Sunday, September 20, 2009

ब्रॉडगेज की राह में फाटक बने रोड़ा

5बार पढ़ा गया
सादुलपुर-रतनगढ़ आमान परिवर्तन
चूरू, 20 सितम्बर। सादुलपुर-रतनगढ़ के बीच आमान परिवर्तन की राह में नए फाटक की मांग रोड़ा बन गई हैं। सादुलपुर के गांव डोकवा व तारानगर के गांव हडिय़ाल में ग्रामीण ब्रॉडगेज की राह रोके बैठे हैं। फाटक स्वीकृत नहीं होने तक ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हैं जबकि रेलवे अधिकारी मांग के सामने लाचार हैं।रेलवे ने विवादित स्थान को छोड़ आमान परिवर्तन की गाड़ी भले आगे बढ़ा ली है, पर ऐसे में रेल पटरियों पर धरना देकर बैठे ग्रामीणों के हटे बिना रेल सेवा का लाभ तय समय पर मिलना मुश्किल हो चला है। आखिर ग्रामीणों की समस्या का समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है...? रेलवे को किन परेशानियों से जूझना पड़ेगा ? क्या हो सकता है समस्या का समाधान? आदि सवाल आमजन को कुरेदने लगे है।
पत्रिका ने इन सवालों पर पड़ताल की तो कुछ यूं बनी उम्मीद।एक करोड़ रुपए की दरकारपटरियों पर नया फाटक स्वीकृत करवाने वाले को रेलवे में कम से कम एक करोड़ रुपए एक मुश्त जमा कराने पड़ते हैं। यह राशि राज्य सरकार, नगरपालिका, पंचायत, सार्वजनिक निर्माण विभाग या जनप्रतिनिधि कोटे से जमा करवाई जा सकती है। गत वर्ष सादुलपुर-रेवाड़ी के बीच गांव कालरी में एमपी कोटे व सादुलपुर-हिसार के बीच गांव इंदासर के पास राज्य सरकार के सहयोग से नया फाटक खुलवाया गया था।
दीपावली तक लाना है इंजन
सादुलपुर से रतनगढ़ के बीच करीब सौ किलोमीटर लम्बे ट्रेक पर रेल प्रशासन दीपावली से पहले ब्रॉडगेज इंजन बतौर ट्रायल दौड़ाना चाहता है क्योंकि आमान परिवर्तन में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व बिहार के एक हजार व पांच सौ स्थानीय श्रमिक लगे हुए हैं। दीपावली पर श्रमिकों के घर जाने से पहले बड़ी लाइन बिछाने का काम पूरा होने पर ही मार्च 2010 तक ब्रॉडगेज ट्रेनों की सुविधा मुहैया हो सकेगी।
ना उखाडऩे दी ना बिछाने
आधिकारिक जानकारी के अनुसार हडिय़ाल टमकोर मार्ग पर फाटक की मांग पर अड़े ग्रामीणों ने बड़ी लाइन नहीं बिछाने दी है जबकि डोकवा में दो-तीन किलोमीटर में मीटरगेज लाइनों को ही उखाड़ा नहीं जा सका। ग्रामीणों के प्रदर्शन के चलते हडिय़ाल-टमकोर मार्ग पर करीब अस्सी मीटर में बिना आमान परिवर्तन के श्रमिक आगे बढ़ चुके हैं।
-----हम ग्रामीणों की मांग मानने को तैयार हैं मगर रेलवे नियमों के अनुसार करीब एक करोड़ रुपए एक मुश्त जमा कराने होंगे। यह राशि चाहे पंचायत जमा करवाए या राज्य सरकार या फिर कोई जनप्रतिनिधि। आमान परिवर्तन की राह में ग्रामीण यूं रोड़े बने रहे तो क्षेत्रवासियों को ब्रॉडगेज का लाभ मिलने में देरी होगी।
-एनके शर्मा, उप मुख्य अभियंता, उत्तर-पश्चिम रेलवे, बीकानेर
------आमान परिवर्तन के कारण रेलवे के पोल संख्या 246 /5-6 पर हडिय़ाल-टमकोर का रास्ता बंद हो हो गया है। इससे आस-पास के पचास गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलमंत्री ममता बनर्जी को रेलवे के खर्च पर हडिय़ाल टमकोर मार्ग पर फाटक बनवाने के लिए लिखा गया है। लोगों की समस्या का समाधान जल्द ही होगा।
-नरेन्द्र बुडानिया, सांसद, चूरू
-----
इस सम्बन्ध में सचिव सार्वजनिक निर्माण विभाग को अवगत करा दिया गया है। समस्या के हल के लिए प्रशासनिक दृष्टि से पूरे प्रयास किए जा रहे हैंं। शीघ्र ही परिणाम सामने आएंगे।
-डा।केके पाठक,कलक्टर, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Saturday, September 19, 2009

