Friday, August 13, 2010

बारिश ने बरसाए 'रिकॉर्ड'

गत वर्ष से 20 एमएम अधिक बरसात
दस वर्षों के औसत से 46 एमएम कम

चूरू। जिले में इस बार मानसून नित नए रिकॉर्ड कायम कर रहा हैं। गत वर्ष की कुल बारिश का रिकॉर्ड तो सभी ब्लॉकों में टूट चुका है जबकि आधा सावन और पूरा भादो अभी बाकी है। जिले में अब 46 एमएम बरसात और होती है तो इस बार गत दस वर्षों की औसत बारिश का रिकॉर्ड भी टूट जाएगा।
जिले के छहों ब्लॉकों में इस बार अब तक 1 हजार 718 एमएम बारिश हो चुकी है, जो वर्ष 2009 से 119 एमएम, वर्ष 2002 से 745 एमएम तथा वर्ष 2000 से 321 एमएम अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार जिले में जून से सितम्बर के अंत तक मानसून सक्रिय रहता है। इस बार शुरुआत से ही अच्छी बारिश हो रही है।
जिले में बीते चौबीस घंटों के दौरान चूरू व सरदारशहर में झमाझम हुई। सरदारशहर में बुधवार रात करीब 50 एमएम पानी बरसा जबकि चूरू में दोपहर को 4.4 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जिले के शेष इलाकों में कहीं बादल छाए रहे तो कहीं बूंदाबांदी हुई। दिन का अधिकतम तापमान 34.3 व न्यूनतम तापमान 26.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

इस बार की बारिश
ब्लॉक वर्षा
चूरू 296
सरदारशहर 201
रतनगढ़ 318
सुजानगढ़ 236
राजगढ़ 259
तारानगर 408
औसत 286.33
(वर्षा एमएम में, भू- राजस्व शाखा के अनुसार)

गत दस वर्ष की स्थिति
साल -----------वर्षा
2000--------- 233
2001 ---------372
2002 ---------162
2003 ---------414
2004 ---------309
2005 ---------355
2006 ---------297
2007 ---------405
2008 --------506
2009 --------266
तारानगर पर अधिक मेहरबान
जिले में इस बार अब तक बदरा तारानगर ब्लॉक पर सबसे अधिक मेहरबान हुए हैं। यहां पर 408 एमएम बारिश हो चुकी है, जो तारानगर में वर्ष 2000, 02, 03, 06 व 09 के दौरान हुई कुल बारिश से अधिक है। उधर, अब तक सबसे कम 201 एमएम बारिश सरदारशहर ब्लॉक में रिकॉर्ड की गई है।

फसलों में कीट व रोग का प्रकोप
अच्छी बारिश के चलते खेतों में खरीफ फसलें लहलहाने लगी हैं। कीट व रोगों ने भी फसलों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. होशियार सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने गुरुवार को चूरू तहसील के गांव बीनासर व देपालसर आदि के खेतों का दौरा किया तो मंूग,मोठ ग्वार में रोग का प्रकोप पाया गया। हालांकि कीट व रोग अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए फसलों को खास नुकसान नहीं हो रहा है। टीम ने किसानों को कीट व रोगों से बचाव की सलाह दी है। टीम में कृषि अधिकारी भारत भूषण शर्मा, कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ. मुकेश शर्मा, जीएस पुण्डीर आदि शामिल थे।

Wednesday, August 11, 2010

अंग्रेजी की राह में 'कांटे'

महाविद्यालय हलचल :
लोहिया महाविद्यालय में अंग्रेजी का एक भी व्याख्याता नहीं
चूरू. विदेशी भाषा सीख कर कॅरियर बनाने की सोच रहे राजकीय लोहिया महाविद्यालय के सैकड़ों विद्यार्थियों का सपना टूटता नजर आ रहा है। समस्या यह है कि नए सत्र का आगाज हो चुका है मगर महाविद्यालय में अंग्रेजी का एक भी व्याख्याता नहीं है। ऐसे में अनिवार्य अंग्रेजी और अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थियों की राह में 'कांटेÓ दिखाए दे रहे हैं। नए सत्र में अंग्रेजी की कक्षाएं शुरू करने को लेकर महाविद्यालय प्रबंधन की भी चिंता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। उधर, डाइट में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को अंग्रेजी में अधिक पारंगत करने के लिए स्थापित लिंग्वा लैब प्रशिक्षक के अभाव में बंद पड़ी है। यहां पर इस साल मार्च में ही प्रशिक्षक का पद खाली हो गया था। लोहिया महाविद्यालय की लिंग्वा लैब का हाल ऐसा ही है। अंग्रेजी का व्याख्याता उपलब्ध नहीं होने के कारण पिछले साल अक्टूबर से लैब पर ताला लगा हुआ है। महाविद्यालय ने अंग्रेजी व्याख्याता नियुक्त किए जाने का प्रस्ताव आयुक्तालय को भेजा है। प्रस्ताव पर अमल जब होगा तब होगा इस शिक्षा सत्र में तो विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी पढऩे की राह में बाधा ही है।

