Thursday, March 11, 2010

जाळों ने रोका पानी का प्रवाह

अब दो दिन से मिलेगा पानी, पर्याप्त आपूर्ति भी नहीं संभव
चूरू, 11 मार्च। गर्मी अभी बढऩी शुरू ही हुई है कि पीने के पानी की कमी से लोगों के कण्ठ सूखने लगे हैं। जलदाय विभाग ने चूरू में अब 48 घंटे में जलापूर्ति शुरू कर दी है। उपलब्ध मीठे पानी की भी स्थिति यह है कि आने वाले दिनों में इतना भी पानी आपूर्ति नहीं किया जा सकेगा जितना अब तक किया जा रहा था। यानि जलापूर्ति का अंतराल भी बढ़ गया और पानी की उपलब्ध मात्रा भी घट गई। ऐसा प्रकृति प्रदत्त बरसात की कमी से तो है ही इसके अतिरिक्त विभागीय अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही बरते जाने से भी है।
जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ के गांव गंधेली से मसीता वाली हैड के बीच रावतसर वितरिका तथा गंधेली से कर्मसाना व ललानिया कैनाल की लम्बे समय से सफाई नहीं की गई है। इससे कैनाल और वितरिकाओं में पेड़-पौधे उग आए हंै। जाळे व मिट्टी (गाद) जमा होने से जल प्रवाह क्षमता प्रभावित हो गई है। हालात यह है कि एक दिन में पचास क्यूसेक के बजाय आठ-नौ क्यूसेक पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है।आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह सब विभागीय क्षेत्राधिकार की लड़ाई में लम्बित रहा। वितरिकाएं सिंचाई विभाग क्षेत्राधिकार में है जबकि कैनाल जलदाय विभाग के क्षेत्राधिकार में आती है। इनमें सामान्य तौर पर प्रति दो माह में सफाईकी जानी चाहिए थी। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस ओर उच्चाधिकारियों को ध्यान दिलाए जाने के बाद भी कतई गंभीरता से नहीं लिया गया।
मोटे तौर पर देखा जाए तो 'बाड़ खेत ने खायÓ वाली कहावत आपणी योजना पर सटीक बैठ रही है। गर्मियों की शुरुआत में ही योजना की जलापूर्ति व्यवस्था गड़बड़ा गई है। चूरू-बिसाऊ परियोजना के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र को दो दिन में एक बार मीठा पानी दिया जाने लगा है। निकट भविष्य में अन्य क्षेत्रों की जलापूर्ति में भी कटौती की जा सकती है। इंदिरा गांधी नहर से जुड़ी वितरिकाओं व कैनाल में घटते जल प्रवाह के चलते जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में गर्मियों में मीठे पानी की भंयकर किल्लत रहने की आशंका पैदा हो गई है।

45 की बजाय 10 क्यूसेक
जिले में मीठे पानी की जलापूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए इंदिरा गांधी नहर से रोजाना 45 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। जबकि इन दिनों महज 10 क्यूसेक पानी मिल पा रहा है। हालांकि नहर से पानी तो छोड़ा जा रहा है, लेकिन वितरिका व कैनाल की सफाई के अभाव में पानी पहुंच नहीं पा रहा है।

चूरू-बिसाऊ परियोजना
सबसे अधिक परेशानी चूरू-बिसाऊ परियोजना से जुड़े उपभोक्ताओं को होगी। परियोजना को रोजाना 18 हजार किलोलीटर पानी की तुलना में 7 हजार किलोलीटर पानी मिल रहा है। वह भी एक दिन के अंतराल से आपूर्ति किया जा रहा है। गत गर्मियों में रोजाना 15 हजार किलोलीटर से अधिक पानी मिला था।
सन्तोष गुप्ता/विश्वनाथ सैनी

1 comment:

  1. उफ़ ये गर्मी और पानी की कमी...!आखिर समय रहते सब कुछ दुरुस्त क्यूँ नहीं किया जाता..

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