Sunday, December 5, 2010

'खाकी' के सामने बेबस है 'करंट'

[ चौकी-थानों पर बढ़ता बकाया ] : बिल के नाम पर ठेंगा
चूरू.जिले में 'खाकी' का रौब विद्युत निगम पर भारी पड़ रहा है। किसी दिन बिजली की कटौती हो जाए तो 'खाकियों' का तत्काल टेलीफोन पहुंच जाता है, लेकिन बिल जमा करवाने की बारी हो तो खाकी 'ठेंगा' दिखाने से भी नहीं चूकते। विद्युत निगम के खिलाफ होने वाले आन्दोलन एवं धरने प्रदर्शन के दौरान पुलिस महकमे की जरूरत पडऩे के कारण विद्युत निगम के अभियंता भी इनके सामने बेबस नजर आते हैं। हालत यह है कि चूरू जिले व लाडनूं के 28थानों एवं चौकियों में फूंकी जाने वाली बिजली के बिलों के पेटे हर साल औसतन एक लाख रुपए बकाया हो जाता है। बिलों की बकाया राशि सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही हैं, वहीं विद्युत निगम इनके कनेक्शन काटने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है।
एक लाख हो गए दस लाख
सूचना का अधिकार कानून के तहत खुलासा हुआ है कि पुलिस महकमा बिजली के बिल चुकाने के प्रति गम्भीर नहीं है। महकमे पर जिले में बिजली बिलों के पेटे 2001 में करीब एक लाख 21 हजार रुपए बकाया थे। लेकिन बिल जमा नहीं करवाने से यह राशि अगस्त 2010 में बढ़कर 10 लाख 19 हजार के पार पहुंच गई।
आधा दर्जन के हालात खराब
जिले के आधा दर्जन थानों एवं चौकियों के बिलों के आंकड़े खुलासा करते हैं कि दस साल में अधिकांशतया इनका बिल नहीं चुकाया गया। राजगढ़ एवं छापर पुलिस थाने एवं साण्डवा पुलिस चौकी पर बकाया का आंकड़ा करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपए को पार कर गया है। राजगढ़ चौकी पर एक लाख 27 हजार 178 रुपए बकाया होने पर विद्युत कनेक्शन काट दिया गया। हालांकि बिल जमा करवाने के मामले में सभी जगह हालात एक जैसे नहीं है। सादुलपुर ग्रामीण, चूरू ग्रामीण और चूरू शहर पुलिस थाना ऐसे भी हैं, जिन पर बिजली बिल पेटे एक रुपया भी बकाया नहीं है।
जानते ही नहीं बिल चुकाना
थाना/चौकी-2001-----२०१०
साण्डवा---6703.76--1,63,481.45
राजगढ़----1541----1,61,259.64
छापर-----13609---1,49,781.20
विभाग का दावा, पुराना है बकाया
वर्तमान में बिजली के बिलों का नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा है। पांच-सात साल पूर्व के कुछ बिल बकाया हैं। जिनका भुगतान करवाने का प्रयास कर रहे हंै। बजट के लिए मुख्यालय को लिखा गया है।
- अनिल कयाल, एएसपी, चूरू
क्या करें, पुलिसवाले जो हैं
थानों व चौकियों पर बिजली के बिलों की राशि लगातार बढ़ती जा रही है। बकाया वसूली के लिए बार-बार नोटिस जारी करते हैं। पुलिस विभाग के अधिकारी सुनवाई नहीं करते। आम उपभोक्ता का तो शीघ्र ही कनेक्शन काट देते हैं, लेकिन पुलिस के रौब के चलते कोई सख्त कदम नहीं उठा पाते हैं। गत एक दशक के दस लाख रुपए से अधिक बकाया हैं।
-के.एल. घुघरवाल, अधीक्षण अभियंता, जोधपुर विद्युत वितरण निगम, चूरू

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