Tuesday, September 15, 2009

सूखे के घावों पर लगेगा मरहम

जिला प्रशासन ने बनाया एक अरब से अधिक का कंटीजेंसी प्लान
चूरू, 15 सितम्बर। अरमानों पर पानी फिरने से चिंतित किसान हों या चारे के अभाव में पशुओं की हालत देख परेशान होता पशुपालक, कृषि आधारित रोजगार की उम्मीद छोड़ घर बैठने को मजबूर बेरोजगार हों या फिर आर्थिक मदद का इंतजार करता असहाय। मानसून की बेरुखी के कारण पीड़ा सहने वाले इन लोगों के घावों पर मरहम लगाने की प्रशासन ने तैयारी कर ली है। जिले के सभी 912 अभावग्रस्त गांवों के लिए प्रशासन ने सितम्बर 09 से मार्च 2010 तक की एक अरब दस करोड़ 34 लाख 12 हजार रुपए की आकस्मिक योजना आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग को भेजी है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो सूखे से प्रभावित लोगों को चालू माह से राहत मिलनी शुरू हो जाएगी।
तीन लाख को मिल सकेगा रोजगार
योजना के तहत अभावग्रस्त गांवों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के अभावा अन्य कार्यों में तीन लाख लोगों को मार्च 2010 तक रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। सितम्बर में 15 हजार 200, अक्टूबर में 24 हजार 250, नवम्बर में 34 हजार 350, दिसम्बर में 45 हजार 290, जनवरी में 56 हजार 280, फरवरी में 62 हजार 210 व मार्च में 65 हजार 250 लोगों को रोजगार मुहैया करवाने का लक्ष्य रखा गया है।
असहायों को मदद
योजना के तहत असहाय व्यक्तियों की प्रतिमाह छह सौ रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी। प्रशासन ने सुजानगढ़ में 1458 , रतनगढ़ में 600, सरदारशहर में 2110, चूरू में 375, तारानगर में 1177 तथा राजगढ़ में 26 15 असहाय व्यक्तियों को चिन्हित किया है।
रोजाना दौड़ेंगे 93 टैंकर
मानसूनी के दगा देने के कारण लोगों को पेयजल समस्या का भी सामना करना पड़ेगा। प्यासे हलक तर करने के लिए योजना के तहत जिले के 74 गांवों में पानी के रोजाना 93 टैंकर दौड़ेंगे। प्राथमिक तौर पर योजना में सुजानगढ़ के 16, रतनगढ़ के 8, सरदारशहर के 10, चूरू के 7, तारानगर के 9 तथा राजगढ़ के 24 गांवों को शामिल किया है।
गोशालाओं को अनुदान
जिले की 38 पंजीकृत व 10 अपंजीकृत गोशालाओं में पल रहे चौदह हजार से अधिक पशु भी योजना से लाभान्वित होंगे। योजना के तहत सुजानगढ़ की 14, रतनगढ़ की 7, सरदारशहर की 10, चूरू की 5, तारानगर की 8 तथा राजगढ़ की 4 गोशालाओं को अनुदान दिया जाएगा।
नौ सौ से अधिक चारा डिपो
योजना के अनुसार जिले में अक्टूबर से चारे की कमी को देखते हुए पशुधन को बचाने के लिए मार्च 2010 तक 2 लाख 79 हजार 200 मैट्रिक टन चारे की आवश्यकता होगी। अक्टूबर में 45, नवम्बर में 120, दिसम्बर में 150, जनवरी में 208, फरवरी में 208 तथा मार्च 249 स्थानों पर चारा डिपो खोले जाएंगे। इनसे प्रतिमाह 85 हजार से साढ़े चार लाख पशुओं को चारा मिल सकेगा।
किस पर होगा कितना खर्च
मद राशि (लाखों में)
मजदूरी 746 3।७०
चारा 2233।६०
गोशाला 547।५०
चिकित्सा120।००
असहाय 3००।06
जल 131।६६
अन्य 237।६०
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जिले के 912 गांव अभावग्रस्त घोषित किए गए हैं। आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग को एक अरब से अधिक की आकस्मिक योजना भेजी है। जल्द ही योजना के स्वीकृत होने की उम्मीद है।
-डा। केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:
1 टिप्पणियाँ:
Udan Tashtari said...
आभार इस आलेख और जानकारी के लिए.
September 17, 2009 8:23 AM

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