Sunday, November 14, 2010

फाइलों में अटके सामुदायिक कुण्ड

कुण्ड निर्माण में लाखों का मिलता है अनुदान,
12 का लक्ष्य, 7 की चयन प्रक्रिया जारी
चूरू। सामूहिक प्रयासों से बड़े कुण्ड बनाकर धोरों को हरा-भरा करने की सामुदायिक कुण्ड निर्माण योजना दो साल से फाइलों में अटकी हुई है। योजना में लाखों रुपए के अनुदान का प्रावधान होने के बावजूद जिले में एक भी कुण्ड नहीं बन पाया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में 12 कुण्ड बनाए जाने का लक्ष्य है, परन्तु अभी तक सात ही समूहों ने आवेदन किया है। फिलहाल इन्हीं समूहों के आवेदनों को भी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। ऐसे में इस बार तय लक्ष्य निर्धारित समय में हासिल होने की सोचना बेमानी होगी।
योजना के तहत कम से कम पांच किसानों को मिलकर सामुदायिक कुण्ड निर्माण के लिए आवेदन करना होता है। 50 मीटर लम्बा व इतना ही चौड़ा और तीन मीटर गहरा कुण्ड बनाने पर राज्य सरकार की ओर से साढ़े सात लाख रुपए का अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है। शेष राशि किसान समूह को मजदूरी जैसे मिट्टी खुदाई करके वहन करनी होती है।

इस साल बदले प्रावधान
विभागीय जानकारी के अनुसार पहले वर्ष योजना के तहत अनुदान की राशि तथा कुण्ड की लम्बाई-चौड़ाई दोगुनी थी। जिले की भौगोलिक स्थिति व बारिश की कमी की वजह से इतना बड़ा कुण्ड बन पाना संभव नहीं हुआ। ऐसे में इस वर्ष 12 अक्टूबर को योजना की अनुदान राशि व कुण्ड की साइज में घटाई गई है।

इन्होंने किया आवेदन
कुण्ड निर्माण के लिए गांव परसनेऊ के रामरख मेघवाल, दांदू के जगदीश मेघवाल, पृथ्वीराज मेघवाल व औंकार मेघवाल, बास जैसे का के चूनाराम जाट, ढाणी रणवा के भंवर लाल तथा खण्डवा के अम्मीलाल बुरड़क ने आवेदन किया है।
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चालू वित्तीय वर्ष के दौरान जिले में 12 कुण्ड बनाए जाने हैं। फिलहाल सात आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदन के आधार पर किसानों का चयन किया जा रहा है। निर्धारित समय में कुण्ड निर्माण का लक्ष्य प्राप्त करने के पूरे प्रयास कर रहे हैं।
-डॉ. होशियार सिंह, उप निदेशक, कृषि विभाग, चूरू

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