Thursday, September 10, 2009

छतों पर मंडराती मौत


हाईटेंशन लाइन के करीब तक मकान की मंजिल बनाने को बेपरवाह, जिला प्रशासन के कानों तक आए दिन होती इंसान की मौत की नहीं पहुंचती चीत्कार।
चूरू, 10 सितम्बर। शहर की आधा दर्जन से अधिक कॉलोनियों में छतों पर मौत मंडरा रही है। इस स्थिति से हर कोई जो परोक्ष या अपरोक्ष जुड़ा है अच्छी तरह वाकिफ है, किन्तु लाचार है। जिला प्रशासन ने तो जैसे गांधीजी के तीन बंदरों वाली कहावत को आत्मसात कर लिया है। उसके कानों तक आए दिन होती इंसान की मौत की चीत्कार नहीं पहुंचती। विद्युत निगम तो चूरू वासियों के घरों पर विद्युत तारों के रूप में लटकती मौत को देख आंखे मूंद लेता है। नगर परिषद ने तो वर्षों से मुंह पर चुप्पी या चिप्पी लगा रखी है। ऐसा नहीं कि सामने खड़ी साक्षात मौत से कोई डरता नहीं, हर एक खौफजदा है। हर कोई चाहता भी है कि समाधान हो पर पहल करने वाले नहीं मिलते। राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी ने इस गंभीर समस्या को एक दशक से भी अधिक समय से जस का तस बना रखा है। नियम और कानून तो यहां बेमानी हैं। लोग भी अपने घर में रहने की चाहत में जैसे मौत को भी अनदेखा करने से नहीं चूक रहे। हाईटेंशन लाइन के करीब तक मकान की मंजिल बनाने को बेपरवाह है। पत्रिका ने शहर का दौरा कर जाना तो हाल-ए-नजारा यह रहा।

क्या कहते हैं नियम
आधिकारिक जानकारी के अनुसार किसी भूमि पर विद्युत लाइन खींचे जाने के बाद भूखण्ड आवंटित करवाकर कोई निर्माण कार्य करे और छत से विद्युत लाइन गुजरे तो भूखण्ड मालिक को लाइन शिफ्ट करवाने का खर्चा वहन करना पड़ता है। इसके विपरित परिस्थिति में निगम अपने खर्च पर लाइन शिफ्ट करता है। लाइन शिफ्ट भी नहीं हो सके तो निगम को उसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पड़ते हैं।

हर स्तर पर अनदेखी
शहर में चाहे सैनिक बस्ती हो या शेखावत कॉलोनी या कोई और। छत पर मंडराती मौत के मामले में मकान मालिकों और निगम दोनों ने अनदेखी की है। कॉलोनी के प्लानरों ने तारों की परवाह किए बगैर भूखण्ड आवंटित कर दिए और रातों-रात उनमें भवन खड़े कर दिए। निगम की लापरवाही यह है कि उसने विद्युत लाइन शिफ्ट करने की कभी कोई योजना नहीं बनाई।

#उस्मानाबाद कॉलोनी
रोडवेज बस स्टैण्ड के पास स्थित इस कॉलोनी में आधारभूत सुविधाओं के अभाव के साथ-साथ छत से गुजरते विद्युत तार सबसे बड़ी समस्या हैं। समस्या समाधान के लिए अधिकारियों का कई बार दरवाजा खटखटा चुके कॉलोनीवासी अब लाइन शिफ्टिंग की उम्मीद छोड़ चुके हैं। विद्युत तारों से एक दर्जन से अधिक परिवार पीडि़त हैं।
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भूखण्ड से विद्युत तार हटने की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में निर्माणाधीन मकान की छत की ऊंचाई 15 फीट की बजाय सात फीट ही रखी है। छत पर कभी ना कभी तो चढऩा ही पड़ेगा इसलिए छत की ऊंचाई कम करके विद्युत खतरे का उपाय खोजा है। इसके अलावा हम कर भी क्या सकते हैं।
-यासिन तेली, उस्मानाबाद कॉलोनी

#सैनिक बस्ती
चूरू में निगम की लापरवाही का सैनिक बस्ती से बेहतर कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। कॉलोनी की दो दर्जन से अधिक छतों पर मौत मंडरा रही है। सबसे अधिक यहीं के वाशिंदे करंट की चपेट में आए हैं। तीन-चार व्यक्तियों को तो जिंदगी से भी हाथ धोना पड़ा है।
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करीब चार साल पूर्व छत से गुजरते चार तार छत पर टिक गए थे। इससे दो बार छत की दीवार तोडऩी पड़ी और छत पर जाना बंद हुआ सो अलग। बारिश में तो मकान की दीवारों में करंट आने लगता है। ऐसे कई बार सड़क पर आना पड़ा है।
-शांति देवी, सैनिक बस्ती

#ओम कॉलोनी
11 केवी लाइन से कॉलोनी के आधा दर्जन से अधिक घरों पर खतरा मंडरा रहा है। 12 वर्ष पहले भंवरलाल शर्मा के छत पर हादसा हुआ तो निगम अभियंताओं ने छत पर ही खम्भा लगाकर तार ऊंचे कर दिए। निगम के अभियंता शेष घरों की छतों से तार हटाने या उन्हें ऊंचे करने के लिए शायद एक और हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
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मकानों का काम चल रहा था तब मिस्त्री को चाय पकड़ाने छत पर गई तो करंट से झुलस गई। तीन दिन से होश आया और तीन माह तक इलाज चला। बारिश और तूफान में करंट के डर से बच्चे तो क्या बड़ों को भी छत पर नहीं जाने देते।
-शांति देवी, ओम कॉलोनी

