Thursday, January 7, 2010

मिट्टी व पानी की सेहत की होगी जांच

प्रदेश में खुलेंगी सत्ताइस प्रयोगशालाएं
12 जिलों में 15 स्थान चिह्नित,
बारह होंगी भ्रमणशील,
अप्रेल में शुरू होगी जांच
चूरू, 7 जनवरी। प्रदेश के किसानों को खेत की मिट्टी, पानी व उर्वरकता की जांच के लिए अब मिलों तक का सफर तय नहीं करना पड़ेगा। किसानों की इस समस्या का समाधान मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरकता प्रबंध की राष्ट्रीय परियोजना के प्रथम चरण के तहत प्रदेशभर में स्थापित होने वाली 27 प्रयोगशालाओं के माध्यम से होगा। इनमें प्रदेश के बारह जिलों में चौदह स्थानों पर मृदा परीक्षण व एक स्थान पर उर्वरक परीक्षण की स्थायी तथा प्रदेशभर में मृदा परीक्षण की बारह भ्रमणशील प्रयोगशालाएं शामिल हैं। स्थायी प्रयोगशालाओं के स्थान का चयन करने में सिंचित क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार समस्त पन्द्रह स्थायी प्रयोगशालाओं में अप्रेल 10 से जांच कार्य शुरू होने की उम्मीद है। प्रतापगढ़, सीकर, अजमेर, नागौर, बाडमेर, करौली, बीकानेर, जालौर व पाली में खुलने वाली प्रयोगशालाओं के भवन निर्माण की निविदाएं भी निकाली जा चुकी हैं। शेष प्रयोगशालाओं के लिए भूमि तलाश की जा रही है।—-निजी सहभागिता से संचालनमृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का संचालन निजी सहभागिता से होगा। सरकार की ओर से किसी एनजीओ या निजी कम्पनी को भूखण्ड आवंटन के साथ ही उस पर भवन निर्माण करवाकर प्रयोगशाला के आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। संचालनकर्ता को प्रयोगशाला में केवल अपना स्टाफ तैनात करना होगा। इसके अलावा कोटा में खुलने वाली उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला के संचालन का जिम्मा खुद सरकार के पास रहेगा।—-यह होगी सुविधामृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं में खेत की मिट्टी व पानी की सम्पर्ण जांच हो सकेगी। इनमें मिट्टी के मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्व तथा पानी की क्षारियता, लवणीयता, पीएच व ईसी समेत कई जाचें शामिल हैं। जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी दिया जाएगा।—-फैक्ट फाइलआधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में कृषि जोतों की संख्या 58।2 लाख है। खेतों की मिट्टी व पानी आदि की जांच के लिए विभिन्न जिलों में 33 सरकारी व पांच निजी प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।
इन्हें मिली सौगात
जिला-----चयनित स्थान
चूरू-----साण्डवा
सीकर-----लक्ष्मणगढ़
सीकर-----श्रीमाधोपुर
प्रतापगढ़-----प्रतापगढ़
अजमेर-----केकड़ी
नागौर-----कुचामन
नागौर-----लाडनूं
बाडमेर----गुढ़ामलानी
करौली----हिण्डौन
बीकानेर----डूंगरगढ़
जालौर----सांचौर
पाली-----जैतारण
कोटा----- सांगोद
टोंक----- दूनी
कोटा-----कोटा
(कोटा में उर्वरक तथा शेष स्थानों पर मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं खुलेंगी)
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प्रदेश भर में सभी 15 स्थायी प्रयोगशालाओं में अप्रेल से जांच शुरू हो जाएगी। इनमें दस प्रयोगशालाओं के भवन निर्माण के टेण्डर हो चुके हैं। शेष के लिए भूमि आंवटन की कार्यवाही चल रही है।
-दयालसिंह चौधरी, संयुक्त निदेशक कृषि (गुण नियंत्रण), जयपुर
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जिले में मृदा परीक्षण की प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए सुजानगढ़ तहसील के गांव साण्डवा को चिह्नित किया है। इससे जिले के किसानों को खेत की मिट्टी व पानी की जांच के लिए जिला मुख्यालय पर स्थित एकमात्र प्रयोगशाला पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साण्डवा में प्रयोगशाला के लिए भूमि की तलाश शुरू कर दी है।
-भंवर सिंह राठौड़, उप निदेशक कृषि विभाग, चूरू

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