चक दिया चूरू

54वीं राज्यस्तरीय 19 वर्षीय हॉकी प्रतियोगिता जीत
चूरू। गांव में हॉकी खेलने की शुरूआत करने वाली चूरू की बेटियों ने कमाल कर दिखाया है। बेटियों ने जालोर के खेल स्टेडियम में शुक्रवार को 54वीं राज्यस्तरीय 19 वर्षीय हॉकी प्रतियोगिता जीत ली है। सुबह नौ बजे खेले गए फाइनल मुकाबले में जिले की टीम ने सीकर को दो-एक से हराया। जोश और उत्साह से लबरेज जिले की टीम अपने दमदार प्रदर्शन की बदौलत पहली बार 19 वर्षीय हॉकी प्रतियोगिता पर कब्जा जमाने में कामयाब हुई है। इससे पहले चूरू की टीम 1999 में तीसरे स्थान पर रही थी। जिले में शुक्रवार को टीम के जीत की सूचना मिलते ही खेल प्रेमियों व शिक्षा महकमे में खुशी की लहर दौड़ गई। विजेता टीम संभवतया शनिवार को चूरू आएगी। शिक्षा विभाग और विभिन्न संगठनों की ओर से टीम का शानदार स्वागत किया जाएगा। साहवा की सरोज पारीक की कप्तानी में जिले की टीम ने प्रदेशभर की 16 टीमों को पीछे छोड़कर प्रतियोगिता का ताज हथियाया है।कोच जसवंत राव, हाकम अली, दल प्रभारी महेन्द्र प्रजापत व प्रबंधक चन्द्रकला चाहर के नेतृत्व में टीम जालौर गई थी। इसमें 16 सदस्य थे। प्रतियोगिता में 13 सितम्बर से अंतिम गोल तक चूरू की टीम का दबदबा रहा। उद्घाटन मैच में टीम ने गत वर्ष की विजेता अजमेर को दो-शून्य से हराया। इसके अलावा अजमेर, झुंझुनूं, हनुमानगढ़ और भीलवाड़ा के सामने जीत दर्ज की।
पांच मिनट में दागे दो गोल
हाकम अली ने पत्रिका को दूरभाष पर बताया कि टीम ने फाइनल मैच में दो गोल दागे और दोनों ही गोल सेंटर फॉरवर्ड खिलाड़ी रमनदीप की हॉकी से निकले। मैच शुरू होने के दस मिनट बाद सीकर ने एक गोल दागकर बढ़त हासिल की। चूरू टीम ने हिम्मत नहीं हारी और मैच पर पकड़ बनाए रखी। हॉफ टाइम के बाद मैच के शुरूआती पांच मिनट में चूरू की रमनदीप ने पांच मिनट में एक के बाद एक गोल दागकर जीत की इबादत लिखी। गोलकीपर सुचित्रा को बेस्ट प्लेयर का पुरस्कार दिया गया है।
अपनों ने लगाया गले
राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का खिताब जीतने की सूचना मिलते जालौर में रह रहे चूरू के लोगों ने टीम को हाथों में उठा लिया। जालौर में बीएसएनएल में कार्यरत चूरू तहसील के गांव लोसनाबड़ा के जयसिंह पूनियां ने खिलाडियों को नाश्ता और गोविन्द राम शर्मा ने भोजन करवाया। जालौर कोतवाली में तैनात गांव बेवड़ निवासी हैड कॉस्टेबल विनोद पूनियां ने भी टीम को भोजन के लिए आमंत्रित किया। दूसरे जिले में अपनों का प्यार पाकर खिलाड़ी निहाल हो गए।
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Tuesday, September 15, 2009

