्र संख्या बीस से अधिक मगर कक्षा छह, सात और आठ में छात्र संख्या बीस से कम श्रेणी शामिल है।

दूसरे स्कूल में पढ़ेंगे

जिन प्राथमिक विद्यालयों की सभी कक्षाओं में छात्र संख्या बीस से कम तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों की कक्षा छह, सात और आठ में छात्र संख्या बीस है उन पर ताला लगाकर उनके विद्यार्थियों को नजदीक के अन्य सरकारी स्कूल में पढ़ाया जाएगा। प्राथमिक विद्यालय एक किलोमीटर तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय दो किलोमीटर के दायरे में स्थित अन्य सरकारी विद्यालय में मर्ज होंगे।

आधे जिले की स्थिति

जिले के छह ब्लॉक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारियों में से तीन ने अनार्थिक विद्यालयों की सूचना डीईओ ऑफिस भेज भी दी है जबकि शेष ब्लॉकों में शिक्षा अधिकारी सूचना को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार रतनगढ़, चूरू व सुजानगढ़ में 55 विद्यालय अनार्थिक हैं। खास बात यह है कि इनमें से शिक्षामंत्री के गृह क्षेत्र सुजानगढ़ के 11 विद्यालय कागजों में चल रहे हैं। शेष तारानगर, सादुलपुर और सरदार शहर में करीब पच्चीस विद्यालयों के अनार्थिक घोषित होने की और सम्भावना है।

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अनार्थिक विद्यालयों की सूचियां तैयार की जा रही हैं। तीन बीईईओ ने सूचना भेज दी है। शेष को बुधवार सुबह 11 बजे तक सूचना भेजने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
-ओमप्रकाश जांगिड़, जिला प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी, चूरू

अनार्थिक एवं कागजी विद्यालयों की सूचनाएं नए सिरे से जुटाई जा रही हैं। विद्यालयों में तीस सितम्बर 09 की छात्र संख्या को आधार माना गया है।

-शिवजी राम चौधरी, उपनिदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा, चूरू



प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Friday, November 6, 2009

उम्मीद की फसल

2बार पढ़ा गया
राष्ट्रीय कृषि बीमा योजनाआधों को भी नहीं मिला क्लेम

चूरू, 6 नवम्बर। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना एक बार फिर से जिले के तीस हजार से अधिक किसानों के लिए महज उम्मीद की फसल साबित हुई है। वर्ष 2008-09 के दौरान रबी की फसलों का बीमा करवाने वाले जिले के 59 हजार 556 किसानों में से तारानगर व सुजानगढ़ तहसील के 20 हजार 538 किसानों को हाल ही बीमा क्लेम स्वीकृत हुआ है। जिले की चूरू, सरदारशहर, रतनगढ़ व राजगढ़ तहसील के किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिला है। तारानगर तहसील के किसानों को चना तथा सुजानगढ़ तहसील के किसानों को गेहूं, मैथी व सरसों का बीमा क्लेम स्वीकृत किया गया है।

यह है समस्या

योजना के नियमानुसार किसानों को बीमा का लाभ देने के लिए तहसील स्तर पर सूखा घोषित किया जाता है। जिस तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है उसी के किसानों को बीमा का लाभ मिलता है। भले ही सभी किसानों का नुकसान हुआ हो या नहीं। जबकि दूसरी ओर अन्य तहसीलों के विभिन्न गांवों में नुकसान झेलने के बावजूद किसान बीमा के लाभ से वंचित हो जाते हैं। बीमा क्लेम के निर्धारण में तहसील की बजाय गांव को इकाई माने जाने की मांग किसान व किसान संघों की ओर से लम्बे समय से की जा रही है। लेकिन नतीजा सिफर है।

आंकड़ों की जुबानी

आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्ष 08-09 के दौरान जिले के 59 हजार 556 किसानों ने दो लाख 74 हजार 238 हैक्टेयर में खड़ी फसलों का बीमा करवाया तथा बीमाकर्ता कम्पनी को प्रीमियम के रूप में दो करोड़ 45 लाख 33 हजार 448 रुपए जमा करवाए। बदले में 20 हजार 538 किसानों को 12 करोड़ 42 लाख 51 हजार 6 57 रुपए बीमा क्लेम स्वीकृत हुआ है।

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कम्पनी ने तहसील को इकाई मानकर बीमा क्लेम स्वीकृत किया है। राशि जल्द ही किसानों के खाते में जमा करवा दी जाएगी। तहसील की बजाय गांव को इकाई माने जाने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।

-ओमप्रकाश सेन, प्रतिनिधि, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी

योजना के तहत फसल की कम से कम 16 अलग-अलग खेतों से क्रॉप कटिंग होती है। क्रॉप कटिंग के लिए खेतों का चयन औचक (रेंडमली) होता है। फिर पिछले पांच से दस साल तक के औसत उत्पादन से तुलना की जाती है। जिस तहसील का उत्पादन औसत से कम होता उसमें किसानों को बीमा क्लेम स्वीकृत किया जाता है। जिले में सुजानगढ़ व तारानगर तहसील के अलावा अन्य तहसीलों में उत्पादन औसत से कम नहीं रहा इसलिए इनके किसानों के लिए बीमा क्लेम स्वीकृत नहीं हो सका।-

भंवरसिंह राठौड़, उप निदेशक, कृषि विभाग, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:

चेतना के स्वर said...
gazzab dada lage raho congrats
November 9, 2009 7:37 PM

Monday, November 2, 2009

लाखों की रकम हजारों ने की हजम

उपभोक्ताओं पर एक करोड़ से अधिक बकाया
निगम लेगा रिकवरी एजेंटों की मदद
तीन हजार से अधिक डिफाल्टर घोषित
चूरू। पहले तो फोन पर जी भर कर बातें कर ली और जब बिल के भुगतान का समय आया तो मुकर गए। बिल की राशि ऎसे हजम कर ऎसी डकार ली कि निगम के बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद कान पर जूं नहीं रेंगी। भारत संचार निगम के साथ ऎसा व्यवहार करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या हजारों में है।सरकार के लाखों रूपयों चुकाने को लेकर नीयत में खोट रखने वाले इन उपभोक्ताओं से बकाया वसूलना अब टेढी खीर साबित हो रहा है। ऎसे में निगम ने निजी एजेंट की सेवा लेने की तैयारी करने के साथ ही कई उपभोक्ताओं के खिलाफ सिविल कोर्ट की शरण भी ली है।विभागीय जानकारी के मुताबिक वर्तमान में लगभग 18 हजार उपभोक्ताओं पर फोन के बिलों के रूप में एक करोड 6 लाख रूपए बकाया चल रहे हैं।
इसके अलावा मोबाइल (पोस्टपेड), लैण्ड लाइन व डब्ल्यूएलएल के तीन हजार 41 ऎसे उपभोक्ता हैं, जो डिफाल्टर घोषित किए जा चुके हैं। बकाया के चलते इनका कनेक्शन भी काट दिया गया है। इन पर 59 लाख 97 हजार 546 रूपए बकाया हैं, जिनकी प्राप्ति की उम्मीद काफी कम है।
नहीं बरतते सख्ती
बीएसएनएल सरकारी कम्पनी होने के कारण बकाया वसूलने में उपभोक्ताओं के साथ अन्य निजी कम्पनियों की तरह सख्ती नहीं बरत पाती है। निगम अघिकारी अपने स्तर पर बकाया वसूली का प्रयास करते आए हैं लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं निकले। अब एक निजी एजेंट की भी सेवा ली जाएगी। इसके लिए निगम ने हाल ही निविदा जारी की है।
कुल उपभोक्ता
सेवा-----------------धारक
मोबाइल(पोस्टपेड)--2000
लैण्डलाइन----------40,0०0
डब्ल्यूएलएल ------ 10,०००
कौन-कितना डिफाल्टर
सेवा--------------उपभोक्ता---बकाया राशि
लैण्ड लाइन-------1311 -------8,16,०२९
मोबाइल(पोस्टपेड) 214 --------3,27,928
डब्ल्यूएलएल----- 1514 --------8,53,५८९
कब से बकाया
समय--------- उपभोक्ता--------- राशि
3-6माह------671 --------------7,77,661
6-12माह----- 1244 ------------7,66,833
12-24माह---- 1126 ------------4,52,752
कोर्ट की शरण
आधिकारिक जानकारी के अनुसार बकाया नहीं चुकाने वाले कई उपभोक्ताओं के खिलाफ निगम ने हाल ही सिविल कोर्ट की शरण ली है। इसके अलावा लम्बे समय पर निगम की राशि पर कुण्डली मारे बैठे एसटीडी/पीसीओ धारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की भी तैयारी की जा रही है।
यहां के उपभोक्ता शामिल
जिला मुख्यालय स्थित भारत दूरसंचार निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक कार्यालय के अधीन चूरू जिला समेत बीकानेर जिले के डूंगरगढ़ तहसील के उपभोक्ता आते हैं।
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हजारों उपभोक्ता कई महिनों से बकाया राशि नहीं चुका रहे हैं। अब बकाया वसूली के प्रयास तेज कर दिए हैं। कुछ उपभोक्ताओं के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज करवाया है। इसके अलावा एक निजी एजेंट के लिए निविदा भी निकाली है।
-जसवीर सिंह त्यागी, महाप्रबंधक, बीएसएनएल, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

परमजीत बाली said...
अच्छी जानकारी दी।आभार।
November 3, 2009 5:12 PM

RAJNISH PARIHAR said...
बकाया वसूल करने के लिए सब तरीके अपनाने ही होंगे..वरना अन्य सरकारी विभागों की भांति BSNL का भी भट्ठा बैठ जायेगा...
November 7, 2009 10:47 AM