#शेखावत कॉलोनी
कॉलोनी में 11 केवी और 33 केवी कई घरों की छतों से गुजरती है। लोग चौबीसों घंटें मौत के सांये में बीताते हैं। 33 केवी के नीचे के घरों में बारिश और आंधी में अक्सर हवाई करंट आता है।अधिकांश लोग विद्युत तारों की समस्या के कारण कॉलोनी में भूखण्ड खरीदने पर पछता रहे हैं। कॉलोनी में छोटे-बड़े हादसे आए दिन होते हैं।
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भूखण्ड खरीदा तब निगम ने कहा कि निर्माण कार्य शुरू होगा तब लाइन शिफ्ट कर देंगे। वर्षों पुरानी यह समस्या आज भी जस की तस है। हम तो लाइन शिफ्टिंग का चार्ज तक देने को तैयार हैं मगर निगम समस्या की गंभीरता को समझे तब समाधान हो।
-इकबाल खां, शेखावत कॉलोनी

#पूनियां कॉलोनी
कॉलोनी में डेढ़ दर्जन से अधिक घरों की छत से 11 केवी की लाइन गुजर रही है। प्रेमप्रकाश सहारण के नोहरे में तो लोहे का खम्भा तक लगा हुआ है। कॉलोनीवासियों के अनुसार गांधी कॉलोनी से पूनियां कॉलोनी के बीच खींची गई इस विद्युत लाइन से कॉलोनीवासी भयभित हैं। लोगों में निगम के अभियंताओं के प्रति भारी रोष भी है।
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चौबीसों घंटे भय समाया रहता है। छत के बीचोंबीच से गुजरती 11केवी लाइन के कारण रात को बाहर भी नहीं सोते हैं। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या से अवगत करवा दिया मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
-इन्द्रचंद राठी, पूनियां कॉलोनी

#वन विहार कॉलोनी/प्रतिभा नगर
वन विहार कॉलोनी और प्रतिभा नगर में छत के नजदीक से गुजरते विद्युत तार हर समय हादसे को निमंत्रण दे रहे हैं। निगम के अभियंताओं के सुध नहीं लेने के कारण लोगों ने अपने स्तर पर सुरक्षा बरत रखी है। कहीं पर ईंटों की ऊंची दीवार बनाई गई तो कहीं पर तारों में पाइप डलवाकर सुरक्षित कर रखा है।
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छत के नजदीक से गुजर रहे तारों की समस्या की कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। आखिर हमने ही ईंट लगाकर बच्चों को तारों के नजदीक जाने से रोक रखा है। विद्युत तारों की समस्या से आखिर कब तक जूझना पड़ेगा।
-तुलसी देवी, प्रतिभा नगर

हादसे दर हादसे
--8 सितम्बर 09 सैनिक बस्ती में छत पर निर्माण कार्य करवाते समय विद्युत लाइन के सम्पर्क में आने से अकबर हुसैन की मौत। इससे पहले भी तीन व्यक्ति गंवा चुके हैं जान।
--1 सितम्बर 09 को वार्ड 22 में छत पर खेल रहा सात वर्षीय समीर करंट से झुलसा।
आठ माह पहले शेखावत कॉलोनी स्थित मस्जिद की छत पर तार छूने से अकरम इलाही झुलसा।
--करीब ढाई साल पहले उस्मानाबाद कॉलोनी में छत पर प्लास्तर करते समय विद्युत तार के सम्पर्क में आने से आरिफ हुआ घायल।
--करीब 12 साल पहले ओम कॉलोनी में निर्माणधीन मकान की छत से गुजर रहे तार के सम्पर्क में आने से शांति देवी मरते-मरते बची।

इतने पास से खतरा
लाइन----नजदीक---नीचे
33केवी---2मीटर----3.7मीटर
11केवी---1.2मीटर--3.7मीटर
132केवी--3मीटर----5मीटर
(निगम के एसई के अनुसार )
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जन सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर कोर्ट आइपीसी और सीआरपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्रसंज्ञान लेकर क्षतिकारक चीज का हटाने का आदेश दे सकती है।
-हेमंत शर्मा, वकील, चूरू

छत से लाइन शिफ्टिंग के मेरे पास सैकड़ों आवेदन आ चुके हैं। यह तो भूखण्ड आवंटन करने वाले और लेने वाले दोनों की गलती है। सैनिक बस्ती की छतों से हाईटेंशन लाइन का खतरा दूर करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए निगम को कॉलोनी का सर्वे करने के आदेश दिए जा चुके हैं।
-डा. केके पाठक, जिला कलक्टर, चूरू

कॉलोनियों से लाइन गुजरी तब मकान नहीं बने हुए थे। यह तो प्लॉट काटने वालों और विद्युत लाइनों के नीचे मकान बनाने वालों की गलती है। खतरा तो है मगर निगम कर भी क्या सकता है। सैनिक बस्ती में समस्या सबसे गंभीर है। कॉलोनी से लाइन शिफ्ट करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा हुआ है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद लाइन शिफ्ट की जाएगी।
-केआर मेहता, अधीक्षण अभियंता, जोधपुर डिस्कॉम

समस्या गंभीर है। शहर की 25 फीसदी आबादी इससे प्रभावित है। लाइन शिङ्क्षफ्टग की पहले एक योजना तो बनी मगर उसका कोई नतीजा नहीं निकला। वैसे भी यह राज्यस्तर का मामला है। समस्या के समाधान के लिए शहरवासियों को मिलकर प्रयास करने की दरकार है। परिषद अपने स्तर पर मदद करने में कोई कमी नहीं रहने देगी।
-रमाकांत ओझा, सभापति, नगर परिषद, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी



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