सूखे के घावों पर लगेगा मरहम

जिला प्रशासन ने बनाया एक अरब से अधिक का कंटीजेंसी प्लान
चूरू, 15 सितम्बर। अरमानों पर पानी फिरने से चिंतित किसान हों या चारे के अभाव में पशुओं की हालत देख परेशान होता पशुपालक, कृषि आधारित रोजगार की उम्मीद छोड़ घर बैठने को मजबूर बेरोजगार हों या फिर आर्थिक मदद का इंतजार करता असहाय। मानसून की बेरुखी के कारण पीड़ा सहने वाले इन लोगों के घावों पर मरहम लगाने की प्रशासन ने तैयारी कर ली है। जिले के सभी 912 अभावग्रस्त गांवों के लिए प्रशासन ने सितम्बर 09 से मार्च 2010 तक की एक अरब दस करोड़ 34 लाख 12 हजार रुपए की आकस्मिक योजना आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग को भेजी है। सब कुछ योजनानुसार हुआ तो सूखे से प्रभावित लोगों को चालू माह से राहत मिलनी शुरू हो जाएगी।
तीन लाख को मिल सकेगा रोजगार
योजना के तहत अभावग्रस्त गांवों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के अभावा अन्य कार्यों में तीन लाख लोगों को मार्च 2010 तक रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। सितम्बर में 15 हजार 200, अक्टूबर में 24 हजार 250, नवम्बर में 34 हजार 350, दिसम्बर में 45 हजार 290, जनवरी में 56 हजार 280, फरवरी में 62 हजार 210 व मार्च में 65 हजार 250 लोगों को रोजगार मुहैया करवाने का लक्ष्य रखा गया है।
असहायों को मदद
योजना के तहत असहाय व्यक्तियों की प्रतिमाह छह सौ रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी। प्रशासन ने सुजानगढ़ में 1458 , रतनगढ़ में 600, सरदारशहर में 2110, चूरू में 375, तारानगर में 1177 तथा राजगढ़ में 26 15 असहाय व्यक्तियों को चिन्हित किया है।
रोजाना दौड़ेंगे 93 टैंकर
मानसूनी के दगा देने के कारण लोगों को पेयजल समस्या का भी सामना करना पड़ेगा। प्यासे हलक तर करने के लिए योजना के तहत जिले के 74 गांवों में पानी के रोजाना 93 टैंकर दौड़ेंगे। प्राथमिक तौर पर योजना में सुजानगढ़ के 16, रतनगढ़ के 8, सरदारशहर के 10, चूरू के 7, तारानगर के 9 तथा राजगढ़ के 24 गांवों को शामिल किया है।
गोशालाओं को अनुदान
जिले की 38 पंजीकृत व 10 अपंजीकृत गोशालाओं में पल रहे चौदह हजार से अधिक पशु भी योजना से लाभान्वित होंगे। योजना के तहत सुजानगढ़ की 14, रतनगढ़ की 7, सरदारशहर की 10, चूरू की 5, तारानगर की 8 तथा राजगढ़ की 4 गोशालाओं को अनुदान दिया जाएगा।
नौ सौ से अधिक चारा डिपो
योजना के अनुसार जिले में अक्टूबर से चारे की कमी को देखते हुए पशुधन को बचाने के लिए मार्च 2010 तक 2 लाख 79 हजार 200 मैट्रिक टन चारे की आवश्यकता होगी। अक्टूबर में 45, नवम्बर में 120, दिसम्बर में 150, जनवरी में 208, फरवरी में 208 तथा मार्च 249 स्थानों पर चारा डिपो खोले जाएंगे। इनसे प्रतिमाह 85 हजार से साढ़े चार लाख पशुओं को चारा मिल सकेगा।
किस पर होगा कितना खर्च
मद राशि (लाखों में)
मजदूरी 746 3।७०
चारा 2233।६०
गोशाला 547।५०
चिकित्सा120।००
असहाय 3००।06
जल 131।६६
अन्य 237।६०
-----
जिले के 912 गांव अभावग्रस्त घोषित किए गए हैं। आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग को एक अरब से अधिक की आकस्मिक योजना भेजी है। जल्द ही योजना के स्वीकृत होने की उम्मीद है।
-डा। केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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1 टिप्पणियाँ:
Udan Tashtari said...
आभार इस आलेख और जानकारी के लिए.
September 17, 2009 8:23 AM

सैकड़ों पद फिर भी रहेंगे खाली

नहीं मिले पदोन्नति के पात्र शिक्षक
चूरू, 15 सितम्बर। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों पर हजारों शिक्षकों की पदोन्नति के बावजूद समस्त पद नहीं भरे जा सकेंगे। विभाग को खाली पद भरने के लिए निर्धारित कोटेवार पात्र शिक्षक नहीं मिले हैं। अकेले बीकानेर मण्डल में शिक्षकों के करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। हालांकि शिक्षा अधिकारियों का दावा है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। समानीकरण व शैक्षणिक व्यवस्था के चलते स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पदोन्नति के लिए सामान्य वर्ग में 31 मार्च 1997 तथा अनुसूचित जाति (एससी) व अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग में 31 मार्च 2004 तक के शिक्षकों को पात्र माना गया है। इनमें पांच साल तक के अनुभव वाले शिक्षकों को ही शामिल किया गया है।

नहीं मिले एससी-एसटी के शिक्षक
बीकानेर मण्डल में खाली रहने वाले पद सबसे अधिक एससी और एसटी कोटे के हैं। मण्डल के पांचों जिलों में एससी के 484 व एसटी के 360 शिक्षकों के खाली पदों की तुलना में पात्र शिक्षक क्रमश: 404 व 139 हैं। मण्डल में एससी कोटे के 80 व एसटी कोटे के 221 शिक्षकों के पद खाली रखने पड़ेंगे। इसके विपरित सामान्य वर्ग में पुरुष शिक्षकों के समस्त पद भरने के बावजूद सैकड़ों पात्र शिक्षक बच जाएंगे।