Wednesday, October 28, 2009

गूंज उठी शहनाइयां

घोड़ी, बैण्ड-बाजा, हलवाई, धर्मशालाएं-गेस्ट हाउस हुए बुक
चूरू, 28 अक्टूबर। देवउठनी एकादशी के साथ ही अंचल में गुरुवार से शादियों का सीजन शुरू हो गया है। देवउठनी का अबूझ सावा होने के कारण कई स्थानों पर शहनाई गूजेंगी तथा डीजे और बैण्ड के बोल सुनाई पड़ेंगे। घोड़ी, बैण्ड, टेण्ट, वाहन व धर्मशालाओं की कई महीनों तक की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। हलवाई, पण्डित, विवाह स्थल सजाने वाले और दुकानदारों की व्यस्तता बढ़ गई है। गुरुवार को शादियों की धूम के साथ ही तुलसी विवाह की परम्परा भी निभाई जाएगी।

आए हम बाराती...
चहुंओर सावों की धूम होने के कारण वाहन मालिकों के चेहरे खिल उठे हैं। बारात के लिए जीप, कार और बसों की कई महीनों तक की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। महालक्ष्मी ट्रेवल्स के राजेश जांगिड़ के अनुसार बसों का किराया कम से कम 21 सौ रुपए लिया जा रहा है। शादियों की सीजन में यात्री वाहनों की कमी होने से अन्य वाहन चालकों को भी अच्छी कमाई की उम्मीद है।

घोड़ी पर होकर सवार...
दूल्हे राजा को घोड़ी पर बैठाकर तोरणद्वार तक पहुंचाने के लिए घोड़ी मालिकों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। घोड़ी को दुल्हन की तरह सजाने के साथ ही उसकी खुराक भी बढ़ा दी गई है। घोड़ी मालिक कमल कुमार ने बताया कि घोड़ी को रोजाना तीन किलोग्राम दूध पिलाया जा रहा है तथा घी खिलाना भी शुरू कर दिया है। शादी में घोड़ी को दो घंटे तक ले जाने पर 11 सौ तथा फुल टाइम के 21 सौ रुपए लिए जा रहे हैं। छह फरवरी तक के लिए घोडिय़ों की एडवांस बुकिंग हो चुकी हैं।

बहारों फूल बरसाओ...
शादियों की धूम शुरू होने से पुष्प भण्डारों पर बहार आ गई है। गजरे और फूल मालाएं तैयार करने का कार्य जोरों पर है। पुष्प भण्डार के मालिक बुद्धमल सैनी ने बताया कि सौ रुपए से दो हजार रुपए की वरमालाएं तैयार की गई हैं। देवउठनी एकादशी पर दस से पन्द्रह क्विंटल फूल बिकने की उम्मीद है। दूल्हे राजा के लिए वाहनों के सजने का सिलसिला सुबह दस बजे बाद से शुरू होगा। पांच सौ से पांच हजार रुपए तक में वाहन सजाए जाएंगे।

सजना है मुझे सजना...
शादी के मौके पर ब्यूटी पार्लरों में रौनक लौट आई है। दुल्हनें सजने-संवरने में कोई कमी नहीं छोड़ रही हैं। दुल्हन की सहेलियों में भी उत्साह देखा जा रहा है। दूल्हा और दुल्हन के साथ-साथ सजने के लिए उनके दोस्त और परिजन भी ब्यूटी पार्लर पहुंच रहे हैं। कायाकल्प ब्यूटी पार्लर संचालक मंजू शर्मा ने बताया कि देवउठनी को कई दुल्हनों ने एडवांस बुकिंग करवाई है। दुल्हनें सजने-संवरने में ग्यारह सौ से पांच हजार रुपए तक खर्च कर रही हैं।

मुहूर्त अबूझ, सावे 22 नवंबर से
ज्योतिषाचार्य पण्डित बालकृष्ण कौशिक ने बताया कि देवउठनी एकादशी का पौराणिक महत्व के कारण इस दिन अबूझ सावों की धूम रहती है। लोग विवाह के लिए इसे खासा महत्व देते हैं। एकादशी को दोपहर 12.55 से रात 1.30 बजे तक मृत्युलोक भद्रा होने से फेरे या पाणिग्रहण संस्कार उक्त समय निकालकर ही कराया जाना बेहतर है। उन्होंने बताया कि सूर्य के वृश्चिक राशि में आने के बाद ही सावे 22 नवंबर से शुरू होंगे। फिलहाल सूर्य तुला राशि में विचरण कर रहा है।

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Tuesday, October 27, 2009

सीधे सवालों के टेढ़े जवाब

प्रभारी सचिव भाणावत ने अधिकारियों को सुनाई खरी-खरी
चूरू, 27 अक्टूबर। आपको विद्युत सुविधा से वंचितों की संख्या ही मालूम नहीं तो लक्ष्य कैसे हासिल करोगे...क्या कहा चारे की कमी नहीं है... प्रशासन ने तो 18 स्थानों पर चारा डिपो खोले हैं...आप निरीक्षण तो खूब करते हो मगर उनका परिणाम तो कुछ भी नहीं निकला...श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान हुआ ही नहीं और आपने मजदूरी का औसत आंकड़ा भी निकाल लिया...सीएमएचओ आप सो रहे हो...रात को कहां गए थे...स्वास्थ्य का ध्यान रखों, आपके कंधों पर पूरे जिले के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है...।
सीधे-सीधे सवालों के ऐसे जवाब मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों की बैठक में सामने आए। दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार को चूरू आए प्रभारी सचिव राजेन्द्र भाणावत ने अधिकारियों की जमकर क्लास ली। कुछेक को छोड़ कोई भी अधिकारी प्रभारी सचिव के सीधे-सीधे सवालों का ढंग से जवाब नहीं दे पाया। आलम यह था कि अधिकारी, प्रभारी सचिव के हर दूसरे सवाल में उलझते गए।
प्रभारी सचिव भाणावत ने जोधपुर विद्युत वितरण निगम के अधीक्षण अभियंता एनएन चौहान से विद्युत सुविधा से जुडऩे लायक ढाणियों की संख्या के बारे में पूछा मगर उन्हें पता ही नहीं था। पशुपालन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि जिले में चारे की कमी नहीं खल रही है। इस पर प्रभारी सचिव ने कहा कि आपको पता नहीं है तो यह नहीं बोले कि सब कुछ ठीक है। क्योंकि अधिकारी की जानकारी और ग्रामीण स्तर की समस्या की वास्तविक स्थिति में अंतर रहेगा तो असंतोष बढ़ेगा।
प्रभारी सचिव ने डीएसओ हरलाल सिंह से कहा कि विभिन्न योजनाओं के तहत राशन सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंची या नहीं.. इसका कैसे पता लगाते हो। डीएसओ इस सवाल का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। सीएमएचओ वीके जिंदल की सबसे अधिक खिंचाई की गई।
जिंदल प्रभारी सचिव के कई सवालों के जवाब में न केवल उलझ गए बल्कि गलत जानकारी देने से भी नहीं चुके। एक सवाल के जवाब में सीएमएचओ ने कम्पाउण्डर मरीज को चिकित्सकीय परामर्श देने का अधिकार रखने की बात कही तो प्रभारी सचिव ने खासी नाराजगी जताई। प्रभारी सचिव ने सबसे अधिक लम्बे समय तक नरेगा पर चर्चा की।
नरेगा के जेईएन अनिल माथुर से उन्होंने न्यूनतम मजदूरी, स्वीकृत व अधूरे पड़े कार्यों समेत कई सवाल किए। 15 अक्टूबर तक के पखवाड़े में न्यूनतम मजदूरी औसत 8 3 रुपए का जवाब सुन प्रभारी सचिव ने कहा कार्य का नाप-जोख हुआ ही नहीं और आपने औसत मजदूरी कैसे निकाल ली। बैठक में जिला कलक्टर डा. केके पाठक, एडीएम बीएल मेहरड़ा, एएसपी अनिल क्याल समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

हर एक को दिए निर्देश
~अधिक से अधिक राशन टिकटों का हो वितरण।
~नरेगा में टांके निर्माण के साथ अन्य योजनाओं से पौधे दो।
~नरेगा श्रमिकों को 15 दिन में हो मजदूरी का भुगतान।
~जेईएन व मेट की नाप-जोख में अंतर होने पर हो सख्त कार्रवाई।
~जिले में पचास फीसदी मेट महिलाएं हो।
~विद्यार्थियों की फर्जी संख्या दिखाने वाले स्कूल हो बंद।
~निजी अस्पताल व जांच केन्द्रों के आंकड़ें भी एकत्रित किए जाए।
~नरेगा में जहां कुछ काम अधूरे हैं वहां नए कार्य न हो स्वीकृत।
~सरपंचों को सामग्री राशि स्वीकृत करने में विशेष सावधानी बरतें।
आंकड़ों में नरेगा की तस्वीर
~नरेगा में 28 हजार 74 श्रमिक कार्यरत हैं।
~नरेगा के आठ हजार कामों में से एक हजार 6 7 पूरे हुए ।
~श्रमिकों को रोजाना की मजूदरी औसत 83 रुपए मिलती है।
~70 रुपए से कम रोजाना किसी भी श्रमिक को नहीं मिलते।
~रोजाना के 70-80 रुपए पाने वाले 187 श्रमिक हैं।
~870 श्रमिक रोजाना 80-90 रुपए मजदूरी पाते हैं।
~केवल दस श्रमिकों को रोजाना 90-100 रुपए मिलते हैं।
~जिले में महिला मेट केवल दस फीसदी हैं।

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Saturday, October 24, 2009

दो सौ 72 शिक्षक पदस्थापित

परिवेदनाओं का निस्तारण
चूरू, 24 अक्टूबर। शिक्षा विभाग ने तृतीय से द्वितीय श्रेणी में पातेय वेतन पर पदोन्नत माध्यमिक विद्यालयों के दो सौ 72 शिक्षकों को पदस्थापित किया है। माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में पदस्थापित शिक्षकों की सूची चस्पा कर दी गई। विभागीय जानकारी के अनुसार मण्डल के पांचों जिलों के 158 शिक्षकों को परिवेदनाओं का निस्तारण करने के बाद फिर से इधर-उधर किया गया है। झुंझुनूं जिले के अनुसूचित जाति के 104 तथा सामान्य के दस शिक्षकों के पूर्व में पदोन्नति पर पदस्थापित होने से वंचित रह जाने के कारण अब उन्हें भी लाभान्वित किया गया है।
विभागीय सूत्रों ने बताया गत माह तृतीय से द्वितीय श्रेणी में पदोन्नति पर पदस्थापित किए जाने के बाद करीब 250 शिक्षकों ने अन्य विद्यालयों में पदस्थापित किए जाने की परिवेदना लगाई थी। इनमे से 158 शिक्षकों को द्वितीय से प्रथम श्रेणी में पदोन्नति के बाद खाली हुए पदों पर पदस्थापित किया गया है।

इनको दी प्राथमिकता
परिवेदनाओं के निस्तारण में महिला शिक्षक तथा असाध्य रोग से पीडि़त शिक्षकों को उनके ब्लॉक में पदस्थापित किए जाने को प्राथमिकता दी गई है। मण्डल में 15-16 महिला शिक्षक तथा असाध्य रोग से पीडि़त 5-6 शिक्षकों को अन्य ब्लॉक से खुद के ब्लॉक में पदस्थापित किया गया है।

फिर इधर-उधर
चूरू-45
बीकानेर-10
झुंझुनूं-47
हनुमानगढ़-30
श्रीगंगानगर-26
---
झुंझुनूं जिले में एससी के 104 तथा सामान्य के दस शिक्षक पदोन्नति पर पदस्थापित होने से रह गए थे। इनके अलावा 158 शिक्षकों को परिवेदनाओं के निस्तारण करके पदस्थापित किया है।
-बीएल मीणा,उप निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Friday, October 23, 2009

पर्दे के पीछे क्या है...