तीनों पद खाली
जिले के इस एक मात्र मॉडल कॉलेज में अंगे्रजी व्याख्याताओं के कुल तीन पद स्वीकृत हैं, इनमें से एक पद करीब दस साल से खाली पड़ा है जबकि पिछले साल अक्टूबर में उप प्राचार्य पद पर प्रमोशन पाकर व्याख्याता जीएस महला राजकीय रूईया महाविद्यालय रामगढ़ शेखावाटी में तथा एचआर ईसराण राजकीय महाविद्यालय सरदारशहर चले गए। तब से लोहिया महाविद्यालय में अंग्रेजी पढ़ाने वाला कोई नहीं है। इससे विद्यार्थी अंग्रेजी पढऩे से वंचित हो रहे हैं।

लैब पर जड़ा ताला
महाविद्यालय में करीब चार वर्ष पूर्व स्थापित लिंग्वा लैब पर वर्तमान में स्टाफ के अभाव में ताला लगा हुआ है। लैब में माइक्रोफोन, हैडफोन, ऑडियो कैसेट आदि उपकरण धूल फांक रहे हैं। महाविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थियों की संख्या तकरीबन पांच सौ के आस-पास है। साथ ही तीनों संकायों में अनिवार्य विषय के रूप में अंग्रेजी चुनने वाले विद्यार्थी भी सैकड़ों में हैं।

डाइट में लिंग्वा लैब को प्रशिक्षक का इंतजार
डाइट में राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों में अंग्रेजी विषय पढ़ाने का स्तर सुधारने के उद्देश्य से नवम्बर 2008 में लिंग्वा लैब की स्थापना की गई। जिले के एक हजार 460 प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों में से अब तक180 को ही प्रशिक्षित किया गया है। 24 शिक्षकों को एक साथ प्रशिक्षण देने की क्षमता वाली यह लैब 23 मार्च 2010 के बाद से बंद पड़ी है। यहां पर प्रशिक्षक के रूप में तैनात सेवानिवृत अंग्रेजी व्याख्याता ओमप्रकाश तंवर व हीरालाल महर्षि बीएड महाविद्यालयों में चले गए। तब से डाइट में अंग्रेजी का कोई प्रशिक्षण शिविर नहीं लगाया जा रहा है।

क्या है लिंग्वा लैब
लिंग्वा लैब का नाम लैंगवेज से पड़ा है। लैब का उद्देश्य विद्यार्थियों का उच्चारण सुधार कर अंग्रेजी बोलने की झिझक दूर करना है। लैब में विद्यार्थियों को अंगे्रजी की विशेष अभ्यास पुस्तिका से देखकर अंग्रेजी में अपनी भाषा टेप रिकॉर्डर में रिकॉर्ड करनी पड़ती है, जिसे हैडफोन के जरिए सुनने पर एक विशेष मशीन की मदद से उच्चारण आसानी से सुधारा जा सकता है। यह प्रक्रिया इतनी सरल है कि इससे कम समय में फटाफट अंग्रेजी बोलनी सीखी जा सकती है।

&&
अंग्रेजी का एक भी व्याख्याता नहीं है। इस समस्या की ओर आयुक्तालय का ध्यान दिलाया जा चुका है। जल्द ही व्याख्याताओं की तबादला सूची जारी होने वाली है। यहां के खाली पद भी भरे जाने की उम्मीद है। किसी कारणवश यदि ऐसा नहीं हुआ तो वैकल्पिक व्यवस्था से पढ़ाएंगे।
-एमडी गोरा, प्राचार्य, लोहिया महाविद्यालय, चूरू
लैब से जिलेभर के शिक्षक लाभान्वित हो सकते हैं। फिलहाल प्रशिक्षक के अभाव में लैब बंद कर रखी है। सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से प्रशिक्षक तैनात किए जाने हैं।
-सत्यनारायण स्वामी, प्रभारी, लिंग्वा लैब, डाइट, चूरू

प्रवेश तो दे देंगे, बैठाएंगे कहां?

