Wednesday, September 1, 2010

घर का बीज पडोसी रहे सींच

चूरू। घर का जोगी जोगणा आन गांव का सिद्ध वाली कहावत चूरू जिले के गांव गुडाण निवासी प्रगतिशील किसान महावीर सिंह आर्य पर सटीक बैठ रही है। किसान आर्य की ओर से तैयार की गई गेहूं की नई किस्म 'महा किसान क्रांति' व 'महा किसान वरदान' को प्रदेश में भले ही पहचान नहीं मिल पाई हो, मगर पडोसी राज्य उत्तर-प्रदेश व हरियाणा के किसानों के लिए ये किस्में वरदान साबित हो रही हैं। किसान इन किस्मों के बीजों की बुवाई कर मालामाल हो रहे हैं। यूपी के मुजफ्फनगर, एलम, बागपत, कासिमपुर, खेडी, निरपुदा व सिसोली तथा हरियाणा के भिवानी, लुहारू, बहल व दादरी इलाके के सैकडों खेत क्रांति व वरदान किस्म से लहलहा चुके हैं।
इस बार रबी के सीजन में उत्तर प्रदेश के करीब 250 तथा हरियाणा के 20 किसानों ने इन किस्म के गेहूं की बम्पर पैदावार हासिल की है। रबी की फसल के आगामी सीजन में उत्तर प्रदेश में दोनों किस्में काम लेने वाले किसानों की संख्या दोगुनी होने का अनुमान है। जानकारी के अनुसार आर्य की ओर से तैयार गेहूं की दोनों ही किस्म यूपी की स्थानीय किस्म पीवीडब्ल्यू 377 व यूपी 2338 किस्म तथा हरियाणा की 306 किस्म से पैदावार समेत चारा व रोग प्रतिरोधक क्षमता में अघिक उन्नत साबित हो रही है। इससे हरियाणा में किसान 35 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की तुलना में 50 से 60 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तथा यूपी के किसान 45-50 क्विंटल प्रति हैक्टेयर के मुकाबले 60 से 70 क्विंटल प्रति हैक्टेयर पैदावार प्राप्त कर रहे हैं।

पड़ोसी राज्यों के खेतों में यूं पहुंचा बीज
वर्ष 2007-08 में झुंझुनूं जिले के पिलानी में लगे किसान मेले में महावीर सिंह आर्य ने दोनों ही किस्म के बीजों की प्रदर्शनी लगाई थी। मेले में आए यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के गांव एलम के किसान सुनील ने आर्य से बीस किलोग्राम बीज खरीदे थे। सुनील में यूपी में दो बीघा में बुवाई की और पहली बार नौ क्विंटल पैदावार हासिल की। इससे कम समय में ही दोनों किस्मों ने मुजफ्फर नगर समेत आस-पास के कई जिलों में पहचान बना ली। इसी प्रकार वर्ष 2008-09 में हरियाणा के भिवानी जिले के दिगावा में एनएचआरडीएफ की ओर से लगाए गए मेले में आर्य ने दोनों ही किस्मों की प्रदर्शनी लगाई। हरियाणा के कई किसानों ने आर्य से इनके बीज खरीदे। इसके बाद दोनों ही राज्यों के किसान आर्य से लगातार सम्पर्क में रहे और समय-समय पर गुडाण आकर बीज प्राप्त किए।

हम दिलाएंगे पहचान
चूरू के किसान की ओर से तैयार गेहूं की नई किस्मों का यूपी व हरियाणा में बडे पैमाने पर उपयोग होना हम सब के लिए गर्व की बात है। प्रदेश के किसानों का इनसे लाभान्वित नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में पहले जानकारी नहीं थी। आपने इस ओर ध्यान दिलाया है। गेहूं की इन किस्मों की प्रदेशभर में भी पहचान हो, इसके लिए उच्च अघिकारियों से चर्चा की जाएगी।
-होशियार सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग, चूरू

दिनोंदिन बढती मांग
गेहूं की उन्नत किस्में तैयार करने में बीते दो दशक से काम रहा हूं। महा किसान क्रांति व महा किसान वरदान नामक किस्म सबसे अघिक सफल रही हैं। दोनों ही किस्मों के पेटेंट की प्रक्रिया चल रही है। इसकेे लिए राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान अहमदाबाद की टीम भी कई बार गुडाण आ चुकी है। हरियाणा व यूपी में दोनों किस्मों की मांग दिनोंदिन बढती जा रही है।
-महावीर सिंह आर्य, किसान, गांव गुडाण, राजगढ (चूरू)

500 किसान बोएंगे
ढाई वर्ष पूर्व मुजफ्फनगर के किसान सुनील ने राजस्थान के किसान महावीर सिंह आर्य से लाई दो नई किस्मों की जानकारी दी थी। दोनों ही किस्म हमारी स्थानीय किस्मों से अघिक पैदावार देती हैं। पिछले कई साल से मैं दोनों को काम में ले रहा हूं। इस बार हमारे यहां के करीब पांच सौ किसान क्रांति व वरदान किस्म के गेहूं की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं।
-नरेन्द्र सिंह (किसान), निरपुदा, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश

पर्याप्त बीज का अभाव
गेहूं की महा किसान क्रांति व महा किसान वरदान किस्म का उपयोग करने से हमें स्थानीय किस्म से 15-25 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक अघिक पैदावार प्राप्त होती है। गुडाण निवासी प्रगतिशील किसान आर्य से एक किसान मेले में बीज खरीदा था। हरियाणा के कई जिलों में इन किस्मों की मांग बढ रही है, मगर आर्य पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।
-हीरानंद श्योराण (किसान), गांव पहाडी, जिला भिवानी, हरियाणा

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