रामलीला के पात्रों की असल जिंदगी
चूरू, 23 सितम्बर। संवाद कौशल और अभिनय कला के बूते रंगमंच पर रामायण के पात्रों का जीवंत चित्रण कर लोगों का विशुद्ध मनोरंजन एवं ज्ञानवद्र्धन करने वाले रंगकर्मियों के लिए दर्शकों से मिलने वाली दाद और वाह-वाही भले ही दम तोड़ती नाट्यविधा के लिए संजीवनी बूटी का सा काम करती हो, तालियों की गडग़ड़ाहट सुन इन कलाकारों का मन मयूर नाचने लगता हो और थकान दूर हो जाती हो। किसी की शाबासी या आलिंगन उनके लिए वरदान बन जाता हो। लेकिन सच्चाई यह नहीं है। इन कलाकारों की असल जिंदगी इतनी सुनहरी और रूपहली कतई नहीं है। असल जिंदगी बड़ी ही जटिल, मेहनतकश और दुविधाओं से परिपूर्ण है। चेहरे पर हास्य का भाव है और दिल के किसी कोने में गम और दर्द की टीस छिपी है। महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मंदी से जूझते हालातों में पारिवारिक रिश्ते और सामाजिक समरसता बनाए रखना इनके लिए भी आम जन की तरह ही मुश्किल है।मर्यादा पुरुषोत्तम राम, महाप्रतापी और आज्ञाकारी लक्ष्मण, धरती पुत्री व पतिव्रता सीता तथा महान पंडि़त, तंत्र-मंत्र-यंत्र के ज्ञाता और तपस्वी अहंकारी रावण जैसे पात्रों को रंगमंच पर अपने अभिनय से जीवंत बना देने वाले इन कलाकारों की असल जिंदगी को पत्रिका ने लोको स्थित हनुमान कला मंच की ओर से मंचित रामलीला के पात्रों में खोजा तो पाया।
हनुमानजी चार बच्चों के पिता
पवन पुत्र एवं बाल ब्रह्मचारी वीर हनुमान की भूमिका निभाने वाले श्रवण कुमार चार बच्चों के पिता हैं। पेशे से फार्मासिस्ट श्रवण पुत्र मोह में परिवार नियोजन नहीं अपना पाए। वैसे रामलीला के पात्र के रूप में भगवान श्रीराम की आज्ञा पर संजीवनी बूंटी के लिए औषधियों से भरा पहाड़ हाथ पर उठाकर लाने वाले श्रवण हारी-बीमारी में परिवारजनों के उपचार के लिए महंगाई से हार जाते हैं।
सीता को डांटते हैं लक्ष्मण
रामायण के पात्र के रूप में भाभी सीता को मां से भी बढ़कर मानने वाले लक्ष्मण (नंदकिशोर बरोड़) असल जिंदगी में पेशे से शिक्षक हैं। मजे की बात है कि रामलीला में सीता बने (पृथ्वी सिंह) उनकी स्कूल में पढ़ते हैं। शिष्य होने के नाते स्कूलमें कभी-कभी गुरुजी की डांट भी सुननी पड़ती है तो मार भी खानी पड़ती है।
श्रीराम की शिष्य है सीता
रामलीला के मंच पर भरे स्वयंवर में भगवान श्रीराम के गले में वर माला डाल कर उनसे परिणयसूत्र में बंधने वाली सीता असल जिंदगी में रामजी का ही शिष्य है। सीता की भूमिका निभा रहे पृथ्वीसिंह का कहना है कि मंच पर उनके पति मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम असल जिंदगी में भी उनके लिए वंदनीय एवं पूजनीय हैं। दरअसल भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे घनश्याम पेशे से शिक्षक हैं और वे पृथ्वी सिंह को स्कूल में पढ़ाते भी हैं।
हंसी में छुपा गम
चेहरे के हाव-भाव और संवादों से दर्शकों को सबसे अधिक गुदगुदाने वाले हास्य कलाकार (प्रदीप कुमार) की जिंदगी में अन्य कलाकारों की तुलना में सबसे अधिक गम है। डेढ़ माह पहले ही उनकी माता का निधन हुआ। उनके पित तो उन्हें इससे पहले ही छोड़ गए। दिल के किसी कोने में उनके लिए गम और दर्द बसा होने के बावजूद इस हास्य कलाकार ने उसे कभी चेहरे पर झलकने नहीं दिया।
राम जी को चाहिए लव-कुश
महर्षि वशिष्ट के गुरुकुल में रहकर शिक्षा पाने वाले भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे घनश्याम दत्त असल जिंदगी में भी गुणी, ज्ञानी, अनुशासित और आज्ञावान हैं। बीएससी, बीएड तक शिक्षा ग्रहण करने वाले घनश्याम घर में भी मर्यादित व्यवहार करते हैं। श्रीराम जी बने घनश्याम की अब एक ही मुराद है वे असल जिंदगी में भी लव-कुश के पिता बने।
रफीक है महापंडि़त रावण
रामायण के पात्रों में महाज्ञानी, महापंडि़त रावण के बारे में भले ही लोग कहते होंगे कि रावण ब्राह्मणकुल का (हिन्दू) था, परन्तु रामलीला के मंच पर रावण की भूमिका मोहम्मद रफीक अंसारी बखूबी निभा रहे हैं। पेशे से शिक्षक अंसारी 12 साल से रामलीला से जुड़े हैं।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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भत्ता नहीं प्रशिक्षण लो

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अक्षत कौशल योजना
चूरू, 23 अक्टूबर। स्नातक बेरोजगारों को अक्षत योजना के तहत अब भत्ता नहीं मिलेगा। बेरोजगारी भत्ता चाहने वालों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार ने बेरोजगारी भत्ते की 'अक्षत योजना में संशोधन कर 'अक्षत कौशल योजना के नाम से नई योजना लागू की है। अब बेरोजगारों को भत्ते की राशि की बजाय 'कौशल वाउचर मिलेगा, जिसे दिखाकर वह प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेगा। भत्ते की राशि बेरोजगारों को प्रशिक्षित करने वाली संस्था को दी जाएगी।
यहां मिलेगा प्रशिक्षण
बेरोजगारों को प्रशिक्षण देने के लिए जिले में तीस संस्थानों को अधिकृत किया गया है। चूरू तहसील में दस, सादुलपुर में तीन, सरदारशहर में छह, सुजानगढ़ में सात, रतनगढ़ व तारानगर में दो-दो संस्थाएं प्रशिक्षण देंगी। बेरोजगारों को कम्प्यूटर, फाइनेंस, बैंकिंग, स्पोकन इंग्लिश, रिटेल मैनेजमेंट समेत विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अधिकांश शर्तें पुरानी
एक अक्टूबर से प्रदेशभर में लागू अक्षत कौशल योजना में अधिकांश शर्तें अक्षत योजना के समान होंगी। बेरोजगारों को प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा। अभ्यर्थी के पास स्नातक की डिग्री तथा रोजगार कार्यालय में छह माह पुराना पंजीयन होना जरूरी है। अक्षत योजना के तहत पुरुषों को 400, महिलाओं को 500 तथा निशक्तजनों को 600 रुपए का अधिकतम दो साल के लिए मिलते थे। अब इतनी ही राशि का प्रशिक्षण मिलेगा।इतनों का भत्ता बकायाजुलाई 07 से शुरू हुई बेरोजगारी भत्ते की अक्षत योजना पिछले छह माह से दम तोड़ रही थी। जिले में जुलाई 07 से 31 मार्च 09 तक 2 हजार 66 बेरोजगारों को भत्ता दिया जा चुका है। अप्रेल 09 से सितम्बर तक 263 आवेदकों को भत्ते का इंतजार है।
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नई योजना से जिले में बेरोजगारी कम होगी। पांच सौ कौशल वाउचर प्राप्त हो चुके हैं। जल्द ही आवेदन पत्र स्वीकार किए जाएंगे।-एनएस महला, जिला रोजगार अधिकारी, चूरूयोजना के तहत बेरोजगारों को प्रशिक्षित करने की तैयारी शुरू कर दी है। कौशल वाउचर वितरित होने के साथ संस्थान में प्रशिक्षण देना शुरू करेंगे।
-कौशल दाधीच, संभाग समन्वयक, कम्प्यूकोम सॉफ्टवेयर, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

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saakarsansthan said...
dally update karte hai kya?
October 26, 2009 3:11 PM

धरतीपुत्रों के दिन फिरेंगे

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जिले में खुलेगा कृषि विज्ञान केन्द्र
गाजसर और चांदगोठी में तलाशी भूमि