महाविद्यालय हलचल :
जिले के मॉडल कॉलेज में कमरों का टोटा, सेक्शन बढऩे से बढ़ी परेशानी
चूरू. महाविद्यालयों में हाल ही सीटें बढ़ाए जाने से भले ही विद्यार्थी खुशी से फूले नहीं समा रहे हों मगर चूरू के राजकीय लोहिया महाविद्यालय प्रबंधन के लिए बढ़ी हुई सीटें कोढ़ में खाज साबित हो रही हैं। दरअसल जिले के सबसे बड़े और मॉडल कॉलेज का दर्जा प्राप्त इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों को बैठाने के लिए पर्याप्त कक्षा कक्ष नहीं हैं। लम्बे समय से पर्याप्त कक्षा कक्षों की समस्या से जूझ रहे लोहिया महाविद्यालय में इस बार कला संकाय में 160 व वाणिज्य संकाय में 80 सीटें बढऩे से विद्यार्थियों को बैठाने को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। फिलहाल महाविद्यालय में कक्षाएं लगाने के लिए आवश्यकता की तुलना में कम कक्ष ही उपलब्ध हैं। महाविद्यालय में तीन संकायों के यूजी व पीजी के विद्यार्थियों की संख्या चार हजार के आस-पास है। वाणिज्य संकाय की कक्षाएं सुबह 8 बजे, कला संकाय की 9 बजे व विज्ञान संकाय की 10 बजे शुरू होती हैं। दोपहर 12 बजे बाद तो महाविद्यालय में विकट स्थिति पैदा हो जाती है। विद्यार्थियों को बैठने के लिए कमरे खाली नहीं मिलते।

कितनी है आवश्यकता
महाविद्यालय में यूजी कक्षाओं के कुल चालीस सेक्शन हैं। इनमें तीनों संकाय के प्रथम वर्ष के 18, द्वितीय वर्ष के 12, तृतीय वर्ष के 10 सेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा एमकॉम में एबीएसटी, ईएफएम, बीएडएम, एमए में राजनीतिक विज्ञान व इतिहास और एएससी में केमिस्ट्री, बॉटनी और जूलॉजी के कक्षाओं के लिए कम से कम 16 कक्षा कक्षों की आवश्यकता है। महाविद्यालय को प्रभावी शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए 56 कक्षा कक्षों की दरकार है।

क्या है उपलब्धता

महाविद्यालय की ऊपरी व निचली मंजिल पर कुल 87 कमरें बने हुए हैं। इनमें से प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, स्टाफ, प्रयोगशालाएं, लेखा शाखा, स्टोर, नॉलेज सेंटर, पुस्तकालय, कॉमन रूम, कम्प्यूटर फेसिलिटी सेंटर, एनएसएस व एनसीसी आदि के लिए पचास से अधिक कमरे आवंटित हैं। कक्षा कक्ष के रूप में 35-40 कमरे काम लिए जा रहे हैं। महाविद्यालय के छह कमरों में विधि महाविद्यालय संचालित है।

क्या है समाधान
महाविद्यालय में कक्षा कक्षों की संख्या बढ़ाने के लिए किसी संकाय का अलग से ब्लॉक बनवाने की यूजीसी से मांग की जा सकती है। इसके अलावा महाविद्यालय के छात्रावास में वैकल्पिक व्यवस्था भी की जा सकती है। जानकारी के अनुसार महाविद्यालय के पास स्थित छात्रावास में कुल 128 कमरे हैं। विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावास का आधा परिसर ही काम आ रहा है। छात्रावास में कम छात्र संख्या वाली कक्षाएं लगाए जाने पर भी विचार किया जा सकता है।

&&
महाविद्यालय ने निश्चित रूप से कक्षा कक्षों की कमी है। फिर भी शिक्षण व्यवस्था किसी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दी जा रही है। इस बार आवश्यकता पड़ी तो पोर्च व गैलेरी में कक्षाएं संचालित कर लेंगे। इसके अलावा छात्रावास के खाली कमरे काम में ले लेंगे।
-एमडी गोरा, प्राचार्य, लोहिया महाविद्यालय, चूरू

&&
महाविद्यालय में छात्र संख्या चार हजार के आस-पास रहती है। मगर कक्षा कक्षों का हमेशा से अभाव ही रहा है। छात्रावास के खाली कमरों को काम लिया जा सकता है। हालांकि छात्रावास के कमरे अपेक्षाकृत छोटे हैं मगर उनमें पीजी की कक्षाएं आसानी से संचालित की जा सकती हैं।
-भंवर सिंह सामौर, पूर्व प्राचार्य, लोहिया महाविद्यालय,
२0 जुलाई 2010