महिला शिक्षकों की भारी कमी
शिक्षकों के खाली रहने वालों पदों में आधे से अधिक पद महिला शिक्षकों के हैं। एससी व एसटी की महिला शिक्षकों के खाली पद मण्डल के किसी भी जिले में पूरे नहीं भरे जा सकेंगे।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार चूरू और श्रीगंगानगर में एससी व एसटी वर्ग में पदोन्नति की पात्र महिला शिक्षक एक भी नहीं हैं। बीकानेर में एससी के 14 व एसटी के 10 खाली पदों की तुलना में एक-एक पात्र महिला शिक्षक ही उपलब्ध हैं। हनुमानगढ़ में भी लगभग ऐसी ही स्थिति है। झुंझुनूं में एससी के 24 व एसटी के18 खाली पदों की तुलना में क्रमश: 19 व 12 पात्र महिला शिक्षक उपलब्ध हैं।
—-
जिले-----खाली पद---पात्र शिक्षक
चूरू------690-----500
झुंझुनूं----625------597
बीकानेर---543------468
हनुमानगढ़-516------444
श्रीगंगानगर644------615
योग----3018------2624
(इनमें सामान्य, एससी व एसटी के महिला व पुरुष शिक्षक शामिल हैं)

मण्डल में शिक्षकों की पदोन्नति के बाद भी करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। निर्धारित कोटे के पात्र शिक्षक ही नहीं मिले तो पद कहां से भरे। हालांकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
-बलराम मीणा, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू

प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

सैकड़ों पद फिर भी रहेंगे खाली

नहीं मिले पदोन्नति के पात्र शिक्षक
चूरू, 15 सितम्बर। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों पर हजारों शिक्षकों की पदोन्नति के बावजूद समस्त पद नहीं भरे जा सकेंगे। विभाग को खाली पद भरने के लिए निर्धारित कोटेवार पात्र शिक्षक नहीं मिले हैं। अकेले बीकानेर मण्डल में शिक्षकों के करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। हालांकि शिक्षा अधिकारियों का दावा है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। समानीकरण व शैक्षणिक व्यवस्था के चलते स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पदोन्नति के लिए सामान्य वर्ग में 31 मार्च 1997 तथा अनुसूचित जाति (एससी) व अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग में 31 मार्च 2004 तक के शिक्षकों को पात्र माना गया है। इनमें पांच साल तक के अनुभव वाले शिक्षकों को ही शामिल किया गया है।
नहीं मिले एससी-एसटी के शिक्षक
बीकानेर मण्डल में खाली रहने वाले पद सबसे अधिक एससी और एसटी कोटे के हैं। मण्डल के पांचों जिलों में एससी के 484 व एसटी के 360 शिक्षकों के खाली पदों की तुलना में पात्र शिक्षक क्रमश: 404 व 139 हैं। मण्डल में एससी कोटे के 80 व एसटी कोटे के 221 शिक्षकों के पद खाली रखने पड़ेंगे। इसके विपरित सामान्य वर्ग में पुरुष शिक्षकों के समस्त पद भरने के बावजूद सैकड़ों पात्र शिक्षक बच जाएंगे।
महिला शिक्षकों की भारी कमी
शिक्षकों के खाली रहने वालों पदों में आधे से अधिक पद महिला शिक्षकों के हैं। एससी व एसटी की महिला शिक्षकों के खाली पद मण्डल के किसी भी जिले में पूरे नहीं भरे जा सकेंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार चूरू और श्रीगंगानगर में एससी व एसटी वर्ग में पदोन्नति की पात्र महिला शिक्षक एक भी नहीं हैं। बीकानेर में एससी के 14 व एसटी के 10 खाली पदों की तुलना में एक-एक पात्र महिला शिक्षक ही उपलब्ध हैं। हनुमानगढ़ में भी लगभग ऐसी ही स्थिति है। झुंझुनूं में एससी के 24 व एसटी के18 खाली पदों की तुलना में क्रमश: 19 व 12 पात्र महिला शिक्षक उपलब्ध हैं।
जिले-----खाली पद---पात्र शिक्षक
चूरू------690-----५००
झुंझुनूं----625------५९७
बीकानेर---543------468
हनुमानगढ़-516------४४४
श्रीगंगानगर644------६१५
योग----3018------२६२४
(इनमें सामान्य, एससी व एसटी के महिला व पुरुष शिक्षक शामिल हैं)
मण्डल में शिक्षकों की पदोन्नति के बाद भी करीब चार सौ पद खाली रहेंगे। निर्धारित कोटे के पात्र शिक्षक ही नहीं मिले तो पद कहां से भरे। हालांकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
-बलराम मीणा, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी

Monday, September 14, 2009

वो तो दिल में बसता है...