चूरू, 23 अक्टूबर। जिले के काश्तकारों के दिन जल्द ही बहुरेंगे। किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीक व फसलों की उन्नत किस्म की जानकारी देने तथा प्रशिक्षित करने के लिए जिले में एक और कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) खोले जाने की कवायद तेज हो गई है। केवीके के लिए चूरू तहसील के गांव गाजसर और सादुलपुर तहसील के गांव चांदगोठी से 20-20 हैक्टेयर जमीन का प्रस्ताव राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर को भेजा गया है।
दोनों गांवों में से एक गांव के प्रस्ताव को मंजूरी मिलनी है। केवीके खोले जाने का काम चालू वित्तीय वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है। चूरू के साथ ही जयुपर, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, अलवर व जैसलमेर में भी एक-एक कृषि विज्ञान केन्द्र और खोला जाएगा।
इसलिए पड़ी जरूरत
जिले की सरदारशहर तहसील मुख्यालय पर 1993 से कृषि विज्ञान केन्द्र संचालित है। क्षेत्र बड़ा होने के कारण अन्य तहसीलों के किसानों को केवीके का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। नया केवीके राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के अधीन काम करेगा। प्रत्येक केवीके से तीन-तीन तहसीलों के काश्तकारों को जोड़ा जाएगा।
यह होगा फायदा
केवीके में किसानों की खेती से जुड़ी तमाम समस्याओं का समाधान होगा। यहां पर शस्य विज्ञान, गृह विज्ञान, कीट, पौध, पशु व उद्यान विशेषज्ञों की सेवाएं मिल सकेंगी। कृषि की उन्नत किस्मों के प्रदर्शन लगाए जाएंगे। विशेषज्ञ किसानों को खेती की विभिन्न जानकारी देने के साथ ही आवश्यक प्रशिक्षण भी देंगे।
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मेरे नेतृत्व में संयुक्त निदेशक कृषि और सरदारशहर केवीके प्रभारी की कमेटी ने केवीके के लिए दो गांवों से जमीन का प्रस्ताव राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय को महीने भर पहले भेजा है। दोनों में से एक गांव में जल्द ही केवीके खोला जाएगा।
जीएल यादव, क्षेत्रीय निदेशक कृषि अनुसंधान केन्द्र, फतेहपुर शेखावाटी
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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संगीता पुरी said...
बहुत अच्‍छी खबर है .. इसपर जल्‍द अमल हो .. किसान भाइयों को बधाई !!
October 24, 2009 7:40 PM

Wednesday, October 21, 2009

बसों में बरसा धन

दिल्ली व जयपुर रूट पर सबसे अधिक कमाई
चूरू, 21 अक्टूबर। घाटे से जूझ रहे चूरू आगार की बसों में दीपावली पर जमकर धन बरसा है। बसों में यात्रीभार बढऩे का सिलसिला धनतेरस से शुरू हुआ और भैया दूज तक बना रहा। त्योहारी सीजन में आगार को हर रूट पर बसों से कमाई हुई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 15 से 19 अक्टूबर तक बसों का यात्रीभार औसत 71 फीसदी रहा तथा 25 लाख 77 हजार 536 रुपए की आय प्राप्त हुई है। इस दौरान सबसे अधिक कमाई 5 लाख 73 हजार 193 रुपए छोटी दिवाली के दिन हुई। पांचों दिनों में सबसे कम आय रामनवमी को 3 लाख 25 हजार 447 रुपए की हुई।इस दिन बसों का यात्रीभार 63 फीसदी रहा जबकि सामान्य दिनों में आगार की बसों का यात्रीभार औसत 60-62 फीसदी रहता है। रोडवेज सूत्रों का मानना है कि अंचल में ब्रॉडगेज का कार्य चलने से बंद हुई रेल सेवा के कारण भी बसों में यात्री भार ज्यादा रहा।राजधानी वाले रूट कमाऊआगार को सबसे अधिक कमाई राजधानी से जोडऩे वाले रूटों पर हुई है। इनमें चूरू-जयपुर वाया सीकर तथा चूरू-दिल्ली वाया झुंझुनूं रूट शामिल है। बढ़ते यात्रीभार को देखते हुए आगार प्रबंधन ने जयपुर रूट पर एक तथा दिल्ली रूट पर तीन अतिरिक्त बसें भी दौड़ाई। उधर, सरदारशहर रूट पर बसें डीजल व रखरखाव का खर्च भी नहीं निकाल पाई।आमान परिवर्तन से फायदा सादुलपुर-रतनगढ़ के बीच हो रहे आमान परिवर्तन के चलते ट्रेनें बंद होने का फायदा रोडवेज बसों को हुआ है। यही कारण है कि गत पांच दिवसीय दीपोत्सव की तुलना में इस बार बसों की कुल आय में करीब तीस हजार रुपए तथा यात्रीभार में 2.6 फीसदी का इजाफा हुआ है। गत वर्ष 26 से 30 अक्टूबर तक बसों का यात्रीभार औसत 68.4 प्रतिशत रहा। ----बसों से अच्छी आय हुई है। चार स्थानों पर चैक पोस्ट भी स्थापित की गई थी। आमान परिवर्तन के चलते ट्रेनें बंद होने के कारण आय में गत वर्ष की तुलना में इजाफा हुआ है।-बेनीप्रसाद शर्मा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज आगार, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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RAJNISH PARIHAR said...
चलो इस आमान परिवर्तन के बहाने ही सही,रोडवेज को कुछ फायदा तो हुआ....!शायद कुछ हालात सुधर जाए...
October 22, 2009 3:25 PM

मतदाताओं में हजारों चेहरे नए

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स्थानीय निकाय चुनाव
चूरू में दस हजार 845 व राजगढ़ में तीन हजार 746 वोटर बढ़े
चूरू, 21 अक्टूबर। स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रशासन ने चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। वार्डों में सभांवित उम्मीदवारों के नामों की चर्चा भी होने लगी है। जल्द ही चुनाव की अधिसूचना जारी होने वाली है। जिले में चूरू नगरपरिषद व राजगढ़ नगरपालिका के चुनाव होंगे। निकाय के गत चुनाव की तुलना में इस बार चूरू व राजगढ़ निकाय के मतदाताओं में साढ़े चौदह हजार से अधिक नए चेहरे मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे।आधिकारिक जानकारी के अनुसार पांच साल के दौरान चूरू नगरपरिषद में 10 हजार 845 तथा राजगढ़ नगरपालिका में तीन हजार 746 मतदाता बढ़े हैं। वर्ष 2004 के चुनाव के बाद चूरू नगर परिषद के मतदाताओं की संख्या 63 हजार 537 से बढ़कर 74 हजार 382 तथा राजगढ़ नगरपालिका के मतदाताओं की संख्या 32 हजार 666 से बढ़कर 36 हजार 412 हो गई है। मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। नगरपरिषद के 45 वार्डों के कुल मतदाताओं में 39 हजार 438 पुरुष व 34 हजार 944 महिलाएं हैं।वर्ष 2004 के चुनाव के मुकाबले इस बार नगरपालिका क्षेत्र में तीन हजार 746 मतदाता बढ़े हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार नगरपालिका के कुल तीस वार्डों में से सबसे अधिक 116 मतदाता वार्ड 26 में बढ़े हैं। नगरपालिका के वार्डों की संख्या में वृद्धि नहीं हुई है।
सबसे अधिक, सबसे कम
आधिकारिक जानकारी के अनुसार मतदाता सूचियों के अंतिम प्रकाशन के समय
चूरू नगरपरिषद में सबसे अधिक तीन हजार 133 मतदाता वार्ड 10 तथा सबसे कम 853 मतदाता वार्ड 25 में हैं। नगरपरिषद के मतदाताओं में अनुसूचित जाति के सबसे अधिक एक हजार 180 मतदाता वार्ड 36 में तथा अनुसूचित जनजाति के सबसे अधिक 68 मतदाता वार्ड 28 में हैं।
सूची से 198 नाम हटाए
आधिकारिक जानकारी के अनुसार 22 सितम्बर 09 को प्रारूप प्रकाशन के बाद मतदाता सूचियों से 198 नाम हटाए गए हैं। वार्ड 21 की मतदाता सूची से 92, वार्ड 1 व 6 से छह-छह, वार्ड 4,42 व 45 से एक-एक, वार्ड 7, 17 व 18 से दस-दस, वार्ड 20 से 7, वार्ड 15 से 4, वार्ड 22 व 26 से तीन-तीन, वार्ड 32 से 39, वार्ड 43 से पांच नाम हटाए गए हैं।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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Saturday, October 10, 2009

ना कचरा उठेगा, ना आग बुझेगी!