Wednesday, August 4, 2010

पढ़ाई का पीटे 'ढोल', गुणवत्ता में 'गोल'

चूरू. जिले के सरकारी विद्यालय बच्चों को पढ़ाने का भले ही 'ढोल' पीट रहे हो मगर पढ़ाई से गुणवत्ता 'गोल' होती जा रही गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पकड़ नहीं बना पा रहे हैं। विद्यालयों की यह कड़वी सच्चाई क्वालिटी इंश्योरेंश परीक्षण में सामने आई है। जिलेभर के एक हजार 55 राजकीय उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह सात के 32 हजार 146 विद्यार्थियों की इस साल दस से बारह जनवरी को विशेष परीक्षा हुई, जिसमें विद्यार्थियों से गणित, अंग्रेजी व विज्ञान विषय के प्रश्न हल करवाए गए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार परीक्षण के परिणामों को हाल ही अंतिम रूप दिया गया है। जिले को 59 प्रतिशत अंकों के साथ 'सीÓ ग्रेड में रखा गया है। जिलेभर के 86 विद्यालय तो उत्तीर्ण होने योग्य अंक भी हासिल नहीं कर पाए हैं। इन्हें आठ से 35 प्रतिशत तक अंक प्राप्त हुए हैं। 150 विद्यालयों को डी ग्रेड मिली हैं। महज 123 विद्यालयों को 8 0 या इससे अधिक प्रतिशत अंक हासिल हुए हैं। जिले में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सुजानगढ़ के गांव सारोठिया का राजकीय माध्यमिक विद्यालय तथा सरदारशहर के गांव रायपुरिया का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर रहे। तारानगर के गांव राजपुरा का राजकीय माध्यमिक विद्यालय फिसड्डी रहा।
माध्यमिक स्कूल भी फेल
पढ़ाई के मामले में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय अधिक फिसड्डी रहे हैं मगर राजकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति भी अच्छी नहीं कही जा सकती। जिले में एक दर्जन से अधिक माध्यमिक स्तर के विद्यालय परीक्षण में खरे नहीं उतर पाए हैं। सुुजानगढ़ में गांव शोभासर, छापर, जैतासर, ईंयारा, चूरू में आसलखेड़ी, खींवासर, सिरसला, बालरासर आथुना, हरिया देवी दूधवा, राजगढ़ में भोजाण, पहाड़सर, जसवंतपुरा, बैरासर छोटा, ददरेवा, तारानगर में धीरवास बड़ा, राजुपरा, तारानगर, कोहिणा, सरदारशहर में दूलरासर तथा रतनगढ़ में परसनेऊ, राजलदेसर, जांदवा, लोहा व भुखरेड़ी में स्थित माध्यमिक स्तर के विद्यालय को निम्न ग्रेड मिली है।

ऐसे हुई परीक्षा
एसएसए के तहत क्वालिटी इंश्योरेंस परीक्षण हुआ। राजस्थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद जयपुर के स्तर पर प्रश्न तैयार कर विद्यालयों में पहुंचाए गए। बेरोजगार प्रशिक्षक अध्यापक व कार्यरत सरकारी शिक्षकों ने विद्यालयों में जाकर कक्षा छह व सात के विद्यार्थियों की परीक्षा ली। कॉपियों की जांच ब्लॉक पर बीआरसीएफ कार्यालय में अनुभवी शिक्षकों से करवाई गई।

किसके कितने फेल
ब्लॉक स्कूल
सुजानगढ़ 9
चूरू 27
राजगढ़ 15
तारानगर 11
सरदारशहर 10
रतनगढ़ 14

यह रहा पैमाना
ग्रेड----- प्राप्तांक
ए----- 80 या इससे अधिक प्रतिशत
बी----- 65 से 79 प्रतिशत
सी----- 50 से 64 प्रतिशत
डी----- 36 से 49 प्रतिशत
ई----- 36 प्रतिशत से नीचे
--
क्वालिटी इंश्योरेंश परीक्षण के जरिए जिलेभर के एक हजार से अधिक स्कूलों के 32 हजार 146 विद्यार्थी की परीक्षा लेकर गुणवत्ता परखी गई। परीक्षण के परिणाम को हाल ही अंतिम रूप दिया गया है। जिले को सी ग्रेड मिली है। न्यून परिणाम वाले विद्यालय में जनवरी व फरवरी में अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी।
-जगदीश प्रसाद गोदारा, कार्यक्रम सहायक, एसएसए चूरू

हिसाब-किताब

विजेट आपके ब्लॉग पर

ब्लॉग पर अपनी भाषा चुनें