Wednesday, October 21, 2009

बसों में बरसा धन

दिल्ली व जयपुर रूट पर सबसे अधिक कमाई
चूरू, 21 अक्टूबर। घाटे से जूझ रहे चूरू आगार की बसों में दीपावली पर जमकर धन बरसा है। बसों में यात्रीभार बढऩे का सिलसिला धनतेरस से शुरू हुआ और भैया दूज तक बना रहा। त्योहारी सीजन में आगार को हर रूट पर बसों से कमाई हुई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 15 से 19 अक्टूबर तक बसों का यात्रीभार औसत 71 फीसदी रहा तथा 25 लाख 77 हजार 536 रुपए की आय प्राप्त हुई है। इस दौरान सबसे अधिक कमाई 5 लाख 73 हजार 193 रुपए छोटी दिवाली के दिन हुई। पांचों दिनों में सबसे कम आय रामनवमी को 3 लाख 25 हजार 447 रुपए की हुई।इस दिन बसों का यात्रीभार 63 फीसदी रहा जबकि सामान्य दिनों में आगार की बसों का यात्रीभार औसत 60-62 फीसदी रहता है। रोडवेज सूत्रों का मानना है कि अंचल में ब्रॉडगेज का कार्य चलने से बंद हुई रेल सेवा के कारण भी बसों में यात्री भार ज्यादा रहा।राजधानी वाले रूट कमाऊआगार को सबसे अधिक कमाई राजधानी से जोडऩे वाले रूटों पर हुई है। इनमें चूरू-जयपुर वाया सीकर तथा चूरू-दिल्ली वाया झुंझुनूं रूट शामिल है। बढ़ते यात्रीभार को देखते हुए आगार प्रबंधन ने जयपुर रूट पर एक तथा दिल्ली रूट पर तीन अतिरिक्त बसें भी दौड़ाई। उधर, सरदारशहर रूट पर बसें डीजल व रखरखाव का खर्च भी नहीं निकाल पाई।आमान परिवर्तन से फायदा सादुलपुर-रतनगढ़ के बीच हो रहे आमान परिवर्तन के चलते ट्रेनें बंद होने का फायदा रोडवेज बसों को हुआ है। यही कारण है कि गत पांच दिवसीय दीपोत्सव की तुलना में इस बार बसों की कुल आय में करीब तीस हजार रुपए तथा यात्रीभार में 2.6 फीसदी का इजाफा हुआ है। गत वर्ष 26 से 30 अक्टूबर तक बसों का यात्रीभार औसत 68.4 प्रतिशत रहा। ----बसों से अच्छी आय हुई है। चार स्थानों पर चैक पोस्ट भी स्थापित की गई थी। आमान परिवर्तन के चलते ट्रेनें बंद होने के कारण आय में गत वर्ष की तुलना में इजाफा हुआ है।-बेनीप्रसाद शर्मा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज आगार, चूरू
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:


1 टिप्पणियाँ:

RAJNISH PARIHAR said...
चलो इस आमान परिवर्तन के बहाने ही सही,रोडवेज को कुछ फायदा तो हुआ....!शायद कुछ हालात सुधर जाए...
October 22, 2009 3:25 PM

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