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चूरू, 10 अक्टूबर। गंदे पानी से उफनतीं नालियां व गंदगी से अटीं तंग गलियां दीपावली पर भी चकाचक नहीं हो पाएंगी और आग जनित हादसों पर तत्काल काबू पाने की सोचना तो बेमानी होगी। दरअसल नगरपरिषद प्रशासन दीपोत्सव को लेकर तनिक भी गंभीर नहीं है। गली-मोहल्लों से साफ-सफाई और अग्निशमन की व्यवस्थाएं दीपावली को लेकर अब तक चाक-चौबंद नहीं की गई हैं। शनिवार को पत्रिका ने दोनों व्यवस्थाओं की पड़ताल की तो लगा कि दीपोत्सव पर नगर की स्वच्छता और सुन्दरता के प्रति नगरपरिषद अपने दायित्व और कत्र्तव्य बोध को पूरी तरह भुला चुकी है।सफाई व्यवस्था का तो आलम यह है कि वर्तमान में नई व पुरानी सड़क से लगते छह वार्डों से कचरा रोजाना उठाया जा रहा है जबकि शेष वार्डों में सफाई का नम्बर आठ दिन में एक बार आता है। ऐसे में दीपोत्सव पर नगरपरिषद के भरोसे शहर का सौन्दर्य शायद ही बढ़े। उधर, दीपावली पर आग जनित हादसे बढऩे की आशंका अधिक रहती है। लेकिन आग पर तत्काल काबू पाने के लिए अग्निशमन केन्द्र के पास लम्बी रेस के घोड़े ही नहीं हैं। दमकलकर्मियों के पास पर्याप्त संसाधन होना तो दूर की बात है। फिलहाल परिषद के पास तीन दमकल हैं। इनमें से पन्द्रह साल पुरानी एक दमकल तो लगभग कण्डम हो चुकी हैं। फिर भी उसे दौड़ाया जा रहा है। नगरपरिषद प्रशासन ने दीपावली को लेकर साफ-सफाई और अग्निशमन सेवा से जुड़े कार्मिकों को ना तो विशेष निर्देश दिए हैं और ना ही कोई अतिरिक्त व्यवस्थाएं की हैं।
101 नम्बर मिलेगा व्यस्त
अग्निशमन केन्द्र के टेलीफोन की स्थिति यह है कि वह दिनभर व्यस्त रहता है। केन्द्र पर तैनात कर्मचारियों की मानें तो उस पर चौबीस घंटों में पांच सौ से अधिक बार फोन आते हैं। जो सभी फाल्स होते हैं। ऐसे में दिवाली पर आवश्यकता पडऩे पर भी फोन स्वाभाविक रूप से व्यस्त मिलेगा। बार-बार अवगत करवाए जाने के बावजूद दीपोत्सव जैसे मौके पर भी नगरपरिषद प्रशासन ने इसका कोई हल नहीं निकाला है और ना ही कोई अन्य टेलीफोन की व्यवस्था की है।
सफाईकर्मी गिनती के
दीपावली पर सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी 138 कर्मचारियों के कंधों पर है। जोरदार बात तो यह है कि टै्रक्टर, लोडर, पम्प चालक और जमादार भी इन्हीं में से हैं। शहर में सफाईकर्मियों की संख्या गिनती की रह गई है। मोटे अनुमान के तौर पर शहर को छह सौ से अधिक सफाईकर्मियों की दरकार है। लेकिन उनकी संख्या बढ़ाने के लिए परिषद के पास बजट ही नहीं है। तंग गलियों से कचरा उठाने में सहायक 907 (छोटा ट्रक) का तो परिषद को चालक ही नहीं मिल रहा है।
कैसे हो चाक-चौबंद?
अग्निशमन अधिकारीलिपिक बने हुए हैं स्थायी फायरमैन।
अग्निरोधक संसाधनों काएईएन व जेईएन कीबीस बड़े वाहन व चालीस छोटे वाहनों कीपरिषद प्रशासन नहीं है गंभीर।शहरवासियों में जागरूकता का अभाव।
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दीपावली पर साफ-सफाई और दमकल सेवा में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। परिषद के अधिकारियों को सर्तक रहने के निर्देश दिए हैं। वैसे भी परिषद खुद कई समस्याओं से जूझ रही है।उम्मेद सिंह, उपखण्ड अधिकारी, चूरूआबादी के लिहाज से सफाईकर्मी काफी कम है। मुख्य सड़क से लगते वार्डों में ही सफाई व्यवस्था नियमित है। शेष वार्डों में आठवें दिन कचरा उठ पा रहा है। दीपावली पर सफाई की चाहकर भी विशेष व्यवस्था नहीं कर पाएंगे।
-संतलाल स्वामी, सफाई निरीक्षक
दीपावली पर विशेष सफाई व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान में सफाई व्यवस्था संतोषजनक है। अग्निशमन केन्द्र के नम्बरों का चार्ज वसूला जाए तो समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
-रमाकांत ओझा, सभापति, नगरपरिषद, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Thursday, October 8, 2009

दिल के झरोखे से देखी हवेलियां

विदेशी पर्यटकों ने निहारा चूरू को
चूरू, 8 अक्टूबर। वाउ इट्स क्यूट..., वैरी नाइस पेंटिंग्स एण्ड डिजाइन..., आई लाइक दिस...। पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ ही चूरू के पर्यटन स्थलों पर विदेशी पर्यटकों के ये शब्द सुनाई देने लगे हैं। सीजन में पर्यटकों का पहला दल गुरुवार को चूरू आया। दल में शामिल हॉलैण्ड के 22 पर्यटकों ने घंटेभर तक चूरू के पर्यटन स्थलों को निहारा।
बाजार में खरीदारी की और जाते-जाते गांव ऊंटवालिया के जोहड़ में दोपहर का भोजन लिया। राजस्थान के 21 दिन के भ्रमण के लिए आया यह दल बुधवार को दिल्ली से महनसर गढ़ पहुंचा था। यहां से गुरुवार को गढ़ के गाइड लालसिंह शेखावत के साथ महनसर, रामगढ़ बिसाऊ होते हुए सुबह साढ़े 11 बजे चूरू पहुंचा।पर्यटकों ने चूरू में बागला, सुराणा व कोठारियों की हवेलियां देखी तथा सफेद घंटाघर व मुख्य बाजार में खरीदारी की। दल दोपहर को वापस महनसर गढ़ रवाना हो गया। शुक्रवार को बीकानेर जाएगा।
शेखावत ने बताया कि विदेशी पर्यटक राजस्थानी भोजन के कायल हैं। किसी को बाजरे की रोटी स्वाद लगती है तो कोई राजस्थानी दाल को अधिक पसंद करता है। गुरुवार को गांव ऊंटवालिया के पथराणा जोहड़ में दोपहर के भोजन में पर्यटक बाजरे की रोटी, लहसून की चटनी और दाल की प्रशंसा करते नहीं थके।
यहां के लोग वैरी फ्रेंडली
ग्रुप लीडर की हैसियत से राजस्थान का दस बार भ्रमण कर चुकी हूं। यहां की हवेलियां सबसे अधिक आकर्षित करती हैं। थोड़ी-थोड़ी हिन्दी भी बोल लेती हूं। हिन्दी में कहूं तो यहां की हवेलियां क्यूट हैं एण्ड लोग बहुत फ्रेंडली हैं।
दिन्या, ग्रुप लीडर, हॉलैण्ड
बार-बार बुलाए रामगढ़
पर्यटन स्थलों में रामगढ़ शेखावाटी की हवेलियों का कोई सानी नहीं है। इन्हें बार-बार देखने को मन करता है। राजस्थान आने का फिर मौका मिला तो रामगढ़ शेखावाटी जरूर आऊंगा।
-नैल्स, पर्यटक, हॉलैण्ड
देसी अंदाज निराला
यहां के बाजार में शौरगुल और प्रदूषण अधिक है। लोगों का रहन-सहन और अंदाज पूरी तरह से देसी है। पर्यटन के लिहाज से यहां काफी कुछ है। इनके आस-पास आधारभूत सुविधाएं बढ़ाई जाए तो पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।
-पास्कल, पर्यटक, हॉलैण्ड
सजी थाली लगे अच्छी
राजस्थान में जितनी मशक्कत खाना बनाने में की जाती है। उतने ही प्यार से भोजन परोसा भी जाता है। यहां के भोजन से सजी थाली मुझे खास पसंद है। स्वाद का तो कहना क्या?।
सेन्डर, पर्यटक, हॉलैण्ड
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

विनोद कुमार पांडेय said...
राजस्थान है ही ऐसा जगह लोगों का दिल जीत लेता है..बढ़िया प्रस्तुति...धन्यवाद!!!
October 12, 2009 10:06 PM

ललित शर्मा said...
थाने,म्हारी बधाई, चो्खो समाचार सुणायो, राजस्थान की धरती को दुनिया में जवाब ही कोनी,
October 12, 2009 11:17 PM

Monday, October 5, 2009

गलफांस बनी डिजायर

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शिक्षकों की पदोन्नति पर पदस्थापन का मामला
चूरू, 5 अक्टूबर। शिक्षकों की पदोन्नति पर पदस्थापन में विधायक की सिफारिशों को तव्वजो नहीं देने की मजबूरी शिक्षा विभाग के अधिकारियों व बाबुओं की नौकरी पर बन आई है। विधायक की शिकायत पर शिक्षामंत्री भंवरलाल मेघवालने राजगढ़ ब्लॉक के शिक्षकों की पदस्थापन सूची रद्द करने के साथ ही शिक्षा उपनिदेशक बलराम मीणा व जिला शिक्षा अधिकारी गजेन्द्र सिंह शेखावत को जयपुर तलब किया है। शिक्षा अधिकारी शिक्षकों के पदस्थापन से संबंधित रिकॉर्ड व बाबुओं को साथ लेकर मंगलवार को जयुपर जाएंगे। सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक व प्राथमिक कार्यालयों में आलम यह था कि शिक्षकों के पदस्थापन से जुड़े बाबू तो अपनी नौकरी को कोसते नजर आए।सूत्रों के अनुसार शिक्षकों के पदस्थापन की सूची से राजगढ़ के पूर्व विधायक नंदलाल पूनियां सबसे अधिक असंतुष्ट हैं। चूरू विधायक हाजी मकबूल मण्डेलिया भी खुश नहीं बताए जा रहे हैं। विधायक नंदलाल पूनियां ने अपने चहेतों को राजगढ़ ब्लॉक में लगाने के साथ ही करीब 20 शिक्षकों को ब्लॉक से बाहर पदस्थापित करने की डिजायर लगाई थी। अब पूनियां की शिकायत है कि शिक्षकों के पदस्थापन में उनके चहेतों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। चहेतों को राजगढ़ ब्लॉक में ही पदस्थापित करना था जबकि उन्हें अन्य ब्लॉकों में भेज दिया गया। उधर, विधायक हाजी मकबूल मण्डेलिया को पीड़ा है कि उनकी डिजायर पूरी तरह से अमल में नहीं लाई जा सकी है।उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग ने हाल ही प्रारम्भिक शिक्षा के 414 व माध्यमिक शिक्षा के 16 7 शिक्षकों को पातेय वेतन पर पदोन्नत कर पदस्थापित किया है। इनमें से राजगढ़ व चूरू ब्लॉक के 34 शिक्षकों को दूसरे ब्लॉकों में भेजा गया है।
नए सिरे से बनेगी सूची!
डिजायर के चलते हुई गड़बड़ी के कारण राजगढ़ ब्लॉक में पदस्थापित शिक्षकों की सूची नए सिरे से बनाई जाएगी। इसी के साथ ही परिवेदनाओं के चलते अन्य ब्लॉकों की सूचियों में भी संशोधन की गुंजाइश है।इनका कहना है
...राजगढ़ में अधिशेष शिक्षकों को ही दूसरे ब्लॉकों में पदस्थापित किया गया है। शिक्षामंत्री ने मंगलवार को जयपुर बुलाया है। राजगढ़ ब्लॉक की सूची नए सिरे से बनेगी या नहीं यह तो जयुपर जाने के बाद ही पता चल सकेगा।
-बलराम मीणा, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू
मेरे से डिजायर तो मांग ली। लेकिन शिक्षाधिकारियों ने अपनी मर्जी से शिक्षकों का पदस्थापन किया है। सोमवार सुबह मैंने शिक्षामंत्री से मुलाकात कर विरोध भी जताया है। मेरे ब्लॉक की सूची तो नए सिरे से बननी चाहिए।
-नंदलाल पूनियां, पूर्व विधायक, राजगढ़
शिक्षामंत्री ने राजगढ़ ब्लॉक में शिक्षकों के पदस्थापन की सूची रद्द करने के दूरभाष पर निर्देश दिए हैं। आगामी आदेशों तक पदोन्नत शिक्षकों को पदस्थापन के लिए कार्यमुक्त नहीं करने के लिए संबंधित संस्था प्रधानों को निर्देशित किया जा रहा है।
-गजेन्द्र सिंह शेखावत, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Friday, October 2, 2009