सका नाम लेने भर से रूह को सुकून मिलता है...दुनियाभर के लोग जिसकी आस्था के समुद्र में गोता लगा रहे हैं...जिसके बारे में कहा जाता है कि उसके घर देर है मगर अंधेर नहीं...जिसे लोग हर लम्हा हर पल अपने पास महसूस करते हैं...वह लोगों की खुशियों में भी शरीक होता है और दुखों में भी...गमों का पहाड़ टूटने पर वह जीने का सहारा बनने से भी नहीं कतराता...एक दिन मेरा पागल मन उसको खोजने निकल पड़ा...उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर में ढूंढा...राह में मिलने वाले हर बंदे से उसका ठिकाना पूछा...मगर हर चौखट पर उसका रूप बदला हुआ था...और हर गली में उसका नाम अलग था...उसके इतने सारे रूप देख और नाम सुन तो पागल मन और बावला हो गया...बेचारे मन के कुछ भी समझ में नहीं आया...मुझसे बोल रहा था कि उसे खुदा कहूं या भगवान, उसका नाम रब है या परमेश्वर...रहीम चाचा को तो वो हाथों की लकीरों में दिखाई देता है...और राम को दीये की लो में...करतार सिंह तो पंचों में भी उस परमेश्वर को देख लेता है...और माइकल तो उसे हर लम्हा अपने नजदीक मानता है...दुनिया में वो ही एक ऐसा शख्स है... जो लोगों को आंखें बंद करने के बाद भी साफ नजर आता है...पागल मन का हाल जान तो मैं भी अजीब उलझन में फंस गया...क्योंकि ना तो मैंने कभी उस शख्स को देखा है और ना ही कभी उससे बात की है...बेचैन मन को कैसे समझाऊं कि वह कौन है?...जो संगीत में है...माँ-बाबा में दिखाई देता है...गरीब की दुआओं में जिसका जिक्र होता है...जो हवाओं की दिशा बदलने की ताकत रखता हो...नदियों और नालों की रूख जो मोड़ दे...जिसका वास्ता देने पर लोगों की रूह कांप उठती हो...जिसे लोग पत्थर में देखते हैं... पूजते हैं...यहां तक की उससे बात भी करते हैं...जिसे अग्नि का रूप मान लोग सात जन्मों तक प्यार के बंधन में बंध जाते हैं...जिसको साक्षी मान प्रेमी जोड़े जिंदगीभर के लिए एक-दूसरे के हो जाते हैं...हर शख्स उसके लिए 24 घंटों में से कुछ समय निकालता है...पागल मन ने मेरे चैहरे को पढ़ लिया...उसने भांप लिया कि मैं उस अनदेखे शख्स की टोह लेने में कामयाब नहीं हुआ...उसे बता नहीं पाऊंगा कि वो कौन है?... पागल ने लम्बी सांस ली और तस्सली से मेरे पास आकर बैठ गया...मैं जिस मन को लम्बे समय से पागल समझ रहा था...उसकी बातें सुन तो मेरा वर्षों पुराना भ्रम मिनटों में टूट गया...एकाएक मेरी नजरें उसके सामने झुक गई...उस मन ने मुझे बताया कि मंदिर में भी वही शख्स है जो मस्जिद में है...गुरुद्वारा और गिरजाघर के उसके रूप में भी कोई अंतर नहीं है...इन चारों का असली रूप तो हमारे दिल में बसता है...उसे हम किसी भी नाम से जानें...यह उसने हम पर छोड़ रखा है...---विश्वनाथ सैनी
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
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2 टिप्पणियाँ:

Pankaj Mishra said...
बहूत अच्छा लिखा है आपने
September 14, 2009 2:05 PM

Ram said...
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September 14, 2009 2:31 PM

Thursday, September 10, 2009

छतों पर मंडराती मौत


हाईटेंशन लाइन के करीब तक मकान की मंजिल बनाने को बेपरवाह, जिला प्रशासन के कानों तक आए दिन होती इंसान की मौत की नहीं पहुंचती चीत्कार।
चूरू, 10 सितम्बर। शहर की आधा दर्जन से अधिक कॉलोनियों में छतों पर मौत मंडरा रही है। इस स्थिति से हर कोई जो परोक्ष या अपरोक्ष जुड़ा है अच्छी तरह वाकिफ है, किन्तु लाचार है। जिला प्रशासन ने तो जैसे गांधीजी के तीन बंदरों वाली कहावत को आत्मसात कर लिया है। उसके कानों तक आए दिन होती इंसान की मौत की चीत्कार नहीं पहुंचती। विद्युत निगम तो चूरू वासियों के घरों पर विद्युत तारों के रूप में लटकती मौत को देख आंखे मूंद लेता है। नगर परिषद ने तो वर्षों से मुंह पर चुप्पी या चिप्पी लगा रखी है। ऐसा नहीं कि सामने खड़ी साक्षात मौत से कोई डरता नहीं, हर एक खौफजदा है। हर कोई चाहता भी है कि समाधान हो पर पहल करने वाले नहीं मिलते। राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी ने इस गंभीर समस्या को एक दशक से भी अधिक समय से जस का तस बना रखा है। नियम और कानून तो यहां बेमानी हैं। लोग भी अपने घर में रहने की चाहत में जैसे मौत को भी अनदेखा करने से नहीं चूक रहे। हाईटेंशन लाइन के करीब तक मकान की मंजिल बनाने को बेपरवाह है। पत्रिका ने शहर का दौरा कर जाना तो हाल-ए-नजारा यह रहा।

