Wednesday, February 10, 2010

जी का जंजाल बना परिवार नियोजन

चूरू।छोटा परिवार-सुखी परिवार की नसीहत देने वाले परिवार नियोजन कार्यक्रम ने जिले में कई परिवारों को दुखी कर दिया है। कार्यक्रम के तहत शिविरों में नसबंदी करवाने वाले महिला व पुरूषों को शिविर के दौरान चिकित्सा विभाग द्वारा बरती गई लापरवाही का खामियाजा भुगतना पडा है।गत दो वर्ष के आंकडों पर गौर करें तो चूरू जिले में ऎसे परिवारों की संख्या करीब 64 है जिन्हें नसबंदी ऑपरेशन विफल हो जाने के कारण मानसिक परेशानी भगुतनी पडी है। नसबंदी ऑपरेशन विफल होने पर हाल ही 20 महिलाओं को मुआवजा राशि के रूप में तीस-तीस हजार रूपए के चेक वितरित किए गए हैं मगर जिले के 24 परिवारों को अभी मुआवजे का इंतजार है।
बढा विफलता का ग्राफ
कार्यक्रम के तहत वर्ष 2006-07 के दौरान लगभग आठ हजार एक नसबंदी ऑपरेशन किए गए। इनमें से 20 ऑपरेशन विफल हो गए। वर्ष 2007-08 में आठ हजार 307 महिला/पुरूषों का नसबंदी ऑपरेशन किया गया। इनमें विफल ऑपरेशन का आंकडा 44 रहा। इनमें तीन पुरूष भी शामिल हैं।फिर पति की बारीजिले में अघिकांश ऑपरेशन दूरबीन की सहायता से किए गए हैं। महिला का नसबंदी ऑपरेशन विफल होने पर दूरबीन से दुबारा ऑपरेशन करना लगभग संभव नहीं है। ऎसे में महिला को या तो सर्जरी से ऑपरेशन करवाना पडता या फिर उसके पति को ऑपरेशन के लिए आगे आना पडता है।
ऎसे होते हैं प्रोत्साहित
कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन करवाने पर सरकार की ओर से संबंघित महिला को 600 तथा पुरूष को 1100 रूपए दिए जाते हैं। महिला को ऑपरेशन के लिए प्रेरित करने वाले को 150 तथा पुरूष को प्रेरित करने वाले को 200 रूपए दिए जाते हैं। ऑपरेशन विफल होने पर बीमा कम्पनी की ओर से एक ही बार मुआवजा दिया जाता है।
नका कहना...
जिले में नसबंदी के 0।6 से 2 प्रतिशत तक ऑपरेशन विफल होते हैं। पीडित परिवार को बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाता है। शेष रहे 24 परिवारों को आगामी दो माह में मुआवजे का भुगतान हो जाएगा।
प्रशांत खत्री, उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अघिकारी, चूरू

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