पंचायतीराज का स्वर्णिम सफर

देश में में पंचायतीराज व्यवस्था ने पचास वर्ष का सफर तय कर लिया है। आज राजस्थान का नागौर जिला पंचायतीराज की स्थापना का साक्षी बन खुद को एक बार फिर से गौरवान्वित महसूस कर रहा है। पंचायतीराज का स्वर्ण जयंती समारोह नागौर के उस ऐतिहासिक मैदान में मनाया जा रहा है, जहां देश के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने दो अक्टूबर 1959 को पंचायतीराज की नींव रखी थी। समारोह में नेहरू की तरह दो बार प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल करने वाले डा. मनमोहन सिंह व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत राजनीति की कई जानी-मानी हस्तियां शिरकत करेंगी। स्वतंत्रता के बाद देश में कई बदलाव हुए। कई नई व्यवस्थाएं लागू हुई। आखिर पंचायतीराज व्यवस्था की जरूरत क्यों महसूस की गई और इसे किस तरह अंतिम रूप दिया गया। मन को कुरेदते इन सवालों का जवाब खोजा तो पाया कि आजादी के बाद देश के समग्र विकास में अधिकतम लोगों को सहभागी बनाने के लिए विकेन्द्रीकरण की नीति अपनाई गई। पंचायतीराज भी उसी दिशा में उठाया गया एक कदम था।जब देश में पंचवर्षीय योजना लागू करने पर विचार किया जा रहा था तब ग्रामीण क्षेत्र में जनता का सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता सुनिश्चित करना आवश्यक समझा गया। इस आवश्यकता ने भी पंचायतीराज को आधार प्रदान किया।लोकतंत्र में अटूट विश्वास रखने वाले पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने 1952 में सामुदायिक विकास कार्यक्रम शुरू किया। लेकिन इसमें ग्रामीण विकास की बजाय सरकारी मशीनरी के विकास पर अधिक जोर देने के कारण कार्यक्रम विफल हो गया। परिणाम स्वरूप सरकार ने 1957 में पंचायतीराज के संबंध में बलवंतराय मेहता समिति का गठन किया।समिति ने अपनी रिपोर्ट में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण और सामुदायिक विकास कार्यक्रम को सफल बनाने का उल्लेख करते हुए पंचायतीराज की नींव रखने की सिफारिश की। नौ सितम्बर 1959 को राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद बिल पारित कर विकेन्द्रीकृत व्यवस्था लागू की। इसके बाद दो अक्टूबर को राजस्थान को देश में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की शुरुआत करने का गौरव प्राप्त हुआ।आंकड़ों की जुबानीवर्तमान में राजस्थान में सात संभाग, 33 जिले, 32 जिला परिषदें, 192 उपखण्ड, 243 तहसीलें, 237 पंचायत समितियां है। 237 पंचायत समितियों में से हाल ही छह पंचायत समितियों को फिर से ग्राम पंचायतों का दर्जा दे दिया गया है। लिहाजा ग्राम पंचायतों की संख्या 9195 हो गई हैं। पंचायतीराज के 2010 में होने वाले चुनावों से पूर्व चल रही परिसीमन की प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों की संख्या 12 हजार के लगभग हो जाएगी।महिलाओं की भागीदारी कमचूरू जिले में पंचायतराज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है।हर स्तर पर पुरुषों का वर्चस्व है। जिला परिषद के कुल 26 सदस्योंं में महज आठ महिलाएं हैं। वर्तमान में जिले की छह पंचायत समितियों में प्रधान के पद पर मात्र दो महिलाएं काबिज हैं। जिले की 249 ग्राम पंचायतों में से भी अधिकांश की बागडोर पुरुषों के हाथ में है।सरपंच या कठपुतली?देश में पंचायतीराज की नींव रखे जाने के पचास वर्ष बाद भी कई महिला सरपंच पति की कठपुतली बनी हुई हैं। गत वर्ष अपे्रल में चूरू पंचायत समिति की एक सरपंच से रूबरू होने का मौका मिला। दोपहर में फोटोग्राफर के साथ सरपंच के घर पहुंचा। सरपंच के घर पर मौजूद एक रिश्तेदार से जब उनके बारे में पूछा तो जवाब मिला कि वे किसी काम से बाहर गए हैं। शाम तक आएंगे। रिश्तेदार से सरपंच के मोबाइल नम्बर लेकर बात की तो माजरा समझ में आया। दरअसल घर, रिश्तेदारी और गांव में महिला की बजाय उनके पति को सरपंच माना जाता है। बाद में पता चला कि असल सरपंच तो घर पर ही हैं।नए दौर में किया प्रवेश देश की लगभग तीन चौथाई आबादी गांवों में रहती है। गांवों के विकास पर ही काफी हद तक भारत का विकास निर्भर है। यहां महात्मा गांधी का कथन बिल्कुल सटीक बैठता है कि यदि गांव नष्ट होते हैं तो भारत नष्ट हो जाएगा। भारत के पिछले इतिहास पर यदि नजर डालें तो देखेंगे कि गांव के आपसी झगड़ों का निपटारा गांवों की पंचायतें करती थीं। पंचों का फैसला सर्वमान्य होता था। मोर्यकाल में गांव के चुने हुए लोगों की सभा, ग्रामसभा कहलाती थी। जिसका प्रधान ग्रामिक होता था। मुगलकाल में भी गांव, शासन की सबसे छोटी इकाई था। गांव का प्रधान अधिकारी वहां का मुखिया होता था, जिसे मुकद्दम कहते थे। अंग्रेजी राज में गांव की पंचायतें धीरे-धीरे समाप्त हो गईं। गांवों का समस्त कार्य प्रांतीय सरकारें करने लगीं। 18 8 2 में लॉर्ड रिपन ने स्थानीय शासन की स्थापना का प्रयास किया। लेकिन वह सफल नहीं हो सका।स्थानीय स्वायत्त संस्थाओं की जांच के लिए 18 8 2 व 1907 में ब्रिटिश शासकों ने शाही आयोग का गठन किया। 1920 में संयुक्त प्रान्त, असम, बंगाल, बिहार, पंजाब व मद्रास में पंचायतों की स्थापना के लिए कानून बनाए गए। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में नया संविधान लागू होने के साथ ही पंचायतीराज अर्थात ग्रामीण स्थानीय शासन ने नए दौर में प्रवेश किया।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:


1 टिप्पणियाँ:
चेतना के स्वर said...
achchi khabar likh dali hai dada congratsisko bhi padhna or thoda sa batanahttp://chetna-ujala.blogspot.com/2009/10/blog-post.html
October 27, 2009 3:13 PM