क्या कहते हैं नियम
आधिकारिक जानकारी के अनुसार किसी भूमि पर विद्युत लाइन खींचे जाने के बाद भूखण्ड आवंटित करवाकर कोई निर्माण कार्य करे और छत से विद्युत लाइन गुजरे तो भूखण्ड मालिक को लाइन शिफ्ट करवाने का खर्चा वहन करना पड़ता है। इसके विपरित परिस्थिति में निगम अपने खर्च पर लाइन शिफ्ट करता है। लाइन शिफ्ट भी नहीं हो सके तो निगम को उसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पड़ते हैं।

हर स्तर पर अनदेखी
शहर में चाहे सैनिक बस्ती हो या शेखावत कॉलोनी या कोई और। छत पर मंडराती मौत के मामले में मकान मालिकों और निगम दोनों ने अनदेखी की है। कॉलोनी के प्लानरों ने तारों की परवाह किए बगैर भूखण्ड आवंटित कर दिए और रातों-रात उनमें भवन खड़े कर दिए। निगम की लापरवाही यह है कि उसने विद्युत लाइन शिफ्ट करने की कभी कोई योजना नहीं बनाई।

#उस्मानाबाद कॉलोनी
रोडवेज बस स्टैण्ड के पास स्थित इस कॉलोनी में आधारभूत सुविधाओं के अभाव के साथ-साथ छत से गुजरते विद्युत तार सबसे बड़ी समस्या हैं। समस्या समाधान के लिए अधिकारियों का कई बार दरवाजा खटखटा चुके कॉलोनीवासी अब लाइन शिफ्टिंग की उम्मीद छोड़ चुके हैं। विद्युत तारों से एक दर्जन से अधिक परिवार पीडि़त हैं।
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भूखण्ड से विद्युत तार हटने की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में निर्माणाधीन मकान की छत की ऊंचाई 15 फीट की बजाय सात फीट ही रखी है। छत पर कभी ना कभी तो चढऩा ही पड़ेगा इसलिए छत की ऊंचाई कम करके विद्युत खतरे का उपाय खोजा है। इसके अलावा हम कर भी क्या सकते हैं।
-यासिन तेली, उस्मानाबाद कॉलोनी

#सैनिक बस्ती
चूरू में निगम की लापरवाही का सैनिक बस्ती से बेहतर कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। कॉलोनी की दो दर्जन से अधिक छतों पर मौत मंडरा रही है। सबसे अधिक यहीं के वाशिंदे करंट की चपेट में आए हैं। तीन-चार व्यक्तियों को तो जिंदगी से भी हाथ धोना पड़ा है।
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करीब चार साल पूर्व छत से गुजरते चार तार छत पर टिक गए थे। इससे दो बार छत की दीवार तोडऩी पड़ी और छत पर जाना बंद हुआ सो अलग। बारिश में तो मकान की दीवारों में करंट आने लगता है। ऐसे कई बार सड़क पर आना पड़ा है।
-शांति देवी, सैनिक बस्ती

#ओम कॉलोनी
11 केवी लाइन से कॉलोनी के आधा दर्जन से अधिक घरों पर खतरा मंडरा रहा है। 12 वर्ष पहले भंवरलाल शर्मा के छत पर हादसा हुआ तो निगम अभियंताओं ने छत पर ही खम्भा लगाकर तार ऊंचे कर दिए। निगम के अभियंता शेष घरों की छतों से तार हटाने या उन्हें ऊंचे करने के लिए शायद एक और हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
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मकानों का काम चल रहा था तब मिस्त्री को चाय पकड़ाने छत पर गई तो करंट से झुलस गई। तीन दिन से होश आया और तीन माह तक इलाज चला। बारिश और तूफान में करंट के डर से बच्चे तो क्या बड़ों को भी छत पर नहीं जाने देते।
-शांति देवी, ओम कॉलोनी

#शेखावत कॉलोनी
कॉलोनी में 11 केवी और 33 केवी कई घरों की छतों से गुजरती है। लोग चौबीसों घंटें मौत के सांये में बीताते हैं। 33 केवी के नीचे के घरों में बारिश और आंधी में अक्सर हवाई करंट आता है।अधिकांश लोग विद्युत तारों की समस्या के कारण कॉलोनी में भूखण्ड खरीदने पर पछता रहे हैं। कॉलोनी में छोटे-बड़े हादसे आए दिन होते हैं।
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भूखण्ड खरीदा तब निगम ने कहा कि निर्माण कार्य शुरू होगा तब लाइन शिफ्ट कर देंगे। वर्षों पुरानी यह समस्या आज भी जस की तस है। हम तो लाइन शिफ्टिंग का चार्ज तक देने को तैयार हैं मगर निगम समस्या की गंभीरता को समझे तब समाधान हो।
-इकबाल खां, शेखावत कॉलोनी

