Friday, January 9, 2015

बिन बरसे फिरा पानी
बूटा-बूटा तोडऩे लगा दम-

40 हजार हैक्टेयर की फसलें चौपट 
-2 हजार हैक्टेयर रोजाना प्रभावित
चूरू, 7 अगस्त। थळी के धोरों में नीली छतरी वाले की मेहरबानी नहीं होने से खरीफ का बूटा-बूटा दम तोडऩे लगा है। मेहनत को मिट्टी में मिलती देख काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी है। हालात इस कदर बिगड़ते जा रहे हैं कि दस-बारह दिन में फसलों की प्यास नहीं बुझी तो काश्तकारों की उम्मीदों पर बिन बरसे ही पानी फिर जाएगा। खेतों से अनाज की पैदावार तो दूर चारे के भी लाले पड़ जाएंगे। विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में खरीफ फसलों की कुल बुवाई के करीब पांच प्रतिशत यानि 40 हजार 275 हैक्टेयर में फसलें पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। इसमें चारा पैदा होने की भी गुंजाइश नहीं बची है। 
घट गया उत्पादन
फसल---- नुकसान
बाजरा---- 25-30
ग्वार----- 25
मोठ----- 30
मूंग------40
मूंगफली---15-20
(कृषि विभाग के अनुसार नुकसान प्रतिशत में)
पैदावार में घाटा
ब्लॉक---- नुकसान
रतनगढ़---40
चूरू------35
सरदारशहर- 32-33
तारानगर--31
राजगढ़--- 28
सुजानगढ़--20-25
(कृषि विभाग के अनुसार नुकसान प्रतिशत में)
कितनी प्यास, कितनी उम्मीदकृषि अधिकारियों की मानें तो आगामी पांच दिन में बारिश होती है तो खरीफ फसलों की प्रति हैक्टेयर अनुमानित पैदावार में से ग्वार की 75 प्रतिशत, बाजरा व मोठ की 70-70 प्रतिशत पैदावार ही हासिल हो सकेगी। तीन-चार रोज में बारिश होने पर मूंग की साठ प्रतिशत पैदावार प्राप्त होने की गुंजाइश है। खरीफ की अन्य फसलों की स्थिति दयनीय है।
तापमान बना दुश्मन
सावन में अच्छी बारिश के बाद अगर तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस रहे तो फसलों के लिए वरदान साबित होता है मगर इस बार सावन सूखा बितने पर तापमान भी फसलों का दुश्मन बना हुआ है। कृषि विभाग के मौटे अनुमान के तौर पर जिले में रोजाना करीब दो हजार हैक्टेयर में फसल दम तोड़ रही है।
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बारिश नहीं होने से आगामी सप्ताह में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा जाएंगी। फसलों से पैदावार तो दूर चारे की भी गुंजाइश नहीं रहेगी।-रणजीत सिंह सर्वा, कृषि अधिकारी
प्रस्तुतकर्ता विश्वनाथ सैनी
प्रतिक्रियाएँ:


1 टिप्पणियाँ:

काजल कुमार Kajal Kumar said...
पूरे उत्तर भारत का ही से हाल है, बहुत चिंता व दुख की बात है.
August 9, 2009 3:04 PM



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