Sunday, September 20, 2009

ब्रॉडगेज की राह में फाटक बने रोड़ा

5बार पढ़ा गया
सादुलपुर-रतनगढ़ आमान परिवर्तन
चूरू, 20 सितम्बर। सादुलपुर-रतनगढ़ के बीच आमान परिवर्तन की राह में नए फाटक की मांग रोड़ा बन गई हैं। सादुलपुर के गांव डोकवा व तारानगर के गांव हडिय़ाल में ग्रामीण ब्रॉडगेज की राह रोके बैठे हैं। फाटक स्वीकृत नहीं होने तक ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हैं जबकि रेलवे अधिकारी मांग के सामने लाचार हैं।रेलवे ने विवादित स्थान को छोड़ आमान परिवर्तन की गाड़ी भले आगे बढ़ा ली है, पर ऐसे में रेल पटरियों पर धरना देकर बैठे ग्रामीणों के हटे बिना रेल सेवा का लाभ तय समय पर मिलना मुश्किल हो चला है। आखिर ग्रामीणों की समस्या का समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है...? रेलवे को किन परेशानियों से जूझना पड़ेगा ? क्या हो सकता है समस्या का समाधान? आदि सवाल आमजन को कुरेदने लगे है।
पत्रिका ने इन सवालों पर पड़ताल की तो कुछ यूं बनी उम्मीद।एक करोड़ रुपए की दरकारपटरियों पर नया फाटक स्वीकृत करवाने वाले को रेलवे में कम से कम एक करोड़ रुपए एक मुश्त जमा कराने पड़ते हैं। यह राशि राज्य सरकार, नगरपालिका, पंचायत, सार्वजनिक निर्माण विभाग या जनप्रतिनिधि कोटे से जमा करवाई जा सकती है। गत वर्ष सादुलपुर-रेवाड़ी के बीच गांव कालरी में एमपी कोटे व सादुलपुर-हिसार के बीच गांव इंदासर के पास राज्य सरकार के सहयोग से नया फाटक खुलवाया गया था।
दीपावली तक लाना है इंजन
सादुलपुर से रतनगढ़ के बीच करीब सौ किलोमीटर लम्बे ट्रेक पर रेल प्रशासन दीपावली से पहले ब्रॉडगेज इंजन बतौर ट्रायल दौड़ाना चाहता है क्योंकि आमान परिवर्तन में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व बिहार के एक हजार व पांच सौ स्थानीय श्रमिक लगे हुए हैं। दीपावली पर श्रमिकों के घर जाने से पहले बड़ी लाइन बिछाने का काम पूरा होने पर ही मार्च 2010 तक ब्रॉडगेज ट्रेनों की सुविधा मुहैया हो सकेगी।
ना उखाडऩे दी ना बिछाने
आधिकारिक जानकारी के अनुसार हडिय़ाल टमकोर मार्ग पर फाटक की मांग पर अड़े ग्रामीणों ने बड़ी लाइन नहीं बिछाने दी है जबकि डोकवा में दो-तीन किलोमीटर में मीटरगेज लाइनों को ही उखाड़ा नहीं जा सका। ग्रामीणों के प्रदर्शन के चलते हडिय़ाल-टमकोर मार्ग पर करीब अस्सी मीटर में बिना आमान परिवर्तन के श्रमिक आगे बढ़ चुके हैं।
-----हम ग्रामीणों की मांग मानने को तैयार हैं मगर रेलवे नियमों के अनुसार करीब एक करोड़ रुपए एक मुश्त जमा कराने होंगे। यह राशि चाहे पंचायत जमा करवाए या राज्य सरकार या फिर कोई जनप्रतिनिधि। आमान परिवर्तन की राह में ग्रामीण यूं रोड़े बने रहे तो क्षेत्रवासियों को ब्रॉडगेज का लाभ मिलने में देरी होगी।
-एनके शर्मा, उप मुख्य अभियंता, उत्तर-पश्चिम रेलवे, बीकानेर
------आमान परिवर्तन के कारण रेलवे के पोल संख्या 246 /5-6 पर हडिय़ाल-टमकोर का रास्ता बंद हो हो गया है। इससे आस-पास के पचास गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलमंत्री ममता बनर्जी को रेलवे के खर्च पर हडिय़ाल टमकोर मार्ग पर फाटक बनवाने के लिए लिखा गया है। लोगों की समस्या का समाधान जल्द ही होगा।
-नरेन्द्र बुडानिया, सांसद, चूरू
-----
इस सम्बन्ध में सचिव सार्वजनिक निर्माण विभाग को अवगत करा दिया गया है। समस्या के हल के लिए प्रशासनिक दृष्टि से पूरे प्रयास किए जा रहे हैंं। शीघ्र ही परिणाम सामने आएंगे।
-डा।केके पाठक,कलक्टर, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Saturday, September 19, 2009

चक दिया चूरू

54वीं राज्यस्तरीय 19 वर्षीय हॉकी प्रतियोगिता जीत
चूरू। गांव में हॉकी खेलने की शुरूआत करने वाली चूरू की बेटियों ने कमाल कर दिखाया है। बेटियों ने जालोर के खेल स्टेडियम में शुक्रवार को 54वीं राज्यस्तरीय 19 वर्षीय हॉकी प्रतियोगिता जीत ली है। सुबह नौ बजे खेले गए फाइनल मुकाबले में जिले की टीम ने सीकर को दो-एक से हराया। जोश और उत्साह से लबरेज जिले की टीम अपने दमदार प्रदर्शन की बदौलत पहली बार 19 वर्षीय हॉकी प्रतियोगिता पर कब्जा जमाने में कामयाब हुई है। इससे पहले चूरू की टीम 1999 में तीसरे स्थान पर रही थी। जिले में शुक्रवार को टीम के जीत की सूचना मिलते ही खेल प्रेमियों व शिक्षा महकमे में खुशी की लहर दौड़ गई। विजेता टीम संभवतया शनिवार को चूरू आएगी। शिक्षा विभाग और विभिन्न संगठनों की ओर से टीम का शानदार स्वागत किया जाएगा। साहवा की सरोज पारीक की कप्तानी में जिले की टीम ने प्रदेशभर की 16 टीमों को पीछे छोड़कर प्रतियोगिता का ताज हथियाया है।कोच जसवंत राव, हाकम अली, दल प्रभारी महेन्द्र प्रजापत व प्रबंधक चन्द्रकला चाहर के नेतृत्व में टीम जालौर गई थी। इसमें 16 सदस्य थे। प्रतियोगिता में 13 सितम्बर से अंतिम गोल तक चूरू की टीम का दबदबा रहा। उद्घाटन मैच में टीम ने गत वर्ष की विजेता अजमेर को दो-शून्य से हराया। इसके अलावा अजमेर, झुंझुनूं, हनुमानगढ़ और भीलवाड़ा के सामने जीत दर्ज की।
पांच मिनट में दागे दो गोल
हाकम अली ने पत्रिका को दूरभाष पर बताया कि टीम ने फाइनल मैच में दो गोल दागे और दोनों ही गोल सेंटर फॉरवर्ड खिलाड़ी रमनदीप की हॉकी से निकले। मैच शुरू होने के दस मिनट बाद सीकर ने एक गोल दागकर बढ़त हासिल की। चूरू टीम ने हिम्मत नहीं हारी और मैच पर पकड़ बनाए रखी। हॉफ टाइम के बाद मैच के शुरूआती पांच मिनट में चूरू की रमनदीप ने पांच मिनट में एक के बाद एक गोल दागकर जीत की इबादत लिखी। गोलकीपर सुचित्रा को बेस्ट प्लेयर का पुरस्कार दिया गया है।
अपनों ने लगाया गले
राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का खिताब जीतने की सूचना मिलते जालौर में रह रहे चूरू के लोगों ने टीम को हाथों में उठा लिया। जालौर में बीएसएनएल में कार्यरत चूरू तहसील के गांव लोसनाबड़ा के जयसिंह पूनियां ने खिलाडियों को नाश्ता और गोविन्द राम शर्मा ने भोजन करवाया। जालौर कोतवाली में तैनात गांव बेवड़ निवासी हैड कॉस्टेबल विनोद पूनियां ने भी टीम को भोजन के लिए आमंत्रित किया। दूसरे जिले में अपनों का प्यार पाकर खिलाड़ी निहाल हो गए।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Tuesday, September 15, 2009

सूखे के घावों पर लगेगा मरहम

जिला प्रशासन ने बनाया एक अरब से अधिक का कंटीजेंसी प्लान
चूरू, 15 सितम्बर। अरमानों पर पानी फिरने से चिंतित किसान हों या चारे के अभाव में पशुओं की हालत देख परेशान होता पशुपालक, कृषि आधारित रोजगार की उम्मीद छोड़ घर बैठने को मजबूर बेरोजगार हों या फिर आर्थिक मदद का इंतजार करता असहाय। मानसून की बेरुखी के कारण पीड़ा सहने वाले इन लोगों के घावों पर मरहम लगाने की प्रशासन ने तैयारी कर ली है। जिले के सभी 912 अभावग्रस्त गांवों के लिए प्रशासन ने सितम्बर 09 से मार्च 2010 तक की एक अरब दस करोड़ 34 लाख 12 हजार रुपए की आकस्मिक योजना आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग को भेजी है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो सूखे से प्रभावित लोगों को चालू माह से राहत मिलनी शुरू हो जाएगी।
तीन लाख को मिल सकेगा रोजगार
योजना के तहत अभावग्रस्त गांवों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के अभावा अन्य कार्यों में तीन लाख लोगों को मार्च 2010 तक रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। सितम्बर में 15 हजार 200, अक्टूबर में 24 हजार 250, नवम्बर में 34 हजार 350, दिसम्बर में 45 हजार 290, जनवरी में 56 हजार 280, फरवरी में 62 हजार 210 व मार्च में 65 हजार 250 लोगों को रोजगार मुहैया करवाने का लक्ष्य रखा गया है।
असहायों को मदद
योजना के तहत असहाय व्यक्तियों की प्रतिमाह छह सौ रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी। प्रशासन ने सुजानगढ़ में 1458 , रतनगढ़ में 600, सरदारशहर में 2110, चूरू में 375, तारानगर में 1177 तथा राजगढ़ में 26 15 असहाय व्यक्तियों को चिन्हित किया है।
रोजाना दौड़ेंगे 93 टैंकर
मानसूनी के दगा देने के कारण लोगों को पेयजल समस्या का भी सामना करना पड़ेगा। प्यासे हलक तर करने के लिए योजना के तहत जिले के 74 गांवों में पानी के रोजाना 93 टैंकर दौड़ेंगे। प्राथमिक तौर पर योजना में सुजानगढ़ के 16, रतनगढ़ के 8, सरदारशहर के 10, चूरू के 7, तारानगर के 9 तथा राजगढ़ के 24 गांवों को शामिल किया है।
गोशालाओं को अनुदान
जिले की 38 पंजीकृत व 10 अपंजीकृत गोशालाओं में पल रहे चौदह हजार से अधिक पशु भी योजना से लाभान्वित होंगे। योजना के तहत सुजानगढ़ की 14, रतनगढ़ की 7, सरदारशहर की 10, चूरू की 5, तारानगर की 8 तथा राजगढ़ की 4 गोशालाओं को अनुदान दिया जाएगा।
नौ सौ से अधिक चारा डिपो
योजना के अनुसार जिले में अक्टूबर से चारे की कमी को देखते हुए पशुधन को बचाने के लिए मार्च 2010 तक 2 लाख 79 हजार 200 मैट्रिक टन चारे की आवश्यकता होगी। अक्टूबर में 45, नवम्बर में 120, दिसम्बर में 150, जनवरी में 208, फरवरी में 208 तथा मार्च 249 स्थानों पर चारा डिपो खोले जाएंगे। इनसे प्रतिमाह 85 हजार से साढ़े चार लाख पशुओं को चारा मिल सकेगा।
किस पर होगा कितना खर्च
मद राशि (लाखों में)
मजदूरी 746 3।७०
चारा 2233।६०
गोशाला 547।५०
चिकित्सा120।००
असहाय 3००।06
जल 131।६६
अन्य 237।६०
-----
जिले के 912 गांव अभावग्रस्त घोषित किए गए हैं। आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग को एक अरब से अधिक की आकस्मिक योजना भेजी है। जल्द ही योजना के स्वीकृत होने की उम्मीद है।
-डा। केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:
Udan Tashtari said...
आभार इस आलेख और जानकारी के लिए.
September 17, 2009 8:23 AM