#पूनियां कॉलोनी
कॉलोनी में डेढ़ दर्जन से अधिक घरों की छत से 11 केवी की लाइन गुजर रही है। प्रेमप्रकाश सहारण के नोहरे में तो लोहे का खम्भा तक लगा हुआ है। कॉलोनीवासियों के अनुसार गांधी कॉलोनी से पूनियां कॉलोनी के बीच खींची गई इस विद्युत लाइन से कॉलोनीवासी भयभित हैं। लोगों में निगम के अभियंताओं के प्रति भारी रोष भी है।
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चौबीसों घंटे भय समाया रहता है। छत के बीचोंबीच से गुजरती 11केवी लाइन के कारण रात को बाहर भी नहीं सोते हैं। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या से अवगत करवा दिया मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
-इन्द्रचंद राठी, पूनियां कॉलोनी

#वन विहार कॉलोनी/प्रतिभा नगर
वन विहार कॉलोनी और प्रतिभा नगर में छत के नजदीक से गुजरते विद्युत तार हर समय हादसे को निमंत्रण दे रहे हैं। निगम के अभियंताओं के सुध नहीं लेने के कारण लोगों ने अपने स्तर पर सुरक्षा बरत रखी है। कहीं पर ईंटों की ऊंची दीवार बनाई गई तो कहीं पर तारों में पाइप डलवाकर सुरक्षित कर रखा है।
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छत के नजदीक से गुजर रहे तारों की समस्या की कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। आखिर हमने ही ईंट लगाकर बच्चों को तारों के नजदीक जाने से रोक रखा है। विद्युत तारों की समस्या से आखिर कब तक जूझना पड़ेगा।
-तुलसी देवी, प्रतिभा नगर

हादसे दर हादसे
--8 सितम्बर 09 सैनिक बस्ती में छत पर निर्माण कार्य करवाते समय विद्युत लाइन के सम्पर्क में आने से अकबर हुसैन की मौत। इससे पहले भी तीन व्यक्ति गंवा चुके हैं जान।
--1 सितम्बर 09 को वार्ड 22 में छत पर खेल रहा सात वर्षीय समीर करंट से झुलसा।
आठ माह पहले शेखावत कॉलोनी स्थित मस्जिद की छत पर तार छूने से अकरम इलाही झुलसा।
--करीब ढाई साल पहले उस्मानाबाद कॉलोनी में छत पर प्लास्तर करते समय विद्युत तार के सम्पर्क में आने से आरिफ हुआ घायल।
--करीब 12 साल पहले ओम कॉलोनी में निर्माणधीन मकान की छत से गुजर रहे तार के सम्पर्क में आने से शांति देवी मरते-मरते बची।

इतने पास से खतरा
लाइन----नजदीक---नीचे
33केवी---2मीटर----3.7मीटर
11केवी---1.2मीटर--3.7मीटर
132केवी--3मीटर----5मीटर
(निगम के एसई के अनुसार )
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जन सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर कोर्ट आइपीसी और सीआरपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्रसंज्ञान लेकर क्षतिकारक चीज का हटाने का आदेश दे सकती है।
-हेमंत शर्मा, वकील, चूरू

छत से लाइन शिफ्टिंग के मेरे पास सैकड़ों आवेदन आ चुके हैं। यह तो भूखण्ड आवंटन करने वाले और लेने वाले दोनों की गलती है। सैनिक बस्ती की छतों से हाईटेंशन लाइन का खतरा दूर करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए निगम को कॉलोनी का सर्वे करने के आदेश दिए जा चुके हैं।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू

कॉलोनियों से लाइन गुजरी तब मकान नहीं बने हुए थे। यह तो प्लॉट काटने वालों और विद्युत लाइनों के नीचे मकान बनाने वालों की गलती है। खतरा तो है मगर निगम कर भी क्या सकता है। सैनिक बस्ती में समस्या सबसे गंभीर है। कॉलोनी से लाइन शिफ्ट करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा हुआ है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद लाइन शिफ्ट की जाएगी।
-केआर मेहता, अधीक्षण अभियंता, जोधपुर डिस्कॉम

समस्या गंभीर है। शहर की 25 फीसदी आबादी इससे प्रभावित है। लाइन शिङ्क्षफ्टग की पहले एक योजना तो बनी मगर उसका कोई नतीजा नहीं निकला। वैसे भी यह राज्यस्तर का मामला है। समस्या के समाधान के लिए शहरवासियों को मिलकर प्रयास करने की दरकार है। परिषद अपने स्तर पर मदद करने में कोई कमी नहीं रहने देगी।
-रमाकांत ओझा, सभापति, नगर परिषद, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी



Friday, September 4, 2009

बंद होंगे गड़बड़ी के सुराख

नरेगा में नई व्यवस्था, शुरुआत सुजानगढ़ ब्लॉक से
विश्वनाथ सैनी
चूरू, 4 सितम्बर। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना (नरेगा) में अब सरकारी राशि का रिसाव नहीं हो सकेगा। नरेगा में भ्रष्टाचारियों की जेबें भरने वाले सुराखों का जिला प्रशासन ने तोड़ निकाल लिया है। खुद प्रशासन के लिए सिरदर्द बन चुके नरेगा के उन तमाम सुराखों को जल्द ही बंद किया जाएगा। इसके लिए न केवल मस्टररोल का प्रारूप बदला गया है बल्कि नरेगा कार्य के निरीक्षण के लिए तीसरी आंख की भी मदद ली जाएगी।जिला प्रशासन की नई व्यवस्था में नरेगा का मस्टररोल जारी होने से लेकर श्रमिकों के हाथ में मजदूरी पहुंचने तक का सारा काम-काज कम्प्यूटराइज होगा। नरेगा के ए- फोर साइज के नए मस्टररोल का उपयोग पहली बार आगामी पखवाड़े से सुजानगढ़ ब्लॉक में किया जाएगा। बाद में जिलेभर में इसका उपयोग होगा।

नहीं लिख सकेंगे फर्जी नाम
नरेगा के भ्रष्टाचारी नए मस्टररोल में श्रमिकों के फर्जी नाम किसी भी सूरत में दर्ज नहीं कर सकेंगे। क्योंकि मस्टररोल में अब श्रमिकों के नाम का कॉलम खाली ही नहीं मिलेगा। नया मस्टररोल जारी करने से पहले उसमें उन सभी श्रमिकों के नाम कम्प्यूटर से दर्ज किए जाएंगे, जिन्होंने नरेगा में काम की मांग की है। फिलहाल जारी होने वाले मस्टररोल में श्रमिकों के नाम के कॉलम समेत समस्त कॉलम खाली होते हैं। ऐसे में काम की मांग नहीं करने वाले श्रमिक का नाम मस्टररोल में दर्जकर भ्रष्टाचारी सरकारी राशि डकारने में कामयाब हो जाते हैं।

कांट-छांट की गुंजाइश नहीं
नए मस्टररोल में श्रमिकों के नाम, पंजीकरण संख्या, हाजिरी और मजदूरी में कांट-छांट की गुंजाइश न के बराबर है। नए मस्टररोल में हाजिरी और मजदूरी को छोड़ शेष समस्त सूचनाएं उसे जारी करने के साथ ही कम्प्यूटर से दर्ज कर दी जाएंगी। मेट को अब हाजिरी के कॉलम में 'एÓ और 'पीÓ की बजाय एक से दस तक की संख्या क्रमवार लिखनी होगी। अनुपस्थित श्रमिक के कॉलम में क्रोस लगाना होगा। भ्रष्टाचारी किसी श्रमिक की हाजिरी में गड़बड़ करना चाहेगा तो उसे समस्त श्रमिकों की क्रम संख्या में कांट-छांट करनी पड़ेगी। ऐसे में हाजिरी की गड़बड़ी आसानी से पकड़ में आ जाएगी।

हर ब्लॉक में फ्लाइंग स्क्वायड
नरेगा में मस्टररोल की नई व्यवस्था के अलावा प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक अधिकारी के नेतृत्व में फ्लाइंग स्क्वायड टीम गठित की जाएगी। खास बात यह है कि भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर फ्लाइंग स्क्वायड टीम नरेगा कार्यस्थल का निरीक्षण करने के साथ ही उसकी वीडियोग्राफी भी करेगी। इससे शिकायत की जांच को सही दिशा देने में आसानी होगी। टीम के नेतृत्व की जिम्मेदारी रोजाना बदलती रहेगी। टीम का नेतृत्व वह अधिकारी करेगा जो उस दिन अपने क्षेत्र में उपस्थित हो।

यह भी होगा फायदा
जिले में कार्यरत नरेगा श्रमिकों की संख्या का पता मिनटों में लगाया जा सकेगा।-मस्टररोल में श्रमिकों की पंजीकरण संख्या, अकाउण्ट नम्बर व मजदूरी लिखने में नहीं हो सकेगी गड़बड़ी।-जिले में नहीं रहेगा नरेगा का बैकलॉग।-नरेगा का बजट जारी होने में नहीं होगी देरी।-लम्बे-चौड़े मस्टररोल की घट जाएगी साइज।

इनका कहना है...
नई व्यवस्था से नरेगा की कई खामियों को दूर किया जा सकेगा। नया मस्टररोल दिल्ली एनआईसी ने काफी पहले डिजाइन किया था मगर प्रदेश के किसी भी जिले में इसे नहीं अपनाया गया। आगामी पखवाड़े से चूरू के सुजानगढ़ में पहली बार इसके तहत काम होगा।
-डा. केके पाठक,जिला कलक्टर, चूरू

हिसाब-किताब

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