Wednesday, May 26, 2010

पढ़बा सूं रैग्या टाबर

सर्वे में हुआ खुलासा, सर्वाधिक सरदारशहर में
नए शिक्षा सत्र से जोडऩे के होंगे खास प्रयास

विश्वनाथ सैनी @ चूरू
जिले में करीब सात हजार बच्चे शिक्षा से महरूम हैं। इनमें अधिकांश ने तो स्कूल की दहलीज पर कभी कदम ही नहीं रखा जबकि शेष ने बीच में पढ़ाई छोडऩे के बाद फिर कभी स्कूल की सुध नहीं ली। सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से हाल ही करवाए गए चाइल्ड ट्रेकिंग सर्वे में यह आंकड़ा सामने आया है।
सर्वे के दौरान बच्चे पढऩे-लिखने की उम्र में घरेलू कामों में जुटे अथवा गली-मोहल्लों में मटरगस्ती करते मिले। परिवार की माली हालत खराब होने के कारण कई बच्चे कहीं ना कहीं मजदूरी करते भी पाए गए। सर्वे में इन बच्चों को अनामांकित व ड्रापआउट के रूप में चिह्नित किया गया है। अब नए शिक्षा सत्र में इन बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोडऩे के विशेष प्रयास किए जाएंगे।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिलेभर में कुल 6 हजार 956 बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। छह से चौदह साल तक के इन बच्चों में से अधिकांश कभी स्कूल नहीं गए। शेष ने स्कूल में कभी ना कभी दाखिला तो लिया लेकिन आठवीं कक्षा से पूर्व ही पढ़ाई छोड़ दी।
शिक्षकों ने विद्यालय रिकॉर्ड तथा घर-घर जाकर बच्चों का सर्वे किया है। पढ़ाई से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रखने वाले सबसे अधिक 1 हजार 795 बच्चे सरदारशहर ब्लॉक तथा सबसे कम 276 बच्चे सादुलपुर ब्लॉक में सामने आए हैं।

नए सत्र मे पढ़ाएंगे
सर्वे में चिह्नित किए गए बच्चों का जुलाई से शुरू हो रहे प्रवेशोत्सव के दौरान स्कूलों में दाखिला करवाने का प्रयास किया जाएगा। अभिभावकों को बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित भी करेंगे। इसके अलावा आवासीय ब्रिज कोर्स, गैर आवासीय ब्रिज कोर्स, शिक्षा मित्र केन्द्र, कस्तूरबा गांधी विद्यालय आदि में भी बच्चों के लिए पढऩे-लिखने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

कहां कितने वंचित
ब्लॉक बच्चे
तारानगर- 1025
सरदारशहर- 1795
राजगढ़- 276
चूरू- 670
रतनगढ़- 1680
सुजानगढ़- 1510
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16 से 21 मई तक हुए सर्वे के दौरान जिले में करीब सात हजार बच्चे अनामांकित व ड्रापआउट हैं। सर्वे की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है। नए शिक्षा सत्र में इन बच्चों को पढ़ाया जाएगा।
-मोहन लाल त्रिवेदी, प्रभारी अधिकारी, वैकल्पिक शिक्षा (एसएसए) चूरू

2 comments:

  1. अनिवार्य-शिक्षा वाले बिल से कुछ फायदा होगा क्या इस मामले में ???

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  2. अनिवार्य शिक्षा से ज्यादा बड़ी चीज़ है भूख...!इसके लिए नियमित विद्यालयों की जगह वैकल्पिक विद्यालयों की जरूरत है !अब सरकार को कौन समझाए

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