सैकड़ों पद फिर भी रहेंगे खाली

नहीं मिले पदोन्नति के पात्र शिक्षक
चूरू, 15 सितम्बर। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों पर हजारों शिक्षकों की पदोन्नति के बावजूद समस्त पद नहीं भरे जा सकेंगे। विभाग को खाली पद भरने के लिए निर्धारित कोटेवार पात्र शिक्षक नहीं मिले हैं। अकेले बीकानेर मण्डल में शिक्षकों के करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। हालांकि शिक्षा अधिकारियों का दावा है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। समानीकरण व शैक्षणिक व्यवस्था के चलते स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पदोन्नति के लिए सामान्य वर्ग में 31 मार्च 1997 तथा अनुसूचित जाति (एससी) व अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग में 31 मार्च 2004 तक के शिक्षकों को पात्र माना गया है। इनमें पांच साल तक के अनुभव वाले शिक्षकों को ही शामिल किया गया है।

नहीं मिले एससी-एसटी के शिक्षक
बीकानेर मण्डल में खाली रहने वाले पद सबसे अधिक एससी और एसटी कोटे के हैं। मण्डल के पांचों जिलों में एससी के 484 व एसटी के 360 शिक्षकों के खाली पदों की तुलना में पात्र शिक्षक क्रमश: 404 व 139 हैं। मण्डल में एससी कोटे के 80 व एसटी कोटे के 221 शिक्षकों के पद खाली रखने पड़ेंगे। इसके विपरित सामान्य वर्ग में पुरुष शिक्षकों के समस्त पद भरने के बावजूद सैकड़ों पात्र शिक्षक बच जाएंगे।

महिला शिक्षकों की भारी कमी
शिक्षकों के खाली रहने वालों पदों में आधे से अधिक पद महिला शिक्षकों के हैं। एससी व एसटी की महिला शिक्षकों के खाली पद मण्डल के किसी भी जिले में पूरे नहीं भरे जा सकेंगे।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार चूरू और श्रीगंगानगर में एससी व एसटी वर्ग में पदोन्नति की पात्र महिला शिक्षक एक भी नहीं हैं। बीकानेर में एससी के 14 व एसटी के 10 खाली पदों की तुलना में एक-एक पात्र महिला शिक्षक ही उपलब्ध हैं। हनुमानगढ़ में भी लगभग ऐसी ही स्थिति है। झुंझुनूं में एससी के 24 व एसटी के18 खाली पदों की तुलना में क्रमश: 19 व 12 पात्र महिला शिक्षक उपलब्ध हैं।
—-
जिले-----खाली पद---पात्र शिक्षक
चूरू------690-----500
झुंझुनूं----625------597
बीकानेर---543------468
हनुमानगढ़-516------444
श्रीगंगानगर644------615
योग----3018------2624
(इनमें सामान्य, एससी व एसटी के महिला व पुरुष शिक्षक शामिल हैं)

मण्डल में शिक्षकों की पदोन्नति के बाद भी करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। निर्धारित कोटे के पात्र शिक्षक ही नहीं मिले तो पद कहां से भरे। हालांकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
-बलराम मीणा, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

सैकड़ों पद फिर भी रहेंगे खाली

नहीं मिले पदोन्नति के पात्र शिक्षक
चूरू, 15 सितम्बर। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों पर हजारों शिक्षकों की पदोन्नति के बावजूद समस्त पद नहीं भरे जा सकेंगे। विभाग को खाली पद भरने के लिए निर्धारित कोटेवार पात्र शिक्षक नहीं मिले हैं। अकेले बीकानेर मण्डल में शिक्षकों के करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। हालांकि शिक्षा अधिकारियों का दावा है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। समानीकरण व शैक्षणिक व्यवस्था के चलते स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पदोन्नति के लिए सामान्य वर्ग में 31 मार्च 1997 तथा अनुसूचित जाति (एससी) व अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग में 31 मार्च 2004 तक के शिक्षकों को पात्र माना गया है। इनमें पांच साल तक के अनुभव वाले शिक्षकों को ही शामिल किया गया है।
नहीं मिले एससी-एसटी के शिक्षक
बीकानेर मण्डल में खाली रहने वाले पद सबसे अधिक एससी और एसटी कोटे के हैं। मण्डल के पांचों जिलों में एससी के 484 व एसटी के 360 शिक्षकों के खाली पदों की तुलना में पात्र शिक्षक क्रमश: 404 व 139 हैं। मण्डल में एससी कोटे के 80 व एसटी कोटे के 221 शिक्षकों के पद खाली रखने पड़ेंगे। इसके विपरित सामान्य वर्ग में पुरुष शिक्षकों के समस्त पद भरने के बावजूद सैकड़ों पात्र शिक्षक बच जाएंगे।
महिला शिक्षकों की भारी कमी
शिक्षकों के खाली रहने वालों पदों में आधे से अधिक पद महिला शिक्षकों के हैं। एससी व एसटी की महिला शिक्षकों के खाली पद मण्डल के किसी भी जिले में पूरे नहीं भरे जा सकेंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार चूरू और श्रीगंगानगर में एससी व एसटी वर्ग में पदोन्नति की पात्र महिला शिक्षक एक भी नहीं हैं। बीकानेर में एससी के 14 व एसटी के 10 खाली पदों की तुलना में एक-एक पात्र महिला शिक्षक ही उपलब्ध हैं। हनुमानगढ़ में भी लगभग ऐसी ही स्थिति है। झुंझुनूं में एससी के 24 व एसटी के18 खाली पदों की तुलना में क्रमश: 19 व 12 पात्र महिला शिक्षक उपलब्ध हैं।
जिले-----खाली पद---पात्र शिक्षक
चूरू------690-----५००
झुंझुनूं----625------५९७
बीकानेर---543------468
हनुमानगढ़-516------४४४
श्रीगंगानगर644------६१५
योग----3018------२६२४
(इनमें सामान्य, एससी व एसटी के महिला व पुरुष शिक्षक शामिल हैं)
मण्डल में शिक्षकों की पदोन्नति के बाद भी करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। निर्धारित कोटे के पात्र शिक्षक ही नहीं मिले तो पद कहां से भरे। हालांकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
-बलराम मीणा, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, September 14, 2009

वो तो दिल में बसता है...

सका नाम लेने भर से रूह को सुकून मिलता है...दुनियाभर के लोग जिसकी आस्था के समुद्र में गोता लगा रहे हैं...जिसके बारे में कहा जाता है कि उसके घर देर है मगर अंधेर नहीं...जिसे लोग हर लम्हा हर पल अपने पास महसूस करते हैं...वह लोगों की खुशियों में भी शरीक होता है और दुखों में भी...गमों का पहाड़ टूटने पर वह जीने का सहारा बनने से भी नहीं कतराता...एक दिन मेरा पागल मन उसको खोजने निकल पड़ा...उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर में ढूंढा...राह में मिलने वाले हर बंदे से उसका ठिकाना पूछा...मगर हर चौखट पर उसका रूप बदला हुआ था...और हर गली में उसका नाम अलग था...उसके इतने सारे रूप देख और नाम सुन तो पागल मन और बावला हो गया...बेचारे मन के कुछ भी समझ में नहीं आया...मुझसे बोल रहा था कि उसे खुदा कहूं या भगवान, उसका नाम रब है या परमेश्वर...रहीम चाचा को तो वो हाथों की लकीरों में दिखाई देता है...और राम को दीये की लो में...करतार सिंह तो पंचों में भी उस परमेश्वर को देख लेता है...और माइकल तो उसे हर लम्हा अपने नजदीक मानता है...दुनिया में वो ही एक ऐसा शख्स है... जो लोगों को आंखें बंद करने के बाद भी साफ नजर आता है...पागल मन का हाल जान तो मैं भी अजीब उलझन में फंस गया...क्योंकि ना तो मैंने कभी उस शख्स को देखा है और ना ही कभी उससे बात की है...बेचैन मन को कैसे समझाऊं कि वह कौन है?...जो संगीत में है...माँ-बाबा में दिखाई देता है...गरीब की दुआओं में जिसका जिक्र होता है...जो हवाओं की दिशा बदलने की ताकत रखता हो...नदियों और नालों की रूख जो मोड़ दे...जिसका वास्ता देने पर लोगों की रूह कांप उठती हो...जिसे लोग पत्थर में देखते हैं... पूजते हैं...यहां तक की उससे बात भी करते हैं...जिसे अग्नि का रूप मान लोग सात जन्मों तक प्यार के बंधन में बंध जाते हैं...जिसको साक्षी मान प्रेमी जोड़े जिंदगीभर के लिए एक-दूसरे के हो जाते हैं...हर शख्स उसके लिए 24 घंटों में से कुछ समय निकालता है...पागल मन ने मेरे चैहरे को पढ़ लिया...उसने भांप लिया कि मैं उस अनदेखे शख्स की टोह लेने में कामयाब नहीं हुआ...उसे बता नहीं पाऊंगा कि वो कौन है?... पागल ने लम्बी सांस ली और तस्सली से मेरे पास आकर बैठ गया...मैं जिस मन को लम्बे समय से पागल समझ रहा था...उसकी बातें सुन तो मेरा वर्षों पुराना भ्रम मिनटों में टूट गया...एकाएक मेरी नजरें उसके सामने झुक गई...उस मन ने मुझे बताया कि मंदिर में भी वही शख्स है जो मस्जिद में है...गुरुद्वारा और गिरजाघर के उसके रूप में भी कोई अंतर नहीं है...इन चारों का असली रूप तो हमारे दिल में बसता है...उसे हम किसी भी नाम से जानें...यह उसने हम पर छोड़ रखा है...---विश्वनाथ सैनी
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

Pankaj Mishra said...
बहूत अच्छा लिखा है आपने
September 14, 2009 2:05 PM

Ram said...
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September 14, 2009 2:31 PM

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