Thursday, February 11, 2010

ढाई आखर प्रेम का...

चूरू 11 फरवरी। दोस्तों, इंसान की जिंदगी में कभी ना कभी कोई ना कोई जरूर दस्तक देता है। खासकर जवानी में। क्योंकि यह उम्र ही ऐसी होती है, इसमें दिल किसी के लिए धड़कता है तो दुनिया की भीड़ में अलग दिखने के लिए मचलता भी है। इस उम्र में किसी का दिल लेना...किसी को अपना बनाना और किसी के ख्यालों में गुम हो जाना कोई नई बात नहीं है। जवां दिलों की ख्वाहिशों को तो मानों पंख लग जाते हैं। दुनिया हसीन और आसमां रंगीन नजर आने लग जाता है।
जाने कब और कहां...किस पर नजर ठहर जाए...कोई नहीं जानता है। ''आंख लड़ी, बात बड़ी और प्यार हो गया।'' इसके बाद तो प्रेमी जोड़े हर पल-हर लम्हे को अपने अंदाज से जीने लगते हैं। चाहे दिन हो या रात...दोनों को एकांत की तलाश रहती है। तकदीर से कभी एकांत के दो पल मिल जाए तो वे खुद को खुशनसीब समझने लगते हैं।
दोनों की बातों का सिलसिला कभी खत्म होने का नाम ही नहीं लेता। प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए चांद तारे तोड़ लाने का वादा तक करता है तो प्रेमिका उसके लिए सारे जमाने को छोडऩे को तैयार हो जाती है। दोनों सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें तक खा लेते हैं।
प्यार हमसफर बन जाए तो कहना ही क्या? जिंदगी प्यार के सहारे कैसे कट जाए...कुछ पता नहीं चलता। मगर दोस्तों सभी जोड़ों को यह मौका नहीं मिलता।
हर प्यार परवान तो चढ़ता है मगर जरूरी नहीं उसे मंजिल मिले ही। अधिकतर मामलों में दोनों के बीच परिवार खुद दीवार बन जाते हैं। जिसे तोड़ पाना दोनों को अपने बुते से बाहर लगने लगता है। समाज भी दोनों के रिश्ते को मंजूरी नहीं देता।
इन सब के बावजूद कभी कभी प्यार कामयाब भी हो जाता है। तो यूं मानों प्यार की असली अग्नि परीक्षा शुरू हुई है। दोनों को एक ही छत के नीचे रहते अपने प्यार की ज्योति को जगाए रखना होगा। प्रेम जैसा रिश्ता जितना मजबूत है उससे लाख गुना अधिक नाजूक है। तभी तो रहिम जी कह गए ''रहिमन धागा प्रेम का तोड़ा मत चटकाय, टूटे से फिर ना जुड़े ...जुड़े तो गांठ पड़ जाए''। दोस्तों अपने प्यार में कभी गांठ मत पडऩे देना, क्योंकि जिंदगी में यह मौका नसीब वालों को मिलता है। प्यार एक ऐसी कश्ती है जिसमें सवार होने वाले जोड़े एक-दूसरे के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण भाव रखकर ही अपनी नैया पार लगा सकते हैं। वरना पता नहीं नैया कब डूब जाए। कब प्यार ऐसा गम दे जाए जिसके घाव जीते जी नहीं

3 comments:

  1. bhabhi ko ye baat pata chal gai to joote padenge
    dada!
    sambhal kar chalo

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  2. saineejee,
    Jaihind! achchha lagaa aapkaa parichay. main bhi do saal pahale tak rajasthan patrika ka parihara samvaaddaata tha. ab masik patrika MARWARI DIGEST nikal raha hun. Ratan Jain Parihara

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